RAINA AT MIDNIGHT

प्रस्तावना
Date: 12th December 2017
Time: 12:00 a.m.
घडी के कांटे रात के ठीक बारह बजा रहे थे|
‘रैना! रैना!!’
विकास बेतहाशा चिल्ला रहा था लेकिन उसकी आवाज़ जैसे किसी पत्थर से टकराई|
रैना को देखकर उसके मुंह से सिसकारी निकल गई|
उसके तन पर एक भी कपड़ा नहीं था, आखें सूजी हुई और जैसे शून्य में टिकी हुई थीं| माथे पर चाकू से गोद कर डायन लिखा हुआ था| रैना के माथे से बहता खून आखों के पोर से निकलते आसुओं के साथ गाल पर ढलक रहा था| विकास के तिरपन काँप गए| उसके मुंह से सिसकारी निकल गई| रैना अब रैना नहीं रह गई थी, वो रानी बन चुकी थी| जिन परालौकिक शक्तियों के अस्तित्व को वो नकारती आ रही थी वो अब उसके अस्तित्व पर हावी हो रही थी|
विकास ने कैमरे का नाईट विज़न मोड ऑन किया, रैना जैसे किसी सम्मोहन के वशीभूत कहीं खिची चली जा रही थी| उसे ना अपनी नग्नावस्था का ख्याल था ना इस बात का कि विकास उसे रिकॉर्ड कर रहा है| दिसम्बर की सर्द रात में ठंड और गलन से विकास के हाथ काँप रहे थे जबकि वो टर्टलनैक और उसके ऊपर लेदर जैकेट पहने था, उसके हाथों में भी लेदर ग्लव्स थे, बहुत कोशिश करके वो कैमरे को शेक होने से रोक पा रहा था लेकिन रैना पर तो जैसे नश्तर की भाँती जिस्म को बींधने पर उतारू शीतलहरी का कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा था|
खाली सुनसान सड़क के बीचोंबीच रैना बेसुध सी चली जा रही थी| जैसे-जैसे वो आगे बढ़ रही थी शीतलहरी के साथ उड़ कर आता हुआ कोहरा मानो किसी दोशाला की तरह उसे आवृत कर रहा था| विकास जो रैना से कुछ कदम पीछे था उसने अपनी चाल तेज़ की लेकिन रैना जैसे अचानक ही घने कोहरे के आवरण में कहीं गुम हो गई|
‘रैना! रैना!!’ विकास ने चारों ओर घूम-घूमकर उसे आवाज़ लगाईं, लेकिन वो कहीं भी नहीं थी|
रैना गायब हो चुकी थी|
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Date: 30th January 2017
Time: 11:59 p.m.
‘आर यू रेडी विकास’?
‘एब्सल्यूटली’|
‘शशांक एंड प्रत्युष’?
‘ऑन आवर मार्क्स’|
‘ओके देन, वी आर गोइंग लाइव इन थ्री…टू…वन…’|
‘हेल्लो पीपल, दिस इज़ रैना प्रधान फ्रॉम रैना एट मिडनाइट, टुनाइट वी आर लाइव फ्रॉम ए स्मॉल टाउन नियर राजनगर कॉल्ड रौनकपुर’|
रैना एट मिडनाइट वेबचैनल की लाइव फीड विडियो में रैना प्रधान का चेहरा साफ़ नजर आ रहा था| उसके बैकड्राप में खेत और कुछ दूरी पर एक जानवरों को बाँधने वाला बाड़ा था जिसके पास सिर्फ एक लालटेन जल रही थी जोकि पास ही बंधे एक बांस पर टंगी हुई थी|
विकास नाईट विज़न कैमरा हैंडल कर रहा था, शशांक फ़्लैश लाइट लिए हुए था ताकि विडियो फीड में लाइट प्रॉपर आये| प्रत्युष के हाथ में उसका लैपटॉप था जिससे वो फीड का लाइव ब्रॉडकास्ट वेबचैनल पर मैनेज कर रहा था|
‘अब हम आपको जो दृश्य दिखाने जा रहे हैं वो शॉकिंग भी है और आउटरेजियस भी| एक तरफ हम बात करते हैं वीमेन एम्पावरमेंट और शाइनिंग एंड राइजिंग इंडिया की दूसरी तरफ आज भी हमारे देश में एक बड़ा वर्ग ऐसा है जिसकी सोच और मानसिकता अब भी सौ साल पिछड़ी हुई है’|
वायरलेस माइक्रोफोन पर बेबाकी से बोलती हुई रैना बाड़े के बंद दरवाज़े तक पहुँच कर रुकी| रैना की नज़रें सीधे कैमरे को देख रही थीं जैसे दर्शकों की आखों में आखें डालकर उन्हें चैलेंज कर रही हों|
‘हर्रsss’
बाड़े के अन्दर से अजीब सी आवाज़ आ रही थी|
विकास ने कैमरा ज़ूम-इन कर के रैना के एक्सट्रीम फेशियल क्लोज़-अप पर फोकस किया|
‘होल्ड योर ब्रेथ पीपल, अब जो आप देखने वाले हैं उसके बाद शायद कई रातों तक आपके लिए सोना मुश्किल होगा’|
रैना ने एक झटके से बाड़े का दरवाज़ा धकेला, दरवाज़ा एक झटके से आधा खुल कर अटक गया| दरवाज़ा चौखट से एक ज़ंजीर से बंधा हुआ था जिसपर एक मोटा पुराने ज़माने का ताला लटक रहा था| अन्दर से रंभाने की अजीब सी आवाज़ और तेज़ आने लगी जैसे किसी भैंसे को हलाल किया जा रहा हो| उसके साथ ही मवेशियों की गोबर, गारा और गंदगी मिश्रित दुर्गन्ध उनकी नाक से टकराई| अन्दर काफी अँधेरा था|
रैना ने ज़ंजीर को एक झटका दिया, ज़ंजीर काफी मज़बूत थी और उसपर उतना ही मज़बूत ताला जड़ा हुआ था|
‘इसे मैं देखता हूँ, विकास भाई जरा ये लाइट पकड़ना’|
शशांक ने फ़्लैश लाइट विकास के दूसरे हाथ में थमाई और अपने जैकेट में रखा एक बड़ा सा रिंच निकाल कर दरवाज़े की तरफ बढ़ा|
‘नहीं शशांक शोर नहीं…’ विकास उसे समझाने की कोशिश कर ही रहा था कि उसकी बात बीच में रह गई|
शशांक ने रिंच के 4-5 ताबड़तोड़ वार उस कुंडे पर किए जिससे ज़ंजीर और ताला बंधा हुआ था, कुंडा उन दोनों जैसा मज़बूत नहीं था| शशांक के पैरों के पास कुंडा ताले और ज़ंजीर सहित आ गिरा| शशांक ने विजयी अंदाज़ में विकास की तरफ देखा| विकास ने फ़्लैश लाइट वापस उसकी ओर बढ़ा दी|
रैना धडधडाते हुए बाड़े के अन्दर दाखिल हुई, शशांक, विकास और प्रत्युष भी उसके पीछे अन्दर आये| शशांक ने अपने हाथ में थमी फ़्लैशलाइट बाड़े में चारों तरफ घुमाई, वहां गाय और भैसों का तबेला था| जानवरों के ऊपर से गुजरती हुई फ़्लैश लाइट एक जगह आकर रुकी|
वो दृश्य देखकर तीनो लड़के कुछ पलों के लिए जडवत हो गए|
‘कैमरा फोकस करो विकास’| रैना ने निर्देशात्मक अंदाज़ में कहा|
विकास ने कैमरे का रुख उस तरफ किया जिधर फ़्लैश लाइट की रौशनी पड़ रही थी| जैसे ही उसने तीखी लाइट में कैमरे को आउट ऑफ़ फोकस से फोकस में लाया तो सामने का हौलनाक दृश्य उस घड़ी रैना एट मिडनाइट वेबचैनल की लाइव विडियो फीड देख रहे सैकड़ों व्यूअर्स के सामने नुमाया हुआ| गाय और भैसों के बीच गोबर और गंदगी से सनी हुई एक महिला नजर आ रही थी जो किसी जानवर की भाँती ही खुद को फ़्लैश लाइट की तीखी रौशनी से छुपाने की कोशिश कर रही थी|
उसपर पड़ती रौशनी में उसके गले में बंधी मोटी सांकल साफ़ दिखाई दे रही थी जिसका प्रयोग जानवरों को बाँधने के लिए किया जाता है| सांकल का दूसरा छोर एक खूंटे से बंधा हुआ था| खुद पर पड़ती रौशनी से विचलित होकर औरत वहां बंधे बाकी जानवरों की तरह ही अपना सर जोर-जोर से झटक रही थी, उसके गले से जानवरों जैसी ही आवाज़ निकल रही थी|
लाइव फीड व्यूअर्स की तादाद तेज़ी से बढ़ने लगी|
‘अंधविश्वास ने आज भी हमारे देश, हमारे समाज के एक बहुत बड़े हिस्से को इस कदर अँधा कर रखा है कि उन लोगों की नज़रों को एक इंसान और जानवर में फर्क नहीं दिखाई देता’| रैना की आवाज़ क्रोध और उत्तेजना से काँप रही थी|
‘यहाँ क्या हो रहा है!! कौन हो तुम लोग’?
बाड़े के दरवाज़े के पास से एक गरजदार मर्दाना आवाज़ आई|
शशांक ने फ़्लैशलाइट का रुख आवाज़ की दिशा में किया| दरवाज़े पर एक लम्बा-चौड़ा, बड़ी-बड़ी मूछों वाला आदमी खड़ा था, उसके एक हाथ में टॉर्च और दूसरे में लाठी थी| उसके चेहरे से ही क्रूरता झलक रही थी|
‘क्या कर रहे थे तुमलोग यहाँ चोरों की तरह घुसकर’?
क्रोध से भरी हुई लाल आखों से उसने चारों को घूरते हुए कहा|
‘और ये क्या है तेरे हाथ में? ये तो कैमरा है! क्या रिकॉर्ड कर रहे हो तुमलोग’!!
उस मूछों वाले आदमी की नजर विकास के हाथ में थमे कैमरे पर पड़ी| आगभभूका हुआ वो विकास के ऊपर झपट ही रहा था उसके हाथ से कैमरा छीनने के लिए कि शशांक बीच में आ गया|
‘जरा रुको बड़े भाई| आराम से बात करते हैं’|
‘क्या बात करेगा तू’?
‘तुम जो कर रहे हो वो बहुत ही गलत और अमानवीय है| तुम इस तरह किसी महिला को जानवार बना कर गाय-भैसों के बीच नहीं बाँध सकते’|
‘देख बे लौंडे, जितनी तेरी उम्र नहीं होगी उतने मेरे सर के बाल सफ़ेद हो गए हैं| मुझे उपदेश मत झाड वर्ना तेरा उपदेश इस लट्ठ के साथ ही वापस तुझमे घुसेड़ दूंगा’|
‘देखिये बात करने का आपका ये तरीका ठीक नहीं है’| मामला खराब होता देख रैना ने बीच में हस्तक्षेप किया|
‘और तुमलोग जो चोरी-छुपे यहाँ आधी रात को घुस कर विडियो बना रहे हो वो ठीक है’?
‘मैं आज दिन में आपसे मिलने आई थी, उस समय ही मैंने आपको समझाया था कि आपकी पत्नी बीमार हैं| उन्हें झाड-फूंक कराने और यूं जानवरों की तरह बाँध कर रखने की नहीं बल्कि उनका सही ढंग से इलाज करवाने की ज़रूरत है| आपने अगर उस समय मेरी बात मान ली होती तो मुझे मजबूरन ये कदम ना उठाना पड़ता’|
‘मैंने भी तुझे उस समय समझाया था कि मेरी बीवी पागल नहीं है, उसपर पिशाच का साया है जिसकी वजह से खुद को जानवर समझने लगी है वो| वो खुद जानवरों की तरह व्यवहार करती है अगर उसे यहाँ जानवरों के बीच नहीं बांधता तो ये घर और गाँव में ना जाने कितने लोगों पर हमला कर देती’|
‘देखिये महाजन सिंह जी, आप मेरे साथ इन्हें लेकर मेंटल इंस्टिट्यूट चलिए वहां डॉक्टर्स इनका प्रॉपर चेक-अप करके बताएंगे कि…’
‘अरे क्या बताएंगे डॉक्टर!! यही कि मेरी बीवी पागल है!! तुमने कभी किसी पागल को ऐसे जानवर बने देखा है| तुम साले शहरी लौंडे-लौंडिया दो-चार अक्षर पढ़-लिख क्या जाते हो खुद को बहुत होशियार समझते हो| अरे दुनिया में भगवान और शैतान से ऊपर नहीं है तुम्हारी ये पढ़ाई-लिखाई| इस औरत पर पिशाच का साया है जिससे ये धीरे-धीरे जानवर बन रही है, इसे कोई सिद्ध बाबा या तांत्रिक-ओझा ही ठीक कर सकता है कोई डॉक्टर नहीं’!
‘भगवान और शैतान की बहस में मैं नहीं पड़ना चाहती लेकिन आपको इतना बताना चाहती हूँ कि जिसे आप पिशाच का साया समझ रहे हैं वो एक मानसिक रोग है| क्लिनिकल लायकेनथ्रोपी नाम के इस मानसिक रोग में इंसान खुद को जानवर समझने लगता है और जानवरों जैसा ही व्यवहार भी करने लगता है| क्लिनिकल लायकेनथ्रोपी बहुत ही रेयर मेंटल कंडीशन है जिससे लाखों में कोई एक इंसान ही ग्रस्त होता है’|
‘बकवास है ये’|
‘ये बकवास नहीं सच है, समय रहते सही इलाज और सही वातावरण मिले तो मरीज़ काफी हद तक ठीक हो सकता है लेकिन अगर मरीज़ को सही देखभाल ना मिले तो ये बिमारी जानलेवा हो जाती है और कुछ ही दिनों में मरीज़ की मौत हो जाती है’|
‘पिशाच का साया जिसपर पड़ जाए वो तो वैसे भी कुछ दिनों का ही मेहमान होता है लड़की| मैंने कहा ना, तुमलोग या तुम्हारा डॉक्टर इसे ठीक नहीं कर सकते| अब निकलो यहाँ से’|
‘हमें निकालने से कुछ नहीं होगा, ये विडियो देश भर में हज़ारों-लाखों लोग देख रहे हैं| आप हमें भगा सकते हैं लेकिन कल को आपके दरवाज़े पर देश भर की मीडिया और एनजीओ होंगे’|
‘हाँ-हाँ उनको भी देख लेंगे, अब चलो दफा हो यहाँ से| और सुन लड़की, विडियो बना कर इन्टरनेट पर डालने का इतना शौक है ना तो ये ऊलजलूल चीज़ें क्यों अपना विडियो इन लौंडों के साथ बना कर डाल, देश क्या विदेश से भी लाखों लोग देखेंगे’| महाजन सिंह ने रैना को सर से पैर तक घूरते हुए कहा|
रैना अबतक शालीनता से स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही थी लेकिन इसके बाद उसके लिए खुद पर काबू रख पाना असंभव हो गया| एक ही पल में ऐसा लगा जैसे महाजन सिंह के शब्दों ने रैना के दिमाग की नसों में शॉर्ट सर्किट कर दिया हो|
‘यू बास्टर्ड! हाउ डेयर यू’!! गुस्से में बिफरती रैना शर्तिया महाजन सिंह का मुंह नोच लेती और प्रत्युष बीच में ना आता|
प्रत्युष आवाक सा रैना को देख रहा था| अगर उसने पूरी ताकत लगाकर रैना को नहीं पकड़ा होता तो महाजन सिंह की दुर्गत होनी निश्चित थी|
‘नो रैना| वी नीड टू गो, राईट नाउ’| प्रत्युष रैना को समझाते हुए बोला|
रैना सहित विकास और शशांक ने भी उस तरफ देखा जिधर प्रत्युष इशारा कर रहा था| बाड़े के खुले दरवाज़े के बाहर उन्हें दर्जन भर लोग हाथ में मशाल और लाठी लिए आते दिखाई दिए|
‘दो टके की लौंडिया महाजन सिंह पर हाथ उठाने चली है, तेरे जिस्म के छोटे-छोटे टुकड़े यहीं खेतों में फिकवा दूंगा किसी के बाप की औकात नहीं है कि कुछ बिगाड़ ले मेरा’|
रैना गुस्से से थर-थर काँप रही थी, ऐसा लग रहा था जैसे उसपर क्रोध का दौरा पड़ गया हो| प्रत्युष ने बड़ी मुश्किल से उसे कण्ट्रोल किया|
‘रैना, ट्राई टू अंडरस्टैंड द सिचुएशन, वी नीड टू लीव नाउ’| प्रत्युष रैना के कान में हौले से फुसफुसाना, रैना का शरीर ढीला हुआ| उसने प्रत्युष का प्रतिरोध करना बंद कर दिया हालांकि उसका चेहरा अभी भी तमतमाया हुआ था|
‘तुमने अगर हमें किसी भी तरह नुक्सान पहुंचाया तो याद रखना इस समय हज़ारों लोग तुम्हारी हरकत के चश्मदीद गवाह होंगे| क़ानून से बच नहीं पाओगे तुम|’ विकास ने धमकी भरे लहजे में कहा, हालांकि वो जानता था कि उस धमकी का महाजन सिंह पर कोई ख़ास प्रभाव नहीं पड़ने वाला|
महाजन सिंह कुछ क्षण उन्हें घूरता रहा| विकास की अपेक्षा के विपरीत महाजन सिंह पर धमकी का प्रभाव पड़ा|
‘निकल जाओ यहाँ से, अगली बार इस जगह के आस-पास भी नजर आये तो दुनिया में दोबारा किसी को नजर नहीं आओगे’| महाजन सिंह लगभग फुफकारता हुआ बोला|
तीनो लड़के रैना को लेकर फ़ौरन ही वहां से निकले, बाहर लाठी और मशाल लिए भीड़ ने उन्हें ना रोका| वहां से लगभग पांच सौ मीटर दूर उनकी वैनिटी खड़ी थी| विकास और प्रत्युष रैना के साथ वैनिटी में पीछे सवार हुए, शशांक ने ड्राइविंग सीट संभाली और गाड़ी को गियर में डाल कर जेट को मात करने वाली स्पीड से भगाया|
रैना विस्फरित नेत्रों से बाड़े की तरफ देख रही थी, जैसे वहां कुछ था जो उसे बुरी तरह विचलित कर रहा था|
‘विकास गिव में ए सिगरेट’| रैना अपने पर काबू करने की भरसक कोशिश करते हुए बोली|
‘रैना नो’| प्रत्युष ने उसे समझाने की कोशिश की|
‘विकास गिव मी ए फकिंग सिगरेट’!! रैना गुस्से में चिल्लाई| विकास ने चुपचाप सिगरेट केस और लाइटर रैना की तरफ बढ़ा दिया|
रैना ने एक सिगरेट निकाल कर होठों से लगाई|
‘हरामज़ादा! उसकी हिम्मत कैसे हुई मुझे ऐसा बोलने की!! जान ले लूंगी मैं उस कुत्ते की’| सिगरेट जलाते हुए रैना बोली, गुस्से, आवेग और अपमान की उसकी आवाज़ काँप रही थी, गला भर गया था उसका|
‘तुम्हे कुछ करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी रैना| आज की लाइव विडियो के वेब व्यूज स्टैटिस्टिक्स फिनौमिनल हैं, कल सुबह वाकई एनजीओज महाजन सिंह की गर्दन पर सवार होंगी’| प्रत्युष अपने लैपटॉप पर नजर डालते हुए बोला|
पर रैना को तो जैसे उसकी आवाज़ सुनाई ही नहीं दे रही थी, वो अपनी नाक की दोनाली से सिगरेट का धुंआ यूं छोड़ रही थी जैसे महाजन सिंह की मौत का मंसूबा बना रही हो|
वैन धूल बढाते हुए आगे बढ़ती रही, रैना की नज़रें विंड स्क्रीन से बाहर उठते हुए धूल के गुबार के पार किसी चीज़ पर टिकी हुई थीं| रैना के नाक और मुंह से धुंए की पतली लकीर निकलती रही| उसकी आखें किसी एक जगह पर ही स्थिर थीं और एक ही पल में चेहरे पर सैकड़ों भाव आ और जा रहे थे| प्रत्युष निरंतर रैना को ही देख रहा था|
अगली सुबह वाकई विभिन्न समाज सेवी संगठनों और मीडिया ने रौनकपुर के ठाकुर महाजन सिंह के घर पर धावा बोल दिया था। पुलिस और मीडिया की मौजूदगी में जब बाड़ा खुलवाया गया तो वहां महाजन सिंह की पत्नी खूंटे से बंधी हुई मृत अवस्था मे पाई गई। बहुत हो-हल्ला मचा, महाजन सिंह ने दावा किया कि रात में उस लड़की और उसके साथियों की हरकत से कुपित होकर पिशाच ने उसकी पत्नी की जान ले ली। पुलिस ने महाजन सिंह को हिरासत में ले लिया लेकिन साक्ष्यों के अभाव में उसपर कोई कार्यवाही ना हो सकी।
अपनी ऊंची राजनीतिक पहुंच की बदौलत महाजन सिंह जल्द ही बरी हो गया और यह सारा प्रकरण जिसने रैना एट मिडनाइट वेबचैनल के वायरल हुई वीडियो ने देश का सबसे बड़ा मुद्दा बना दिया था उसे कुछ दिन बीतते ही लोगों ने अपने ज़हन से भुला दिया।
इस प्रकरण के ठंडे पड़ जाने के लगभग दो हफ्ते बाद महाजन सिंह ने उसी बाड़े में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली जहां उसकी पत्नी मृत पाई गई थी। हालांकि महाजन सिंह की मौत रहस्यमय और संदिग्ध अवस्था मे हुई थी लेकिन साक्ष्यों के अभाव में उसे आत्महत्या ही माना गया।
इस घटना को लेकर रौनकपुर में तरह तरह की अफवाहों और अटकलों का बाज़ार गर्म था।
कुछ लोगों का कहना था कि महाजन सिंह की बीवी की प्रेतात्मा ने उसकी जान ले ली तो कुछ का मानना था कि जिस पिशाच ने उसकी बीवी के शरीर पर कब्ज़ा किया था उसी पिशाच ने कुपित होकर महाजन सिंह की भी जान ले ली। कुछ ऐसे लोग भी थे जिनके मुताबिक महाजन सिंह ने अपनी बीवी का कत्ल किया था और फिर आत्मग्लानि के वशीभूत होकर उसने खुद की जान भी ले ली। कुल मिला कर जितने मुंह उतनी बातें थी। समय बीतता गया और महाजन सिंह वाली घटना का ज़िक्र रौनकपुर की चौपालों और चाय की टपरियों पर भी होना बंद हो गया।
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रैना एट मिडनाइट की व्यूअरशिप और रीच में रौनकपुर वाली घाटना के बाद काफी बढ़ोतरी हुई थी। रैना और उसकी टीम ने विभिन्न सरकारी और गैरसरकारी समाजसेवी संगठनों के साथ कॉलेब्रेट करके एक अवेयरनेस मूवमेंट चलाई जहां रैना और उसकी टीम देश के अलग-अलग गांवों, कस्बों, छोटे और बड़े शहरों में जाकर लोगों को मानसिक बीमारियों और उनके उपचार के बारे में बताते थे। उनका उद्देश्य भूत-प्रेत और आत्मा आने के नाम पर मानसिक रूप से पीड़ित लोगों जिनमे बड़ी संख्या महिलाओं की होती थी उन्हें अमानवीय प्रताड़ना से बचाना और उनके सही उपचार के लिए उन्हें सही मानसिक चिकित्सा मुहैया कराना था।
रैना ने विकास, प्रत्युष और शशांक के साथ मिलकर ऐसी असंख्य मानसिक रोग से पीड़ित महिलाओं और उनके उनके ही घरवालों, तांत्रिक-ओझा और बाबाओं द्वारा उपचार के नाम पर किए जा रहे शोषण पर डाक्यूमेंट्री फिल्में बनाईं। इसके अलावा ऐसे कई एक्सक्लूसिव वीडियो फुटेज रैना एट मिडनाइट पर रात बारह बजे नियमित रूप से अपलोड होते रहे।
इन वीडियो फुटजेस में सिर्फ मानसिक रूप से पीड़ित लोगों को ही कैद नहीं किया गया था बल्कि इनमे एक बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी थी जो खुद ही डायन, चुड़ैल और सिद्धिप्राप्त साधक बने बैठे थे। इन वीडियो क्लिप्स में ऐसी महिलाओं के हिडन वीडियो लिए गए थे जो खुद को शैतान की उपासक समझती हैं और अपने ऊलजलूल काले जादू के तरीकों से अपने ही घरवालों, रिश्तेदारों या पड़ोसियों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करती है।
Date: 31st March 2017
Time: 11:59 p.m.
रैना अपनी टीम के साथ रसालगढ़ नामक अर्बन टाउन में मौजूद थी| रसालगढ़ एक समय में रेगिस्तानी इलाका और जंगल था जोकि अब इंडस्ट्रियल एरिया बन गया था| जिसके चारों तरफ अर्बन टाउनशिप बसाई जा रही थी| इस अर्बन टाउनशिप के लिए रसालगढ़ के छोटे-मोटे गाँव की ज़मीने गाँववासियों से कौड़ियों के मोल खरीदी गईं | उनकी झोपड़ियों और कच्चे-पक्के घरों की जगह टाउनशिप बसाई गई| गाँव के ज़्यादातर लोग पलायित हो गए, कुछ ने वहीं टाउनशिप में ही छोटा-मोटा काम शुरू कर दिया|
रैना और उसकी टीम को एक गुमनाम मेल द्वारा किसी ने रसालगढ़ के क्रिसेंट क्रॉस पर स्थित एक पुराने किले के खँडहर के सामने किसी के द्वारा रखे जा रहे टोटकों के बारे में बताया था| रैना, विकास, प्रत्युष और शशांक की टीम उसी खंडहर के ग्राउंड फ्लोर पर छुपी हुई थी|
‘इतनी बढ़िया अर्बन टाउनशिप के मुख्य चौराहे पर ये खँडहर किला क्यों छोड़ रखा है’? शशांक ने उस खँडहर किले का मुआएना करते हुए कहा|
‘रसालगढ़ की अर्बन टाउनशिप इस हिसाब से ही प्लान की गई है जिसमे यहाँ की चुनिन्दा इमारतों और खंडहरों को जिनकी पुरातत्व के हिसाब से महत्ता है उन्हें गिराया नहीं गया बल्कि इन्हें रेनोवेट करने की प्लानिंग है और इनके इर्द-गिर्द ही टाउनशिप बसाई गई है’| प्रत्युष बोला|
‘भाई तुझे तो हर बात की जानकारी रहती है, फिर ये भी बता दे कि ये टोटके यहाँ कौन और क्यों रख रहा है’| शशांक चिढ कर बोला| प्रत्युष मुस्कुराए बिना नहीं रह पाया|
‘यहाँ टोटके कौन रख रहा है ये तो मैं नहीं जानता लेकिन इस खँडहर के बारे में क्षेत्र में तरह-तरह के किस्से कहानियां प्रचलित हैं| ऐसा कहा जाता है कि पुराने समय में रसालगढ़ के चौथे राजा देवेशप्रताप ने अपने इकलौते बेटे संभव कुमार के लिए ये किला बनवाया था| जैसा कि हम ठरकी राजे-रजवाड़ों के अत्याचारों के टिपिकल किस्से सुनते हैं वैसे ही अपना संभव कुमार भी था, इस किले में उसने रसालगढ़ के और आस-पास बसने वाले कबीलों की सैकड़ों औरतों से दुराचार किया’|
‘कमीना कहीं का’!! रैना किसी नागिन की भाँती फुफकारते हुए बोली| विकास से लेकर सिगरेट वो पहले ही सुलगा चुकी थी| विकास ने प्रत्युष को उसकी कहानी कंटिन्यू करने का इशारा किया|
‘एकबार संभव कुमार रसालगढ़ की बंजारा जाति की साधिका को उठा लाया’|
‘ये साधिका कौन थी भाई’?
‘रसालगढ़ की बंजारा जाति के सरदार की बेटी| वो भविष्य में घटित होने वाली घटनाओं को पहले ही देख लेती थी| रसालगढ़ के लोग उसे कोई सिद्ध जादूगरनी या कपालिका मानते थे, इसीलिए उसका नाम साधिका पड़ गया था’|
‘एक्स्ट्रा सेंसरी परसेप्शन…सिक्स्थ सेन्स’| रैना सिगरेट का धुंआ छोड़ते हुए भावहीन स्वर में बोली|
‘हाँ लेकिन उस ज़माने में लोग इसे विज्ञान द्वारा प्रमाणित एक बौधिक क्षमता के बजाए जादू-टोना या चमत्कार ही मानते थे| बहरहाल संभव कुमार साधिका को जबरन इस किले में उठा लाया और उसके साथ दुराचार की कोशिश करने लगा’|
‘मेरा एक सवाल है…’ शशांक प्रत्युष को बीच में ही टोकते हुए बोला|
‘बको’!
‘अगर साधिका के पास सिक्स्थ सेन्स थी, वो भविष्य में घटित होने वाली घटनाएं पहले ही देख लेती थी तो फिर वो ये क्यों ना देख पाई कि ठरकी कुमार उसके साथ क्या करने वाला है’?
प्रत्युष फिर से मुस्कुराया|
‘वो देख चुकी थी| साधिका अपनी और संभव कुमार दोनों की मौत पहले ही देख चुकी थी| इसीलिए जब संभव कुमार उसे उठा ले गया तो उसने एक शीशी में ज्वलनशील तेल पहले ही अपने पास छुपा लिया था| जब संभव कुमार साधिका को किले में लाया और उससे दुराचार करने चला तब मौका मिलते ही साधिका ने छुपा कर लाया हुआ ज्वलनशील तेल अपने और संभव कुमार पर उढ़ेल लिया और कमरे में रखे दिये से आग लगा ली’|
कुछ देर तक उनके बीच सन्नाटा छाया रहा|
‘लेकिन साधिका जब पहले ही इस घटना के बारे में जान चुकी थी तो वो संभव कुमार के उसे उठाने से पहले ही क्यों नहीं भाग गई? या फिर उसने खुद को जलने से क्यों नहीं बचाया’? शशांक सर खुजाते हुए बोला|
‘इंसान की एक्स्ट्रा सेंसरी परसेप्शन उसे वही दिखाती है जो घटित होने वाला है| इंसान उसे सिर्फ देख सकता है उसे किसी भी हाल में बदल नहीं सकता क्योंकि अगर वो घटित होने वाली घटनाओं को बदल देगा तो वो कभी घटित ही नहीं होंगी और अगर वो घटित नहीं होंगी तो उसका सिक्स्थ सेंस उसे वो घटनाएं दिखाएगा ही नहीं’| रैना पूर्व की भाँती ही भावहीन स्वर में बोली|
‘साधिका और संभव कुमार के साथ-साथ ये किला भी जल कर खँडहर बन गया, तबसे लोग इस जगह को शापित मानते आए हैं| यहाँ के मूलनिवासी सरकार द्वारा इस किले का रेनोवेशन करवाए जाने के फैसले से खुश नहीं हैं| ये टोटके रखने का काम ऐसे ही किसी इंसान का लगता है’| प्रत्युष किसी डिटेक्टिव के अंदाज़ में बोला|
‘भूत-प्रेत, आत्मा-श्राप सब बकवास है’| रैना अपनी खत्म हो गई सिगरेट का टोटा का टोटा फेंकते हुए बोली|
‘मैं ये मानती हूँ कि किसी भी जगह की अपनी सोर्स ऑफ़ एनर्जी होती है| पॉजिटिव नेगेटिव या न्यूट्रल| अगर कोई जगह किसी भयानक घटना की साक्षी बन चुकी है तो उस घटना की नेगेटिव एनर्जी वहां बहुत लम्बे समय के लिए रह जाती है’|
‘इसी तरह कोई इंसान भी अगर किसी बहुत ही भयानक घटना का साक्षी बने तो उस घटना की नेगेटिव एनर्जी उसके साथ हमेशा के लिए जुड़ जाती है, है ना रैना’? प्रत्युष ने अर्थपूर्ण ढंग से रैना से कहा|
कुछ देर तक प्रत्युष और रैना एक-दूसरे को निशब्द देखते रहे| उनकी तंत्रा एक आवाज़ से भंग हुई|
पायल की आवाज़ से, जो रात के सन्नाटे में सुनसान सड़क पर कहीं दूर से गूंजी थी|
‘तुमलोगों ने सुनी वो आवाज़’? विकास चौकन्ना होते हुए बोला|
‘हाँ, कैमरा ऑन कर लो विकास और सबलोग कवर ले लो| पायल की आवाज़ इसी तरफ बढती आ रही है’| रैना ने निर्देश दिया जिसका तीनो ने फ़ौरन ही पालन किया|
कुछ ही देर में चेहरे तक घूँघट ओढ़े एक औरत का साया क्रिसेंट क्रॉस की तरफ बढ़ रहा था| उसके हाथ में एक मिट्टी की हांडी थी जिसका मुंह लाल कपड़े से बंधा हुआ था| हांडी के ऊपर काली तुम्बी की जड़ें, नीबू और कुछ हड्डियां आदि रखे हुए थे| साया स्थिर कदमों से चलते हुए क्रिसेंट क्रॉस पर पहुंचा, वो साया सीधे खँडहर की तरफ बढ़ रहा था|
‘विकास, व्यू प्रॉपर मिल रहा है न’? रैना फुसफुसाई|
‘बिलकुल’|
‘गुड| ये वेशभूषा से ही कोई लोकल बंजारन लग रही है| इसे टोटका रखते हुए कवर करो| जैसे ही ये टोटका रखकर पलटेगी हम इसके सामने होने चाहिए| सरप्राइज एलिमेंट यू नो’! रैना सबको समझाते हुए बोली|
सबने सहमति में सर हिलाया|
किले की जर्जर बाहरी दिवार की ओट लेकर विकास सबसे आगे बढ़ा क्योंकि वो कैमरा हैंडल कर रहा था, प्रत्युष और शशांक उसके पीछे थे और रैना उनके पीछे थी| उनका प्लान दिवार की ओट लिए हुए ही आगे बढ़ना था ताकि जैसे ही खँडहर के सामने पहुँच कर वो औरत टोटका रखे ये लोग बगल से होते हुए उसतक पहुँच जाएं|
लम्बे घूँघट वाली औरत स्थिर क़दमों से चलते हुए खँडहर के सामने पहुंची और अपने घुटनों पर बैठकर हांडी को उसने सड़क पर रख दिया| इसके बाद हांडी के चारों तरफ फूल, हड्डियाँ, काली तुम्बी की जड़ें, नीबू रखकर उनपर लाल सिन्दूर छिड़कते हुए मंत्रोच्चारण करने लगी| विकास उसके इस पूरे एक्शन को कवर करते हुए खँडहर की दिवार के टूटे हिस्से से निकल कर खँडहर की बगल वाली गली में आ गया और उस महिला की तरफ बढने लगा| शशांक और प्रत्युष भी उसके पीछे थे|
रैना भी उनके पीछे-पीछे दिवार के टूटे हिस्से से गली में निकली लेकिन आगे बढ़ने के बजाए वो वहीँ ठिठक गई| उसे ऐसा लगा जैसे उसके पीछे गली में कोई है| रैना अँधेरी गली में पलटी, वहां एक साया था| गली में पीछे, और अँधेरे की ओर बढ़ता हुआ| रैना विकास, प्रत्युष और शशांक से उलटी दिशा में खँडहर के पीछे के हिस्से की तरफ बढ़ने लगी|
रैना ज्यों-ज्यों आगे बढती जा रही थी गली और भी ज्यादा अँधेरी होती जा रही थी| ऐसा लग रहा था जैसे चारों तरफ से अँधेरे की चादर रैना के पूरे वजूद को अपने आगोश में समेटे जा रही है और रैना मंत्रमुग्ध सी, जैसे किसी सम्मोहंपाश में जकड़ी हुई उस धुंधले से नज़र आ रहे साए के पीछे बढ़ रही है जो अनजान होकर भी उसे अनजान नहीं लग रहा था| रैना को ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे वो कोई स्वप्न देख रही है, जैसे सपने में अक्सर लोग हमें धुंधली आकृतियों के रूप में नज़र आते हैं जिन्हें हम जानते तो हैं लेकिन पहचानते नहीं हैं|
रैना को अब वो साया कुछ जाना सा लग रहा था, वो साया एक लडकी का था| क्यूंकि लडकी की पीठ रैना की ओर थी इसलिए वो उसका चेहरा नहीं देख पा रही थी और स्वप्न की भाँती ही रैना कितनी ही तेज़ उस लड़की के पीछे दौड़ने का प्रयास कर रही थी लेकिन फिरभी उनके बीच बनी दूरी कम नहीं हो रही थी| रैना ने ध्यान दिया कि वो लडकी यूं चल रही है जैसे अपने होशो-हवास में ना हो, उसी समय वहां अँधेरे से एक और साया यूं उभरा जैसे अँधेरे की स्याह कालिख ने ही जिस्म का रूप ले लिया हो| इस साए का कोई रूप नहीं था, किसी घाट लगाए शिकारी की भाँती ये काला साया आगे बढ़ रही लड़की पर झपटा, उसके जिस्म के कपड़ों को तार-तार करने लगा, उस लड़की के जिस्म को भभोड़ने लगा|
रैना का पूरा अस्तित्व जैसे जडवत हो गया था, उसने चीखने की कोशिश की लेकिन पूरा जोर लगाने के बाद भी उसके गले से आवाज़ ना निकली| रैना आगे बढ़कर उस काले साए को रोकना चाहती थी, वो अपना भरपूर जोर लगा रही थी, भरसक प्रयास कर रही थी लेकिन फिर भी उस साए तक ना पहुँच पाई| जिस लड़की को वो साया भभोड़ रहा था वो किसी मूर्ती की भाँती जडवत खड़ी थी, उसकी दुर्दशा को देखकर रैना को ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे उसकी आत्मा चीत्कार कर रही हो| रैना के लिए और अधिक बर्दाश्त कर पाना संभव न था|
किसी ने रैना के कंधे पर हाथ रखा| रैना चिहुंक कर पलटी, वो प्रत्युष था|
‘तुम यहाँ क्या कर रही हो रैना’?
‘प..प्र…प्रत्युष…व्…वो लड़की…उसे बचाओ’! रैना बहुत मुश्किल से बोल पाई, उसका पूरा जिस्म पसीने से तर था और वो सूखे पत्ते की तरह सर से पैर तक काँप रही थी|
‘कौन सी लड़की’?
‘वो लड़की…’! रैना पलटी, वहां कोई ना था| अँधेरी गली के साए जो उसकी नज़रों के सामने कुछ ही पलों पहले हौलनाक मंजर पेश कर रहे थे ऐसा लग रहा था जैसे वो रैना के अंतर्मन के किसी अँधेरे कोने में जा छुपे हों|
रैना भाग कर गली के अंतिम छोर तक गई| उसे यकीन नहीं आ रहा था कि उसने जागती हालत में इतना सजीव ख्वाब देखा था या फिर वो उसके दिमाग का बुना कोई इंद्रजाल था|
‘वहां कोई नहीं है रैना, तुम अकेली ही यहाँ अँधेरी गली में खड़ी हुई थी’| प्रत्युष रैना के पास आते हुए बोला|
‘वो टोटके वाली औरत’?रैना अबतक खुद को संभाल चुकी थी|
‘लोकल बंजारन थी| खँडहर का रेनोवेशन नहीं होने देना चाहती थी क्योंकि उसकी पूर्वज साधिका को इस किले के मालिक ने कलंकित किया था’|
‘मतलब तुम्हारी थ्योरी ठीक थी’|
प्रत्युष मुस्कुराया| विकास और शशांक भी वापस आते दिखाई दिए|
टोटका करने वाली महिला के माफ़ी मांगने पर उनलोगों ने उसे छोड़ दिया था और उसका विडियो भी डिलीट कर दिया| इससे पहले भी कई बार ऐसा हो चुका था जब रैना ने दोषी का विडियो शूट करके उसे कन्फ्रंट किया था| कई केसेस में दोषी के कसबल फ़ौरन ही ढीले पड़ जाते थे फिर रैना या तो उनका विडियो अपलोड नहीं करती थी या फिर उनकी पहचान गुप्त रखने के लिए उनके चेहरे विडियो में ब्लर कर देती थी|
ऐसे अनगिनत विडियो वो लोग डिलीट कर देते थे जहां अंधविश्वास करने वाला अपने किये की माफ़ी मांग कर दोबारा ऐसा कृत्य ना करने का वादा करता था|
ऐसे बहुतेरे हिडेन वीडियो ऐसे सड़कछाप इश्कियाए लड़कों के होते थे जो सड़क किनारे फुटपाथ पर और रेलवे स्टेशन के हॉकर्स स्टॉल पर मिलने वाली लुगदी कागज़ पर छपी, सस्ती घटिया बाइंडिंग वाली और उतने ही फर्जी, सस्ते और घटिया राइटरों द्वारा लिखी गयी काले और लाल जादू की किताब, वृहद इंद्रजाल और वशीकरण के 1001 टोटकों की किताब पढ़कर अपने स्कूल, कॉलेज या पड़ोस की लड़कियों को अपने ‘प्यार’ के सम्मोहनपाश में फांसने के लिए रात को किसी पीपल या बरगद के नीचे शमशान क्रियाएं करते पाए जाते थे।
जो बात वाकई हैरान और परेशान करने वाली थी वो यह थी कि इनके अलावा काला जादू, शमशान क्रियाएं, टोना और टोटका करने वाले लोगों की काफी बड़ी तादाद ऐसी थी जो पढ़ी लिखी, सोशली हाई क्लास और सोसाइटी को बिलॉन्ग करने वाले लोगों की थी।
बॉलीवुड हॉरर फिल्मों के नेगेटिव कैरेक्टर्स की तरह ये लोग काले चोंगों में, नकली रुद्राक्ष की माला डाले, माथे पर लाल मोटा तिलक लगाए और आँखों मे सुरमा डाले नहीं नज़र आते थे।
ये तबका गांव या छोटे शहरों का नही बल्कि मेट्रोपोलिटन का था। ये लोग आम इंसान थे, हर रोज़ सुबह पार्क्स में जॉगिंग करने वाले, मॉल्स और मल्टीप्लेक्सेज में जाने वाले, वीकेंड पार्टी करने वाले आम इंसान जिन्हें देखकर उनकी शक्ल या उनके सामाजिक हैसियत से उनकी पिछड़ी हुई मानसिकता का पता नही लगाया जा सकता था।
Date: 30th June 2017
Time: 11:15 p.m.
‘प्रत्युष तू श्योर है ना कि वो आएगा| तेरी इनफार्मेशन गलत तो नहीं निकलेगी’?
