कृतिका- ‘हेलो क्रीपर्स! मैंहूँआपकी क्रीपी कृतिका और आज मैंआपको बतानेवाली हूँएक बहुत ही कू ल एं ड क्रीपी ए.आइ. ऐप के बारेमें. इस ऐप का नाम है “क्रीप सॉस” और इसकी अमेज़िंग आर्टिफ़िशल इंटेलिजेन्स आपकी फ़ोटोग्राफ़्स स्कैन कर के उन्हेंआपके क्रीपी अवतार मेंबदल सकता है. वेट…वेट…वेट, मुझेपता हैआप लोग क्या सोच रहेहैं. येकाम तो बहुत सारेए.आइ. ऐप कर सकतेहैंराइट? नो गाइज़, क्रीप सॉस का आर्टिफ़िशल इंटेलिजेन्स आपके स्टिल, स्टैटिक क्रीपी वर्ज़न्स जेनरेट नहीं करता. वेट, लेट मी जस्ट शो इट टू यू.’
1कृतिका नेलाइव यूट्यूब वीडियो स्ट्रीम करतेकै मरा की तरफ़ अपनी मोबाइल स्क्रीन कर के उस पर ‘क्रीप सॉस’ ऐप का आइकॉन क्लिक किया. ऐप ओपन होतेही उसनेफ़ोन गैलरी सेअलग-अलग ऐ ंगल सेली हुई अपनी आठ-दस फ़ोटोग्राफ़्स ऐप पर अपलोड कर दी.
कृतिका- ‘सी गाइज़, मैंडिफ़्रेंट ऐ ंगल्स सेली हुई अपनी फ़ोटोग्राफ़्स ऐप पर अपलोड कर रही हूँ. इसका पावरफ़ुल ए.आइ. विद इन ए मिनट मेरा वर्चूअल क्रीपी अवतार जेनरेट कर देगा एं ड नाउ इट्स टाइम टू सी द मैजिक! मैंऐप के ओपन फ़्रं ट कै मरा ऑप्शन मेंजा कर अपनेफ़ोन का फ़्रं ट कै मरा ओपन कर रही हूँ.’
कृतिका नेफ़्रं ट कै मरा ओपन किया, मोबाइल स्क्रीन पर कृतिका दिखाई देरही थी और कृतिका के ठीक पीछेकृतिका का ही अक्स खड़ा नज़र आ रहा था, जिसकी आँखों मेंपुतलियाँनहीं थी, चेहरे पर बंजर ज़मीन जैसी दरारेंपड़ी हुई थीं, बिखरेहुए बाल चेहरेके सामनेआए हुए थे. किसी अतृप्त आत्मा जैसा नज़र आता वो अर्धपारदर्शी साया देखनेमेंबेहद डरावना लग रहा था और किसी ज़ॉम्बी की तरह चलतेहुए कृतिका की ओर बढ़ रहा था. उस सायेके गलेसेज़ॉम्बी जैसी ही घरघराहट निकल रही थी. कृतिका मोबाइल लेकर जिधर-जिधर आगेबढ़ती वो साया उधर-उधर उसके पीछे आता. लाइव स्ट्रीम करतेकै मरा पर कृतिका और उसके पीछेआती उसकी ‘आत्मा’ साफ़ नज़र आ रहेथे. कै मरा हैंडल करती कृतिका की फ़्लैट मेट और उसकी बेस्ट फ़्रेंड वर्तिका कै मरा रिग लेकर उसे फ़ॉलो कर रही थी ताकि कृतिका की मोबाइल स्क्रीन पर कृतिका और उसका पीछा करती उसकी ‘आत्मा’ वीडियो मेंसाफ़ दिखाई दें. कृतिका चहकतेहुए बोली.
कृतिका- ‘सी गाइज़, इज़’ इं ट इट अमेज़िंग! अब जब तक मेरेमोबाइल पर “क्रीपी सॉस” ऐप का फ़्रं ट कै मरा ओपन रहेगा, मैंजहां-जहां जाऊँ गी मेरा येक्रीपी अवतार मुझेफ़ॉलो करेगा. ऐप का लिंक आपको नीचेडिस्क्रिप्शन मेंमिल जाएगा, अभी ऐप डाउनलोड करें. आप मेरा कोड सी.के.666 अप्लाई करेंगे तो आपको मिलेगा वेल्कम बोनस. तो देर किस बात की हैक्रीपर्स, फटाफट ऐप डाउनलोड करो, अपना क्रीपी अवतार बनाओ और अपनेदोस्तों और घरवालों को डराओ. मैंआपसे मिलती हूँअपनेअगलेक्रेज़ी क्रीपी वीडियो में, अंटिल देन, दिस इज़ योर क्रीपी कृतिका साइनिंग ऑफ़. चाउ.’
वर्तिका – ‘यूनेल्ड इट कृ तु. आय एम प्रिटी श्योर इसके बाद हमारेपास स्पॉन्सर्सकी लाइन लगने वाली है. येस्टार्टअप वालेस्मॉल टाइम एप और ब्रैंड्ज़ शुरुआत के लिए तो ठीक हैंलेकिन अगर अच्छेटॉप ब्रैंड्ज़ की स्पॉन्सरशिप मिल गयी तो सब्सक्राईबर्सटेन थाउजेंड सेसीधेवन मिलियन हो जाएँ गे. ’ वर्तिका नेलाइव स्ट्रीमिंग बंद करतेहुए कहा.
कृतिका- ‘वो भी हो जाएगा मेरी जान, कृतिका कपूर जल्द ही इंडिया की टॉप फ़ीमेल यूट्यूबर होगी. तूबस ऐसेही कै मरा हैंडल करती रह एं ड मेक श्योर दैट आय लुक गुड.’
कृतिका नेआँ ख मारतेहुए वर्तिका सेकहा. वर्तिका मुस्कुरायी. कृतिका और वर्तिका बेस्ट फ़्रेंड्स थे. कृतिका को बचपन सेही हॉरर का भूत पागलपन की हद तक सवार था, हॉरर फ़िल्म्स, कॉमिक्स, नॉवल्स, ऐसा कु छ भी नहीं था जो कृतिका सेछूटा हो. टीनेज मेंआते-आतेउसका हॉरर के लिए पागलपन इस कदर बढ़ा कि उसनेक्रीपी कृतिका नाम सेअपना राइटिंग ब्लॉग स्टार्टकर दिया जो कि इंस्टेंट हिट हो गया. इसके बाद कॉलेज मेंआनेपर बारी आयी यूट्यूब चैनल की, जहां क्रीपी कृतिका अपनी हॉरर स्टोरीज़ नैरेट करनेलगी. लगभग दो साल मेंउसके सब्सक्राईबर्सकी संख्या दस हज़ार हुई जो उसकी उम्मीद सेकाफ़ी कम थी.
कृतिका को लगा था कि इतनेसमय मेंयूट्यूब सिल्वर प्लेबटन, तीन साल मेंगोल्ड बटन, और चार साल मेंडायमंड बटन उसके बैकग्राउंड वॉल पर सजेहोंगेलेकिन गुजरतेसमय के साथ ना ही उसके सब्सक्राइबर बढ़ रहेथेऔर ना ही ढंग की कोई स्पॉन्सरशिप डील आ रही थी. कु छ महीनों पहलेएक होम फ़र्निशिंग कम्पनी नेस्पॉन्सरशिप और फ़्री होम फ़र्निशिंग दी थी उसके बाद सेसूखा पड़ा हुआ था. क्रीप सॉस की डील उसके पास वर्तिका ही लेकर आयी थी. इस पूरी जर्नी मेंवर्तिका हमेशा कृतिका के साथ रही लेकिन उसेकभी भी कृतिका नेड्युक्रेडिट या अप्रीशीएशन नहीं दिया.
हॉरर जितना बड़ा पैशन कृतिका के लिए था उतना ही वर्तिका के लिए भी, शायद इसीलिए दोनों बेस्ट फ़्रेंड बनी वरना दोनों की पर्सनालिटी एक-दूसरे से बिलकु ल उलट थी. कृतिका सोशल और एक्स्ट्रॉवर्टथी और वर्तिका इंट्रवर्ट. कृतिका के अलावा वर्तिका के कोई दोस्त ना थे. कृतिका को जहां राइटिंग का शौक़ था, वर्तिका को कोडिंग और हैकिंग का. जब कृतिका अपनेदोस्तों के साथ रात रात भर पार्टी कर रही होती तब वर्तिका का टाइम डार्क वेब पर बीतता. वर्तिका खुद भी लम्बेसमय सेआर्टिफ़िशल इंटेलिजेन्स और सिम्युलेशन पर काम कर रही थी और खुद अपना ऐप डिवेलप करने की कोशिश कर रही थी, जिसके लिए उसेचाहिए था काफ़ी सारा पैसा और उसका फ़िलहाल एक ही ज़रिया था उसके पास, कृतिका.
कृतिका नेवर्तिका सेउसका फ़ोन लेकर उसपर क्रीप सॉस ऐप इंस्टॉल किया और आप ओपन कर के उस पर फटाफट हर ऐ ंगल सेखींच कर वर्तिका के फ़ोटोग्राफ़्स अपलोड कर दिए. कु छ ही देर में वर्तिका का क्रीपी अवतार उसके पीछेखड़ा था.
कृतिका- ‘दुनिया बाद मेंकरेगी ऐप डाउनलोड, लाइक चैरिटी, प्रमोशन बीगिन्स एट होम. येले, अब मेरा भूत मेरेपीछेऔर तेरा भूत तेरेपीछे.’ कृतिका दोनों हाथों मेंफ़ोन लेकर नचातेहुए बोली.
