James Gunn kaun hai?
दार्जीलिंग से कुर्सेओंग जाने वाली hill cart road उस तूफ़ानी रात जैसे ठाने बैठी थी कि अनाहिता को उसकी मंज़िल तक पहुँचने नहीं देगी. मूसलाधार बारिश, रात का अंधकार और पहाड़ी रास्ता एक पल के लिए भी अनाहिता की नज़रें सड़क से हटने नहीं दे रहे थे फिर भी उसने एक उड़ती नज़र car dashboard के digital clock पर डाली. रात के ग्यारह बज रहे थे. मुश्किल से डेढ़ घंटे के रास्ते पर driving करते हुए उसे लगभग सवा दो घंटे बीत चुके थे.
क्या वो समय रहते अपने destination तक पहुँच पाएगी? अगर वो समय रहते ना पहुँची तो आदि का क्या होगा?…यह ख़याल आते ही अनाहिता के शरीर ने इतनी ज़ोर की झुरझुरी ली कि एक पल को उसके हाथ car की steering wheel पर फिसल गए. फिसलन भरे पहाड़ी रास्ते पर car के tyres रगड़ खाने से वातावरण में बारिश के स्थायी शोर को चीरती एक तीखी आवाज़ गूंजी. अनाहिता के पाँव अगर फ़ौरन ही break पर कस ना गए होते तो उसकी गाड़ी खाई में जा चुकी होती. पहाड़ी ढलान से एक inch के फ़ासले पर रुकी गाड़ी में सवार अनाहिता के दिल की धड़कन car के wind screen पर तेज़ी से चलते wipers के साथ एक अलग तारतम्य बना रही थीं. अपने काँपते शरीर और भयभीत अंतर्मन को स्थिर करने के इरादे से अनाहिता ने एक cigarette सुलगाई. तीन-चार कश खींच कर उसने अपना सर seat के head rest से टिका लिया और धीरे-धीरे नाक से धुएँ की दोनाली छोड़ने लगी. उसकी बंद आँखों के सामने आदि का अक्स तैर गया. उसने wind screen थोड़ी नीचे कर के cigarette बाहर फेंका और car एक बार फिर रास्ते पर बढ़ा दी.
बारिश के थपेड़े और रात के अंधेरे में उस रास्ते पर कुछ भी नज़र आना लगभग नामुमकिन था फिर भी लगभग पंद्रह मिनट तक drive करने के बाद उसे दूर सड़क के किनारे कहीं एक पीला बल्ब जलता दिखाई दिया. क्या यही उसकी मंज़िल थी? हाँ यकीनन यही थी!
British era architecture स्टाइल में बने घर व इमारतें दार्जीलिंग में अब भी आराम से दिख जाते हैं लेकिन कुर्सेओंग जैसे छोटे क़स्बे में ये आम बात नहीं. उस इमारत का architecture उसके ब्रिटिश काल में बने होने की चुग़ली कर रहा था. देखने से ही पता लगता था कि वो शायद कोई पुश्तैनी घर था जिसे motel में तब्दील कर दिया गया था. बाहर एक पुराना सा जंग लगा sign board था जिसपर रंग-बिरंगे अक्षरों में ‘Broadway Motel’ लिखा हुआ था जो अब बदरंग हो चुके थे और glow-sign की ज़्यादातर lights फूटी हुई थीं. अगर उस इमारत के पास आकार नहीं देखा जाए तो वो sign board नज़र भी नहीं आता. जो पीला bulb अनाहिता ने देखा था वो इमारत के portico में जल रहा था. उसके सामने glass door था जिससे अंदर का नजारा दिखाई दे रहा था. अंदर एक बड़ा सा hall था जिसमें table और कुर्सियाँ लगा कर उसे cafe` का स्वरूप दे दिया गया था.
इमारत के ऊपर के कमरे शायद guests के ठहरने के लिए इस्तेमाल किए जाते थे लेकिन फ़िलहाल वहाँ घुप्प अंधेरा था. नीचे cafe` के अंदर दो-एक tables पर कुछ लोग बैठे नज़र आ रहे थे. अनाहिता ने इमारत के बग़ल की ख़ाली जगह में car park की और बारिश स बचने के लिए तेज़ी से cafe` की ओर भागी. हालाँकि cafe` के अंदर कदम रखने तक वो सर से पैर तक भीग चुकी थी. अनाहिता के साथ एक छोटा trolly bag था जिसे वो यूँ सीने से चिपकाए हुए थी जैसे उसमें कोई bomb हो जो bag को अनाहिता से अलग करते ही फट जाएगा.
अनाहिता ने एक उड़ती नज़र cafe` में फिराई. वहाँ सिर्फ़ तीन tables पर लोग बैठे नज़र आ रहे थे. पहली table पर एक लगभग सत्तर साल का वृद्ध था जो हाथ में कोई मोटी जासूसी novel लिए हुए ऊँघ रहा था. रह-रह कर वृद्ध के तेज़ व धीमे होते खर्राटे लयात्मक अन्दाज़ में cafe` में गूंज रहे थे. दूसरी table पर दो लड़के बैठे थे जिनकी उम्र पच्चीस से तीस के बीच होगी. दोनों शक्ल सूरत व पहनावे से young corporate professionals लग रहे थे जो शायद vacation या work trip पर वहाँ आए थे. उनकी table पर beer की कई ख़ाली cans रखी हुई थीं और cigarette butts से ash tray ऊपर तक भारी हुई थी. फ़िलहाल दोनों नशे में झूमते हुए किसी बात पर बहस कर रहे थे. बहस के बीच में वो table पर रखी serving tray से roasted chicken उठा कर एक बड़ा टुकड़ा नोचते और beer के साथ उसे गले से नीचे उतारते हुए दोबारा बहस में लग जाते.
तीसरी table पर एक लगभग पचास साल का आदमी बैठा था. उसके सर पर salt and pepper खिचड़ी बाल थे जो बिल्कुल बारीक कटवाए हुए थे लेकिन चहरे पर घनी व बड़ी दाढ़ी-मूँछ थी जो लगभग उसके आधे चेहरे को ढँक रही थीं. उसका क़द लम्बा और शरीर मज़बूत दिखाई देता था और उसे देखते ही उसके किसी अपराधी या shady character होने का एहसास होता था. उसने मोटे frame का चश्मा लगाया हुआ था जिससे उसकी छोटी-छोटी लेकिन शिकारी जैसी तीखी आँखें अनाहिता को ही घूर रही थीं. अनाहिता ने सकपका कर अपनी नज़रें उससे हटा लीं और तेज़ कदमों से चलती हुई cafe` की सबसे आख़री table पर जा बैठी.
