A NIMITT KALANTRI MYSTERY

BY: NITIN K. MISHRA

CO-WRITER & DESIGNER: ADITI VATSALA KASHYAP

CREATIVE CONSULTANT- RIBHU CHOPRA

Aadi Parva

अस्वीकरण 

इस कहानी के सभी पात्र, घटनाएँ स्थान  काल्पनिक हैं। इनका किसी भी जीवित अथवा मृत व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है, ऐसा होना मात्र एक संयोग है। कहानी का उद्देश्य किसी भी धर्म, जाति या समुदाय अथवा व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। कहानी में विचलित करने वाले दृश्यों, उत्पीड़न और हिंसा का वर्णन है साथ ही अपशब्दों तथा आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया है। कहानी अपने विवेक से पढ़ें। यह कहानी केवल व्यस्क पाठकों के लिए हैं, अट्ठारह वर्ष से कम आयु वाले पाठक कहानी ना पढ़ें। 

DISCLAIMER 

All characters, events, and places in this story are fictional. Any resemblance to any living or deceased person is purely coincidental. The story is not intended to hurt the sentiments of any religion, caste, community, or individual. The story contains disturbing scenes, descriptions of abuse and violence, as well as the use of profanity and objectionable language. Read the story at your own discretion. This story is meant only for adult readers; anyone under eighteen should not read it.

निमित्त(VOICE OVER): 

बचपन में मुझे नाना का बनाया ‘gooseberry jam’ अंधा पसंद था…मैं ये भी कह सकता था कि gooseberry jam मेरा फ़ेवरेट था लेकिन वो feel convey नहीं होती जो अंधा पसंद होने में होती है। 

Army से voluntary retirement लेने के बाद के बाद नाना ने लम्बे समय तक cantonment school में maths and woodcraft teacher का काम किया था। स्कूल से retirement के बाद भी उनके students उनसे मिलने अक्सर हमारे farmhouse पर आते रहते थे। इनमें से एक था श्रीवास्तव। इसका पूरा नाम मुझे याद नहीं लेकिन अपने आप में character था। छोटी ठुड्डी वाला शलगम के आकार का चेहरा, और वैसी ही शारीरिक बनावट। छोटी बटन जैसी आँखें और उनपर मोटा horn-rimmed power glass। शत्रुघन सिंह स्टाइल मूँछें जो दोनों साइड से कभी symmetrical नहीं होती थीं, आगे को घोड़े की तरह निकले हुए दांत। चुस्त शर्ट-पैंट पहनता था जिसमें शर्ट के निचले बटन तोंद पर vertical eye shape का gap बनाते( Skelly इसके लिए better example suggest कर रहा है पर वो देना शायद inappropriate होगा)। लहरदार बालों में ढ़ेर सारा नारियल तेल लगा कर बिल्कुल चिपका कर बनाता था। श्रीवास्तव मुझे रत्ती भर भी पसंद नहीं था, कोई ख़ास वजह नहीं थी…वैसे भी लोगों को नापसंद करने के लिए मुझे किसी ख़ास reason की ज़रूरत नहीं होती। लोगों को नापसंद करना मेरा पैदाइशी शग़ल है। 

पर उस Sunday श्रीवास्तव को सख़्त नापसंद करने का बहुत valid reason था मेरे पास…नाना gooseberry jam बना रहे थे। 

श्रीवास्तव नाना से मिलने अक्सर Sundays को आता और सुबह 10-11 बजे का आया शाम 4-5 बजे से पहले ना टसकता। वो पूरे टाइम अपनी family life, marital issues, work life struggles का रोना रोता और नाना चुपचाप stoic facial expressions के साथ उसका यह रोना सुनते। बीच-बीच में बड़ी हद उनके मुँह से 

‘हूँ-हम्म” जैसी हुंकार निकलती फिर वो वापस zen बन जाते। 

दोपहर के लगभग 3 बज रहे थे। कड़ाही में पकते jam की ख़ुशबू से मेरा दिमाग़ वैसे ही आपा खो रहा था जैसे पिछले Friday दूरदर्शन पर देखी film में heroine को देख कर रंजीत ने अपना आपा खोया था। मैं लगातार नाना के रूम के चक्कर काट रहा था कि कब यह मानहूस-मारा श्रीवास्तव टले और नाना मुझे देसी घी के करारे 8 तह वाले नमकीन पराँठे बना कर jam के साथ दें। किसी guest के आने पर मेरे room में ना जाने की सख़्त हिदायत थी, इनमें सिर्फ़ William Guard नाना अपवाद थे, जिनके आने पर मैं room में रह सकता था।  

मेरी pet dog शेरा और pant pocket में बैठा Skelly भी मेरे साथ दरवाज़े के पीछे खड़े कान लगाए हुए थे कि श्रीवास्तव कब अपना रोना ख़त्म कर के टालेगा। अंदर से उसकी मायूस, मरी आवाज़ आई, 

श्रीवास्तव: ये जीवन क्या है मा’ट सा’ब ? 

उस समय के लोगों का ‘मास्टर साहब’ को ‘मा’ट सा’ब’ और ‘डॉक्टर साहब’ को डा’क सा’ब कर देना आम बात थी। Skelly अक्सर सोचता था कि ‘कॉंट्रैक्टर साहब’ को लोग ‘कंट सा’ब’ क्यों नहीं बुलाते!