‘आजतक कभी निकली है क्या? रिलैक्स रैना, वो आएगा और ज़रूर आएगा’|
‘जबतक वो आएगा तबतक हमलोग इस वैनिटी में फ्राइड चिकेन बन चुके होंगे| साले शशांक ये वैनिटी का एसी ठीक क्यों नहीं करवाता तू’!! पसीने से तरबतर विकास माथे से पसीना पोंछते हुए बोला|
‘भाई, ये मेरा काम ना है| इस प्रत्युष को बोला था मैंने इसने नहीं करवाया’|
‘अबे तेरे हिस्से का काम मैं क्यों करू? तू कभी ये तो नहीं बोलता कि मेरी जगह मेरी गर्लफ्रेंड के साथ डेट पे चला जा| फिर अपने बाकी कामों के लिए क्यों बोलता है मुझे’|
‘बिकॉज़ आई डोंट मिक्स बिज़नस विद प्लेज़र| वैसे भी मेरे हाथों की लकीरों में शायद ऊपर वाला गर्लफ्रेंड वाली लाइन डालना भूल गया है’| रैना पर एक चोर नजर डालते हुए शशांक बोला|
‘चुप करो बे तुम दोनों! यहाँ गर्मी से आत्मा पिघल रही है और साला तुमलोगों को बकैती सूझी है’| विकास ने झुंझलाकर प्रत्युष और शशांक को लताड़ लगाई, दोनों खामोश हो गए|
रैना उस दिन काफी शांत थी| गर्मी से उन चारों की ही हालत खराब हो रही थी| उस घडी उनकी वैनिटी राजनगर के बाहरी एरिया में खड़ी थी जोकि हाईवे से लगा हुआ था और जिसे ग्रेटर राजनगर एक्सटेंशन के नाम से जाना जाता था|
कुछ साल पहले तक ये एरिया बियाबान हुआ करता था लेकिन पिछले कुछ सालों में ही यहाँ कई बड़ी मल्टीनेशनल फर्म्स ने अपना बेस सेटअप किया था जिस वजह से ग्रेटर राजनगर एक्सटेंशन आई.आई.टी. एंड मार्केटिंग प्रोफेशनल्स का काफी बड़ा हब बनता जा रहा था| प्रॉपर्टी रेट्स हाई हुए थे, कई रेजिडेंशियल सोसाइटीज डेवलप हो रही थीं|
ग्रेटर राजनगर एक्सटेंशन के सेक्टर 13 के जिस हिस्से में फिलहाल उनकी वैनिटी खड़ी थी वहां दूर-दूर तक सिर्फ खाली प्लॉट्स थे जिनमे ऊंचे-ऊंचे झाड-झंखाड़ उगे हुए थे| इस सेक्टर में सिर्फ एक ही रेजिडेंशियल सोसाइटी थी जिसके नवासी हिमांशु तुरनवाल के इंतज़ार में वो लोग वहां मौजूद थे| उस घड़ी उन लोगों ने वैनिटी को एक खुले हुए प्लॉट की ऊंची झाड़ियों के पीछे छुपाया था| वैनिटी की सभी लाइट्स बंद थीं ताकि किसी को उसकी वहां मौजूदगी का पता ना चले|
विकास ने अपनी रिस्ट वॉच के रेडियम डायल पर नजर डाली, साढ़े ग्यारह बज रहे थे| दूर हाई-वे से किसी गाड़ी की दो हेड-लाइट्स नजर आयीं, गाड़ी ने हाई-वे का रास्ता छोड़कर खाली प्लॉट्स को जाने वाला कच्चा रास्ता पकड़ा|
‘हेयर कम्स हॉर्नी हिमांशु’| प्रत्युष ने व्यंगपूर्ण अंदाज़ में कहा|
‘हाहाहा…सही कहा भाई| हॉर्नी ही है ये, साला शौक का तो पता नहीं लेकिन ठरक वाकई बड़ी चीज़ होती है| बन्दा चालीस का है, दो बच्चियों का बाप है और अपनी कंपनी की फ्रेशर इंटर्न निधि के पीछे पड़ा हुआ है’| शशांक बोला|
‘मेरे एक फ्रेंड का छोटा भाई भी उस लड़की के साथ ही हिमांशु की कंपनी में इंटर्न है| उससे ही इस हॉर्नी हिमांशु के काले जादू वाले काले कारनामों का पता चला’| प्रत्युष बोला|
‘लेकिन इसके काले जादू का क्या चक्कर है’?
‘लड़की को वश में करने के लिए ये किसी अघोरी की मदद ले रहा है जो इससे तामसिक क्रियाएं करवाता है| इन क्रियाओं के लिए एक निर्धारित खाली जगह चाहिए थी जहां 21 रातों तक ये क्रिया कर सके| आज वो इक्कीसवी रात है’|
‘लेकिन मेरे शरलक होम्स तुझे ये इतनी ख़ुफ़िया वाली जानकारी कहाँ से मिल जाती है’? शशांक बोला|
‘जब सनी…मेरे फ्रेंड के छोटे भाई ने हिमांशु के बारे में बताया था तो उसने एक अजीब बात बताई थी| हिमांशु निधि से उसकी पर्सनल चीज़ें जैसे उसकी हैंकी, या हेयर क्लिप किसी ना किसी बहाने से मांगता था| शुरुआत में एक दो बार तो निधि ने मना नहीं किया लेकिन बार-बार ऐसा होने पर उसे कुछ शक हुआ तो उसने हिमांशु को स्मार्टली मना कर दिया| लेकिन इसके बाद उसके ऑफिस बैग से उसकी कुछ पर्सनल चीज़ें चोरी हुई’|
‘लेकिन ये चोरी तो कोई भी कर सकता था’!
‘बिलकुल कर सकता था लेकिन अगर बैग में से मोबाइल फोन की जगह चोर सेनेटरी पैड चुरा कर ले जाए तो वो चोर कोई साइको ही हो सकता है’|
‘या फिर परवर्ट’| रैना बोली|
‘बिलकुल| इसके बाद ही मैने दिन-रात इस हॉर्नी हिमांशु की हर मूवमेंट पर नजर रखना शुरू किया और जल्दी ही इसका ये कारनामा मुझे पता चल गया’|
‘एव्रीबडी क्वाइट! कार पास आ रही है’| विकास ने बाकी तीनो को आगाह किया|
इसके बाद कोई कुछ ना बोला|
जिस प्लाट में वैनिटी खड़ी थी उसके अगले प्लाट में आकर एक स्कोडा रुकी| ड्राइविंग सीट पर बैठा शख्स बाहर निकला, वो हिमांशु ही था| गाड़ी की हेडलाइट्स अभी भी जल रही थीं, उसने नीचे उतारकर चारों तरफ देखा और कुछ सोचता रहा, फिर वो वापस मुड़कर गाड़ी की डिक्की की तरफ बढ़ा|
रैना, विकास, शशांक और प्रत्युष बिना आवाज़ किए धीरे से वैनिटी से बाहर निकले और ऊंचे झंखाड़ की आड़ लेते हुए हिमांशु की गाड़ी की तरफ बढ़े| विकास अपना नाईट विज़न कैमरा ऑन कर चुका था, कैमरे की लाइव विडियो फीड वेबचैनल पर ब्रॉडकास्ट नहीं हो रही थी|
क्योंकि अबतक हिमांशु ने अंधविश्वास में कोई भी गंभीर अपराध नहीं किया था इसलिए रैना क्रिसेंट क्रॉस की बंजारन की तरह उसका ये हिडेन विडियो बना कर उसे भी एक चांस देना चाहती थी ताकि वो अपनी ये हरकतें बंद करके सही रास्ते पर आ जाए| अगर हिमांशु उसकी बात नहीं मानता तो उस केस में रैना ये विडियो चैनल पर अपलोड कर देती|
‘ये कर क्या रहा है’?
‘मेक श्योर कर रहा है कि आस-पास कोई है तो नहीं’|
‘वैसे ये हिमांशु यहाँ करता क्या है’? रैना ने प्रत्युष से पूछा|
‘निधि की जो भी पर्सनल चीज़ें वो चुराता था उन्हें यहाँ लाकर उनसे कुछ जादू-टोना करता था, शायद वशीकरण के लिए| मैंने हिमांशु का पीछा करके मोबाइल से इसका विडियो बनाने की कोशिश की थी लेकिन इस जगह इतना अँधेरा होता है कि मोबाइल कैमरा काम नहीं करता’| प्रत्युष बोला|
‘अब देखना ये है कि आज अपने हॉर्नी हिमांशु भईया क्या उठा कर लाए हैं’| विकास हिमांशु की दिशा में देखते हुए बोला जोकि अपनी गाड़ी की डिक्की खोलकर अन्दर झुका हुआ था|
‘अबे…अबे…ये तो पूरी लड़की ही उठा लाया’!! शशांक चिहुंक उठा| रैना, प्रत्युष और विकास ने भी चौंक कर उस दिशा में देखा|
हिमांशु गाड़ी की डिक्की से एक लड़की को निकाल रहा था| लड़की के हाथ-पैर रस्सियों से बंधे हुए थे और मुंह में कपड़ा ठूसा हुआ था|
‘ये निधि है| हिमांशु पर नज़र रखने के दौरान मैंने इसे देखा था और इसके डिटेल्स भी पता किए थे’| प्रत्युष लड़की को देखकर चौंका|
हिमांशु ने किसी आलू की बोरी की तरह निधि को उठा लिया। लड़की उसकी पकड़ से छूटने के भरसक प्रयास कर रही थी लेकिन सब व्यर्थ था। अपने बंधे हाथ-पैर इधर-उधर फेंक कर, हिमांशु पर वार करके निधि पूरा जोर लगा रही थी कि किसी तरह खुद को आज़ाद करा सके| इस प्रक्रिया में अपनी कोहनी का भरपूर वार वो हिमांशु की कनपट्टी पर करने में सफल हो गई|
हिमांशु दर्द से तिलमिला गया|
उसने पूरी बेरहमी से निधि को किसी बोरी के सामान ही नीचे पटक दिया| निधि के मुंह से घुटी हुई कराहें निकली जो उसके मुंह में ठुसे कपडे की वजह से काफी दब गई थी| निधि नीचे धूल में गिरी हुई दर्द से तड़प रही थी, हिमांशु फिर अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ा| इस बार पैसेंजर्स सीट से कुछ निकाल रहा था वो|
‘कर क्या रहा है ये’?
‘जो भी कर रहा है हमें इसे रोकना होगा’| रैना की आवाज़ क्रोध से थर्राने लगी थी|
‘बस कुछ सैकेंड और रैना, इसका पूरा कारनामा मैंने रिकॉर्ड कर लिया है| निधि को हम बचा लेंगे और ये हॉर्नी हिमांशु काफी लम्बा अंदर जाने वाला है’| विकास रैना को रोकते हुए बोला|
हिमांशु लड़की के पास वापस आया, उसके एक हाथ में लम्बे फल का चाक़ू था और दूसरे में एक बंधा हुआ जिंदा मुर्गा फडफडा रहा था| निधि पीठ के बल सरक कर उससे दूर हटने की कोशिश कर रही थी, लेकिन हिमांशु ऍन उसके ऊपर सवार हो गया| हिमांशु ने फडफडाते हुए पक्षी का समूचा सर अपने मुंह में भर लिया और अगले ही पल किसी हिंसक जंगली जानवर की तरह उसका सर धड़ से अलग नोच डाला| अपने मुंह में भरा पक्षी का सर उसने थूक दिया, उसके हाथों में पक्षी का सरविहीन धड़ अभी भी फडफडा रहा था और खून के फौवारे छोड़ रहा था, उस खून के फौवारे से वो निधि को सराबोर करते हुए कोई मन्त्र बुदबुदाने लगा|
इससे आगे बर्दाश्त कर पाना रैना के वश में नहीं था, रैना उस घड़ी शायद अपने आप में नहीं रह गई थी| किसी आंधी की तरह उठी वो और तूफ़ान के जैसे दनदनाते हुए हिमांशु तक पहुँच गई|
हिमांशु इस अप्रत्याषित आगमन से दो पल के लिए आवाक रह गया|
रैना ने एक ज़ोरदार मुक्का सीधे हिमांशु की नाक पर जड़ दिया| उसे दिन में तारे नजर आ गए|
वो हडबडा कर पीछे गिरा, उसकी नाक से खून की धार फूट रही थी| उसके जेब से गाड़ी की चाभी निकल कर धूल में ना जाने कहाँ गुम हो गई|
रैना नीचे झुकी और निधि के मुंह में ठूसा हुआ कपड़ा निकालने लगी|
‘तुम ठीक तो हो निधि’?
‘म..मुझे बचाइए इस ह..हैवान से’|
‘अब ये तुम्हे कोई नुक्सान नहीं पहुंचा सकता’|
विकास, प्रत्युष और शशांक भी भागते हुए वहां पहुँच गए थे| हिमांशु ने अबतक खुद को संभाल लिया था, चाभी उस अँधेरे में ढूंढ पाना संभव नहीं था| खुद को बचाने के लिए उसने बेतहाशा भागना शुरू किया| रैना पर जैसे कोई भूत सवार हो गया था, वो अकेले ही हिमांशु के पीछे लपकी|
‘तुमलोग निधि को संभालो और कॉल करके पुलिस व एम्बुलेंस बुलाओ, मैं रैना के साथ जाता हूँ’| प्रत्युष ने असमंजस में पड़े विकास और शशांक से कहा और बगैर उनके उत्तर की प्रतीक्षा किए उस दिशा में लपक लिया जिधर हिमांशु और उसके पीछे रैना गए थे|
रैना बेतहाशा भाग रही थी, हिमांशु का पीछा करते हुए वो ना जाने कितनी दूर निकल आई थी| उसे समझ नहीं आ रहा था कि हिमांशु इतनी जल्दी उसकी आखों के आगे से ओझल कैसे हो गया|
हिमांशु हाई-वे की तरफ नहीं भागा था, बल्कि प्लॉट्स को जोड़ते हुए कच्चे रास्ते पर भागा था, उस तरफ अँधेरा और ऊंचे झंखाड़ होने की वजह से वहां छुपना आसान था| रैना को यकीन था कि हिमांशु वहीँ कहीं छुपा हुआ होगा|
अचानक पीछे से कोई रैना पर लपका, संभल पाने से पहले ही रैना पीठ के बल धूल भरी ज़मीन पर चित गिरी थी, ये हिमांशु ही था जो अँधेरे में उसके लिए घात लगाए बैठा था|
रैना के कुछ समझ पाने से पहले ही हिमांशु रैना के ऊपर सवार था| उसने चित रैना के दोनों हाथ अपने घुटनों के नीचे दबा लिए, रैना बेबस थी| वो चाह कर भी हिल नहीं पा रही थी| हिमांशु के हाथ में कुछ चमक रहा था, ये वही लम्बे फल वाला खंजर था|
‘विकास!! प्रत्युष!!’ रैना चिल्लाई|
हिमांशु की आखों में शैतानियत नाच रही थी, उसके अधरों पर एक हिंसक मुस्कान तैर गई जैसे अपने चंगुल में फंसी रैना का यूं छटपटाना उसे असीम सुख प्रदान कर रहा हो|
हिमांशु ने खंजर की नोक रैना के सीने पर रख दी और उसपर हल्का सा दबाव डाला| रैना दर्द से तिलमिला उठी| खंजर की नोक पर रैना के लहू की बूंदे नजर आ रही थी, हिमांशु हौले से चाक़ू का फल अपने होठों के पास लाया और रैना के लहू का स्वाद चखने लगा| उसकी भाव भंगिमा देखकर ऐसा लगा जैसे उसने किसी तीव्र मादक पदार्थ का सेवन किया हो|
रैना खुद को छुडाने के लिए कसमसा रही थी|
हिमांशु अपना मुंह रैना के दाहिने कान के पास ले गया| रैना की सासें तेज़ चल रही थीं|
‘वो तुझे नहीं छोड़ेगी लड़की| इशानी जानती है कि तूने उसके साथ क्या किया है’| हिमांशु हौले से उसके कान में फुसफुसाया|
एक पल के लिए रैना जैसे जडवत हो गई| हिमांशु के मुंह से इशानी का नाम सुनने की उसने कल्पना भी नहीं की थी| वो इशानी के बारे में कैसे जान सकता था?
हिमांशु सीधा हुआ और उसका खंजर वाला हाथ दोबारा रैना के सीने की ओर बढ़ा, इस बार रैना ने किसी तरह उसके घुटने के नीचे से किसी तरह अपना दायाँ हाथ आज़ाद कर लिया था|
रैना ने हिमांशु की खंजर वाली कलाई थाम ली| उस पोजीशन में रैना अधिक बल लगा पाने में असमर्थ थी फिर भी उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर हिमांशु की कलाई पकडे रखी| हिमांशु का चेहरा जैसे किसी शैतान की तरह तमतमा रहा था, उसका खंजर वाला हाथ उठा, लेकिन उसका निशाना इसबार रैना नहीं थी| हिमांशु का खंजर वाला हाथ चला और उसमे थमा खंजर पूरी बेरहमी से हिमांशु की ही गर्दन में घुस गया| रैना बुरी तरह चिल्लाई|
‘व्..वो…तुझे नहीं छोड़ेगी रैना…इ…इशानी तुझे …नहीं छोड़ेगी’| हिमांशु के मुंह से जैसे लहू में लिसड़े हुए निकले वो लफ्ज़|
रैना का हाथ अब भी हिमांशु की कलाई थामे हुए था लेकिन उसे कण्ट्रोल करने की शक्ति अब उसमे नहीं थी| हिमांशु का हाथ हिला और उसकी गर्दन में फंसा हुआ खंजर उसके गले के मांस और श्वास नली को एक कान से दूसरे कान तक खुद ही उधेड़ता चला गया|
रैना बेतहाशा चीखती रही, हिमांशु का सर उसके धड़ से अब सिर्फ गर्दन की खाल से ही जुड़ा हुआ था और घड़ी के पेंडुलम की तरह लटक कर इधर-उधर झूल रहा था| उसकी कटी गर्दन से भलभलाता खून रैना के पूरे चेहरे और ऊपरी जिस्म को सुर्ख लाल रंग रहा था|
भय और विभत्सता की पराकाष्ठा में रैना को लगा कि अब वो अपने होश खोने वाली है| उसकी धुंधली होती नज़रों के सामने दूर अँधेरे में उसे एक लडकी का साया नजर आया| इशानी! क्या वो इशानी थी!!
रैना को ऐसा लग रहा था जैसे वो कोई सपना देख रही है| उसकी आखें तो खुली हुई हैं लेकिन जो वो देख रही है वो हकीकत नहीं है|
‘रैना! रैना!!’ दूर से कोई उसे आवाज़ दे रहा था, झंकझोर रहा था लेकिन रैना जैसे अपनी इस नींद से खुद को जगा ही नहीं पा रही थी|
‘रैना’!! किसी ने पूरे जोर से रैना के जिस्म को झंकझोरा| रैना की तंत्रा भंग हुई, ये प्रत्युष था|
प्रत्युष ने रैना के ऊपर लुड़का हुआ हिमांशु का बेजान शरीर एक तरफ गिरा दिया|
‘प्रत्युष’!!
रैना डर से कांपती किसी छोटी बच्ची की तरह प्रत्युष से लिपट गई|
‘काम डाउन रैना, सब ठीक है| यू आर सेफ नाऊ’|
प्रत्युष ने रैना को संभालने की कोशिश की लेकिन रैना को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे उसे कोई पागलपन का दौरा पड़ा हो|
‘प्रत्युष…प्रत्युष!! व्…वो इशानी को जानता था’|
‘कौन? कौन जानता था इशानी को रैना’?
‘हि…हिमांशु| उसने मुझसे कहा कि…कि…इशानी मुझे छोड़ेगी नहीं’|
‘व्हाट? ऐसा कैसे को सकता है? हिमांशु इशानी को कैसे जान सकता है’?
‘म..मैं नहीं जानती प्रत्युष ले…लेकिन मैंने अभी इशानी को यहाँ देखा था’|
‘रैना, तुम्हे गहरा मेंटल शॉक लगा है| यू नीड टू काम डाउन फर्स्ट’| प्रत्युष के चेहरे पर अनगिनत भाव एकसाथ आ और जा रहे थे|
‘नो आई डोंट नीड टू काम डाउन बट रादर यू नीड टू लिसेन टू मी प्रत्युष, आई हैव सीन इशानी स्टैंडिंग राईट इनफ्रंट ऑफ़ माय आईज’|
‘दिस इज़ नॉट पॉसिबल रैना बिकॉज़ इशानी इज़ डेड!! मर चुकी है इशानी! हमलोगों ने अपनी आखों के सामने उसकी चिता को राख होते देखा था’| प्रत्युष अपनी भावनाओं पर अब और काबू ना रख पाया| उसके अन्दर उमड़ता हुआ दर्द और आक्रोश किसी लावे की तरह फूट कर बाहर निकला|
दो पलों के लिए वहां सन्नाटा पसर गया| दोनों ही बिलकुल शांत थे| वातावरण की शान्ति कई भागते हुए क़दमों की आहत से भंग हुई| विकास और शशांक पुलिस को लेकर वहां पहुँच गए थे|
प्रत्युष रैना और निधि के साथ ही एम्बुलेंस में सवार था जो उन्हें लेकर सिटी हॉस्पिटल जा रही थी|
‘आई एम सॉरी रैना, उस समय मैं कुछ ज्यादा ही ओवर रियेक्ट कर गया’| प्रत्युष ने हौले से रैना से कहा|
‘दैट्स ऑलराईट प्रत्युष| इवन आई नीड टू अपोलोजाईज़ टू यू, मैं उस समय शॉक में थी और ना जाना क्या-क्या बकती चली गई’|
फिर दोनों में से कोई कुछ ना बोला| रैना ने हेडरेस्ट से अपना सर टिका कर आखें बंद कर लीं| ठीक एकसाल पहले का समय किसी मूवी के फ्लैशबैक की तरफ उसकी बंद आखों के सामने से गुजरने लगा|
एक साल पहले तक रैना एक आम कॉलेज गोइंग लड़की थी जिसकी लाइफ फ्रेंड्स, चैटिंग, शॉपिंग, और सोशल नेटवर्क्स में बसती थी| इंस्टाग्राम पर हर एक घंटे में लेटेस्ट सेल्फी और ग्रुपि डालना, फेसबुक पर पोस्ट्स, स्टोरी अपडेट्स, ट्विटर पर ट्वीट्स उसकी दिनचर्या का अभिन्न अंग थे| रैना मास कॉम एंड जर्नलिज्म की सैकेंड इयर की स्टूडेंट थी| उसके ग्रुप में उसकी बेस्ट फ्रेंड इशानी, इशानी का बॉयफ्रेंड प्रत्युष और उनके फ्रेंड्स विकास और शशांक थे| विकास और शशांक दोनों ही रैना को लाइक करते थे लेकिन फिलहाल रैना किसी भी रिलेशनशिप के लिए कमिट नहीं करना चाहती थी|
कुल मिलाकर रैना की लाइफ में सबकुछ लाइव और हैपनिंग था लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ जिसने रैना की आने वाली जिंदगी के साथ-साथ खुद रैना को भी पूरी तरह बदल दिया|
रैना और उसकी बेस्ट फ्रेंड इशानी में किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया और दोनों में बोलचाल बंद हो गई| हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ था, इससे पहले भी उन दोनों का अनगिनत बार एक-दूसरे से किसी न किसी बात पर झगड़ा हो चुका था| कुछ दिनों तक दोनों एक-दूसरे का मुंह भी नहीं देखती फिर अचानक पहले की तरह यूं नॉर्मल हो जाती थीं जैसे कुछ हुआ ही ना हो| लेकिन इस बार झगड़े के एक हफ्ते बाद इशानी ने कॉलेज आना बंद कर दिया| धीरे-धीरे सोशल साइट्स पर से भी वो गायब रहने लगी| रैना, प्रत्युष या किसी भी फ्रेंड के कॉल वो नहीं लेती थी, फिर उसका मोबाइल भी स्विच ऑफ रहने लगा| शुरू में रैना को लगा कि इशानी यूं ही फुटेज खा रही है लेकिन जब 15-20 दिन बीत गए और इशानी से किसी का कोई कॉन्टैक्ट नहीं हुआ तो रैना और प्रत्युष इशानी के अपार्टमेंट पहुंचे|
इशानी अपार्टमेंट बिल्डिंग के सिक्स्थ फ्लोर पर अपनी माँ और बड़े भाई के साथ रहती थी| रैना और प्रत्युष अभी अपनी टू व्हीलर्स पार्क ही कर रहे थे कि अपार्टमेंट बिल्डिंग से किसी के चीखने की आवाज़ आई|
‘रैना! प्रत्युष!! हेल्प’!!
रैना और प्रत्युष के आश्चर्य का ठिकाना ना रहा, चीखने वाली इशानी थी जो अपने रूम की खिड़की से उन दोनों को देखकर बेतहाशा पागलों की तरह चीख रही थी|
रैना और प्रत्युष हवा की तरह उड़ते हुए ऊपर पहुंचे| प्रत्युष ने अपार्टमेंट की डोरबेल बजाई| दरवाज़ा इशानी के भाई ने खोला|
‘भईया इशानी को क्या हुआ’| आवाक रैना ने इशानी के भाई के कंधे के पीछे अपार्टमेंट में झांकते हुए कहा|
‘क…कुछ नहीं| इशानी की तबियत ठीक नहीं है…त…तुमलोग जाओ अभी यहाँ से’| इशानी के भाई केवल ने ना ही उन दोनों को अंदर बुलाया और ना ही खुद दरवाज़े से हटने का उपक्रम किया|
‘रैना!! हेल्प मी रैना’!! ठीक उसी समय अंदर से अपनी माँ को धक्का देते हुए इशानी बाहर निकली|
‘रुक जा इशानी’!! केवल ने इशानी का रास्ता रोकने की कोशिश की|
लेकिन तबतक प्रत्युष केवल को धक्का दे चुका था| इशानी भाग कर अपार्टमेंट से बाहर निकली और प्रत्युष और रैना के पीछे छुप गई|
‘म…मुझे बचा लो रैना! इन लोगों ने मुझे ज़बरदस्ती यहाँ बंद करके रखा हुआ है| ना मुझे निकलने देते हैं ना किसी से बात करने दे रहे हैं| म..मेरा फोन भी छीन लिया है इन लोगों ने, मुझे दिन भर कमरे में बंद करके रखते हैं और मारते-पीटते हैं’| इशानी ने रोते-रोते कहा|
‘पर क्यों’? प्रत्युष और रैना की कुछ समझ में नहीं आ रहा था|
‘क्योंकि इसपर किसी चुडैल का साया है’| इशानी की माँ बाहर आते हुए बोली|
‘आंटी ये आप क्या बोल रही हैं! आज के ज़माने में भी आप इन दकियानूसी बातों पर विश्वास करती हैं’? रैना भौंचक थी|
‘तुमलोग बच्चे हो, कुछ भी नहीं समझते| इशानी ठीक नहीं है, वो अकेले में खुद में ही बडबडाती है| आधी रात को उठकर पूरे घर में बडबडाते हुए घूमती है, नींद में चलती है जैसे इसके शरीर पर किसी ने कब्ज़ा कर रखा हो’| इशानी की माँ बोली|
‘आंटी अगर ऐसा है तो इशानी को प्रोफेशनल हेल्प की ज़रूरत है, उसे किसी अच्छे साइकोथेरेपिस्ट के पास ले जाना चाहिए ना कि उसे किसी जानवर की तरह बंद कर के रखना चाहिए’| रैना अपने गुस्से पर बड़ी मुश्किल से काबू करते हुए बोली|
‘इसका इलाज किसी साइकोथेरेपिस्ट के पास नहीं है रैना| हमने अपने गुरूजी को बुलाया है| उनका ही आदेश है कि उनके आने तक इशानी को अकेले में बंद करके रखा जाए, ना किसी से मिलने दिया जाए और ना ही किसी से बात करने दी जाए| गुरूजी कल सुबह की फ्लाइट से अमेरिका से लौट रहे हैं जहां उनका बहुत बड़ा स्पिरिचुअल वर्कशॉप चल रहा था, कल इंडिया पहुँचते ही वो सीधे यहाँ आ जाएंगे’|
‘नहीं!! मुझे नहीं मिलना उस ढोंगी से| रैना वो गुरूजी बहुत ही गंदा आदमी है| जब मैं छोटी थी तब से ही वो मेरे साथ गलत हरकत करने की कोशिश करता आ रहा है| मैंने कई बार ये बात मम्मी और भईया को बताने की कोशिश की लेकिन ये दोनों उस गुरु के इतने अंधे भक्त हैं कि इनपर मेरी बात का कोई असर नहीं होता’| इशानी रैना से गिडगिडाते हुए बोली|
‘चुप कर लड़की! ये तू नहीं तेरे ऊपर कब्ज़ा किए हुए चुडैल का साया बोल रहा है’| इशानी की माँ गरजते हुए बोली|
‘माँ ठीक कह रही हैं| जब से हमलोग गुरूजी की शरण में आए हैं तबसे मेरे बिज़नस में सिर्फ प्रॉफिट ही प्रॉफिट हुआ है| ये गुरूजी के आशीर्वाद का ही चमत्कार है जिसने हमें फर्श से उठाकर अर्श पर पहुंचा दिया और ये लड़की गुरूजी पर ही लांछन लगा रही है!! अरे दुनिया भर में लाखों-करोड़ों भक्त हैं गुरूजी के, आजतक किसी ने गुरु जी पर एक ऊँगली तक नहीं उठाई’| केवल ने भी अपनी माँ का पक्ष लिया|
रैना ने एक नज़र उन दोनों माँ-बेटे पर डाली. केवल के हाथ की हर ऊँगली में सोने की रत्नजड़ित अंगूठी थी, लेटेस्ट आई-फोन था| कलाई पर रोलेक्स की डायमंड स्टडेड घड़ी थी और गले में खालिस सोने की मोटी सीकड़| उसकी माँ भी ऊपर से नीचे तक सोने से लदी हुई थी| ‘इतना पैसा, इतनी संभ्रान्ति लेकिन सोच ऐसी दो कौड़ी की’| रैना ने दोनों को देखते हुए सोचा, उसे उनसे ज़बरदस्त घृणा हो रही थी|
‘इशानी को उसकी मर्ज़ी के खिलाफ आपलोग ऐसे बंद करके नहीं रख सकते| इशानी हमारे साथ जाएगी’| प्रत्युष इशानी का हाथ पकड़ते हुए बोला|
‘खबरदार! इशानी कहीं नहीं जायेगी| यहाँ से कोई जाएगा तो सिर्फ तुमदोनो, वरना मैं पुलिस बुलाऊंगा’| केवल गरजते हुए बोला|
‘पुलिस को आप नहीं हम बुलाएंगे| मैंने कॉल कर दिया है पुलिस कुछ ही देर में आ रही है’| रैना सख्त भाव से बोली|
केवल और उसकी माँ एक-दूसरे का मुंह देख रहे थे|
रैना और प्रत्युष इशानी का हाथ पकड़ कर उसके साथ खड़े हुए थे, उन्हें यकीन था कि केवल और उसकी माँ अब इशानी का बाल भी बांका नहीं कर सकते लेकिन उनकी सोच को झटका तब लगा जब रैना की कॉल पर वहां पहुंचे पुलिस ऑफिसर ने इस मामले को पारिवारिक मसला बता कर अपना पल्ला झाड लिया और वहां से चलता बना|
‘इशानी हमारे साथ जाएगी, चलो इशानी’| प्रत्युष इशानी का हाथ खींचते हुए बोला|
‘इशानी कहीं नहीं जाएगी! अगर तुमलोगों ने इशानी को यहाँ से ले जाने की कोशिश की तो इस बार पुलिस को कॉल मैं करूँगा और मेरे बुलाने पर पुलिस खाली हाथ नहीं जाएगी| तुम दोनों पर इशानी के एबडक्शन चार्जेज़ लगाऊंगा मैं’| पुलिस के इस तरह वापस लौटने से केवल को शह मिल गई थी|
‘लेकिन इशानी अपनी मर्जी से हमारे साथ जा रही है’| प्रत्युष दांत पीसता हुआ बोला|
‘ये बात हवालात में बंद होने पर उन पुलिस वालों को सुनाना जो मेरे दिए नोटों के बंडल गिनने में मशगूल होंगे’| केवल के चेहरे पर उस घड़ी बहुत ही घृणित भाव थे| प्रत्युष का दिल आया उसी समय वो केवल का मार-मार कर बुरा हाल कर दे, लेकिन वो जानता था कि उसके ऐसा करने से बात और बिगड़ जाएगी|
‘इस समय तो हमलोग जा रहे हैं, लेकिन जब हम वापस आयेंगे तो हमारे साथ पूरा कॉलेज होगा| सैकड़ों स्टूडेंट्स के सामने ना आप हमें इशानी को ले जाने से रोक पाओगे और ना ही सैकड़ों स्टूडेंट्स पर एबडक्शन चार्जेज लगा पाओगे’ रैना केवल और उसकी माँ को घूरते हुए बोली|
‘जो करते बन पड़े कर लो, फिलहाल चलते बनो यहाँ से’| इशानी की माँ ने उन दोनों को दुत्कारा|
‘नहीं रैना!! प्रत्युष!! म..मुझे इन जल्लादों के साथ अकेला छोड़कर मत जाओ, तुमलोग नहीं जानते कि ये मेरे साथ क्या करेंगे’| भय से कांपती हुई इशानी रैना से लिपट गई|
‘इशानी! बेब्स लिसेन टू मी, ये लोग तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते| हमलोग विकास, शशांक के साथ पूरे कॉलेज को लेकर यहाँ आयेंगे| कल सोशल मीडिया पर इनकी करतूत ट्रेंडिंग होगी आई प्रॉमिस यू| लेकिन उसके लिए हमें अभी यहाँ से जाना होगा’| रैना ने इशानी को समझाते हुए कहा|
इशानी रोती-गिडगिडाती रही, उसकी माँ और भाई उसे खींचते हुए वापस अन्दर ले गए|
‘कमऑन प्रत्युष| वी नीड टू हरीअप| हमें सबको इकठ्ठा करना होगा’| रैना लिफ्ट पर सवार होते हुए बोली|
‘मुझे अंदर से अच्छी फीलिंग नहीं आ रही रैना, हमें इशानी को वहां नहीं छोड़ना चाहिए था’ प्रत्युष काफी परेशान नजर आ रहा था|
‘कोई दूसरा रास्ता नहीं था प्रत्युष| हमने पुलिस को बुला कर भी देख लिया, इशानी को बचाना है तो हमें स्टूडेंट पॉवर का सहारा लेना होगा’| रैना उसे समझाती हुई बोली|
लिफ्ट के रुकते ही रैना और प्रत्युष बाहर निकले और बाहर की ओर दौड़ गए| लेकिन उनके बेतहाशा भागते कदमों को ब्रेक तब लग गया जब रैना के ठीक सामने ऊपर से कुछ आकर गिरा| ज़ोरदार आवाज़ हुई|
कुछ पलों के लिए प्रत्युष और रैना सन्न रह गए|
वो इशानी थी| इशानी ने रैना की आखों के सामने दम तोडा|
केवल ने फेक मेडिकल डॉक्यूमेंट्स से ये प्रूव कर दिया कि इशानी की दिमागी हालत ठीक नहीं थी, पुलिस ने इसे सुसाइड केस घोषित करके फाइल बंद कर दी|
रैना और प्रत्युष ने विकास और शशांक के साथ मिलकर ‘जस्टिस फॉर इशानी’ की ऑनलाइन मुहीम चलाई लेकिन नतीजा सिफर निकला|
केवल अपना सारा बिज़नस वाइंडअप कर के और सबकुछ बेचबाच के अपनी माँ के साथ कहीं चला गया और कभी किसी के ढूंढें दोनों माँ-बेटा ना मिले|
रैना इशानी की मौत के लिए खुद को इस हद तक ज़िम्मेदार मानती रही कि डीप डिप्रेशन का शिकार हो गई| इस दौरान ही रैना ने हैवी स्मोकिंग और ड्रिंकिंग शुरू कर दी थी| रैना ने यह बात कभी किसी को नहीं बताई कि वो इशानी को अपने ज़हन से निकालने के लिए इतना हेविली स्मोक और ड्रिंक करती थी|
इशानी…जो उसे मरने के बाद भी हर जगह नजर आने लगी थी|
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Date: 1st July 2017
Time: 11:00 a.m.
‘हाऊ आर यू फीलिंग टुडे रैना’?
‘एबसल्युटली फाइन डॉक्टर पोद्दार’|
डॉक्टर पोद्दार रैना के पर्सनल साइकोथेरेपिस्ट थे| इशानी की मौत के बाद जब रैना डिप्रेशन में चली गई थी तो उसे सिगरेट और शराब की गर्त से निकालने के लिए प्रत्युष ही उसे डॉक्टर पोद्दार के पास लाया था|
छे महीने की इंटेंस रिग्रेशन थेरेपी के बाद रैना फाइनली अपने डिप्रेशन से बाहर आई| उसे इशानी नजर आना बंद हो गई थी| उस समय ही रैना ने ‘रैना एट मिडनाइट’ शुरू करने का फैसला कर लिया था ताकि आइन्दा किसी और इशानी के साथ अन्याय ना हो| विकास, शशांक और प्रत्युष ने भी इस मुहीम में उसका पूरा-पूरा साथ दिया था|
अबतक अपने चैनल के अवेयरनेस प्रोग्राम की बदौलत उन लोगों ने अनगिनत ढोंगी बाबाओं, सूफियों, फकीरों, संतो, तांत्रिकों और ओझाओं का पर्दाफाश किया था| लाखों लोगों की आखों पर पड़ा अंधविश्वास का पर्दा उठाया था और निधि जैसे कई बेक़सूर मासूमों को शिकार बनने से बचाया था|
‘प्रत्युष बता रहा था कि तुमने फिर से स्मोकिंग स्टार्ट कर दी है’| डॉक्टर पोद्दार ने रैना की फ़ाइल स्टडी करते हुए, बिना उसकी तरफ नजरें उठाए कहा|
रैना ने प्रत्युष को घूर कर देखा, प्रत्युष ने रैना से नज़रें ना मिलाई|
‘मैं आपसे अकेले में कुछ बात करना चाहती हूँ’| रैना डॉक्टर पोद्दार से बोली, वो अभी भी प्रत्युष को घूर रही थी|
डॉक्टर पोद्दार ने आखों से इशारा किया प्रत्युष, विकास और शशांक चुपचाप उठकर केबिन से बाहर चले गए|
‘वो मुझे दोबारा नज़र आ रही है डॉक्टर’|
‘इशानी’? डॉक्टर पोद्दार ने फाइल से नज़रें उठाई, अब वो रैना को देख रहे थे| उनके चेहरे पर गंभीर भाव थे|
डॉक्टर पोद्दार इकलौते ऐसे इंसान थे जो इस सच को जानते थे कि इशानी अपनी मौत के बाद भी रैना को नजर आती थी|
रिग्रेशन थेरेपी के दौरान जब उन्होंने रैना को हिप्नोटाईज़ किया था तब ये बात उनसे छुपी नहीं रह सकती थी|
छे महीने की ट्रीटमेंट के दौरान धीरे-धीरे इशानी रैना को नजर आना बिलकुल बंद हो गई थी|
‘लेट मी गेस, ये सब उस महाजन सिंह की वाइफ….व्हाट वॉज़ हर नेम? इमरती देवी…यस इमरती देवी की मौत के बाद से दोबारा शुरू हुआ है’? डॉक्टर पोद्दार रैना के बिलकुल करीब आकर बैठ गए|
रैना ने सहमती में सर हिलाया|
‘रौनकपुर से वापस लौटते वक्त मुझे वो दोबारा से दिखाई दी थी, जब हम वैनिटी में थे उस समय| दूर उस बाड़े के पास खड़ी हुई थी वो’|
‘लुक रैना, इमरती देवी के साथ तुमने ऑलमोस्ट वो ही सिमिलर सिचुएशन एक्सपीरियंस की जो तुमने इशानी के वक्त एक्सपीरियंस की थी| तुम उसे बचाना चाहती थी लेकिन हालात से मजबूर होकर तुम्हे उसे लिए बिना ही वापस लौटना पड़ा| इस घटना ने तुम्हारे सबकॉनशियस में दबे गिल्ट को फिर से ट्रिगर कर दिया| रही सही कसर तब पूरी हो गई जब अगली सुबह वो औरत बाड़े में मरी हुई पाई गई| तुम्हारे अंतर्मन ने इस घटना को सीधे-सीधे इशानी वाले इंसिडेंट से रिलेट कर दिया, नतीजतन तुम्हे इशानी फिर से नजर आने लगी’|
‘इट्स नॉट जस्ट दैट डॉक्टर| इमारती देवी वाले इंसिडेंट के बाद एक और इंसिडेंट हुआ था’|
रैना डॉक्टर पोद्दार को क्रिसेंट क्रॉस वाली घटना के बारे में बताती चली गई|
‘हुम्म! तो तुम्हे लगता है कि वो लड़की जिसपर तुमने एक काले साए को अटैक करते देखा था वो इशानी थी’?
‘पता नहीं, मैंने उसका चेहरा नहीं देखा था| सबकुछ इतना धुंधला था जैसे मैं कोई सपना देख रही हूँ’| रैना ने सोचपूर्ण मुद्रा में कहा|
‘साफ़ ज़ाहिर है रैना कि तुम हेल्युसिनेट कर रही थी’| डॉक्टर पोद्दार पूरी संवेदना के साथ बोले|
‘हाँ शायद, लेकिन फिर कल रात अपनी जान लेने से पहले मैंने हिमांशु को कहते सुना था कि इशानी मुझसे बदला लेने आ रही है| हिमांशु को इशानी के बारे में पता होना इम्पॉसिबल है’| रैना विचलित भाव से बोली|
डॉक्टर पोद्दार कुछ क्षण शान्ति से रैना को ऑब्जर्व करते रहे|
‘टेल मी समथिंग रैना, डू यू बिलीव इन पैरानॉर्मल्स’?
‘एबसल्यूटली नॉट डॉक्टर| आई नो आई एम गोइंग कुकू…मैं पागल हो रही हूँ’|
‘इट्स नॉट लाइक दैट रैना’|
‘बट माय माइंड इज़ प्लेइंग ट्रिक्स ऑन मी’|
‘टर्निंग बैक टू योर नैस्टी हैबिट्स वोंट हेल्प यू फाइट इट’|
रैना जानती थी कि डॉक्टर पोद्दार का इशारा उसकी स्मोकिंग की तरफ है लेकिन उसे उस समय भी सिगरेट की तीव्र तलब लग रही थी|
‘पर मैं क्या करू’?