Cafe` की ज़्यादातर tables ख़ाली होने के बावजूद अनाहिता ने ये table चुनी थी क्योंकि यहाँ से वो cafe` में बैठे सभी लोगों के साथ-साथ entrance और बाहर portico पर नज़र रख सकती थी. Entrance के glass door के अलावा वहाँ एक बड़ी French glass window थी जो अनाहिता की table से बिल्कुल लगी हुई थी. यहाँ से motel के portico, बाहर सामने के area के अलावा main road भी साफ़ दिखाई देती थी. हालाँकि रात और बारिश के कारण portico की पीली रौशनी से परे कुछ ख़ास नज़र नहीं आ रहा था फिर भी, किसी गाड़ी के वहाँ आने पर उसे पहले ही पता चल जाता.
अनाहिता ने trolly bag अपने बग़ल की कुर्सी पर रख दिया. Cafe` में एक तरफ़ counter था जिसके पीछे बड़ा सा Menu और rate board लगा हुआ था. वहाँ एक छोटा दरवाज़ा भी था जिसपर पर्दा लगा हुआ था, अनाहिता ने अंदाज़ा लगाया कि इसके पीछे kitchen होगा. फ़िलहाल counter ख़ाली था, अनाहिता ने इधर-उधर इस आस में देखा कि शायद कोई बैरा दिख जाए लेकिन ऐसा लगता था जैसे cafe` में मौजूद उन चार लोगों के अलावा वहाँ कोई भी नहीं था. Cafe में एक wall से लगे हुए काफ़ी बड़ा व ऊँचा bookshelf था जिसपर वहाँ बैठने वाले customers के लिए newspapers, magazines, comic books के अलावा अलग-अलग genre की ढेरों किताबें सजी हुई थीं. इसके अलावा एक तरफ़ ऊपर को जाती सीढ़ियाँ थीं जो शायद ऊपर guest rooms को जाती थीं.
अनाहिता ने देखा कि अपराधी जैसा नज़र आने वाला शख़्स अब भी उसे ही घूर रहा था. अनाहिता को देखते हुए वो अपने सामने रखे coffee cup से एक चुस्की लेता फिर बग़ल में रखी diary व pen उठा कर कुछ लिखने लग जाता. इसके बाद वो फिर वही प्रक्रिया दोहराता. उस शख़्स से नज़रें मिलते ही अनाहिता ने अपनी नज़रें हाथा लीं. वो शख़्स फिर diary में कुछ लिखने लगा.
अनाहिता ने अपनी wrist watch पर नज़र डाली, रात के साढ़े ग्यारह बज रहे थे. उसने चैन की साँस ली. ख़राब मौसम व रास्ते के बावजूद वो तय समय से आधा घंटा पहले पहुँच गयी थी. उसका दिल पसलियों पर धाड़-धाड़ चोट कर रहा था. अनाहिता को एहसास ही नहीं हुआ की कब बेख़याली में उसने table पर रखा salt dispenser उठा लिया और उसे उँगलियों के बीच fidget करने लगी. Dispenser से नमक जब उसके गीले हाथों और कपड़ों पर गिर कर चिपक गया तब उसे ध्यान आया कि वो क्या कर रही है. Dispenser वापस table पर रखते हुए अनाहिता खुद को साफ़ करने की कोशिश करने लगी, उसने देखा कि वो अपराधी जैसा दिखने वाला शख़्स लगातार उसके हर एक action को देख रहा था और अपनी diary में कुछ लिख रहा था जैसे उसकी हर movement note कर रहा हो. अनाहिता के मन में अचानक एक विचार कौंधा. कहीं ये शख़्स वही तो नहीं था जिसकी प्रतीक्षा अनाहिता कर रही थी? ये ख़याल आते ही अनाहिता को यूँ लगा जैसे उसके हाथ-पैर बेजान हो गए हों. उसका चेहरा डर से पीला और फिर सफ़ेद पड़ गया. उसने काँपती उँगलियों से बग़ल में रखे trolly bag की front sleeve से अपना mobile phone निकाला और एक message type करने लगी.
‘I AM HERE’.
अनाहिता ने message send कर दिया. आधे minute बाद उस अपराधी जैसे दिखने वाले शख़्स के mobile पर message notification आया. अब शक की कोई गुंजाइश नहीं थी, ये वही था! बारिश में बुरी तरह भीगे होने और वातावरण में ठीक-ठाक ठंड होने के बावजूद अनाहिता के माथे पर ठंडे पसीने की बूँदें उभर आयीं. अनाहिता ने डर कर अपनी आँखें बैंड कर लीन, उसकी बंद आँखों के सामने आदि का मासूम चेहरा उभरा. अपने बेटे के लिए उसे ये करना ही होगा! अपनी इच्छाशक्ति का हर कतरा जुटा कर अनाहिता अपनी table से उठी और trolly bag के तेज़ कदमों से उस शख़्स की table की तरफ़ बढ़ने लगी. वो शख़्स लगातार उसे ही घूर रहा था, अनाहिता भरसक प्रयास किए हुए थी कि उसकी डर से बेजान प्रतीत होती टांगें कहीं उसका साथ ना छोड़ दें. उस शख़्स के eye contact से बचने की कोशिश करती हुई अनाहिता उसकी table तक पहुँची.
अनाहिता- ‘Stop playing games with me. मैं तुम्हारे बताए time से पहले ही पैसे ले कर आ गयी हूँ.’
अनाहिता ने देखा कि पहली बार उस शख़्स के चेहरे पर असमंजस के भाव उभरे.
शख़्स- ‘Excuse me, do I know you?’
दो पल के लिए अनाहिता और वो शख़्स दोनों एक-दूसरे की आँखों में झांकते रहे लेकिन दोनों की आँखों में सिर्फ़ सवाल थे, जवाब नहीं. ऐन ही पल अनाहिता की आँखों में तैरते सवाल उसके उमड़ते आंसुओं में डूब गए और उनकी जगह विनती ने ले ली.
अनाहिता- ‘मैं पैसे ले आयी हूँ, पूरे पचास लाख हैं…म…मैंने किसी से कुछ भी नहीं कहा. अपना घर, गहने सब कुछ बेच दिया. देखो प्लीज़ मुझे मेरा बेटा दे दो…म…मैं तुम्हें और पैसे दूँगी. कुछ shares and funds हैं, उनसे बीस-तीस लाख और मिल जाएँगे लेकिन थोड़ा समय लगेगा. तुम बस मेरे आदि को छोड़ दो, मैं बाक़ी पैसे मिलते ही दे दूँगी…मेरे बेटे को छोड़ दो!’
अनाहिता के लिए अपने भावावेग को नियंत्रित कर पाना अब असम्भव था, वो उस शख़्स के सामने वाली chair पर बेजान गुड़िया सी बैठ गयी और फफक-फफक कर रोने लगी. उस शख़्स ने table पर रखी mineral water की pet bottle उठायी और अनाहिता की तरह बढ़ाते हुए बोला.
शख़्स- ‘आपको कोई confusion हुई है. आप शायद मुझे कोई और समझ रही हैं…शायद कोई kidnapper जिसने आपके बेटे को kidnap किया है, if I’m not wrong.’
अनाहिता अवाक सी कभी उस शख़्स को और कभी पानी की बोतल को देख रही थी.
