Anaamika Untold

सत्यवीर ने अपना सिंंगल मॉल्ट मैकालन का ग्लास उठाया और उँगलियों के बीच स्टर किया। तरल शराब में पिघलते आइस क्यूबस ग्लास की दीवारों से टकरा कर जो खनक उत्पन्न कर रहे थे वो रूम में रखे विंंटेज विनाइल प्लेयर पर बजते गैरी कोलमैन के जैज़ ‘द स्काई इज़ क्राइंग’ के साथ लयात्मक अन्दाज़ में गूंज रही थी। होंठों के बीच दबी बेन्सन एंड हेजेज़ की आख़री कश खींच कर सिगरेट स्टब पहले से ही भरे ऐश ट्रे में झोंकते हुए सत्यवीर ने हाथ में थमा ग्लास ख़ााली किया। पचास साल तक एज्ड किया हुआ स्मूद ड्रिंंक उसके दिमाग़ के तारों को झनझनाते हुए नीचे उतरा।
सत्यवीर ने अपने सर को झटका दिया जैसे उसका दिमाग़ जाने कब से सोया पड़ाा था जिसे वो जगाने की कोशिश कर रहा था। उसने अपने पुराने रेमिंंगटॉन टाइपराइटर के रोलर में पेपर लोड किया और दोबारा लिखने की कोशिश करने लगा। इस बार शुरुआत पिछली बार से अच्छी हुई थी। उसकी कहानी का मेन प्रटैगनिस्ट एक राइटर था जो क्रिसमस ईव पर उसकी तरह ही अपने सेक्लूडेड कॉटिज में अकेला राइटिंंग कर रहा था। तभी कॉटिज की डोरबेल बजती है और दरवाज़ाा खोलने पर राइटर को बाहर एक खूबसूरत लड़की खड़ीी दिखाई देती है। ओपनिंंग सीन इम्पैक्टफ़ुुल होना सत्यवीर के लिए बहुत ज़रूरी था। सत्यवीर की उँगलियाँ टाइपराइटर पर यूँ फिसल रही थीं जैसे किसी दक्ष की-बोर्ड प्लेयर की उँगलियाँ प्यानो पर फिसलती हैं लेकिन यह पहला सीन ब्रेक करते ही उसने झुंझला कर पेपर रोलर से खींच लिया और उसे बॉल की तरह मोड़ कर अपने पीछे उछाल दिया।
आगे कहानी क्या मोड़ लेगी ये सत्यवीर के दिमाग़ में ही नहीं आ रहा था। सत्यवीर की राइटिंंग डेस्क के चारों तरफ़ फ़्लोर पर ऐसी काग़ज़ की अनगिनत गेंदें बिखरी हुई थीं। अपना चश्मा उतार कर उसने एक तरफ़ उछाल दिया और उँगलियों से आँखों को मीचने लगा। कॉटिज पर आए एक हफ़्ता बीत चुका था लेकिन भरसक कोशिश करने के बावजूद उसे ऐसा कोई प्लॉट आइडिया नहीं आया था जो उसकी अगली फ़िल्म को ब्लॉकबस्टर बना दे।
आज क्रिसमस ईव थी। सारी दुनिया जब फ़ेेस्टिव मूड में डूबी हुई थी सत्यवीर एक अदद प्लॉट आइडिया के लिए हिमाचल के एक छोटे से हिल टाउन नारकंडा के आउटस्कर्ट्स्स में बने अपने प्राइवेट कॉटिज में अकेला और तनहा अपने आप से ही जद्दोजहद कर रहा था। सत्यवीर ने एक और सिगरेट जलाई और अपना ख़ााली ग्लास ले कर लिविंंग रूम में बने बार की तरफ़ जाने को उठा। ठीक उसी समय डोरबेल बजी। सत्यवीर की नज़र अपनी रिस्ट वॉच पर गयी। रात के आठ बज रहे थे। हालाँकि उस बियाबान में रात के आठ बजे का मतलब आधी रात था। उस समय वहाँ उसके किसी जानने वाले के होने का सवाल ही पैदा नहीं होता था, उस पर से क्रिसमस ईव।
कॉटिज के आस-पास चार किलोमीटर तक कोई दूसरा एस्टैब्लिश्मेंट नहीं था। सत्यवीर ने डोरबेल को इग्नोर करने का फ़ैैसला किया और खुद में बड़बड़ााते हुए बोला, “जो भी है भाड़ में जाए!”
वो बार में पहुँचा और अपने लिए ड्रिंंक बनाने लगा। डोरबेल फिर से बजी, इस बार पहले से ज़्यादा देर तक। सत्यवीर ने ड्रिंंक की एक चुस्की ली और बार टेबल की ड्रॉअर खोल कर अपनी ख़ाास स्मिथ एंड वेसन रिवॉल्वर निकाली और जींस की बैकपॉकेट में डाल ली।
इस बार डोरबेल के साथ-साथ दरवाज़े पर दस्तक भी हुई। बाहर जो कोई भी था वो अपने आप वहाँ से हिलने के मूड में नहीं था। सत्यवीर ने अपना ड्रिंंक का ग्लास ख़ााली कर के बार टेबल पर पटका और सिगरेट के कश लगाता हुआ दरवाज़े पर पहुँच कर चिल्लाया, “हू द हेल इज़ दिस? फक ऑफ़ ऑर आइ विल कॉल द कॉप्स।”
“आइ एम रियली सॉरी टू बॉदर यू।माई कार जस्ट ब्रोक डाउन ऑन द हाई-वे। कैन यू हेल्प मी प्लीज़!” बाहर से एक डरी हुई आवाज़ आयी।
सत्यवीर ने बाहर से किसी लड़की की आवाज़ की अपेक्षा नहीं की थी। वो दो पल के लिए सोच में पड़ गया।
“वॉट आर द ऑड्ज़ ! ये तो लगता है जैसे मेरी ही राइटिंंग मैनिफ़ेेस्ट हो रही है।” वो खुद में ही बड़बड़ााया।
लेकिन उसके दिमाग़ में अगले ही पल ये ख़याल आया कि ये दरवाज़ाा खुलवाने के लिए कोई चाल भी हो सकती थी। हो सकता था कि लड़की किसी रॉबर्स गैंग की मेम्बर हो और उसके बाक़ीी साथी आस-पास छुपे बैठे हों कि जैसे ही सत्यवीर दरवाज़ाा खोले वे उसपर अटैक कर दें। बाहर से फिर आवाज़ आयी।
“आइ कैंट गेट द नेटवर्क आउट हेयर। कैन यू ऐट लीस्ट लेट मी मेक ए फ़ोन कॉल प्लीज़?” सत्यवीर अब भी असमंजस में था। हालाँकि उसके पास रिवॉल्वर थी, लेकिन अगर बाहर आर्म्ड रॉबर्स हुए तो? अब तक बाहर खड़ीी लड़की समझ गयी थी कि सत्यवीर का उसकी हेल्प करने का कोई इरादा नहीं था। उसने फिर कहा, “कैन यू ऐट लीस्ट कॉल द कॉप्स?”
“वॉट?”
“आपने कहा था ना कि अगर मैंने डोरबेल बजाना बंद नहीं किया तो आप पुलिस को कॉल करेंगे। आप मेरे लिए दरवाज़ाा नहीं खोलना चाहते ना सही पर पुलिस को इन्फ़ॉॉर्म कर दीजिए। कम से कम पुलिस तो आकार मेरी मदद करेगी। वरना इस रात के टाइम मैं इस अन-सेफ़ एरिया में अकेली क्या ही करूँगी…बाहर बहुत ठंड है, बर्फ़ भी पड़ रही है। मैं तो रात भर में ठंड से ही ठिठुर कर मर जाऊँगी।”
“ऑलराइट-ऑलराइट! मैं दरवाज़ाा खोल रहा हूँ, वेट।”
सत्यवीर ने सिगरेट फ़र्श पर गिरा कर बूट से रौंदा और रिवॉल्वर निकाल कर हाथ में ले ली और सावधानीपूर्वक दरवाज़ाा खोला।
सामने बला की खूबसूरत लड़की खड़ीी थी। उसकी आवाज़ से उसकी ख़ूबसूरती का जो अंदाज़ाा सत्यवीर ने लगाया था वो उससे भी कहीं ज़्यादा खूबसूरत थी। उस लड़की की उम्र मुश्किल से बाइस, बड़ीी हद तेईस होगी। हिरणी जैसी बड़ीी-बड़ीी आँखें, दूधिया रंग और बिल्कुल साँचे में ढला जिस्म। सत्यवीर एक बार फिर अपने आप में ही बुदबुदाया।
“वॉट आर द ऑड्ज़ !”