‘देखो रैना, तुम्हारे रैना एट मिडनाइट के आईडिया को मैंने सपोर्ट किया था क्योंकि तुम्हे तुम्हारे डिप्रेशन से उबारने और तुम्हारे जीवन को एक पॉजिटिव नोट पर लाने में ये काफी सहायक सिद्ध हुआ था और इससे सोसाइटी को भी फायदा हुआ है| लेकिन अब ये एक्सट्रीम फिजिकल, मेंटल एंड इमोशनल प्रेशर तुम्हारे लिए खतरनाक साबित हो रहा है| अपने सब्जेक्ट्स से इम्पेथाइज़ करना अच्छा है लेकिन उसके लिए भी हमें लाइन्स ड्रा करनी पड़ती है, सीमा तय करनी पड़ती है’|
‘आप कहना क्या चाहते हैं डॉक्टर’?
‘यही कि तुम्हे आराम की और एक छुट्टी की ज़रूरत है| कुछ दिन के लिए रैना एट मिडनाइट को विराम दो, एक छुट्टी ले लो’|
‘बट दैट्स नॉट पॉसिबल डॉक्टर’| रैना ने प्रतिवाद करने की कोशिश की लेकिन डॉक्टर पोद्दार ने उसे चुप करा दिया|
‘नो इफ एंड बट! अगर दुनिया की मदद करना चाहती हो तो सबसे पहले अपनी मदद करो रैना| टेक ए ब्रेक’|
रैना ने अनमने ढंग से सहमती में सर हिलाया|
जब वो डॉक्टर पोद्दार के केबिन से बाहर निकली उस समय प्रत्युष, विकास और शशांक बाहर ही खड़े थे|
शशांक के हाथ में कुछ था जिसे वो पंखे की तरह हिला रहा था|
‘ये क्या है’? रैना ने पूछा|
‘टिकेट्स हैं, मुन्नार के| ज़बरदस्त जगह है, दिल खुश हो जाता है’| शशांक बत्तीसी दिखाते हुए बोला|
‘मतलब तुम तीनो पहले ही छुट्टी की प्लानिंग कर चुके हो’| रैना चौंकते हुए बोली|
‘बिलकुल| डॉक्टर पोद्दार ने हमसे पहले ही कह दिया था कि हमारी कमांडिंग ऑफिसर को छुट्टी चाहिए, तो जवान ब्रेक पर जाने को तैयार हैं’| विकास फौजी जवान के अंदाज़ में बोला|
रैना मुस्कुराए बिना ना रह सकी|
तीनो लड़के रैना को लेकर हॉस्पिटल के कॉरिडोर से बाहर की तरफ बढ़ गए|
रैना ने भरसक कोशिश की कि वो कॉरिडोर में रखी विजिटर्स चेयर की तरफ ना देखे|
वहां बैठी इशानी उसे ही घूर रही थी|
Date: 3rd July 2017
Time: 8:00 p.m.
बारिश की झुर्मुराहट धीरे-धीरे तेज़ हो रही थी| रैना ने विंड स्क्रीन ग्लास पर बारिश की बूंदों से बनती-बिगड़ती रेखाओं के पार देखने की कोशिश की, हाई-वे पर चारों तरफ अँधेरे और बारिश के शोर के अलावा कुछ नहीं था|
प्रत्युष ने जिस ट्रेवलिंग एजेंसी से बैंगलोर की फ्लाइट टिकट्स बुक की थी उसी से मुन्नार जाने और वहां घूमने के लिए एस.यू.वी. भी बुक कर ली थी| शशांक के ड्राइविंग स्किल्स सबसे अच्छे होने की वजह से फिलहाल वो गाड़ी चला रहा था, विकास उसके बगल की सीट पर था| रैना और प्रत्युष पीछे बैठे हुए थे| उन लोगों को अविनाशी और पल्लादम होते हुए शाम पांच बजे तक मुन्नार पहुँच जाना था लेकिन खराब मौसम के कारण उनके ग्यारह बजे से पहले मुन्नार पहुँच पाने की कोई संभावना नहीं बन रही थी|
प्राकृतिक छटाओं और बारिश की हल्की फुहारों से झिलमिलाते रास्तों बीच दिन का सफर सुहाना बीता था| इतना सुहाना कि कुछ समय के लिए रैना वाकई सबकुछ भूल गई थी| पिछले दिनों घटी घटनाएं, हिमांशु का उसपर अटैक करना…और इशानी|
रैना ने अपनी नज़रें सडक से हटा लीं, उसके माथे की सिलवटें लौट आई थीं|
‘विकास! सिगरेट देना’|
विकास ने यूं बिहेव किया जैसे उसे रैना की आवाज़ सुनाई ही ना दी हो|
‘विकास’!!
रैना जानती थी कि विकास उसकी आवाज़ सुन रहा है लेकिन जानबूझकर जवाब नहीं दे रहा|
रैना आगे झुकी और विकास के सर पर एक ज़ोरदार तड़ी जड़ दी|
‘आह’!
‘अब सुनाई देने लग गया तुझे! सिगरेट निकाल अब’!
विकास ने पलट कर प्रत्युष को देखा| रैना समझ गई कि प्रत्युष ने ही विकास को रैना को सिगरेट देने से मना किया है| आग उगलती नज़रों से रैना प्रत्युष को घूर रही थी, प्रत्युष को इस बात का पूरा एहसास था लेकिन वो वस्तुस्थिति से अनजान बना हुआ अपने मोबाइल की स्क्रीन निहार रहा था|
‘स्टॉप पेट्रोनाईजिंग मी प्रत्युष’|
‘आय एम नॉट’|
‘यस यू आर’|
‘नो आय एम नॉट’!!
‘भाई आखरी इंग्लिश पिक्चर जो मैंने देखी थी उसमे ये यस यू आर-नो आई एम नॉट के बाद बन्दा-बंदी किस्सी-विस्सी करने लग गए थे| ए भाई प्रत्युष, तू थोडा दूर सरक के बैठ ना भाई’!! रियर-व्यू मिरर से पीछे की सीट पर नज़रें गड़ाए शशांक बोला|
‘तू रियर व्यू की जगह फ्रंट व्यू पर फोकस कर साले, वर्ना आगे से कोई ट्रक आकर किस्सी-विस्सी करेगी तुझे’!! विकास झुंझला कर बोला|
प्रत्युष बिना कुछ कहे रैना से थोडा परे सरक कर अपने साइड की विंड स्क्रीन से बाहर झाँकने लगा|
शशांक अभी भी रियर व्यू मिरर से पीछे झाँक रहा था, उसकी नज़रें रैना से मिली| रैना का चेहरा भावहीन था, उसने अपने दाहिने हाथ की मिडिल फिंगर ऊपर करके शशांक की ओर लहराई, शशांक हडबडा कर फ़ौरन आगे देखने लगा| विकास भी पीछे रैना को ही देख रहा था, रैना ने वैसे ही भावहीन नेत्रों से उसे देखा|
‘तुझे भी चाहिए’?
विकास ने गिव-अप करने के अंदाज़ में सर झटका और सिगरेट का पैकेट निकाल कर पीछे रैना की ओर बढ़ा दिया|
रैना ने छटपटाते हुए एक सिगरेट निकाली और होठों से लगा कर सुलगाई| एक गहरा कश खींचते ही उसके चेहरे पर ऐसे भाव आए जैसे उसकी रुकी हुई सांस दोबारा चलने लगी हो|
रैना ने अपने साइड की विंड स्क्रीन नीचे की, प्राकृतिक ताज़ी हवा के झोंके और बारिश की फुहार उसके चेहरे से टकराईं| रैना के नथुनों से निकलता धुँआ जैसे उसके माथे की शिकन के साथ हवा के उन थपेड़ों और बारिश की बूंदों में विलीन हुआ जा रहा था| उसने विंड स्क्रीन थोड़ी और नीचे कर ली और अपना चेहरा बाहर निकाल लिया| उसके खुले बाल तेज़ हवा के साथ समुन्द्र में उठती लहरों की तरह लहरा रहे थे, चेहरे पर आती लटों को हटाने की उसने ज़हमत नहीं उठाई|
चेहरा बाहर निकालने पर अँधेरे में भी रोड के दोनों तरफ गुजरते पेड़ों का समूह उसे नजर आ रहा था| आगे रास्ता घुमावदार था, किसी जायंट रोलर कोस्टर राइड की तरह उनकी गाड़ी आड़े-तिरछे रास्तों से लहराते हुए गुजर रही थी| पेड़ों के समूह अँधेरे और बारिश में अलग-अलग आकृतियाँ बना रहे थे जो तेज़ी से आगे बढती गाड़ी की रफ़्तार के साथ बनती और बिगडती प्रतीत हो रही थीं|
शशांक बहुत ही सावधानीपूर्वक किसी दक्ष ड्राईवर की तरह हर घुमावदार मोड़ से गाड़ी निकाल रहा था| आगे एक अंधे मोड़ पर शशांक ने गाड़ी घुमाई| रैना चेहरा बाहर निकाले हुए अपनी आखें बंद किए थी और चेहरे पर पड़ती बारिश की बूंदों से खुद को सराबोर करने में लीन थी| तभी अचानक उसके चेहरे से कुछ सरसराते हुए गुज़रा| उसने चौंक कर आखें खोली| हवा, बारिश और गुजरते पेड़ों के अलावा वहां कुछ ना था| क्या सडक किनारे किसी पेड़ की बारिश से झुकी टहनियों के पत्ते रैना के चेहरे से टकराए थे? नहीं, वो स्पर्श पत्तों का नहीं था| वो स्पर्श कपड़े का था, किसी झीने कपड़े का और उसमे बसी एक ख़ास लेडीज परफ्यूम की खुशबू…जो इशानी लगाया करती थी|
रैना ने चौंक कर अँधेरे में चारों तरफ देखा| पेड़ों के अलग-अलग आकृतियाँ बनाते समूहों के अलावा उसे कुछ ना दिखाई दिया| हडबडा कर उसने अपना चेहरा अंदर किया| प्रत्युष चुपचाप उससे परे अपने साइड की विंड स्क्रीन से बाहर देख रहा था| शशांक गाड़ी चलाने में तल्लीन था और विकास रह-रह के ऊंघ रहा था| सबकुछ नॉर्मल था| रैना ने अपनी उखड़ती साँसों को नियंत्रित करने की कोशिश की| उसने सिगरेट के दो-तीन गहरे कश खींचे| उसके चेहरे की त्वचा पर अब भी उस झीने कपड़े के स्पर्श का एहसास था, उसके नथुनों में अब भी उस परफ्यूम की गंध थी| रैना विंड स्क्रीन से ठीक सामने देख रही थी, उसे पूरा यकीन था कि गुजरते पेड़ों के बीच बनती आकृतियों में कहीं छुपी हुई इशानी उसे ज़रूर नजर आएगी| उसका दिल पसलियों पर ज़ोरों से चोट कर रहा था, जाने कितनी ही देर तक वो उन गुजरते हुए पेड़ों को देखती रही लेकिन इशानी कहीं नजर ना आई|
रैना ने आखें बंद कर के सर हेड रेस्ट से टिका लिया| उसे अब हल्की ठंड लग रही थी लेकिन ऐसा मौसम की वजह से भी हो सकता था| नहीं, ये ठंड बाह्य नहीं थी, उसे अपनी रीढ़ में सिहरन महसूस हो रही थी| ऐसा लग रहा था जैसे उसकी रगों में दौड़ता खून जम रहा है, धमनियां शिथिल पड़ रही हैं| रैना को इशानी की उपस्थिति का एहसास हो रहा था| हाँ, इशानी जब भी आस-पास होती थी रैना को उसका पूर्वाभास हो जाता था| रैना ने झटके से आखें खोली, उसे यकीन था कि इशानी उसे बैकसीट पर अपनी बगल में बैठी दिखेगी लेकिन इशानी वहां नहीं थी| गाड़ी में सबकुछ पूर्ववत था, प्रत्युष खिड़की से बाहर देख रहा था, विकास ऊंघ रहा था और शशांक ड्राइव करने में बिजी था|
रैना ने सिगरेट का आखरी कश खींचा| सिगरेट बट उसने बाहर फेंक दिया| एक बार फिर खुली हुई विंड स्क्रीन से उसने अपना चेहरा बाहर निकाला| उसे यकीन था कि इशानी उसे कहीं ना कहीं ज़रूर दिखाई देगा| लेकिन अब भी बाहर द्रुत गति से गुजरते ऊंचे-नीचे पेड़ों की आकृतियों और ऊपर से गिरती और पल प्रति पल तेज़ होती बारिश की फुहार के अलावा कुछ ना था|
‘ऊपर’!!
रैना ने चौंक कर अपना चेहरा ऊपर एस.यू.वी. की रूफ पर घुमाया| ठीक उसी समय शशांक ने एक तीखा मोड़ काटा, सामने से आते एक ट्रक की हेडलाइट की तीव्र रौशनी में एस.यू.वी. सराबोर हो गई| उस रौशनी में एस.यू.वी. के रूफटॉप पर पालथी मारे बैठी इशानी साफ़ नज़र आई| उसके जिस्म पर वही झीना कपडा था, बारिश से सराबोर उसके बालों की लटें सफ़ेद पड़े हुए चेहरे को इस तरह ढके हुए थीं कि सिर्फ उसकी दो भावहीन आखें नजर आ रही थीं| उसकी आखों की स्याह पुतलियाँ फैल कर जैसे पूरी आखों पर छा गई थीं और उन स्याह आखों में रैना को अपनी सूरत साफ़ नजर आ रही थी|
नहीं, ये उसका वहम नहीं हो सकता था| इशानी वाकई थी वहां पर| रैना चीखना चाहती थी, अपने साथियों को इशानी की उपस्थिति के बारे में बताना चाहती थी लेकिन उसके गले से चाह कर भी आवाज़ नहीं निकली| उसकी नज़रें यूं इशानी के चेहरे पर जमी हुई थीं कि वो चाह कर भी अपनी नज़रें उससे हटा नहीं पा रही थी| इसी लिए शायद उसे सामने से आती ट्रक दिखाई नहीं दी जोकि रास्ता संकरा होने की वजह से बिलकुल उनकी एस.यू.वी. के बगल से लग कर गुजरने वाली थी| रास्ते के दोनों तरफ कच्ची ढलान होने के कारण शशांक गाड़ी को साइड नहीं कर सकता था, उस रास्ते पर सिर्फ इतनी जगह थी कि दोनों गाडियां अगल-बगल से गुजर जाएं लेकिन रैना का पिछली सीट से बाहर निकला सर यदि इनके बीच आता तो दोनों तेज़ रफ्तार गाड़ियों के बीच उसका पिसना तय था|
शशांक, विकास और प्रत्युष रैना को निरंतर आवाज़ दे रहे थे लेकिन रैना को जैसे उनकी चिल्लाहटें सुनाई ही नहीं दे रही थीं| ट्रक की हेडलाइट की तीखी रौशनी सीधे रैना के गाड़ी से बाहर निकले चेहरे पर पड़ रही थी| प्रत्युष बिजली की गति से लपका और रैना की कमर में हाथ डाल कर उसे गाड़ी के अंदर खींचने की कोशिश करने लगा लेकिन उसी समय नीचे हुई विंड स्क्रीन ऊपर हुई और रैना की गर्दन उसके बीच फंस गई| अगले ही क्षण ट्रक की ज़ोरदार टक्कर रैना के सर के परखच्चे उड़ा देने वाली थी लेकिन सैकेंड के सौंवे हिस्से में प्रत्युष ने विंड स्क्रीन का पुश बटन दबाया और रैना को अंदर खींच लिया| अपने चेहरे को लगभग छू कर गुजरते ट्रक का वेग रैना ने साफ़ महसूस किया, मौत वाकई उसे छू कर गुजरी थी|
रैना का पूरा चेहरा बारिश के पानी और पसीने से सराबोर था| सासें धौंकनी की तरह चल रही थीं|
‘अबे विकास ये कौन सा माल फुंकवा दिया लड़की को’| शशांक हाँफते हुए बोला, उसका पूरा जिस्म भी पसीने से सराबोर था| ये शशांक की ही सूझबूझ और ड्राइविंग में दक्षता का नतीजा था कि उनकी कुचली हुई लाशें कबाड़ा हुई गाड़ी में बीच सडक पर फंसी हुई नहीं थीं|
‘पागल हो गई हो क्या!! कर क्या रही थी तुम’!! प्रत्युष चिल्लाया| रैना ने उसकी बात का कोई जवाब ना दिया| वो पथराई हुई आखों से शून्य में निहार रही थी|
‘शशांक आगे गाड़ी रोक’!! प्रत्युष आदेशात्मक लहज़े में बोल।
चाय बागान के पास शशांक ने गाड़ी रोकी| जिस गेस्ट हाउस में जिस गेस्ट हाउस में उन लोगों की रूम बुकिंग्स थीं वो पास ही था| यहाँ पहुँचते-पहुँचते उन्हें रात के लगभग साढ़े ग्यारह बज चुके थे| बारिश रुकी तो नहीं थी फिर भी काफी हद तक हल्की हो चुकी थी|
शशांक ड्राइव करते-करते थक चुका था इसलिए विकास ने ड्राइविंग सीट संभाली|
इस समय तक रैना के मूड स्विंग्स काफी ज्यादा बढ़ चुके थे| वो एक के बाद एक सिगरेट पी रही थी और मना करने पर बुरी तरह बिफर रही थी| प्रत्युष के उसे समझाने की हर कोशिश विफल हुई।
‘दो मिनट का ब्रेक लेते हैं’| प्रत्युष बाहर निकलते हुए बोला|
रैना पहले ही गाड़ी से बाहर निकल चुकी थी| उसकी नज़रें चाय बागान की तरफ गड़ी हुई थीं|
शशांक बाहर निकलने के बजाय पिछली सीट पर ढेर हो गया|
‘क्या हुआ रैना, तुम्हे क्या परेशान कर रहा है’?
‘बताउंगी तो तुम यकीन नहीं करोगे’|
‘ट्राय करके देखो’|
‘रहने दो| मुझे खुद जिस बात पर यकीन नहीं है उसपर तुम्हे कैसे यकीन करवाऊं’|
रैना स्थिर कदमों से चलती हुई सडक के किनारे की तरफ बढ़ी| सडक के दोनों तरफ चाय के बागान थे| रैना की नज़रें एक ख़ास जगह टिकी हुई थीं|
चाय बागान के बीचों-बीच, वहां कोई खड़ा हुआ था| अँधेरे में उसे सिर्फ एक आकृति नजर आ रही थी|
‘रैना! रैना कहाँ जा रही हो’! प्रत्युष ने पीछे से आवाज़ दी, लेकिन रैना उसकी आवाज़ नहीं सुन रही थी|
वो बागान की तरफ बढ़ गई| बागान के बीचोंबीच खड़ी आकृति किसी लडकी की थी|
रैना को यकीन था कि वो इशानी है| आज वो इशानी को नज़रंदाज़ करके निकलना नहीं चाहती थी| आज वो अपने डर का सामना करना चाहती थी, खुद को यकीन दिलाना चाहती कि इशानी का नज़र आना सिर्फ उसके दिमाग का भ्रम है, लोग मर कर वापस नहीं आते| और खुद को यह यकीन दिलाने के लिए उसका अपने भ्रम से रूबरू होना आवश्यक था|
रैना चाय बागान के बीचों-बीच पहुँच गई| अब उसे पीछे से आती प्रत्युष की आवाज़ भी सुनाई नहीं दे रही थी, ना ही उसने पीछे मुड़कर देखने की कोशिश की| उसकी नज़रें अपने सामने टिकी हुई थीं| सामने लड़की का साया अब भी अँधेरे में था| रैना उसका चेहरा नहीं देख पा रही थी|
लड़की का साया अपनी जगह से बिलकुल भी हिल-डुल नहीं रहा था, ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने बागान के बीच में स्केयर-क्रो खड़ा कर दिया हो| रैना सावधानीपूर्वक उसके कुछ और पास गई| अब दोनों के बीच सिर्फ दो हाथ का फासला था, अभी भी उस आकृति का चेहरा रैना को नजर नहीं आ रहा था|
एकाएक आसमान में ज़ोरदार घन गर्जना हुई|
उस गर्जना के साथ ही ऐसा लगा जैसे किसी ने वहां हज़ार वॉट के सैकड़ों बल्ब जला दिए हों| कड़कती बिजली कि उस क्षणिक रौशनी में रैना को अपने सामने खड़ी आकृति का चेहरा साफ़ नजर आया|
रैना को ऐसा लगा जैसे सामने किसी ने आईना रख दिया हो| वो आकृति कोई और नहीं बल्कि वो खुद थी| रैना को अपनी आखों पर यकीन नहीं हो रहा था| रैना खुद अपने आप को अपनी नज़रों के सामने खड़ा देख रही थी, पथराई नज़रों से खुद को ही घूरती हुई|
नहीं, ये सच नहीं हो सकता था! उसकी आखें और उसका दिमाग उससे खेल खेल रहे थे|
‘रैना, यहाँ क्या कर रही हो’?
प्रत्युष की आवाज़ रैना को अपने ठीक पीछे सुनाई दी| रैना चौंक कर पलटी, वातावरण में फिर से अन्धकार छा चुका था| प्रत्युष रैना के पीछे-पीछे बागान के बीच तक आ गया था, विकास और शशांक भी उससे कुछ ही पीछे थे|
‘क्या हुआ रैना’? प्रत्युष ने आहिस्ता से रैना के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा|
रैना मुंह से कुछ ना बोली, पीछे मुड़कर उसने उस तरफ इशारा किया जहां उसने अपनी आकृति देखी थी| तीनो लड़कों की निगाह उस तरफ उठी जिधर रैना इशारा कर रही थी|
‘वो कौन है? यहाँ अँधेरे में क्या कर रही है’? प्रत्युष बोला|
रैना आश्चर्यचकित थी, तीनो लडकों को भी वो आकृति नजर आ रही थी|
विकास ने अपने मोबाइल की टॉर्च लाइट जलाई और उस लडकी के चेहरे की तरफ की|
‘कौन हो तुम’?
रैना ने टॉर्च लाइट में एकबार फिर उस लडकी का चेहरा देखा| नहीं, इस बार उस लडकी की जगह रैना को अपना चेहरा नजर नहीं आया| हालांकि उसके कद-काठी और चेहरे-मोहरे में रैना से काफी समानता थी, शायद इसीलिए रैना एक पल के लिए देखने पर कंफ्यूज हो गई कि वो खुद को ही देख रही है|
‘ये कुछ बोल क्यों नहीं रही? लगता है ये किसी तरह के शॉक में है’| शशांक सशंकित भाव से बोला|
वो चारों उस लड़की की तरफ ही देख रहे थे, उसका चेहरा और आखें बिलकुल पथराई हुई थीं| मोबाइल फ़्लैशलाइट की आखों में सीधी पड़ रही रौशनी से भी उसकी आखें पलक नहीं झपक रही थीं|
‘नहीं, ये शॉक में नहीं है| ये स्लीप वॉकिंग कर रही है’| रैना उस लड़की की पथराई हुई आखों में आखें डालते हुए बोली|
ठीक उसी समय आसमान में एक बार फिर ज़ोरों की घन गर्जना हुई, उसी समय रैना ने उस लड़की के कंधे पर अपना हाथ रखा|
लड़की के शरीर ने जोर से झुरझुरी ली| उसकी हल्की चलती सासें तेज़ हो गईं, पलकें तेज़ी से फड़क रही थीं और विस्फरित नेत्र अपने आस-पास के माहौल को समझने की कोशिश कर रहे थे| ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी बुरे सपने से जागी हो|
‘रिलैक्स! वी वोंट हर्ट यू| वी आर हियर टू हेल्प’| रैना लड़की को समझाते हुए बोली|
‘कौन हो तुम? यहाँ कैसे आ गई’?
‘मेरा नाम रानी है, रानी दर्पणा| य…यहाँ से कुछ ही दूर पर मेरी कॉटेज है’|
‘तुम यहाँ इतनी रात गए इस बारिश में कर क्या रही थी’?
‘म…मुझे सॉम्नैमब्यूलिजम है…नींद में चलने की बिमारी| शायद नींद में चलते-चलते मैं यहाँ तक आ गई’|
‘हम लोग आगे गोल्डन डियर लॉज तक जा रहे हैं, तुम हमारे साथ चल सकती हो’| प्रत्युष बोला|
‘थैंक्स’| लडकी के चेहरे पर फीकी सी मुस्कान उभरी|
रैना और प्रत्युष के साथ रानी पिछली सीट पर सवार हुई, विकास ने ड्राइविंग सीट संभाली और शशांक उसके बगल में बैठ गया|
जिस समय वे गोल्डन डियर लॉज पहुंचे उस समय रात के लगभग बारह बज चुके थे|
‘तुम्हारी कॉटेज यहाँ से कितनी दूर है रानी’? विकास ने लॉज के गेट पर गाड़ी रोकते हुए पूछा|
‘बस दस मिनट का रास्ता है, मैं यहाँ से पैदल चली जाऊँगी| थैंक्स गाइस|’
‘अरे हमलोग छोड़ के आते हैं ना! शशांक, तू लॉज में चेक-इन कर’| प्रत्युष ने शशांक से कहा|
शशांक नीचे उतर कर लॉज के अंदर बढ़ गया|
‘यू रियली डोंट नीड टू डू दिस’| रानी कृतज्ञ भाव से बोली|
‘दैट्स पर्फेक्ट्ली ऑलराईट| जबतक शशांक चेक-इन फॉर्मैलिटीज़ पूरी करेगा हमलोग तुम्हे ड्राप करके वापस भी आ चुके होंगे’| प्रत्युष रानी से बोल ही रहा था कि उन्हें मुंह लटकाए और भुनभुनाते हुए वापस लौटता शशांक दिखाई दिया|
‘क्या हुआ बे’?
‘हमारी बुकिंग कैंसिल हो गई| हमारे रूम्स इन्होने दूसरे गेस्ट्स को अलॉट कर दिए हैं’|
‘व्हाट! ऐसा कैसे कर सकते हैं ये लोग’?
‘मैनेजर का कहना है कि हमारी बुकिंग शाम 6 बजे की है, लेकिन हमने जब नौ बजे तक भी चेक-इन नहीं किया तो इन्हें रूम्स दूसरे गेस्ट्स को देने पड़े’|
‘तो हमें दूसरे रूम्स अलॉट करें’|
‘यही तो प्रॉब्लम है, इनके पास कोई भी रूम खाली नहीं है’|
‘ये क्या बेहूदा मज़ाक है! हमलोग आधी रात को कहाँ जाएंगे’| रैना गुस्से में बिफरी|
‘इफ यू गाइस डोंट माइंड, आपलोग मेरे साथ मेरे कॉटेज में रुक सकते हैं’| रानी झिझकते हुए बोली|
‘वी डोंट वॉंट टू कॉज यू एनी ट्रबल’| प्रत्युष उलझन भरे स्वर में बोला|
‘ट्रबल की कोई बात नहीं है| कॉटेज काफी बड़ा है और मैं वहां अकेली ही रहती हूँ| तुमलोग रहोगे तो कम से कम स्लीपवॉकिंग करते हुए दूर निकल जाने का डर नहीं रहेगा’| इस बार रानी सहज भाव से मुस्कुराते हुए बोली|
तीनो लड़कों ने रैना की तरफ देखा| रैना ने सहमती में अपना सर हिलाया| विकास ने गाड़ी लॉज से आगे रानी के कॉटेज की तरफ बढ़ा दी|
∙ ∙ ∙
‘तुम रैना प्रधान हो! रैना एट मिडनाईट वाली! इसीलिए तुम्हारा चेहरा इतना जाना-पहचाना लग रहा था’| रानी ने रैना की तरफ गौर से देखते हुए कहा| रैना की तरफ से जवाब में सिर्फ एक फीकी सी औपचारिक मुस्कान दी|
‘वैसे तुम्हे आईना देखकर भी ऐसी फीलिंग आ सकती है कि तुमने रैना को कहीं देखा है| तुमदोनो बिलकुल कुम्भ में बिछड़ी जुड़वाँ बहने लगती हो’| प्रत्युष ने अगल-बगल बैठी रानी और रैना की तरफ देखते हुए कहा|
‘भाई अपनी प्रॉब्लम सॉर्टेड है, अब रैना को लेकर हमें एक-दूसरे से कम्पटीशन नहीं करना पड़ेगा…उसकी डूप्लगैंगर है हमारे पास| तू इस रानी को अपनी रानी बनाने के पीछे लग मैं रैना पर कंसन्ट्रेट करता हूँ’| शशांक अपने बगल की कुर्सी पर बैठे विकास के कान में फुसफुसाया|
‘क्यों बे! मैं रानी के पीछे क्यों जाऊं? तू जा रानी के पीछे’| विकास वापस शशांक के कान में फुसफुसाते हुए बोला|
दोनों एक क्षण एक-दूसरे को प्रतिद्वंदियों की भाँती देखते रहे|
‘ठीक है, आय डोंट माइंड’| शशांक कंधे उचकाते हुए बोला और लगभग एक ही बाईट में आधा हॉटडॉग उसने अपने मुंह में भर लिया|
रात के पौने एक बज रहे थे| वो लोग उस समय रानी के कॉटेज में थे|
‘आय एम सॉरी गाइस, आय वॉजन्ट एक्सपेक्टिंग एनी कंपनी इसलिए डिनर काम चलाऊ ही है’|
‘तुम मज़ाक कर रही हो! तुम यहाँ अकेलें रहती हो और यहाँ इतना खाना है कि पूरी बरात खा सकती है’| विकास ने टेबल की तरफ देखते हुए कहा|
‘और पूरी बरात का खाना हमारा बाराती अकेले खा जाएगा अगर हमलोग यहाँ से नहीं उठे’| विकास शशांक को घूरते हुए बोला, शशांक फिलहाल चिकन विंग्स मुंह में ठूसने में व्यस्त था|
‘तुमने तो खाने को छुआ भी नहीं’| रानी ने रैना की प्लेट देखते हुए कहा|
‘सफर की थकान से भूख मर गई है’| रैना के टोन में बेरुखी थी जिसे रानी के साथ-साथ प्रत्युष ने भी साफ़ महसूस किया|
डाइनिंग टेबल पर कुछ पल सन्नाटा छाया रहा| विकास और शशांक ने मुंह बंद कर के खाने पर कंसन्ट्रेट करने में ही बेहतरी समझी|
‘वैसे इतनी बड़ी कॉटेज में तुम अकेले क्यों रहती हो| तुम्हारी फॅमिली…?’प्रत्युष ने बात बदल कर स्थिति संभालने की कोशिश की|
‘ये मेरी पुश्तैनी कॉटेज है| मैं दस साल की थी जब माँ-पापा की डेथ एक एक्सीडेंट में हो गई, उसके बाद मैं यहाँ अपनी नानी के साथ रहती थी| कुछ महीने पहले नानी भी चल बसीं, उनके बाद इस प्रॉपर्टी की इकलौती वारिस मैं हूँ| मैं बैंगलोर की एक सॉफ्टवेर कंपनी में जॉब करती हूँ और वीकेंड्स पर यहाँ आ जाती हूँ’|
‘भाई, मैं इस रानी पर ही कंसन्ट्रेट करने वाला हूँ| इन-लौज़ की किच-किच नहीं और दहेज़ में ये कॉटेज मिलेगी अलग से’| शशांक विकास के कान में फुसफुसाया| विकास ने उसकी पसली पर अपनी कोहनी मारी|
‘वैसे तुमलोग यहाँ कैसे? क्या यहाँ मुन्नार में भी घोस्ट हंटिंग करने आये हो’? रानी ने प्रत्युष से पूछा|
‘वी आर नॉट घोस्ट हन्टर्स, वी आर मिथ बस्टर्स’| रैना ने रानी की बात काटते हुए कहा|
‘एक्चुअली, वे डू नॉट बिलीव इन पैरानॉर्मल’| प्रत्युष बीच में बोला|
‘स्ट्रेंज! आई थॉट यू गाइस आर पैरानॉर्मल इन्वेस्टीगेटर्स…’ रानी चौंकते हुए बोली|
‘नो वी आर नॉट| हम लोगों में ये अवेयरनेस लाने की कोशिश करते हैं कि देयर इज़ नो सच थिंग एज़ आफ्टर लाइफ’| रैना भावहीन ढंग से बोली|
‘यू डोंट रियली बिलीव दैट, डू यू’? रानी ने चौंकते हुए कहा|
‘एक्चुअली वी डू’| रैना पूर्व की भाँती भावहीन ढंग से बोली|
‘फिर तुम्हारे हिसाब से जो लोग मर जाते हैं उनका क्या होता है? वो कहाँ जाते हैं’?
‘कहीं नहीं| जैसे मोबाइल की बैटरी डेड होने का मतलब ये नहीं कि उस बैटरी की एनर्जी कहीं जाती है, वो बस खत्म हो जाती है…पूफ्फ़!!…फिनिश…ओवर…डेड’!! वैसे ही हमारा शरीर एक मशीनरी है, दिमाग बैटरी और उसे चलाने वाली आत्मा एनर्जी है’| रैना की आवाज़ में इसबार उत्तेजना थी|
‘मैं तुम्हारी आखों में देखकर ये बता सकती हूँ रैना कि तुम जो बोल रही हो उसपर तुम्हे खुद यकीन नहीं है’| रानी अपना चेहरा रैना के बिलकुल नज़दीक लाते हुए बोली| वो सीधे रैना की आखों में देख रही थी|
‘बर्रररsss’ उसी समय शशांक ने खा कर लम्बी डकार मारी|
‘अब एक खाया तो मेरी आत्मा पूफ्फ़ हो जाएगी’| शशांक दांत निपोरते हुए बोला|
‘मेरे ख्याल में अब हमलोगों को आराम करना चाहिए, आजका सफर कुछ ज्यादा ही लम्बा और थका देने वाला था’| प्रत्युष बात को और आगे नहीं बढ़ाना चाहता था|
‘यहाँ कॉटेज में 5-6 कमरे हैं, सभी ठीक-ठाक अवस्था में हैं| तुमलोग जो भी कमरे पसंद आए ले सकते हो’| रानी अपनी जगह से उठते हुए बोली|
रानी ने सबको कॉटेज में कमरे दिखाए| उस कॉटेज में तीन कमरे नीचे और तीन फर्स्ट फ्लोर पर थे| रानी खुद फर्स्ट फ्लोर पर बने कमरों में से एक में रह रही थी| ऊपर के ही दूसरे कमरे में रैना ने अपना सामान डाला जबकि तीनो लड़के नीचे ग्राउंड फ्लोर पर बने कमरों में सेटल हो गए| रात बहुत गुजर चुकी थी और थकान बहुत ज्यादा थी, इसलिए सभी बेड पर गिरते ही नींद के हवाले हो गए|
कुछ समय बाद रैना को अपने रूम के बाहर कुछ आहट महसूस हुई| थकान और नींद से रैना का शरीर इतना बोझिल था कि उसने उस आहट को नज़रंदाज़ करके सो जाना ही बेहतर समझा|
थोड़ी देर बाद रैना को एहसास हुआ कि कोई उसके बेड के पास कोई खड़ा हुआ है और उसे घूर रहा है| रैना चौंक कर उठ बैठी| उसके बेड के सामने रानी खड़ी हुई थी और एकटक उसे देख रही थी| रानी के जिस्म पर कोई कपड़ा नहीं था|
‘त…तुम अंदर कैसे आई’| रैना ने चौंकते हुए पूछा, रानी की तरफ से कोई जवाब ना आया, वो बुत की तरह खड़ी हुई, पथराई आखों से रैना को देखती रही|
‘हे भगवान्! ये तो फिर से नींद में चल रही है’!! रैना अपने आप में बोली|
इससे पहले कि रैना उठकर उसे नींद से जगा पाती रानी उसके बेडरूम से निकल कर नीचे की तरफ जाती हुई सीढ़ियों की ओर बढ़ गई| रैना भी लपक कर बेड से उतरी, उसने बेड से चादर अपने साथ ले ली और रानी के पीछे लपकी| वो नहीं चाहती थी कि इस अवस्था में रानी कॉटेज से बाहर जाए|
रानी किसी रिमोट कण्ट्रोल से चलने वाले खिलौने की तरह नपी-तुली चाल से चलते हुए कॉटेज से बाहर निकल गई|
रानी की निर्वस्त्र अवस्था रैना को विचलित कर रही थी, उसके इस तरह बिना कपड़ों के नींद में चलते हुए बाहर निकल जाने से उसके साथ कोई भी अनहोनी हो सकती थी| रैना अपनी जान लगाकर रानी के पीछे भागी| रानी सडक की ढलान से होती हुई चाय बागान की तरफ जा रही थी|
‘रानी रुक जाओ! नींद से जागो रानी’!! रैना ने रानी को पीछे से आवाज़ दी, रानी की पीठ रैना की तरफ थी और वो चाय बागान में उतर चुकी थी|
गनीमत सिर्फ यह थी कि उस समय रात के तीन बज रहे थे और दूर-दूर तक किसी के वहां होने की संभावना नहीं थी|
रैना भी रानी के पीछे चाय बागान में उतरी, रानी की आकृति उसे वहीँ खड़ी दिखाई दी जहां उनलोगों ने रास्ते से आते वक्त देखी थी|
रानी की पीठ रैना की ओर थी और वो बिलकुल स्थिर, किसी पुतले के जैसी खड़ी हुई थी|
रैना आहिस्ता से उसके नज़दीक आई|
‘रानी! नींद से जागो रानी’!!
रानी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई|
रैना ने धीरे से अपना हाथ रानी के कंधे पर रखा| रानी के शरीर में प्रतिक्रिया हुई| रानी आहिस्ता से रैना की ओर घूमी| रैना को एकबार फिर अपनी आखों पर यकीन नहीं हो रहा था| रानी की जगह एकबार फिर उसे अपना ही चेहरा नजर आया, यानी जिसका पीछा करते हुए वो वहां तक गई थी वो कोई और नहीं खुद वही थी? रैना असमंजस और पशोपेश में पड़ी हुई खुद को ही अपनी नज़रों के सामने निर्वस्त्र अवस्था में रात के तीन बजे चाय बागान के बीच खड़ा देख रही थी|
किसी ने रैना के कंधे पर हाथ रखा| एक अजीब ठंडा और गीला स्पर्श था वो जिससे रैना के पूरे शरीर में सिहरन दौड़ गई थी| रैना चौंक कर पलटी, दूसरा आश्चर्य उसके सामने खड़ा था|
बारिश में भीगी इशानी उसके सामने खड़ी थी| उसके बाल उसके चेहरे पर गिरे हुए थे जिनके बीच से दो चमकी हुई काली आखें रैना को घूर रही थीं|
रैना ने कुछ कहने के लिए मुंह खोला लेकिन उसके हलक से आवाज़ ना निकली|
इशानी के दोनों हाथ शिकंजों की तरह रैना के कन्धों पर कस गए, इशानी बुरी तरह रैना को झंकझोर रही थी| रैना खुद को आज़ाद कराने की कोशिश कर रही थी लेकिन पीछे से दूसरी रैना के हाथ उसकी गर्दन पर कस गए|
‘रैना! रैना!!’