शख़्स- ‘पानी पीजिए, डरिये नहीं, मैं आपको कोई नुक़सान नहीं पहुँचाऊँगा.’
पानी की बोतल उठाने के बजाए अनाहिता अपना हाथ तबले पर पटकते हुए बोली.
अनाहिता- ‘मैंने कहा ना, मुझसे खेल मत खेलो. मेरा बेटा आदि कहाँ है?’
अपने रोने की आवाज़ दबाने के लिए अनाहिता ने अपने दोनों हाथों में चेहरा छुपा लिया और सिसक कर रोने लगी. उसकी सिसकारियाँ और दूसरे table पर सो रहे वृद्ध के खर्राटे बाहर से आते तेज़ बारिश के शोर के साथ मिल कर शांत cafe` में एक अजीब सा वातावरण बना रहे थे जिसमें बीच-बीच में beer की पिनक में बहस कर रहे लड़कों का शोर भी शुमार हो रहा था.
शख़्स- ‘मैं एक बार फिर कहता हूँ आप मुझे कोई और समझ रही हैं.’
अपने long coat की breast pocket से उस शख़्स ने एक police id card निकाला और table पर अनाहिता की तरफ़ सरका दिया. अपने आंसू पोंछ कर अनाहिता ने id card उठाया. उसके माथे पर confusion भरी शिकन आयी.
अनाहिता- ‘इंस्पेक्टर देबब्राता गंगोपाध्याय, स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग ऑफ़िसर, क्राइम ब्रांच! लेकिन..लेकिन मैंने तो आपको किड्नैपर समझा था. अभी कुछ देर पहले मैंने जब किड्नैपर को मेरे यहाँ पहुँचने का message किया था तब आपके mobile का message notification बजा था.’
देबब्राता ने अपना मोबाइल निकाला और message खोल कर अनाहिता के सामने रख दिया.
देबब्राता- ‘ये mobile company वाले यहाँ के मच्छरों से ज़्यादा खून चूसते हैं. आधी रात को caller tune भला कौन बेवक़ूफ़ set करने के message देखता है बताइए.’
अनाहिता का ध्यान देबब्राता की बात में नहीं था, वो जैसे अपने आप से ही बड़बड़ायी.
अनाहिता- ‘आप किड्नैपर नहीं हैं, आप पुलिस वाले हैं. मुझसे गलती हो गयी, मुझे यहाँ आपके table पर नहीं आना चाहिए था. आपसे बात नहीं करनी चाहिए थी, कहीं उस किड्नैपर ने देख लिया तो वो पैसे लेने नहीं आएगा. उसे लगेगा कि मैं पुलिस अपने साथ ले कर आयी हूँ. कहीं वो मेरे आदि को…नहीं…नहीं.’
अपनी बात अधूरी छोड़ कर अनाहिता वहाँ से जाने के लिए उठ खड़ी हुई. देबब्राता ने फुर्ती से उसका हाथ पकड़ लिया और उसे बैठाते हुए बोला.
देबब्राता- ‘बैठ जाइए. मैंने कहा ना मैं आपकी मदद कर सकता हूँ. मुझे लगता है कि आप और मैं एक ही अपराधी का इंतज़ार कर रहे हैं. आप अपनी बात मुझे ज़रा detail में समझाइये.’
अनाहिता का गला फिर से रुंध गया. वो देबब्राता से याचना करते हुए बोली.
अनाहिता- ‘मुझे आपकी कोई सहायता नहीं चाहिए. देखिए आप भूल जाइए कि मैंने आपसे कुछ भी कहा और मेरा matter मुझे मेरे तरीक़े से sort out करने दीजिए. आपके साथ involve होकर मैं अपने बेटे की जान ख़तरे में नहीं डाल सकती.’
देबब्राता- ‘आपके बेटे की जान वैसे भी ख़तरे में है.’
अनाहिता- ‘What do you mean?’
देबब्राता- ’जिस अपराधी के पीछे मैं हूँ उसने आज तक अपने एक भी victim को ज़िंदा नहीं छोड़ है. आप जैसे लोग समय रहते extortion और kidnapping case police में report नहीं करते, सिर्फ़ इस डर में कि कहीं मुजरिम आपके परिवार वालों को मार ना दे लेकिन इसके जैसे मुजरिम अपने पीछे जुर्म का हर सुबूत मिटा देते हैं. कुछ बचता है तो सिर्फ़ लाशों का कारवाँ और उम्र भर का guilt कि काश हमने समय रहते पुलिस की मदद ले ली होती.’
अनाहिता अपना सर पकड़ कर बैठ गयी. उसमें अब हिलना तो दूर, ज़बानी प्रतिवाद करने की ताक़त भी शेष ना थी.ग्यारह बज कर चालीस मिनट हो चुके थे. कुछ ही देर में बारह बजने वाले थे. अगर इंस्पेक्टर सच कह रहा था तो अनाहिता के पास फ़ैसला करने के लिए बहुत ही कम समय था. उसने देखा कि इंस्पेक्टर अपनी diary में फिर कुछ लिख रहा था.
अनाहिता- ‘उस अपराधी को पकड़वाने और अपने बेटे की जान बचाने के लिए मुझे क्या करना होगा?’
देबब्राता- ‘सबसे पहले मुझे सिलसिलेवार ढंग से सारा माजरा बताइए.’
अनाहिता- ‘मेरा नाम अनाहिता है. कोलकाता में मेरा handicraft export का business है. दस साल पहले शादी हुई थी…love marriage! आठ साल पहले आदि हुआ, five years back my husband passed way in a car accident. मेरे लिए ज़िंदा रहने की सिर्फ़ एक ही वजह है, मेरा बेटा आदि.’
अनाहिता के बोलने के साथ-साथ देबब्राता की pen भी तेज़ी से diary पर खिंचती चली जा रही थी.
देबब्राता- ‘आदि का किड्नैप कब और कहाँ हुआ?’
अनाहिता- ‘परसों सुबह. हम कोलकाता से दार्जीलिंग छुट्टियाँ मनाने आए थे. सुबह हम बतासिया लूप पर थे. आदि एक पल मेरे साथ था, मेरे मना करने पर भी वो तेज़ी से भागते हुए मेरी नज़रों से ओझल हुआ और फिर….मैं घंटों तक पागलों की तरह उसे ढूँढती रही. फिर उस किड्नैपर का call आया और उसने मुझसे आदि के बदले ransom demand की. Ransom ले कर आने के लिए उसने यही जगह बताई थी, दार्जीलिंग से कुर्सेओंग आते हुए पुराना ‘Broadway Motel’
देबब्राता सबकुछ diary में note करता चला गया. फिर आश्वासन भरे लहजे में अनाहिता से बोला.
देबब्राता- ‘Don’t worry Anahita. I promise you, मैं आदि को सही-सलामत तुम्हारे पास ले कर आऊँगा.’
उसकी आवाज़ में एक सच्चाई, एक conviction था जिसे अनाहिता ने साफ़ महसूस किया.