सवाल करने के बाद श्रीवास्तव की बटन जैसी आँखें गोल चश्मे से magnify होकर नाना पर टिकी हुई थीं। नाना शांति से कड़ाही में कड़छी चला रहे थे ताकि चाशनी ज़्यादा पक कर कड़ी ना हो जाए। जवाब के इंतज़ार में उल्लू के जैसे आँखें झपकाता श्रीवास्तव लगातार उन्हें घूर रहा था। 

नाना: जीवन वो है जो हम उसे बनाते हैं श्रीवास्तव। जो मिला, जो हमारे साथ घटित हुआ, वो नहीं…बल्कि उसपर हमारी प्रतिक्रिया, हमारे action define करते हैं कि हमारा जीवन कैसा होगा। 

श्रीवास्तव: पर उन factors का क्या जो हमारे control में नहीं? भाग्य का क्या? वही तो जीवन सबसे ज़्यादा बर्बाद करते हैं। 

श्रीवास्तव सिर हिलाते हुए बोला। नाना के अधरों पर हल्की मुस्कान उभरी। 

नाना: हमारे साथ जो होता है, वो universe की नियति है और हम उसके वशीभूत होकर जो करते हैं…वो हमारे जीवन का निमित्त है। 

मुझे नाना की बात उस वक्त ना ज़्यादा समझ आई और ना ही उसे समझने में मेरा interest था। उस पल में मेरे लिए जीवन gooseberry jam और देसी घी के 8 layer  वाले नमकीन पराठे के taste से ज़्यादा कुछ ना था। 

FEW DAYS BACK 

गाने की धुनों के साथ वो इकहरे बदन का साया मादक अन्दाज़ में थिरक रहा था। हर beat पर साँप की तरह बल खाती उसकी कमर और ऊपर-नीचे होते कूल्हे उसके dance moves को उत्तेजक से अश्लील की परिधि में ला रहे थे, लेकिन उसके सामने बैठे शख़्स पर उन अदाओं का कोई प्रभाव ना था। 

अपने moves fail होता देख साये के हाथ तेज़ी से अपने सीने पर फिरने लगे। उसकी कमर नीचे फ़र्श पर बैठे शख़्स के ठीक सीध में थी, डान्सर के pelvic thrusts उस शख़्स के चेहरे को target कर के और तेज़ हुए। Thrusts के साथ डान्सर का groin bulge उभरने लगा। नीचे बैठे शख़्स की अब भी लेशमात्र दिलचस्पी डान्सर में नहीं थी, उसकी नज़रें बार-बार room के corner में जा रही थीं। वहाँ बज रहे loud music के बावजूद भी उस corner से उठती सिसकने की हल्की आवाज़ साफ़ सुनी जा सकती थी।  शख़्स ने अपनी जगह से उठने की कोशिश की पर दो मज़बूत हाथों ने उसके कंधे दबाते हुए वापस फ़र्श पर बिठा दिया। 

गाने की धुनों पर थिरकती डान्सर की आँखें बंद थी, pelvic thrusts के साथ उसका सिर यूँ झटके खा रहा था कि उसके खुले सुनहरे बाल उसके चहरे पर बिखर रहे थे। उसका दुबला शरीर यूँ थर्रा रहा था जैसे orgasm hit करने वाली हो। फिर वो अचानक रुक कर सीधी हुई और playboy pin-up model के जैसे कूल्हे निकाल कर खड़े होते हुए उसने अपने चहरे पर आए बाल पीछे समेटे। फिर फ़र्श पर बैठे शख़्स को घूरते हुए बनावटी शिकायती लहजे में बोली,

डान्सर: C’mon करमू! मैं तुम्हारे लिए इतना sexy dance कर रही हूँ और तुम मुझ पर ध्यान भी नहीं दे रहे। 

करमवीर अस्थाना: Please! Let my daughter go. She’s just a kid.

फ़र्श पर बैठा शख़्स गिड़गिड़ाते हुए बोला, उसकी आँखें वापस room corner पर जा टिकीं जिधर से सिसकने की आवाज़ आ रही थी।

डान्सर ने किसी कुशल Mime artist की तरह frowning face बनाया और ऊँगलियाँ गाल पर नीचे की तरफ़ खींचते हुए आंसुओं की लकीर खींचने की नक़ल की। 

डान्सर: You are such a party pooper karmu. सारा मूड ख़राब कर दिया…I hope तुम्हारी बिटिया रानी mood बना दे…हिहिही 

अपने आड़े-टेढ़े दांत दिखाते हुए डान्सर करमवीर को चिढ़ाने के लिए हंसी।

“हुँह”

फिर एक लचक के साथ उसने अपनी गर्दन व कूल्हे घुमाए और किसी हिरणी के समान कुलाँचे भरते और अपने कूल्हे मटकाती room corner की ओर बढ़ी। 

डान्सर: Hello, baby girl…did you like my moves?

अपने कूल्हे करमवीर की ओर उठाते हुए डान्सर आगे झुकी, उसकी नज़रें कोने में दुबकी हुई लगभग चौदह साल की बच्ची के कोण-कोण को scan कर रही थी। उन आँखों में ऐसे भाव थे कि बच्ची सहम कर खुद में सिमटने की असफल कोशिश करने लगी। 

बच्ची: प…पापाsss 

सहमी बच्ची की सिसकारियों के साथ वो हल्की गुहार निकली, हालाँकि वो कहीं ना कहीं जानती थी कि उसके पापा उसे बचा पाने में असमर्थ हैं। 

करमवीर: दूर हट उससे कमीने! बच्ची है वो!  