रैना चौंक कर उठ बैठी, रानी नाश्ते की ट्रे लिए खड़ी थी और उसे आवाज़ दे रही थी| कमरे में आ रही पर्याप्त रौशनी बता रही थी कि सुबह हो चुकी थी| खिड़की से आती धूप रैना के चेहरे पर पड़ी| रात की बारिश के बाद सुबह आसमान खुला और साफ़ था|
‘तुम शायद कोई बुरा सपना देख रही थी’| रानी ने ब्रेकफास्ट ट्रे साइड टेबल पर रखते हुए रैना से कहा|
क्या जो कुछ उसने देखा वो सपना था? लेकिन सपना इतना सजीव कैसे हो सकता है? रैना ने अपने घुमते हुए सर को दोनों हाथों से पकड़ लिया, उसे सिगरेट पीने की तीव्र तलब हो रही थी लेकिन उसकी चेन स्मोकिंग को कण्ट्रोल में रखने के लिए विकास सिगरेट का पैकेट उसे नहीं देता था|
रैना ने सामने दिवार पर टंगी वॉल क्लॉक पर नजर डाली, सुबह के नौ बज रहे थे|
‘जल्दी से फ्रेश होकर ब्रेकफास्ट कर लो और रेडी होकर नीचे आ जाओ| बाकी लोग नाश्ता कर चुके हैं’| रानी ने मुस्कुराते हुए रैना से कहा और अपने पीछे रूम का दरवाज़ा बंद करके बाहर निकल गई|
रैना अपना सर पकड़े जाने कितनी ही देर तक रानी और रात के घटनाक्रम के बारे में सोचती रही| उसने अपने बैग से मोबाइल निकाला और डॉक्टर पोद्दार का नंबर डायल किया|
‘सपने में खुद नग्नावस्था में देखना इस बात की ओर संकेत करता है कि आपके सब-कॉनशियस में कोई भेद, कोई राज़, कोई ऐसा गिल्ट है जिसके दुनिया के सामने आ जाने से आप डरते हैं’| डॉक्टर पोद्दार ने रैना की सारी बात सुनने के बाद कहा|
‘लेकिन वो सपना इतना सजीव था डॉक्टर जैसे वास्तविकता में घटित हुआ हो| और…और मेरे कॉनशियस में कोई गिल्ट नहीं है, फिर मुझे ऐसा अजीब सपना क्यों आया, और उस सपने का कोई ना कोई कनेक्शन इस लड़की रानी से ज़रूर है’|
‘देखो रैना, ड्रीम साइकोलॉजी एक बहुत ही वास्ट सब्जेक्ट है| मैं फिलहाल तुम्हे जो भी बताऊंगा वो कॉमन कॉजेज़ हैं, इसके पर्सनलाइज्ड साइकोएनालिसिस के लिए तुम्हे वापस आने तक प्रतीक्षा करनी होगी| वैसे, जैसा कि मैंने कहा, खुद को पब्लिकली नेकेड एंड अंडर कॉनशियस एंड कांस्टेंट प्रेशर महसूस करना एक कॉमन कॉज है|
हर व्यक्ति अपने जीवन में कभी ना कभी या फिर कई बार खुद को सपने में इस अवस्था में देखता है| इसका सीधा सा अर्थ मटेरियलिस्टिक या इमोशनल लॉस, इमोशनल सफरिंग, गिल्ट एंड ह्युमिलिएशन से है|
अब तुम्हारे केस में ये ट्रिगरिंग फैक्टर क्या है ये या तो तुम्हे खुद फिगर आउट करना होगा या फिर वापस यहाँ लौटने तक वेट करना होगा| और जहां तक सवाल उस लड़की रानी का है, तुमने बताया कि उस लडकी रानी के फीचर्स तुमसे काफी कुछ मिलते-जुलते हैं, इसीलिए तुम्हारे सब-कॉनशियस ने तुम्हारे रूप में उसका एडाप्टेशन कर लिया| ये ड्रीम पैटर्न्स में एक कॉमन ह्यूमन बिहेवियर है, अगर तुमने ध्यान दिया हो तो हम जब भी अपने सपनो को फर्स्ट परसों के रूप में देखते हैं हम उस सपने का हिस्सा तो ज़रूर होते हैं लेकिन कभी अपना खुद का चेहरा नहीं देखते’|
रैना चुपचाप डॉक्टर पोद्दार की बात सुन रही थी लेकिन उसका दिमाग अभी भी किसी उधेड़बुन में लगा हुआ था|
‘खुद को रिलैक्स करो रैना, तुम वहां अपने दिमाग पर पड़ रहे बोझ को कम करने गई हो उसपर और बोझ डालने नहीं| ये सब बेकार की बातें सोचना छोडो एंड एन्जॉय योर वैकेशंस’| डॉक्टर पोद्दार ने रैना को समझाते हुए कहा|
‘थैंक्स डॉक्टर पोद्दार, आय विल ट्राय’| रैना ने औपचारिकतावश कहा और कॉल डिसकनेक्ट कर दी|
रैना जब रेडी होकर नीचे आई तो उसने शशांक और विकास को रानी से फ़्लर्ट करते पाया, जबकि रानी का ध्यान प्रत्युष पर था जोकि उनसे अलग-थलग बैठा अपने लैपटॉप पर पिछले दिन रास्ते में खींची हुई फोटोज़ कैमरे से ट्रान्सफर करने में व्यस्त था|
‘मेरे ख्याल में हमें लॉज जा कर रूम्स का पता करना चाहिए| अगर उस लॉज में रूम नहीं अवेलेबल है तो किसी दूसरे होटल या लॉज में रूम देखना होगा’| रैना नीचे आते हुए बोली|
‘पर क्यों? यहाँ कोई प्रॉब्लम है क्या’? रानी आहत भाव से बोली|
‘ऐसी कोई बात नहीं है रानी, लेकिन हम इस तरह बिन बुलाए मेहमान के जैसे तुम्हारे घर में घुस आए हैं’|
‘रिलैक्स रैना, मुझे तुमलोगों के यहाँ रहने से कोई दिक्कत नहीं है इन्फेक्ट मुझे कंपनी मिल गई है वर्ना अकेले इस कॉटेज में बोर हो जाती’|
रैना सोच में पड़ गई| उसका दिल उस जगह और रानी से जितना जल्दी और जितना दूर हो सके जाने का कर रहा था लेकिन उसका दिमाग वहां रुकना चाहता था, रानी नाम की उस अनसुलझी पहेली को सुलझाना चाहता था जो पिछली रात से उसके दिलोदिमाग में विचारों का ज्वारभाटा लाए हुए थी|
‘इतना मत सोचो, मुन्नार घूमने के लिए तुमलोगों को मुझसे अच्छी गाइड भी नहीं मिलेगी’| रानी मुस्कुराते हुए बोली|
‘यहीं रुकते हैं ना रैना’| शशांक ऐसे टोन में बोला जैसे बच्चा अपनी माँ से किसी खिलौने की फरमाईश कर रहा हो|
‘ठीक है, सबसे पहले कहाँ चल रहे हैं घूमने के लिए’? रैना मुस्कुराते हुए बोली|
प्रत्युष चुपचाप रैना को देख रहा था| वो जानता था कि रैना के दिमाग में कुछ उथल-पुथल चल रही है, वो ये भी जानता था कि वो जो कुछ भी था समय के साथ ही सामने आएगा|
उनका पूरा दिन राजमाला और टी म्यूजियम घूमने में गुज़रा| मौसम बेहद खुशनुमा था और पूरे दिन धूप-छाँव की लुका-छुपी चलती रही| रानी वाकई एक बेहतरीन गाइड थी और ऐसा लगता था जैसे वो मुन्नार के चप्पे-चप्पे से वाकिफ थी| विकास और शशांक तो जैसे रानी पर लट्टू ही हो गए थे| पूरा दिन दोनों रानी के आगे-पीछे करते रहे, शशांक रानी को इम्प्रेस करने के लिए उल-जलूल हरकतें कर रहा था जबकि विकास अपने विडियो कैमरा से रानी के विडियो उतारता रहा| शाम सात बजते-बजते उनका काफिला इको-पॉइंट पहुंचा|
‘ये है मुन्नार का फेमस इको-पॉइंट’| रानी इको पॉइंट की चोटी पर चढ़ते हुए बोली|
‘यहाँ आवाज़ सचमुच इको होती है’? विकास ने पूछा|
‘ट्राय करके देख लो’|
‘रानीssss’ विकास दोनों हथेलियों का कुप्पा मुंह से लगाते हुए जोर से चिल्लाया|
‘रानीsss’…
एक मिनट बीतते-बीतते उसकी आवाज़ इको हुई|
‘यहाँ नीचे एक खूबसूरत झील है, क्या तुमलोग देखना चाहोगे’? रानी ने पूछा|
सभी सहर्ष तैयार हो गए और नीछे झील की तरफ बढ़ गए| रैना सबसे पीछे थी| अचानक वो कुछ सोचकर इको पॉइंट पर ठिठकी| वो वापस चोटी पर पहुंची|
‘रैनाsss’!! रैना जोर से चिल्लाई|
कुछ देर तक सिर्फ हवाओं की सरसराहट उसके कानो से गुजरती रही| उसके बाद उसकी आवाज़ इको होकर वापस आई|
‘इशानीssss’!!!
रात ग्यारह बजते-बजते वे लोग कॉटेज वापस लौटे| डिनर सभी बाहर ही कर चुके थे| प्रत्युष, शशांक और विकास कॉटेज के बाहर बियर पीने बैठ गए, रानी ने भी उन्हें ज्वाइन कर लिया| उनके लाख बोलने पर भी रैना वहां नहीं रुकी, उसके सर में दर्द है और वो सोना चाहती है ये बोलकर रैना जल्दी ही अपने कमरे में चली गई|
रैना के कमरे की खिड़की कॉटेज के बाहरी तरफ खुलती थी| रैना ने खिड़की से झाँक कर देखा तो रानी और तीनो लड़के कॉटेज के बाहरी लॉन में बैठकर बियर पीने और बातें करने में मशगूल थे| रैना चुपचाप अपने रूम से निकली और रानी के रूम की तरफ बढ़ गई|
उस कमरे में एक नजर में देखने में सबकुछ सामान्य था लेकिन पहली बात जो रैना को खटकी वो ये थी कि रानी के मुताबिक़ वो बैंगलोर में जॉब करती थी और वीकेंड पर यहाँ आती थी लेकिन वहां पर कोई भी लगेज बैग मौजूद नहीं था| रूम में सामान इस तरह रखा हुआ था जैसे वहां कोई काफी लम्बे समय से रह रहा हो, फिर भी कमरे में और वहां की अलमारियों में ऐसी गंध थी जैसी किसी जगह के लम्बे समय तक बंद रहने से से होती है| रूम की दीवारों पर कोई भी तस्वीर नहीं थी और कमरे में कोई भी आइना नहीं था| एक इक्कीस-बाईस साल की लडकी के कमरे में कोई भी आइना क्यों नहीं था?
रैना ने रानी सावधानीपूर्वक रानी के सामान की तलाशी लेना शुरू किया| वहां रोज़मर्रा में प्रयोग होने वाली सामान्य वस्तुएं थीं| लेकिन रैना कोई ख़ास वस्तु तलाश रही थी| कुछ ऐसा जो उसे रानी के बारे में जानकारी दे सके| रैना तलाशी लेते समय इस बात का पूरा ध्यान रखे हुए थी कि रानी को इस बात का शक ना हो कि उसके सामान के साथ किसी ने छेड़ छाड़ की है। वहां मौजूद दराजों, कबर्ड, कहीं भी कुछ ऐसा नही मिला जो रैना के काम का हो।
नीचे से रानी और तीनों लड़कों के बात करने की आवाज़ आने लगी, यानी वो लोग बाहर लॉन से कॉटेज के अंदर आ गए थे। रैना लपक कर रूम के दरवाजे पर पहुंची। वहां से स्टेयरकेस और नीचे का ओपन एरिया साफ नजर आ रहा था। रानी की पीठ रैना की तरफ थी और वो शशांक और विकास से बात करने में मशगूल थी। प्रत्युष अपने रूम की तरफ बढ़ रहा था। शशांक रानी के कान में कुछ हौले से कहता और रानी उसपर खिलखिला कर हंसती। उनपर बियर का असर साफ दिखाई दे रहा था।
अचानक रानी पीछे पलटी और अपने कमरे के दरवाजे व चौखट की तरफ देखने लगी, अगर रैना फौरन ही दरवाज़े के पीछे नहीं हो जाती तो निश्चित ही रानी की नज़र उसपर पड़ती। रानी कुछ पल अपने रूम की तरफ ही देखती रही, तभी शशांक ने फिर कुछ कहा और रानी का ध्यान रूम से वापस शशांक पर आ गया। रैना ने चैन की सांस ली। उसने निश्चय किया कि उसे फौरन रूम से निकल जाना चाहिए इससे पहले कि रानी ऊपर की ओर आये। तभी रैना की निगाह रूम में रखी एलमिरा के ऊपर पड़ी। वहां कुछ था, कुछ ऐसा जो रैना की निगाह से बच गया था। रैना लपक कर वहां पहुंची लेकिन उसकी ऊंचाई एलमिरा के ऊपर रखी वस्तु तक पहुंचने के लिए कम थी।
रैना ने इधर उधर देखा, एलमिरा के पास ही टेबल रखा था। उसने लपक कर टेबल उठाया और उसपर चढ़ गई। एलमिरा के ऊपर एक पुराना फोटोफ्रेम और एक पुरानी एलबम थी, दोनो चीजों पर धूल की परत चढ़ी हुई थी। रैना ने दोनों चीजें अपने कब्ज़े मे की और टेबल से उतर गई। लेकिन उस टेबल का एक साइड का पाया बाकी तीन पायों से कदरन छोटा था इसलिए रैना के उतरते। ही उसका बैलेंस ऑफ हुआ। रैना ने खुद को और टेबल को गिरने से तो बच लिया लेकिन उसके पाए से फर्श पर हुई ज़ोरदार आवाज़ को नहीं रोक पाई।
रानी को ऊपर रूम से कुछ खटके की आवाज़ आयी। शशांक पूरी शाम उसपर लाइन मारने के सारे पैंतरे आज़मा चुका था और अब भी उसका पीछा नहीं छोड़ रहा था जबकि रानी सिर्फ औपचारिकतावश उसे झेल रही थी। तीनो लड़कों में सबसे ज़्यादा प्रत्युष ने उसे प्रभावित किया था लेकिन रानी के बार-बार कोशिश करने पर भी प्रत्युष ने उससे बात करने में कोई खास दिलचस्पी नही दिखाई।
‘ओके गाइस, लेट्स कॉल इट ए नाईट। कल सुबह मिलते हैं’। रानी जम्हाई लेते हुए बोली और शशांक या विकास के कुछ कह पाने से पहले ही सीढ़ियों की तरफ बढ़ गई।
रैना का कलेजा मुंह को आ गया। वो रंगे हाथों पकड़ी जाने वाली थी। कमरे से निकलने का सिर्फ एक ही दरवाज़ा था जहां से निकलना मुमकिन नहीं था क्योंकि सीढ़ियों से ऊपर आती रानी उसे साफ देख लेती।
‘रानी एक मिनट सुनना’।
रानी ने पलट कर देखा प्रत्युष अपने कमरे के दरवाजे पर खड़ा था और उसे बुला रहा था।
एक पल तो रानी को यकीन ही नहीं हुआ, दिन भर वो प्रत्युष से बात करने का मौका तलाशती रही और वो उसे नज़रअंदाज़ करता रहा और इस वक्त वो खुद उसे बुला रहा था।
‘मेरे वाशरूम की लाइट काम नहीं कर रही है शायद, क्या एक मिनट देख सकती हो। शायद मुझे स्विच में कंफ्यूजन हो रहा है’। प्रत्युष मुस्कुराते हुए बोला।
‘श्योर! यहां के स्विचेस और वायरिंग सब ब्रिटिश काल के हैं इसलिए अक्सर प्रॉब्लम होती रहती है। चलो में देखती हूँ’। रानी प्रत्युष के कमरे की तरफ बढ़ गयी।
प्रत्युष ने रानी के पीछे अपने कमरे में जाते समय एक निगाह ऊपर रानी के कमरे की चौखट पर डाली और फिर अपने कमरे में चल गया। रानी के कमरे की चौखट के पीछे छुपी रैना समझ गयी कि प्रत्युष ने ये स्टंट उसे बचाने के लिए किया है। रैना फौरन वहां से बाहर निकली और अपने रूम में पहुंच कर की उसने सांस ली।
‘ये साले प्रत्युष की प्रॉब्लम क्या है! दिन भर मेहनत हमने की, लड़की को रूम में लेकर ये साहब चले गए’। शशांक रुआंसी शक्ल बनाते हुए बोला।
‘अबे लाइट नही जल रही, वो चेक करवाने ले गया है’। विकास उसके सर पर तड़ी मारते हुए बोला।
‘ओ भाई! जो आखरी इंग्लिश फ़िल्म मैंने देखी थी ना, उसमे भी हीरो हीरोइन को लाइट ठीक करने के बहाने रूम में ले जाता है। लाइट-वाइट कुछ ना ठीक होती बस दोनो के बीच प्यार की ‘लॉ’ जल जाती है’।
‘एक तो तू ये इंग्लिश फिल्मों के नाम पर जॉनी सिन्स की फिल्में देखना बन्द कर’! विकास उसे घुडकते हुए बोला।
‘अबे ये प्रत्युष ग्रहण है हमारे जीवन का मैं बता रहा हूँ तुझे। ऊपर वाले ने हमारे आस-पास जितनी हॉट बंदियाँ भेजी हैं सब इस कमीने की झोली में ही गिरी हैं। जब इशानी ज़िंदा थी तो वो इसपर मरती थी। हम दोनों जानते हैं कि रैना का भी फर्स्ट क्रश ये पापी प्रत्युष ही है, इसीलिए वो भी हम दोनों को घास नहीं डालती। बड़ी मुश्किल से ऊपर वाले ने हमारे अरमानो की बंजर हो चली धरती पर रानी नाम की ठंडी फुहार भेजी उसे भी ये तूफान उड़ाए ले जा रहा है। मेरे दिल की आह लगेगी इस पापी प्रत्युष को’। शशांक पिनक में बड़बड़ा रहा था।
‘ये तेरे दिल की आह नही तेरे दिमाग की ठरक है साले। तू सोने चल भाई’!! विकास शशांक को घसीटते हुए उसके कमरे की तरफ ले गया।
बाहर आसमान बादलों से घिरा हुआ था। रह-रह कर उठ रही बादलों की गड़गड़ाहट के बीच बरसात शुरू हो गयी। रात के बारह बज चुके थे।
‘स्विच तो ठीक काम कर रहा है। शायद बल्ब फ्यूज़ हुआ है। मैं सुबह इसे चेंज करवा दूंगी ‘ रानी सोचपूर्ण मुद्रा में बोली।
रानी और प्रत्युष उस रूम से लगे हुए वाशरूम में थे जिसमें प्रत्युष रह रहा था।
‘मैंने बेकार ही तुम्हे परेशान किया रानी। रात काफी हो गयी है, तुम सो जाओ। कल इसे में देख लूंगा’। हाथ मे फ़्लैश लाइट लिए हुए प्रत्युष बोला।
रानी ने प्रत्युष की तरफ देखा। ठीक इसी समय आसमान में जोरदार बिजली कौंधी। रानी डरकर प्रत्युष से लिपट गयी। प्रत्युष आवाक था।
‘तुम ठीक तो हो रानी? तुम्हें थंडरिंग नॉइज़ से डर लगता है’? प्रत्युष समझ नहीं पा रहा था कि खुद से बुरी तरह लिपटी हुई रानी को अलग कैसे करे।
‘मुझे ऐसी तूफानी रात से डर लगता है प्रत्युष। ये मुझे कुछ याद दिलाती है’। रानी खुद ही उससे अलग होते हुए बोली।
‘याद दिलाती है? क्या याद दिलाती है? तुम क्या बात कर रही हो’? प्रत्युष ने रानी का चेहरा देखा, ऐसा लग रहा था जैसे उसके चेहरे से पूरा खून निचुड़ गया हो, जैसे उसके चेहरे पर राख पुती हुई हो।
‘कुछ नहीं, रात बहुत हो गयी है। गुड नाईट’। रानी ने पलटते हुए कहा और फौरन ही वहां से बाहर निकल गयी। बाहर निकलते वक्त उसकी नज़र पर्दे के पीछे खड़ी रैना पर नहीं गई जो उसकी और प्रत्युष की बात सुन रही थी| रानी के अपने रूम में जाने के बाद रैना ने प्रत्युष को अपने कमरे में चुपचाप आने का इशारा किया और वो भी वापस अपने कमरे की तरफ बढ़ गई|
रैना अपने सामने बेड पर रखे हुए फ़ोटो एल्बम और फ़ोटो फ्रेम को एकटक देख रही थी। उसे समझ नही आ रहा था कि जो वो देख रही है उसका वो क्या निष्कर्ष निकाले। प्रत्युष से कौन सी बात छुपा रही थी रानी? बरसात की रात और घन गर्जना से इतना डर क्यों लगता है रानी को?
रानी रुपी पहेली के बारे में सोचती हुई रैना अपने मोबाइल फोन को हाथ में लेकर सोचपूर्ण मुद्रा में नचा रही थी, तभी उसके रूम के दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई। रैना के वॉल क्लॉक पर निगाह डाली, रात के पौने एक बजे रहे थे। रैना ने दरवाजा खोला, बाहर प्रत्युष खड़ा हुआ था। वो एक तरफ हट गई।
‘तुम पागल हो गयी हो क्या! कर क्या रही थी तुम रानी के रूम में!! वो तो अच्छा हुआ कि अपने रूम में जाते समय मेरी नज़र तुमपर पड़ गयी’। प्रत्युष धीमी आवाज़ में रैना को डपटते हुए बोला।
‘और अभी मुझे यहां क्यों बुलाया है तुमने? ऐसी कौन सी बात है जो सुबह तक वेट नही कर सकती थी’?
प्रत्युष के सवालों का रैना ने कोई जवाब नही दिया, सिर्फ बेड पर रखी चीजों की तरफ इशारा कर दिया।
प्रत्युष ने बेड पर रख फोटो फ्रेम उठाया, उसमे रानी की एक वृद्ध महिला के साथ फोटोग्राफ थी जोकि कॉटेज के बाहर खींची गई थी।
‘ये तो रानी की फोटोग्राफ है, शायद अपनी नानी के साथ। इसमें क्या प्रॉब्लम है? जब उसकी नानी जीवित रही होंगी ये तबकी पिक होगी’। प्रत्युष कंधे उचकाते हुए बोला।
‘तुम्हारे हिसाब से ये पिक कितनी पुरानी होगी प्रत्युष’? रैना ने सोचपूर्ण मुद्रा में पूछा।
‘जिस बेकद्री से इसे रखा गया है उससे ये ज़्यादा पुरानी नज़र आ रही है वर्ना दो-तीन साल पुरानी पिक होगी ये’। प्रत्युष गौर से फोटोग्राफ को देखते हुए बोला।
‘ज़रा फोटो के राइट हैंड कॉर्नर में नीचे की तरफ देखो, बॉर्डर पर’।
प्रत्युष की निगाह रैना की निर्देशित जगह पर गई। वहां एक इबारत लिखी थी, ‘टू माय लविंग नानी फ्रॉम रानी’। जिसके बगल में रानी के साइन और डेट थी। वहां डेट 6 july 2000 लिखी हुई थी। प्रत्युष को अपनी आँखों पर विश्वास नही हो रहा था।
‘रानी की ऐज 21-22 से ऊपर नहीं है। इस फोटोग्राफ में वो हूबहू वैसी ही नज़र आ रही है जैसे वो अभी दिखती है। अगर इस फोटो में रानी 22 साल की है तो इसकी डेट के हिसाब से उसकी ऐज चालीस के आस-पास होनी चाहिए। क्या रानी कहीं से भी तुमको चालीस साल की दिखाई देती है’! रैना एक सांस में बोल गई।
प्रत्युष समझ नही पा रहा था कि वो क्या बोले।
‘ये डेट गलत होगी। किसी तरीके का मज़ाक’!
‘रानी के हाथ मे मोबाइल फोन देखो। नोकिया 650, ये मोबाइल फोन 1999 में लॉन्च हुआ था’। रैना फोटो में रानी के हाथ मे थमे मोबाइल की तरफ इशारा करते हुए बोली। प्रत्युष के मुंह से बोल ना फूटा। रैना ने प्रत्युष के सामने एलबम खोल दी। एलबम में रानी के बचपन के ब्लैक एंड वाइट फोटोग्राफ्स थे।
‘इन ब्लैक एंड वाइट फोटोग्राफ्स को देखो प्रत्युष। अगर रानी बाइस साल की है तो आज के डेट से उसका बर्थ ईयर 1995 होना चाहिए। जबकि ये फोटोग्राफ्स 1980 के अराउंड के हैं’।
रैना की बात काटने के लिए कोई भी तर्क प्रत्युष को सूझ नही रहा था।
‘एक बात पर और ध्यान देना प्रत्युष, रानी के हिसाब से वो सॉफ्टवेर कंपनी में काम करती है लेकिन उसके पास कोई भी लैपटॉप या मोबाइल फोन नहीं है| ना ही इस कॉटेज में कोई लैंडलाइन है| रानी का बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं है, ना ही बाहरी दुनिया का रानी से कोई संपर्क है’|
‘तुम कहना क्या चाहती हो? रानी…मर चुकी है’?
‘मैं ऐसा कुछ नहीं कहना चाहती प्रत्युष| तुम जानते हो कि मुझे इन चीज़ों पर यकीन नहीं है’| ये बोलते वक्त रैना ने खुद महसूस किया कि उसकी आवाज़ में वो पहले वाला आत्मविश्वास नहीं था|
बाहर फिर ज़ोरदार बिजली कड़की, उसके बाद कुछ पलों का सन्नाटा छ गया| उस सन्नाटे में किसी के पदचापों की आवाज़ उन्हें कमरे के बाहर साफ़ सुनाई दी|
‘तुमने वो आवाज़ सुनी प्रत्युष’?
‘हाँ, बाहर कोई है| मैं देखता हूँ’|
प्रत्युष ने दरवाज़े में झिर्री कर के बाहर झाँका, बाहर का दृश्य देखकर उसकी रीढ़ में सिहरन दौड़ गई| रानी उसे नींद में चलते हुए सीढ़ियों से नीचे उतरती दिखाई दी, उसके जिस्म पर कोई भी कपड़ा नहीं था|
‘यानी कल रात जो मैंने देखा था वो सपना नहीं था|’ रैना अपने आप में बडबडाई|
‘क्या देखा था तुमने कल रात रैना’?
‘छोडो उसे, रानी के पीछे चलो| बाहर घमासान बारिश हो रही है| उसे ऐसी अवस्था में नहीं जाने दे सकते हम’|
रैना और प्रत्युष जबतक सीढ़ियों तक पहुंचे तबतक रानी कॉटेज का दरवाज़ा खोलकर बाहर निकल चुकी थी| दोनों बगुले की तरह कुलांचे भरते हुए सीढ़ियों से नीचे पहुंचे| कॉटेज के बाहर दूर-दूर तक कोई नज़र नहीं आ रहा था| सिर्फ और सिर्फ ज़ोरदार बारिश के थपेड़े थे वहां|
‘इतनी जल्दी कहाँ गायब हो गई वो’?
‘बारिश और अँधेरे के कारण कुछ दिखाई नहीं दे रहा, पता नहीं किस तरफ निकल गई है वो’|
‘कल वो चाय बागान की तरफ गई थी, हमें पहले उधर ही चलना चाहिए’|
‘ठहरो रैना! ऊपर देखो’!!
रैना ने चौंक कर उस तरफ देखा जिधर प्रत्युष इशारा कर रहा था| कॉटेज की पहली मंजिल पर दोनों कमरों की खिडकियों से जलती लाइट की रौशनी नीचे आ रही थी| जिस रूम में रैना रह रही थी वो खाली था जबकि रानी के कमरे में एक साया चलता हुआ नजर आ रहा था|
रैना और प्रत्युष कभी एक-दूसरे का चेहरा देख रहे थे तो कभी उस साए को देख रहे थे जो निश्चित तौर पर किसी लड़की का था| दोनों वापस कॉटेज के अन्दर भागे और जिस गति से सीढ़ियों से नीचे आये थे उसी गति से वापस ऊपर की तरफ दौड़ गए|
रैना और प्रत्युष रानी के कमरे के सामने पहुंचे| दोनों का दिल उनकी पसलियों पर चोट कर रहा था, अपनी उखड़ी हुई साँसों को दोनों व्यवस्थित करने की कोशिश कर रहे थे| प्रत्युष ने हाथ बढ़ा कर दरवाज़े को हल्के से छुआ, दरवाज़े और चौखट के बीच झिर्रि बन गई यानी दरवाज़ा अन्दर से लगा हुआ नहीं था| प्रत्युष ने एक प्रश्नवाचक नजर रैना पर डाली, रैना ने सहमती में सर हिलाया|
प्रत्युष ने दरवाज़े को हल्का सा धक्का दिया, सामने रूम में रानी नज़र आई जोकि नींद में ही चल रही थी| लेकिन उस समय वो निर्वस्त्र नहीं थी बल्कि उसके शरीर पर एक नाईट गाउन था| रैना और प्रत्युष दोनों कमरे में दाखिल हुए|
‘ये नींद में चल रही है’|
‘इसका शरीर, बाल, कपडे सबकुछ सूखा हुआ है, कमरे में भी पानी का कोई नामोनिशान नहीं| ऐसा कैसे हो सकता है? हम दोनों ने ही इसे मूसलाधार बारिश में बिना कपड़ों के जाते देखा था’|
‘मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा और दिल सिर्फ एक ही चीज़ कह रहा है| हमलोगों को जल्द से जल्द यहाँ से निकल जाना चाहिए’| प्रत्युष रैना से बोला, उसके चेहरे पर गंभीर भाव थे|
‘अब तो इस गुत्थी को सुलझाए बिना मैं यहाँ से बिलकुल नहीं जाने वाली| ये रैना एट मिडनाईट का अबतक का सबसे बड़ा केस होगा’| रैना दृण भाव से बोली|
‘रैना आर यू आउट ऑफ़ योर माइंड! ये कोई मज़ाक नहीं है, ना ही जादू-टोना अंधविश्वास का केस है, दिस इज़ ब्लडी सीरियस’| प्रत्युष झुंझला कर बोला|
‘आई नो दैट इट्स ब्लडी सीरियस…सो एम आय| ये लड़की कोई भूत-प्रेत, कोई प्यासी भटकती आत्मा नहीं है प्रत्युष| लुक, आई कैन टच हर’| रैना ने हाथ बढ़ा कर रानी के सीने पर रखा|
‘मैं इसकी हार्ट बीट, इसकी पल्पटेशन महसूस कर सकती हूँ प्रत्युष| इसके जिस्म में हल्की हरारत है, अगर ये लड़की कोई आत्मा होती तो ना इसका दिल धड़कता ना इसके शरीर में हरारत होती| ये मेरे और तुम्हारी तरह ही एक जीती-जागती इंसान है प्रत्युष’|
‘फिर वो एल्बम, फोटोग्राफ्स…और अभी जो कुछ घटित हुआ वो’?
‘वही तो पता लगाना है! अपने डिटेक्टिव स्किल्स यूज़ करो प्रत्युष| इस लड़की और इस कॉटेज के बैकग्राउंड के बारे में जितनी इनफार्मेशन कलेक्ट कर सको करो’|
रैना और प्रत्युष जैसे रानी के कमरे में आये थे वैसे ही वहां से वापस निकल गए| कमरे का दरवाज़ा प्रत्युष ने यथावत बंद कर दिया, दोनों वापस अपने-अपने कमरों में चले गए| कुछ देर बाद रानी के कमरे का दरवाज़ा खुला, नींद में चलती हुई रानी बाहर निकल कर कुछ देर तक रैना के कमरे के दरवाज़े पर खड़ी रही, फिर किसी चाभी लगी गुड़िया की तरह वापस अपने कमरे में चली गई| इन सभी लोगों को इस बात का एहसास भी नहीं था कि एक शख्स ऐसा भी था जो इन सभी गतिविधियों पर नजर रखे हुए था|
जब विकास शशांक को ज़बरदस्ती कमरे में ले गया तो उस वक्त तो बिना हुज्जत किए चला गया लेकिन नींद शशांक की आखों से कोसों दूर थी| उसका दिमाग बगल के कमरे के वॉशरूम पर ही अटका हुआ था जहां रानी और प्रत्युष मौजूद थे| जब उसे यकीन हो गया कि विकास सो चुका है तब शशांक चुपके से अपने कमरे से निकला और प्रत्युष के कमरे की तरफ बढ़ गया| कमरा खाली था, यानी प्रत्युष और रानी वॉशरूम में थे| शशांक का दिल बैठने लगा| प्रत्युष और रानी के बात करने की हल्की आवाज़ उसतक आ रही थी|
वो धीरे-धीरे कमरे के अंदर बढ़ा और वॉशरूम के निकट पहुंचा| क्योंकि शशांक कमरे के अन्दर आकर छुपा था इसलिए उसे इस बात का एहसास नहीं हुआ कि कमरे के बाहरी पर्दे के पीछे रैना भी आकर छुपी है|
शशांक ने पर्दे की ओट लेते हुए वॉशरूम के भीतर झाँका ताकि उसे कोई देख ना सके| ठीक उसी समय आसमान में बिजली कड़की| वॉशरूम के अंदर रानी सहमकर प्रत्युष से लिपट गई| शशांक को ऐसा लगा जैसे उसके सीने पर कोबरा सांप लोट रहा हो| जब रानी वहां से निकली तब भी वो कमरे में पर्दे के पीछे ही छुपा हुआ था| प्रत्युष कमरे में आ गया| प्रत्युष ने बाहरी पर्दे की ओट से निकल कर उसे इशारा करती हुई रैना को देखा जबकि कमरे के अन्दर छुपा हुआ शशांक अपनी जगह से दरवाज़े और वहां खड़ी रैना को नहीं देख सकता था| प्रत्युष ने रैना के वहां से जाते ही दरवाज़ा अन्दर से बंद कर लिया|
अब शशांक फंस गया, या तो प्रत्युष के सामने आकर वो अपनी किरकिरी करवाता या फिर प्रत्युष के सो जाने का वेट करता ताकि उसके सोने के बाद वो वहां से निकल सके| शशांक ने दूसरे ऑप्शन के साथ जाने में बेहतरी समझी| वो पर्दे के पीछे खड़ा प्रत्युष के सोने का इंतज़ार करने लगा साथ ही वो ये भी मना रहा था कि प्रत्युष का ध्यान पर्दे की तरफ ना जाए लेकिन तभी एक और प्रत्याशित घटना घटी| प्रत्युष उठा और दरवाज़ा खोल कर सीढ़ियों से ऊपर की तरफ बढ़ गया।
कुछ देर तक शशांक असमंजस में वहीं खड़ा रहा, उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर ये माजरा क्या चल रहा है| फिर वो भी ऊपर जाने का इरादा कर के प्रत्युष के कमरे से बाहर निकला, लेकिन बाहर निकलते ही उसने कुछ ऐसा देखा जिसकी कल्पना भी उसने सपने में ना की थी। पहली मंजिल पर रानी नींद में चलती हुई अपने कमरे से बाहर निकली, उसकी निर्वस्त्र अवस्था देखकर शशांक भौंचक रह गया। उसके दिमाग ने उस घड़ी काम करने से इनकार कर दिया। शशांक स्टेयरकेस की ओट में छुप गया।
इसी समय रैना के रूम का दरवाजा खुला, शशांक को रैना और प्रत्युष की आवाज़ें सुनाई दीं। रानी तबतक सीढ़ियों से उतर कर कॉटेज के बाहर की तरफ बढ़ चुकी थी, शशांक क्योंकि स्टेयरकेस के पीछे छुपा हुआ था इसलिए रैना और प्रत्युष की निगाह उसपर नहीं पड़ी थी। शशांक जानता था कि प्रत्युष और रैना किसी भी पल कमरे से बाहर निकल सकते हैं। वो चीते की फुर्ती से स्टेयरकेस के पीछे से निकल और बाहर की तरफ लपक लिया। लेकिन दुनिया के सारे आश्चर्य उस दिन शशांक के लिए ही लाइन लगाए बैठे थे। कॉटेज से बाहर निकल कर शशांक ने कुछ ऐसा देखा जिसने उसके रहे सहे होश भी फाख्ता कर दिए।
अगला दिन सामान्य ही गुज़रा, दिन भर बरसात की झड़ी लगी रही| रैना और साथियों का काफिला मुन्नार से लगभग तेरह किलोमीटर दूर मट्टुपेट्टी डैम पहुँचा। डैम से लगे हुए लेक में बारिश की बूंदे गिर कर प्रकृति का एक अत्यंत मधुर संगीत तैयार कर रही थीं। आसमान बादलों से घिरा हुआ था, साफ जाहिर था कि बारिश जल्दी नही थमने वाली थी। बारिश से झील के पीछे की पहाड़ियां यूं नज़र आ रही थीं जैसे वॉटर कलर पेंटिंग में उन्हें वॉश टेक्निक से पेंट कर दिया गया हो। यूं तो मट्टुपेट्टी डैम इस मौसम में सैलानियों से खचाखच भरा रहता है लेकिन उस दिन शायद सुबह से हो रही बरसात का असर था कि सैलानियों की संख्या वहां ना के बराबर थी।
रैना ने गौर किया कि शशांक उस दिन असामान्य रूप से शांत और खुद में ही खोया हुआ था। उस दिन वो रानी से फ़्लर्ट करने की कोशिश भी नहीं कर रहा था। विकास और प्रत्युष ने भी ये बात नोटिस की लेकिन पूछे जाने पर शशांक ने बात इधर उधर कर दी। वो लोग लेक के पास ही बने रेस्टोरेंट पहुंचे।
‘यहां का नॉन-वेज ऑसम है गाइस। तुमलोगों को यहां का चेट्टीनाडू चिकेन करी और मटन बिरयानी ट्राय करनी चाहिए’! रानी चहकते हुए बोली।
सबने रानी के रिकमेंडेशन पर नॉन-वेज आर्डर कर लिया।
रैना लेक की तरफ देख रही थी। उसके नथुने सिगरेट के धुएं की दोनाली चला रहे थे और दिमाग उधेड़बुन में उलझा हुआ था। रानी का अतीत और इशानी का वर्तमान दोनो ही रैना को विचलित किये हुए थे। बारिश की बूंदें लेक की सतह से टकराकर एक कुहासे की परत लेक के ऊपर तैयार कर रही थीं। उस कुहासे के बीच लेक के बीचोंबीच कमर तक पानी मे डूबी हुई एक आकृति खड़ी थी। उसके लम्बे और गीले बाल उसके चेहरे पर आए हुए थे जिससे उसका चेहरा पूरी तरह ढका हुआ था लेकिन फिर भी रैना ने उसे अच्छी तरह पहचान था। वो इशानी थी। उसकी काली आँखें रैना पर ही गड़ी हुई थीं। रैना भी एकटक इशानी को ही देख रही थी। रैना का चेहरा भावहीन था और उसके नाक व मुंह से सिगरेट के धुएं की गाढ़ी लकीर निकल रही थी। लेक के बीचोंबीच खड़ी हुई इशानी धीरे धीरे लेक के अंदर समा गई।
वेटर उनका ऑर्डर सर्व कर गया। विकास और प्रत्युष फोटोग्राफ्स और वीडियो शूट करने में व्यस्त थे। रानी और रैना ने उन्हें काफी आवाज़ें दी।
‘छोड़ो इन लोगों को, खाना खाते हैं यार। ज़ोरों की भूख लगी है और खाना सामने रख ठंडा हो रहा है’। रैना झुंझलाते हुए बोली।
‘हाँ, मेरे भी यही ख्याल है। वैसे भी शशांक तो हमारा साथ देगा ही। क्यों शशांक’? रानी आंख मारते हुए शशांक से बोली। शशांक ने कोई जवाब ना दिया, उसके अधरों पर सिर्फ एक फीकी सी मुस्कान आयी। रैना, रानी और शशांक खाने बैठ गए। रानी ने तीनों की प्लेट्स में खाना सर्व किया।
‘चलो गाइस, टूट पड़ा बहुत ज़ोरों की भूख लगी है’। रानी ने कहा और खाना शुरू कर दिया।
‘क्या बात है शशांक? तुम्हारी तबियत तो ठीक है’? रैना ने शशांक से पूछा।
‘ह…हाँ, सब ठीक है रैना। मैं बिल्कुल ठीक हूँ’। शशांक यूं चौंका जैसे नींद से जागा हो।
रैना को शशांक का व्यवहार कुछ अजीब लग रहा था। उसने देखा कि शशांक बहुत ध्यान से रानी को देख रहा था।
रैना की नजरें भी रानी पर गई। रकनी खाने में तल्लीन थी। उसने मटन रिब्स हाथों में पकड़े हुए थे और अपने दांतों से मांस को हड्डी से यूं नोच रही थी जैसे कोई मांसभक्षी जानवर नोचता है।
‘शायद इसी वाकई बहुत भूख लगी हुई है’। रैना ने रानी की तरफ देखते हुए कहा। ‘चलो शशांक, हम दोनों भी कहना शुरू करते हैं। ये लोग तो पता नहीं कब आएंगे’!
शशांक ने देखा, प्रत्युष और विकास अभी भी कैमरा लेकर शूट करने में तल्लीन थे। उसने रैना का अनुसरण किया।
दोनो ने खाने का एक-एक कौर अपने मुंह मे भरा ही था कि फौरन बाहर थूक दिया।
‘बिरयानी का मटन तो कच्चा है’!! शशांक मुंह का निवाला थूकते हुए बोला।
‘हाँ, ये पूरी तरह पका नहीं है’। रैना भी अपना निवाला थूक चुकी थी। उसका ध्यान रानी पर गया जोकि खाने में तल्लीन थी।
‘रानी! ये खाना मत खाओ, ये मटन अच्छी तरह कुक नहीं हुआ है’। रैना ने रानी को रोकते हैं कहा।
‘क्या बात कर रही हो रैना? मुझे तो ये बिल्कुल परफेक्ट लग रहा है’। रानी ने अपना चेहरा मटन के टुकड़े से ऊपर उठाते हुए कहा। उसकी आँखें किसी शिकारी सिंहनी के मानिन्द चमक रही थीं और उनमें ऐसे भाव थे जिन्हें देखकर रैना और शशांक दोनो ही भौंचक रह गए।
वेटर के खाना बदल कर दोबारा लाने और उनके खाना खत्म करने तक मूसलाधार बारिश हल्की फुहारों में बदल गई थी| रैना प्रत्युष और विकास के साथ घूमने निकल गई, रानी भी उनके साथ हो ली लेकिन शशांक तबियत ना ठीक होने की वजह बता कर लेक के पास ही रुक गया| रैना और साथी पहाड़ी की तरफ निकल गए, हवा काफी तेज़ और ठंडी थी और उसके साथ चेहरे पर पड़ रही पानी की हल्की फुहारें रैना को बहुत ही भली मालूम दे रही थीं| प्रत्युष और विकास अपने-अपने कैमरे से लैंडस्केप शूट करते हुए आगे चल रहे थे| प्रत्युष रैना की पिक लेने के लिए पीछे घूमा|
‘रानी कहाँ गई’?
रैना ने पीछे पलट कर देखा, रानी उसके साथ ही चल रही थी लेकिन अब वो वहां नहीं थी|
‘शायद वो भी वापस लेक के पास चली गई हो’| रैना ने सशंकित भाव से कहा| प्रत्युष ने कंधे उचकाए और विकास के साथ आगे बढ़ गया| रैना उनके पीछे चल तो रही थी लेकिन उसका दिमाग कहीं और था|
‘कितना खूबसूरत है ना ये लेक’|
शशाक चौंक कर पीछे पलटा| रानी उसके पास ही खड़ी हुई मुस्कुरा रही थी, बारिश की बूँदें उसके भीगे हुए बालों की लटों से टपक रही थीं| उसके कपड़े पूरी तरह भीगे हुए थे और उसके जिस्म के हर एक उभार, हर कटाव पर यूं चिपके थे जैसे किसी शिल्पिकार ने उसे संगेमरमर से तराश कर बनाया हो| उस घड़ी रानी बला की खूबसूरत लग रही थी| शशांक चाह कर भी उसपर से अपनी नज़रें नहीं हटा पाया|
‘तुम साईट सीइंग के लिए नहीं गई’|
‘ये जगह मेरे लिए नई नहीं है| अनगिनत बार आ चुकी हूँ यहाँ, इसलिए साईट सीइंग में कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं है’| रानी बोलते हुए शशांक के बिलकुल करीब आकर बैठ गई|
वो दोनों लेक के किनारे पर बैठे थे, उनके आस-पास घनी झाड़ियाँ और पेड़ होने से उनके वहां होने का पता नहीं चल रहा था|
‘अरे! तुम्हे तो बुखार हो रहा है’| रानी ने अपनी हथेली शशांक के गले पर रखी| शशांक के शरीर ने हल्की झुरझुरी ली|
‘तुम्हे यहाँ बारिश में नहीं बैठना चाहिए, तबियत और ज्यादा खराब हो जाएगी’| रानी शशांक की आखों में देखते हुए बोली| उसकी आखों में एक अजीब सा सम्मोहन था| शशांक को ऐसा लग रहा था जैसे वो अपने दिलो-दिमाग पर से अपना काबू खोता जा रहा है| उसने बीती रात की घटना याद करने की कोशिश की, क्या हुआ था कल रात? क्या वो वाकई घटित हुआ था? या फिर उसे जो भी याद है उसकी खुद की कल्पना की उपज है? शशांक सही ढंग से कुछ याद नहीं कर पा रहा था, ना ही अब वो कुछ याद करना चाहता था| वो सिर्फ रानी को याद रखना चाहता था| रानी ने अपने कोमल लेकिन अंगारों जैसे जलते हुए होठ शशांक के होठों पर रख दिए| शशांक चाह कर भी खोद को रोक नहीं पाया| रानी और शशांक एक-दूसरे में गुत्थम-गुत्था हो गए|
रैना जब नीचे लेक के पास पहुंची तब उसे रानी और शशांक कहीं दिखाई ना दिए| रैना शशांक को आवाज़ लगाने ही वाली थी कि पास की झाड़ियों से उसे कुछ आवाज़ आई| रैना बेआवाज़ कदमों से चलते हुए झाड़ियों के पास आई| वहां उसने रानी और शशांक को एक-दूसरे में खो जाने की जद्दोजहद करते पाया|
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रात के लगभग बारह बज रहे थे, पूरे एरिया में पॉवर कट हुआ था| कॉटेज में लिविंग एरिया में चारों कोनो पर पुराने अंग्रेजों के समय के कलर्ड स्टेनग्लास लैम्प्स जल रहे थे| लिविंग रूम के बीचों-बीच रैना, प्रत्युष, विकास, शशांक और रानी बैठे हुए थे|
शशांक और रानी एक-दूसरे से बिलकुल लग कर बैठे थे| डैम से लौटने के बाद से शशांक वापस काफी खुश नजर आ रहा था| उसके और रानी के बीच की नजदीकियां भी काफी बढ़ी हुई थीं| दोनों ऐसे व्यवहार कर रहे थे जैसे हनीमून पर आए नवविवाहित जोड़े करते हैं| रैना को उनके इस व्यवहार से काफी झुंझलाहट हो रही थी लेकिन वो प्रत्यक्षतः अपने मनोभाव प्रकट नहीं कर रही थी| जब उसे लगा कि उनकी हरकतें उसकी बर्दाश्त से बाहर हो रही हैं तो वो वहां से उठकर कॉटेज से बाहर की तरफ चली गई|
उसने विकास के बैग से चुपके से कुछ सिगरेट्स निकाल लिए थे| वो जानती थी कि प्रत्युष के कहने पर विकास उसकी स्मोकिंग को कण्ट्रोल करने की कोशिश कर रहा था इसीलिए वो उसे दिन में एक-दो सिगरेट से ऊपर नहीं देता था| विकास खुद स्मोकिंग नहीं करता था लेकिन रैना के लिए उसके पसंद के ब्रैंड के सिगरेट हमेशा अपने पास रखता था| विकास के अपने प्रति मनोभाव से रैना अनभिज्ञ नहीं थी| वो यह भी जानती थी कि शशांक भी उसके प्रति वही भाव रखता है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में, रानी के उनके जीवन में आगमन के बाद से शशांक का रैना के प्रति मोह भंग हो रहा था|
लेकिन रैना वो मनोभाव जिसके लिए रखती थी उसके दिल में रैना के प्रति वो भाव नहीं थे| प्रत्युष!