सत्यवीर के हाथ में रिवॉल्वर तना देख कर लड़की ने चेहरे पर छोटी बच्ची जैसी मासूमियत लिए अपने दोनों हाथ ऊपर उठा दिए। सत्यवीर ने झेंपते हुए रिवॉल्वर वापस पॉकेट में डाल लिया।
“आइ एम रियली सॉरी फ़ॉॉर दिस। प्लीज़ कम इन।”
“एक सेकंड को तो लगा कि आप मुझे शूट ही कर देंगे।” लड़की अंदर आते हुए मासूमियत से बोली।
“ऐक्चूअली यहाँ कोई आता-जाता नहीं, उस पर से ऐसे मौसम और क्रिसमस हॉलिडेज़ में तो सवाल ही पैदा नहीं होता। मुझे लगा शायद कोई चोर-बदमाश है इसलिए…”
“चोर-बदमाश डोरबेल बजा कर नहीं आते। बट थैंक्स फ़ॉॉर लेटिंंग मी इन…एंड फ़ॉॉर नॉट शूटिंंग मी।” लड़की सत्यवीर को देखते हुए मुस्कुराते हुए बोली।
“नाउ यू आर एम्बैरेसिंंग मी। प्लीज़ सीट डाउन, मेक योरसेल्फ़ कम्फ़र्टेबल।” सत्यवीर ने झेंपते हुए कहा।
लड़की ने खुद को कॉटिज के लिविंंग एरिया में पाया। वहाँ लिविंंग एरिया के बीचों-बीच दो काफ़ीी बड़े बेडनुमा काउच रखे हुए थे जिनके बीच में वॉलनट वुडेन टेबल थी। फ़्लोर महोगनी वुडेन प्लैंक्स लगे हुए थे जिनके ऊपर एक काफ़ी एक्स्पेन्सिि व पर्शियन कार्पेट बिछा हुआ था। एक तरफ़ फ़ाायरप्लेस और चिमनी थी जिसके ठीक सामने बार था जहां दुनिया भर की सबसे महँगी लिकर सजी हुई थी। रूम की दीवारों पर फ़िल्म डाइरेक्टर सत्यवीर सैम्यूअल की फ़िल्मों के बड़े-बड़े हैंड पैंटेड पोस्टर्ज़ फ़्रेम कर के लगाए हुए थे।
लड़की लिविंंग एरिया में लगे काउच पर बैठ गयी। सत्यवीर की नज़रें बार-बार उस लड़की पर फिसल रही थीं। उसने पीच कलर का पुल-ओवर और ब्लू हाई-वेस्ट डेनिम व स्नीकर्स पहने हुए थे। सत्यवीर की बाज जैसी नज़रों से ये बात छुपी ना रही कि उस लड़की ने ब्रा के ऊपर सीधे पुल-ओवर पहना हुआ था और रह-रह कर उसका जिस्म ठंड से ठिठुर रहा था। डिसेम्बर की उस सर्द रात में इतने कम कपड़ों में भला कौन घर से बाहर निकलता है?
“वुड यू लाइक आ ड्रिंंक? ठंड लगनी कम हो जाएगी।”
“ओन्ली इफ़ इट्स नॉट आ प्रॉब्लम।” लड़की ने झिझकते हुए जवाब दिया।
“आई विल गेट यू आ सत्यवीर सैम्यूअल स्पेशल क्रिसमस पंच। क्रैन्बेरी एंड टार्ट चेरी जूस, मिक्स्ड विद् सिरप, स्टर्ड ए बिट विद् ऑल स्पाइस एंड जिंंजर। शेकेन विद् रम एंड ए डैश ऑफ़ वोदका, एंड टॉप्ड विद् जिंंजर एल।”
जिस कुशलता और ख़ूबसूरती से एक सिद्धहस्त कलाकार अपनी कलाकृति बनाता है उसी दक्षता से सत्यवीर ने कॉक्टेल तैयार कर के लड़की के सामने सर्व किया।
“सत्यवीर सैम्यूअल! ऑ माई गॉड!! यू आर द फ़ेेमस फ़िल्म मेकर सत्यवीर सैम्यूअल। होली मदर ऑफ़ गॉड…दिस क्रिसमस श्योर एज़ हेल केम विद् सर्प्राईज़ेज़! आई मीन वॉट आर द ऑड्ज़ …कि मेरी गाड़ीी क्रिसमस ईव पर बियाबान-सुनसान में बंद हुई और मैं जिससे मदद माँगने पहुँची वो द लेजेंड, वन ऑफ़ द फ़ााईनेस्ट फ़िल्म मेकर सत्यवीर सैम्यूअल निकले।” लड़की ने ट्रे से ड्रिंंक उठाते हुए कहा।
वो बड़ीी-बड़ीी आँखों से सत्यवीर को यूँ अपलक देख रही थी जैसे किसी छोटी बच्ची ने पहली बार जू में जिराफ़ देखा हो।
“वॉट आर द ऑड्ज़ कि मैंने अभी-अभी जिसके लिए अपना स्पेशल कॉक्टेल बनाया उसका नाम भी मुझे नहीं पता।” सत्यवीर उसके सामने वाले काउच पर बैठते हुए बोला।
“आई एम सो सॉरी।”
“हेल्लो सो सॉरी।”
“हाहाहा…आई एम अनामिका।” लड़की खिलखिला कर हँसी।
“अनामिका! नाइस नेम। अनकॉमन इन जेनरेशन ज़ीी, बट रियली नाइस नेम। सो मिस्टिरीयस।”
लड़की अपनी ड्रिंंक का सिप लेते हुए बोली.
“थैंक्यू! आई फ़ााइंड इट ओल्ड फ़ैैशंड। आप मिलेनियलस पर ज़्यादा सूट करते हैं ऐसे नाम। बट आई मस्ट टेल यू, यू रियली नो योर ड्रिंंक्स वेल। आप लेजेंडेरी फ़िल्म मेकर ही नहीं लेजेंडेरी ड्रिंंक मेकर भी हैं।”
उसके बात पर दोनों हंसे। ये मौसम की ठंड और शाम से लगातार ख़ााली किए जामों का असर था या फिर अनामिका की ख़ूबसूरती उसके अल्हड़पन की कशिश, सत्यवीर अनामिका पर से चाह कर भी अपनी नज़रें नहीं हटा पा रहा था।
“आई हैव वेस्टेड एनफ़ ऑफ़ योर क्रिसमस ईव ऑलरेडी। मुझे कॉल कर के चलता होना चाहिए।” अनामिका अपने ड्रिंंक की एक सिप लेते हुए बोली।
“क्रिसमस ईव, उस पर से तूफ़ाानी सर्द रात! ना कोई टो-ट्रक सर्विस कॉल लेने वाली है ना ही कोई मकैनिक या पुलिस। फिर भी, गो अहेड, ट्राई योर लक।” सत्यवीर ने अपना फ़ोोन अनामिका की तरफ़ बढ़ााते हुए कहा।
“सीम्स माई लक इज़ ऑल्सो एंजॉइंग क्रिसमस हॉलिडेज़। आपके फ़ोोन में भी नेटवर्क नहीं है।” अनामिका मोबाइल स्क्रीन देख कर मायूसी से मुस्कुराते हुए बोली।”
ठीक उसी समय तेज आवाज़ के साथ लिविंंग एरिया की फ़्रेंच विंंडो खुल गयी और बाहर से सर्द बर्फीली हवा के तेज़ थपेड़े सत्यवीर और अनामिका के चेहरों पर चोट करने लगे। एकाएक पूरे कॉटिज में घुप्प अंधेरा छा गया। एकाएक चारों तरफ़ इतना अंधेरा हो गया था कि हाथ को हाथ सुझाई नहीं दे रहा था। बाहर से आते बर्फीली हवा के तेज थपेड़ों के शोर के बीच भी सत्यवीर को अनामिका की तेज चलती साँसों की आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही थी।
“मौसम बहुत ज़्यादा ख़राब हो गया है। अनामिका ज़रा मेरा फ़ोन पास करना प्लीज़।”
अनामिका ने फ़ोन अंधेरे में सत्यवीर की तरफ़ बढ़ााया। एक पल के लिए सत्यवीर की उँगलियाँ अनामिका के हाथ से स्पर्श हुईं। उसका हाथ बर्फ़ सा ठंड हो रहा था। सत्यवीर ने फ़ोन की फ़्लैश लाइट जलाई और फ़ौौरन उठ कर फ़्रेंच विंंडो बंद की। लिविंंग एरिया की फ़ाायर प्लेस में वुड लॉग्स डाल कर सत्यवीर ने आग जलाई और फ़ाायरप्लेस पोकर से लॉग्ज़ एडजस्ट करने लगा।