अपनी बेटी को इस अवस्था में देख कर करमवीर तड़प कर चीखा। 

“भटाक” 

sledgehammer सा हाथ करमवीर के चेहरे से टकराया। उसकी नाक व मुँह फूट गए। भलभलाते खून से सने अपने चेहरे को दोनों हाथों से पकड़े करमवीर फ़र्श पर छटपटाने लगा। उसके सिर पर खड़े पहाड़ जैसे bouncer ने उसके सिर पर बचे-खुचे बालों को बेरहमी से मुट्ठी में भींचा और उसे घसीट कर बिठाया।  

बच्ची: प…पापाsss 

अपने पापा की हालत देख कर बच्ची बुरी तरह चीखी लेकिन उसकी चीख डान्सर की पागलों जैसी हंसी में घुट गई। 

डान्सर: ईsss…हिहिही…हाहाहा..ईsss 

उसके चेहरे पर किसी पागल लकड़बग्घे से expression थे। हंसते हुए उसके खुले मुँह से लगातार लार टपक रही थी। 

बच्ची ने उठने की कोशिश की पर दूसरे पहाड़ जैसे बाउन्सर ने उसे जकड़ा हुआ था। 

डान्सर: You know karmu, gender fluid होने के perks क्या हैं? कुछ देर पहले तेरे लिए dance करते हुए I identified as a diva, और अब तेरी बेटी को देख के…

(बच्ची को ऊपर से नीचे तक घूरते हुए बोला) मेरी gender fluidity मेरे सारे fluids यहाँ flush कर रही है(अपना groin grab करते हुए बोला)… ईsss…हिहिही…हाहाहा..ईsss(मुँह से और ज़्यादा लार गिरने लगी)

बच्ची ने सहम कर अपनी आँखें भींच लीं 

करमवीर: तुम्हारी सारी बात मानने को तैयार हूँ मंथन…तुम जो कहोगे सब करूँगा…please don’t hurt my daughter. (तड़पते हुए बोला)

मंथन: The name is Manthara…the unholy maadar of all chods… ईsss…हिहिही…हाहाहा..ईsss.

मंथरा अपनी कमर को लचकाते हुए करमवीर की तरफ़ बढ़ी। 

मंथरा: बेटी बचाओ slogan को seriously ले लिया तूने तो करमू! ईsss…हिहिही…हाहाहा..ईsss

मंथरा ने एक-बार जो पागल लकड़बग्घे सा हँसना शुरू किया तो रुकी ही नहीं। 

करमवीर: तेरी माँ को तुझे देख कर कर घिन्न नहीं आती मंथन गोखले?(कलप कर बोला)

मंथरा की हंसी को फ़ौरन break लग गया। 

मंथरा: Ouch! तूने तो below the belt hit कर दिया। (अपना चेहरा करमवीर के पास लाया) जब मुँह खुलने पर कुछ अच्छा ना निकले तो उस मुँह में कुछ ठूँस देना चाहिए।

मंथरा ने सीधे होते हुए अपनी leather pant unzip की और दोनों bouncers से बोली। 

मंथरा: मधु, तू बेटी की आँखों खोल के रख, कैटभ, तू पप्पा का मुँह खोल के पकड़…ईsss…हिहिही…हाहाहा..ईsss

कुछ देर बाद मधु-कैटभ के साथ मंथरा करमवीर अस्थाना के घर से निकल रही थी जब उसके फ़ोन पर tune बजी,

“सकून…सकून…सकून,” (मंथरा ने फ़ौरन call pick की)

मंथरा: काम हो गया आदरणीय, करमू ने मुँह खोल दिया…literally…ईsss…हिहिही…हाहाहा..ईsss

(Phone पर दूसरी ओर से आचार्य की चिंतित आवाज़ सुनाई दी)

आचार्य: हम्म…वो ठीक तो है ना? तूने उसके या उसके परिवार को कुछ किया तो नहीं?

मंथरा: मैंने कभी किसी चींटी को भी नुक़सान पहुँचाया है आदरणीय?

(मासूमियत mimic करते हुए बोला) मैं तो हर situation को प्यार से handle करता हूँ। 

आचार्य: मंथन…(आवाज़ में genuine concern था)

मंथरा: Relax आदरणीय, everything is under control…मैं सिर्फ़ करमू की बेटी के अंतर्मन में दबी एक याद और करमू की ज़ुबान पर एक खारा स्वाद बन कर रह जाऊँगा…ईsss…हिहिही…हाहाहा..ईsss

आधी रात को सुनसान सड़क पर मूसलाधार बारिश में मंथरा का शरीर यूँ थिरक रहा था जैसे कोई Mime artist ballet dance कर रहा हो। कड़कती बिजली के साथ उसकी पागल लकड़बग्घे सी हंसी वातावरण में गूंज रही थी। दोनों bouncers मधु और कैटभ बुत बने खड़े थे। 

*** 

VARANASI, INDIA 

BACKGROUND SOUND FROM THE GHATS 

“शिवा भरणम  घोर रूपम, पंच इंद्रिय तारकम।

नित्यम जाग्रा स्थिते निष्ठम, नागा नागम आश्रयहम 

नागा नागम, नागा नागम,

नागा नागम आश्रयहम” 

काशी विश्वनाथ corridor बनने के बाद बनारस के “बड़े बाबा विश्वनाथ” के नाम से प्रख्यात प्राचीन शिव मंदिर से जुड़ी हुई विश्वनाथ गली; जो कि असंख्य छोटी-बड़ी गलियों का सघन जाल है, की संरचना और सघनता में कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं आया।  इन गलियों में एक अलग संसार बसता है। देश-विदेश से आने वाले सैलानियों से लेकर local बनारसियों से हमेशा खचाखच पटी रहने वाली इन गलियों में कुछ इतनी संकरी और अंधेरी हैं जो लगता है जैसे किसी दूसरी दुनिया में खुलती हों। Hi-tech gadgets हों, दुर्लभ antiques या फिर fast food से लेकर cosmetics तक, यहाँ सब कुछ मिलता है।  