कॉलेज के पहले दिन ही प्रत्युष को देखते ही रैना अपना दिल उसे दे बैठी थी, लेकिन प्रत्युष ने अपनी हमसफर के तौर पर रैना को नहीं इशानी को चुना|
जिस दिन इशानी को पूरे कॉलेज के सामने प्रत्युष ने प्रपोज़ किया था उस रात पूरी रात फूट-फूट कर रोई थी रैना|
रैना के दिल में एक टीस उठी| उसने एक सिगरेट सुलगा लिया| वो कॉटेज के बाहरी लॉन पर टहल रही थी, बारिश की बहुत ही हल्की फुहारी अब भी गिर रही थी|
इशानी की मौत के बाद भी रैना प्रत्युष को अपना ना बना सकी| प्रत्युष इशानी की यादों के सहारे ही जीना चाहता था| रैना ने एक गहरा कश खींचा और टहलते हुए लॉन की बाहरी दिवार के समीप आ गई| वापस लौटने के लिए रैना पलटी ही थी कि उसे कॉटेज के बगल में लगे ताड़ के पेड़ के पीछे खड़ी इशानी दिखाई दी| इतने फासले से भी वो इशानी की स्याह काली आखों को खुद पर गड़ी महसूस कर सकती थी| रैना ने इशानी की तरफ से नज़रें फेरने की कोशिश ना की|
‘मैं जानती हूँ कि तुम सिर्फ मेरे दिमाग का वहम हो’| रैना के अधरों पर एक तीखी मुस्कान उभरी| उसने सिगरेट का आखरी कश खींचा और सिगरेट बट नीचे गिरा कर अपने बूट की हील से रौंद दिया|
उसी समय उसे प्रत्युष कॉटेज से बाहर आता दिखाई दिया, उसके चेहरे पर घबराहट के भाव थे| रैना ने उस दिशा में देखा जहां इशानी उसे खड़ी दिखाई दी थी, इशानी वहां नहीं थी|
‘क्या हुआ प्रत्युष? इतने परेशान क्यों नज़र आ रहे हो’?
‘रात में सबके सो जाने के बाद मेरे कमरे में आना रैना| मैंने तुम्हारे कहने के अनुसार रानी के बारे में पता लगाने की कोशिश की थी| मुझे जो जानकारी मिली है उसे देखकर तुम दंग रह जाओगी’|
‘ऐसी क्या जानकारी मिली है तुम्हे प्रत्युष’?
‘अभी नहीं, मेरे कमरे में आना फिर बताऊंगा नहीं दिखाऊंगा भी’| प्रत्युष ने रैना से कहा और वापस अंदर चला गया|
रात के लगभग एक बजे जब रैना निश्चित हो गई कि सब सो चुके हैं तब वो चुपके से अपने कमरे से बाहर निकली और सीढ़ियों से नीचे होती हुई प्रत्युष के कमरे की तरफ बढ़ी| उसे शशांक के कमरे से कराहने की हल्की आवाज़ आई| रैना का माथा ठनका| उसने दरवाज़े के की-होल की झिर्री से अन्दर झाँक कर देखा| कमरे में एक लैम्प की अपर्याप्त रौशनी में भी उसने अपने सामने का नज़ारा भलीभांति देखा| बेड पर रानी और शशांक वही सबकुछ कर रहे थे जो दिन में लेक के किनारे उन्हें करते हुए रैना ने देखा था| रैना प्रत्युष के कमरे की तरफ बढ़ गई| उसने प्रत्युष के कमरे का दरवाज़ा हल्के से ढकेला, दरवाज़ा खुला हुआ था| अन्दर प्रत्युष चिंतित मुद्रा में इधर-उधर टहल रहा था| साफ़ जाहिर था कि वो रैना की ही प्रतीक्षा कर रहा था| प्रत्युष के कमरे में भी एक लैम्प की अपर्याप्त रौशनी थी|
‘क्या बात है प्रत्युष? क्या दिखाना चाहते थे तुम मुझे’? रैना ने पूछा|
उत्तर में प्रत्युष ने अपना लैपटॉप ऑन किया और रैना के सामने घुमा दिया| लैपटॉप स्क्रीन पर एक न्यूज़ आर्टिकल पेज खुला हुआ था|
न्यूज़ की डेट जुलाई 2001 की थी| उस खबर को पढ़कर रैना को अपनी आखों पर यकीन नहीं हो रहा था| वो पागलों की तरह न्यूज़ को बार-बार पढ़ रही थी| उसकी सासें उखड़ रही थी, पूरा जिस्म पसीने से सराबोर हो गया था|
‘मुझे भी पहली बार ये न्यूज़ पढ़कर यकीन नहीं हुआ था रैना| 6 जुलाई 2001 को रानी दर्पणा नाम की लड़की की निर्वस्त्र लाश मुन्नार के चाय बागान से पाई गई थी| लड़की स्लीपवाल्किंग की बिमारी से ग्रस्त थी| पुलिस का अनुमान है कि रात को नींद में चलते हुए लड़की रास्ते पर निकल गई जहां किसी राह गुज़रते ने उसकी स्थिति का फायदा उठाते हुए उसके साथ बलात्कार किया और उसकी लाश चाय बागान में फेंक दी’| प्रत्युष गंभीर भाव से बोला|
रैना बेड पर अपना माथा पकड़े बैठी थी, उसकी कनपट्टीयाँ सायं-सायं कर रही थीं|
‘ये केस कभी भी सॉल्व नहीं हुआ और इसे ठंडे बसते में डालकर भुला दिया गया| लेकिन इस केस के बारे में एक और बात है जो बहुत ही रहस्यमयी है’| प्रत्युष रैना के बगल में बैठता हुआ बोला|
‘कौन सी बात’?
‘पोस्टमॉर्टेम के बाद रानी की लाश उसके घरवालों को अंतिम संस्कार के लिए सुपुर्द करनी थी लेकिन रानी की इकलौती रिश्तेदार, उसकी नानी की मृत्यु एक साल पहले यानी सन 2000 में ही हो चुकी थी’|
‘फिर रानी की लाश का क्या हुआ’?
‘उसकी लाश को कोई लड़का क्लेम कर के ले गया जिसने अपनी पहचान रानी के बॉयफ्रेंड के रूप में दी थी| उसके बाद रानी की लाश या उस रहस्यमयी लड़के का क्या हुआ किसी को नहीं पता’| प्रत्युष बोलकर शांत हुआ|
प्रत्युष की जगह रैना अब रूम में चिंतित भाव से चहलकदमी कर रही थी|
‘अगर असली रानी 2001 में मर चुकी है तो फिर ये लडकी कौन है जो खुद को रानी बता रही है? प्रत्युष! क्या पुलिस रिकॉर्ड में रानी का कोई फाइल फोटो है’?
‘नहीं! ऐसे केसेस में विक्टिम का फाइल फोटो इन्टरनेट पे नहीं डाला जाता रैना| अगर पुलिस रिकॉर्ड में फाइल फोटो होगा भी तो मुन्नार पुलिस स्टेशन के रिकॉर्ड रूम की किस शेल्फ पर कितनी फाइलों के नीचे दबा धूल फांक रहा होगा ये बताना नामुमकिन है’|
‘कुछ तो गड़बड़ है प्रत्युष, ये लड़की कोई फरेबी है, कोई कॉन गर्ल जो रानी बनी हुई है’|
प्रत्युष कुछ पल शांत रहा, जैसे खुद में फैसला नहीं कर पा रहा हो कि जो वो रैना से कहने वाला है उसे वो कहना चाहिए या नहीं| खुद में फैसला कर लेने के बाद प्रत्युष बोला|
‘रैना कुछ और भी है जो मैं तुम्हे दिखाना चाहता हूँ’|
‘क्या’?
प्रत्युष ने लैपटॉप पर एक सेव्ड वेबपेज खोला और लैपटॉप रैना के आगे कर दिया|
‘ये क्या है’? रैना उलझन भरे भाव से बोली|
‘ये एक पैरानॉर्मल वेबसाइट है रैना, इसपर अलग-अलग तरह की परालौकिक शक्तियों का वर्णन है| मैं तुम्हें इस ख़ास परालौकिक शक्ति के बारे में बताना चाहता हूँ’| प्रत्युष ने क्लिक करके एक लिंक खोला|
‘यक्षिणी’?
‘हाँ यक्षिणी| यक्षिणी वो परालौकिक शक्तियां या वो स्त्रियाँ, लडकियां होती हैं जिनकी मृत्यु बेहद दर्दनाक हुई हो| कोई ऐसी लड़की जिसके साथ दुराचार करके उसकी हत्या कर दी गई हो वो एक यक्षिणी का रूप ले सकती है| ये यक्षिणी देखने में बिलकुल आम जीते-जागते इंसानों के जैसी लगती है, ये इंसानों के बीच भी रह सकती है| ये अपना शिकार चुनकर उसपर घात लगाती है और शिकार को अपने रूप जाल में फंसा कर पहले उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाती है फिर उसकी जान ले लेती है’| प्रत्युष एक ही सांस में बोलता चला गया|
‘क्या अनपढ़, गंवारों जैसी बात कर रहे हो प्रत्युष!! तुम! तुम से ये उम्मीद नहीं थी मुझे!! इशानी की मौत को कैसे भूल गए तुम? कैसे भूल गए कि इसी अंधविश्वास ने इशानी की जान ले ली थी और आज तुम इसी अंधविश्वास के दलदल में धंस रहे हो’!! रैना प्रत्युष पर बिफर पड़ी और उसके कुछ कहने से पहले ही रूम से बाहर निकल गई|
अगली सुबह लगभग दस बजे रैना की आँख खुली| आज रानी ब्रेकफास्ट लेकर उसके कमरे में उसे उठाने नहीं आई थी| रैना को नीचे से कुछ आजें सुनाई दी| वो उठकर सीढ़ियों पर पहुंची| विकास और प्रत्युष जोर-जोर से शशांक का नाम पुकार रहे थे और उसके कमरे का दरवाज़ा पीट रहे थे|
‘क्या हुआ’? रैना सीढ़ियों से नीचे आते हुए बोली|
‘शशांक दरवाज़ा नहीं खोल रहा, फोन भी नहीं उठा रहा है’| घबराया हुआ विकास बोला|
‘रानी कहाँ है’? रैना ने पूछा|
‘पता नहीं| हमलोगों ने पूरे कॉटेज में ढूंढ लिया, रानी का भी कोई अता-पता नहीं है’| प्रत्युष गंभीर भाव से बोला|
‘गाइस, दरवाज़ा तोड़ दो’| रैना ने प्रत्युष और विकास को निर्देश दिया जिसका दोनों ने फ़ौरन ही पालन किया| दरवाज़े की चिटकनी इतनी मज़बूत नहीं थी कि विकास और प्रत्युष के सम्मिलित बल के आगे अधिक देर ठहर पाती| दरवाज़ा खुल कर दो भाग में झूल गया, सामने बेड पर शशांक की लाश औंधी पड़ी दिखाई दी|
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इशानी ने अपने जीवन में खुशियों का मुंह बहुत कम ही देखा था| जिस समय उसके पिता की मृत्यु हुई इशानी महज पांच साल की थी| पिता की मृत्यु के बाद फॅमिली बिज़नस खस्ता हाल हो गया| उसके बड़े भाई और माँ ने बिज़नस संभालने की भरसक कोशिश की लेकिन गरीबी उनके दामन से यूं ही चिमटी रही जैसे जूतों से गीला तारकोल चिपक जाए तो नहीं छूटता| उसका बचपन गम और दुश्वारियों की गोद में झूलते हुए कब अचानक ही बीत गया इसका एहसास इशानी को तब हुआ जब उसकी माँ और भाई तथाकथित गुरूजी की शरण में आए|
तंगहाली और भारी कर्ज़ के बोझ से दबे हुए उनका परिवार जब गुरूजी की शरण में पहुंचा तब गुरूजी ने उद्घोषणा की कि वो उस परिवार के तारणहार बनेंगे| केवल और उसकी माँ गुरु जी के चरण छोड़े नहीं छोड़ रहे थे लेकिन गुरूजी की बाज निगाहें दूर खड़ी तेरह वर्षीय इशानी के जिस्म को टटोल रही थीं| ऊपरवाले ने लड़कियों को ये कुदरती नियामत बक्शी है कि वो देखने वाले की नज़रों के पीछे छुपी नियत भांप लेती हैं| इशानी की नज़रों ने भी भांप लिया था कि उसके परिवार की दुश्वारियां मिटाने की कीमत गुरूजी उससे वसूलना चाहता है|
अगले एक साल में गुरूजी के दावे को सच साबित करते हुए केवल का बिज़नस आसमानी ऊंचाइयां छूने लगा, इसमें बड़ा हाथ गुरूजी के उन हाई-प्रोफाइल बिज़नसमेन भक्तों का भी था जिन्होंने केवल की फर्म के साथ गुरूजी के आदेश पर बिज़नस अंडरटेकिंग की अन्यथा सामान्य अवस्था में वो हाईप्रोफाइल क्लाइंट्स ऐसे किसी लो स्टेटस फर्म की ओर झांकते भी नहीं| जो भी हो, चमत्कार तो ये गुरु जी का ही था| केवल और उसकी माँ की श्रद्धा गुरूजी में और अगाध हो गई|
इशानी अब चौदह साल की हो गई थी| एक दिन अचानक ही गुरूजी के शिष्य का कॉल आया और केवल को उसकी माँ-बहन समेत गुरूजी के आश्रम पहुँचने का आदेश हुआ| केवल और उसकी माँ पूरे रास्ते हाय-फाफे करते रहे कि जाने क्या बात हो गई लेकिन इशानी खामोश बैठी थी| उसे अंदेशा था कि उन्हें किस लिए आश्रम बुलाया जा रहा है|
आश्रम पहुंचकर उसके शक की पुष्टि तब हो गई जब गुरूजी ने केवल को समझाते हुए कहा कि उस समय कोई ख़ास लग्न मुहूर्त चल रहा है जिसमे विशिष्ट अनुष्ठान करने से उसके बिज़नस में बड़ा लाभ होगा और उन्हें अकूत धन प्राप्ति होगी| क्योंकि उस घर में इशानी के रूप में भगवती का वास है इसलिए अनुष्ठान में गुरूजी के साथ सिर्फ इशानी बैठेगी| इशानी जानती थी कि उसकी माँ और भाई की आखों पर दौलत की जो चकाचौंध चादर पड़ी है उससे पार उन्हें गुरूजी का भेड़िये सरीखा हैवान रूप नहीं नजर आएगा जो इशानी के नर्म मांस को भभोड़ने के मंसूबे बना रहा है| इशानी उस छोटी उम्र में ही ये समझ चुकी थी कि उसकी मुहाफ़िज़ वो खुद है|
इशानी को एक अकेले कमरे में बिठाया गया| वहां बैठने के लिए एक ही खाट थी, हवन-अनुष्ठान के कमरे में खाट होने का मतलब इशानी अच्छी तरह समझती थी| उस कमरे में ऐसी सामग्री और माहौल था जैसे कोई अनुष्ठान होने वाला हो| कमरे में एक सराउंड साउंड सिस्टम था जिसपर जोर-जोर से मंत्रोच्चारण का ऑडियो प्ले हो रहा था| उस ऑडियो का शोर इतना ज्यादा था कि कमरे के अन्दर ना बाहर की आवाज़ आ सकती थी ना ही कमरे की कोई आवाज़ बाहर जा सकती थी|
कुछ देर बाद गुरूजी अन्दर आया और कमरे का दरवाज़ा उसने अंदर से बंद कर लिया| कमरे की खिड़कियाँ पहले ही बंद थीं| गुरूजी की चाल में उस घड़ी बेहद इत्मीनान था जैसे किसी भेड़िये की चाल में होता है जब वो मेमने को एक बंद कोने में घेर चुका होता है|
‘घबराओ मत बच्ची, हम तुमको भयभीत नहीं करना चाहते…भयमुक्त करना चाहते हैं’| गुरूजी खाट पर इशानी के बिलकुल करीब बैठ गया| स्पीकर के शोर में उसकी आवाज़ इशानी को साफ़ सुनाई दे इसलिए वो इशानी के ऊपर झुक गया|
‘तुम्हारे और तुम्हारे परिवार के सुनहरे भविष्य के द्वार इस बंद कमरे से ही खुलेंगे बच्ची’| बोलते हुए गुरूजी आहिस्ता से अपना हाथ इशानी की जांघ पर रख दिया और हौले से उसकी स्कर्ट ऊपर को सरकाने लगा|
ठीक उसी समय इशानी का शरीर हरकत में आया| अपनी हथेली में छुपाया हुआ पेंसिल शार्प करने वाला स्क्रेपर ब्लेड उसने फुर्ती से गुरूजी के गले में धंसा दिया| दर्द की तीव्र लहर उसके शरीर में उठी और गले से एक बहुत ही महीन खून की धार खिंच गई|
गुरूजी इशानी पर झपटने की कोशिश करता उससे पहले ही उसके दूसरे हाथ में वैसा ही स्क्रेपर ब्लेड चमचमाया जोकि उसने गुरूजी के हाथ की कलाई पर उभरी नसों से लगा दिया| बुढ्ढे के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं, माथे पर पसीना चुहचुहा आया| रगों में कुछ पल पूर्व ही उबाल मारता खून जैसे सर्द होकर जम गया|
‘लिसेन यू सन ऑफ़ ए बिच! मैं तुझ जैसों की जात अच्छी तरह पहचानती हूँ| तू मेरे भाई और माँ को बेवकूफ बना सकता है मुझे नहीं’|
‘नादानी मत कर बच्ची, मुझे मार कर तू बच नहीं पाएगी’|
‘तुझ जैसे घिनौने दरिन्दे को जिंदा नहीं छोड़ना चाहिए, लेकिन मैं अपना भविष्य, अपनी जिंदगी तेरे जैसे नाली के कीड़े को मारकर जेल की दीवारों में सर फोड़ते नहीं बिताना चाहती’|
इशानी के हाथ मे थमे स्क्रेपर ब्लेड्स गुरुजी की गर्दन और कलाई पर लगे हुए थे। वो हिलने की कोशिश भी करता तो ब्लेड अपना काम कर जाते।
‘आज तुझे छोड़ दिया लड़की…लेकिन एकदिन तेरा शिकार करूंगा, बहुत ही इत्मीनान में तबियत से करूंगा, भगा-भगा कर करूँगा और स्वाद ले-ले कर खाऊंगा। उस दिन तुझे बचाने वाला कोई ना होगा’। गुरुजी के भिंचे दांतों से ज़हर से लिसड़े शब्द निकले।
इशानी बाहत मुश्किल से अपने हाथ मे थमे ब्लेड्स को हरकत में लाने से रोक पाई।
उस दिन के बाद गुरुजी ने इशानी पर घात ना लगाई, लेकिन उसकी माँ और भाई पर अपनी कृपादृष्टि बनाए रखी।
दुनिया के हर मर्द के अंदर एक भेड़िया होता है। किसी के अंदर खूंखार, किसी मे शांत तो किसी के अंदर सोया हुआ। गुरुजी के अंदर का भेड़िया जितना हिंसक था उतना ही धैर्यवान भी था।
इशानी जानती थी कि गुरुजी उसके शिकार का मंसूबा दिन-रात बना रहा था और एक नया एक दिन वो हमला ज़रूर करेगा।
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शशांक की मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई थी इस बात की पुष्टि पुलिस के साथ आई फॉरेंसिक टीम ने कर दी। डेड बॉडी पोस्टमोर्टेम के लिए ले जाने को एम्बुलेंस कॉटेज के आगे खड़ी हुई थी| एक हवलदार की निगरानी में दो हॉस्पिटल स्टाफ शशांक की बॉडी रूम से निकाल रहे थे| प्रत्युष और विकास वहां तफ्तीश को पहुंचे इंस्पेक्टर से बात कर रहे थे|
प्रत्युष ने ही फ़ोन कर के पुलिस को बुलाया था और रैना को सख्त हिदायत दी थी कि जबतक वो ना कहे उसे कुछ भी नहीं बोलना है|
रैना का सर दर्द से बुरी तरह फट रहा था| कुछ पल के लिए उसे ऐसा लगा जैसे वो कोई भयानक सपना देख रही है और जब उसकी आँख खुलेगी तो सबकुछ ठीक हो जाएगा| अपनी इस खुशफहमी में ही रैना ने अपनी आखें बंद की, उसे शशांक और रानी नजर आये| एक-दूसरे के नग्न जिस्म से लिपटे हुए, पसीने से तर-बतर, हाँफते हुए दोनों उसे ही घूर रहे थे|
रैना ने चौंक कर आखें खोली, सामने प्रत्युष खड़ा था|
‘वो पुलिस इंस्पेक्टर तुम्हारा बयान लेना चाहता है| उसके बाद तुम यहाँ से जा सकती हो’| प्रत्युष रैना को समझाते हुए बोला|
प्रत्युष ने इस बात का पूरा ध्यान रखा कि रैना को वहां से जल्द से जल्द रवाना कर दिया जाए।
‘मैं तुम दोनों को इस मुसीबत में छोड़ कर नही जाऊंगी’।
‘यहां फॉर्मेलिटीज में टाइम लगेगा रैना। शशांक की बॉडी भी लेनी है पोस्टमार्टम के बाद और…’ बोलते हुए प्रत्युष बीच मे ही रुक गया।
‘और क्या’?
‘हम पुलिस को रानी वाला एंगल नही बता सकते। अभी तो ये एक्सीडेंटल डेथ का केस है, अगर यक्षिणी, भूत-चुड़ैल और पैरानॉर्मल का राग शुरू किया तो लम्बे जाएंगे’। विकास प्रत्युष की बात कम्पलीट करते हुए बोला।
रैना के चेहरे पर जैसे राख पुत गई।
‘फिर क्या करेंगे? पुलिस तो सवाल करेगी ही’।
‘शशांक की डेथ में पुलिस को अबतक किसी भी फाउल-प्ले की गुंजाईश नहीं दिखी है| शशांक रात को हेविली ड्रंक था| पुलिस का यही मानना है कि अल्कोहल और सेक्स की ओवर एक्साइटमेंट में उसका कार्डियक अरेस्ट हो गया’| प्रत्युष गंभीर भाव से बोला|
‘पुलिस ने ये नहीं पूछा कि शशांक किसके साथ फिजिकली इंटिमेट था जब उसकी डेथ हुई’? रैना ने सशंकित भाव से कहा|
प्रत्युष और विकास कुछ पल एक-दूसरे का मुंह देखते रहे|
‘हमने पुलिस को यही बताया है कि कल रात तुम शशांक के साथ थी| इसीलिए वो इंस्पेक्टर तुम्हारा स्टेटमेंट लेगा| तुम्हे बस इतना कहना है कि कल रात तुम दोनों ने साथ में ड्रिंक और सेक्स किया फिर जब तुम्हे लगा कि शशांक सो गया है तब तुम अपने रूम में वापस चली गई’| प्रत्युष झिझकते हुए बोला|
‘व्हाट!! व्हाट नॉनसेंस इज़ दिस! हाऊ कुड यू…’ रैना बुरी तरह भड़क गई|
उसकी आवाज़ पर हवलदार का ध्यान उसकी ओर गया| प्रत्युष और विकास ने रैना को आवाज़ नीचे रखने का इशारा किया|
‘प्लीज ट्राय टू अंडरस्टैंड रैना, देयर इज़ नो अदर वे आउट’| विकास फुसफुसाते हुए बोला|
‘आय डोंट गिव ए डैम’!!
‘ठीक है! तो तुम ही बताओ हम पुलिस से क्या कहें? ये कि एक भटकती आत्मा, एक यक्षिणी हमें यहाँ लाई थी और उसने ही पहले शशांक को रिझाया फिर उसके साथ सेक्स करके उसकी जान ले ली| डू यू इवन रियलाइज़ हाऊ रिडिक्युलस दिस साउंड्स’!! प्रत्युष की आवाज़ धीमी लेकिन सख्त थी|
रैना उसका प्रतिवाद करती उससे पहले ही वो इंस्पेक्टर उसे अपनी तरह आते दिखा| अब वाद-प्रतिवाद का समय नहीं था|
‘मिस रैना प्रधान| कल रात क्या हुआ था’? इंस्पेक्टर की आवाज़ रूखी और शुष्क थी| प्रत्युष और शशांक के दल उनकी पसलियों पर धाड़-धाड़ चोट कर रहे थे| क्या जवाब देने वाली थी रैना?
‘वी वर जस्ट हैविंग सम फन दैट्स ऑल ऑफिसर’! रैना अपने कंधे उचकाते हुए बोली| वो इतनी कैजुअल दिख रही थी और साउंड कर रही थी कि उसकी एक्टिंग देख कर प्रत्युष और विकास के मुंह खुले रह गए|
‘डिटेल! आय नीड योर स्टेटमेंट इन डिटेल’|
‘ओके! वी हैड ए कपल ऑफ़ ड्रिंक्स अराउंड मिड-नाईट, देन वी डिसाइडेड टू हैव सम फन| यू अंडरस्टैंड फन इंस्पेक्टर’? रैना ने अपने भोले से चेहरे पर बेपनाह मासूमियत लाते हुए कहा लेकिन उसकी आखों में ज़माने भर की शरारत थी| ‘फन’ को डिसक्राइब करने के लिए उसने अपने दोनों हाथों से भद्दा इशारा किया| इंस्पेक्टर के छक्के छूट गए, उसे लगा उसके कानो से धुंआ निकलने लगेगा|
‘फ…फिर क्या हुआ’|
‘हम दोनों शशांक के रूम में गए, वी वांटेड टू मेक लव एंड वांटेड इट टू लास्ट लॉन्ग’| रैना अपनी आवाज़ में मादकता लाते हुए बोली| इंस्पेक्टर को अपना गला सूखता महसूस हो रहा था|
‘सो बोथ ऑफ़ अस हैड एफिड्रीन टू मैक्सिमाईज़ द एक्सपीरियंस’| रैना आँख मारते हुए बोली|
‘व्हाट! यू गाइस हैड एफिड्रिन आफ्टर कनज्युमिंग अल्कोहल’!! इंस्पेक्टर के कान खड़े हो गए|
प्रत्युष और विकास कभी एक-दूसरे का तो कभी रैना का मुंह ताक रहे थे|
‘रैना! ये क्या बोल रही….’ विकास ने रैना को टोकने की कोशिश की|
‘बीच में मत बोलना! लडकी को बोलने दो’! इंस्पेक्टर की आवाज़ में धमकी का पुट विकास ने साफ़ महसूस किया था| उसने चुप रहने में ही भलाई समझी|
‘ तुम साले रईस माँ-बाप की बिगड़ी औलादें हो! किसी और की जिंदगी तो दूर तुमलोगों को खुद की जिंदगी की कोई कीमत नहीं है| जरा से मौज-मजे, किक, सेक्सुअल ओवरड्राइव के लिए किसी भी हद तक जा सकते हो तुमलोग’!! इंस्पेक्टर तीनो को झाड़ते हुए बोला
‘सर लेट मी एक्सप्लेन’| प्रत्युष विनती करते हुए बोला|
‘टेक योर एक्सप्लेनेशन एंड शोव इट अप योर ऐस’!|इंस्पेक्टर इस कदर गरजा कि वहां सन्नाटा छा गया|
‘एफिड्रिन एक घातक और इल्लीगल ड्रग है जो एक्सटेसी बनाने में यूज़ होता है…जिसे तुम आजकल के लौंडे-लौंडिया लव पिल्स बोलते हैं| हैवी डोज़ ऑफ़ अल्कोहल, एफिड्रिन और उसके बाद पलंगतोड़ सेक्स| इतना एक्सट्रीम प्रेशर हार्ट बर्दाश्त नहीं कर पाया और लौंडे का कार्डियक अरेस्ट हो गया’| बाकी पोस्टमॉर्टेम की रिपोर्ट से पता चल ही जाएगा कि असली मांजरा क्या है| रिपोर्ट्स आने तक तुमलोग मुन्नार छोड़कर नहीं जाओगे’|
इंस्पेक्टर ने हुक्म दनदनाया और वहां से जाने लगा|
‘सर! ये सबकुछ एक मिसहैपनिंग है| वी विल रियली बी थैंकफुल अगर आप इस मसले को रफा-दफा कर दे| बदले में आपका ख्याल रखने की ज़िम्मेदारी हमारी’| प्रत्युष बगुले की तरह इंस्पेक्टर के पीछे लपका|
प्रत्युष की पेशकश सुनकर इंस्पेक्टर रुक गया| दो क्षण उसने प्रत्युष को यूं देखा जैसे आखों से ही एनकाउंटर कर डालेगा, फिर उसके अधरों पर हल्की सी मुस्कान उभरी|
‘तुम समझदार लगते हो| मेरे साथ आओ’| इंस्पेक्टर प्रत्युष को लेकर एक तरफ चला गया|
‘ये सब क्या है रैना! ये एफिड्रिन का क्या चक्कर है’? विकास रैना के पास आते हुए बोला|
रैना ने अपने जीन्स की जेब से एक छोटी सी दवा की शीशी निकाल कर विकास की तरफ बढाई| विकास ने शीशी उसके हाथ से ले ली| वो एफिड्रिन की जेनेरिक शीशी थी|
‘ये मुझे सुबह शशांक के साइड टेबल पर रखी दिखाई दी थी’| रैना ने कहा|
‘तुमने बताया क्यों नहीं’!
‘मौका नहीं मिला| प्रत्युष पुलिस को पहले ही कॉल कर चुका था| फिर अभी मैं कुछ कहती उससे पहले ही तुमलोगों ने मेरे शशांक के साथ होने का बखेड़ा खड़ा कर दिया’|
‘लेकिन तुम्हे ये एफिड्रिन वाली बात पुलिस को बताने की क्या ज़रूरत थी| अब वो इंस्पेक्टर बेवजह ही हमारे सर पर टंटा करेगा’!
‘वो इसलिए बेवकूफ इंसान क्योंकि तुम दोनों पहले ही ये एनाउंसमेंट कर चुके थे कि रात को मैं शशांक के साथ थी| अब अगर मैं एफिड्रिन के बारे में इंस्पेक्टर को नहीं बताती और पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट में ये ड्रग कॉज ऑफ़ डेथ के रूप में पाई जाती तो सोचो क्या होता’| रैना विकास को लताड़ते हुए बोली|
‘अरे हाँ यार, सोचने वाली बात तो है ये| वैसे भी तुमने एन टाइम पर सिचुएशन संभाल ली| इतनी गज़ब की नेचुरल एक्टिंग की कि एक मिनट को लगा जैसे वाकई रात को शशांक के साथ रानी नहीं तुम थी’|
‘बकवास मत करो’!
‘आय एम सॉरी’!!
‘काम हो गया| ऊपर वाले को थैंक्यू बोलो कि इंस्पेक्टर घूसखोर निकला’| प्रत्युष पसीना पोंछते हुए उनके पास आया| उसके चेहरे पर राहत के भाव थे|
‘मतलब अब यहाँ से निकल सकते हैं’? विकास के चेहरे पर भी आशावादी चमक उभरी|
‘अभी नहीं| पहले पोस्टमॉर्टेम तो हो जाए| शशांक की बॉडी भी लेनी है| उसके घर फोन कर दिया है मैने, कल सुबह तक शशांक के माँ-पापा यहाँ आ जाएंगे| दो दिन तो कम से कम लगेंगे यहाँ से निकलने में’| प्रत्युष सोचपूर्ण ढंग से बोला|
‘गुड! उस डायन को ढूँढने के लिए दो दिन बहुत हैं’| रैना जैसा खुद से ही बात करते हुए बोली|
‘हम कुछ भी कर लें रानी को नहीं ढूंढ सकते| जिसका कोई अस्तित्व नहीं है उसे कैसे ढूंढेंगे…’
‘ओ प्लीज! डोंट यू गाइस स्टार्ट दैट क्रेप अगेन! डायन और यक्षिणी को सेक्सुअल प्लेज़र के लिए एक्सटेसी पिल्स की ज़रूरत कबसे पड़ने लगी’!
‘उसे पिल्स की ज़रूरत अपने लिए नहीं थी रैना, शशांक को मारने के लिए थी’|
‘क्यों? वो तो यक्षिणी थी ना! फिर उसे ड्रग की क्या ज़रूरत, शशांक का खून पी जाती’!
‘तुम समझ नहीं रही हो रैना! उसने इतने स्वाभाविक ढंग से शशांक को मारा है कि हम चाह कर भी किसी के सामने ये प्रूव नहीं कर सकते कि ये किसी पैरानॉर्मल एंटिटी का काम है और यही वो चाहती है’| प्रत्युष रैना को समझाते हुए बोला|
तभी एक हवालदार उनकी तरफ आया, ‘चलो निकलो यहाँ से ये जगह सील होगी’|
रात घिर चुकी थी| रैना, प्रत्युष और विकास पास के ही एक लॉज के ओपन गार्डन में बैठे थे| उस समय बारिश नहीं हो रही थी लेकिन जुलाई के महीने के हिसाब से ठंड काफी थी| आस-पास का एरिया पहाड़ी होने के कारण धुंध वातावरण में शाम से ही घुल रही थी|
तीनो के हाथ में बियर बॉटल थी और रैना के होठों में सिगरेट दबी हुई थी| प्रत्युष लॉन में रखी इजी चेयर पर अधलेटी अवस्था में अपने सर पर हाथ टिकाए बैठा था| उसकी आखें बंद थीं और चेहरे पर काफी थकान थी| विकास के चेहरे पर भी परेशानी के भाव साफ़ थे जबकि रैना का चेहरा बिलकुल शांत और भावहीन था| तीनो में से कोई भी वार्ता करने की कोशिश नहीं कर रहा था|
शशांक की मौत और जिन परिस्थितियों में वो मरा था दोनों ने ही उन तीनो को अंदर तक हिला दिया था| शशांक के पेरेंट्स को उसकी मौत की खबर दे दी गई थी| अगली सुबह वो मुन्नार पहुँचने वाले थे|
रैना ने रानी के विषय में आस-पास पूछ-ताछ की लेकिन कोई सफलता उसके हाथ ना लगी| ऑटोप्सी रिपोर्ट शाम तक आ गई थी जिसमे ये स्थापित हो गया था कि शशांक की मौत अल्कोहल एंड एफिड्रिन के हाई डोज़ में ओवरएक्साइटमेंट के कारण कार्डियक अरेस्ट से हुई थी|
प्रत्युष से तगड़ी घूस लेने के बाद केस के इंचार्ज इंस्पेक्टर ने प्रत्युष को खुद कॉल कर के ये रिपोर्ट बताई|
उन तीनो को पुलिस की तरफ से क्लीन चिट मिल चुकी थी|
‘शशांक हमारे साथ नहीं है ये सोच के भी अजीब लगता है| मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा’| विकास ने चुप्पी तोड़ी, उसका गला भरा हुआ था|
शशांक की मौत जिन परिस्थितियों में हुई थी उसके बाद उन्हें शशांक की मौत का शोक मनाने का भी समय नहीं मिला था| अब जबकि वो तीनो एकांत में स्थिर हुए तब उन्हें शशांक के ना होने की कमी का एहसास सुबह से पहली बार हुआ|
‘उस डायन को पाताल से भी ढूंढ निकालूंगी मैं’| रैना की आवाज़ में शोभ और रोष साफ़ झलक रहे थे|
‘कैसे रैना कैसे!! वो हवा की तरह गायब हो चुकी है| उसका ना कहीं कोई नामोनिशान है ना ही कोई अतापता’| विकास के सब्र का बाँध टूट रहा था|
‘हमारे पास रानी की कोई फोटोग्राफ भी नहीं है जिससे…’ प्रत्युष सोचपूर्ण मुद्रा में कुछ बोल रहा था कि रैना ने उसकी बात बीच में काट दी|
‘फोटोग्राफ है! हमलोग डैम गए थे वहाँ हमलोगों ने फोटो और विडियो शूट किया था, उसमे रानी की फोटोग्राफ भी होगी और विडियो भी’| रैना फटाफट बोली|
‘अरे हाँ! मुझे तो याद ही नहीं रहा| फोटोस और विडियो मेरे DSLR कैमरा में होंगे’| विकास जल्दी से उठते हुए बोला और लॉज के अंदर भागा|
‘प्रत्युष! तुमने अपने फ़ोन से भी कुछ पिक्स ली थी ना, जरा चेक करना’| रैना ने भी अपना मोबाइल फोन निकाला|
‘मेरे फ़ोन में रानी की कोई भी साफ़ पिक नहीं है रैना’| प्रत्युष ने अपने फोन की इमेज गैलरी खोल कर फोन रैना की ओर बढ़ा दिया| वाकई किसी भी पिक में रानी की क्लियर इमेज नहीं थी, यी तो वो आउट ऑफ़ फ्रेम थी या आउट ऑफ़ फोकस| रैना के फ़ोन में भी रानी की पिक नहीं थी जबकि रैना को साफ़-साफ़ याद आ रहा था कि उसने रानी की कुछ स्नैप चोरी-छुपे लिए हैं|
‘ऐसा कैसे हो सकता है! फोटोग्राफ्स अपने-आप कैसे डिलीट हो गईं’? रैना मन ही मन अपने फोन की गैलरी स्क्रॉल करते हुए सोच रही थी तबतक विकास अपना dslr कैमरा ले आया| कैमरा ऑन करते ही तीनो की नज़रें डिस्प्ले-स्क्रीन पर गड़ गईं|
‘ऐसा कैसे हो सकता है’!! कैमरा के लिए गए शॉट्स देखते ही तीनो की आखें अविश्वास से फैल गईं|
‘म..मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा’| विकास तेज़ी से स्नैप्स रिव्यु करते हुए बोला|
कैमरे में ऐसी कई पिक्स थीं जिनमे रानी की उपस्थिति थी, और उनमे रानी ना ही आउट ऑफ़ फोकस थी ना ही आउट ऑफ़ फ्रेम थी| बस जब बात उनके इस घोर आश्चर्य का सबब बनी थी वो ये थी कि पिक्स में रानी की जगह रैना का चेहरा था| हर एक जगह जहां पर रानी को होना चाहिए था वहां रैना थी|
‘शायद तुम दोनों के चेहरे एक-दूसरे से मिलते हैं इसलिए पिक्स में…’ प्रत्युष सोचते हुए बोला, रैना ने उसकी बात बीच में काट दी|
‘ऐसा नहीं हो सकता प्रत्युष| आइडेंटिकल ट्विन्स भी हूबहू एक जैसे नहीं दिखते| उनके फेशियल फीचर्स में बहुत माइन्युट, बहुत बारीक ही सही लेकिन अंतर होते हैं| यहाँ ऐसा कोई अंतर नजर नहीं आ रहा है|
‘इस पिक को देखो, तुम्हे याद है विकास तुमने मेरे कहने पर ही ये पिक ली थी’| रैना एक पिक की ओर इशारा करते हुए बोली|
‘हाँ मुझे याद है| तुमने ही इंसिस्ट किया था शशांक और रानी की कपल फोटो निकालने को लेकिन ये समझ नहीं आ रहा कि इसमें रानी की जगह शशांक के साथ तुम कैसे आ गई’!! विकास उस ठंड में भी अपने माथे का पसीना पोंछते हुए बोला|
‘कुछ समझ नहीं आ रहा, हर उस जगह जहां रानी को होना चाहिए वहां मैं हूँ| ड्रेस वही है जो रानी ने पहनी थी लेकिन चेहरा मेरा है’| रैना सर पकड़ते हुए बोली| उसके होठों से धुंए की पतली लकीर निकल रही थी|
‘फेफड़े कोयला हो जाएंगे तेरे! क्या कर रही है रैना, अब बस भी कर सिगरेट पीना’! प्रत्युष झुंझलाते हुए बोला|
रैना ने उसकी बात पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जैसे उसे प्रत्युष की आवाज़ सुनाई ही ना दे रही हो| ‘विकास, विडियो क्लिप्स चेक करो’!
विकास ने विडियो क्लिप्स प्ले की| हर जगह जहां रानी को होना चाहिए था वहां रैना का चेहरा था|
‘मुझे सिगरेट दे’| रैना की आवाज़ और हाथ काँप रहे थे|
उस घड़ी विकास ने प्रतिवाद करना मुनासिब नहीं समझा और अपनी जेब से सिगरेट का डब्बा निकाल कर रैना की तरफ बढ़ा दिया| रैना ने किसी बाज़ की तरह पूरा डब्बा उसके हाथ से झपट लिया|
‘य..ये क्या कर रही हो’!