देबब्राता- ‘तुम्हें बिल्कुल भी घबराने की ज़रूरत नहीं है. उन दोनों लड़कों को देख रही हो. वो दोनों असल में under cover police officers हैं.’
अनाहिता ने चौंक कर उन लड़कों की ओर देखते हुए कहा.
अनाहिता- ‘लेकिन ये लोग तो नशे में हैं.’
देबब्राता- ‘ऐक्टिंग कर रहे हैं. वास्तव में पूरी तरह सजग और चौकन्ने हैं….well, पूरी तरह नहीं, लड़कों ने कुछ beer तो पी ही है but they’re tough like stallion.’
अनाहिता और देबब्राता को अपनी तरफ़ देखता देख कर लड़कों की नज़रें भी उनकी table पर गयी. देबब्राता ने हौले से उनकी तरफ़ देखते हुए हाथ हिलाया. लड़कों ने भी हाथ हिला कर प्रत्युत्तर दिया. अनाहिता ने सवाल किया.
अनाहिता- ‘अब मुझे क्या करना होगा?’
देबब्राता- ‘कुछ भी नहीं. तुम वापस अपनी table पर जा कर बैठ जाओ, जैसे हमारे बीच कोई बात हुई ही नहीं. फिर हम उस कमीने के आने का इंतज़ार करेंगे.’
देब्रोतो ने अनाहिता से कहा उसके बाद ज़ोर से आवाज़ लगाई.
देबब्राता- ‘फ़िलिप! ओ फ़िलिप!! देख कस्टमर आयी है, मैडम को coffee serve करो और हमारे नौजवानों के लिए एक और round beer!’
अनाहिता ने उलझन भरे अन्दाज़ में पलट कर देखा. Counter के पीछे एक छोटा सा दरवाज़ा था जिसपर एक भारी पर्दा लगा हुआ था. पर्दा हटा कर एक साठ-पैंसठ साल का छोटे क़द और इकहरे बदन का दुबला-पतला सा आदमी बाहर झांका. इसका रंग कोयले सा काला था. सर पर बहुत कम बाल थे और चहरे पर हफ़्ते भर बढ़ी हुई stubble. इसके बाल बिलकुल सफ़ेद थे और आँखें इतनी पीली जैसे उसे jaundice हुआ हो. उसकी आँखें बता रही थीं कि वो नींद और नशे से धुत्त था और देबब्राता की आवाज़ पर बहुत मुश्किल से उठ कर वहाँ आया था.
देबब्राता- ‘ये फ़िलिप है. इस Broadway Motel का caretaker. दिन में यहाँ और भी waiter होते हैं लेकिन रात में यहाँ फ़िलिप अकेला होता है. आप अपनी table पर बैठिए अनाहिता, मैं coffee भिजवाता हूँ.’
देबब्राता के कहते-कहते फ़िलिप लड़खड़ाते कदमों से चलता हुआ उसकी table तक आ गया, उसकी shirt ने आख़री बार पानी और detergent का मुँह कब देखा था कह पाना मुश्किल था. उसके पास से आती पसीने और सस्ती देशी शराब की तीव्र दुर्गंध से अनाहिता को उबकाई आने लगी. नशे से लड़खड़ाता फ़िलिप खुद को सोबर दिखाने की भरसक लेकिन विफल कोशिश कर रहा था. उसने सर झुका कर अनाहिता का अभिवादन किया और पूछा.
फ़िलिप- ‘Good evening ma’am. How would you like your coffee? Cappuccino, Irish blend, regular black…’
अनाहिता- ‘मुझे coffee नहीं चाहिए, I’m good. बस एक mineral water ला दीजिए.’
फ़िलिप की नशे से सराबोर आवाज़ और उसकी poor personal hygiene witness करने के बाद उसके हाथ की बनी coffee पीने की हिम्मत अनाहिता में नहीं थी. वो chair से उठी और trolly bag के साथ वापस सबसे पीछे वाली table पर जा कर बैठ गयी.
फ़िलिप- ‘One mineral water for the lady and two beer for the boys.’
फ़िलिप अपने आप में बड़बड़ाया और फिर लड़खड़ाते कदमों से पर्दे के पीछे कहीं ओझल हो गया. अनाहिता ने देख देबब्राता एक बार फिर अपनी diary में कुछ लिखने में मशगूल है. क्या देबब्राता वाक़ई उस अपराधी को पकड़ कर आदि को सही-सलामत अनाहिता के पास ला सकता था? क्या अनाहिता को उसपर विश्वास करना चाहिए? ऐसे अनगिनत सवाल अनाहिता के दिमाग़ में घुमड़ रहे थे. उसने एक बार फिर समय देखा, घड़ी के काँटे पौने बारह से कुछ ऊपर थे. अचानक उसे बाहर, दूर सड़क पर रात के अंधेरे और तूफ़ानी बारिश को चीरती किसी गाड़ी की headlight दिखाई दी जो उसी तरफ़ आ रही थी. अनाहिता ने फ़ौरन देबब्राता को इशारा किया. देबब्राता जैसे उसके इशारे की ही प्रतीक्षा कर रहा था. वो फुर्ती से अपने table से उठ खड़ा हुआ और entrance की तरफ़ बढ़ा. अनाहिता भी अपनी जगह से उठने को हुई लेकिन देबब्राता ने उसे बैठे रहने का इशारा किया और बाहर portico में निकल गया.
अनाहिता ने देखा कि देबब्राता ने portico में निकल कर अपने long coat की पॉकेट से एक copper cigarette case aur lighter निकाला और एक cigarette सुलगा ली. Tension के कारण खुद अनाहिता को भी smoke की तलब महसूस हो रही थी. Anticipation में उसके हाथ-पाँव सूखे पत्तों की तरह काँप रहे थे. उसने देखा कि गाड़ी की headlight main road छोड़ कर motel की ओर कच्चे रास्ते पर मुड़ चुकी है. तेज बारिश के कारण यह रास्ता कीचड़ और फिसलन से सराबोर था. गाड़ी बहुत ही धीमी speed से motel की तरफ़ बढ़ रही थी. अनाहिता का दिल मुँह को आ रहा था. Portico में खड़ा देबब्राता इत्मिनान से धुएँ के छल्ले छोड़ते हुए गाड़ी के पास आने की प्रतीक्षा कर रहा था.
ठीक उसी समय फ़िलिप अंदर से बाहर आया, उसके एक हाथ में mineral water और दूसरे में दो beer cans थे. उसने अनाहिता के पास आकार तबले पर mineral water रखते हुए पूछा.
फ़िलिप- ‘Anything else ma’am.’
अनाहिता- ‘No! Thank you!’
अनाहिता को उस घड़ी फ़िलिप का आना बेहद नागवार लग रहा था, वो चाहती थी कि ये बला जल्द से जल्द उसके सर पर से टले. उसने mineral water के पैसे निकाल कर table पर पटक दिए फ़िलिप ने अपने कंधे बेपरवाही में उचकाते हुए पैसे उठाए और नशे में झूमते हुए लड़कों की table पर जा कर beer can रख दिया और फिर वापस counter के पर्दे के पीछे कहीं ग़ायब हो गया.