आग जलने से लिविंंग एरिया में कुछ रौशनी हो गयी। सत्यवीर उठकर बार टेबल की तरफ़ बढ़ाा। वहाँ से उसने एक पुराना काँच की चिमनी वाला ब्रास ऑयल लैम्प निकाला और अपने लाइटर से पहले लैम्प और फिर एक सिगरेट जलाते हुए बोला, “ऐसे मौसम और समय में यहाँ लाइट जाने का मतलब है कि लाइट अगले दो-तीन घंटे से पहले नहीं आने वाली। अगर कहीं कोई पेड़ टूट कर किसी इलेक्ट्रिि क पोल पर गिरा होगा तो अगले दो-तीन दिन तक नहीं आने वाली। आज की रात अब मोबाइल नेटवर्क तो भूल ही जाओ।”
सत्यवीर ने लैम्प अनामिका के सामने टेबल पर रख दिया और एक गहरा कश खींचा।
“कैन आई हैव वन?” अनामिका ने धीमे से पूछा।
सत्यवीर ने सहमति में सर हिलाया और अपना सिगरेट केस खोल कर अनामिका की ओर बढ़ाा दिया। अनामिका ने उसमें से एक सिगरेट उठा कर होंठों से लगा ली। सत्यवीर ने लाइटर जला कर उसकी तरफ़ बढ़ााया। ऑयल विक लाइटर की लपलपाती लौ में अनामिका का चेहरा और भी ज़्यादा खूबसूरत नज़र आ रहा था। अपनी पचास साल की ज़िंंदगी में सत्यवीर हर क़िस्म की लड़की के साथ सो चुका था जिनमें से कुछ तो टॉप बॉलीवुड ऐक्ट्रेसेस भी थीं लेकिन मेक-अप की बनावटी परतों के पीछे छुपे उन खूबसूरत पर बेजान चेहरों में से किसी में भी अनामिका जैसी शोख़ीी और मासूमियत नहीं थी। सत्यवीर ने आज तक अनामिका जितनी खूबसूरत लड़की नहीं देखी थी। अनामिका काउच पर टिक कर बैठ गयी और सिगरेट के गहरे कश लेते हुए बीच-बीच में अपनी ड्रिंंक सिप करने लगी। सत्यवीर ने एक गहरे कश में सारा धुआँ अपने फेफड़ों में भरा और एक ही घूँट में अपना ग्लास ख़ााली कर दिया। उसका दिमाग़ ना चाहते हुए भी बार-बार अनामिका के बिना कपड़ों के जिस्म की कल्पना कर रहा था। उसके अंदर से एक आवाज़ चीख-चीख कर कह रही थी कि उसे उस लड़की के साथ वो सब कुछ करना चाहिए को उसका दिमाग़ उससे कह रहा है। आख़िर उस तूफ़ाानी रात भला कौन वहाँ आने वाला है।
“आई विल गेट यू सम्थिंग टू ईट एंड आ वॉर्म ब्लैंकेट। यू कैन क्रैश ऑन द काउच फ़ॉॉर द नाइट। कल सुबह तुम्हारी कार ठीक कराने का कोई इंतज़ााम देखते हैं। वैसे तुम क्रिसमस ईव पर वो भी इतने ख़राब मौसम में, अकेले, बेवक्त जा कहाँ रही थी?” सत्यवीर ने बड़ीी मुश्किल से अपने अनियंत्रित होते दिमाग़ीी घोड़ों को लगाम लगाई और वहाँ से उठते हुए बोला।
“शिमला, अपनी नानी के पास। ऐक्चूअली मैं अपने फ़्रेंड्ज़ के साथ शिमला से नारकंडा स्नो स्कीईंग के लिए आयी थी। मैंने नानी से प्रॉमिस किया था कि मैं क्रिसमस ईव उनके साथ ही स्पेंड करूँगी। नारकंडा से शिमला तीन-चार घंटे का ही रास्ता है, मुझे लगा मैं टाइम्ली पहुँच जाऊँगी लेकिन कमीनी कार ने धोखा दे दिया।”
सत्यवीर लिविंंग एरिया के डाइनिंंग एक्स्टेन्शन से जुड़े ओपन किचन में ऑम्लेट के लिए अंडे व्हिप कर रहा था।
“यू मस्ट बी रियली क्लोज़ टू योर ग्रैनी वरना इतने ख़राब मौसम में अकेले ड्राइव करने की बेवक़ूूफ़ीी नहीं करती।” सत्यवीर की बात के लहजे से झलक रहा था कि वो अनामिका की बात से पूरी तरह कन्विि न्स्ड नहीं है।
“आई नेवर सॉ माई पेरेंट्स। जब से होश सम्भाल है तबसे नानी ने ही मुझे पाला। वो मेरे लिए मेरी लाइफ़ की सबसे इम्पॉर्टेंंट इंसान हैं।”
“देन शी मस्ट बी रियली वरीड।” “हाँ, यही टेन्शन तो मुझे खाए जा रही है। अगर फ़ोोन काम कर रहा होता तो एट लीस्ट उन्हें इन्फ़ॉॉर्म कर देती।”
“स्मोक एंड ड्रिंंक करती हो तो मैंने अज्यूम कर लिया कि नॉन-वेज भी खाती ही होगी। होप आई एम नॉट रॉंग।” सत्यवीर खाने की ट्रे लिए हुए वहाँ आया और ट्रे रखते हुए बोला।
“मेरी नानी कहती है कि मैं किसी को कच्चा भी चबा सकती हूँ।आई एम स्ट्रिक्ट्ली कार्निवोरस।”
“मुझे कच्चा मत खाना भई। लो ये खाओ ये मुझसे बेटर टेस्ट करेगा।” सत्यवीर ने ट्रे से एक प्लेट उठा कर अनामिका के सामने टेबल पर रखते हुए कहा।
अनामिका ने देखा कि प्लेट में चीज़ ऑम्लेट, सॉल्टेड मीट विद् मैश्ड पीज़ एंड पोटेटो, रम केक और पुडिंंग बहुत क़रीने से सजाए हुए थे।
“यू आर ए ट्रू आर्टिस्ट। आपकी हर चीज़ एक आर्ट मास्टरपीस जैसी पर्फ़ेक्ट दिखाई देती है।” वो प्लेट एड्मायर करते हुए बोली।
सत्यवीर ने मुस्कुरा कर उसका कॉम्प्लिि मेंट स्वीकार किया और अपनी प्लेट लेकर उसके सामने वाले काउच पर बैठ गया। उसने देखा कि अनामिका यूँ खाना खा रही थी जैसे कई दिनों की भूखी हो। सत्यवीर ने कभी किसी लड़की को इस तरह खाना खाते नहीं देखा था।
“मैंने इससे ज़्यादा टेस्टी सॉल्टेड मीट अपनी लाइफ़ में कभी नहीं खाया।” अनामिका सॉल्टेड मीट का एक बड़ाा सा पीस नोचते हुए बोली।
“इट्स ऑल अबाउट कॉर्निंंग प्रॉसेस। मीट को डेली, ड्राई सॉल्ट से घंटों रब करना पड़ता है। जस्ट लाइक ए स्कल्प्टर पॉलिशेज हिज़ स्कल्प्चर।”
अनामिका ने देखा कि सत्यवीर की आँखों में ये प्रॉसेस बताते समय एक अजीब सी चमक, उसकी आवाज़ में एक अलग ही एक्साईट्मेंट थी।
“और लोगी?”
अनामिका ने सहमति में सर हिलाया। सत्यवीर के होंठों की मुस्कान फैल गयी। वो उठ कर तेज़ीी से किचन में गया और जल्द ही एक प्लेट में सॉल्टेड मीट के कई स्लायसेज़ और एक हाथ में वाइन ग्लास के साथ वापस आया।
“स्पाइस्ड बर्बन विद् रेड वाइन। टेस्ट्स बेस्ट विद् सॉल्टेड मीट।”
“आर यू ट्राइंग टू गेट मी ड्रंक।” अनामिका वाइन ग्लास उसके हाथ से लेते हुए मिस्चीवियसली बोली।
“मे बी! आर यू ड्रंक?”
“हाहा..नॉट येट।”
अनामिका ने खिलखिलाते हुए जवाब दिया हालाँकि उसकी आँखों में नशे के गुलाबी डोरे तैरते सत्यवीर को साफ़ नज़र आ रहे थे। उसने मुस्कुराते हुए अपनी प्लेट ख़ााली कर के टेबल पर रखी और एक ग्लास में बर्बन लेकर इत्मिनान से काउच पर बैठ गया। अनामिका भी अब तक अपना खाना ख़त्म कर चुकी थी और वाइन ग्लास से इत्मिनान से सिप ले रही थी।
“इफ़ यू डोंट माइंड, कैन आई आस्क समथिंंग?”
“शूट।”
“आप क्रिसमस ईव पर फ़्रेंड्ज़ और फ़ैैमिली से दूर यहाँ बियाबान में अकेले क्या कर रहे हैं?”