वर्तिका- ‘दुनिया ए.आइ. सेवैसेही डरी हुई है, इन कमबख़्तों को अलग सेभूत बनानेकी ज़रूरत नहीं.’ वर्तिका नेअपना फ़ोन लेतेहुए कहा.
कृतिका- ‘चल मैंबहुत थक गयी हूँसोनेजा रही हूँ. तूआज रात वो लास्ट वीक जो शूट की थी वो वीडियो एडिट कर देना कल अपलोड करनी है.’
कृतिका नेवर्तिका सेकहा, वर्तिका नेसहमति मेंसर हिलाया. कृतिका सोनेके लिए अपनेबेडरूम में चली गयी और वर्तिका वीडियो एडिट करनेके लिए सिस्टम पर बैठ गयी. नींद सेवर्तिका की आँखें भी बोझिल हो रही थीं. कै मरा फ़ेस करनेकी थकान सेज़्यादा कै मरा हैंडल करनेवालेकी थकान होती हैक्योंकि यो पूरेसमय एक बेहद उबाऊ काम कर रहा होता है. वर्तिका नेबाहेंफै लातेहुए एक ज़ोर की अंगड़ाई ली. उसेकॉफ़ी की तलब हुई. बिना कॉफ़ी के वर्तिका के लिए काम कर पाना नेक्स्ट टू इम्पॉसिबल था.
किचेन कैबिनेट खोलनेपर उसेकॉफ़ी की शीशी ख़ाली दिखाई दी.
वर्तिका- ‘यार कृ तु, तूनेफिर कॉफ़ी ख़त्म कर दी. तुझेपता हैना मैंबिना कॉफ़ी के काम नहीं कर सकती!’ वर्तिका झुंझलातेहुए किचेन सेही चिल्लाई.
कृतिका- ‘रिलैक्स डार्लिंग. मैंशाम को ही डिपार्ट्में टल स्टोर सेतेरी फ़ेवरेट कॉफ़ी लेआयी थी. प्लैट्फ़ॉ र्मपर रखा ग्रोसरी बैग चेक कर.’ कृतिका अपनेबेडरूम सेचिल्लाई.
वर्तिका सेग्रोसरी बैग चेक किया. उसमेंअपनी फ़ेवरेट कॉफ़ी देख कर उसनेचैन की साँस ली. कॉफ़ी सिप करतेहुए वर्तिका वापस अपनेकाम पर आ बैठी. कृतिका नेअपना मोबाइल चार्जिंग पर लगाया और सोनेलेट गयी. कृतिका अपनी आँखेंबंद करनेही वाली थी कि उसेरूम के दरवाज़ेपर अंधेरेमें एक साया खड़ा नज़र आया. कृतिका चौंक कर उठ बैठी और अंधेरेमेंगौर सेदेखनेकी कोशिश करनेलगी कि वहाँवाक़ई कोई हैया सिर्फ़ येउसके मन का वहम था.
कृतिका- ‘वर्तु? त..तूहैक्या?’ कृतिका नेडरतेहुए पूछा. दरवाज़ेपर खड़ेसायेनेकोई जवाब ना दिया. वो चुपचाप पलटा और वहाँसेचला गया.
कृतिका कू द कर बेड सेउठी और भागतेहुए वर्तिका के रूम मेंपहुँची. वर्तिका कम्प्यूटर के सामने चेयर पर बैठी नींद सेऊँ घ रही थी. डेस्क पर उसका ख़ाली कॉफ़ी मग रखा हुआ था. कृतिका ने वर्तिका के दोनों कं धेपकड़ कर उसेज़ोर सेहिलाया.
कृतिका- ‘वर्तु! त..तूअभी मेरेरूम मेंआयी थी क्या?’
ऐसेनींद सेअचानक जगाए जानेसेवर्तिका हड़बड़ा कर चौंकी.
वर्तिका – ‘हुँह! क..क्या! कृ तुतूहै..तूनेचौंका दिया मुझे. म..मेरी आँ ख लग गयी थी.’ वर्तिका नेपीछे मुड़ कर कृतिका की ओर देखतेहुए कहा. उसकी नींद सेभारी आँखों मेंआश्चर्यसाफ़ नज़र आ रहा था.
कृतिका- ‘जान तो मेरी निकली हुई हैवर्तु, बता ना तूअभी रूम मेंआयी थी क्या? तूदरवाज़ेपर खड़ी थी?’
वर्तिका – ‘क…क्या बोल रही हैकृ तु? मैंतो यहाँकाम कर रही थी, काम करते-करतेमेरी आँ ख लग गयी.’ वर्तिका को देख कर लग रहा था कि वो वाक़ई सच बोल रही है. कृतिका पहलेसेभी ज़्यादा संजीदा हुई.
कृतिका- ‘वर्तु! वी हैव एन इंट्रूडर, कोई फ़्लैट मेंघुस आया है. मेरेरूम के दरवाज़ेपर खड़ा मुझेघूर रहा था.’
वर्तिका – ‘क्या! कौन था?’
कृतिका- ‘मुझेक्या पता कौन था! मुझेलगा तूहै, अंधेरेमेंउसका चेहरा नहीं दिख रहा था.’ कृतिका डर सेहाँफतेऔर फु सफु सातेहुए बोली.
वर्तिका – ‘काम डाउन कृतिका! तुझेवहम हुआ होगा. फ़्लैट मेंहम दोनों के अलावा कोई भी नहीं है.’
कृतिका- ‘नहीं यार! मैंनेउसेबिल्कुल साफ़-साफ़ देखा था. मुझेकोई वहम नहीं हुआ. मैंकह रही हूँ ना कि कोई था तो था.’ कृतिका झल्ला कर बोली.
वर्तिका – ‘ओके-ओके. एक काम करते हैं, पूरे फ़्लैट की लाइट्स जला कर चेक करते हैंअभी क्लीयर हो जाएगा.’ वर्तिका चेयर सेउठतेहुए बोली.
कृतिका- ‘उसनेहम पर अटैक कर दिया तो?’
वर्तिका – ‘वो एक हैहम दो, वैसेभी मुझेयक़ीन हैकि कोई नहीं है. अगर कोई अंदर घुसा होता और उसेहम पर अटैक करना होता तो अब तक कर चुका होता.’ वर्तिका नेएक टेनिस रैके ट खुद लिया और दूसरा कृतिका के हवालेकिया.
फिर दोनों लड़कियों नेफ़्लैट की सभी लाइट्स ऑन कर के कमरा-कमरा और हर कमरेका चप्पा- चप्पा छान मारा लेकिन उन दोनों के अलावा किसी भी तीसरेव्यक्ति की वहाँउपस्थिति के कोई संके त ना मिले.
वर्तिका – ‘सी, आय टोल्ड यू. कोई नहीं है.’
कृतिका- ‘लेकिन मैंनेसाफ़-साफ़ देखा था.’
वर्तिका – ‘थोड़ी देर पहलेतो तूनेकहा था कि साफ़ नहीं देखा था, साया अंधेरेमेंथा.’
कृतिका- ‘अरेबाबा शक्ल नहीं देखी थी लेकिन साया साफ़ देखा था.’
वर्तिका – ‘लेकिन अब तो क्लीयर हो गया ना कि तुझेवहम हुआ था.’
कृतिका- ‘हाँ.’ कृतिका की आवाज़ मेंअब भी संशय के भाव थे.
वर्तिका – ‘जा कर सो जा, तूथक गयी है. मुझेभी वीडियो एडिट करना है.’ वर्तिका नेअनमनेमन से कहतेहुए कृतिका के हाथ सेटेनिस रैके ट लिया और वापस अपनेरूम मेंचली गयी.
कृतिका कु छ पल वहीं खड़ी सोचती रही कि क्या वाक़ई उसेइतना बड़ा वहम हुआ था? उस सायेकी बॉडी लैंग्वेज इतनी अजीब और अप्राकृतिक थी जिसेयाद करतेहुए भी उसके जिस्म मेंफिर सिहरन दौड़ गयी. कृतिका नेअपनेसर को झटका देतेहुए उस विचार को दिमाग़ सेनिकालनेकी कोशिश की. उसेएहसास हुआ कि डर सेउसका मुँह और गला सूख रहेथे.
पूरेफ़्लैट मेंदिवाली की तरह जल रही जगमग लाइट्स ऑफ़ करतेहुए कृतिका किचेन मेंपहुँची. फ़्रिज खोल कर उसनेपानी की बॉटल निकाली और एक साँस मेंआधी बॉटल ख़ाली कर दी. बॉटल वापस रख कर जैसेही उसनेफ़्रिज डोर बंद किया, डोर के पीछेउसेअंधेरेकोनेमेंफिर किसी के खड़े होनेका एहसास हुआ. एक साया, जिसकी क़द-काठी कृतिका के समान थी.
कृतिका- ‘ई ई ई sss’ चीखतेहुए कृतिका पीछेको हटी.
बिना देखेपीछेहटती कृतिका किसी सेटकराई. एक बार फिर उसकी चीख निकल गयी. कृतिका- ‘ई ई ई sss’
वर्तिका – ‘कृ तु! क्या हुआ हैतुझे? क्यों पागलों की तरह चीख रही है. येमैंहूँ.’ वर्तिका कृतिका को झँझोड़तेहुए बोली.
कृतिका नेडर सेभींच कर बंद की हुई अपनी आँखेंखोलीं. सामनेवर्तिका खड़ी थी.