दोनों लड़के अपने सामने table पर रखी tray का सारा chicken अबतक सफ़ाचट कर चुके थे. Beer मिलते ही दोनों उस पर ऐसे टूट पड़े जैसे जनम-जनम के प्यासे हों. लगभग एक साँस में ही दोनों ने cans ख़ाली कर दिए और फिर किसी बेहूदा joke पर हंसते-खिलखिलाते हुए वहाँ से उठ कर जाने लगे. अनाहिता दो पल को बिल्कुल आवाक सी उन दोनों को देखती रही, उसने एक बार फिर बाहर देखा. गाड़ी लगभग portico के पास पहुँचने ही वाली थी. दोनों लड़के एक-दूसरे पर गिरते-पड़ते हुए ऊपर guest rooms की तरफ़ जाती सीढ़ियों की ओर बढ़े. अनाहिता के लिए अब इससे अधिक रुक पाना सम्भव नहीं था. वो अपनी table से उठ कर तेज कदमों से चलती हुई उन दोनों लड़कों के पास पहुँची और उन्हें पीछे से आवाज़ दी.
अनाहिता- ‘तुम दोनों पागल हो क्या! एन time पर इंस्पेक्टर देबब्राता को अकेला छोड़ कर कहाँ जा रहे हो?’
दोनों लड़के पीछे पालते और अपनी आँखें मिचमिचा कर बेवक़ूफ़ों की तरह अनाहिता को घूरने लगे जैसे उसने अपनी बात हिंदी के बजाय हीब्रू में कही हो. उन्हें ऐसे बेवक़ूफ़ों की तरह घूरता देख कर अनाहिता और अधिक झल्ला उठी.
अनाहिता- ‘Under cover ही सही, हो तो on duty police officers! Senior मुफ़्त में पिला रहा है तो इतनी क्या पी ली जो नशे में duty ही भूल गए.’
इस बार दोनों लड़कों ने प्रतिवाद किया.
लड़का ०१- ‘मैडम हमने तो सिर्फ़ beer पी है लेकिन आपने जो माल फूंका है वो तो बिल्कुल next level है. अरे हम दोनों किस angle से under cover cop नज़र आते हैं?’
अनाहिता की आवाज़ काँपने लगी.
अनाहिता- ‘त…तो फिर तुम दोनों कौन हो?’
लड़का ०२- ‘ये जुगल है मैं कुशल, हम तो दिल्ली से यहाँ vacation पर आए हैं आप हमें undercover cop बनाए दे रही हैं.’
अनाहिता- ‘त..तुम…दोनों police officers नहीं हो….तो..तो फिर तुमने देबब्राता को देख कर हाथ क्यों हिलाया और उसकी offer की beer क्यों पी?’
लड़का- ०१- ‘अरे हम उसको नहीं जानते. हमें यहाँ रुके तीन दिन हो गए हैं, वो ज़्यादातर time यहीं दिखता है so you know as a gesture hi-hello है बस…और कोई भला मानस फोकट की beer offer कर रहा हो तो कौन गधा मना करता है.’
वो लड़के इसके आगे भी अनाहिता से कुछ कह रहे थे लेकिन उसके कानों में जैसे कोई आवाज़ नहीं पड़ रही थी. वो उल्टे पैरों से वापस अपने table की ओर भागी. बीच वाले table पर सोते वृद्ध के खर्राटे धीमे-तेज़ हो रहे थे, उनके हाथ से novel किसी भी पल नीचे गिरने को थी लेकिन अनाहिता का ध्यान सिर्फ़ बाहर portico की ओर था. गाड़ी वहाँ नहीं थी और देबब्राता भी कहीं नज़र नहीं आ रहा था. तभी अचानक अनाहिता का मोबाइल बजा. Mobile स्क्रीन पर KIDNAPPER लिखा flash हो रहा था. अनाहिता ने काँपती उँगलियों व आवाज़ से call receive किया.
अनाहिता- ‘ह…हेल्लो!’
किड्नैपर- ‘किधर है रे तू?’
अनाहिता- ‘म…मैं अंदर ही हूँ…म..मैंने कुछ नहीं किया…म…मैंने उसे कि…कुछ नहीं बताया.’
किड्नैपर- ‘हेल्लो….हेल्लो!! अरे क्या बोल रही है तू कुछ सुनाई नहीं दे रहा. इधर network का बहुत problem है, तू मेरी बात सुन. मैं बारिश और landslide में फँसा हुआ हूँ, मुझे पहुँचने में आधा पौना घंटा और लगेगा. तू तब तक वहीं दब के बैठ और सुन, कोई होशियारी करने की कोशिश मत करना. बच्चा मेरे साथ ही है.’
किड्नैपर ने phone handsfree पर डाल कर आदि कि ओर बढ़ा दिया.
आदि- ‘मम्मा…मम्मा!!’
आदि की भयभीत आवाज़ सुन कर अनाहिता बुरी तरह विचलित हो गयी.
अनाहिता- ‘आदि! मेरे बेटे….don’t you worry darling. Mamma won’t let anything bad happen to you!’
Phone disconnect हो चुका था. एक तरफ़ अनाहिता ने चैन की साँस ली कि बाहर आयी गाड़ी किड्नैपर की नहीं थी दूसरी तरफ़ उसके दिमाग़ में देबब्राता को लेकर सैकड़ों सवाल एक-साथ उठने लगे. उसने उन दोनों लड़कों के undercover cop होने का झूठ क्यों बोला? इसके अलावा और क्या झूठ बोला था उसने? वो वाक़ई crime branch का police officer था भी या नहीं? अगर नहीं तो फिर कौन था वो? कहाँ था वो?
इन सभी सवालों के सागर में डूबती-उतराई अनाहिता ने mobile trolly bag के front slip में रखने के बजाए अपने jeans की pocket में डाल लिया, उसकी नज़रें entrance पर जा टिकीं. देबब्राता अंदर दाखिल हुआ और स्थिर कदमों से चलते हुए अपनी table पर जा बैठा. इस बार देबब्राता की चाल में उसने एक बदलाव महसूस किया. देबब्राता ने table पर रखी अपनी diary उठायी और पढ़ने लगा. अनाहिता को उसका ये व्यवहार बहुत अजीब लगा. देबब्राता diary पढ़ने में तल्लीन था. अनाहिता उठी और उसके table पर पहुँची.
अनाहिता- ‘तुमने मुझसे झूठ क्यों बोला?’
अनाहिता को अपने सर पर खड़ा देखकर दो पल तक देबब्राता उसे देखता रहा फिर मुस्कुरा कर उसे सामने वाली chair पर बैठने का इशारा किया. अनाहिता अपनी जगह ही खड़ी रही.
अनाहिता- ‘वो दोनों लड़के पुलिस वाले नहीं हैं….और…और…मुझे तो लगता है कि तुम भी पुलिस वाले नहीं हो. अगर किड्नैपर बारिश-तूफ़ान में ना फँस गया होता और सही समय पर पहुँच जाता तो जाने क्या होता.’