“फ़्रेंड्ज़ ! फ़ैैमिली! हाहाहाहा!” अनामिका के सवाल के जवाब में सत्यवीर ने विषादपूर्ण ढंग से ठहाका लगाते हुए कहा, “शो-बिज़नेस में फ़्राइडे टू फ़्राइडे सिर्फ़ इंसान की क़िस्मत ही नहीं बदलती। उसके रिश्तों की सच्चाई भी बदलती है। वन्स आई वॉज़ रिगार्डेड एज़ द फ़ााईनेस्ट इंडियन फ़िल्ममेकर। माई लास्ट टू फ़िल्म्स वर द बिग्गेस्ट बॉक्स ऑफ़िस फ़ेेल्यर्स एंड एव्रीथिंंग चेंज्ड। दोनों फ़िल्मों में मेरा ही पैसा लगा था। दोनों फ़िल्में मुझे पैसों और रिश्तों दोनों से कंगाल कर गयीं। जो लोग मुझे रात-दिन फ़ोोन और मैसेज करते नहीं थकते थे उन्होंने मेरे कॉल्स लेने बंद कर दिए। मेरे मैसेजेस भी सीन पर छोड़ देते हरामज़ाादे! सडन्ली द होल वर्ल्ड बिकेम प्रोफ़ेेट एंड अनाउन्स्ड दैट सत्यवीर सैम्यूअल्स फ़िल्म मेकिंंग करियर इज़ ओवर।”
अनामिका ने अचानक सत्यवीर की आवाज़ में दर्द और क्रोध महसूस किया।
“आइ गेव माई एंटायर लाइफ़ टू फ़िल्म मेकिंंग। आई गेव सिक्स्टीन हिट्स बट इट टुक ओन्ली टू फ़्लॉप्स फ़ॉॉर पीपल टू राइट मी ऑफ़। मैंने भी ठान लिया कि लोगों को दिखा दूँगा कि मेरी लेखनी, मेरी फ़िल्म मेकिंंग में वही पहले जैसी धार है। मैंने अपनी हर फ़िल्म खुद लिखी है। मेरी आख़री दो फ़िल्मों को छोड़ कर मेरी हर फ़िल्म यहीं, इसी प्राइवेट कॉटिज में, अपने पुराने रेमिंंगटॉन टाइपराइटर पर लिखी है मैंने। मेरी अगली ब्लॉकबस्टर फ़िल्म भी यहीं, इसी कॉटिज में मेरे उसी टाइपराइटर पर लिखी जाएगी।”
“डोंट टेल मी! सीरीयस्ली? आप अब भी टाइपराइटर यूज़ करते हैं? वाउ! दिस इज़ सो अमेजिंंग।” अनामिका अपनी आँखें बड़ीी कर के चौंकते हुए बोली।
सत्यवीर के चेहरे पर एक फीकी मुस्कान उभरी। उसने टेबल पर रखा अपना ड्रिंंक उठाया, वो अपना ग्लास ख़ााली कर चुका था। शाम से पी रहे सत्यवीर पर अब नशे का सुरूर धीरे-धीरे असर दिखा रहा था।
“मैं अपने लिए एक और ड्रिंंक बनाने जा रहा, तुम भी लोगी क्या?” वो अपना ख़ााली ग्लास लेकर काउच से उठते हुए बोला।
अनामिका ने सहमति में सर हिलाते हुए अपना ख़ााली ग्लास उसकी तरफ़ बढ़ाा दिया। सत्यवीर थोड़ाा चौंका। “कपैसिटी अच्छी है तुम्हारी। इतने में तो अच्छे-अच्छे डोल जाते हैं।”
“अच्छे-अच्छे डोलते होंगे, मैं तो अच्छी नहीं हूँ ना. आई एम ए बैड-बैड गर्ल।” अनामिका ने मिस्चीवियसली जवाब दिया।
“हाहाहाहा…अच्छा। मुझे तो नहीं दिखती।”
“अभी तो रात शुरू ही हुई है।अभी बहुत वक्त है देखने और समझने के लिए।”
बार की तरफ़ बढ़ता सत्यवीर अनामिका की तरफ़ पलटा। अनामिका ने वो बात कुछ अलग ही अन्दाज़ में कही थी लेकिन जब सत्यवीर ने उसकी ओर देखा तब वो पहले की तरह ही चेहरे पर बच्चों सी मासूमियत लिए उसे देख कर मुस्कुरा रही थी। सत्यवीर ने महसूस किया कि फ़ाायर प्लेस में जल रहे आग के बावजूद वहाँ पर ठंड धीरे-धीरे बढ़ रही थी। उसने फ़ाायर पोकर से कुछ और लॉग्स आग में सरकाए फिर दोनों के लिए ड्रिंंक तैयार किया और वापस अनामिका के सामने काउच पर आ बैठा। अनामिका ने उससे ड्रिंंक लेते हुए कहा।
“नाउ आई कैन अंडरस्टैंड, मेरे आने से आपको कितनी दिक़्क़त हुई होगी। मैंने आपको लिखने में डिस्टर्ब कर दिया।”
“ऑन द कॉंट्रेरी, तुमने तो मुझे अगली फ़िल्म के लिए काफ़ीी इंट्रेस्टिंंग सब्जेक्ट दे दिया वरना पिछले एक वीक से मैं यहाँ सिर्फ़ टाइम और पेपर बर्बाद कर रहा था।” सत्यवीर ने अपने ड्रिंंक का एक घूँट लेकर इनकार में सर हिलाते हुए कहा।
“मैंने? मैंने आपको क्या सब्जेक्ट दे दिया?” अनामिका ने चौंकते हुए पूछा।
“क्रिसमस ईव की रात, बर्फीले तूफ़ाान में पहाड़ीी पर बने एक अकेले सुनसान कॉटिज में एक अकेला राइटर और वहाँ अचानक से आती है एक अंजान, ब्यूटिफ़ुुल, मिस्टिरीयस लड़की. बैकड्रॉप फ़ॉॉर ए पर्फ़ेक्ट थ्रिलर।”
सत्यवीर ने देखा कि अनामिका की आँखों में बच्चों जैसी चमक और एक्साईट्मेंट थी।
“दैट्स ऑसम! वैसे आप आगे क्या दिखाने वाले हैं? जैसे-जैसे रात गुजरती जाती है आपकी कहानी के प्रोटैगनिस्ट को धीरे-धीरे ये एहसास होता है कि वो मिस्टिरीयस लड़की कोई ज़िंंदा इंसान नहीं बल्कि वास्तव में कोई भटकती हुई आत्मा है जो उसके जैसे ही अकेले तनहा मर्दोंं को पहले अपने हुस्न के जाल में फँसाती है और फिर उन्हें मार कर उनका खून पी जाती है और फिर रात के अंधेरे में ही कहीं ग़ाायब हो जाती है? एम आई राइट?”
“नो यू ऐंट! डोंट माइंड बट ये बहुत घिसा-पिटा नैरेटिव है। हर वान्ना-बी और नौसिखिया राइटर कुछ ऐसा ही सोचता है। मैं ये बिल्कुल नहीं दिखा रहा।” सत्यवीर ने मुस्कुराते हुए ड्रिंंक का एक सिप लिया फिर बोला।
“अच्छा फिर बताइए कि आपकी कहानी में क्या होता है?”
“मुझे अपने दर्शकों के दिलोदिमाग़, उनके जज़्बात से खेलना पसंद है। तुमने अभी-अभी जो कहानी सुनाई, ज़्यादातर दर्शकों के दिमाग़ में फ़िल्म देखते टाइम भी यही नैरेटिव चल रहा होगा। उन्हें लगेगा कि ज़रूर ये भोली सी, मासूम, प्यारी सी दिखने वाली अनामिका कोई आत्मा, डायन या चुड़ैल है। वरना भला ऐसी सर्द, बर्फीली, तूफ़ाानी रात में कोई जवान, खूबसूरत लड़की ऐसे आराम से किसी बिल्कुल अंजान, अजनबी के कॉटिज में बैठ कर शराब थोड़े ही ना पिएगी लेकिन उनका दिमाग़ इस ख़याल की तरफ़ नहीं जाएगा कि आख़िर प्रटैगनिस्ट इस लड़की को इतनी शराब क्यों पिला रहा है।”
“क…क्या मतलब?”