कृतिका- ‘य..यहाँतो तूहैवर्तुलेकिन व..वहाँपीछेफ़्रिज के बग़ल मेंकोई और भी छुपा खड़ा है.’ कृतिका के गलेसेफँ सी हुई आवाज़ निकली. उसनेबिना पीछेदेखे, उँगली सेफ़्रिज की तरफ़ इशारा करतेहुए कहा.
वर्तिका – ‘यहाँकोई नहीं हैकृ तु. क्या हो गया हैतुझे? पाँच साल की एज़ सेस्टीफे न किंग के हॉरर नॉवल्स पढ़ कर बड़ी होनेवाली, वॉकिंग डेड और टेल्स फ़्रॉम द क्रिप्ट बैक टू बैक देखनेवाली क्रीपी कृतिका आज वहम सेडर रही है?’ वर्तिका नेकिचेन की लाइट जलातेहुए कहा.
कृतिका चौंक कर पीछेपलटी. फ़्रिज के पहलूमेंकोई नहीं था.
कृतिका- ‘येकै सेहो सकता है! वो साया मेरेबिल्कुल क़रीब था, फ़्रिज के बग़ल मेंखड़ा हुआ. फ़्रिज डोर बंद करतेही यूँउभरा था जैसेउस अंधेरेसेअस्तित्व मेंआ रहा हो.’
वर्तिका – ‘हाँतो अंधेरेसेही अस्तित्व मेंआया था.’
कृतिका- ‘म..मतलब?’
वर्तिका – ‘मतलब मैंसमझाती हूँ. मैंफ़्रिज के पास तेरी पोज़िशन पर खड़ी होती हूँतूज़रा लाइट्स ऑफ़ कर.’ वर्तिका नेफ़्रिज के सामनेआकार डोर खोलतेहुए कहा.
कृतिका नेकिचेन की लाइट्स ऑफ़ की, अब सिर्फ़ किचेन की ग्लास विंडो के बाहर सेस्ट्रीट लाइट की रौशनी अंदर आ रही थी जो विंडो के सामनेरखेफ़्रिज और वर्तिका पर कु छ यूँपड़ रही थी कि पहलूमेंदिवार पर बंद होतेफ़्रिज की लाइट के साथ मिल कर वर्तिका की डबल शैडो बना रही थी जो एक झटके मेंदेखनेपर उसकी तरफ़ बढ़नेका आभास देरही थी.
वर्तिका – ‘सी, देयर इज़ योर अंधेरेसेनिकलता साया. नाओ काम डाउन, जा कर सो जा आराम से.’
कृतिका प्रतिवाद करना चाहती थी लेकिन उसके पास अपना कहा साबित करनेका कोई सबूत नहीं था. वो भारी कदमों सेअपनेरूम की ओर बढ़ी. अंधेरेमेंबेड के मुहानेपर बैठी कृतिका का दिमाग़ ना चाहतेहुए भी उस सायेके बारेमेंही सोच रहा था. क्या वो साया उसके दिमाग़ की उपज था? उसनेकु छ सोचतेहुए अपना मोबाइल चार्जिंग सेनिकाला और उसका वीडियो कै मरा रिकॉर्डर ऑन कर के उसेहोल्डर पर ऐसेसेट कर दिया जिससेरूम के दरवाज़ेकी साफ़ रिकॉर्डिंग हो सके. अगर अगली बार वो साया दरवाज़ेपर नज़र आता हैतो इसका मतलब उसेवहम नहीं हो रहा.
कृतिका बेड पर लेट गयी फिर भी उसकी नज़रेंदरवाज़ेकी चौखट पर सेनहीं हट रही थीं. कमरेमें उसेएक अजीब सी ठंड, एक असहज करनेवाली सिहरन का एहसास हो रहा था. उसनेब्लैंके ट अपने खुलेहुए पैरों पर खींचा और आँखेंबंद कर के सोनेकी कोशिश करनेलगी. कु छ देर तक कहीं कोई गतिविधि नहीं हुई. अंततः कृतिका को नींद आ गयी. नींद मेंकृतिका को एहसास हुआ जैसेउसके पैरों पर कोई चीज़ रेंग रही है. उस ठंडी, लिजलिजी ‘चीज़’ का अजीब सा स्पर्शउसके पैरों के तलवों सेहोता हुआ ऊपर उसके घुटनों और जाँघों की तरफ़ बढ़नेलगा. कृतिका नींद मेंकसमसायी. वो
गीली, लिजलिजी चीज़ उसकी ऊपरी जाँघों पर फिरती हुई उसकी दोनों टांगों के बीच पहुँचनेलगी. कृतिका चीख मार कर उठ बैठी. ब्लैंके ट के नीचेउसके अलावा भी कोई था, ठीक उसके दोनों पैरों के बीचों-बीच ब्लैंके ट मेंफ़ुट्बॉल जितना बड़ा गोल उभार आया हुआ था. कृतिका को अपनी साँस रुकती महसूस हुई. थरथराती उँगलियों सेब्लैंके ट का सिरा पकड़ कर उसनेथोड़ा ऊपर उठाया और ब्लैंके ट के अंदर झांका.
अपनेदोनों पैरों के बीच उसेवर्तिका का सर नज़र आया. वर्तिका की दोनों आँखों मेंपुतलियाँनहीं थीं, उसकी आँखेंवैसी ही नज़र आ रही थीं जैसेफ़िल्मों मेंज़ॉम्बीज़ की आँखेंदिखाई देती हैं. उसके चेहरेकी खाल बंजर ज़मीन के जैसी सूखी हुई थी और जगह-जगह दरारेंपड़ी हुई थीं. गालों पर और ठोड़ी के पास से खाल सड़ चुकी लाश के माफ़िक़ उधड़ कर लटक रही थी. वर्तिका के होंठ अप्राकृतिक रूप सेउसके एक गाल सेदूसरेगाल तक फै लेहुए थेजिनके बीच सेआधेहाथ लम्बी ज़बान बाहर निकली हुई, साँप की तरह लपलपा रही थी. यही वो लिजलिजी चीज़ थी जो कृतिका को अपनेपैरों पर रेंगती महसूस हुई थी. किसी पागल कुत्तेके जैसे, उसकी ज़बान सेलगातार गाढ़ा, चिपचिपा लार गिर रहा था जो कृतिका के पैर और जाँघों पर फै ला हुआ था. कृतिका को सिर्फ़ वर्तिका का सर नज़र आ रहा था, जिसेदेख कर ऐसा लग रहा था जैसेउसका धड़ बेड और मैट्रेस के अंदर धँसा हुआ हो. किसी पालतूपेट की तरह अपनी लम्बी, लिजलिजी ज़बान सेवर्तिका इत्मिनान सेकृतिका की अंदरूनी जाँघ चाट रही थी. कृतिका को ब्लैंके ट उठा कर, अंदर अपनी तरफ़ झांकता पा कर वर्तिका के फै लेहुए होंठ उसके दोनों कानों तक पहुँच गए और सड़ेहुए आड़े-तिरछेदांत नज़र आनेलगे. उसके गलेसेहंसी और घरघराहट की एक मिली-जुली आवाज़ निकली जिसनेअब तक जड़वत बैठी कृतिका को थर्राकर रख दिया.
कृतिका नेज़ोर सेचिल्लानेके लिए मुँह खोला लेकिन उसकी चीख उसके गलेमेंही घुट कर रह गयी. चीख निकलनेसेपहलेही ब्लैंके ट के अंदर दो हाथों नेकृतिका की टांगेंपकड़ कर उसेब्लैंके ट के अंदर खींच लिया. चारों तरफ़ अंधेरा ही अंधेरा था बाक़ी और कु छ नहीं. इस घुप्प अंधकार में कृतिका बुरी तरह अपनेहाथ-पैर फेंक रही थी. अपनेफे फड़ों का पूरा ज़ोर लगा कर वो चिल्ला रही थी फिर भी उसके गलेसेकोई आवाज़ नहीं फू ट रही थी. उसेअपना दम घुटता, अपनी साँस रुकती मालूम दी. अंधेरेके अलावा उसेकु छ नज़र नहीं आ रहा था. ऐसा लग रहा था जैसेअंधकार ने ब्लैंके ट का रूप लेकर कृतिका को अपनेआग़ोश मेंजकड़ लिया हो.
लगातार अपनेहाथ-पैर मार कर कृतिका ब्लैंके ट का छोर तलाशनेऔर उससेबाहर निकलनेकी कोशिश कर रही थी लेकिन उसेयूँलग रहा था जैसेवो हमेशा के लिए इस ब्लैंके ट की कब्र मेंदफन कर दी गयी हो. कृतिका को लगा जैसेवो कोई बुरा सपना देख रही है. एक ऐसा रीयलिस्टिक नाइट्मेयर जो वास्तविकता सेभी ज़्यादा वास्तविक प्रतीत हो रहा था.
कृतिका नेचौंक कर आँखेंखोलीं. ऊपर रूम की सीलिंग नज़र आ रही थी. वो स्प्रिंग लगे ‘जैक इन द बॉक्स’ की तरह एक झटके सेबेड पर सीधी बैठ गयी. उसनेअपनेऊपर सेब्लैंके ट हटा कर उसेबेड सेपरेउछाल दिया. ब्लैंके ट के नीचेउसके अलावा कोई नहीं था. पूरेकमरेमेंही उसके अलावा कोई भी नहीं था. कृतिका वाक़ई सपना देख रही थी. उसनेबेड सेउतर कर पैरों मेंफ़्लिप-फ़्लॉप डाली और भागतेहुए वर्तिका के रूम मेंपहुँची.