‘तू तो सिगरेट पीता नहीं है| ये स्पेशल ब्रांड सिर्फ तू मेरे लिए लाता है और अपने पास इसलिए रखता है ताकि मेरी स्मोकिंग कण्ट्रोल में रहे लेकिन फायदा क्या होता है? मुझे जितनी पीनी है मैं पीती ही हूँ’! रैना बियर का घूँट भरते हुए बोली| विकास और प्रत्युष एक-दूसरे का मुंह देख रहे थे|
‘शशांक की मौत कैसे हुई ये एक राज़ है, ऐसा राज़ जो या तो शशांक जानता था या रानी| शशांक वापस जिंदा होकर हमें अपनी मौत का राज़ बताने आएगा नहीं और रानी ढूंढें नहीं मिल रही’| रैना पैकेट से सिगरेट निकाल कर सुलगा चुकी थी| उसके चेहरे पर गहन चिंता के भाव थे|
‘रानी तो वाकई हमें ढूंढें नहीं मिलेगी| शशांक की मौत का राज़ हमें कोई बता सकता है तो वो शशांक ही है’| प्रत्युष सोचपूर्ण ढंग से यूं बोला जैसे वो खुद से बात कर रहा हो|
विकास और रैना दोनों ही उसका मुंह देख रहे थे|
‘भाई बियर चढ़ गई है क्या’!! विकास ने उसका मुंह ताकते हुए कहा|
‘बिलकुल होश में हूँ और जो कह रहा हूँ वही हमारे पास आखरी रास्ता है आगे बढ़ने का’|
‘तो हम अब हॉस्पिटल के मॉर्ग में जाकर शशांक की डेड बॉडी से पूछताछ करने वाले हैं’? रैना की आवाज़ में उसकी खिजियाहट साफ़ झलक रही थी|
एक क्षण प्रत्युष विकास और रैना का चेहरा देखता रहा जैसे फैसला ना कर पा रहा हो कि जो बात ओ कहना चाहता है उसे किस तरह उनके सामने रखे|
‘हम शशांक की आत्मा को यहाँ बुलाएंगे| सिर्फ वही बता सकती है कि एक्चुअल में क्या हुआ था’|
‘एक्सलेंट आईडिया प्रत्युष! आय वंडर मुझे ये आईडिया क्यों नहीं आया’| रैना उठ कर खड़ी हो गई|
‘शशाक की आत्मा!! प्लीज यहाँ आ जाओ शशांक की आत्मा!! वी मिस यू टेरीब्ली’!! रैना नाटकीय अंदाज़ में अपने हाथ हवा में उठाते हुए बोली| उसपर नशे का सुरूर भी साफ़ झलक रहा था|
‘आय एम नॉट किडिंग रैना’!! प्रत्युष ने आहत भाव से कहा|
‘नीदर एम आय प्रत्युष| मैं वही करने की कोशिश कर रही हूँ जो तुम कह रहे हो| इसके बाद हम क्या करने वाले हैं? काला चोंगा पहन के, गले में माला डाल के, चेहरे पर भस्म पोत कर और हाथों में हड्डियां लेकर वैसे ही तांत्रिक बनने वाले हैं जिनका पर्दाफाश हम अपने वेबचैनल पर करते आए हैं’?
‘तुम गलत समझ रही हो रैना’!
‘तो फिर मुझे समझाओ ना प्रत्युष कि तुम क्यों उस अंधविश्वास के दलदल में धंसते जा रहे हो जिसने इशानी को हमसे छीन लिया! तुम कैसे भूल सकते हो कि इशानी की जान इसी अंधविश्वास के कारण गई थी’|
‘भूला मैं नहीं हूँ रैना, भूल तुम गई हो|’ प्रत्युष के मुंह से अनायास ही निकला|
‘क्या कहा तुमने? क्या भूल गई हूँ मैं’?
‘क…कुछ नहीं’| प्रत्युष ने खुद को संभाला, जैसे उसे एहसास हुआ हो कि वो कुछ ऐसा बोल गया है जो उसे नहीं बोलना चाहिए था|
‘तुम कहना क्या चाहते हो? शशांक से सवाल कैसे करेंगे हम’? विकास ने संशयपूर्ण मुद्रा में पूछा
|
‘मैं आता हूँ अभी’| प्रत्युष वहां से उठा और लॉज के अन्दर बढ़ गया|
विकास और रैना दोनों के ही दिमाग काम नहीं कर रहे थे| आखिर चल क्या रहा था प्रत्युष के मन में?
कुछ देर में प्रत्युष वापस बाहर आया, उसके हाथ में एक काला कपडा था जिसमे लकड़ी का एक आयताकार तख्ता लिपटा हुआ था| उस घड़ी प्रत्युष बेहद संजीदा नज़र आ रहा था| वो वापस अपनी जगह आकर रैना और विकास के बीच बैठ गया|
‘ये क्या है’? रैना ने सशंकित भाव से पूछा|
जवाब देने की जगह प्रत्युष ने कपडे में लिपटा तख्ता खोल कर उनके सामने रख दिया| रैना और विकास आवाक होकर उस लकड़ी के तख्ते को देख रहे थे|
‘औइजा बोर्ड! ये तो औइजा बोर्ड है’| विकास चौंकते हुए बोला|
लकड़ी का जो तख्ता प्रत्युष ने विकास और रैना के बीच रखा था वो वास्तव में एक औइजा बोर्ड था| उस बोर्ड पर ऊपर की तरफ दाहिने कोने में सूर्य का चिन्ह और बाएं कोने में चंद्रमा का चिन्ह बना हुआ था| इन दोनों चिन्हों के बीच ऊपरी पंक्ति में 0 से 9 तक अंक इंग्लिश में उकेरे हुए थे और नीचे की पंक्ति में इंग्लिश के A से लेकर Z तक एल्फाबेट उकेरे हुए थे| सूर्य के कुछ नीचे की तरफ YES उकेरा हुआ था और चन्द्रमा के नीचे की तरफ NO उकेरा हुआ था| नंबर और एल्फाबेट की पंक्तियों के बीच, बोर्ड के बिलकुल मध्य में सिक्के के आकार का वृत्त था जिसपर एक सितारे का चिन्ह उकेरा हुआ था| सबसे ऊपर बोर्ड के मध्य में HELLO और सबसे नीचे बोर्ड के मध्य में GOOD BYE उकेरा हुआ था| बोर्ड देखने में बहुत ही कलात्मक था और बहुत पुराना मालूम दे रहा था| रैना ने बोर्ड उठाकर उसपर अपना हाथ फिराया| ऐसा लग रहा था जैसे बोर्ड की खूबसूरती ने उसे मंत्रमुग्ध कर दिया है| बोर्ड काफी मोटा और भारी-भरकम था| रैना उसपर उकेरे चिन्हों, अंकों और आकृतियों पर हाथ फिराती रही ये उन बाज़ार में और ऑनलाइन मिलने वाले सस्ते औइजा बोर्ड्स जैसा नहीं था जिसका प्रयोग ज्यादातर युवा थ्रिल और टाईमपास करने के लिए करते हैं| ये औइजा बोर्ड उन सबसे अलग था|
‘रोज़वुड! ये रोज़वुड का बना हुआ औइजा बोर्ड है और ये काफ़ी पुराना लग रहा है| ये तुम्हे कहाँ मिला’? रैना ने प्रत्युष से सशंकित भाव से पूछा|
‘रानी के लॉज में| मैं रानी के पास्ट से जुड़ी किसी चीज़ की तलाश में लॉज खंगाल रहा था जिससे उसके रहस्य पर कुछ रौशनी डाली जा सके| वहां मुझे ये बोर्ड मिला|
‘ये आम औइजा बोर्ड्स से काफी अलग है’| रैना बोर्ड पर हाथ फिराते हुए बोली|
‘ये विक्टोरियन एरा का बना हुआ औइजा बोर्ड है रैना| इसे बनाने के लिए कॉफिन यानी ताबूत की लकड़ी का प्रयोग किया गया है| उस समय में ये औइजा बोर्ड्स और इनका प्रयोग वर्जित होता था क्योंकि इन औइजा बोर्ड्स का प्रयोग मृत आत्माओं को बुलाने के लिए डायनो द्वारा किया जाता था| उस समय आम इंसान इसका प्रयोग करना तो दूर इसे अपने घर में भी नहीं रखता था| जैसा कि तुम जानती ही हो कि विक्टोरियन एरा में विचक्राफ्ट यानी जादूटोना एक गंभीर अपराध था और इसमें लिपट डायनों को बीच चौराहों पर खम्भों से बाँध कर जिंदा जला दिया जाता था|’
‘तुम इतना यकीन से कैसे कह सकते हो कि ये बोर्ड विक्टोरियन एरा का है| आजकल कई इंटरनेशनल शॉपिंग साइट्स ऑथेंटिक औइजा बोर्ड्स के नाम पर नकली माल बना कर बेच रही हैं जो देखने में विंटेज लगते हैं लेकिन होते नहीं हैं’| विकास कंधे उचकाते हुए बोला|
‘ये कोकोबोलो रोज़वुड है| ध्यान से देखो इसपर जितनी भी माईन्यूट एनग्रेविंग है वो मशीन से की हुई नहीं है बल्कि हाथ से की हुई है| अब जितने भी औइजा बोर्ड्स बनते हैं वो एन्ग्रेव्ड नहीं प्रिंटेड होते हैं और अगर एनग्रेविंग हुई भी तो वो मशीन से होती है हाथ से इतना महीन काम अब नहीं होता’| प्रत्युष ने चिन्हों, एल्फाबेट्स और नंबर्स की तरफ इशारा किया|
रैना और विकास ने ध्यान से एनग्रेविंग को बहुत ही करीब से, हाथ फिरा के देखा| बारीक एनग्रेविंग वाकई हाथ से की हुई थी|
‘दूसरी बात, इसको पलट कर देखो’|
रैना और विकास ने बोर्ड को पलटा| उसके पीछे निचले दाहिने कोने पर सन 1802 की तारीख खुदी हुई थी|
‘विश्व के सबसे पहले औइजा बोर्ड का पेटेंट सन 1891 में कराया गया था, जबकि इसपर सन 1802 की तारीख है| ये औइजा बोर्ड उस समय बनाया गया था जब ये दुनिया में स्पिरिट कॉलर, स्पीकिंग बोर्ड आदि के फैंसी नामो से नहीं जाना जाता था| इसके अलावा, इस औइजा बोर्ड और आम औइजा बोर्ड्स में जो सबसे बड़ा फर्क है वो है इसकी प्लेनचेट| इस बोर्ड के बीचोंबीच जो सर्किल है ज़रा उसपर हाथ फिराओ…ध्यान से’|
रैना ने सर्किल पर हाथ फिराया, लकड़ी के टेक्सचर के बीच उसे किसी उभरी हुई धातु का एहसास हुआ|
‘ताबूत की कील! इस बोर्ड के मध्य में, ठीक उस जगह पर जहां प्लेनचेट रखा जाता है वहां ताबूत की कील गाड़ी हुई है| और ये रहा इसका प्लेनचेट’| प्रत्युष अपनी जींस की पॉकेट से कुछ निकालते हुए बोला|
उसके हाथ में एक पुराना चांदी का सिक्का था| उस सिक्के के एक तरफ एक देवदूत यानी एंजेल बना हुआ था और दूसरी तरफ क्रिस्चियन क्रॉस|
‘आम प्लेनचेट लकड़ी के दिल के आकार के टुकड़ों से बने होते हैं लेकिन इसका प्लेनचेट शुद्ध चांदी का बना हुआ है’|
‘ऐसा क्यों’?
‘क्योंकि चांदी पवित्र धातु मानी जाती है जो दुष्ट आत्माओं को बाँध सकती है| किसी भी औइजा बोर्ड का सबसे अहम हिस्सा उसका प्लेनचेट होता है|उस प्लेनचेट को माध्यम बना कर कोई भी बुरी आत्मा दूसरी दुनिया से इस दुनिया में प्रवेश कर सकती है लेकिन ताबूत की कील और चांदी का प्लेनचेट बुरी आत्मा का मार्ग बाधित करके उसे ज़बरन इस दुनिया में प्रवेश करने से रोकते हैं’| प्रत्युष चांदी का सिक्का रैना और इकास को दिखाते हुए बोला|
‘तुमने रिसर्च काफी अच्छी की है प्रत्युष लेकिन फिर भी ये है सिर्फ रेव पार्टीज में जॉइंट लगा कर एक्स्ट्रा किक बूस्ट करने वाला एक सिली बोर्ड गेम| जिसे पहले लोगों को डराने और बेवकूफ बनाने के लिए यूज़ किया जाता था अब मज़े के लिए यूज़ किया जाता है’| रैना निर्विकार भाव से बोली| उसने बोर्ड वापस प्रत्युष को थमा दिया|
‘तुम अगर वाकई ये मानती हो तो फिर तुम्हारी इस थ्योरी को परखते हैं| सांच कंगन को आरसी क्या’| प्रत्युष रैना को चैलेंज करते हुए बोला|
‘मैं ऐसे किसी बेहूदा प्रयोग का हिस्सा बन कर शशांक और इशानी की आत्मा को ठेस नहीं पहुंचाना चाहती’| रैना आहत भाव से बोली|
‘तो ठीक है| लेट्स डू इट द वे वी डू इट| रैना एट मिडनाईट का एपिसोड हम अपने ऊपर शूट करते हैं| हम इस औइजा बोर्ड के ज़रिये शशांक की आत्मा को बुलाने की कोशिश करेंगे, या तो तुम्हारा विश्वास जीतेगा या मेरा भ्रम टूटेगा| क्या बोलती हो रैना’?
रैना सोच में पड़ गई|
‘इसकी बात में दम है रैना| प्रत्युष के साथ-साथ मेरा भी दिमाग हिल गया है पिछले कुछ दिनों की घटनाओं से| वाकई ये एक अच्छा प्रयोग होगा’| विकास प्रत्युष का समर्थन करते हुए बोला|
‘ठीक है| लेट्स डू इट’| रैना दृण भाव से बोली|
• • •
उस घड़ी लॉज के कमरे में रैना, प्रत्युष और विकास फर्श पर पालथी मारे बैठे थे| वो तीनो एक घेरा बना कर बैठे थे और बोर्ड उनके बीचों-बीच फर्श पर रखा था| कमरे के हर कोने पर मोटी मोमबत्तियां जल रही थीं| ये मोमबत्तियां प्रत्युष लॉज मैनेजर से लेकर आया था, बरसात में अक्सर पूरे एरिया का पॉवर ट्रिप होने के कारण लॉज में मोटी मोमबत्तियां भारी मात्रा में रखी जाती थीं| कमरे के दो कोनो पर ट्राईपॉड स्टैंड पर कैमरा माउंट किये हुए थे जिनकी रिकॉर्डिंग ऑन थी|
एक मोटी मोमबत्ती औइजा बोर्ड के ऊपर जल रही थी, बोर्ड के बीच के खांचे पर चांदी का सिक्का रखा हुआ था|
‘हम तीनो को एक-दूसरे का हाथ पकड़ कर एक ह्यूमन चेन बनाना होगा| ये हमारी सुरक्षा के लिए ज़रूरी है| जबतक हम एक-दूसरे का हाथ पकडे हुए हैं तबतक बुरी आत्माएं हमारा अहित नहीं कर सकतीं’|
‘एक मिनट! हमें अपना एक हाथ इस प्लेनचेट के ऊपर नहीं रखना होगा’? रैना ने संशय के भाव से पूछा|
‘नहीं| यही बात इसकी ऑथेंटिसिटी प्रूव करेगी| हममे से कोई भी इस प्लेनचेट को हाथ नहीं लगाएगा| हमारे दोनों हाथ ह्यूमन चेन के रूप में बंधे होंगे| आम प्लेनचेट पर प्लेयर्स अपनी उंगलियाँ रखते हैं, प्लेनचेट के हिलने पर ये नहीं कहा जा सकता कि प्लेनचेट किसी आत्मा ने हिलाया है या ऊँगली रखे किसी प्लेयर ने, जबकि यहाँ हम इस प्लेनचेट को स्पर्श ही नहीं कर रहे’| प्रत्युष रैना की तरफ देखते हुए बोला|
‘हुम्म| मुझे तो लगा था कि तुम इतने डेस्पेरेट हो चुके हो कि खुद ही प्लेनचेट को हिलाने लगोगे, आय एम ग्लैड डट आय वाज़ रॉंग’| रैना भावहीन स्वर में बोली|
‘बस ध्यान रखना, चाहे कुछ भी क्यों ना हो जाए, एकदूसरे का हाथ बिलकुल मत छोड़ना’| प्रत्युष गंभीर भाव से बोला|
तीनो ने एक-दूसरे का हाथ पकड़ कर एक घेरा बनाया| तीनो का दिल तेज़ी से धड़क रहा था|
‘दूसरी दुनिया के वासियों| क्या तुम हमें सुन सकते हो’| प्रत्युष की आवाज़ रात के सन्नाटे में कमरे में गूँज उठी| कोई जवाब ना आया|
‘क्या हमारे अलावा कोई और भी है यहाँ’? प्रत्युष ने दुबारा आवाज़ लगाईं| ऐसे ही अनगिनत बार कोशिश करने के बावजूद कोई परिणाम ना निकला|
‘शशांक! क्या तुम यहाँ हो शशांक’? प्रत्युष ने फिर कोशिश की|
‘क्या बेवकूफी है ये! अब तो प्रूव हो गया ना कि पैरानॉर्मल सिर्फ एक कपोल कल्पना है’| रैना झुंझला कर बोली| वो लगभग पिछले एक घंटे से शशांक की आत्मा को बुलाने की प्रक्रिया कर रहे थे, नतीजा सिफर ही था|
रैना ने प्रत्युष और विकास का हाथ छोड़ कर उठने की कोशिश की, दोनों ने ही उसका हाथ भींच कर पकड़ लिया| रैना पर कुछ वैसा ही क्रोध हावी हो रहा था जैसा महाजन सिंह के ऊपर उसे आया था| उसके जबड़े भिंच गए, चेहरे के भाव बिलकुल पत्थर के सामान सख्त|
‘नहीं रैना! चेन मत तोडना’!! विकास आंदोलित भाव से बोला| रैना ने उसकी तरफ देखा, विकास की आखें फटी हुई थीं, वो औइजा बोर्ड की तरफ आवाक होकर देख रहा था| रैना की नज़रों ने भी विकास की नज़रों का अनुसरण किया|
बोर्ड के बीचोंबीच रखा हुआ चांदी का सिक्का अपने स्थान से हिल रहा था| अपने आप! बिना किसी के हिलाए| रैना को अपनी आखों पर विश्वास नहीं हो रहा था| उसके चेहरे पर सैकड़ों भाव एकसाथ उमड़े|
‘कौन हो तुम! कौन है यहाँ हमारे अलावा’!! प्रत्युष चिल्लाया|
प्रत्युत्तर में चांदी का सिक्का अपने स्थान से निकला और पूरे बोर्ड के चारों कोनो पर फिरने लगा जैसे कैरम बोर्ड पर स्ट्राइकर एक कोने से टकराकर दूसरे कोने में घूम रहा हो| रैना एकटक उस चांदी के सिक्के को घूर रही थी|
‘य…ये…क्या हो रहा है’!! विकास की आवाज़ काँप रही थी|
‘शशांक! क्या ये तुम हो? जवाब दो’!! प्रत्युष पुनः चिल्लाया|
मशीनी अंदाज़ में पूरे बोर्ड पर घूमता हुआ सिक्का NO पर आकर थम गया| सिक्के के थमने के साथ ही जैसे उन तीनो की सासें भी थम गईं| चेहरे पर राख पुत गई| हाथ-पाँव में जैसे शक्ति ना रही|
‘क…कौन हो त…तुम…’!! प्रत्युष ने हिम्मत जुटा कर पूछा| उसका मुंह सूख रहा था, ज़बान जैसे तालू से चिपक रही थी|
चांदी का सिक्का आहिस्ता से NO के ऊपर बने हुए चंद्रमा के चिन्ह के ऊपर जा कर स्थिर हो गया| प्रत्युष का चेहरा जर्द पीला पड़ गया|
‘क..क्या हुआ प्रत्युष’! रैना ने पूछा|
‘औइजा बोर्ड पर सूर्य का चिन्ह सदात्माओं का स्थान होता है जबकि चन्द्रमा का चिन्ह किसी उत्पाती, उपद्रवी दुष्टात्मा का स्थान होता है’|
‘य…यानी हमारे साथ यहाँ कोई दुष्टात्मा मौजूद है’| विकास यूं पसीने से तर हो रहा था जैसे किसी ने उसपर घड़ों पानी डाल दिया हो|
‘क…कौन है वो दुष्टात्मा? र…रानी’? रैना हिम्मत जुटाते हुए बोली|
चांदी का सिक्का पहले चन्द्रमा से नीचे वापस NO पर आकर टिका| प्रत्युष, रैना और विकास तीनो एक-दूसरे का मुंह ताकने लगे| सिक्का फिर अपनी जगह से हिल्ला और नीचे की पंक्ति में एल्फाबेट्स पर एक एक करके फिरने लगा| I-S-H-A-A-N-I
ठीक उसी समय तेज़ हवा के झोंके से कमरे की खिड़की का पल्ला खुल गया और तेज़ हवा से बोर्ड के ऊपर जल रही मोमबत्ती बुझ गई| इसके बाद कमरे की बाकी मोमबत्तियां भी बुझ गईं| रैना की चीख निकल गई| अँधेरे में भी उसे फर्श पर हथेलियों और घुटनों के बल चल कर अपनी ओर बढती इशानी साफ़ नजर आ रही थी| रैना ने प्रत्युष और विकास का हाथ झटक दिया और अपनी जगह से उठ गई|
‘नहीं!! चेन मत तोड़ो’!! प्रत्युष चिल्लाया|
रैना ने स्विचबोर्ड की ओर दौड़ लगाई, इशानी उसके पीछे आ रही थी| कमरे में घुप्प अँधेरा था, फिर भी वो इशानी की सरसराहट महसूस कर सकती थी| रैना ने लाइट्स ऑन की| पूरा कमरा रौशनी से नहा गया| प्रत्युष और विकास अपनी जगह बैठे बुरी तरह हांफ रहे थे| कमरे में और कोई ना था| बोर्ड पर सिक्का GOOD BYE पर रखा हुआ था|
‘त…तुम दोनों ने देखा! तुम दोनों ने इ…इशानी को देखा’? रैना की आवाज़ काँप रही थी| प्रत्युष और विकास आवाक से उसे ही एकटक ताक रहे थे|
‘अँधेरा होने के बाद कुछ भी दिखाई नहीं दिया| स…सिर्फ तुम्हारे चीखने की आवाज़ आ रही थी’|
‘नहीं दिखी! इस बार भी मेरे अलावा इशानी किसी को नजर नहीं आई| अगर वो वाकई थी तो ऐसा क्यों हुआ’| रैना अपने आप से ही बडबडा रही थी|
‘ये तुमने क्या किया रैना! तुम्हे चेन नहीं तोडनी चाहिए थी’| विकास रुआंसे अंदाज़ में बोला|
‘फक यू…फक…योर चेन’!! रैना गुस्से में बिफरती हुई कैमरे की तरफ लपकी| उसने कैमरे की रिकॉर्डिंग प्ले-बैक की|
दोनों ही कैमरों में उनके हाथ पकड़ कर आत्मा को बुलाने तक की रिकॉर्डिंग हुई थी लेकिन जिस समय सिक्का हिला था उस समय पर दोनों ही कैमरों की रिकॉर्डिंग बंद हो गई थी|
‘यहाँ जो कुछ भी हुआ तुम उसे नकार नहीं सकती रैना’| प्रत्युष अपने स्थान से उठा|
‘मैं नहीं जानती कि तुमने ये कैसे किया प्रत्युष, लेकिन मैं ये साबित कर के रहूंगी कि इसके पीछे तुम्हारा हाथ है’| रैना ने कैमरा प्रत्युष की तरफ उछाला और आंधी-तूफ़ान की तरह कमरे से बाहर निकल गई|
‘अ…अब क्या करें’! विकास ने मरी हुई आवाज़ में पूछा|
‘रैना ने चेन तोड़कर ठीक नहीं किया| इससे बुरी आत्मा को हमारी दुनिया में प्रवेश करने का रास्ता मिल जाएगा’| प्रत्युष चिंतित भाव से बोला|
‘ये इशानी बुरी आत्मा कैसे बन गई’?
‘ज़रूरी नहीं कि जो खुद को इशानी बता रही है वो वाकई इशानी ही हो’|
‘फिर हम क्या करेंगे? शशांक के बाद हमारा भी नम्बर लगेगा क्या’! विकास अपना सर पकड़ते हुए बोला|
‘कुछ नहीं होगा|…कुछ भी नहीं होगा’| प्रत्युष का चेहरा भावहीन था लेकिन उसके दिलोदिमाग में भयानक उथल-पुथल मची हुई थी|
रात के लगभग तीन बज रहे थे| प्रत्युष और विकास लॉज में एक ही रूम शेयर कर रहे थे, वही रूम जिसमे उन्होंने कुछ घंटों पहले आत्मा बुलाने की कोशिश की थी| रैना उनके बगल वाले कमरे में थी| प्रत्युष और विकास दोनों ने ही आखों-आखों में रात काट दी थी, नींद उनकी आखों से कोसों दूर थी|
प्रत्युष उस रात ख़ासा विचलित नज़र आ रहा था| इतना विचलित वो शशांक की लाश देखकर भी नहीं हुआ था जितना उस वक्त नज़र आ रहा था| उसके दिलोदिमाग में सिर्फ एक ही नाम गूँज रहा था…इशानी| उसकी इशानी!!
कितनी बेइन्तेहा मोहब्बत करता था वो इशानी से| कॉलेज में पहली बार इशानी को देखते ही उसके अन्दर की सच्चाई और मासूमियत को महसूस कर लिया था प्रत्युष ने और उसके अन्दर दबे हुए बेहिसाब दर्द को भी|
ज्यों-ज्यों प्रत्युष इशाई के करीब आता गया उसके अतीत, उसकी जिंदगी की विषमताओं से रूबरू होता गया, इशानी के लिए और जीवन की विषम से विषम परिस्थितियों से लड़ने के उसके जज्बे के लिए प्रत्युष के मन में प्यार के साथ-साथ इज्ज़त भी बढती चली गई| इशानी जैसी स्ट्रॉगं लड़की मानसिक रूप से इस कदर कैसे टूट सकती है ये सवाल इशानी की मौत के बाद लम्बे समय तक प्रत्युष को सालता रहा लेकिन प्रत्युष आसानी से हार मानने वालों में नहीं था, उसे इशानी की मौत का सच जानना ही था…और उसका सिर्फ एक ही जरिया थी, रैना!
उस वक्त प्रत्युष को जो बात सबसे ज्यादा परेशान कर रही थी वो औइजा बोर्ड वाली घटना थी, जो कुछ भी थोड़ी देर पहले उस रूम में घटित हुई थी| क्या वाकई इशानी वहां आई थी? नहीं, इशानी की आत्मा बुरी नहीं हो सकती थी| प्रत्युष के ज़हन में दूसरा सवाल कौंधा…क्या वाकई उस कमरे में कोई आत्मा थी? अगर नहीं तो फिर बिना हाथ लगाए प्लेनचेट कैसे हिला?
‘पानी खत्म हो गया है’| विकास मरी हुई आवाज़ में बोला|
‘लॉज के रिसेप्शन के पास ही वॉटर कूलर है, वहां से भर ला’| प्रत्युष बोला|
विकास अपनी जगह से उठा, फिर वापस बैठ गया|
‘रहने दो| प्यास मर गई है’|
‘साले प्यास नहीं, डर से तेरी नानी मर गई है! कल तक हमलोग दुनिया को बताते फिरते थे कि भूत-प्रेत जादू-टोना सब अंधविश्वास है आज खुद हमारी ही लगी पड़ी है’!! प्रत्युष झुंझला कर बोला|
‘ये सब तेरी गलती है! तू ही लाया था वो मनहूस औइजा बोर्ड’!!
प्रत्युष चुप हो गया| उसे वाकई समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या बोले| ख़ैर इस बहस ने विकास के अन्दर के पौरुष को ललकार दिया था| उसने खाली बोतल उठाई और दनदनाते हुए कमरे से बाहर निकल गया|
पूरा गलियारा खाली था| वहां के सन्नाटे को सिर्फ विकास के पदचापों की आवाज़ भंग कर रही थी| विकास को अपना कलेजा मुंह को आता प्रतीत हुआ| फिर भी हिम्मत करके वो वाटर कूलर तक पहुंचा| रिसेप्शन भी खाली पड़ा था|
विकास पानी भर ही रहा था कि उसे किसी के आने की आहट मिली| उसके हाथ-पैर कांपने लगे|
उसे पलट कर देखा तो लॉज की बाहरी एंट्रेंस पर उसे एक साया नज़र आया| विकास लपककर रिसेप्शन काउंटर के पीछे छुप गया|
वो साया जो किसी लड़की का था धीरे-धीरे करीब आ रहा था| वो रैना थी|
‘रैना!! रैना इतनी रात गए इस अनजान जगह पर कहाँ गई थी और क्यों’? विकास का दिमाग काम नहीं कर रहा था|
उसने देखा कि रैना अपने आप में ही खोई हुई कुछ यूं चली जा रही थी जैसे नींद में चल रही हो|…रानी की तरह! विकास के जिस्म ने ये ख्याल आते ही एक ज़बरदस्त झुरझुरी ली|
रैना उसी तरह मशीनी चाल से चलते हुए अपने कमरे में प्रवेश कर गई|
विकास भी असमंजस में चलता हुआ कमरे में लौट आया| उसे समझ नहीं आ रहा था कि इस बाबत वो प्रत्युष को बताये या नहीं| उन दोनों की हिम्मत नहीं हुई कि उस औइजा बोर्ड को हाथ भी लगाए| बोर्ड कमरे में फर्श पर यथावत पड़ा हुआ था, लेकिन सुबह वो बोर्ड अपने स्थान से गायब हो गया| लाख ढूँढने पर भी उन्हें वो बोर्ड कहीं ना मिला|
प्रत्युष और विकास के कमरे से वापस आने के बाद रैना के दिमाग में ज़बरदस्त खलबली मची हुई थी| उसके मस्तिष्क को जाती सभी नसें तनी हुई थीं और उसे ऐसा लग रहा था जैसे किसी भी पल सरदर्द से उसका सर तरबूज की तरह फट जाएगा| शशांक की मौत और राई का यूं गायब हो जाना उसे पहले ही बुरी तरह विचलित किये हुए था उसपर से आज की औइजा बोर्ड वाली घटना! उसे प्रत्युष पर बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा था| उतना ही गुस्सा जितना उसे कॉलेज में तब आया था जब उसे पता चला था कि प्रत्युष इशानी को चाहता है|
प्रत्युष रैना को पहली नज़र में ही भा गया था| प्रत्युष के अन्दर एक ख़ास स्पार्क था जो रैना को बाकी किसी लड़के में नज़र नहीं आता था, ये महज़ जिस्मानी आकर्षण नहीं था बल्कि आत्मीय था| रैना को यकीन था कि वो और प्रत्युष काफी कुछ एक जैसे हैं और बहुत ही आदर्श जीवनसाथी सिद्ध होंगे|
अथाह पैसे और रुतबे में पली-बढ़ी रैना प्रधान को जीवन में इससे पहले कभी सच्चे दोस्तों का साथ नहीं मिला था| हाई सोसाइटी के स्नॉब और शो-ऑफ लाइफस्टाइल से अलग रैना को सुकून इशानी और प्रत्युष जैसे दोस्तों के साथ में मिला| इशानी, प्रत्युष, विकास और शशांक के साथ वो जितनी खुश थी उस ख़ुशी का एहसास उसने अपनी तमाम उम्र में कभी नहीं किया था| लेकिन उसकी इस ख़ुशी की उम्र ज्यादा लम्बी नहीं थी|
इशानी और प्रत्युष एक-दूसरे को पसंद करते हैं ये बात ले पाना रैना के लिए आसान नहीं था| रैना और इशानी में इस बात को लेकर आए दिन झगडे होने लगे| शुरुआत हल्की-फुलकी नोक-झोंक और बहस से हुई लेकिन बात बढ़ते-बढ़ते काफी सीरियस झगडे तक पहुँच गई थी|
रैना ने बेड पर लेटकर अपनी आखें बंद कर ली, औइजा बोर्ड वाली घटना और औइजा बोर्ड पर तेज़ी से सरकते प्लेनचेट का दृश्य उसके ज़हन में उभरने लगा| उसने फ़ौरन ही आखें खोल लीं और बेड पर बैठ गई और अपनी उखड़ी हुई साँसों को व्यवस्थित करने की कोशिश करने लगी|
रैना की आखें सामनी की तरफ उठी और जडवत हो गईं| उसके बेड के ठीक सामने इशानी खड़ी हुई थी, वही सफ़ेद झीनी सी ड्रेस पहने हुए जिसके पार से उसके जिस्म की खून निचुड़ी हुई, सफ़ेद पड़ चुकी खाल दिखाई दे रही थी| उसके लम्बे बाल लटों की सूरत में उसके चेहरे के आगे झूल रहे थे फिरभी उन रात के अँधेरे से भी ज्यादा काली लटों के बीच से अंगारों की तरह दहकती आखें रैना को साफ़ नज़र आ रही थीं जो उसे ही घूर रही थीं|
रैना के सर की नसों में दर्द की एक तीव्र लहर दौड़ गई, उसका पूरा शरीर एंठने लगा| रैना के बेडसाइड टेबल पर रखी पानी की बौटल और कांच का ग्लास थर्राने लगे| धीरे-धीरे बेडसाइड टेबल, जिस बेड पर रैना बैठी थी वो और उस कमरे में मौजूद हर एक वस्तु यूं थर्राने लगी जैसे वहां तीव्र भूकम्प आ रहा हो|
छनाक की तीव्र कर्कश आवाज़ के साथ कांच का ग्लास नीचे फर्श पर गिरकर टूट गया| रैना ने नज़रें घुमाई, इशानी वहां नहीं थी| सबकुछ सामान्य हो चुका था| रैना के चेहरे पर दृण भाव उभरे| वो बेड से उठी और रूम का दरवाज़ा खोल कर बाहर निकली| लॉज में चारों तरफ मरघट सा सन्नाटा पसरा हुआ था| बगल के प्रत्युष और विकास के कमरे से भी कोई आवाज़ नहीं आ रही थी, रैना चुपचाप लॉज से निकल कर रात के अन्धकार में रानी के कॉटेज की तरफ बढ़ गई|
रानी के कॉटेज में मरघट सा सन्नाटा पसरा हुआ था| मेन गेट पर पुलिस द्वारा लगाईं गई मोटी ज़ंजीर और ताला लटक रहा था| रैना ने बगल की बाड़े वाले बाउंड्री फांद कर कॉटेज के आगे के गार्डन में प्रवेश किया| सामने कॉटेज के फ्रंट डोर पर भी पुलिस का लगाया हुआ सीलबंद ताला लटक रहा था| रैना कुछ क्षण वहीं खड़ी रही फिर कॉटेज के बगल में मौजूद झंखाड़ की तरफ बढ़ गई| रैना देखते ही देखते उस झंखाड़ में कहीं गायब हो गई|
लगभग डेढ़ घंटे बाद रैना वहां से निकली और वापस लॉज की तरफ बढ़ गई|
अगली सुबह एक और घटना घटी, हर पोर्न वेबसाइट पर एक विडियो क्लिप वायरल हो चुका था| ‘रैना एम एम एस’| किसी ने रानी और शशांक के अन्तरंग क्षणों की चोरी से विडियो बना ली थी| अँधेरे और चेहरे की समानता के कारण ये कहना मुश्किल था कि उस विडियो में रानी है या रैना| पूरी दुनिया के लिए वो रैना ही थी|
दुनिया के सामने एक ही सच आया| रैना और शशांक ने उस रात जम कर नशा किया फिर अपना सेक्स विडियो बनाया जोकि किसी तरह लीक हो गया| ड्रग्स और अल्कोहल के नशे और सेक्स के उन्माद ने शशांक की जान ले ली|
रैना एम एम एस ने रैना को कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा| उस विडियो में वो नहीं रानी है उसकी ये दलील कोई सुनने या मानने वाला नहीं था|
रैना एट मिडनाईट वेबसाईट शट-डाउन हो गई| रैना ने खुद को एकबार फिर सबसे कटऑफ कर लिया| प्रत्युष और विकास से भी|
वो अंडरग्राउंड होकर एक गुमनाम जिंदगी बिताने लगी| रैना जानती थी कि इस दुनिया को हमेशा नए तमाशे की दरकार रहती है, पुराने खेल जल्द ही ज़माना अपने ज़हन से मिटा देता है| एक दिन लोग रैना एम एम एस को भी भूल जाएँगे…उसके बाद रैना एट मिडनाईट अपना आखरी और फाइनल एपिसोड पेश करेगा|
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पिछले लगभग दो महीनो से रैना दुनिया की नज़रों से दूर थी| प्रत्युष और विकास ने उससे मिलने और बात करने की अनगिनत कोशिशें की लेकिन सब नाकाम हुई, यहाँ तक कि डॉक्टर पोद्दार ने भी अपनी तरफ से रैना से बात करने के भरसक प्रयास किये लेकिन कोई नतीजा ना निकला|
इस पूरे समय रैना ने अपने घर, अपने रूम, अपने आप से जुड़ी एक-एक चीज़ को उथल-पुथल कर डाला| वो कुछ ढूंढ रही थी| वो खुद भी नहीं जानती थी कि वो क्या ढूंढ रही है और वो चीज़ उसे कहाँ मिलेगी| अपनी गुजरी हुई जिंदगी, अपनी हर एक चीज़ जो उसके पास मौजूद थी, अपनी हर छोटी-बड़ी बात का लेखा-जोखा रैना दिन-रात डायरी में लिखती रहती थी| उसके पिता को यकीन हो गया था कि रैना अपना दिमागी संतुलन पूरी तरह खो चुकी है|
मिस्टर प्रधान ने रैना से बात करने की, उसका किसी बड़े साइकायट्रिस्ट से इलाज करवाने की बहुतेरी कोशिशें की लेकिन रैना किसी के लिए भी राज़ी नहीं हुई| थक हार कर मिस्टर प्रधान ने भी हथियार डाल दिए और अपनी बेटी को समय और उसके भाग्य पर छोड़ दिया| लेकिन रैना ने हथियार नहीं डाले थे, अपने जीवन का हर एक दिन, हर एक पल वो जैसे उस गुत्थी को सुलझाने के मंसूबे बनाने में लगा रही थी जिसने उसकी जिंदगी का रुख बदल दिया था|
Date: 30th September 2017
नवमी का दिन था| हर कोई दुर्गा पूजा की तैयारियों में लगा हुआ था| पूरा राजनगर शहर दुल्हन की तरह सजा था| लोग सड़कों पर निकल कर उल्लास कर रहे थे लेकिन रैना अपने कमरे में कैद थी| अपनी मुहीम पर बिना रुके, बिना थके जुटी हुई|
संसार में कुछ भी बेवजह नहीं होता| एक छोटी घटना, अनगिनत बड़ी घटनाओं को जन्म देती है| इशानी की मौत वो घटना थी जिसने इन सभी घटनाओं को जन्म दिया था| लेकिन वो कौन सी घटना थी जो इशानी की मौत की कारक बनी|
‘क्या-क्या-क्या’!! आखिर क्या छूट गया है मुझसे! ऐसी कौन सी बात है जो मुझे याद नहीं आ रही, ऐसा कौन सा राज़ है जिसतक मैं पहुँच नहीं पा रही हूँ’!! रैना पागलों की भाँती चिल्लाई|
गुस्से का दौरा पड़ रहा था उसे| उसने कमरे में रखा सामान उठा कर फेंकना और तहस-नहस करना शुरू किया|
अपना कीमती मैकबुक-प्रो उसने एक झटके में दिवार से दे मारा| लैपटॉप पुर्जा-पुर्जा होकर बिखर गया|
रैना का पूरा वजूद गुस्से से काँप रहा था उसका सर दर्द करने लगा| वो एक कुर्सी पर बैठ गई और छत को निहारने लगी| उसके दिमाग की नसें तनने लगीं, पूरा जिस्म एंठने लगा| उसके कमरे में रखी हुई एक-एक वस्तु वैसे ही थर्राने लगी जैसे लॉज में हुआ था|
रैना ने दोनों हाथों से अपना सर पकड़ लिया, दर्द की अधिकता से वो कुर्सी से फर्श पर जा गिरी| उसने अपने दोनों घुटने अपने पेट में सिकोड़ लिए, उसके आस-पास की हर एक चीज़ यूं काँप रही थी जैसे भूकम्प आ गया हो|
फर्श से लेकर छत तक सबकुछ भूकम्प के कम्पन से थर्राने लगा, थर्राहट इतनी तीव्र थी जिससे छत की फॉल्स सीलिंग का एक हिस्सा खुल कर नीचे लटक गया|
छत की फॉल्स सीलिंग!!
रैना ने पूरा कमरा तलाशा था लेकिन उसने छत की फॉल्स सीलिंग नहीं तलाशी! रैना को याद आया कि उसे जब भी अपनी कोई चीज़ घर वालों से छुपानी होती थी तो वो उसे अपने रूम की फॉल्स सीलिंग में छुपाती थी पर जाने कैसे रैना ये बात भूल गई थी| उसके आस-पास की थरथराहट और कम्पन धीरे-धीरे शांत हो गया|
उसने स्टडी टेबल खींच कर फॉल्स सीलिंग के नीचे एक ख़ास स्थान पर लगाईं और उसपर चढ़ गई| रैना ने फॉल्स सीलिंग का लटकता हुआ चौकोर खाना खींचा तो वो आसानी से अपनी जगह से अलग हो गया| उसने अपना हाथ खाली जगह पर डाला और इधर-उधर कुछ टटोलने लगी|
उसका हाथ किसी चीज़ पर पड़ा|
वहां एक पोलिथीन रैपर में लिपटी हुई कोई चीज़ थी| रैना ने रैपर बाहर निकाला और उसपर से धूल झाडी| आखिर क्या था उस रैपर में?
रैना को कुछ भी याद नहीं आ रहा था कि उसने वो रैपर वहां कब और क्यों रखा था|
उसने आहिस्ता से वो रैपर खोला| उसके अंदर एक टूटा हुआ कैमकॉर्डर था| रैना का कैमकॉर्डर, जोकि अचानक से गायब हो गया था|
रैना को हमेशा से ही लाइफ के मोमेंट्स कैप्चर करने का शौक था, उसके इस शौक को देखते हुए मिस्टर प्रधान ने ही उसे उसके बर्थडे पर canon EOS Mark II कैमकॉर्डर दिया था| उस कैमकॉर्डर से रैना ने अपने, इशानी, प्रत्युष विकास और शशांक के अनगिनत विडियो बनाए थे, फिर एक दिन अचानक ही उसका कैमकॉर्डर गायब हो गया| रैना समझ नहीं पा रही थी कि वो कैमकॉर्डर वहां फालसे सीलिंग में कैसे पहुंचा? और वो टूटा हुआ क्यों था?