दक्षिण भारत से आए दर्शनार्थियों के बड़े हुजूम से बांस फाटक की ओर जाने वाली गली जाम थी। 7-8 साल की बच्ची, कुरकुरे के दो पैकेट मुट्ठी में दबाए हुए, दर्शनार्थियों को लगभग धकियाते हुए इनके बीच से जगह बनाती तेज़ी से भाग रही थी। 

उसके नन्हे कदमों की speed से पता लगता था कि वो इन गलियों के चप्पे-चप्पे से परिचित है। हिरणी सी कुलाँचे भरती वो एक-गली से दूसरी गली की भूल-भूलैया में भाग रही थी, हर गली पिछली गली से ज़्यादा संकरी और अधिक सुनसान होती जा रही थी। 

Finally एक लकड़ी के टूटे-जर्जर, दीमक खाए दरवाज़े के सामने वो रुकी। दरवाज़े के बग़ल की दीवार पर एक तख्ती लगी थी जिसकी condition दरवाज़े से ज़रा ही बेहतर  थी। तख्ती के किनारे दीमक और सीलन की भेंट चढ़ चुके थे और paint उड़ चुका था जिससे तख्ती पर लिखा “RAJA ANTIQUE SHOP” बहुत मुश्किल से पढ़ने में आ रहा था। नाम पढ़ते हुए बच्ची ने तख्ती पर थूका और ग़ुस्से से wrapper फाड़ते हुए दो-तीन कुरकुरे मुँह में भर लिए। फिर दरवाज़े को एक लात मारी, दरवाज़ा चरमराते हुए अंदर की तरफ़ खुल गया। 

अंदर एक छोटा room था जिसमें पीला बल्ब जल रहा था। यहाँ चाँदी, पीतल, ताम्बे और अष्ट-धातु की कुछ मूर्तियाँ रखी थीं जो देखने में बिल्कुल साधारण और original antiques की सस्ती कॉपी थीं। वहाँ की किसी चीज़ में लड़की को interest नहीं था। कमरे के एक कोने में लोहे की आलमारी रखी थी जो अपनी जगह से हल्की सरकी हुई थी और उसके पीछे एक गलियारा दिख रहा था। बच्ची गलियारे में बढ़ गई। 

बनारस का “पक्का माहौल” कहे जाने वाले पुराने इलाक़ों में पत्थरों से बने मकानों में लम्बे गलियारे; जो तहख़ानों के जाल से जुड़े हुए हों, होना आम है। इनका प्रयोग व्यापारी माल-गोदाम के तौर पर करते हैं और ऊपर की संकरी गलियों व भीड़ भरे रास्तों से जो cargo ले जाना मुमकिन नहीं वो इन तहख़ानों से होते हुए पुराने घाटों तक ले ज़ाया जाता है। 

गलियारे के दूसरी तरफ़ एक गोदाम था जहां बाहर रखी मूर्तियों की तुलना में उच्च कोटि की मूर्तियाँ रखी थीं। यहाँ 15-20 लेबर; जो देखने में किसी C-grade भोजपुरी फ़िल्म में villain के extras से ऊपर ना दिख रहे थे, पुरातन धातु की seals और अन्य antiques सावधानीपूर्वक फूस लगा कर wooden boxes में pack कर रहे थे। इन boxes को metal containers में रखा जा रहा था। एक नज़र में देखने पर ये बिल्कुल normal set-up था जिसमें कुछ भी suspicious ना था। एक लम्बाई व चौड़ाई दोनों में असामान्य आकार का आदमी; जो कि antique shop का मालिक था, लोहे की folding chair पर बैठा दूध के ग्लास में जलेबियाँ डुबो कर खा रहा था और बीच-बीच में labours को अपने बनारसी शब्दकोश से परिचित करवा रहा था। बच्ची की वहाँ उपस्थिति की किसी को खबर नहीं थी। यहाँ का सारा कार्यकलाप देखते हुए बच्ची ने इत्मिनान से पैकेट में बचे कुरकुरे हवा में उछाल कर मुँह से catch किए और ख़ाली wrapper फेंकते हुए किसी filmy hero सी चिल्लाई।

बच्ची: अरे रे मोटका!  

antique shop owner के साथ बाक़ियों का ध्यान भी उसकी ओर गया। 

बच्ची: सरऊ के! एतना मारब तोके, तोहार मतारियो चीन ना पाई(इतना मारूँगी तुम्हें कि तुम्हारी माँ भी पहचान नहीं पाएगी)।

मालिक का चर्बी से लटकता लेकिन सख़्त चेहरा ग़ुस्से से सुर्ख़ लाल हुआ। 

Labour: आप बैठिए भईया जी, हम देखते हैं। 

भईया जी: काम करो रे। ये साली हराम की पिल्ली, गटर की पैदाइश, इसकी दोनों टंगड़ी पकड़ कर चीर के गंगा जी में फेंक देंगे। 

दूध का ग्लास खाल कर फेंकते हुए भईया जी गरजे और बड़ी मुश्किल से कुर्सी से अपना बेडौल शरीर उठा कर गैंडे के समान फुफकारते हुए बच्ची की तरफ़ बढ़े। बच्ची फुर्ती से गलियारे में वापस भागी। इतने भारी-भरकम शरीर के बावजूद असामान्य फुर्ती का प्रदर्शन करते हुए भईया जी भी गलियारे में labours की नज़रों से ओझल हुए। 

“BAMMM” अचानक ऐसी आवाज़ हुई जैसे कोई अनियंत्रित ट्रक वहाँ घुस गया हो।

Labour 01: लगता है पेहंटी(छोटी बच्ची के लिए प्रयुक्त देहाती अपशब्द) के कचर दिए भईया जी…हिहिही।

अगले ही पल labours ने अपने जीवन का वो अलौकिक, अविस्मरणीय दृश्य देखा जिसकी कल्पना ना उन्होंने कभी की थी ना उसके सच होने पर यक़ीन कर सकते थे। 180 किलो के भईया जी उड़ रहे थे। 

गलियारे के invisible point से take-off लिया भईया जी का शरीर सीधे labours के सामने crash land हुआ। 

Labour 01: भईया जी…ए-हो…भईया जी।  

लेबर ने हाथ में थामे लकड़ी के फट्टे से भईया जी को हिलाया। भईया जी के शरीर में कोई हरकत ना हुई।  

Labour 02: मर-मरा गइल का-हो? चप्पलवा सुँघावा तनी!   