कृतिका- ‘वर्तिका! तुझेयक़ीन नहीं आएगा अभी मेरेसाथ क्या हुआ…’
कहतेहुए कृतिका बीच मेंही रुक गयी. वर्तिका रूम मेंनहीं थी.
कृतिका- ‘वर्तु! वॉशरूम मेंहैक्या?’ कृतिका नेरूम मेंअंदर आतेहुए आवाज़ लगाई लेकिन कोई जवाब ना आया. वॉशरूम अंदर सेलगातार पानी गिरनेकी आवाज़ आ रही थी.
कृतिका वापस जानेको पलट ही रही थी कि अचानक उसकी नज़र वॉशरूम डोर के नीचेपड़ी. अंदर सेपानी बहता हुआ बाहर रूम मेंफै ल रहा था.
कृतिका- ‘वर्तु?’ कृतिका नेवॉशरूम के दरवाज़ेपर नॉक किया. जवाब फिर भी नहीं मिला.
कृतिका नेदरवाज़ेका डोर नॉब घुमाया. दरवाज़ा बिना आवाज़ के खुल गया. अंदर घुप्प अंधेरा था लेकिन सेमी ट्रैन्स्पेरेंट शॉवर कर्टेन के पीछेबाथटब मेंएक साया बैठा नज़र आ रहा था. लगातार पानी गिरनेकी आवाज़ उस तरफ़ सेही आ रही थी. कृतिका नेटू-वेलाइट का स्विच दबा कर वॉशरूम की लाइट जलाई. सेमी-ट्रैन्स्पेरेंट कर्टेन के पीछे बाथटब मेंवर्तिका बैठी हुई थी. बाथटब का टैप खुला हुआ था और पानी ओवर फ़्लो होकर बाहर गिर रहा था.
कृतिका- ‘वर्तु? तूइतनी रात मेंक्यों नहा रही है? और टैप तो बंद कर यार! देख पानी रूम तक फै ल गया है.’ कृतिका नेआगेबढ़ कर कर्टेन हटातेहुए कहा.
कृतिका नेदेखा कि सर सेपैर तक भीगी हुई वर्तिका बिना कपड़ों के इत्मिनान सेबाथटब मेंबैठी हुई थी. उसका ध्यान बाथटब मेंभरेहुए पानी पर गया तो कि तारकोल जैसा गाढ़ा और काला दिखाई दे रहा था लेकिन ध्यान सेदेखनेपर उसेएहसास हुआ कि वो काला गाढ़ापन वास्तव मेंपानी का नहीं था बल्कि वर्तिका के लम्बेबालों का था जो देखनेपर ऐसेलग रहेथेजैसेबाथटब मेंभरेपानी मेंघुल रहेहों.
वर्तिका- ‘काम डाउन कृतिका! तूभी अंदर आ जा ना!’ वर्तिका नेअचानक सेअपना चेहरा कृतिका की तरफ़ घुमातेहुए कहा. वर्तिका की आँखों मेंशैतानी चमक थी, उसके अधरों पर एक विषैली मुस्कान तैर रही थी.
बाथटब सेपानी के साथ बह कर बाहर निकलतेवर्तिका के लम्बेबाल फ़र्शपर चारों तरफ़ फै ल रहे थे.
कृतिका- ‘ई ई ई ई sss’ चीखतेहुए कृतिका नेअपनेकदम तेज़ी सेपीछेखींचे.
फ़र्शपर फै लेवर्तिका के लम्बेबालों नेमज़बूत लताओ ं की तरह कृतिका के दोनों पैरों को जकड़ लिया.
वर्तिका- ‘आ ना कृ तु! कितना टाइम हो गया हमनेसाथ मेंनहीं नहाया. आ आज दोनों साथ नहाएँ गे.’
कृतिका- ‘नहींss…वर्तिका स्टॉपss!’
कृतिका ज़ोर-ज़ोर सेचीख रही थी और खुद को वर्तिका के बालों की गिरफ़्त सेछुड़ानेकी भरसक कोशिश कर रही थी लेकिन अब वो तारकोल जैसेबाल कृतिका की कमर तक लिपट चुके थेऔर तेज़ी सेउसेखींचतेहुए बाथटब की ओर लेजा रहेथे.
वर्तिका- ‘हाहाहाहा…आ ना कृ तुsss.’ वर्तिका के गलेसे फिर सेघरघराती हुई दोहरी आवाज़ निकली जैसी कृतिका नेसपनेमेंसुनी थी.
कृतिका की भरसक कोशिशों के बावजूद वर्तिका के बालों का जाल उसेपूरी तरह अपनी चपेट मेंले चुका था. बाल अब उसे बाथटब मेंखींच चुके थेऔर कृतिका का जिस्म धीरे-धीरे बाथटब के तारकोल जैसेपानी मेंयूँसमा रहा था जैसेकोई दलदल मेंडूबता है. जटाओ ं जैसेबाल अब उसके हाथ और गर्दन तक को अपनी चपेट मेंलेचुके थे. कृतिका को समझ नहीं आ रहा था कि बिना गहराई के बाथटब मेंवो आख़िर इतना नीचेडूब कै सेरही है. ऐसा लग रहा था जैसेयह भी हक़ीक़त नहीं, वैसा ही कोई भयावह सपना था जिससेकि वो चौंक कर जागी थी. बालों के जाल नेकृतिका को पानी की सतह के नीचेखींच लिया. कृतिका का अपनी नाक, अपनेमुँह, अपनेकानों यहाँतक कि अपनी आँखों मेंभी वर्तिका के गाढ़ेतारकोल जैसेबाल घुसतेमहसूस हुए.
कृतिका नेचौंक कर आँखेंखोलीं. ऊपर रूम की सीलिंग नज़र आ रही थी. वो स्प्रिंग लगे ‘जैक इन द बॉक्स’ की तरह एक झटके सेबेड पर सीधी बैठ गयी. उसनेअपनेऊपर सेब्लैंके ट हटा कर उसेबेड सेपरेउछाल दिया. वो एक बार फिर सपना देख रही थी. उसनेबेड सेउतर कर पैरों मेंफ़्लिप-फ़्लॉप डाली और भागतेहुए वर्तिका के रूम मेंपहुँची. इस बार अंदर आनेसेपहलेवो थोड़ी ठिठकी.
कृतिका- ‘वर्तु?’ उसनेदेखा वर्तिका कम्प्यूटर पर वीडियो एडिटिंग कर रही थी. वर्तिका को देख कर कृतिका का आं दोलित मन थोड़ा स्थिर हुआ.
वर्तिका- ‘क्या हुआ कृ तु? फिर कोई साया देख लिया क्या?’ वर्तिका नेउसकी तरफ़ देखतेहुए पूछा.
कृतिका- ‘यूवोंट बिलीव मेरेसाथ आज क्या-क्या हो रहा हैवर्तु.’ कृतिका अंदर आ कर रुआंसी होते हुए बोली.
वर्तिका- ‘कोई बुरा सपना देख लिया क्या?’ वर्तिका नेउसेचुप करातेहुए पूछा.
कृतिका- ‘एक नहीं दो-दो, बैक टू बैक, लूप में! इतनेरियलिस्टिक कि लग ही नहीं रहा था कि सपने हैं. बिल्कुल सच्ची लग रहेथे. पहलेसपनेसेजगी तो मुझेयक़ीन था कि मैंजाग चुकी हूँपर फिर पता चला कि जिसेमैंजगा हुआ समझ रही हूँवो भी सपना ही है.’
वर्तिका- ‘कोई बात नहीं. तूबस स्ट्रेस्ड है. तेरेलिए कॉफ़ी बना के लाऊँ?’
कृतिका- ‘नोss..अच्छा लिसेन, मुझेवो मफ़िन्स ला देजो आज बेकरी सेलाई थी.’ कृतिका छोटी बच्ची के जैसेआँखेंबड़ी-बड़ी करतेहुए बोली. वर्तिका को उस पर प्यार आ गया.
वर्तिका- ‘इतनेकार्बएं ड कै लरीज़ खाती रहेगी तो मोटी हो जाएगी, फिर कै सेबढ़ेंगेतेरेफ़ॉलोअर्ज़?’
कृतिका- ‘हेय! नो फ़ैट शेमिंग. चबी हो जाऊँ गी तो और ज़्यादा क्यूट दिखूँगी.’ कृतिका नेस्माइल के साथ बच्चों की आवाज़ की नक़ल करतेहुए कहा.
वर्तिका- ‘बातेंकरा लो बस कोई इस लड़की से! हाहाहा..रुक लाती हूँतेरेमफ़िन. कौन सा फ़्लेवर चाहिए?’ वर्तिका नेकिचेन की तरफ़ बढ़तेहुए पूछा.
कृतिका- ‘पूरा बॉक्स लेआ, सारेफ़्लेवर थोड़ा-थोड़ा टेस्ट कर लूँगी.’ कृतिका नेखिलखिलातेहुए, मासूमियत सेकहा.
वर्तिका मफ़िन का बॉक्स लेकर वापस रूम मेंआयी. कृतिका नेबच्चों की तरह झपट कर उसके हाथ सेबॉक्स लेलिया और लिड खोल कर बॉक्स के अंदर तीन क़तारों मेंसजेअलग-अलग फ़्लेवर्सके मफ़िन्स का मुआयना करनेलगी. इनमेंसेस्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी मफ़िन वो पहलेही खा चुकी थी. उसनेचॉकलेट मफ़िन निकाला और एक बड़ा बाइट लेतेहुए बोली.