देबब्राता के चेहरे पर एक सहज मुस्कान उभरी. उसने माफ़ी माँगने के अन्दाज़ में अपने दिल पर हाथ रख कर सर झुकाते हुए कहा.
देबब्राता- ‘I am really sorry. Detective James Gunn आपसे तहेदिल से माफ़ी माँगता है.’
अनाहिता- ‘Detective James Gunn?Now who the hell is this James Gunn?’
देबब्राता पहले की तरह ही सहज भाव से मुस्कुराते हुए बोला.
देबब्राता- ‘इस ख़ाकसार का नाम ही Detective James Gunn है. बंदा पेशे से एक private investigator है और आपकी मदद करने का नेक इरादा रखता है यक़ीन कीजिए.’
अनाहिता- ‘Private investigator! तुमने मुझसे कुछ देर पहले जो कुछ भी कहा वो सब कुछ झूठ था?’
James Gunn- ‘यह बात सौ फ़ीसदी सच कही थी कि मैं आपके बेटे को बिल्कुल सकुशल और सुरक्षित आपके पास वापस ले कर आऊँगा.’
अनाहिता- ‘तुम पागल हो क्या? Have you completely lost it! You lied through your teeth and you still want me to trust you!’
James Gunn- ‘I want you to….rather, I insist you to!’
अनाहिता ने महसूस किया कि उसने कुछ देर पहले James के चलने के अन्दाज़ में जो परिवर्तन देखा था वो उसके बात करने के लहजे और mannerism में भी साफ़ दिखाई दे रहा था, ऐसा लग रहा था कि कुछ देर पहले जो शख़्स उससे देबब्राता के रूप में मिला था वो और ये James Gunn दोनों दो अलग-अलग इंसान हों. अनाहिता ने उसे चेतावनी देते हुए कहा.
अनाहिता- ‘Listen to me and listen to me for good. Saving Aadi is none of your business. Stay out of it!!’
James Gunn- ‘मैं अब भी कहूँगा, you need me by your side. Let me help you.’
अनाहिता- ‘I don’t trust you! I can’t trust you after what you did. I can not risk my child’s life by depending on you. Why don’t you get it…तुम देबब्राता हो या James Gunn हो या फिर कोई भी और हो मुझे तुम्हारी मदद नहीं चाहिए. तुम ज़बरदस्ती मुझपर pile upon क्यों कर रहे हो?’
James Gunn- ‘आप मुझे…मेरे intentions को ग़लत समझ रही हैं.’
अनाहिता- ‘मैं सिर्फ़ इतना समझ रही हूँ कि तुमसे मुझे बहुत-बहुत दूर रहना चाहिए. मैं अब उठ कर वापस अपनी table पर जा रही हूँ. भूल जाओ कि हमारे बीच कोई conversation हुआ भी था.’
James Gunn- ‘हो गयी है किसी से जो अनबन, थाम ले दूसरा कोई दामन…ज़िंदगानी की राहें अजब हैं, हो अकेला तो लाखों हैं दुश्मन…हाँ बड़े धोखे हैं…बड़े धोखे हैं इस राह में.’
अनाहिता- ‘What!! What the hell was that?’
James Gunn- ‘एक पुराना गाना है, black and white. बचपन में मैं ये गाना radio पर बहुत बार सुना करता था और इसके lyrics याद कर के गुनगुनाने की कोशिश करता था. बचपन में मैं बहुत शरारती था और जब भी मैं कोई शरारत करता या कोई ग़लत काम करता तो मेरी माँ मुझसे हमेशा यही कहती थीं कि तू जिस राह पर चल रहा है उसमें भी सिर्फ़ दुश्मन और धोखे ही धोखे हैं.’
James जैसे खुद में ही बड़बड़ाते हुए बोला. उसकी किसी भी बात का मतलब अनाहिता को ना ही समझ आ रहा था और ना ही समझने में उसकी ज़रा भी दिलचस्पी थी. बिना James की तरफ़ ध्यान दिए हुए वो वहाँ से अपनी table पर यूँ चली गयी जैसे James कोई छूत की बीमारी था जो उसके थोड़ी देर और वहाँ खड़ा रहने या उसकी बात सुनने से उसे लग सकती थी. अनाहिता जा कर अपनी table पर बैठ गयी. उसने एक चोर नज़र James Gunn पर डाली. वो फिर से अपनी diary में कुछ लिख रहा था. अचानक अनाहिता के दिमाग़ में उस गाड़ी का ख़याल आया जो कुछ देर पहले वहाँ आयी थी. कौन था उसमें? James उससे क्या बात कर रहा था? कहीं ऐसा तो नहीं कि वो किसी चक्रव्यूह में फँसती जा रही है जिसकी उसे भनक भी नहीं! अनाहिता के जी में आया कि वो वापस James की table पर जा कर उससे गाड़ी की बाबत सवाल करे लेकिन फ़ौरन ही उसने ये विचार त्याग दिया. उसके warning देने के बाद से James अपने आप में था, infact उसने एक बार भी नज़र उठा कर अनाहिता की तरफ़ देखा तक नहीं था.
अनाहिता(Thought)- ‘हुँह! बड़ा आया मददगार बनने वाला!’
अनाहिता ने मन ही मन सोचा. Anxiety और tension के कारण उसे smoke की एक बार फिर से ज़ोर की तलब लग रही थी. रात के साढ़े बारह बज रहे थे, किड्नैपर किसी भी पल आदि के साथ वहाँ पहुँच सकता था. अनाहिता के दिमाग़ में विचार आया कि कहीं किड्नैपर के वहाँ पहुँचने पर James कोई नया बखेड़ा या drama ना शुरू कर दे. अनाहिता ने फ़ैसला किया कि वहाँ बैठने से बेहतर था कि वो बाहर portico में kidnapper का wait कर ले. अनाहिता table से उठी और trolly bag के साथ entrance door की तरफ़ बढ़ गयी. उसने गौर किया कि James ने एक बार भी उसकी तरफ़ नज़र उठा कर ना देखा वो पूर्व की भाँति diary में कुछ लिखता रहा.