रैना ने कैमकॉर्डर अलट-पलट के देखा, वो बिलकुल ही चल पाने की स्थिति में नहीं था लेकिन उसका दिल कह रहा था कि उसकी सोच में जो कड़ी मिसिंग है वो इस टूटे हुए कैमकॉर्डर में ही है| रैना ने कैमकॉर्डर का कार्ड स्लॉट खोला, उसमें मेमोरी स्टिक लगी हुई थी| रैना को अपना लैपटॉप तोड़ने का अब अफ़सोस हो रहा था|
प्रत्युष! सिर्फ प्रत्युष ही वो इंसान था जो उसकी मदद कर सकता था| टेक और गैजेट्स के मामले में उसका कोई सानी ना था, उसने कैमकॉर्डर अपने बैग के हवाले किया और प्रत्युष के घर जाने को निकल पड़ी|
शहर नाचते गाते, उल्लास करते लोगों के हुजूम से उमड़ रहा था| पूरे वातावरण में अबीर फैला हुआ था, शंख और मृदंग के साथ जयकारे के शोर से पूरा शहर गुंजायमान था| भव्य पंडालों में मनोरम झांकियां सजी हुई थीं और दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ खचाखच ठंसी हुई थी|
रैना बड़ी मुश्किल से प्रत्युष के अपार्टमेंट बिल्डिंग के पास पहुंची| वो अपार्टमेंट की तरह बढने ही वाली थी कि अचानक ठिठक गई| उसे ऐसा लगा जैसे उसने भीड़ में कोई जाना पहचाना चेहरा देखा है| रैना स्वतः ही भीड़ की तरफ मुड़ गई| उसकी नज़रें किसी को खोज रही थीं|
उसकी नज़रों को जिसकी दरकार थी वो साया भीड़ में गम होने की कोशिश कर रहा था| एक लडकी जिसकी कद-काठी रैना जैसी ही थी वो तेज़ी से भीड़ को चीरते हुए वहां से निकलने की कोशिश कर रही थी| जाने क्यों रैना उसकी तरफ लपकी| उस लड़की को भी इस बात का इल्म था कि कोई उसके पीछे है, वो भरसक प्रयास कर रही थी कि भीड़ का हिस्सा बन कर भीड़ में ही गम हो जाए लेकिन रैना की नज़रें उसका पीछा नहीं छोड़ रही थीं|
लोगों को धक्का देती हुई, भीड़ को काटती हुई रैना उस लड़की के करीब पहुंची| उसी समय वातावरण में अबीर छा गया| रैना को उस लड़की की अबीर में पुती हुई सिर्फ एक झलक मिली…वो रानी थी| ऐसा लग रहा था जैसे उसने रक्त-स्नान किया हो| उसे देखकर रैना के मस्तिष्क में एक बिजली सी कौंधी| आरती शुरू हो चुकी थी, ढोल, मृदंग, शंख की स्वरलहरियों से वातावरण गुंजायमा था| रैना बुत बनी वहीं खड़ी रही, इसके बाद वो भीड़ में कहाँ गायब हो गई कुछ पता नहीं|
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Date: 11th December 2017
विकास और प्रत्युष दोनों ही दंग रह गए जब इतने महीनो बाद कुछ दिन पहले अचानक ही रैना का उनके पास फ़ोन आया| रैना उन दोनों को मुन्नार बुलाना चाहती थी| उसने कहा कि ये उनके जीवन का आखरी गेट-टुगेदर होगा| औइजा बोर्ड वाली घटना अब भी उनके ज़हन में ताज़ी थी, वो दोनों ही वापस उस जगह का रुख नहीं करना चाहते थे| लेकिन उनके लाख समझाने पर भी जब रैना अपनी जिद छोड़ने को तैयार ना हुई तो अंततः दोनों ने ही उसकी बात मानकर मुन्नार जाने का फैसला किया|
मुन्नार में रैना ने तीनो के लिए लॉज में वही कमरे बुक किये थे जहां वो उस रात रुके थे|
‘ये सब क्या है रैना! हमलोग यहाँ वापस क्यों आए हैं? आखिर तुम करना क्या चाहती हो’? प्रत्युष ने रैना से पूछा|
‘उस रात जो अधूरा छोड़ दिया था वो पूरा करना है’| रैना सहज भाव से बोली|
‘पर हमें नहीं करना! जो हुआ सो हुआ, लेट्स फॉरगेट अबाउट इट’!! विकास उसकी बात काटते हुए बोला|
‘आय कांट! होर, सल्ट, बिच! इन नामों से मुझे नवाज़ा गया था तुम्हे नहीं’!! रैना लगभग फुफकारते हुए बोली| विकास खामोश हो गया|
‘हम जानते हैं रैना कि उस रात शशांक के साथ तुम नहीं रानी थी| ये तुम्हारे बदकिस्मती है कि तुम हमेशा गलत वक्त पर गलत जगह होती हो’| प्रत्युष संजीदा भाव से बोला|
‘इसीलिए जो गलत है उसे सही करना चाहती हूँ’|
‘कैसे’?
‘ऐसे’| रैना औइजा बोर्ड निकालते हुए बोली| उसके पास वही बोर्ड था जिसका प्रयोग उन लोगों ने उस रात किया था|
‘ये तुम्हारे पास कैसे आया’!! प्रत्युष और विकास दोनों के मुंह खुले हुए थे|
‘उस रात भोर के आस-पास थोड़ी देर के लिए तुम दोनों की आँख लगी थी| तब मैंने चुपके से आकर ये बोर्ड उठा लिया था’|
‘तुम ये जांचना चाहती थी कि हमने इसे चलाने के लिए इसमें कोई सर्किट या मैकेनिज्म तो नहीं लगाया’| प्रत्युष निर्विकार भाव से बोला|
‘बिलकुल! लेकिन अफ़सोस, इसमें कोई भी सर्किट या मैकेनिज्म नहीं था जिससे इसे बिना हाथ लगाए, कमांड देके चलाया जा सके’| रैना उसकी बात का प्रत्युत्तर देते हुए बोली|
‘उस रात जब तुमने मुझपर कैमरा फेंक कर ये कहा था कि तुम प्रूव कर दोगी कि इस सबके पीछे मेरा हाथ है तभी मैं तुम्हारे इरादे समझ गया था’|
‘सच को स्वीकार करने में मुझे इतने महीने लग गए गाइस| पर अब मैं मान चुकी हूँ कि इस संसार में परालौकिक शक्तियां हैं और उनकी शक्ति असीमित है| इसीलिए उस समय अधूरे छोड़े गए काम को अब हमें पूरा कर देना चाहिए’|
‘करना क्या चाहती हो तुम’? विकास ने पूछा|
‘वही जो उस समय कर रहे थे| हम शशांक की आत्मा को बुलाएंगे, उससे पूछेंगे कि आखिर उस रात क्या हुआ था’|
कुछ देर ना-नुकुर करने के बाद आखिरकार विकास और प्रत्युष रैना की बात मानने के लिए राज़ी हो गए|
उसी रात की भाँती तीनो कमरे के फर्श पर औइजा बोर्ड के इर्दगिर्द घेरा बना कर बैठे| पूरे कमरे में मोमबत्तियां जला दी गईं| सारा माहौल वैसा ही बनाया गया जैस उस रात था| विकास इस बार भी पूरे कैमरा सेटअप के साथ आया था| उनपर फोकस करके कैमरे ट्राईपॉड पर माउंट कर दिए गए|
‘शशांक! क्या तुम हमारी आवाज़ सुन सकते हो’! रैना ने पुकारा| कोई प्रत्युत्तर ना मिला|
‘शशांक, हमारे पास आओ’!! प्रत्युष चिल्लाया| लेकिन कोई जवाब ना मिला|
वो लोग घंटों कोशिश करते रहे लेकिन कुछ हांसिल ना हुआ| लगभग अर्धरात्रि होने को थी|
‘लगता है आज कोई आत्मा आने के मूड में नहीं है’| रैना कंधे उचकाते हुए बोली|
प्रत्युष सशंकित भाव से रैना को देख रहा था| आखिर करना क्या चाहती थी ये लड़की?
अचानक बोर्ड पर रखा प्लेनचेट अपने स्थान पर थर्राने लगा|
‘प्लेनचेट हिल रहा है! यानी हमारी आवाज़ किसी ने सुन ली है’| रैना हिलते हुए प्लेनचेट को देखते हुए बोली|
विकास और प्रत्युष की नज़रें भी औइजा बोर्ड और प्लेनचेट पर ही गड़ी हुई थीं| तीनो ने एक-दूसरे का हाथ मजबूती से पकड़ लिया|
‘क्या हमारे बीच कोई है’| रैना तेज़ आवाज़ में बोली|
प्लेनचेट अपने खांचे से हिलकर YES के ऊपर आ गया| तीनो की नज़रें एक-दूसरे से मिली|
‘श…श..शशांक’? विकास ने पूछा|
प्लेनचेट NO पर चला गया| तीनो ने एकबार फिर से एक-दूसरे की तरफ प्रश्नवाचक दृष्टि से देखा| उनके चेहरों पर हवाइयां उड़ने लगी थीं| दिसम्बर की सर्दी में भी तीनो के माथों पर चुहचुहाती पासी की बूंदे साफ़ देखी जा सकती थीं| कुछ क्षण शांत रहने के बाद अंततः प्रत्युष ने हिम्मत की|
‘इ..इ..इशानी’?
प्लेनचेट NO पर ही टिका रहा| अब तीनो के दिमाग में आंधियां चल रही थीं| आखिर कौन था वहां?
‘फिर कौन हो तुम’? रैना ने पूछा| प्लेनचेट NO पर से हटकर अल्फाबेट्स की तरफ बढ़ा और एक-एक करके अक्षरों पर जाकर रुकने लगा|
R-A-N-I.
‘नहीं! ये नहीं हो सकता’!! प्रत्युष के मुंह से अनायास ही निकला|
‘ये क्या कर रहे हो प्रत्युष| तुम्हे तो औइजा बोर्ड के रूल्स मुझसे ज्यादा बेहतर ढंग से पता हैं| किसी भी आत्मा के आने पर आप उसकी अवहेलना या अनादर नहीं कर सकते हैं| ऐसा करने से वो आत्मा कुपित हो सकती है और वापस जाने के बजाए इसी दुनिया में रुक कर आपसे बदला ले सकती है’| रैना प्रत्युष के कान में फुसफुसाकर बोली|
प्रत्युष ने प्रतिवाद करने के लिए मुंह खोला लेकिन फिर होंठ भींच लिए|
‘शशांक की मौत कैसे हुई’| विकास ने पूछा| प्लेनचेट अपने स्थान से हिला|
I K-I-L-L-E-D H-I-M
तीनो स्तब्ध थे| प्लेनचेट इतने पर ही नहीं रुका|
Y-O-U A-R-E N-E-X-T
तीनो के शरीर ने झुरझुरी ली|
‘तुम सही थे प्रत्युष, मैं गलत थी| तुमने मुझे समझाने की बहुत कोशिश की थी कि रानी जीती-जागती इंसान नहीं बल्कि एक आत्मा है, एक यक्षिणी है लेकिन मैंने तुम्हारी बात नहीं मानी’| रैना आंदोलित भाव से बोली|
प्रत्युष अब भी आवाक था, उसके मुंह से बोल नहीं फूट रहे थे|
‘हम तुम्हे इस दुनिया में वापस नहीं आने देंगे रानी| गाइस, हमें इसे वापस जाने को कहना होगा वर्ना ये वापस इस दुनिया में आ जाएगी’| रैना चिल्ला रही थी, प्रत्युष और विकास बिलकुल आवाक और जड़वत थे| उनका दिमाग काम करना बंद कर चुका था, उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि उस स्थिति में उन्हें क्या करना चाहिए|
अचानक पूरा औइजा बोर्ड और उसपर रखा प्लेनचेट बुरी तरह थर्राने लगा| किसी के कुछ कह या कर पाने से पहले ही औइजा बोर्ड और प्लेनचेट हवा में तैरने लगा| तीनो विस्फरित नेत्रों से वो चमत्कार देख रहे थे| अगले ही पल दोनों वस्तुएं पूरे वेग से कमरे की दिवार से टकरायीं और खील-खील होकर चारों तरफ बिखर गईं|
‘ओ माय गॉड! रानी इतनी पावरफुल ओ चुकी है कि हम उसे रोक नहीं पाए| वो हमारी दुनिया में प्रवेश कर चुकी है’| रैना ने आतंकित भाव से कहा|
‘अब हम क्या करेंगे’? विकास की आवाज़ में कम्पन था, उसकी आवाज़ बुरी तरह लड़खड़ा रही थी|
रैना ने उन दोनों का हाथ छोड़ा और खड़ी हो गई| दोनों असमंजस से घिरे हुए उसे ही देख रहे थे| रैना कैमरे की तरफ बढ़ी जो विकास ने वहां सेट किया था| रैना ने रिकॉर्डिंग प्ले की| कमरे में घटित हुई एक-एक घटना रिकॉर्ड हुई थी|
‘हम रैना एट मिडनाईट दोबारा शुरू करने जा रहे हैं| गेट द वेबसाइट रनिंग एंड अपलोड दिस विडियो’|
‘व्हाट! आर यू आउट ऑफ़ योर माइंड रैना| हम ऐसा नहीं कर सकते’| प्रत्युष चिल्लाया|
‘हम ऐसा ही करने वाले हैं प्रत्युष! ये विडियो रैना एट मिडनाईट पर अपलोड होगी और अभी होगी’!! रैना भी उतनी ही ऊंची आवाज़ में चिल्लाई|
‘रैना समझने की कोशिश करो, हमने रैना एट मिडनाईट शुरू किया था अंधविश्वास को घटाने के लिए, उसे बढ़ावा देने के लिए नहीं| अगर ये विडियो हमने अपलोड की तो लोगों का विश्वास परालौकिक शक्तियों और अंधविश्वास पर बढ़ेगा’| प्रत्युष रैना को समझाते हुए बोला|
‘लेकिन तुम भी तो इसे ही सच मानते हो प्रत्युष| रानी की सच्चाई सबसे पहले तुमने ही तो मुझे बताई थी तुम भूल गए क्या? हम लोगों को वही दिखा रहे हैं जो सच है’| रैना मुस्कुराते हुए बोली|
‘मैं रैना से सहमत हूँ प्रत्युष, हमने आजतक दुनिया को वही दिखाया जो सच है| रैना एट मिडनाईट के हमारे पुराने स्टिंग्स में हमारा सामना कभी भी एक्चुअल पैरानॉर्मल एंटिटी से नहीं हुआ| हमने ढोंगियों का भंडाफोड़ किया और मजलूमों को बचाया लेकिन आज हमारा सामना एक वास्तविक परालौकिक शक्ति से हुआ है, हमारे पास उसका सबूत है तो ये हमारा फ़र्ज़ बनता है कि हम दुनिया के सामने इस सच्चाई को लाएं’| विकास रैना का समर्थन करते हुए बोला|
‘हमने रैना एट मिडनाईट शुरू किया था ताकि इशानी की तरह कोई और मासूम अंधविश्वास की बली ना चढ़े| ये विडियो सैकड़ों इशानियों की बली का सबब बनेगा’| प्रत्युष तड़प कर बोला|
‘क्यों लगता है तुम्हे ऐसा प्रत्युष? क्या यहाँ जो कुछ भी हुआ उसे तुम गलत प्रूव कर सकते हो’? रैना प्रत्युष की आखों में झांकते हुए बोली, प्रत्युष खामोश रहा|
‘अगर तुम उसे गलत नहीं सिद्ध कर सकते तो ये तुम्हारा फर्ज़ है कि उसके बारे में दुनिया को आगाह करो| रानी वापस इस दुनिया में आ चुकी है’|
रैना और विकास के आगे प्रत्युष को हथियार डालने पड़े| रैना एट मिडनाईट वेबचैनल पर ‘रियल पैरानॉर्मल एक्टिविटी’ विडियो अपलोड हो गया और कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों द्वारा देखा गया| लोग पागलों की तरह उस विडियो को देख और विभिन्न सोशल साइट्स पर शेयर कर रहे थे| विडियो वायरल हो चुका था|
‘ल…लेकिन उस रानी रुपी चुडैल से हम कैसे निपटेंगे’? विकास पसीना पोंछते हुए बोला|
‘उसका भी कोई ना कोई सौल्युशन निकाल लेंगे| अगर परालौकिक शक्ति है तो उससे निपटने का तरीका भी ज़रूर होगा| है न प्रत्युष’? रैना प्रत्युष की तरफ देखते हुए बोली| प्रत्युष ने कोई प्रतिक्रया ना दी|
रैना के चेहरे पर विजयी मुस्कान थी|
‘चलो गाइस! रात बहुत हो रही है, सुबह मिलते हैं’| बोलते हुए रैना रूम से निकल गई|
‘ओये पानी फिर से ख़त्म है’! विकास रूम में पानी की खाली बोतल देखते हुए बोला|
‘मैं ले के आता हूँ’| प्रत्युष बोतल की तरफ बढ़ा|
‘नहीं, तू रुक| मैं ही लेकर आता हूँ’| विकास ने बोतल उठा ली और कमरे से बाहर निकल गया|
लॉज का गलियारा उस रात की तरह ही सन्नाटा सुनसान था| विकास स्थिर कदमों से चलते हुए वाटर कूलर तक पहुंचा| रिसेप्शन काउंटर आज भी खाली था|
‘साला ये जगह ही मनहूस है’! विकास खुद में ही बडबडाया और झुक कर पानी भरने लगा|
ठीक उसी समय उसे किसी के कदमों की आहट मिली| कोई चल रहा था! इस वक्त! इस सर्द रात में!
विकास चौंक कर सीधा हुआ| उसकी चौकन्नी आखें चारों तरफ देख रही थीं| रिसेप्शन लॉबी के बाहर लॉज का एंट्रेंस था जोकि घुप्प अँधेरे और घने कोहरे से घिरा हुआ था| फिर भी उस एंट्रेंस की तरफ बढ़ता एक साया विकास को साफ़ नजर आया और उस साए की अवस्था ने विकास के होश उड़ा दिए| उसके हाथ से बोतल छूट कर फर्श पर जा गिरी|
‘प्रत्युष’!! वो बेतहाशा भागते हुए कमरे तक पहुंचा| उसकी सासें उखड़ी हुई थीं|
‘क्या हुआ विकास’!! प्रत्युष उसकी अवस्था देखकर आवाक था|
‘ब..बताने का समय नहीं है| मेरे साथ चल, फ़ौरन’! विकास ने लपक के अपना कैमरा उठाया और वापस बाहर को भागा| प्रत्युष भी उसके पीछे हो लिया|
Date: 12th December 2017
Time: 12:00 a.m.
घडी के कांटे रात के ठीक बारह बजा रहे थे|
‘रैना! रैना!!’
विकास बेतहाशा चिल्ला रहा था लेकिन उसकी आवाज़ जैसे किसी पत्थर से टकराई|
रैना को देखकर उसके मुंह से सिसकारी निकल गई|
उसके तन पर एक भी कपड़ा नहीं था, आखें सूजी हुई और जैसे शून्य में टिकी हुई थीं| माथे पर चाकू से गोद कर डायन लिखा हुआ था| रैना के माथे से बहता खून आखों के पोर से निकलते आसुओं के साथ गाल पर ढलक रहा था| विकास के तिरपन काँप गए| उसके मुंह से सिसकारी निकल गई| रैना अब रैना नहीं रह गई थी, वो रानी बन चुकी थी| जिन परालौकिक शक्तियों के अस्तित्व को वो नकारती आ रही थी वो अब उसके अस्तित्व पर हावी हो रही थी|
विकास ने कैमरे का नाईट विज़न मोड ऑन किया, रैना जैसे किसी सम्मोहन के वशीभूत कहीं खिची चली जा रही थी| उसे ना अपनी नग्नावस्था का ख्याल था ना इस बात का कि विकास उसे रिकॉर्ड कर रहा है| दिसम्बर की सर्द रात में ठंड और गलन से विकास के हाथ काँप रहे थे जबकि वो टर्टलनैक और उसके ऊपर लेदर जैकेट पहने था, उसके हाथों में भी लेदर ग्लव्स थे, बहुत कोशिश करके वो कैमरे को शेक होने से रोक पा रहा था लेकिन रैना पर तो जैसे नश्तर की भाँती जिस्म को बींधने पर उतारू शीतलहरी का कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा था|
खाली सुनसान सड़क के बीचोंबीच रैना बेसुध सी चली जा रही थी| जैसे-जैसे वो आगे बढ़ रही थी शीतलहरी के साथ उड़ कर आता हुआ कोहरा मानो किसी दोशाला की तरह उसे आवृत कर रहा था| विकास जो रैना से कुछ कदम पीछे था उसने अपनी चाल तेज़ की लेकिन रैना जैसे अचानक ही घने कोहरे के आवरण में कहीं गुम हो गई|
‘रैना! रैना!!’ विकास ने चारों ओर घूम-घूमकर उसे आवाज़ लगाईं, लेकिन वो कहीं भी नहीं थी| रैना गायब हो चुकी थी|
‘र…रानी की आत्मा ने रैना के शरीर पर क..कब्जा कर लिया है प्रत्युष!! वो नहीं छोड़ेगी…ह..हममें से किसी को नहीं छोड़ेगी’| विकास की जुबां लडखडा रही थी, उसके हाथ-पैर फूल रहे थे|
प्रत्युष भी आवाक था| उसके मुंह से बोल नहीं फूट रहे थे|
दोनों ने चारों तरफ नज़रें घुमाई| उन्हें एहसास हुआ कि रैना के पीछे आते-आते वो रानी के कॉटेज तक पहुँच गए हैं| कॉटेज के मुख्य द्वार पर मोटी सींकड़ में लगा ताला झूल रहा था| उस लॉज के चारों तरफ दिवार के नाम पर फेंसिंग थी जिसे आसानी से फंदा जा सकता था इसलिए ताले का कोई ख़ास मतलब नहीं था|
रैना उन्हें कॉटेज के सामने के गार्डन से होते हुए बिल्डिंग की तरफ बढती नजर आई|
‘रैना’!! प्रत्युष ने आवाज़ लगाई लेकिन कोई प्रतिक्रया ना हुई|
विकास और प्रत्युष ने एक छलांग में फेंसिंग लांघ ली|
बाहरी दरवाज़े जैसी ही मोटी सींकड़ और ताला कॉटेज बिल्डिंग के एंट्रेंस डोर पर भी लटक रहा था लेकिन रैना उस ओर नहीं बढ़ी बल्कि बिल्डिंग के साइड में उगे बड़े-बड़े पेड़ों और झंखाड़ की ओर बढ़ गई| प्रत्युष और विकास भी उस ओर लपके लेकिन जबतक वे झंखाड़ के उस पार पहुंचे रैना एकबार फिर गायब हो चुकी थी|
‘अब कहाँ गई वो’? विकास सर पकड़ते हुए बोला|
प्रत्युष| ने कोई जवाब ना दिया| वो इधर-उधर देख रहा था| उसने दिवार पर हाथ रखकर फिराना शुरू किया, एक जगह उसका हाथ आकर रुक गया| उसने जोर से धक्का दिया तो दिवार में एक चोर दरवाज़ा खुल गया जिससे कि सीढियां ऊपर पहली मंजिल को जा रही थीं| प्रत्युष और विकास उन सीढ़ियों से होते हुए ऊपर पहुंचे| अब वो कॉटेज की पहली मंजिल के पिछले हिस्से में थे| कॉटेज में घुप्प अँधेरा था और कोहरा भरा हुआ था| सिर्फ एक कमरा ऐसा था जहां से हल्की रौशनी आ रही थी| रानी का कमरा|
दोनों का दिल मुंह को आ रहा था, कंपट्टियां सनसना रही थीं, हाथ-पैर फूल रहे थे| अपनी हिम्मत और पूरी इच्छाशक्ति लगाते हुए दोनों कमरे की ओर बढ़े| वातावरण में कोहरे की गंध के साथ कुछ और भी था| सिगरेट का धुंआ| उसी स्पेशल ब्रांड के सिगरेट का धुंआ जो रैना पीती थी|
कमरे की चौखट पर पहुँचते ही प्रत्युष के मुंह से सिसकारी निकल गई|रैना इत्मीनान से एक रॉकिंग चेयर पर बैठी झूल रही थी| उसके होठों पर एक विषैली मुस्कान थी जिसके बीच सिगरेट दबी हुई थी और हल्का धुंआ वो नथुनों से छोड़ रही थी| उसकी आखों में एक ख़ास चमक थी, ऐसी चमक जो रैना की आखों में तब होती थी जब वो अपने मन की चीज़ हांसिल कर लेती थी| उस घड़ी वो निर्वस्त्र नहीं थी, उसने एक मोटा गाउन पहना हुआ था| कमरे में दो-तीन मोमबत्तियां जल रही थीं जिनका मद्धिम प्रकाश बहुत ही रहस्यमयी वातावरण बना रहा था|
‘मुझे यकीन था कि तुम चोर दरवाज़ा भूले नहीं होगे प्रत्युष| आखिर तुम्हारे प्लान का अहम् हिस्सा था ये| काफी मुश्किल हुई होगी ना पूरे मुन्नार में ऐसा कॉटेज ढूँढने में जो बरसों से बंद पड़ा हो और जिसमे एक ट्रैपडोर हो’| रैना भावहीन स्वर में बोली| उसने अपने माथे पर हाथ फिराया तो खून से लिखा हुआ डायन मिट गया|
‘इस पूरे सेटअप को करने में कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा इसका तुम्हे कोई अंदाजा नहीं है रैना| लेकिन अपनी इशानी के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ…किसी भी हद तक जा सकता हूँ’!! प्रत्युष का चेहरा एकाएक विकृत हो उठा|
‘मानना पड़ेगा क्या गज़ब का प्लान बनाया था तुमने| एकबार को तो मैंने भी सचमुच विश्वास कर लिया था परालौकिक शक्तियों पर’| रैना मुस्कुराते हुए बोली| उसके नथुनों ने ढेर सारा धुंआ उगला|
‘चिंता मत करो| मेरा स्किज़ोफ्रेनिया आउट ऑफ़ कण्ट्रोल नहीं होगा, इन सिगरेट्स में अम्फेटेमाइन्स नहीं हैं’| रैना सख्त भाव से बोली|
‘कोई मुझे बतायेगा यहाँ हो क्या रहा है!! मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा’!! विकास झुंझला कर बोला| उसने अपने कैमरे की रिकॉर्डिंग बंद कर दी थी|
‘तुम शुरू करोगी या मैं शुरू करूं’? प्रत्युष व्यंगात्मक लहजे में बोला|
‘इस कहानी का कुछ हिस्सा तुम जानते हो, कुछ हिस्सा मैं जानती हूँ| दोनों मिलकर सुनाते हैं, कहानी तभी मुकम्मल होगी’| रैना मुस्कुराते हुए बोली|
‘बैठ जा विकास, कहानी जरा लम्बी चलने वाली है’| प्रत्युष कमरे में रखे बेड पर आधा लेटते हुए बोला| विकास एक टेबल के सहारे टिक गया| शुरुआत प्रत्युष ने की|
‘इस कहानी की शुरुआत हमारे कॉलेज के पहले दिन से हुई| जब हम सभी दोस्त एक-दूसरे से मिले| इशानी, रैना, तुम, मैं और शशांक| जल्द ही हम पाँचों में गहरी बॉन्डिंग हो गई लेकिन सबसे गहरी बॉन्डिंग हुई इशानी और रैना के बीच| इशानी और रैना इनसैपेरेबल थीं| अपने ट्रॉमैटिक पास्ट के कारण इशानी को जिस इमोशनल सपोर्ट की ज़रूरत थी उसे रैना ने पूरा किया| इशानी की सिम्प्लिसिटी, उसकी सादगी ने ही मुझे भी उसकी ओर आकर्षित किया, मैं धीरे-धीरे इशानी से प्यार करने लगा| और सारी गडबड यहीं से शुरू हुई’| प्रत्युष जैसे अतीत की यादों में खोते हुए बोला|
‘तुम्हारी लव स्टोरी से इस पूरे प्रकरण का क्या लेना-देना’? विकास अभी भी असमंजस में था|
‘क्योंकि हर लव स्टोरी की तरह हमारी लव स्टोरी में भी एक विलेन था…या कह लो थी’| प्रत्युष रैना की ओर देखते हुए बोला|
रैना के चेहरे पर एक विषैली मुस्कान उभरी| उसने सिगरेट का एक गहरा कश खींचा|
‘उस वक्त मैं नहीं जानता था कि रैना भी मुझसे प्यार करती है| मल्टी-मिलियनेयर टायकून मिस्टर प्रधान की बेटी रैना प्रधान ये कैसे बर्दाश्त कर पाती कि कोई चीज़ उसे पसंद आ जाए और वो किसी दूसरे को मिल जाए…भले ही वो दूसरा उसकी बेस्ट फ्रेंड ही क्यों ना हो’! प्रत्युष दांत भींचते हुए बोला|
‘Awww…तुम चीज़ नहीं हो प्रत्युष| बॉय-टॉय हो सकते हो बट चीज़ नहीं’| रैना व्यंगात्मक लहजे में बोली| वो कुर्सी पर और इत्मीनान से बैठ गई, उसने अपनी एक जाँघ बड़े ही मादक अंदाज़ में कुर्सी के हत्थे से टिका ली जिससे उसका गाउन जाँघ पर से ढलक गया| विकास उसका यह रूप देखकर आवाक था, उसने रैना को कभी ऐसे नहीं देखा था|
‘हैरान मत हो विकास, ये स्किज़ोफ्रेनिक है’| प्रत्युष विकास के मनोभाव समझते हुए बोला|
‘स..स्किज़ोफ्रेनिक! लेकिन इसकी स्प्लिट पर्सनालिटी नहीं है’! विकास दुविधा में भरा हुआ बोला|
‘स्किज़ोफ्रेनिक होने का मतलब ये नहीं है कि इंसान हमेशा स्प्लिट पर्सनालिटी डिसऑर्डर का ही शिकार होगा| स्किज़ोफ्रेनिया के बहुत से अलग-अलग रूप और प्रभाव होते हैं| जो सबसे कॉमन है वो है बी.पी.डी. यानी बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर| इसमें इंसान का व्यक्तित्व अलग-अलग हिस्सों में नहीं बंटता, वो रहता एक ही व्यक्तित्व है लेकिन बहुत ही ज्यादा अनस्टेबल और इम्पल्सिव होता है| एक्सट्रीम इमोशनल फ़्ल्क्चुएशन, एंग्जाईटी और रेज का शिकार होता है| इंसान कभी बहुत ही खुशमिजाज़, मिलनसार और सहृदयी होता है तो कभी ईर्ष्या, द्वेष और घृणा से भरा हुआ| ऐसे लोग हमारे इर्द-गिर्द बहुसंख्या में होते हैं और आम जिंदगी बिता रहे होते हैं| उनके परिवारवाले और वो खुद भी इस बात से अनजान होते हैं कि वो किसी गंभीर मानसिक रोग से पीड़ित हैं| लोगों को लगता है कि उस व्यक्ति विशेष का नेचर ही ऐसा है’|
‘लेकिन रैना की मेंटल कंडीशन का इशानी से क्या कनेक्शन है’?
‘रैना और इशानी में आए दिन मुझे ले कर झगड़े होने लगे| रैना कभी इशानी को भला-बुरा बोलती तो कभी रो-रो कर उससे माफ़ी मांगती थी| इशानी ने इसके बारे में मुझे बताया तो मैंने कहा कि उसे रैना से इत्मीनान से इस विषय में बात करनी चाहिए| अगर उस समय मुझे इस बात का एहसास होता कि रैना दिमागी रूप से बीमार है तो मैं ऐसा कभी ना करता| तुम्हे रैना और इशानी का आखरी बड़ा झगड़ा याद है’?
‘हाँ! हम लोगों को लगा कि ये तो इन लोगों के बीच चलता ही रहता है’|
‘दरअसल इशानी रैना से मेरे बारे में बात करने गई थी| रैना ने उसे इतना भला-बुरा सुनाया कि इशानी डिप्रेशन में चली गई| एक तरफ वो अपनी बेस्ट फ्रेंड और अपने प्यार में से किसी एक को खोने का प्रेशर बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी दूसरी तरफ इसकी माँ और भाई ने उसका जीना हराम कर रखा था| उस वहशी गुरुजी के आश्रम जाने के लिए वो दोनों दिन-रात उसपर प्रेशर बना रहे थे, नतीजतन इशानी का मेंटल ब्रेकडाउन हो गया| वो खुद से ही बातें करने लगी, रातों को उठकर नींद में चलने लगी| इसके आगे का किस्सा खुद बयान करोगी’? प्रत्युष ने रैना की ओर देखते हुए कहा|
‘मुझे इशानी से झगड़ा करने के बाद एहसास हुआ कि मैं उसे कुछ ज्यादा ही बुरा-भला बोल गई| मैंने उससे माफ़ी मांगने की कोशिश की लेकिन वो मेल्स, मैसेज, सोशल मीडिया कुछ भी एक्सेस नहीं कर रही थी और ना ही कॉलेज आ रही थी| फिर एक रात मैंने फैसला किया कि मैं खुद इशानी के घर जाकर उससे बात करुँगी| रात के लगभग बारह बजने को थे लेकिन फिर भी मैं खुद को रोक नहीं पाई| उस रात बारिश हो रही थी, फिर भी मैं उसके अपार्टमेंट जाने के लिए निकली, लेकिन इशानी मुझे अपने अपार्टमेंट से कुछ दूरी पर ही दिखाई दे गई…नींद में चलती हुई| उसने सिर्फ एक सफ़ेद झीना गाउन पहना हुआ था जो बारिश से भीग कर उसके जिस्म से चिपका हुआ था, अपनी उस अवस्था का उसे ज़रा भी एहसास नहीं था| ऐसा लग रहा था कि वो किसी तरह नींद में चलते हुए अपने अपार्टमेंट से बाहर आ गई थी| इससे पहले कि मैं उसतक पहुँचती या उसे आवाज़ लगाती एक बाइक उसके पास आकर रुकी| बाइक चलाने वाला लड़का बुरी तरह पिए हुए था, उसने इशानी को छेड़ने की कोशिश की| जल्द ही उसे एहसास हो गया कि इशानी नींद में चल रही है| वो नींद में चल रही इशानी को घसीट कर एक अँधेरी गली में ले गया’| रैना एक पल के लिए शांत हुई|
प्रत्युष दर्द से काँप रहा था| उसकी आखें सुर्ख लाल हो रही थीं| रैना ने कहानी जारी रखी|
‘मुझे चिल्लाना चाहिए था, शोर मचा कर उस लड़के को भगाने की कोशिश करनी चाहिए थी| लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया, उस घड़ी मेरे दिमाग में एक आईडिया आया| मेरी कार में मेरा कैमकॉर्डर रखा हुआ था, मैं भाग कर अपना कैमकॉर्डर ले आई और मैंने इशानी और उस लड़के की अवस्था की विडियो क्लिप बना ली| लड़का इशानी को उसी तार-तार अवस्था में छोड़ कर वहां से भाग गया| इशानी नींद में चलते हुए वापस अपार्टमेंट की ओर बढ़ गई| मेरे पास ये गोल्डन ऑपरच्युनिटी थी इशानी को अपने और प्रत्युष के बीच से हटाने की| मैंने एक प्रॉक्सी आई.डी. से वो क्लिप इशानी के भाई केवल को सेंड कर दी| मैं जानती थी कि उस क्लिप को देखने के बाद केवल और उसकी माँ इशानी का जीना हराम कर देंगे| उसे हाउस अरेस्ट कर दिया जाएगा और वैसा ही हुआ’|
‘यू बिच! यू सिक बिच’!! प्रत्युष दर्द और क्रोध से कांपते हुए बोला| उसकी आवाज़ थर्रा रही थी|
‘तुम्हे ये बात कब और कैसे पता चली मैं नहीं जानती’| रैना प्रत्युष की बात को नज़रंदाज़ करते हुए बोली|
‘तुम अपनी कहानी जारी रखो| जब समय आएगा तब मैं सब बताऊंगा’| प्रत्युष खुद पर काबू पाते हुए बोला|
‘एज़ यू विश’! रैना ने कंधे उचकाए और आगे बोलना शुरू किया| ‘उस रात केवल को मैसेज करने के बाद मैं वापस घर लौट रही थी| मेरे दिमाग में विचारों की आंधियां चल रही थीं| मेरा दिमाग अपने वश में नहीं था| मैंने जो किया था उसके लिए मेरा गिल्टी कॉनशिय्स मुझे पल-पल धिक्कार रहा था| उस समय अपने इम्पल्सिव अटैक में मैं अपनी बेस्ट फ्रेंड के साथ वो घृणित काम कर गई लेकिन अब मेरा ज़मीर मुझे चैन नहीं लेने दे रहा था| मेरा ध्यान ड्राइविंग पर नहीं रहा, नतीजन गाडी एक पोल से जा टकराई| शॉक से कुछ पलों के लिए मेरी आखों के आगे अँधेरा छा गया| दिमाग शून्य में चला गया| मेरा ध्यान ड्राइविंग पर नहीं रहा और मेरी गाडी एक इलेक्ट्रिक पोल से टकराई| इस एक्सीडेंट में मेरा कैमकॉर्डर टूट कर कबाड़ा हो गया| हालांकि मुझे कोई ऊपरी चोट नहीं आई लेकिन इस शॉक के कारण मेरा दिमाग सलेक्टिव एमनेशिया की स्टेट में चला गया’|
‘सेलेक्टिव एमनेशिया’?
‘सेलेक्टिव एमनेशिया ऐसी स्टेट है जिसमे किसी शॉक या ट्रॉमा की वजह से इंसान कोई ख़ास घटना या चीज़ भूल जाता है’| प्रत्युष बोला|
‘इस शॉक ने मेरे दिमाग से इशानी वाली घटना की याद मिटा दी| जब मैं होश में आई तो मुझे इतना ही याद आया कि मैं इशानी से मिलने निकली थी और शायद उससे मिले बिना ही वापस लौट रही थी| मैंने जो किया था या इशानी के साथ जो हुआ था वो सब मैं भूल गई| कैमकॉर्डर बर्बाद हो गया था, उस घटना, उस क्लिप और उसे केवल को भेजने के बारे में मैं सबकुछ भूल गई’|
‘अ…आय कांट बिलीव दिस रैना| तुम ऐसा कैसे कर सकती हो…ऐसी कैसे हो सकती हो तुम’!! विकास आवाक सा उसे देख रहा था|
रैना ने निर्विकार भाव से कंधे उचकाए और सिगरेट का एक कश लगाया फिर नज़रें प्रत्युष की तरफ घुमाई, ‘योर टर्न’|
‘इशानी की मौत तक मुझे इस बारे में कुछ भी नहीं पता था| मुझे पूरा यकीन था कि केवल और उसकी माँ ने इशानी को ऊपर से नीचे फेंक कर उसकी जान ले ली पर लाख कोशिशों के बाद भी मैं कुछ साबित नहीं कर पाया| केवल और उसकी माँ शहर छोड़कर भाग चुके थे जोकि इस बात का प्रूफ था कि वो कोई बड़ी बात छुपा रहे हैं| मैंने अपने तरीके से इन्वेस्टिगेशन शुरू की, मैंने केवल का पता लगाने के लिए उसके मेल एकाउंट्स, उसके सोशल आई.डी. और उसका क्लाउड स्पेस हैक किया जिसके ट्रैश फोल्डर से मैंने एक विडिओ क्लिप रेट्राईव् की…इशानी के रेप की विडियो| मेरा पूरा वजूद हिल गया था, दिमाग काम नहीं कर रहा था, होश ठिकाने नहीं थे| कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर वो क्लिप वजूद में कैसे आई और केवल के पास कैसे पहुंची| क्लिप से सिर्फ एक बात पता चल रही थी कि बनाने वाले ने उसे चोरी से छुप के शूट किया था लेकिन मैं नहीं जानता था कि वो ज़लील इंसान कौन है’| प्रत्युष दो पल के लिए शांत हुआ|
वातावरण में घुप्प सन्नाटा छा गया जिसे सिर्फ रैना की रॉकिंग चेयर हिलने की आवाज़ तोड़ रही थी|
‘इस दौरान तुम एक्यूट डिप्रेशन में चली गई| मुझे वाकई लगा कि इशानी की मौत ने तुम्हे अन्दर से तोड़ दिया है लेकिन सच ये था कि उस घटना की याद भूल जाने के बाद भी तुम्हारा इनर कॉनशिय्स तुम्हे इशानी की मौत का ज़िम्मेदार ठहरा रहा था, तुम्हारा स्किज़ोफ्रेनिया बढ़ रहा था| मैं तुम्हे डॉक्टर पोद्दार के पास ले गया जिन्होंने तुम्हे हिप्नोटाइज करके तुम्हारी रिग्रेशन थेरेपी शुरू की’
प्रत्युष ने रैना की तरफ देखा, प्रत्युष की आखों में नमी और चेहरे पर गहन वेदना के भाव थे| ‘मैं यही समझता रहा कि इशानी के जाने का गम तुम बर्दाश्त नहीं कर पा रही हो| उस थोड़े से समय के लिए मैं वाकई तुम्हारे करीब आ गया था रैना प्रधान! अपनी इशानी को खो चुका था मैं, अब तुमको खोना नहीं चाहता था| डॉक्टर पोद्दार से मैं तुम्हारे हर सेशन के डिटेल्स लेता था| हर एक चीज़, हर एक बात उनसे जानता था मैं ताकि तुम्हे डिप्रेशन से निकाल सकूं’|
रैना एकटक प्रत्युष को देख रही थी| कुछ पल के लिए उसके चेहरे पर भी दर्द और वेदना के भाव उजागर हुए…लेकिन सिर्फ कुछ पल के लिए|
‘फिर एक दिन डॉक्टर पोद्दार ने मुझे बहुत ही अजीब बातें बताईं| पहली ये कि तुम स्किज़ोफ्रेनिक हो, दूसरी कि हिप्नोसिस के दौरान उन्हें पता चला कि तुम्हारी मेमोरी में कहीं कोई ब्लॉकेज है| उनके मुताबिक़ ऐसा तब संभव था जब किसी शॉक के कारण तुम किसी ख़ास घटना के बारे में भूल गई हो और तीसरी बात ये थी कि जब तुम रिग्रेशन थेरेपी के दौरान हिप्नोटिक स्टेट में थी तब तुमने एकबार कहा था कि तुम इशानी का रेप होने से रोक सकती थी’|
‘पर मैं तो उस घटना को भूल चुकी थी फिर…’
‘तुम्हारा कॉनशिय्स माइंड उस घटना को भूल चुका था लेकिन तुम्हारे सबकॉनशिय्स माइंड में वो बात दफन थी| डॉक्टर पोद्दार ने हिप्नोसिस के दौरान तुमसे इस बाबत पूछने की बहुत कोशिश की कि तुम्हें क्यों लगता है कि इशानी का रेप हुआ था लेकिन तुमने उसका कभी जवाब नहीं दिया| डॉक्टर पोद्दार ने इसका निष्कर्ष ये निकाला कि तुम्हारा दिमाग ऐसी कहानियां गढ़ रहा है जिसमे इशानी का अहित हुआ हो और उसके लिए रैना ज़िम्मेदार हो, लेकिन हकीकत मैं जान गया था| इशानी के रेप के बारे में रेपिस्ट और केवल के अलावा सिर्फ एक और शख्स जान सकता था, वो जिसने वो विडियो क्लिप बनाई थी| मैं समझ गया कि तुम ही वो शख्स हो जिसने उस रात इशानी के रेप की विडियो क्लिप चोरी छुपे बनाई और फिर किसी वजह से तुम उस पूरे इंसिडेंट को भूल गई’|
‘तुम्हारा दिमाग वाकई एक डिटेक्टिव की तरह चलता है प्रत्युष’| रैना प्रत्युष की प्रशंसा किये बिना ना रह पाई लेकिन उसका कोई भी प्रभाव प्रत्युष पर नहीं पड़ा| प्रत्युष की आखों में अपने लिए घृणित भाव उसे साफ़ नजर आ रहे थे|
‘कितनी नफरत करते हो मुझसे प्रत्युष’|
‘उतनी ही जितनी इशानी से मोहब्बत करता था| तुम इंसानियत के नाम पर धब्बा हो रैना, तुमने अपनी आखों के सामने अपनी बेस्ट फ्रेंड को रेप होने दिया| उसे बचाने की जगह उसका विडियो बनाया और उसके ही भाई को भेज दिया| तुम्हारी इस घिनौनी सोच के लिए ही तुमसे जितनी नफरत की जाए वो कम है रैना प्रधान’!! प्रत्युष गुस्से में फुंफकारते हुए बोला|
‘अगर इतनी ही नफरत थी तो मुझे डिप्रेशन में मर जाने देते| क्यों मुझे एक नई जिंदगी दे रहे थे तुम’!!