टूटी-पुरानी चप्पल उतार कर भईया जी को सुँघाई गई। भईया जी टस से मस ना हुए। 

Labour 03: ना! मरे नहीं हैं, साँसवा चल रहा है। बस बेहोस हैं। 

Labour 04: अइसा बेहोस हैं जैसे ट्रकवा रौंद के चल गया हो। ऊ भटंकी पेहंटी कइसे पेल दी पहाड़ से भईया जी को? 

बच्ची वापस गलियारे से प्रकट हुई। कुरकुरे का दूसरा पैकेट फाड़ कर उसने तीन-चार कुरकुरे हवा में उछाले और मुँह से catch करते हुए बोली,

बच्ची: अगला नम्बर किसका है? बारी-बारी पिटोगे या सारे एक साथ?   

Labour 01: तेरी तो…

हाथ में लकड़ी का फट्टा उठाए labour तेज़ी से बच्ची को मारने दौड़ा। बच्ची के पास पहुँचते ही उसकी छाती से जैसे घन टकराया, labour भी भईया जी वाली economy flight की सवारी करते हुए उनकी बग़ल में land हुआ। जब उसके फ़र्श से टकराने उठा धूल व sawdust का ग़ुबार settle हुआ तो बाक़ी बचे labours को बच्ची के साथ एक शख़्स नज़र आया जो एक पल पहले वहाँ नहीं था और लगता था जैसे प्रेत की तरह हवा में प्रकट हुआ हो। उसके साथ एक काले रंग का german shepherd भी खड़ा था और उन्हें घूर रहा था। 

निमित्त: तुझे सिर्फ़ यहाँ तक लाने के लिए बोला था मुन्नी, ये इतने unnecessary dramatics की ज़रूरत नहीं थी। 

मुन्नी: हुँह! You’ ve got all the main character energy, but your entry game is straight-up NPC level. You need grand, kick-ass, slow-motion-walking-through-fire, Rajnikant style entrance! मैं तो बस उसका निमित्त मात्र हूँ (निमित्त को mimic करते हुए कहती है)

निमित्त(eyebrows raised): “Kick-ass”! देख रहा हूँ मेरी सिखाई English की शक्तियों का ग़लत इस्तेमाल हो रहा है(Smirk)

मुन्नी: अभी तो तुम्हारे सिखाए martial-arts की शक्तियों का इस्तेमाल बचा है partner!                   

मुन्नी फ़ौरन martial arts की Seisan-dachi stance में आई। 

निमित्त(डपटते हुए): Ayyee! ये तेरा काम नहीं है, चल फूट अब यहाँ से। 

मुन्नी(चौंक कर): अरे! ये क्या बात हुई? मैं इतनी मेहनत से तुझे यहाँ ले कर आयी, कुरकुरे के दो-दो packet ख़रीदे, सोचा मस्त action देखते-देखते खाऊँगी और तू कह रहा है चल फूट! Not cool dude! 

निमित्त और मुन्नी अपनी बहस में लगे थे, जब दो labour चाकू और छुरा लेकर उनपर लपके। 

“Wuff” चौकन्ने अल्फ़ा ने छलांग लगाई और एक मज़दूर को गिरा कर उसकी छाती पर सवार हो गया। 

दूसरा मज़दूर जो निमित्त के पीछे की तरफ़ से उसपर घात लगाते हुए लपक था उसकी गर्दन पर निमित्त का हाथ यूँ आ कसा जैसे फ़ौलाद का शिकंजा हो। निमित्त ने अब तक अपनी शक्ल भी ना घुमाई थी। ऐसा लग रहा था जैसे निमित्त के सिर के पीछे भी आँखें हों। 

मुन्नी से बहस करते निमित्त के facial expression ऐसे थे जैसे उसकी ही उम्र का कोई छोटा बच्चा हो और दोनो बच्चे आपस में झगड़ रहे हों, लेकिन जैसे ही निमित्त ने अपना चेहरा मज़दूर की तरफ़ घुमाया मज़दूर के तिरपन काँप गए। ऐसा लग रहा था जैसे खुद काल उसकी आँखों में झांक कर फुफकार रहा हो। 

निमित्त(सर्द): जब दो बड़े बात कर रहे हों तब छोटों को बीच में नहीं आना चाहिए।

निमित्त का हाथ te-waza Judo स्टाइल में घूमा और मज़दूर कलाबाज़ियाँ खाता हुआ भईया जी और पहले मज़दूर के बग़ल में ढ़ेर हुआ। निमित्त वापस मुन्नी की ओर पलटा। 

निमित्त(आदेशात्मक): दोबारा नहीं कहूँगा, get-out!                   

मुन्नी जानती थी कि इस point के आगे उससे बहस नहीं की जा सकती। 

मुन्नी(ग़ुस्से से): हुँह! जा रही…पर तुम गंदे हो! गंदे…गंदे…गंदे…अल्फ़ा…तेरा मालिक गंदा है। 

अल्फ़ा: वुफ़्फ़!! 