बाहर आकर अनाहिता ने चैन की साँस ली. रात और बरसात के कारण ठंड काफ़ी बढ़ चुकी थी. ठंड और एक अनजाने डर के अहसास से अनाहिता के पूरे जिस्म ने एक झुरझुरी ली. उसने एक cigarette निकाल कर सुलगा ली. बरसात अब भी रुकी नहीं थी हालाँकि पहले की अपेक्षा काफ़ी हल्की हो चुकी थी. Cigarette के कश खींचती हुई अनाहिता सड़क पर देखने के इरादे से portico से कुछ बाहर निकली. रास्ता दूर-दूर तक बिल्कुल ख़ाली था. Cigarette ख़त्म कर के वो वापस motel की तरफ़ मुड़ी. Portico और motel के सामने के हिस्से के अलावा motel building के दोनों side भी ठीक-ठाक ज़मीन थी जहां कुछ पेड़ और जंगली झँखाड उगे हुए थे. कौतूहलवश अनाहिता उस तरफ़ बढ़ गयी. वहाँ कुछ था जिसने अनाहिता का ध्यान अपनी तरफ़ खींचा. ऊँची झाड़ियों के पीछे कोई चीज़ छुपी हुई थी जिस पर गिरती बारिश की बूँदों का शोर काफ़ी तेज सुनाई दे रहा था. उस एक पल के लिए सबकुछ भूल कर अनाहिता के कदम स्वतः ही उधर बढ़ते चले गए. वहाँ पहुँच कर उसने जो देखा उसकी कल्पना अनाहिता ने सपने में भी नहीं की थी. दो पल के लिए अनाहिता काठ की गुड़िया बनी अपनी जगह जड़वत खड़ी रह गयी. झाड़ियों के पीछे वही गाड़ी छुपाई गयी थी जिसे अनाहिता ने motel की तरफ़ आते देखा था. गाड़ी झाड़ियों के पीछे इतनी सफ़ाई से छुपाई गयी थी कि motel के सामने से देखने पर अंधेरे में उसके वहाँ होने का पता ही नहीं चलता.
बहुत मुश्किल से हिम्मत जुटा कर अनाहिता ने गाड़ी के अंदर झांका. अंदर का नजारा देख कर उसके भीतर की रही सही ताक़त ने जवाब दे दिया. पैर उसके जिस्म का भार सम्भाल ना सके, अगर वो गाड़ी का सहारा ना लेती तो यकीनन नीचे कीचड़ में मुँह के बल जा गिरती. गाड़ी के अंदर, driving seat के पीछे एक लगभग तीस-पैंतीस साल के आदमी की खून से सराबोर लाश पड़ी हुई थी. उसकी छाती में एक बड़ा सा ख़ंजर घोंपा हुआ था. अनाहिता का दिमाग़ चकराने लगा. उसे यह समझते देर ना लगी कि जिस समय वो अपनी table से उठ कर उन लड़कों के पीछे गयी और जितनी देर उसे उनसे बहस कर के वापस अपनी table तक आने में लगी उतनी देर में James Gunn ने इस आदमी की हत्या की और गाड़ी motel के बग़ल की झाड़ियों में छुपा दी. अनाहिता को समझ नहीं आ रहा था कि उसे क्या करना चाहिए. आख़िर कौन था ये James Gunn! अनाहिता को अब यक़ीन हो चला था कि वो ज़रूर कोई पागल हत्यारा है.
अनाहिता ने चारों तरफ़ नज़र दौड़ाई. Motel के पिछले हिस्से में कहीं light जल रही थी. अनाहिता उस light की तरफ़ भागी. अंधेरे और फिसलन में उसका पैर कहीं झाड़ियों में उलझ गया. अंधाधुन भागती अनाहिता का balance off हुआ और वो कीचड़ में जा गिरी. उसे पता भी ना चला कि कब उसका mobile jeans की pocket से निकल कर कीचड़ में जा गिरा. कुछ पलों के लिए अनाहिता की आँखों के आगे घुप्प अंधेरा छा गया.
चेहरे पर गिरती तीखी बारिश की बूँदों ने अनाहिता की बेहोशी तोड़ी. उसकी अनियंत्रित साँसें धौंकनी की तरह चाल रही थीं. कुछ पल के लिए उसे समझ ही ना आया कि वो कहाँ है. फिर सब कुछ किसी flashback reel की तरह एक झटके से उसके ज़हन से गुजरा. अनाहिता से समय देखा, साढ़े बारह बज रहे थे. किड्नैपर किसी भी समय आदि को ले कर वहाँ पहुँच सकता था. अनाहिता पर जैसे कोई जुनून सवार हो गया. वो उठी और motel के पीछे रौशनी की दिशा में भागी.
जहां light जल रही थी वो एक back entrance door था. अनाहिता ने door handle घुमाया, thankfully दरवाज़ा अंदर से locked नहीं था. अंदर जाने पर अनाहिता ने खुद को एक लम्बे passage में पाया. Passage में दोनों तरफ़ cold drinks crates line से लगी हुई थीं. Passage के दूसरे छोर पर एक और दरवाज़ा था जिससे अनाहिता एक बड़े से store room में दाखिल हुई. यहाँ पर अनाज, सब्ज़ियाँ और packaged food items store किए गए थे. यहाँ beer और शराब के कई cartons रखे हुए थे जिनके बीच उसे नशे में धुत्त फ़िलिप पड़ा दिखायी दिया. उसके हाथ में एक old monk की bottle थी जो पूरी ख़ाली हो चुकी थी और इस बात की पुष्टि कर रही थी कि अगले कई घंटों तक बुड्ढा फ़िलिप वापस होश में नहीं आने वाला था, फिर भी, अनाहिता ने फ़िलिप को झंकझोर कर उठाने की कोशिश की.
अनाहिता- ‘फ़िलिप! Please उठो फ़िलिप! मुझे तुम्हारी हेल्प चाहिए…for God’s sake please get up Phillip!!’
फ़िलिप- ‘ऊंssss…!!’
फ़िलिप नशे में कनमनाय और फिर ढ़ेर हो गया. अनाहिता ने एक बार फिर से फ़िलिप को झंकझोरा.
अनाहिता- ‘फ़िलिप उठ जाओ. क्या तुम James Gunn को जानते हो? क्या तुम्हें पता है James Gunn कौन है?’
फ़िलिप- ‘पागल आदमी हैsss….बिल्कुल पागल आदमी हैsss!!’
फ़िलिप नशे में मुश्किल से बड़बड़ाया और फिर ऐसा ढ़ेर हुआ जैसे अब वो नहीं उसका जनाज़ा ही उठेगा. अनाहिता समझ गयी कि उस पर समय ज़ाया करने का कोई फ़ायदा नहीं. उसे आदि की फ़िक्र सता रही थी. अचानक उसका हाथ अपने jeans pocket पर गया. उसका mobile वहाँ नहीं था! दो पल के लिए अनाहिता के दिल की जैसे धड़कन ही रुक गयी. उसके बाद वो पागलों की तरह बेतहाशा अपनी जान फेंक कर store room से बाहर भागी.
Store room kitchen से attached था. Kitchen काफ़ी गंदा और गंदगी से भरा हुआ था. दीवारें जले हुए तेल की चिकनाई और धुएँ से काली पड़ चुकी थीं. Sink में जाने कब के गंदे बर्तनों का अम्बार लगा हुआ था, पास ही dumpster रखा था जो कचरे से इतना भर चुका था कि कचरा निकल कर बाहर गिर रहा था. अनाहिता की निगाहें कुछ ढूँढ रही थीं. एक तरफ़ लगी cutlery में उसे एक बड़ी cleaver knife दिखाई दे गयी. अनाहिता ने उसे अपने jacket में छुपा लिया. वो ठान चुकी थी कि आदि को बचाने के लिए उसे अगर किड्नैपर और James Gunn दोनों का ख़ूँ करना पड़े तो वो ज़रा भी नहीं हिचकिचाएगी.