सत्यवीर के चेहरे पर एक रहस्यमयी तीखी मुस्कान उभरी।
“मतलब ये कि ऐसा भी हो सकता है कि फ़िल्म का प्रटैगनिस्ट…यानी कि मैं वास्तव में एक साइकोपैथ सीरीयल किलर हूँ। अब देखो ना, मेरी लास्ट दो फ़्लॉप फ़िल्मों को छोड़ कर बाक़ीी सभी मर्डर मिस्ट्री थीं। वॉट आर द ऑड्ज़ कि मैंने अपनी हर फ़िल्म की कहानी लिखने से पहले खून किए, फिर अपने एक्स्पिरीयन्स को अपनी इमैजिनेशन के साथ ब्लेंड कर के एक पर्फ़ेक्ट स्क्रीनप्ले रेडी किया जिसे अपनी क्रीएटिविटी एंड विज़न से डाईरेक्ट कर के ब्लॉकबस्टर फ़िल्में बनाई।”
अनामिका के चेहरे का रंग एकाएक उतर गया। अपनी बात का असर अनामिका पर होता देख कर सत्यवीर की मुस्कान और तीखी हो गयी। उसने आगे कहा।
“पिछले एक हफ़्ते से में लाख कोशिशों के बावजूद लिख नहीं पा रहा था क्योंकि कोई प्लॉट आइडिया…या यूँ कहो कोई शिकार नहीं मिल रहा था लेकिन इस क्रिसमस ईव पर सैंटा ने मेरी अगली ब्लॉकबस्टर फ़िल्म के प्लॉट आइडिया…मेरे अगले शिकार के रूप में तुम्हें गिफ़्ट रैप कर के मेरे दरवाज़े भेज दिया। यू डिड एंट ईवेन रीयलाईज़ दैट आई स्पाइक्ड योर ड्रिंंक लेकिन अब तुम्हारे ड्रिंंक में मिलाए सेडेटिव्स धीरे-धीरे अपना असर दिखा रहे हैं। तुम्हारा सर भारी हो रहा है, आँखों के आगे सब धुंधला हो रहा है और तुम चाह कर भी अपने जिस्म को हिला नहीं पा रही।”
एकाएक अनामिका को अपना सर भारी होता महसूस हुआ, उसपर नशा चढ़ रहा था। उसने घबरा कर खुद को काउच पर सीधा करने की कोशिश की। वो बिल्कुल सीधी चौकन्नी बैठ गयी, उसका जिस्म उसका दिमाग़ बिल्कुल सजग था, आँखों में नशे का सुरूर ज़रूर था लेकिन उसे सब कुछ साफ़-साफ़ दिखाई दे रहा था। वो बिल्कुल ठीक थी।
“हाहाहा…गॉचा!!” सामने वाले काउच पर सत्यवीर उसे देखते हुए अपना पेट पकड़ कर लोट-लोट कर किसी बच्चे की तरह हंस रहा था जिसका प्रैंक बिल्कुल सही काम कर गया हो।
“यू ऐक्चूअली गॉट मी फ़ॉर ए मोमेंट. मुझे लगा मैं तो गयी. अब मेरे बिना मेरी नानी का क्या होगा….बट आई मस्ट टेल यू, यू आर ए मास्टर स्टोरीटेलर. बाबा रे! एक पल को तो सच में मुझे लगा कि ड्रिंंक स्पाइक्ड है और मेरा सर घूम रहा है।” अनामिका ने चैन की साँस लेते हुए कहा।
कहते हुए अनामिका ने अपना वाइन ग्लास ख़ााली कर दिया। सत्यवीर ने भी अपना ग्लास ख़ााली किया। सत्यवीर को महसूस हुआ कि फ़ाायरप्लेस में लॉग्ज़ बढ़ााने के बाद भी कमरे में ठंड कम होने के बजाए बढ़ रही थी। वो उठ कर फ़ाायर प्लेस की तरफ़ बढ़ाा. इस बार उसकी चाल में हल्की लड़खड़ााहट थी। सत्यवीर फ़ाायरप्लेस के सामने घुटनों पर बैठ गया और झुक कर पोकर से लकड़ियाँ आग में झोंकने लगा। उसका जैकेट कमर से थोड़ाा ऊपर उठा। अनामिका को उसकी जींस बैकपॉकेट से झांकता रिवॉल्वर का वुडेन हैंडल नज़र आया।
“वैसे…दिस कुड ऑल्सो बी द अदर वे अराउंड।” अनामिका ने कुछ सोचते हुए सत्यवीर से कहा।
“मतलब?”
“हो सकता है कि साइकोपैथ सीरीयल किलर आपका प्रटैगनिस्ट नहीं वो खूबसूरत लड़की…यानी कि मैं होऊँ जो मदद माँगने कॉटिज में आई है।”
सत्यवीर ने पोकर से राख में दबी आग को कुरेदते हुए अम्यूज़िंंगली पूछा, “अच्छा! इतनी क्यूट सी लड़की साइको किलर कैसे बन गयी?”
“हो सकता है कि उस लड़की को उसके बचपन या फिर टीनेज में क्रिसमस ईव पर किसी पेडोफ़ााइल ने सेक्शूअली मॉलेस्ट किया हो जिसका कि उसके नन्हें से दिमाग़, उसके सब-कॉन्शयस माइंड पर इतना गहरा असर पड़ाा कि धीरे-धीरे उसके अंतर्मन ने उसके अंदर एक सीरीयल किलर की स्प्लिट पर्सनालिटी क्रीएट कर दी। ये लड़की अपनी इस दोहरी पर्सनालिटी, अपने इस सीरीयल किलर वाले रूप से अंजान है लेकिन हर साल क्रिसमस ईव पर इसके ऊपर इसकी ये स्प्लिट पर्सनालिटी हावी हो जाती है और ये निकल पड़ती है किसी मिडिल एज अकेले मर्द की तलाश में क्योंकि ऐसे हर मर्द में उसे अपना वो मॉलेस्टर नज़र आता है।”
सत्यवीर ने महसूस किया कि अनामिका की आवाज़ धीरे-धीरे गम्भीर और गहरी होती जा रही है। अब तक फ़ाायर प्लेस में आग ठीक-ठाक भड़क चुकी थी। सत्यवीर जैसे ही उठ कर पीछे पलटा वो चौंक गया। उसने दो कदम पीछे लिए। अनामिका काउच पर नहीं थी बल्कि उसके ठीक पीछे खड़ी हुई थी।
अनामिका का चेहरा और उसकी आँखें नशे से तमतमाए हुए थे, उसने धीरे-धीरे सत्यवीर की तरफ़ कदम बढ़ााते हुए कहा, “वो लड़की…वो साइको किलर हर अकेले, मिडिल एज मर्द में अपने मॉलेस्टर को देखती है और उससे बदला लेना चाहती है। हर साल क्रिसमस ईव पर पहले वो अपनी ख़ूबसूरती, अपने हुस्न से अपने शिकार को रिझाती है।”
कहते हुए अनामिका अपना जिस्म सत्यवीर के जिस्म से यूँ सटा दिया कि दोनों के बीच से हवा भी ना गुज़र पाए। अनामिका के उभारों की चुभन सत्यवीर अपने सीने पर महसूस कर रहा था। अनामिका की बाहें सत्यवीर की कमर से फिसलते हुए उसके बैकपॉकेट तक गयीं।
“और फिर मौक़ाा मिलते ही पूरी बेरहमी से उसका खून कर देती है।”
इससे पहले कि सत्यवीर कुछ सोच-समझ पाता, अनामिका का हाथ बिजली की गति से घूमा। सत्यवीर की स्मिथ एंड वेसन रिवॉल्वर की मज़ल उसकी ठोड़ी पर टिकी हुई थी। अनामिका का अंगूठा रिवॉल्वर के हैमर पर और उँगलियाँ ट्रिगर पर थीं और उसकी आँखों में एक अजीब सा पागलपन नज़र आ रहा था। जाने ये अभी-अभी बढ़ााई फ़ाायर प्लेस की आग का असर था या फिर अनामिका की उन पागलपन की दहक भरी साँसों की तपिश, कुछ देर पहले ठंड से ठिठुरते सत्यवीर के माथे से पसीने की बूँदे उसकी ठोड़ीी पर टिकी रिवॉल्वर के मज़ल पर ढुलक गयीं।
“गॉचा! दैट्स कॉल्ड टिट फ़ॉॉर टैट।” अनामिका ने उसे आँख मारते हुए कहा।
अनामिका ने सत्यवीर की ठोड़ी से रिवॉल्वर हटायी और अपना पेट पकड़ कर हंसती हुई वापस काउच पर बैठ गयी।
“होली शिट। आई ऑल्मोस्ट क्रैप्ड माई पैंट्स।” सत्यवीर ने राहत की साँस लेते हुए अपने माथे का पसीना पोंछते हुए कहा।
“आई एम सो सॉरी. मेरी ऐक्टिंंग बढ़िया थी ना? इन फ़ैैक्ट आप चाहें तो अपनी अगली फ़िल्म के लिए मुझे ही कास्ट कर सकते हैं। अनामिका रिवॉल्वर टेबल पर रखते हुए बोली।
सत्यवीर की नज़रों ने एक बार फिर अनामिका के बदन के हर हिस्से को टटोला।
“नॉट ए बैड आइडिया. फ़्रेश एंड स्टनिंंग लुक्स, इनोसेंट आइज़, बेबी फ़ेेस, तुम तो अपने आप में कम्प्लीट पैकेज हो, उस पर से तुम्हारी ऐक्टिंंग स्किि ल का नमूना मैं अभी-अभी देख कर हटा हूँ. बस एक प्रॉब्लम है।”
“वो क्या?”