अल्फ़ा मुन्नी के हाथ में थामे कुरकुरे packet को ललचाई नज़रों से देखते हुए भौंका। मुन्नी ने उसे कुरकुरे दिए और वहाँ से जाते हुए निमित्त की तरफ़ पलटी। 

मुन्नी: गंदे!! (जीभ चिढ़ाते हुए)

निमित्त मुस्कुराया और जाती हुई मुन्नी को पीछे से आवाज़ लगाई। 

निमित्त: Ayyee! कभी घमंड नहीं किया(Winks)

मुन्नी ने मुस्कुराते हुए निमित्त को वापस आँख मारी और वहाँ से ओझल हो गयी। निमित्त बचे labours की ओर मुख़ातिब हुआ। 

Skelly: क्या बोलती public! अपुन को miss किया क्या? 

निमित्त के दिमाग़ में Skelly की आवाज़ गूंजी।

निमित्त: Skelly, not now!

Skelly: अरे काय कूँ रे हौले? देख भिडु, तेरा हो गया, इस अल्फ़ा के गामा का हो गया…अपुन का intro shot बचा है ना बाबा!

अल्फ़ा(disapprovingly): Wuff-Wuff

Confused खड़े labours निमित्त को हवा में अपने आप से बातें करते देख रहे थे। उन्होंने आपस में सिर-जोड़े मंत्रणा शुरू की। 

Labour 04: ई पगलवा अपने आप से हवा में का बात कर रहा है हो?  

Labour 03: एकदम्मे बउचट हो का बे! देख नहीं रहे हो एतना माला-मंतर, जंतर-तंतर धारण किए हुए है। ज़रूर कोई औघड़-तांत्रिक है, अपने किसी पालतू प्रेत-पिशाच से बात कर रहा है। 

Labour 06: सही कह रहे हो भईया। देखे नहीं भईया जी, घुरवा और लल्लन को कैसा हवा में घुमा के चित्त कर दिया। कऊनो आदमजात के बस का बात नाहीं हो। 

Labour 04: का करें भाग चलें का? भईया जी को धूल चटा दिया, प्रेतवा हम गरीबन का तो गाँडे मार लेगा।  

Labour 03: भाग गए तो बाद में भईया जी सबका गांड में मरचा का लाल बुकनी भर देंगे सो?  

Labour 06: त बोल देंगे कि सबसे पहले आपे अपना गांड चबूतरा करवाए थे तांत्रिकवा से!

Labour 03: देखो, हम कहते हैं कि सब लोग एक-साथ मिल के टूट पड़ो तांत्रिकवा पर। जंतर-मंतर, प्रेत बुलावन का समय ही मत दो।

 Labours(unanimously): हाँ-हाँ, सही क़हत हऊवा।

मंत्रणा कर के labours ने जैसे ही अपने चेहरे उठाए वे सभी एक साथ चौंक गए। उन्हें पता भी ना चला निमित्त कब उनके साथ आ खड़ा हुआ और उनके सिर में सिर मिला कर सारी बातें सुन रहा था। 

निमित्त(गहरी साँस लेते हुए): Very good! Perfect plan! शुरू करते हैं।

मज़दूर एक-दूसरे का मुँह ताक रहे थे। निमित्त ने अपने leather belt pouch से एक paper roll निकाला, साथ ही एक छोटी सी पुड़िया जिसमें जड़ी-बूटी भारी हुई थी और भईया जी द्वारा रिक्त किए गए iron throne पर विराजमान होते हुए इत्मिनान से joint roll कर के सुलगाने लगा। जिस समय चारों तरफ़ से उसे घेर कर labours उसपर एक साथ टूटे तब निमित्त के joint का गाढ़ा धुआँ वहाँ के वातावरण में घुल रहा था। Joint  से नीली और gray चिंगारियाँ धुएँ के साथ उठ रही थीं। धुएँ की गंध ऐसी थी जैसे गीले पत्थर पर पुदीना और धतूरा एक-साथ पीसे गए हों। 

निमित्त पर attack करते labours अपनी जगह जड़वत हो गए। 

वे सभी जागृत थे, उनके दिमाग़ चेतन अवस्था में थे लेकिन उनके शरीर freeze हो गए थे। 

निमित्त अपनी जगह से उठा और धुएँ की परिधि से दूर जा खड़ा हुआ, अल्फ़ा उसके पास ही खड़ा था। निमित्त ने फेफड़ों में भारी साँस छोड़ते हुए कहा,

निमित्त: कभी “नार्केश बूटी” का नाम सुना है? दुर्लभ बूटी है, मुश्किल से मिलती है।  इसे धतूरे के साथ पीस कर ये बुरादा बनाया जाता है। इसका हल्का धुआँ भी अगर फेफड़ों में चला जाए तो neuro-muscular still state trigger करता है…ओह…इंसान को जड़वत कर देता है। ये शरीर को लकवा मारने जैसा है क्योंकि मस्तिष्क पूर्णतः जागृत है बस वो शरीर को चला नहीं पा रहा। 

जड़वत खड़े मज़दूरों के चेहरे सफ़ेद पड़ गए। 

निमित्त: Tension नहीं लेने का भाई लोग, जितना धुआँ तुम लोगों ने inhale किया है उसका असर ज़्यादा से ज़्यादा आधा-पौना घंटा ही रहेगा, पर ज़रा सोचो इतनी देर में तुम सब के साथ क्या-क्या हो सकता है (चेहरे पर mischievous expressions आते हैं)

सभी labours के गले की घंटी एक-साथ उछली। एक-दो की pant में पेशाब निकल गई। पर निमित्त के पास उनपर बर्बाद करने के लिए समय नहीं था। वो बारी-बारी से वहाँ रखे containers खोलने लगा। 

निमित्त(Thought): ये सभी पुरातत्व अवशेष illegally खनन किए गए और अवैध रूप से smuggle कर के overseas market में अरबों dollars में बेचे जाएँगे। अगर इन्हें government को सौंप दिया गया तो ये किसी museum की शोभा बढ़ा रहे होंगे लेकिन इनकी असली जगह ना किसी billionaire का private collection है और ना ही कोई museum…क्योंकि यह सभी अवशेष टूटी हुई कड़ियाँ हैं…

Skelly: तंत्रपुरम की!!