कृतिका- ‘मम्म…तुझे पता है वर्तु, सेक्स और चॉकलेट दोनों ही हाई लेवल ऑफ़ डोपमीन, सेरोटोनिन, और ऑक्सीटोसिन रिलीज़ करतेहैं. तो फ़ील गुड करनेके लिए सेक्स की मशक़्क़त और पार्ट्न र की हुज्जत क्यों झेलना. चॉकलेट खाओ मस्ट रहो.’
वर्तिका- ‘हाँबेटा, क्रिटिसाईज़ वॉट यूकैंट हैव.’
कृतिका नेकं धेउचका कर बचा हुआ मफ़िन मुँह मेंठूँसा और बटरस्कॉच मफ़िन उठा लिया. येमफ़िन पिछलेवालेसेज़्यादा भारी थी.
कृतिका- ‘हुम्म! स्टफ़्ड मफ़िन.’
कृतिका नेएक बाइट लेनेकी कोशिश की. मफ़िन के बीच मेंकु छ स्टफ़्ड था जो उसके दांत से टकराया. वो चीज़ मुलायम थी लेकिन इतनी नहीं कि आसानी सेदांत सेकाटी जा सके. कृतिका ने मफ़िन मुँह सेनिकाला और उँगलियों सेउसेबीच सेतोड़ा, यह देखनेके लिए कि उसमेंकिस चीज़ की फ़िलिंग की गयी है.
मफ़िन के बीच मेंएक आँ ख स्टफ़ की हुई थी. एक इंसानी आँ ख जिसकी पुतली कृतिका की तरफ़ घूमी और जैसेसाँप या गिरगिट के आँ ख की पुतली फ़्लिकर करती हैठीक वैसे ही वो पुतली फ़्लिकर हुई. कृतिका ज़ोर सेचीखी, उसके हाथ सेछूट कर वो मफ़िन नीचेजा गिरा. उसमेंसेआँ ख निकल कर किसी गेंद के जैसेटप्पेखाती हुई, लुढ़कती हुई बेड के नीचेचली गयी. कृतिका नेबॉक्स सेएक और मफ़िन निकाल कर उसेबीच सेतोड़ा. इस मफ़िन मेंएक कटा हुआ कान स्टफ़ किया हुआ था. कृतिका को उबकाई आनेलगी. उसके गलेमेंकु छ फँ स रहा था. उसेऐसा महसूस हुआ जैसेकोई चीज़ उसके पेट सेगलेकी ओर ऊपर की तरफ़ रेंग रही है. उसेउस चॉकलेट मफ़िन का ख़्याल आया जो उसनेखाया था. क्या था उसमें? जो कु छ भी था वो गलेसेरेंगतेहुए उसके मुँह में आ चुका था. उसेअपनी ज़बान पर बुरी तरह मचती चुभन का एहसास हुआ.
कृतिका नेज़ोर सेचीखतेहुए अपना मुँह खोला. लड़की के हाथ की कटी हुई मिडिल फ़िंगर किसी रेंगनेवालेकीड़ेके समान उसकी ज़बान पर रेंग रही थी और उसका लम्बा फ़ाइल किया हुआ नाखून वर्तिका की जीभ मेंधँसा हुआ था.
चीखतेहुए कृतिका वर्तिका की तरफ़ घूमी. पहलेसेही उसके गलेसेनिकलती चीख वर्तिका को देख कर दोगुनी हो गयी. वर्तिका की दाहिनी आई सॉके ट खोखली थी जिससेखून उबल रहा था और टूटी हुई आँ ख की नस बाहर लटक रही थी. उसके कान और हाथों की उँगलियाँकटेहुए थेऔर उस घड़ी वो बहुत विभत्स नज़र आ रही थी.
वर्तिका- ‘मफ़िन्स टेस्टी हैंना कृ तु? रुक क्यों गयी? सारेखा जाओ…हिहिही.’ वर्तिका के गलेसे फिर घरघराहट भरी दोहरी आवाज़ निकली.
मफ़िन बॉक्स मेंरखेमफ़िन कुरेद कर उनके अंदर सेकटी हुई उँगलियाँबाहर निकलनेलगी. यह कटी उँगलियाँकीड़ों की तरह कृतिका के पूरेशरीर पर रेंग रही थीं और नाखूनों सेउसेज़ोर-ज़ोर सेखरोंच रही थीं. वर्तिका के गलेसेबहुत ही विभत्स हंसी और कृतिका के गलेसेचीख एक साथ उबल रही थीं.
कृतिका नेचौंक कर आँखेंखोलीं. ऊपर रूम की सीलिंग नज़र आ रही थी. वो स्प्रिंग लगे ‘जैक इन द बॉक्स’ की तरह एक झटके सेबेड पर सीधी बैठ गयी. उसनेअपनेऊपर सेब्लैंके ट हटा कर उसेबेड सेपरेउछाल दिया. वो एक बार फिर सपना देख रही थी. कृतिका नेदोनों हाथों सेअपना सर पकड़ लिया. येआख़िर उसके साथ क्या हो रहा था. वो बार-बार सपनेसेएक और सपनेमेंजाग रही थी.
ऐसा लग रहा था जैसेवो किसी स्वप्नजाल, सपनों के एक ऐसेअंतहीन चक्र मेंउलझ गयी है, एक ऐसी भूल-भूलैया मेंखो गयी जिससेबाहर निकलनेका रास्ता उसेनहीं मिल रहा. क्या इस बार वो वास्तव मेंजागी थी या फिर अब भी सपनों सेहोतेहुए एक और सपनेमेंपहुँची थी जो वास्तविक प्रतीत हो रहा था. उसनेबेड साइड टेबल की तरफ़ देखा. उसका मोबाइल अब भी चार्जिंग मेंलगा हुआ था. कृतिका का दिमाग़ घूम गया.
कृ तक को अच्छी तरह याद था कि उसनेमोबाइल चार्जिंग सेनिकाल कर उसको होल्डर पर वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए सेट किया था. यानी यह भी हक़ीक़त नहीं सपना था. कृतिका नेज़ोर सेखुद को दांत काटा ताकि दर्दका एहसास हो. उसके शरीर मेंएक तेज दर्दकी लहर दौड़ गयी.
कृतिका- ‘आह्ह! येतो सच्ची का फ़ील हुआ.’ कृतिका अपना हाथ सहलातेहुए खुद मेंबड़बड़ायी. उसके हाथ पर उसके दांत काटेके निशान बन गए थे.
कृतिका- ‘इसका मतलब इस बार येसपना नहीं है. मैंसच मेंजाग गयी हूँ?’ उन दांतों के निशान पर उँगली फिरातेहुए कृतिका नेखुद सेसवाल किया. उसनेबेड सेउतर कर पैरों मेंफ़्लिप-फ़्लॉप डाली और भागतेहुए वर्तिका के रूम मेंपहुँची. वर्तिका कम्प्यूटर पर वीडियो एडिटिंग कर रही थी.
कृतिका- ‘वर्तु?’
वर्तिका- ‘क्या हुआ कृ तु? फिर कोई साया देख लिया क्या?’ वर्तिका नेउसकी तरफ़ देखतेहुए पूछा. कृतिका- ‘येतूमुझसेदूसरी बार पूछ रही हैवर्तु.’ कृतिका अंदर आ कर रुआंसी होतेहुए बोली. वर्तिका- ‘दूसरी बार? मतलब?’ वर्तिका नेउसेचुप करातेहुए पूछा.
कृतिका नेवर्तिका को हर सपनेके बारेमेंविस्तारपूर्वक बताया.
वर्तिका- ‘फ़ॉल्स अवेकनिंग.’ वर्तिका कु छ सोचतेहुए बोली.
कृतिका- ‘वो क्या होता है? मैंतो स्पिरिचूअल भी नहीं हूँ.’
वर्तिका- ‘नहीं बुद्धू, द्धू येवो वाली अवेकनिंग नहीं है. फ़ॉल्स अवेकनिंग एक तरह का ड्रीम लूप होता है जिसमेंसपना देखनेवालेको लगता हैकि वो सोतेसेजाग गया हैलेकिन वो वास्तव मेंनहीं फिर से एक सपनेमेंही जागता है.’
कृतिका- ‘क्रिस्टफ़र नोलन की फ़िल्म इन्सेप्शन के जैसे?’
वर्तिका- ‘अरेउल्टी बुद्धि, इन्सेप्शन ड्रीम लूप एं ड फ़ॉल्स अवेकनिंग पर आधारित थी ना कि येदोनों चीज़ेंउस फ़िल्म पर आधारित हैं. सपनों को उस तरह बिल्कुल भी कं ट्रोल नहीं किया जा सकता जैसा उस फ़िल्म में दिखाया है. फिर भी, ये बात सच है कि एक फ़ॉल्स अवेकनिंग मेंदस या उस से भी ज़्यादा ड्रीम लूप हो सकते हैं.’
कृतिका- ‘तो फिर ये कैसे पता चलेगा कि मैं अभी सच में जग रही हूँ या फिर येभी एक फ़ॉल्स अवेकनिंग है…एक ड्रीम लूप?’
वर्तिका- ‘वेल, घर में कोई क्रीपी साया नहीं घूम रहा है. मैंबाथटब मेंनंगी नहीं बैठी हूँ, मेरी आँ ख, उँगलियाँऔर कान अपनी जगह पर हैंमफ़िन्स मेंनहीं…सो..आई थिंक इट्स सेफ़ टू अज्यूम दैट इट्स ए रीऐलिटी एं ड नॉट ए ड्रीम.’
कृतिका- ‘गेस यूआर राइट.’
वर्तिका- ‘काम डाउन कृतिका. जा के सो जा, मैंभी काम करती यूँ.’ वर्तिका वापस स्क्रीन की तरफ़ घूम गयी.