“फ़िल्म की स्टोरीलाइन। अभी तक हम दोनों ने जो भी प्लॉट आइडिया सोचे हैं वो थ्रिलिंंग तो हैं पर यूनीक नहीं हैं। कैरेक्टर रिविलेशन, क्लाइमैक्स हूक पॉइंट ऐसा होना चाहिए जो व्यूअर्ज़ ने कभी सपने में भी ना सोचा हो और क्लाइमैक्स में ट्वििस्ट ऑफ़ फ़ेेट होना भी ज़रूरी है।”
“वैसे मेरे पास एक अनटोल्ड स्टोरी है। एक ऐसी कहानी जो आपने पहले कभी नहीं सुनी होगी।” अनामिका कुछ सोचते हुए बोली। सत्यवीर मुस्कुराया,
“देयर आर नो सच स्टोरीज़ माई डियर। इस दुनिया में इतनी कहानियाँ हैं और उन्हें इतनी बार इतने तरीक़ेे से कहा जा चुका है कि अनटोल्ड इज़ आ मिथ। हर कहानी, एक था राजा एक थी रानी, दोनों मर गए ख़त्म कहानी! बट…राजा और रानी ने मरने से पहले क्या-क्या किया और दोनों मर कैसे गए, दैट्स वॉट मेक्स आ स्टोरी वर्थ टेलिंंग।”
“चलिए…आप ऐसा मानते हैं तो ऐसा ही सही। हम कहानी के उस अनटोल्ड पार्ट को अनफ़ोोल्ड करते हैं जहां ऐक्चूअली ये पता चलता है कि राजा और रानी मर कैसे गए और उन्होंने मरने से पहले क्या- क्या किया लेकिन उससे पहले…”, अनामिका ने अपनी बात अधूरी छोड़ कर उँगली से अपना ख़ााली वाइन ग्लास ठकठकाया।
“गर्ल! यू ड्रिंंक लाइक ए फ़िश…एंड आइ लाइक दैट।” सत्यवीर मुस्कुराते हुए बोला।
अपना और अनामिका का ख़ााली ग्लास ले कर सत्यवीर बार की तरफ़ बढ़ाा। अब उसपर नशा पूरी तरह हावी हो चुका था। उसके सीने पर पड़ी अनामिका के उभारों की चुभन उसे अब तक बेचैन कर रही थी। उसने ऑयल लैम्प की मद्धिम लौ में काउच पर इत्मिनान से अधलेटी अनामिका को देखा। सौंदर्य की रोमन गॉडेस वीनस जैसी नज़र आती अनामिका के जिस्म से कपड़ों की परतें सत्यवीर अपनी निगाहों से उतार रहा था। सत्यवीर के हाथ थर्राने लगे। उसने अपना सर झटकार एक लार्ज नीट पेग बना कर एक ही साँस में पी गया। अपने चकराते हुए दिमाग़ और बेक़ााबू होते होशोहवास व जज़्बात को क़ााबू में रखने के लिए उसने एक सिगरेट सुलगा ली और दिमाग़ में आते हर आंदोलित विचार को धुएँ में उड़ााने की कोशिश करने लगा।
उसने दोनों ग्लास रीफ़िल किए और काउच की तरफ़ बढ़ गया। इस बार वो अनामिका के सामने वाले काउच पर नहीं बल्कि जिस काउच पर अनामिका अधलेटी थी उसी पर उसकी बग़ल में बैठ गया। अनामिका की आँखों में शरारत भरी चमक के साथ मुस्कान आयी जैसे वो जानती थी कि सत्यवीर यही करने वाला था। सत्यवीर ने ग्लास अनामिका की तरफ़ बढ़ााया। अनामिका ने उठते हुए सत्यवीर के हाथ से ग्लास और उसके होंठों के बीच दबी सिगरेट दोनों ले लिए और धीरे-धीरे कश लगाती और ड्रिंंक सिप करती जैसे अपने ही ख़्यालों में कहीं डूब गयी। कमरे में ठंड एक बार फिर काफ़ीी ज़्यादा बढ़ती जा रही थी। सत्यवीर अनामिका के जिस्म की गर्माहट महसूस करने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसके हाथ अब भी बर्फ़ से ठंडे थे।
“रुको मैं क्वल्ट ले कर आता हूँ तुम बिल्कुल ठंडी हो रही हो।” सत्यवीर उठते हुए बोला।
“जाने दीजिए। वैसे भी कहानी अब ख़त्म होने पर है।” अनामिका ने सत्यवीर का हाथ पकड़ कर उसे बिठाते हुए कहा।
सत्यवीर की कुछ समझ ना आया।
अनामिका फिर से कुछ सोचते हुए बोली, “अच्छा आपने बताया कि आपकी लास्ट दो फ़िल्में जो फ़्लॉप हुईं वो आपने यहाँ इस कॉटिज में नहीं लिखीं। ऐसा क्यों?”
सत्यवीर ने हल्के से हंसते हुए कहा, “ऐक्चूअली इसके पीछे भी एक कहानी है। पाँच साल पहले अपनी सेकेंड लास्ट फ़िल्म लिखने के लिए भी मैं क्रिसमस हॉलिडे में यहाँ कॉटिज पर आया था। ठीक क्रिसमस ईव वाली शाम आइ रैन आउट ऑफ़ बूज़। मैं ऑलरेडी काफ़ी ड्रंक था और उस शाम भी ठीक ऐसा ही बर्फीला तूफ़ाान आया हुआ था। नशे में मैं अपनी गाड़ीी ले कर कॉटिज से दारू लाने निकला। एक तो स्नो-फ़ॉॉल की वजह से ठीक से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था उस पर से किसी बेवक़ूूफ़ ने आधे रास्ते पर गाड़ी पार्क कर रखी थी। बस फिर क्या, ज़बरदस्त ऐक्सिडेंट हुआ। तीन महीने कोमा में और आठ महीने रिहैब में बिताए। उस ऐक्सिडेंट का पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसॉर्डर इतना स्ट्रॉंग था कि मैं फिर यहाँ वापस लौट के नहीं आया।”
अनामिका सिगरेट का कश लगाती, फिर कुछ सोचते हुए बोली, “हम्म…तो इसीलिए आपने अपनी आख़री दो फ़िल्में यहाँ नहीं लिखीं और जब उन फ़्लॉप की वजह से आपने अपना सब कुछ खो दिया तो फिर आपको मजबूरन अपनी अगली फ़िल्म लिखने वापस यहाँ आना पड़ाा, बिकॉज़ यू हैड नो चॉईस।”
सत्यवीर ने सहमति में सर हिलाते हुए कहा, “ऐसा कह सकती हो। मुझे लगा कि मुझे वापस यहाँ आकर लिखना चाहिए क्योंकि ये जगह मेरे लिए उस रात से पहले बहुत लकी थी…एक मिनट…”, सत्यवीर अपनी बात कहते हुए चौंक कर रुक गया और अनामिका की तरफ़ देखा। अनामिका उसे ही देख कर मुस्कुरा रही थी।
“ऑ कम’ऑन! अब तुम ये बकवास मत करना कि पाँच साल पहले उस रात आधी सड़क पर पार्क्ड वो बंद गाड़ीी तुम्हारी थी और कैसे तुम उस ऐक्सिडेंट में मर गयी और पाँच सालों से भूत बन कर भटक रही हो कि कब मैं वापस इस कॉटिज पर आऊँ ताकि तुम अपनी मौत का बदला मुझसे ले सको।”
अनामिका खिलखिला कर हंसी।
“हाहाहा….नहीं बाबा! मैं ऐसा कुछ भी नहीं कह रही। इस कहानी में कोई भूत, चुड़ैल, डायन, भटकती आत्मा नहीं आने वाली।”
“थैंक गॉड! आई हेट इट, जब ये छुटभइये राइटर हॉरर के नाम पर बदला लेने आयी आत्मा वाली बकवास लिखते हैं।” सत्यवीर ने अपना ड्रिंंक सिप करते हुए कहा।
अनामिका एकाएक संजीदा हुई, “मैंने कहा ना, ये एक अनटोल्ड स्टोरी है। बर्फ़ में दफन एक ऐसी दास्तान जो कभी दुनिया के सामने आयी ही नहीं और इसमें कोई सुपर नैचुरल, पैरानॉर्मल या हॉरर ऐंगल नहीं है।”
सत्यवीर इम्प्रेस्ड नज़र आ रहा था। उसने ड्रिंंक सिप करते हुए कहा, “ऑलराइट. नाउ यू गॉट मी हुक्ड। सुनाओ, हम भी तो जानें आख़िर इस कहानी में ऐसा कौन सा ऐंगल है जो अब तक हमारी पकड़ में नहीं आया।”
अनामिका ने अपना ग्लास ख़ााली किया फिर काउच से नाटकीय अन्दाज़ में खड़ीी हुई और यूँ कहने लगी जैसे वो किसी ग्रांड स्टेज पर स्पॉट लाइट में खड़ीी हो और सामने ऑडिटॉरियम में हज़ाारों की क्राउड को ऐड्रेस कर रही हो।