निमित्त(Thought: और मानव सभ्यता इस योग्य नहीं कि इतनी ख़तरनाक चीज़ उनके हाथ सौंपी जाए जिसकी वास्तविक शक्ति का उन्हें कोई अंदाज़ा नहीं। यह baboon के हाथ में nuclear bomb थमाने जैसा होगा। इसीलिए ये सभी seals मेरे साथ जा रही हैं (एक leather bag में seals भरता है)

अपने मतलब का सारा सामान समेट कर निमित्त वहाँ से निकलने को था जब अचानक उसके कदम ठिठक गए। वहाँ कुछ और भी थी…कोई बहुत intense energy उसे अपनी ओर खींच रही थी। सशंकित सा निमित्त एक कोने में पड़े पुआल के ढेर की तरफ़ बढ़ा। इस ढ़ेर में terracotta व धातु की टूटी-फूटी मूर्तियों के अवशेष थे जो किसी काम के नहीं थे। 

अल्फ़ा(alarmed): Wuff-wuff 

निमित्त: तूने भी feel किया अल्फ़ा? Sudden shift of energy. एकाएक वातावरण बहुत बोझिल हो गया है। 

अल्फ़ा का सिर सहमति में हिला। 

निमित्त: यहाँ कुछ तो है। 

निमित्त पुआल और टूटी-फूटी मूर्तियाँ हटाने लगा। अचानक उसका हाथ किसी चीज़ से टकराया। निमित्त की आँख की पुतलियाँ कटोरियों में उलट गयीं। उसके कानों में एक हृदयविदारक चीख गूंजी। किसी सोलह वर्षीय लड़की की हृदयविदारक चीख। 

***    

नियति: Wave check gone wrong! That’s a nasty sea freak out on the way. 

Glass house building के विशाल conference hall से island का दक्षिणी छोर, jetty और समुद्र साफ़ नज़र आ रहे थे। 

आसमान में गरजते लाल बादल अंगारों से सुर्ख़ थे जिन्हें सागर की उठती लहरें जैसे बुझाने की नाकाम कोशिश कर रही थीं। 

“KRACKK…DOOMMM”  

लहरों की इस हरकत ने बादलों का ग़ुस्सा और भड़का दिया। कौंधती बिजली और गरजते बादलों से आसमान थर्राया। 

लगातार तेज़ होती बारिश तेज़ होने लगी, जो कि तेज़ी से उस ओर बढ़ते भयानक समुद्री तूफ़ान का संकेत थी। रात का आसमान सुर्ख़ लाल हो चुका था। 

“KRACKK…DOOMMM”

Paddy: Whoa! That’s a big one. Straight up blasted outta Poseidon’s ass.  

नियति के साथ खड़ी paddy का शरीर उस घन गर्जना से सूखे पत्ते के समान काँपा।  नियति अपना चेहरा glass window के क़रीब लाई। वो बाहर घुमड़ते तूफ़ान को यूँ देख रही थी जैसे यह तूफ़ान उसे आंतरिक सुकून पहुँचा रहा हो। उसके होंठों पर एक हल्की मुस्कान खिली, जो उसकी आँखों में आयी चमक के साथ बढ़ रही थी। वो paddy की ओर घूमी 

नियति(mysteriously): Well, looks like we ain’t getting any more guests tonight.  

नियति hall में उपस्थित guests पर नज़र दौड़ाते हुए बोली। Paddy ने सहमति में सिर हिलाया। 

नियति ने hall में मौजूद guests का ध्यान आकर्षित करने के लिए अपने Yuzu Gin Spritz glass को swizzle stick से ठकठकाया। Guests आपस में बात करने में मशगूल थे। 

“KRACKKKKK…DOOOOOMMM”

एक बार फिर बाहर आसमान फट पड़ा। इस बार की गर्जना पिछली दो बार से कहीं तीव्र थी। पूरा glass house थर्राया जैसे भूकम्प आ गया हो। सभी guests चिहुंके और शांति छा गयी। 

नियति(Smirk): Excellent! Now I have your attention. 

नियति की नज़रें hall में मौजूद हर शख़्स को scan कर रही थीं। इस बार वाक़ई सबका ध्यान नियति पर था।  

नियति: जैसा कि आप सब जानते हैं, आज new year eve पर हम इस island पर…मेरे island पर एक बहुत ही ख़ास कारण से मौजूद हैं। आप में से ज़्यादातर लोग शायद मुझे जानते हैं….obviously जानते होंगे…I’m popular in page 3 circles…and even more obvious than that, आप सब मेरे New year event open invitation पर यहाँ आए हैं सो मेरे बारे में homework कर के आए होंगे। फिर भी, एक quick intro दे देती हूँ। मेरा नाम नियति राजदान है। मैं Philanthropist, Multi-billionaire business tycoon अशोक राजदान की granddaughter और उनके business empire की heiress हूँ। आज का ये new year event एक ख़ास मक़सद से रखा गया है…जिसके बारे में आपलोग already जानते हैं इसीलिए यहाँ मौजूद हैं, फिर भी, आगे बढ़ने से पहले मैं आप सब को एक कहानी सुनाना चाहूँगी। इस कहानी से आप लोगों को हमारे objective के बारे में clarity मिल जाएगी।    