Kitchen के दूसरी तरफ़ वही दरवाज़ा था जो Cafe` counter पर खुलता था. अनाहिता पर्दा हटाते हुए सावधानीपूर्वक cafe` में आयी. उसका एक हाथ jacket के अंदर cleaver knife पर था. उसने देखा कि James Gunn अब वहाँ नहीं था. एक table पर सोते हुए वृद्ध के अलावा पूरा cafe` ख़ाली था. वृद्ध के खर्राटे अब किसी बंद होती खटारा कार की तरह फँस-फँस कर आ रहे थे. अनाहिता को ख़याल आया कि कहीं ऐसा तो नहीं कि James Gunn वहाँ छुप कर उसके लिए घात लगाए बैठा हो और अचानक कहीं से आकार उसकी पीठ में भी छुरा गोप कर वैसे ही मार डाले जैसे उस गाड़ी वाले को मार दिया. अनाहिता बिल्ली की तरह दबे पाँव चलती हुई उस वृद्ध की table तक पहुँची. ठीक उसी समय नींद के झोंके में वृद्ध के हाथ में थमी नॉवल नीचे ज़मीन पर जा गिरी. अनाहिता की नज़रें नॉवल और उसके title cover पर जा टिकीं. ‘Who’s Your Killer- A Detective James Gunn Mystery’!! अनाहिता का दिमाग़ सन्न रह गया. Detective James Gunn कोई वास्तविक इंसान नहीं बल्कि एक नॉवल का काल्पनिक पात्र था! तो फिर वो कौन था जो पहले देबब्राता गंगोपाध्याय और फिर James Gunn बन कर उससे मिला था?
अचानक अनाहिता के दिमाग़ में कि ख़याल आया. वो cafe` में रखे bookshelf की तरफ़ भागी. वो bookshelf में सजी किताबों को उलट-पलट कर देखने लगी. ‘Gangsters of Gangapur – Inspector Debbrata Thriller’, ‘Signs of Sin- Debbrata Gangopadhyay Thriller’, ‘Diabolic Destination- A James Gunn Mystery’ , ‘Kaliyuga Killer- A James Gunn Mystery’!! देबब्राता गंगोपाध्याय और James Gunn की novels शेल्फ पर भारी पड़ी थी.
अनाहिता- ‘देबब्राता गंगोपाध्याय, James Gunn दोनों ही fictional characters हैं, तो फिर आख़िर वो शख़्स कौन था जो इन दोनों नामों से मुझसे मिला था. कोई पागल हत्यारा? Psychopath serial killer? फ़िलिप भी नशे में बड़बड़ा रहा था कि वो बिल्कुल पागल है.’
SFX- Bang-Bang
ठीक उसी समय बाहर से दो gunshots fire होने की आवाज़ आयी. अनाहिता बेतहाशा बाहर की तरफ़ भागी. उसने cleaver knife jacket से निकाल कर हाथ में ले ली. बाहर portico में एक गाड़ी खड़ी हुई थी जिसके सामने फ़र्श पर किड्नैपर की लाश थी. एक गोली उसके माथे में बीचों-बीच मारी गयी थी और दूसरी ठीक उसके दिल पर. गाड़ी की पिछली सीट का दरवाज़ा खुला हुआ था और James Gunn आदि पर झुका हुआ था. अनाहिता ने आव देखा ना ताव अपने हाथ में थमा cleaver knife उसकी पीठ में दे मारा. James चीख मार कर नीचे गिर गया. अनाहिता का knife वाला हाथ फिर से हवा में लहराया. इस बार निशाना James का दिल था लेकिन इससे पहले कि अनाहिता उसका सीना चाक कर देती आदि चीख पड़ा.
आदि- ‘नहीं मम्मा! अच्छे uncle को मत मारो! इन्होंने तो गंदे kidnapper uncle को मार के मुझे बचाया है.’
हाथ में खून सनी knife पकड़े अनाहिता आवाक खड़ी नीचे गिरे James Gunn को देखती रह गयी. James की आवाज़ इस बार पहले से ज़्यादा गहरी थी और उसमें दर्द का पुट था.
James- ‘ह..ह..ह…मैंने कहा था ना, आपको मेरी मदद की ज़रूरत है. इससे पहले गाड़ी में जो आया था वो इस किड्नैपर का ही भेजा हुआ आदमी था. वो आपसे पैसे लेकर आपको मार देता और उसके inform करने पर किड्नैपर आदि को मार देता. मैंने इसीलिए उसे मार कर उसका फ़ोन बंद कर दिया ताकि उससे सम्पर्क ना हो पाने की सूरत में किड्नैपर के पास यहाँ आने के अलावा दूसरा कोई चारा ना बचे.’
अनाहिता- ‘तुम वास्तव में हो कौन?’
James- ‘विजय…विजय राघवन!’
अनाहिता- ‘कौन विजय राघवन?’
Off Screen- ‘ये भी fictional character है, इसका ही लिखा हुआ.’
पीछे से आयी आवाज़ से अनाहिता चौंक कर पलटी. अंदर सो रहे वृद्ध उसे बाहर आते दिखाई दिए, उनकी नींद शायद गोली चलने की आवाज़ से टूटी थी.
अनाहिता- ‘अ…आप?’
वृद्ध- ‘शांतनु समद्दार. मैं इस motel का owner हूँ और ये है विक्टर वर्गिस.’
अनाहिता- ‘विक्टर वर्गिस? वो renowned crime thriller writer?’
वृद्ध- ‘The same. कुछ साल पहले तक ये India का top most, bestselling crime thriller novelist था. फिर बिगड़ती mental state aur dissociative personality disorder ने इसे लिखने के काबिल नहीं छोड़ा. ये कहानी लिखना तो शुरू करता पर कभी उन्हें ख़त्म नहीं कर पाता क्योंकि कहानी ये किसी और किरदार के साथ शुरू करता और फिर धीरे-धीरे किरदार बदलने लगते. हालात इतने ख़राब हो गए कि विक्टर खुद को भी धीरे-धीरे भूलने लगा और ऊँ किरदारों के रूप में ज़िंदगी जीने लगा जो इसने गढ़े थे. कभी ये देबब्राता गंगोपाध्याय होता तो कभी James Gunn तो कभी विजय राघवन तो कभी कोई और.’
अनाहिता विक्टर को सहारा दे कर उठाने की कोशिश करने लगी.
अनाहिता- ‘I…I am so sorry….please don’t die victor! आपका बहुत खून बह गया है…आपको फ़ौरन hospital ले चलना होगा.’
Victor- ‘O c’mon Anaahita, this is the best ending I’ve written so far…m…my masterpiece…my bestseller…ये कहानी तो मेरी मौत पर ही ख़त्म होनी थी…जिस राह पर James चला था उसमें तो ये होना ही था….बाबू जी धीरे चलना…हाँ बड़े धोखे हैं…बड़े धोखे हैं…हाहाहाहा!’
The End