‘यकीन जानो अगर तुम डिप्रेशन में आत्महत्या कर लेती तो वो तुम्हारे लिए सबसे आसान मौत होती, लेकिन तुम्हारी उस मौत से मेरी इशानी का बदला पूरा नहीं होता| तुमने इशानी के साथ जो किया उसके लिए तुम वही डिजर्व करती थी जो मैंने तुम्हारे साथ किया| मैं सस्पेंस में मरा जा रहा था कि आखिर उस रात वाकई क्या हुआ था लेकिन मेरे पास जानने का कोई जरिया नहीं था| रिग्रेशन थेरेपी से तुम धीरे-धीरे अपने डिप्रेशन से बाहर आने लगी लेकिन तुम्हारे सेलेक्टिव एमनिज़िया के कारण उस रात की घटना के बारे में तुम्हे कुछ भी याद नहीं आया| मैं तुम्हे झंकझोरना चाहता था, तुमसे पूछना चाहता था कि बताओ रैना तुमने मेरी इशानी के साथ ऐसा क्यों किया लेकिन इसका कोई फायदा नहीं होता, तुम्हे तो याद ही नहीं था कि तुमने किया क्या है| तुम्हे तुम्हारे घिनौने कृत्य की सज़ा देना चाहता था मैं लेकिन तब जब तुम्हे अपने किये की याद हो और अपने जीवन के अंतिम क्षणों में तुम भी उसी दर्द उसी तड़प से गुजर सको जिससे इशानी गुजरी थी| तुमे उस गुनाह की सज़ा देने का कोई मतलब नहीं था जो अपने ज़हन में तुमने कभी किया ही नहीं था’|
‘इसीलिए तुमने मुझे रैना एट मिडनाईट शुरू करने को एनकरेज किया’!
‘हाँ! तुम्हारी भूली हुई याद को वापस लाने का एक ही तरीका था, तुम्हारे दिमाग पर दबाव डाला जाए| रैना एट मिडनाईट इसका सबसे बेहतरीन ज़रिया था’|
‘ऐसा क्यों’?
‘क्योंकि तुम्हारा गिल्टी कॉनशिय्स तुम्हे इस कदर ट्रिगर कर रहा था कि तुम्हारा स्किज़ोफ्रेनिक माइंड तुम्हे हर जगह इशानी की उपस्थिति दिखाने लगा| इशानी जो सिर्फ तुम्हे नजर आती थी और किसी को भी नहीं’|
‘तुम ये भी जानते हो’!
‘शुरू में नहीं जानता था, फिर धीरे-धीरे मुझे एहसास हुआ जब तुम किसी ख़ास दिशा में डर से देखती थी और तुम्हारी नज़रें वहीं टिक जाती थीं, तुम्हारा चेहरा यूं सफ़ेद पड़ जाता था जैसे तुमने भूत देख लिया हो, तुम्हारी बॉडी लैंग्वेज स्टिफ हो जाती थी| धीरे-धीरे मैं समझ गया कि तुम इशानी को देख रही हो| जानती हो रैना, स्किज़ोफ्रेनिया में लोग अक्सर मरे हुए लोगों को देखते हैं| उन्हें लगता है कि वो भूत या आत्मा को देख रहे हैं जबकि उनका दिमाग उन्हें वो सब दिखा रहा होता है| बस दिक्कत ये थी कि तुम भूत-प्रेत में विशवास नहीं करती थी, तुम जानती थी कि तुम्हारा दिमाग तुम्हारे साथ खेल खेल रहा है| तुम ये मानने को तैयार नहीं थी कि इशानी की आत्मा तुम्हारे पीछे लगी हुई है| रैना एट मिडनाईट के ज़रिये तुम्हारा दिमाग तुम्हारे लिए एक विरोधाभास पैदा कर रहा था और उस विरोधाभास को बढाने का काम किया तुम्हारी स्मोकिंग हैबिट ने’| इस बार प्रत्युष के चेहरे पर तीखी मुस्कान उभरी|
‘क्योंकि मेरी स्मोकिंग हैबिट का फायदा उठाकर तुमने सिगरेट्स में अम्फेटेमाइन्स मिला दिए’|
‘अम्फेटेमाइन्स स्किज़ोफ्रेनिया को बढाने का काम करती है| रौनकपुर में जब महाजन सिंह ने तुम्हे अपना सेक्स विडियो शूट करने की बात कही तब तुम्हारा स्केज़ोफ्रेनिक माइंड ट्रिगर हो गया| तुमने विकास से सिगरेट मांगे, वो सिगरेट जिनमे मैं पहले से ही अम्फेटेमाइन्स मिला चुका था| मैं जिस मौके का इंतज़ार कर रहा था आखिरकार वो मेरे हाथ लग चुका था| बस अब उस प्रेशर को और बढ़ाना था| अम्फेटेमाइन्स ने मेरा वो काम कर दिया| ये विडियो देखो’| प्रत्युष ने अपनी जेब से मोबाइल निकाला और उसपर एक विडियो प्ले करके रैना की तरफ बढ़ा दिया|
रैना ने मोबाइल उसके हाथ से लेकर विडियो देखा| उसकी आखें अविश्वास से फैल गईं| विकास भी उसके पास वो विडियो देखने आ गया था|
उस विडियो में रैना महाजन सिंह को फांसी पर लटकाती नजर आ रही थी|
‘स्केज़ोफ्रेनिक पेशेंट में अमानवीय शक्ति आ जाना बड़ी बात नहीं है| आम हालात में रैना जैसी छुई-मुई लड़की महाजन सिंह जैसे पहाड़ को नहीं उठा सकती थी लेकिन स्केज़ोफ्रेनिक अटैक के दौरान उसके बल का मुकाबला करना महाजन सिंह के वश में नहीं था’|
‘म..मुझे याद नहीं कि म..मैंने महाजन सिंह को मारा’|
‘बेशक तुम्हे याद नहीं| तुम्हारा दिमाग इस कदर ट्विस्टेड हो चुका था| तुम्हे वो हॉर्नी हिमांशु याद है ना? उसने ना तुमसे इशानी के बारे में कुछ कहा ना ही उसने अपनी जान ली| उसने तुमपर अटैक ज़रूर किया था लेकिन स्केज़ोफ्रेनिया अटैक से ग्रस्त होकर तुमने ही उसकी गर्दन काटी थी’|
‘हिमांशु के पीछे जाने से कुछ पल पहले ही मैंने सिगरेट पिया था’|
‘बिलकुल! और अम्फेटेमाइन्स ने अपना काम कर दिया| लेकिन मुश्किल ये थी कि अब भी तुम्हारा दिमाग इशानी वाले इंसिडेंट को रीकॉल नहीं कर रहा था’|
‘इसलिए तुमने मुन्नार ट्रिप का सेट-अप प्लान किया| मानना पड़ेगा, काफी मेहनत की होगी तुमने मेरे जैसी शक्ल-सूरत, कद-काठी वाली लड़की ढूँढने में’| रैना प्रशंसात्मक लहजे में बोली|
‘ल..ल..लड़की ढूँढने में? यानी रानी भी सेटअप थी? लेकिन फिर शशांक को उसने कैसे मारा! और…और…वो औइज बोर्ड’| विकास की आखें कटोरियों से बाहर उबल रही थीं, उत्तेजना से उसकी आवाज़ काँप रही थी|
‘सब पता चलेगा धीरे-धीरे, थोडा इत्मीनान रखो’| रैना खिलखिलाते हुए बोली|
‘तुम्हे अंदाजा भी नहीं है कि कितनी मुश्किल हुई मुझे इस काम में| रानी वास्तव में मुंबई की एक हाई-प्रोफाइल एस्कॉर्ट थी…बहुत ही महंगी एस्कॉर्ट जिसे मुंह मांगी कीमत देकर मैंने इस काम के लिए राज़ी किया था| उसे यही पता था कि ये एक प्रैंक, एक प्रैक्टिकल जोक है| क्योंकि वो एस्कॉर्ट थी इसलिए कपडे उतारने में भी उसे कोई ख़ास एतराज़ नहीं हुआ| लड़की का कपडे उतारना प्लान का बहुत ही इंटीग्रल पार्ट था क्योंकि न्यूडिटी ह्यूमन माइंड और सेंसेस को ट्रिगर करती है, उसके सब-कॉनशिय्स को सबसे ज्यादा| मुझे पता था कि रानी का निर्वस्त्र अवस्था में रात को स्लीपवॉक करना तुम्हारे दिमाग पर गहरा दबाव डालेगा’|
‘तुमने रानी के ज़रिये इशानी के साथ घटी उस रात वाली घटना को रीक्रिएट करने की कोशिश की ताकि उससे मेरे दिमाग पर प्रेशर पड़े और मेरा मेंटल ब्लॉकेज हट जाए| क्या ज़बरदस्त प्लानिंग थी’|
‘प्रॉब्लम तब हुई जब उसकी न्यूड स्लीपवॉक के दौरान शशांक ने उसे कॉटेज के मेन डोर से निकल कर साइड के ट्रैपडोर से एंटर करके अपने कमरे में जाते देख लिया’|
‘और इसीलिए तुम्हारे लिए शशांक को रास्ते से हटाना ज़रूरी हो गया था’?
‘तुम अब भी गलत हो रैना| तुम्हे खुद अंदाजा नहीं है कि तुम कितनी खतरनाक हो| शशांक को मैंने या रानी ने नहीं खुद तुमने मारा था’|
‘व्हॉट’?! रैना के साथ-साथ विकास भी चौंका|
‘रानी ने देख लिया था कि शशांक ने उसे ट्रैपडोर से एंटर करते देख लिया है, उसने ये बात मुझे बताई| शशांक के मन में संशय जन्म ले चुका था लेकिन मेरे कहने पर रानी ने शशांक से यही कहा कि डॉक्टर पोद्दार के कहने पर वो और मैं एक एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं रैना को ठीक करने के लिए’|
‘और शशांक मान गया’?
‘आसानी से तो नहीं! उसे मनाने के लिए रानी को अपने आपको उसके सामने परोसना पड़ा…जिसके लिए उसने मुझसे एक्स्ट्रा फीस वसूली’|
‘उस रात क्या हुआ था जब शशांक की डेथ हुई’? विकास अधीरता से बोला|
‘रैना ने रानी और शशांक को लेक-साइड पर इंटिमेट होते देखा था| उसका स्केज़ोफ्रेनिक माइंड इस बात को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था कि उसके पीछे-पीछे पूंछ बन कर घूमने वाला शशांक रानी के पहलु में पनाह पा रहा था| उस रात मेरे रूम में आने से पहले रैना स्केज़ोफ्रेनिया के अटैक में शशांक के रूम में पहुंची| उसने शशांक के ड्रिंक में एफिड्रीन मिला कर उसे पिलाया फिर उसके साथ पागलों की तरह सेक्स किया…तब तक जबतक शशांक का कार्डियक अरेस्ट नहीं हो गया’|
विकास के शरीर ने जोर की झुरझुरी ली|
‘जिसका की तुमने एम.एम.एस. बनाया और पोर्न साइट्स पर अपलोड कर दिया’| रैना नागिन की तरह फुफकारते हुए बोली|
‘टिट फॉर टेट बेबी’| प्रत्युष बेपरवाही से कंधे उचकाते हुए बोला|
‘वैसे रानी की बैकग्राउंड स्टोरी और सारे एविडेंस काफी अच्छी तरह प्लान किये थे तुमने| यहाँ तक कि इको पॉइंट पर मेरे अपना नाम पुकारने पर रानी का मेरी ही आवाज़ की नकल कर के इशानी का नाम पुकारना बहुत ही माईन्यूट डिटेल्स हैं| फ्यूज़ बल्ब वाके केस में तुम्हे जैसे ही आभास हुआ कि मैं तुम्हारी और रानी की बातें सुन रही हूँ तुमने उसे इशारा किया और उसने तुम्हारी रटाई हुई कहानी गानी शुरू कर दी ताकि मुझे लगे कि उसके भयावह अतीत से जुदा कोई राज़ है जोकि वो छुपा रही है| सारा प्लान फूलप्रूफ था लेकिन मुझे शुरू से ही इस पूरी प्लानिंग में एक बहुत बड़ा झोल नजर आ गया था’|
‘वो क्या’?
‘रानी का एक्सेंट…यानी भाषाशैली| रानी भूत हो चाहे ना हो वो कम से कम मुन्नार की नेटिव नहीं थी| उसकी बैकग्राउंड स्टोरी के मुताबिक़ रानी जन्म से जवानी तक मुन्नार में रही थी फिरभी उसकी भाषाशैली मुम्बईया थी| उसके बात करने का लहज़ा, भाव-भंगिमाएं साफ़-साफ़ उसके मुम्बईया होने की चुगली कर रही थीं| लेकिन तुम्हारे यक्षिणी वाले पॉइंट ने कुछ समय के लिए मुझे असमंजस में डाल दिया था| उस रात औइजा बोर्ड वाली घटना के बाद मैं वापस रानी के लॉज गई थी| वहां काफी देर कोशिश करने के बाद मुझे आखिरकार वो ट्रैपडोर मिल गया जिसने रानी के सामने से निकलने के बाद भी जादुई अंदाज़ में अपने कमरे में पहुचने के करतब की कलई खोल दी’|
‘तो जब मैंने तुम्हे वाटर कूलर के पास देखा था तब तुम रानी के लॉज से लौट रही थी’? विकास ने पूछा|
‘हाँ! मेरे दिमाग में उधेड़बन चल रही थी| उस समय तक मैं श्योर नहीं थी कि ये सब तुम कर रहे हो या प्रत्युष, या फिर इसमें तुम दोनों मिले हुए हो’| रैना विकास से बोली|
‘मैं इसके बारे में कुछ नहीं जानता था’| विकास निर्विकार भाव से बोला|
‘हाँ, अब मैं ये बात जानती हूँ| मुझे अम्फेटेमाइन्स मिले हुए सिगरेट क्योंकि तुमसे मिलते थे इसलिए मेरा पहला शक तुमपर ही था’|
‘इसीलिए तुमने मुझसे सिगरेट का पैकेट छीन लिया था’?
‘हाँ, और वापस आकर मैंने उन सिगरेट्स का लैब टेस्ट करवाया जिससे ये बात साफ़ हो गई कि उनमे अम्फेटेमाइन्स है’|
‘मैंने जानबूझकर तुम्हारे सिगरेट विकास के पास रखवाए थे, ताकि तुम्हे अगर कभी गलती से शक हो भी तो विकास पर हो’| प्रत्युष मुस्कुराते हुए बोला|
‘भगवान् तुम दोनों जैसे दोस्तों से बचाए’| विकास ने आहत भाव से कहा|
‘लेकिन तुम्हारी दिमाग की बत्ती कैसे जल गई’? प्रत्युष ने विकास की बात नज़रंदाज़ करते हुए रैना से पूछा|
‘मुझे किसी कांस्पीरेसी में फंसाया जा रहा है ये मुझे शुरू से ही लग रहा था| एम एम एस स्कैंडल होने के बाद मेरे पास दुनिया से छुपने के अलावा कोई आप्शन नहीं था| उस दौरान मैंने सारी घटनाओं, सभी कड़ीयों को इंट्रोस्पेक्ट करते-करते मैं अपने टूटे कैमकॉर्डर तक पहुंची| उस समय तक मेरा शक क्योंकि विकास पर था और कैमकॉर्डर टूटने के बारे में मुझे कुछ भी याद नहीं था तो मैं उससे डेटा रिकवर कराने के लिए तुम्हारे पास आ रही थी| लेकिन तुम्हारे अपार्टमेंट के बाहर मुझे रानी दिख गई’|
‘मैंने उस बेवकूफ से कहा था मेरे अपार्टमेंट ना आया करे| शशांक की डेथ के बाद मैंने उसे रातों-रात मुन्नार से गायब करवा दिया था लेकिन वो मेरे पीछे ही पड़ी हुई थी’| प्रत्युष ने बेचैनी से पहलु बदला|
‘ख़ैर, उसे देखकर मुझे ये तो यकीन हो गया कि ये सारी प्लानिंग तुम्हारी है| फिर बाद में जब मैंने कैमकॉर्डर की मेमोरी स्टिक में सुरक्षित बचा इशानी का रेप विडियो देखा तो मुझे उस रात की पूरी घटना याद आ गई| मेरे दिमाग का ब्लॉकेज हट गया| स्केज़ोफ्रेनिया के अटैक में महाजन सिंह, हिमांशु और शशांक को मारने के बारे में मुझे कुछ नहीं पता था लेकिन अब पता चल गया है’|
‘फिर तुमने आज का ड्रामा स्टेज किया| रानी वाला सीन इनएक्ट किया, तुम जानती थी कि मैं समझ जाऊँगा फिर भी किया’?
‘उसकी एक ख़ास वजह है, थोड़ी देर में बताउंगी| वैसे भी ज़्यादातर सस्पेंस क्लियर हो चुके हैं| जो छोटे-मोटे बच गए हैं वो कुछ ख़ास नहीं हैं लेकिन एक बहुत बड़ा ट्विस्ट इन टेल बाकी है| वो औइजा बोर्ड| उस रात मैंने औइजा बोर्ड को अच्छे से चेक किया था| उसमे कोई मैकेनिज्म नहीं था| इशानी तो चलो मेरे पागलपन के कारण मुझे नज़र आई लेकिन औइजा बोर्ड पर प्लेनचेट कैसे घूम रहा था’? रैना उत्सुक भाव से बोली|
प्रत्युष संजीदा हुआ| कुछ पल यूं खामोशी छायी रही जैसे वो निर्णय नहीं कर पा रहा हो कि कहाँ से शुरुआत करे|
‘वही तो मैं भी जानने को बेताब हूँ कि तुमने औइजा बोर्ड वाला करतब कैसे किया| वो औइजा बोर्ड मैंने एक इंग्लैंड ट्रिप में किसी एंटिक शॉप से खरीदा था| उसे यूज़ करने का मेरा मकसद सिर्फ तुम्हारे दिमाग को प्रेशराइज़ करना था| मैं खुद नहीं जानता था कि उसपर वो चांदी का सिक्का चलने कैसे लगा था’|
‘जानते हो प्रत्युष, मैंने मुन्नार से लौटने के बाद औइजा बोर्ड्स पर काफी रिसर्च की है| इस खेल के कुछ ख़ास नियम होते हैं, जिनमे से एक यही है कि खेलने वाले किसी भी हाल में एक-दूसरे का हाथ ना छोड़ें| दूसरा और सबसे अहम् नियम ये होता है कि ये खेल कभी भी किसी ऐसे खिलाड़ी के साथ नहीं खेलना चाहिए जिसे इस खेल या परालौकिक शक्तियों पर विश्वास ना हो क्योंकि ऐसा व्यक्ति आत्माओं के लिए दूसरी दुनिया से इस दुनिया में आने का सबसे बड़ा माध्यम वही व्यक्ति बनता है’|
प्रत्युष प्रश्नवाचक नज़रों से रैना को देख रहा था|
‘उस रात और आजरात प्लेनचेट हम तीनो में से किसी ने नहीं हिलाया| यानी कोई ऐसी अदृश्य शक्ति वहां मौजूद थी जिसने दूसरी दुनिया से हमारी दुनिया में प्रवेश किया और जिसका माध्यम मैं बनी’|
‘हाहाहा’!! रैना पागलों की तरह ठहाके लगा कर हंसने लगी|
‘कट दिस शिट रैना!! एनफ ऑफ़ दिस हॉगशिट! बताओ कैसे किया तुमने ये’!!
‘सोचा थोडा मैं भी तुम्हारे साथ खेल लूं’|
‘तुम क्या बोल रही हो मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा है’| प्रत्युष का दिमाग काम करना बंद कर चुका था|
रैना कमरे में रखी मोमबत्तियों में से एक की तरफ देखने लगी| प्रत्युष और विकास समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर रैना कर क्या रही है| कुछ ही देर में मोमबत्ती अपनी जगह पर थर्राने लगी|
दोनों लड़कों के मुंह खुले रह गए, रैना की दृष्टि मोमबत्ती पर गड़ी हुई थी| मोमबत्ती अपने स्थान से हिली और हवा में तैरने लगी| रैना की भावें हल्की सी हिली, मोमबत्ती हवा में ही टेढ़ी हुई और पिघला हुआ मोम फर्श पर गिरकर एक इबारत लिखने लगा|
F-U-C-K-Y-O-U
प्रत्युष और विकास मुंह बाए रैना को देख रहे थे|
‘इंसान की प्रोब्लम ये है कि जो उसके पास है वो उसकी शक्तियों में यकीन नहीं करता, लेकिन जो उसे दिखता नहीं, जिसका कोई वजूद नहीं उससे वो डरता है| तुमने साइकोकिनेसिस या टेलीकिनेसिस के बारे में सुना है’? रैना मुस्कुराते हुए बोली|
‘दिमाग की शक्ति से किसी भी वस्तु को बिना स्पर्श किये उसे उठाना या चलाना’!! प्रत्युष के मुंह से स्वतः ही निकला|
‘बिलकुल सही| टेलीकिनेसिस में इंसान का दिमाग मानसिक तरंगों को टेलीकाइनेटिक ऊर्जा में परिवर्तित करता है| इंसान की सोच, उसकी मानसिक तरंगे मैग्नेटिक वेव्स यानी चुम्बकीय शक्ति में ट्रांसफॉर्म होती हैं और बिना स्पर्श किये किसी भी वस्तु को अपनी जगह से उठा सकती हैं| साइंटिस्ट्स ने भी इस बात की पुष्टि की है कि टेलीकाइनेटिक एनर्जी द्वारा चीज़ों को स्पर्श किये बिना उन्हें अपनी मानसिक तरंगों से कण्ट्रोल करना संभव है’| रैना बोली|
‘ये असंभव है’!! प्रत्युष चिल्लाया|
‘कमाल है, अगर मैं बोलती कि ये किसी आत्मा का काम है तो तुम आसानी से मान लेते लेकिन मोमबत्ती मैने तुम्हारी नज़रों के सामने अपनी मानसिक तरंगों से हवा में हिलाई तो तुम उससे इनकार कर रहे हो’?
‘अपने दिमाग की टेलीकाइनेटिक एनर्जी को चार्ज करने और उससे किसी ऑब्जेक्ट को बिना स्पर्श किये उठाने में इंसान को सालों की कठिन मेहनत लगती है, उसके बाद भी लाखों-करोड़ों में कोई एक होता है जो ऐसा कर पाता है| तुमने रातों-रात ऐसा कैसे कर लिया’!!
‘इंसान का दिमाग अपने-आप में एक भूल-भुलैया है प्रत्युष| हम खुद अपनी शक्तियों को नहीं पहचानते| आम इंसान अपने दिमाग के बहुत ही कम प्रतिशत हिस्से का प्रयोग करता है, पागलों के दिमाग का सक्रीय प्रतिशत आम इंसान के प्रतिशत से कहीं अधिक होता है ये प्रूव हो चुका है| मेरे स्केज़ोफ्रेनिया ने मुझे विक्षिप्त बना दिया लेकिन मुझे टेलीकिनेसिस की शक्ति भी दे दी| शुरू में तो मुझे खुद भी यकीन नहीं हुआ कि मैं उस सिक्के को अपने दिमाग से चला रही हूँ| इसीलिए मैंने उसे चोरी से उठा के उसका प्रॉपर एग्जामिन किया’|
‘फिर अपने कमरे में वापस आने पर मुझपर फिर से मेरी बिमारी हावी होने लगी| उस दौरान मुझे अपनी इस शक्ति, अपनी इस क्षमता का एहसास हुआ| जब भी मैं आंदोलित होती थी, मेरी ये शक्ति जागृत होती थी| इसे साधना बेहद जटिल और पीड़ादायक काम था लेकिन इन कुछ महीनो में मैंने इसपर कितनी अच्छी कमांड बना ली है उसका नमूना तुमलोग देख ही चुके हो’|
‘तुमने जानते-बूझते, पूरी साजिश रच कर चैनल पर एक ऐसा विडियो डलवाया जोकि लोगों में अंधविश्वास को बढ़ावा देगा’| विकास बिफरते हुए बोला|
‘हहाहाहा…’ रैना का पागलों जैसा ठहाका एकबार फिर गूंजा|
‘ये इंसानी फितरत है विकास, लोग तथ्यों को या तो आस्था का लिबास पहनाते हैं या फिर अंधविश्वास का| सच सिर्फ सच होता है, आधी रात में सड़क पर नींद में निर्वस्त्र चल रही लड़की जैसा ही नंगा होता है सच’|
‘अब तुम करना क्या चाहती हो’? प्रत्युष सशंकित भाव में बोला|
‘दुनिया को वही सच देना चाहती हूँ जो उसे पसंद है’|
‘कौन सा सच’?
‘रैना एट मिडनाईट का आखरी विडियो’|
रैना मुस्कुराते हुए अपनी जगह से उठी|
‘मेरा दिमाग वीभत्सता की उन वर्जनाओं को पार कर चुका है जहां तक इंसानी परिधि है| इंसान से बुरी कोई परालौकिक शक्ति नहीं होती और मेरे जैसा इंसान को जो चाहिए उसे पाने के लिए वो कुछ भी कर सकता है|’
रैना ने अपने जिस्म से गाउन परे ढलक जाने दिया, वो एक बार फिर निर्वस्त्र थी| विकास और प्रत्युष आवाक थे| आखिर करना क्या चाहती थी रैना?
उनके कुछ समझ पाने से पहले ही रैना उनपर भूखे भेड़िये की तरह टूट पड़ी| सर्द रात के सन्नाटे में उनकी चीख पहाड़ों में गूँज उठी|
उस रात रैना एट मिडनाईट वेबचैनल पर दो विडियो अपलोड हुई| पहली औइजा बोर्ड वाली घटना की और दसरी विडियो वो थी जो विकास ने शूट की थी जिसमे रैना निर्वस्त्र अवस्था में जा रही थी और विकास चिल्ला रहा था कि रैना रानी बन चुकी है|
अगले दिन उस बंद लॉज से विकास और प्रत्युष की लाशें बरामद हुई| पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार दोनों की मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई थी और मरने से ठीक पहले दोनों ने किसी के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाए थे|
उस घटना के बाद रैना कभी किसी को नहीं दिखी| बस यक्षिणी के नए किस्सों ने जन्म ले लिया था| रानी नाम की एक परालौकिक यक्षिणी जिसने औइजा बोर्ड द्वारा दूसरी दुनिया से इस दुनिया में प्रवेश कर के रैना प्रधान के शरीर पर कब्ज़ा कर लिया था और जो अपने शिकार से शारीरिक सम्बन्ध बना कर उसे मार डालती है|
समाप्त.
Epilogue
Date: 31st December 2018,
Time: 07: 45 p.m.
विभोर ने घड़ी पर निगाह डाली, आठ बजने को थे और अब भी उसे ऊटी पहुँचने में काफी सफ़र तय करना बाकी था| विभोर के सेलफोन की रिंग बजी| कॉल प्रज्ञा का था|
‘जानू, वेयर द हेल आर यू’!
स्पीकरफोन ऑन करते ही अनुषा की खनखनाती आवाज़ गूंजी|
‘स्टिल ऑन द रोड स्वीटहार्ट! लगता है अब अगले साल ही तुम्हारे पास पहुंचूंगा’| विभोर नजरें कोहरे की घनी चादर के पार बामुश्किल नजर आते हाई-वे पर गड़ाए हुए बोला|
‘हाहाहा…वैरी फनी’! अनुषा खिजियाए स्वर में बोली|
‘यार इतना घना कोहरा हो रखा है कि ड्राइव करने में नट-बोल्ट टाइट हो गए हैं, ऊपर से ठंड इतनी है कि कुल्फी जमी जा रही है’|
‘तुम्हारी ठंड का इलाज है मेरे पास डार्लिंग’| अनुषा की आवाज़ में गज़ब की मादकता थी, विभोर अनुषा के पास पहुँच कर उसे अपनी बाहों में भींच कर उसके हुस्न में डूब जाने की कल्पना करने लगा|
अब उसे ठंड उतनी परेशान नहीं कर रही थी|
‘योर न्यू इयर इज़ गोइंग टू बी स्मोकिंग हॉट’| अनुषा शरारत भरे लहजे में बोली|
‘कीप इट सिज़्लिंग बेबी, आय एम कमिंग’!! विभोर की आवाज़ में आतुरता और अधीरता साफ़ झलक रही थी|
कॉल कट करते ही विभोर ने एक्सीलिरेटर पर दबाव बढ़ा दिया| अब वो अनुषा के पास पहुचने में और देरी नहीं करना चाहता था|
कोहरा काफी घना था लेकिन न्यू इयर इव होने की वजह से हाई-वे बिलकुल सुनसान था| उसे पता था सारी दुनिया नए साल का स्वागत करने को तैयार बैठी थी| विभोर मन ही मन मुस्कुराया, उसके नए साल की शुरुआत भी धमाकेदार होने वाली थी|
अनुषा को डेट करते हुए उसे लगभग एक साल होने को था| नए साल में, घड़ी के कांटे के बारह पर चोट करते ही वो उसे शादी के लिए प्रॉपोज़ करने वाला था| उसने अपनी पैन्ट की जेब टटोली, कहीं डायमंड रिंग रखना तो नहीं भूल गया! रिंग अपनी जगह थी| न्यू इयर पर प्रॉपोज़ और वैलेंटाइन्स-डे पर शादी, यही प्लान था विभोर का|
विभोर की विचारों की तंत्रा को एक झटका लगा| कोहरे की मोटी चादर को चीरती हुई उसकी कार की हेडलाइट्स एक साए पर पड़ी जोकि उसकी गाडी के ठीक आगे खड़ा था और हाथ हिला रहा था| साया एक लड़की का था| विभोर ने हडबडाकर ब्रेक लगाए|
लड़की भागते हुए ड्राइविंग सीट की तरफ की विंड स्क्रीन पर पहुंची| विभोर ने गाडी का शीशा हल्का सा नीचे किया, बाहर से जमा देने वाली सर्द हवा के झोंके ने कार में प्रवेश किया| विभोर को सिहरन महसूस होने लगी|
‘क्या आप प्लीज़ मुझे ऊटी तक लिफ्ट दे सकते हैं, मेरी गाडी खराब हो गई है’| लड़की हाई-वे के किनारे खड़ी अपनी कार की तरफ इशारा करते हुए बोली|
विभोर के मन में झिझक थी| रात के उस समय, सुनसान हाई-वे पर एक अनजान, खूबसूरत लडकी का यूं लिफ्ट माँगना किसी को भी संदेहास्पद लगेगा| लड़की उसकी भावनाओं से अनभिज्ञ नहीं थी|
‘मैं समझ सकती हूँ कि आप एप्रिहेन्सिव हो रहे हैं, बट मैं कोई चोर या ठग नहीं हूँ| सर प्लीज़ ट्रस्ट मी, इस समय इस हाई-वे पर मुझे कोई भी लिफ्ट नहीं मिलेगी| मैं एक घंटे से वेट कर रही हूँ, कुछ गाड़ियां यहाँ से गुज़री भी लेकिन एक भी नहीं रुकी’|
विभोर अजीब कशमकश में पड़ गया था|
‘प्लीज़ सर…प्लीज़…प्लीज़…प्लीज़’!! लड़की ने मासूमियत से कहा|
विभोर खुद को रोक नहीं पाया|
‘ऑल राईट, हॉप इन’!
‘थैंक्स सर, गॉड ब्लेस यू’| लड़की की आखें चमक उठी, उसके चेहरे पर मुस्कान फैल गई|
‘वाट्स योर गुड नेम’? सफ़र के दौरान विभोर ने असहजता कम करने के लिए पूछा|
‘रायमा सर| रायमा शास्त्री’|
‘रायमा| व्हाट ए लवली नाम’|
विभोर ने गौर किया कि रायमा जबसे गाडी पर सवार हुई थी तबसे नजर बचा कर उसे ही देख रही थी| उसकी नज़रों में एक अजीब सी कशिश थी|
‘वन्स अगेन थैंक्स फॉर द लिफ्ट सर, अगर आप नहीं होते तो शायद मेरे न्यू इयर की शुरुआत हाई-वे पर ठण्ड से ठिठुरते हुए होती’| रायमा ने मुस्कुराते हुए कहा और गेयर पर रखे हुए विभोर के बाएं हाथ पर हौले से अपना हाथ रख दिया|
‘दैट्स ऑलराइट’| विभोर ने एक औपचारिक मुस्कान दी और अपना हाथ रायमा के हाथ के नीचे से खींच लिया|
‘नो, आय रियली मीन इट’| रायमा विभोर की तरफ झुकते हुए बोली| विभोर थोडा असहज महसूस कर रहा था|
‘नॉट ए बिग डील रायमा, मैं लिफ्ट नहीं देता तो कोई और दे देता’|
‘आय सीरियसली डाउट दैट| आपने शायद इन हाई-वेज़ के बारे में प्रचलित किस्से नहीं सुने हैं’|
‘कैसे किस्से’?
‘ऐसा कहा जाता है कि बैंगलोर-मुन्नार-ऊटी हाई-वे पर एक यक्षिणी भटकती है जो आती-जाती सवारियों से लिफ्ट लेती है, अगर किसी ने गलती से उसे लिफ्ट दे दी तो पहले वो उसे सिड्यूस करती है, उसके बाद उसके साथ फिजिकल रिलेशन बनाती है और फिर उसे मार डालती है’|
विभोर के दिमाग में घंटी सी बजी, उसने भी ऐसे कुछ किस्से सुने तो थे|
‘ये सब सिर्फ मन-गढ़ंत बातें हैं, ऐसा कुछ नहीं होता’| विभोर बात हल्के में लेते हुए बोला|
‘आपको यक्षिणी पर यकीन नहीं है’? रायमा विभोर के और करीब आते हुए बोली| उसकी आवाज़ में अजीब सी कशिश थी| विभोर बुरी तरह असहज महसूस कर रहा था| वो जल्द से जल्द ऊटी पहुँच कर रायमा से पीछा छुडाना चाहता था|
‘आपने मेरी बात का जवाब नहीं दिया| क्या आपको यक्षिणी पर यकीन नहीं है’? रायमा ने पूर्व की भाँती ही पूछा|
‘म..म…मैं नहीं जानता’| विभोर के माथे पर पसीने की बूंदे उभरी|
‘हहाहाहा’ रायमा की खनखनाती हुई सर्द हंसी कार में गूंजी|
‘कोई बात नहीं, जल्द ही तुम्हे यकीन हो जाएगा’| रायमा ने कहा और अपना हाथ विभोर के गाल पर फिराया| विभोर के शरीर ने झुरझुरी ली|
रायमा ने पागलों की तरह अट्टहास लगाई| विभोर को एहसास हुआ कि उसकी मौत उससे सिर्फ कुछ पलों की दूरी पर है| कोहरे से भरे हाई-वे पर गाडी बुरी तरह लहरा रही थी| एक क्षण के अंदर विभोर से गाडी के दरवाज़ों का ऑटोमेटिक डोर लॉक का पुश बटन दबाया और गाडी हाई-वे के किनारे की तरफ की| रायमा के कुछ समझ पाने से पहले ही विभोर ने उसे ज़बरदस्त धक्का दिया| धक्का इतना फोर्सफुल था कि रायमा गाडी से बाहर जा गिरी| विभोर ने फुल स्पीड में गाडी भगा दी|
उसकी सासें धौंकनी की तरह चल रही थीं, शरीर पसीने से तर बतर था, पूरे रास्ते विभोर ने एक पल के लिए भी एक्सीलिरेटर से अपना पैर उठने ना दिया| उसने गाडी सीधे ऊटी में अनुषा के कॉटेज पहुँच कर रोकी|
अनुषा ने दरवाज़ा खोला, वो एक बाथरोब पहने हुए थी और बला की खूबसूरत लग रही थी| विभोर तब भी दमे के मरीज़ की तरह हांफ रहा था| वो अन्दर दाखिल हुआ|
अनुषा पेट पकड़ कर हँसते-हस्ते बेड पर गिर गई|
‘यार मैं एक डायन के हाथों मरते-मरते बचा हूँ और तुम हंस रही हो’| विभोर आहत भाव से बोला|
‘मैं तो हंस रही हूँ लेकिन तुम ये देखकर रोने वाले हो’| अनुषा बड़ी मुश्किल से अपनी हंसी रोकते हुए बोली और उसने अपना मोबाइल विभोर की तरफ बढ़ा दिया|
मोबाइल पर यू-ट्यूब एप खुला था जिसपर ‘प्रैंक गॉन रॉंग’ विडियो खुला था| विडियो मात्र आधे घंटे पहले डाला गया था लेकिन इतनी ही देर में उसके हज़ारों व्यूज़ हो चुके थे| उस विडियो में रायमा विभोर के धक्के से गाडी से बाहर गिरती नजर आ रही थी|
‘य..ये क्या है’? विभोर की कुछ समझ ना आया|
‘ये लोग यू-ट्यूबर्स हैं जो ऐसे प्रैक्टिकल प्रैंक्स करके उनके विडियो यू-ट्यूब पर अपलोड करते हैं| न्यू-इयर इव परफेक्ट टाइम है प्रैंक्स के लिए|’
‘यानी…यानी वो लड़की मुझसे प्रैंक कर रही थी…वो…वो…यक्षिणी नहीं थी’!! विभोर अपना सर पकड़ते हुए बोला|
‘हाहाहा…नहीं, वो बेचारी अपनी किस्मत को रो रही होगी| क्या जोर का धकेला है तुमने उसे गाडी से बाहर’| अनुषा फिर से बेड पर लोट-पोट होते हुए बोली|
‘हुंह! ऐसे वाहियात प्रैंक्स करने वालों के साथ ऐसा ही होना चाहिए| सर्व देम राईट’| विभोर झुंझलाते हुए बोला|
‘हाहाहा…लेकिन बेचारी का विडियो तो ट्रेंडिंग हो गया’| अनुषा पेट पकड़ते हुए बोली|
‘तुम्हे बहुत हंसी आ रही है, और ये क्या हुलिया बना रखा है! इतनी ठंड में न्यू इयर नहाते हुए मनाना है क्या’? विभोर अनुषा के बगल में बेड पर ढेर होते हुए बोला|
‘बाथटब में तुम्हारे लिए गर्म पानी तैयार है| विडियो देखते ही मैं समझ गई थी यू आर गोइंग टू नीड दिस’| अनुषा इठला कर उठते हुए बोली|
‘नहाना मुझे है तो मैडम बाथरोब में क्यूँ हैं’? विभोर शरारती अंदाज़ में बोला|
‘बिकॉज़ आय हैव ए सरप्राइज़ फॉर यू’| अनुषा ने अपना बाथरोब एक तरफ से खोल कर दिखाया, उसने अन्दर कुछ पहना हुआ नहीं था|
विभोर को अपनी सारी थकान काफूर होती महसूस हुई| उसने फटाफट अपने कपड़े उतारे और वाशरूम में घुस गया| बाथटब में बैठते ही उसे महसूस हुआ कि उसे उस समय गर्म पानी की कितनी सख्त ज़रूरत थी| उसे अभी भी उस प्रैंक वाली लड़की पर ज़बरदस्त गुस्सा आ रहा था|
‘वैसे मुझे नहीं पता था कि तुम अन्धविश्वासी हो विभोर’| वाशरूम के बाहर से अनुषा की आवाज़ आई|
‘इन सब चीज़ों से डर तो लगता ही है| कसम से ढोल फटने की फीलिंग आ रही थी| लेकिन अब छोडो भी वो बेकार की बात और जल्दी से आओ’| विभोर बाथटब में अंगड़ाई लेते हुए बोला|
अनुषा वाशरूम के दरवाज़े पर खड़ी नजर आई|
‘अच्छा अगर वाकई में यक्षिणी तुम्हारे सामने आ जाती तो तुम क्या करते’?
‘फिर मैं क्या करता, जो करती यक्षिणी ही करती’| विभोर बेपरवाही से बोला|
अनुषा के चेहरे पर एक विषैली मुस्कान उभरी|
‘सही कहा विभोर, जो करती वो सो-कॉल्ड यक्षिणी ही करती’| अनुषा की आवाज़ एकाएक बेहद सर्द और भारी हो गई |
विभोर की कुछ समझ ना आया|
बाथटब के पास ही वाशबेसिन के किनारे पर रखा हुआ हेयर ड्रायर यूं थर्राने लगा जैसे वहां भूकम्प आ रहा हो| अनुषा एकटक हेयरड्रायर को देख रही थी, उसके चेहरे पर बेहद जहरीली मुस्कान थी| विभोर का ध्यान हेयरड्रायर के स्विच की तरफ गया, उसके नेत्र भय से फैल गए, स्विच ऑन था| विभोर ने उठने का उपक्रम किया लेकिन उसके बाथटब से उठ पाने से पहले ही वाशबेसिन के किनारे पर रखा हेयरड्रायर घरघराते हुए पानी से भरे टब में गिरा|
पूरा वातावरण विभोर की ह्रदयविदारक चीख से गूँज उठा|
अनुषा के चेहरे के भाव बता रहे थे कि उसे वो चीत्कारें सुनकर घोर आत्मिक सुख की अनुभूति हो रही थी|
‘यक्षिणी सिर्फ हाई-वे पर ही शिकार नहीं करती’| उसने खिलखिलाते हुए कहा|
समाप्त|