इस बार वाक़ई कु छ भी अजीब या डरावना नहीं हो रहा था. फ़ाइनली कृतिका जाग चुकी थी. वर्तिका के रूम सेनिकल कर कृतिका वापस अपनेकमरेकी ओर बढ़ी. उसके दिमाग़ मेंसारेसपनेऔर सपनेसेपहलेकी घटनाएँअब एक साथ मिक्स हो रहेथे. वो खुद पर ज़ोर डालतेहुए दोहरानेलगी कि पहलेउसेसायेका वहम हुआ और वो वर्तिका के रूम मेंगयी फिर वो दोनों रैके ट लेकर घर में सायेको ढूँढनेलगे…एक मिनट! कृतिका अपनी जगह ठिठक कर खड़ी हो गयी.
कृतिका यूँजड़वत हो गयी थी जैसेउसेशॉक लग गया हो. उसके दिमाग़ मेंजो बात अब आयी थी वो पहलेक्यों नहीं आयी! वर्तिका नेयूँअचानक सेटेनिस रैके ट कहाँसेनिकाल कर पकड़ा दिया? वो दोनों तो टेनिस खेलतेही नहीं थेऔर ना ही उनके घर मेंकभी टेनिस रैके ट थी. यानी…यानी वो उस समय भी सपना ही था क्योंकि ऐसा सिर्फ़ सपनेमेंही सम्भव हैजब आप किसी चीज़ की कल्पना करो तो वो चीज़ सहज उपलब्ध हो, दूसरी बात उसेयह भी स्पष्ट स्थापित हो गयी कि वो अब भी एक सपनेमेंही हैक्योंकि उसका उठ कर वर्तिका के साथ टेनिस रैके ट लेकर घर मेंअज्ञात सायेको तलाश करना एक सपनेमेंघटित हुई घटना हैजिसका ज़िक्र उसनेअभी वर्तिका को सारा वृतांत बतातेसमय किया था और वर्तिका नेपुष्टि भी की थी, ऐसा तभी हो सकता था जब वो अब भी सपना देख रही हो क्योंकि वास्तविकता मेंजब येघटना घटित ही नहीं हुई तो वर्तिका इस घटना के घटित होनेकी बात नकारती.
कृतिका चौंक कर पीछेपलटी. किसी छिपकली की तरह दिवार पर आड़ी-तिरछी रेंगती हुई वर्तिका अपनेकमरेसेनिकल कर उसकी तरफ़ ही आ रही थी.
वर्तिका- ‘हिहिही…काम डाउन कृतिका, इट्स जस्ट ए ड्रीम…हाहाहा!’ वर्तिका के गलेसेघरघराहट वाली दोहरी आवाज़ निकली.
वर्तिका फुर्ती सेदिवार और छत पर रेंगतेहुए कृतिका की ओर बढ़ रही थी. कृतिका खुद को बचाने के लिए अपना सारा ज़ोर लगा कर भागी लेकिन पूरी ताक़त सेभागनेके बाद भी वो अपनी जगह से ज़रा भी आगेनहीं बढ़ पा रही थी जैसेकि वो किसी ट्रेडमिल पर भाग रही हो. छत पर रेंगतेहुए उसके सर के ऊपर आ गयी वर्तिका नेकृतिका के ऊपर छलांग लगा दी. कृतिका के गलेसेएक तीखी चीख निकली.
कृतिका नेचौंक कर आँखेंखोलीं. ऊपर रूम की सीलिंग नज़र आ रही थी. वो स्प्रिंग लगे ‘जैक इन द बॉक्स’ की तरह एक झटके सेबेड पर सीधी बैठ गयी. उसनेअपनेऊपर सेब्लैंके ट हटा कर उसेबेड सेपरेउछाल दिया. इस बार शक की कोई गुंजाइश नहीं थी. कृतिका पहलेसेजानती थी कि वो एक बार फिर सेएक सपनेमेंही जगी है, एक और ड्रीम लूप में. कृतिका अपना सर पकड़ कर बैठ गयी और सोचनेलगी. आख़िर ऐसा क्यों हो रहा है? आख़िर वो इस ड्रीम लूप मेंआयी कै से? उसका दिमाग़ उसेऐसेफ़ॉल्स अवेकनिंग क्यों दे रहा था जो कभी उसके अंतर्मन के विचारों मेंथेही नहीं. एक मिनट..ड्रीम लूप! फ़ॉल्स अवेकनिंग!!
कृतिका को ड्रीम लूप और फ़ॉल्स अवेकनिंग के बारेमेंवर्तिका नेसपनेमेंबताया था, इस सेपहले कृतिका नेना कभी इस चीज़ के बारेमेंकभी कहीं कु छ सुना था और ना ही देखा या पढ़ा था और सपना कितना भी हाइपर रीयलिस्टिक क्यों ना हो वो आपको ऐसा कु छ नहीं दिखा या बता सकता जो आपनेवास्तविक जीवन मेंकभी कहीं देखा-पढ़ा या सुना ना हो. येवैसेही हैजैसेबॉलीवुड की फ़िल्मों पर रील्स बनानेवाला कोई ‘इन्फ़्लूएंसर’ अचानक सेस्टैन्ली क्यूब्रिक, मार्टिन सकोर्सेसेया रोमन पलैन्स्की की फ़िल्मों की व्याख्या करने लग जाए, या फिर कोई आशिक़ी से भरी ट्रेंडिंग शायरी करने वाला ‘इंस्टा शायर’ एड्गर ऐलन पो की रचनाएँ समझने का दावा करे, यानी कि असम्भव.
इसका सिर्फ़ एक ही मतलब हो सकता था. कृतिका अपनेसपनेमेंनहीं थी. वो वास्तव मेंवर्तिका के सपनेमेंथी और उसका ड्रीम लूप इसीलिए नहीं टूट रहा था क्योंकि हर बार सपनेमेंवो चौंक कर जाग रही थी ना कि वर्तिका. नहीं…पहली बार जब वो वर्तिका के रूम मेंगयी थी तो उसनेवर्तिका को नींद मेंऊँ घता पाया था. कृतिका के हिलानेसेवर्तिका चौंक कर जागी थी, फिर भी ड्रीम लूप नहीं टूटा! फिर आख़िर कै सेटूटेगा यह ड्रीम लूप? कृतिका अपना सर खुजलातेहुए सोच रही थी. उसने क्रिस्टफ़र नोलन की इन्सेप्शन हिंदी डबिंग मेंदेखी थी वो भी सबटाइटल्स के साथ, फिर भी उसके ज़्यादा कु छ पल्लेनहीं पड़ था…ना ही उसेफ़िल्म पूरी तरह समझ आयी थी. बस उसेकु छ बातेंयाद थीं, सपनेमेंगिरने, डूबनेया मारनेसेनींद टूट जाती है. हर बार सपनेमेंकृतिका ही गिरी, डूबी या मरी थी इसीलिए वो एक ड्रीम लूप सेनिकल कर फिर सेदूसरेड्रीम लूप मेंपहुँच जा रही थी. उसने पहले सपने में वर्तिका को झंकझोर कर जगाया ज़रूर था लेकिन उसेगिराया, डुबोया या मारा नहीं था. उसनेबेड सेउतर कर पैरों मेंफ़्लिप-फ़्लॉप डाली और दबेपाँव चलतेहुए वर्तिका के रूम में पहुँची. रूम ख़ाली था. वर्तिका वहाँनहीं थी. कृतिका ने वॉशरूम का दरवाज़ा खोला. इस बार वॉशरूम सेबाहर पानी भी नहीं आ रहा था. बाथटब भी ख़ाली था, वर्तिका वहाँभी नहीं थी.
अब पूरेघर मेंवर्तिका कहीं भी हो सकती थी, किसी भी दरवाज़ेके पीछे, छत या दिवार के बीच से निकल कर वो कृतिका पर हमला कर सकती थी. क्योंकि येवर्तिका का सपना था इसलिए उसके सपना देखतेदिमाग़ और अंतर्मन को इस बात का आभास हो चुका था कि कृतिका को उसके सपने की हक़ीक़त पता चल गयी है. अब उसका अंतर्मन सजग हो चुका था, उसेपता था कि कृतिका कहाँ हैऔर क्या करनेवाली हैजब कि कृतिका को वर्तिका के बारेमेंऐसा कोई इल्म नहीं था.
ऐसेमेंवर्तिका को गिराना या डुबोना तो नामुमकिन काम था. फिर एक ही रास्ता बचता था. वर्तिका को जान सेमारना ताकि सपनेमेंमरनेपर वर्तिका का सपना टूट जाए और वो हक़ीक़त मेंजागेऔर उसके साथ कृतिका भी. लेकिन मारनेके लिए हथियार चाहिए, गला दबा कर मारना सम्भव नहीं वो भी उस इंसान को जिसके सपनेमेंआप उसके ही रहमोकरम के मोहताज हों. घर मेंऐसी कौन सी चीज़ थी जिसेजान लेनेके लिए हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता था? किचेन नाइफ़!
कृतिका किचेन की तरफ़ भागी. किचेन के दरवाज़ेपर वो ठिठक कर रुक गयी. वर्तिका अंदर किचेन मेंथी. उसकी पीठ कृतिका की ओर थी. वो गैस बर्नर ऑन करतेहुए खुद मेंकु छ गुनगुना रही थी और उसकी बॉडी लैंग्वेज सेऐसा लग रहा था कि वो कृतिका की वहाँमौजूदगी सेबिल्कुल बेख़बर थी और अपनेलिए कॉफ़ी बनानेजा रही थी. कृतिका दबेपाँव चलतेहुए किचेन के भीतर दाखिल हुई.