“तो साहेबान! आपके सामने पेश है अनामिका अनटोल्ड की असली दास्तान। क्रिसमस ईव की शाम, जब पूरी दुनिया अपने अपनों के साथ ख़ुशियाँ और त्योहार मना रही थी तब हिंंदुस्तान का टॉप मिस्ट्री फ़िल्ममेकर सत्यवीर सैम्यूअल दुनिया से दूर अपने बियाबान कॉटिज में अपनी अगली ब्लॉकबस्टर फ़िल्म का प्लॉट लिख रहा था। इस प्लॉट का प्रोटैगनिस्ट भी सैम्यूअल की तरह ही अपने कॉटिज में बैठा अपनी अगली कहानी लिख रहा होता है जब उसके कॉटिज की डोरबेल बजती है और एक खूबसूरत लड़की वहाँ आती है। सत्यवीर सैम्यूअल की ये कहानी मैनिफ़ेेस्ट हुई और उस शाम उसके कॉटिज की भी डोरबेल बजी। दरवाज़ाा खोलने पर सामने खूबसूरत अनामिका थी जिसकी गाड़ीी ख़राब हो गयी थी और उसे एक फ़ोोन कॉल करना था। अनामिका कॉल करने अंदर आती है ठीक उसी समय तूफ़ाान तेज हो जाता है, लाइट चली जाती है, फ़ोोन नेटवर्क काम नहीं करता। उस तूफ़ाानी शाम में सत्यवीर और अनामिका कॉटिज में अकेले हैं। जैसे-जैसे शाम आगे बढ़ती है दोनों के बीच क़िस्से कहानियों का सिलसिला बढ़ता है। दोनों एक-दूसरे को एक के बाद एक प्लॉट आइडियाज़ सुनाते हैं। शाम के साथ ठंड और सुरूर भी बढ़ता है, दोनों अपनी मस्ती में मदमस्त बेतहाशा पी रहे हैं दोनों के ही होश और हवास बार-बार भरे जाते और ख़ााली होते शराब के ग्लास में डूब कर दम तोड़ रहे थे। अनामिका खुश थी, वो सत्यवीर की तरफ़ अट्रैक्टेड भी थी लेकिन उसे ये नहीं पता था कि सत्यवीर तो अपनी नज़रों से ही उसके जिस्म से कपड़े उतारने की कोशिश कर रहा था।”
सत्यवीर को अचानक एक झटका सा लगा। वो काउच पर सीधा बैठते हुए डिफ़ेेन्सिि व टोन में बोला।
“य…ये क्या बकवास कर रही हो अनामिका। ए…ऐसा कुछ भी नहीं है।”
अनामिका ने अपनी उँगली सत्यवीर के होंठों पर रखते हुए उसे चुप कराया, “श्श्श्श…लेट मी कम्प्लीट माई स्टोरी फ़र्स्ट। सत्यवीर ने अनामिका को अपनी अगली फ़िल्म ऑफ़र की, अनामिका की तो ख़ुशी का ठिकाना ही ना रहा। उस क्रिसमस ईव पर उसे ये बेस्ट सर्प्राइज़ मिलेगा इसकी उसने सपने में भी उम्मीद नहीं की थी। वो भी सत्यवीर के साथ हल्की-फुल्कि हेल्दी फ़्लर्टिंंग कर रही थी शायद इस रिश्ते को समय दिया जाता तो अनामिका आगे बढ़ने के बारे में भी सोचती, आख़िर सत्यवीर उससे ऑल्मोस्ट दोगुनी एज़ का था लेकिन उसकी नॉलेज, उसका क्राफ़्ट्समैनशिप, उसके स्कि ि ल ने अनामिका को बहुत ज़्यादा इम्प्रेस किया था। रात के साढ़े ग्यारह बज रहे थे, दोनों अब थकान और नशे से चूर थे। सत्यवीर दोनों के लिए उस शाम की आख़री ड्रिंंक बना लाया। दोनों ने मस्ती मज़ााक़ करते हुए वो ड्रिंंक ख़त्म की। अनामिका की नशे और नींद से बोझिल होती आँखें अब बंद हो रही थीं, तभी उसे अचानक सत्यवीर का हाथ अपने पुल-ओवर के अंदर रेंगता महसूस हुआ। वो चौंक कर उठ बैठी और उसने सत्यवीर को खुद से परे धक्का देने की कोशिश की। उसने सत्यवीर को मना किया कि अभी वो इतना आगे बढ़ने के लिए तैयार नहीं है लेकिन सत्यवीर पर तो जैसे जुनून सवार था। उसने अनामिका को काउच पर पिन डाउन कर दिया और उसकी जींस अनबटन करने लगा। अनामिका खुद को बचाने के लिए बुरी तरह हाथ-पैर फेंक रही थी। अचानक उसका हाथ टेबल पर रखी उस रिवॉल्वर पर गया जो उसी ने कुछ देर पहले वहाँ रखी थी। अनामिका ने फ़ौरन रिवॉल्वर उठा कर सत्यवीर पर तान दी। उसका इरादा सत्यवीर को शूट करने का नहीं था, वो तो बस नशे में बहक रहे सत्यवीर को आगे बढ़ने से रोकना चाहती थी। सत्यवीर ने अनामिका के हाथ से रिवॉल्वर छीनने की कोशिश की। दोनों में हाथापाई शुरू हो गयी जिसमें ना जाने कब ट्रिगर दब गया और गोली चल गयी।”
अनामिका दो पल के लिए शांत हुई। वहाँ बिल्कुल सन्नाटा छा गया, सत्यवीर अपनी जगह जड़वत बैठा था। उसका नशा उतर चुका था। उसने बहुत मुश्किल से पूछा, “फ…फिर क्या हुआ?”
“गोली ठीक अनामिका के दिल में जा कर धंसी थी, कोई एग्ज़िट वूँड नहीं। उस बेचारी का तो बचने का कोई चान्स ही नहीं था। अनामिका तो फ़ौौरन ही मर गयी लेकिन सत्यवीर के लिए बहुत बड़ी मुश्किल खड़ीी कर गयी थी। आख़िर वो नशे में धुत्त था, वो लड़की जिसे वो सेक्शूअली मॉलेस्ट करने की कोशिश कर रहा था वो खुद को बचाते हुए उसकी रिवॉल्वर से चली गोली से मरी थी, लाश सत्यवीर के कॉटिज में उसके सामने काउच पर पड़ीी थी। ये राज अगर बाहर आ जाता तो सत्यवीर की लाइफ़, करियर सब बर्बाद हो जाते। दुनिया उसे रेपिस्ट, मर्डरर बुलाती, उसके मुँह पर थूकती, उसकी बची हुई ज़िंंदगी जेल में गुजरती। सत्यवीर को ये मंज़ूर नहीं था। उसके शातिर दिमाग़ ने एक प्लान बनाया। उसने ये काउच हटाया और इसके नीचे बिछा महँगा पर्शियन कार्पेट हटाया।”
अनामिका उस काउच जिसपर सत्यवीर बैठा था और उसके नीचे फ़्लोर पर बिछे पर्शियन कार्पेट की तरफ़ इशारा करते हुए बोली। सत्यवीर चौंक कर काउच पर से उठ खड़ाा हुआ और काउच व कार्पेट को देखने लगा। अनामिका ने आगे कहा, “कॉटिज की फ़्लोर में लगे वुडन प्लैंक्स को सत्यवीर एक- एक कर के निकालने लगा। वुडन प्लैंक्स हटाने के बाद सत्यवीर ने नीचे गड्ढा खोदा। उसने अनामिका की डेड-बॉडी से कपड़े उतारे। उसके खून सने कपड़े और मोबाइल फ़ोोन उसने इसी फ़ाायर प्लेस में जला कर ख़ााक कर दिया और अनामिका की डेड बॉडी गड्ढे में डाल कर उसे वापस भर दिया। फ़्लोर के वुडन प्लैंक्स लगा कर उसपर फिर से कार्पेट और काउच बिछा दिया और अनामिका हमेशा-हमेशा के लिए अपनी इस कहानी के साथ दफन हो गयी।”
सत्यवीर का गला बुरी तरह सूख रहा था, उसका पूरा शरीर ठंडे पसीने से भीगा हुआ था और उसकी रीढ़ में रह-रह कर सिहरन उठ रही थी। उसने अपना पसीना पोंछते हुए बड़ीी मुश्किल से कहा, “बाप रे! त…तुमने इतनी कन्विि क्शन से और इतनी इंटेन्स फ़ीील के साथ ये कहानी सुनाई है कि मुझे खुद को ये फ़ीील हो गया कि ये कहानी नहीं ऐसा सच में हुआ है।”
“कहानी अभी ख़त्म नहीं हुई है डाइरेक्टर साहब। अभी तो ट्वििस्ट ऑफ़ फ़ेेट बाक़ीी है। उसके बिना तो आपकी कोई कहानी ख़त्म नहीं होती ना?” अनामिका मुस्कुराते हुए बोली।
“अ..अच्छा! वो क्या है?”