प्लैट्फ़ॉ र्मपर रखेनाइफ़ रैक सेउसनेएक बड़ी नाइफ़ निकाली फिर वैसेही चलतेहुए ठीक वर्तिका के पीछेआ खड़ी हुई. वर्तिका नेअचानक सेगुनगुनाना बंद कर दिया. कृतिका का चाकू वाला हाथ पूरी तेज़ी सेवर्तिका पर चला. वर्तिका का शरीर कमर सेऊपर यूँ 180° घूमा जैसेवो कोई जीवित इंसान नहीं आर्टिक्यूलेटेड टॉय हो. उसके हाथ मेंसॉसपैन था जिसमेंखौलता हुआ पानी उसने कृतिका के मुँह पर फेंक मारा.
कृतिका- ‘नहीं sss’
कृतिका चीखते हुए उठ बैठी. वो फिर से अपने बेडरूम में, अपने बेड पर थी. उसका मोबाइल बेडसाइड टेबल पर अब भी चार्जिंग मेंलगा हुआ था. उसनेअपनेऊपर सेब्लैंके ट हटा कर उसेबेड से परे उछाल दिया. एक और ड्रीम लूप! एक और फ़ॉल्स अवेकनिंग! उसनेबेड से उतर कर पैरों में फ़्लिप-फ़्लॉप डाली और दबेपाँव चलतेहुए वर्तिका के रूम मेंपहुँची. रूम ख़ाली था, वॉशरूम भी ख़ाली! वो फिर सेदबेपाँव चलतेहुए किचेन तक पहुँची. वर्तिका अंदर थी. सॉसपैन मेंपानी भरते हुए. कॉफ़ी बनानेकी तैयारी करतेहुए. इस बार कृतिका दबेपाँव चलनेमेंसमय बर्बाद नहीं करने वाली थी. कृतिका नेपूरी फुर्ती सेरैक सेचाकू निकाला और वर्तिका की ओर भागी. वर्तिका नेगैस बर्नर का नॉब ऑन किया. इससेपहलेकि वो इग्निशन बटन दबाती, उसकी पीठ मेंदर्द की एक तीखी और असहनीय लहर दौड़ गयी. वर्तिका कराहतेहुए पीछे पलटी, कृतिका नेउसकी पीठ से चाकूनिकाला और उसके दिल मेंउतार दिया. वर्तिका तड़प कर नीचेगिरी.
कृतिका- ‘डोंट वरी वर्तु! इट्स जस्ट ए ड्रीम. अभी तूजागेगी और तेरे इस ड्रीम लूप…इस…इस फ़ॉल्स अवेकनिंग सेतेरेसाथ-साथ मुझेभी छुटकारा मिल जाएगा. म..मैंपता नहीं कै सेतेरेसपनों में आ कर फँ स गयी हूँयार!’
वर्तिका- ‘य…येसपना न..नहीं हैक…कृ तु.’ वर्तिका इसके आगेकु छ नहीं बोल पायी, उसकी साँस रुक चुकी थी. दिल धड़कना बंद कर चुका था.
कृतिका का चेहरा सफ़ेद पड़ गया. उसके होश उड़ गए.
कृतिका- ‘नो..नो..नो.नो…ए..ऐसा नहीं हो सकता…य..येतो ड्रीम लूप है..फ़ॉल्स अवेकनिंग.’ कृतिका पागलों की तरह वर्तिका के बेजान शरीर को ज़ोर-ज़ोर सेहिलानेलगी. कृतिका- ‘वर्तिका! वर्तु! उठ जा वर्तु!’ कृतिका पागलों की तरह चिल्ला रही थी.
किचेन कैबिनेट्स के ऊपर फ़िट एक छोटेसेहिडेन कै मरा सेयेपूरा दृश्य एक दूसरी जगह लाइव स्ट्रीम हो रहा था. एक वाइट रूम मेंजहां एक वॉल पर लगेलाइफ़ साइज़ मॉनिटर पर कृतिका और वर्तिका के फ़्लैट के हर रूम यहाँतक कि वॉशरूम तक का लाइव वीडियो स्ट्रीम हो रहा था. इस मॉनिटर पर दो सेग्मेंट्स थे, ड्रीम और रीऐलिटी. फ़िलहाल ड्रीम वालेसेग्मेंट की स्क्रीन ब्लैंक थी.
स्क्रीन वॉल के ठीक सामनेदो चेयर लगी हुई थीं जो ऑक्युपाइड थीं. कुर्सियों पर एक पुरुष और एक महिला बैठेथे, दोनों की उम्र तीस के आस-पास होगी.
‘दैट्स टू बैड. तुम्हारेएक्स्पेरिमेंट का फ़ेज़ वन फे ल हो गया सृजन.’ लड़की के चेहरेपर ऐसेभाव बिल्कुल नहीं थेजिनसेकहीं सेभी अफ़सोस झलकता हो.
सृजन- ‘पूरी तरह नहीं मिस मिथ्या. ल्यूसिड ड्रीमिंग, कॉग्निटिव सिम्युलेशन ऑफ़ सबकॉंश्यस, प्रोजेक्शन ऑफ़ एक्स्टर्नल सबकॉंश्यस इन सब्जेक्ट’स ड्रीम लूप एं ड फ़ॉल्स अवेकनिंग…हमारे एक्स्पेरिमेंट नेयेसब कु छ कर दिखाया.’
मिथ्या- ‘प्रोजेक्शन अनस्टेबल था सृजन और कॉग्निटिव सिम्युलेशन वीक. इस पूरेएक्स्पेरिमेंट का पॉइं ट यही था कि गेस्ट सब्जेक्ट को पता नहीं चलना चाहिए कि वो होस्ट सब्जेक्ट के सपनेमेंहै. इनफ़ैक्ट, कॉग्निटिव सिम्युलेशन इतना स्ट्रॉंग होना चाहिए कि गेस्ट या होस्ट दोनों मेंसेकिसी को भी ये एहसास ही ना हो कि वो वास्तविक दुनिया मेंनहीं सपनेमेंहैं.’ मिथ्या नेडिस्मिसिव टोन मेंकहा.
सृजन- ‘मेरेहिसाब सेआप हमेंहमारी मेहनत का ड्युक्रेडिट ना दे कर ज़्यादती कर रही हैंमिस मिथ्या. आपको पता हैकि येसब करना कितना मुश्किल था? सबसेपहलेहमनेयानी सृ-gen corps नेएक फ़ेक होम अपलायेंसेस एं ड फ़र्निशिंग कम्पनी बनाई फिर उस कम्पनी की एक और सिस्टर कम्पनी बनाई गयी जो मोबाइल गेम्स एं ड ऐप्लिके शन बनानेका काम करती है. हमारी टेक टीम नेडार्क वेब सेहज़ारों लोगों के नामों की लिस्ट सेशॉर्टलिस्ट कर के वर्तिका और कृतिका को एक्स्पेरिमेंट के लिए फ़ाईनलाइज किया क्योंकि हमेंकोई बड़ा यूट्यूबर नहीं चाहिए था और ना ही ऐसा यूट्यूबर चाहिए था जिसकी कोई ऑडीयन्स रीच ना हो. कृतिका इस क्राईटेरिया पर ऐन फ़िट बैठती थी. बाक़ी पुष्टि के लिए हमारी होम अपलायेंसेस एं ड फ़र्निशिंग कम्पनी नेस्पॉन्सरशिप एं ड फ़्री होम फ़र्निशिंग सर्विस डील के साथ कृतिका को अप्रोच किया. सर्विस के दौरान इनके पूरेफ़्लैट के हर चप्पेपर ऐसेहिडेन कै मरा प्लांट कर दिए गए जिन्हेंकोई इंफ़्रारेड भी कै च नहीं कर सकती. इन कै मरों की लाइव फ़ीड सेहमनेमहीनों तक इन दोनों सब्जेक्ट्स के हर एक पल पर नज़र रखी है. जब हम पूरी तरह आश्वस्त हो गए कि येदोनों हमारेएक्स्पेरिमेंट के लिए पर्फ़ेक्ट सब्जेक्ट हैंतब असली काम शुरू हुआ. हमारी मोबाइल ऐप कम्पनी नेए.आइ. ऐप लॉंच किया जिसके बारेमेंकिसी नेआज तक सुना भी नहीं और इसकी प्रमोशन एं ड स्पॉन्सरशिप डील लेकर वर्तिका को अप्रोच किया.’
मिथ्या- ‘एक मिनट, यहाँमुझेयेबताओ कि तुम लोगों नेडिरेक्ट कृतिका को अप्रोच क्यों नहीं किया.’ मिथ्या नेसृजन की बात काटतेहुए बीच मेंसवाल किया.
सृजन- ‘क्योंकि हमेशा सेही हमारी मेन टेस्ट सब्जेक्ट वर्तिका थी ना कि कृतिका.’ सृजन अर्थपूर्ण ढंग सेमुस्कुरातेहुए बोला.
सृजन- ‘सी मिस मिथ्या, इतनेमहीनों इन्हेंमॉनिटर कर के हम जान चुके थेकि इन दोनों मेंवर्तिका दिमाग़ वाली लड़की है, एक ऐसी लड़की जिसका सबकॉंश्यस एक स्टेबल प्लैट्फ़ॉ र्महो सकता है ल्यूसिड ड्रीमिंग के ज़रिए किसी दूसरेइंसान के सबकॉंश्यस को अपनेसपनेमेंहोस्ट करनेके लिए. कृतिका जैसी निब्बी का दिमाग़ खुद अपनेसपनों को सही ढंग सेनहीं सम्भाल सकता. इसीलिए तो उस बेवक़ूफ़ को शुरू मेंयेपता ही नहीं चला कि वो अपनेनहीं किसी और के सपनेमेंहैं.’
मिथ्या- ‘लेकिन फिर भी अंततः उसेये एहसास हो गया कि येसपने उसके नहीं हैं, जो तुम्हारे एक्स्पेरिमेंट का शिपरेक साबित हुआ. इसका मतलब लड़की उतनी भी बेवक़ूफ़ नहीं और तुम्हारा असेस्मेंट ऐक्यूरट नहीं. ख़ैर, आगेबढ़ो.’
सृजन- ‘असेस्मेंट फ़ेल्यर को मैंस्वीकार करता हूँ. येहमसेसिर्फ़ कृतिका के नहीं बल्कि वर्तिका के के स मेंभी हुआ बल्कि वर्तिका के के स मेंकहीं ज़्यादा हुआ. हमेंअंदाज़ा नहीं था कि वर्तिका के सबकॉंश्यस मेंकृतिका के लिए इतना रेज है. अपनेहर ड्रीम मेंवर्तिका के सबकॉंश्यस नेविभत्स से विभत्स रूप लेकर कृतिका के गेस्ट सबकॉंश्यस पर अटैक कर दिया.’
मिथ्या- ‘यानी वो अटैक तुम्हारेप्रॉम्प्ट्स का नतीजा नहीं थे?’
सृजन- ‘नहीं, मैंसमझाता हूँकै से. जैसा कि आप जानती हैंकि हमनेएक ऐसा अड्वैन्स्ड ए.आइ. प्रोग्राम बनाया हैजो किसी भी इंसान के डिफ़्रेंट विज़ूअल स्कैन कर के उनकी मैपिंग कर के उसके आधार पर उसका एक वर्चूअल कॉंश्यस जेनरेट करता है. यहाँमैंफिर क्लीयर कर देता हूँकि इस वर्चूअल कॉंश्यस मेंउस व्यक्ति की मेमरी स्टोर्डनहीं होती क्योंकि फ़ोटोग्राफ़्स यादों को ट्रिगर करते हैंलेकिन उन्हेंडेटा की तरह ट्रान्स्फ़र नहीं करते. हमारा वर्चूअल कॉंश्यस जेनरेटर व्यक्ति के बायोमेट्रिक्स के आधार पर उसका मूल स्वभाव, उसकी आदतें, तौर तरीक़ों का एक रेप्लिका जेनरेट करता है. नींद के दौरान जब व्यक्ति का सबकॉंश्यस सपनों के रूप मेंसक्रीय हो उससेपहलेअगर हमारेए.आइ. द्वारा बनाया हुआ वर्चूअल कॉंश्यस उस व्यक्ति के दिमाग़ मेंफ़ीड कर दिया जाए तो यह इंसान के असल सबकॉंश्यस को ओवर पावर कर लेता. फिर उस इंसान सेसपनेमेंहम वो करवा सकतेहैंजो हम चाहेंलेकिन यहाँध्यान रखनेवाली बात येहैकि सबकॉंश्यस मेंएक बड़ा और अहम योगदान मेमरी का होता हैजो कि हमारेवर्चूअल कॉंश्यस के पास नहीं थी. वर्चूअल कॉंश्यस क्योंकि वर्तिका के वास्तविक सबकॉंश्यस का प्रतिरूप था इसलिए जैसेही उसके सपनों के दौरान वर्चूअल कॉंश्यस नेउसकी मेमरी ऐक्सेस की वो वैसेही काम करनेलगा जैसेउसका वास्तविक सबकॉंश्यस करता.’
मिथ्या- ‘यानी तुम्हारे प्रॉम्प्ट्स नज़रंदाज़ कर के वर्चूअल कॉंश्यस नेसपनेमेंवर्तिका के मन की चलाई. लेकिन नींद सेजागनेपर उसेपता क्यों नहीं चला इसका?’
सृजन- ‘यही तो ख़ासियत हैवर्चूअल कॉंश्यस की. येसिर्फ़ एक प्रोजेक्शन है. नींद के दौरान जितनी देर येकाम करेगा और इंसान सपना देखेगा वो हम तो इस मॉनिटर स्क्रीन पर उस व्यक्ति के पॉइं ट ऑफ़ व्यूसेदेख लेंगेलेकिन उसके दिमाग़ या उसके अवचेतन मेंइस सपनेकी कोई याद ना रहेगी. उसेलगेगा कि वो एक गहरी बिना सपनेकी नींद सेउठा है. कृतिका को एहसास ना हुआ कि जब सपनेमेंवर्तिका नेउसके मुँह पर खौलता पानी फेंक था तब वो वर्तिका के सीनेमेंचाकू मार चुकी थी. नतीजतन, वर्तिका सपनेमेंमरतेही वास्तविक यथार्थमेंजाग गयी. लेकिन उसका दिमाग़ ब्लैंक था, उसेइन सपनों की कोई याद नहीं थी. उसेलगा वो काम करतेहुए झपक गयी और आदतन कॉफ़ी बनानेवो इत्मिनान सेकिचेन मेंचली गयी. कृतिका को एहसास ही नहीं हुआ कि वर्तिका वास्तविकता मेंजाग चुकी है, उसेलगा कि वो अब भी ड्रीम लूप मेंहैऔर उसनेइसी ग़लतफ़हमी में वर्तिका का असल मेंख़ून कर दिया.’
मिथ्या- ‘लेकिन अगर तुम्हारेदोनों मेंसेकोई भी एक सब्जेक्ट इन सपनों के दौरान वास्तविकता में नींद सेजाग जातेतो?’
मिथ्या की बात पर सृजन मुस्कुराया.
सृजन- ‘आप को लगता हैहम इतनी छोटी सी बात का ख़्याल नहीं रखेंगे? आज शाम ही डिपार्टमेंटल स्टोर और बेकरी मेंतैनात हमारे लोगों नेख़ास कॉफ़ी और मफ़िन कृतिका को दिए. इतनेलम्बे कॉग्निटिव सिम्युलेशन और सीम्लेस ल्यूसिड ड्रीमिंग के लिए सिडेशन बहुत ज़रूरी हैवो भी दोनों सब्जेक्ट्स का. प्रमोशनल वीडियो शूट करनेसेपहलेकृतिका नेमफ़िन खाया और वर्तिका नेकॉफ़ी पी. इसके बाद दोनों नेअपनेफ़ोन मेंहमारा ऐप चलाया जिसनेइनके क्रीपी अवतार डिवेलप करने की आड़ मेंइनकी वर्चूअल ब्रेन मैपिंग कर ली. इसके बाद सेडटिव्स के असर सेवर्तिका एडिटिंग चेयर पर सो गयी और कृतिका रूम मेंजा कर फ़ोन चार्जिंग मेंलगातेही लेकिन उसेइसका एहसास ना हुआ क्योंकि सपनों की कोई शुरुआत या अंत नहीं होता सिर्फ़ बीच का पार्टहोता है. बाक़ी तो आप जानती ही हैंमिस मिथ्या.’
मिथ्या- ‘अब इस सिचूएशन को कै सेहैंडल करोगे?’ मिथ्या स्क्रीन पर कृतिका की तरफ़ इशारा करतेहुए बोली.
सृजन- ‘बड़ेआराम से.’ सृजन कुटिल भाव सेमुस्कुराया.
सृजन- ‘अपनी बेस्ट फ़्रेंड का ख़ून करनेके शॉक सेकृतिका इतनी बदहवास हैकि उसेएहसास ही नहीं कि गैस बर्नर का स्विच ऑन हैलेकिन वर्तिका बर्नर इग्निशन नहीं दबा पायी थी. पूरेकिचेन में गैस भर चुकी है.’
सृजन नेमॉनिटर के नीचेपैनल मेंसेएक स्विच दबाया. कृतिका के किचेन मेंलगेहिडेन कै मरा में स्पार्क हुआ. गैस सेभरेकिचेन मेंवो चिंगारी क़यामत ला गयी. वाइट रूम मेंमॉनिटर पर ज़ोर का धमाका नज़र आया और फिर स्क्रीन ब्लैंक हो गयी. सृजन मिथ्या की तरफ़ घूमा.
सृजन- ‘मेरेपास डेटा आ चुका है. कृतिका का प्रमोशनल वीडियो देख कर आठ सौ लोगों नेक्रीप सॉस ऐप इंस्टॉल किया जिसमेंसेपाँच सौ लोगों नेउसेयूज़ किया है. हमारेपास येपाँच सौ टेस्ट सब्जेक्ट हैंइनमेंसेहम अपनेकाम का आदमी ढूँढ ही लेंगे. कल सुबह इन सभी के फ़ोन सेक्रीप सॉस ऐप खुद ब खुद डिलीट हो चुका होगा. मोबाइल गेमिंग एं ड ऐप कम्पनी एं ड होम फ़र्निशिंग कम्पनी थोड़ेसमय मेंबंद हो जाएँ गी, कोई भी इनका लिंक सृ-gen सेजोड़ नहीं पाएगा. आप अपनी फ़ं डिंग बनाए रखिए मिस मिथ्या, हम अपनी पिछली ग़लतियों सेसबक़ लेंगेऔर आनेवालेसमय में आपको वो देंगेजो आप चाहती है. आख़िर सृ-gen की टैगलाइन है, टर्निंग ड्रीम्स इंटू रीऐलिटी.’
दोनों ने मुस्कुराते हुए एक-दूसरे से हाथ मिलाया.
The End