“अपने गुनाह का हर सबूत मेरी लाश के साथ दफन कर के तुम इस कॉटिज से अपनी गाड़ी में निकले। तुम कोई कोल्ड ब्लडेड मर्डरर तो हो नहीं, इस घटना ने तुम्हें बुरी तरह झंकझोर दिया था उस पर से डर पर हावी शराब का नशा। बर्फीले तूफ़ाान में तुम्हारे लिए अपनी गाड़ीी सम्भाल पाना वैसे ही मुश्किल हो रहा था। इसे आयरॉनी कहो या ट्वििस्ट ऑफ़ फ़ेेट, तुम्हारी गाड़ी सड़क पर खड़ी मेरी बंद कार से जा टकराई। तुम बहुत स्पीड में ड्राइव कर रहे थे, ज़बरदस्त ऐक्सिडेंट हुआ। मेरी गाड़ी नीचे खाई में जा गिरी और ब्लास्ट कर गयी। तुम अगले तीन महीने तक कोमा में और उसके बाद आठ महीने तक रिहैब में रहे। ऐक्सिडेंट के दौरान तुम्हारा दिमाग़ इस घटना को लेकर इतने एक्स्ट्रीम स्ट्रेस में था कि जब तुम कोमा से बाहर निकले तब ट्रैन्शंट ऐम्नीशिया से तुम कॉटिज में हुई इस घटना और मेरे बारे में बिल्कुल भूल चुके थे।”
सत्यवीर ने अनामिका को बीच में टोका.
“एक मिनट-एक मिनट, इस कहानी में एक लूपहोल है। तुम्हारे बारे में तुम्हारे दोस्तों ने, तुम्हारी नानी ने पता करने की कोशिश नहीं की?”
“कोशिश की थी ना! खाई में मिली गाड़ी ही इतनी बुरी हालत में मिली थी कि पुलिस ने बोल दिया कि लाश मिलना इम्पॉसिबल है। नानी से ये शॉक लिया नहीं गया, सडेन हार्ट फ़ेेल्यर से उनकी डेथ हो गयी। दोस्तों ने कुछ टाइम तक ऑनलाइन कैम्पेन चलाई। मीडिया ने भी कुछ दिनों तक रनिंंग न्यूज़ में जस्टिस फ़ॉॉर अनामिका का राग गाया उसके बाद सब कुछ धीरे-धीरे ठंडा पड़ गया। तुम तीन महीने तक कोमा में थे, जब जागे तब डॉक्टर्ज़ ने डिक्लेयर कर दिया कि शॉक और ट्रैन्शंट ऐम्नीशिया के कारण तुम्हें उस ऐक्सिडेंट के बारे में कुछ भी याद नहीं। तुम एक नैशनल सिलेब्रिटी थे और मेरी तो लाश को पूछने वाला भी कोई नहीं था। बात आयी गयी हो गयी। रिहैब से निकलने के बाद तुमने वापस फ़िल्म लिखने और बनाने की ठानी लेकिन तुम्हारा गिल्टी सब-कॉंशन्स तुम्हें वापस यहाँ कॉटिज पर आने से रोक रहा था। इसीलिए तुमने अपनी आख़री दो फ़िल्में यहाँ आकार नहीं लिखी लेकिन चाहो तो इसे कर्मा कहो या फिर ड्रमैटिक इफ़ेेक्ट देने के लिए मेरी आत्मा की आह कह लेना, कि तुम्हारी वो दोनों फ़िल्में तुम्हें बर्बाद कर गयीं। तुमसे तुम्हारा नेम-फ़ेेम, मनी-स्टैटस, फ़ैैमिली- फ़्रेंड्ज़ सब कुछ छिन गया और आख़िरकार तुम लौट कर यहाँ वापस इस कॉटिज में आए। आज क्रिसमस ईव पर तुमने पाँच साल पहले घटी उस घटना को एक बार फिर जिया है… डेज़ॉॉ-वू।”
सत्यवीर को अपने कानों, अपने दिमाग़ में एक सीटी सी बजती सुनाई दे रही थी। उसकी नसें सुन्न पड़ रही थीं। ज़बान सूख कर तालु से जा चिपकी थी और ऐसा लग रहा था जैसे गले में काँटे चुभ रहे हों। उसने बड़ीी मुश्किल से कहा, “य…ये तो सिर्फ़ एक कहानी है…हाँ बहुत ही थ्रिलिंंग है…लेकिन बस एक कहानी है। तुम ऐसे अक्यूज़िंंग टोन में क्यों कह रही हो जैसे ऐसा सच में हुआ हो।”
इस बार अनामिका की आवाज़ उस रात से भी ज़्यादा सर्द थी, “टेबल पर रखी अपनी रिवॉल्वर का चेम्बर देखो सत्यवीर, देखो क्या उसमें से एक बुलेट मिसिंंग है? और अगर मिसिंंग है तो क्या तुम्हें याद है कि वो बुलेट तुमने कब चलाई थी।”
सत्यवीर ने टेबल से रिवॉल्वर उठाई और उसका चेम्बर खोला, एक चेम्बर ख़ााली थी। एकाएक सत्यवीर आपे से बाहर हो गया।
“ये क्या बेहूदा मज़ााक़ है! देयर इज़ लिमिट फ़ॉर एव्रीथिंंग! ठीक है मैं तुम्हारे साथ कुछ ज़्यादा ओपन हो गया, तुम्हें थोड़ीी छूट दे दी तो इसका ये मतलब नहीं कि मेरे सर पर चढ़ कर बैठोगी तुम! तुमने एक बुलेट निकाल कर अपने पास छुपा ली है और अब मुझे ये यक़ीीन दिलाने की कोशिश कर रही हो कि मैं एक रेपिस्ट…एक मर्डरर हूँ! अरे अगर तुम मर गयी हो और यहाँ इस काउच के नीचे दफन हो तो मेरे सामने कैसे खड़ी हो? ये पूरी शाम का डेज़ॉॉ-वू क्या तुम्हारे भूत ने किया है? और…और…तुमने तो कहा था कि इस कहानी में कोई भूत-प्रेत आत्मा नहीं है, फिर तुम कौन हो? कौन हो तुम??”
अनामिका सत्यवीर के बिल्कुल पास आ गयी और उसकी आँखों में एकटक झांकती हुई बोली, “मैं अनामिका की आत्मा नहीं हूँ सत्यवीर, मैं तुम्हारी अंतरात्मा हूँ। मैं तुम्हारे उस डार्क-डीप सब-कॉंशन्स में दफन अनामिका का अक्स हूँ जो इस क्रिसमस ईव पर तुम्हें याद दिलाने की कोशिश कर रहा है कि तुमने क्या किया था। तुम्हारा दिमाग़ तुम्हारे साथ खेल खेल रहा है सत्यवीर, यहाँ इस कॉटिज में तुम्हारे अलावा कोई भी नहीं। आज कॉटिज की डोरबेल नहीं बजी थी, पूरी शाम तुमने सत्यवीर और अनामिका दोनों का पार्ट खुद ही प्ले कर के पाँच साल पहले हुई घटनाओं को दोबारा जिया है। ये तुम्हारे दिमाग़ का तरीक़ाा है तुम्हें सच्चाई दिखाने का।”
“ये झूठ है….ये सब कुछ झूठ है। तुम यहाँ मेरे सामने खड़ीी हो।” सत्यवीर पागलों की तरह चीखा।
“तुम बिल्कुल अकेले हो सत्यवीर…तुम सिर्फ़ अपने आप से बातें कर रहे हो।”
ठीक उसी समय एक-बार फिर तेज बर्फीली हवा का थपेड़ाा वहाँ की खिड़की खोलता चला गया। फ़ाायरप्लेस के ऊपर बनी चिमनी से भी बर्फ़ आग पर गिर रही थी। उस बर्फीली हवा के थपेड़े से फ़ाायरप्लेस की आग और लिविंंग एरिया में जल रहा ऑयल लैम्प दोनों बुझ गए। लिविंंग एरिया में एक बार फिर से घुप्प अंधकार छा गया। सत्यवीर ने पागलों की तरह भागते हुए खिड़की बंद की और फ़ोोन की फ़्लैशलाइट जलाई। वो लिविंंग एरिया में बिल्कुल अकेला था। अनामिका का कहीं नामोनिशान नहीं था जैसे कि वो वहाँ कभी थी ही नहीं।
“नहींsss….नहींsss….ये नहीं हो सकता।” सत्यवीर विक्षिप्त पागलों के समान चिल्ला रहा था। उसने काउच उठा कर दूर पलट दिया और कार्पेट भी उठा कर फेंक दिया। उसपर जैसे कोई जुनून सवार हो गया था, वो एक-एक कर के वुडन फ़्लोर फ़्लोर प्लैंक्स निकाल रहा था। वातावरण में दूर कहीं रात बाहर बजे का चर्च बेल सुनाई दिया और उसके साथ दूर कहीं से आती क्रिसमस कैरल की हल्की आवाज़।
“वी विश यू ए मेरी क्रिसमस….वी विश यू ए मेरी क्रिसमस…एंड ए हैपी न्यू ईयर।”
THE END