Podium पर खड़ी नियति ने गेस्ट्स की तरफ़ नज़रें घुमाई। सभी का ध्यान उसपर था। उसने आगे कहना शुरू किया। 

नियति(Narrative): 

ये कहानी काफ़ी पुरानी है…रामायण से भी पहले की। सो कुछ details missing हैं। कहते हैं सतयुग के अंत और त्रेतायुग की शुरुआत के समय इंसानों से ज़्यादा शक्तिशाली प्रजातियाँ धरती पर इंसानों के साथ वास करती थीं। यक्ष, गंधर्व, किन्नर, देव, असुर, इच्छाधारी प्रजातियाँ, सबका अलग साम्राज्य था। इनमें से यक्ष और यक्षिणियाँ देवों और असुरों के समान शक्तिशाली और मानवों के समान बुद्धिमान व सहृदयी…compassionate थे। 

यह कहानी है एक ऐसी ही गुप्त यक्षिणी की। यह कहानी है सूत्रधारिणी नित्याक्षि की। कहते हैं नित्याक्षि के पास समय को पलट देने की शक्तियाँ थीं। Multi-dimensions, Space-time spirals and loops in memory, destiny, karma, rebirth identities, नित्याक्षि कुछ भी पलट सकती थी। यूँ समझ लीजिए कि प्राणी का जीवनकाल, घटनाक्रम, सबकुछ नित्याक्षि के लिए board पर लिखा text था जिसे वो कभी भी wipe कर के rewrite कर सकती थी।  

यह वो समय था जब धरती पर सभी प्रजातियाँ अपनी शक्तियों का विस्तार करने और आधिपत्य स्थापित करने में लगी हुई थीं। ऐसे में नित्याक्षि की शक्तियाँ किसी प्रजाति का भाग्य बदल सकती थीं, पूरी धरा का अस्तित्व पलट सकती थीं। नित्याक्षि जानती थी कि उसकी शक्तियाँ पाने के लिए हर प्रजाति अपना पूरा ज़ोर लगाएगी। वो ये भी जानती थी कि उसकी शक्तियाँ किसी एक प्रजाति के अधीन हुईं तो क्या होगा। नित्याक्षि ने खुद को और अपनी शक्तियों को संसार से छुपाने के लिए एक एकांत द्वीप पर आश्रय लिया। यहाँ ध्यान साधना में डूबी नित्याक्षि की शक्तियाँ पहले से भी अधिक बहुगुणित हो रही थीं। नित्याक्षि ज़्यादा समय तक खुद को संसार से बचाए ना रख सकी। एक-एक कर के संसार भर से हर प्रजाति के सर्वश्रेष्ठ योद्धाओं और महारथियों, योगी और तांत्रिकों का पदार्पण नित्याक्षि के द्वीप पर होने लगा। सभी नित्याक्षि को पाना चाहते थे, शुरुआत प्रणय निवेदन और विवाह प्रस्ताव से हुई। नित्याक्षि ने हर प्रस्ताव ठुकरा दिया। फिर अपनी शक्ति के दम्भ में चूर योद्धाओं में होड़ लगी बलपूर्वक नित्याक्षि को हासिल करने की। हर किसी को डर था कि नित्याक्षि किसी और को ना मिल जाए, सभी नित्याक्षि द्वारा निवेदन अस्वीकार किए जाने से अपमानित और कुपित थे। सबने मिल कर निर्णय लिया कि अगर नित्याक्षि किसी को स्वीकार नहीं करेगी तो उसके अस्तित्व को ही मिटा दिया जाएगा। जैसे उसने महायोद्धाओं को अपमानित किया है वैसे ही उसे उसके ही द्वीप पर निर्वस्त्र कर लज्जित किया जाएगा। हर योद्धा बारी-बारी बलपूर्वक उसे भोगेगा और फिर उसका वध कर दिया जाएगा। 

संसार के सर्वश्रेष्ठ योद्धाओं से उस अकेली की रक्षा करने वाला कोई ना था। 

कहते है उस रात जल प्रलय सा तूफ़ान आया। नित्याक्षि को अपमानित करने के लिए योद्धा उसके पीछे भाग रहे थे। नित्याक्षि ने वरुण देव से गुहार लगाई कि या तो उसकी अस्मिता की रक्षा करें अन्यथा सागर की उफनती लहरों को उसे लील जाने दें। 

नियति एक पल को ख़ामोश हुई। Hall में सन्नाटा पसरा हुआ था जैसे सबके दिल मुँह को आ रहे हों। उसने आगे कहा।  

नियति(Narrative):             

बहुत मुश्किल से नित्याक्षि सागर तट तक तो पहुँच गई लेकिन लहरें उसे अपना ग्रास बना पातीं उससे पहले ही योद्धाओं ने उसे पकड़ लिया। जाने कितने ही हाथ एक-साथ उसे निर्वस्त्र करने बढ़े। फिर मेघों ने घन गर्जना की, समुद्र की लहरें यूँ उठी कि आसमान ढँक गया। नित्याक्षि की ओर बढ़ा हर हाथ कट कर उसके कदमों में गिरा हुआ था। वरुण देव ने उसकी गुहार सुन ली थी। सागर की उफनती लहरों से बाहर निकला था वो महायोद्धा, इच्छाधारी नागों का राजा तक्षक। संसार का वो अकेला महायोद्धा था जो नित्याक्षि को प्राप्त करने की लालच में वहाँ ना आया था। 

तक्षक ने नित्याक्षि से पूछा कि वो अपने दोषियों को क्या दंड देना चाहती है? नित्याक्षि ने कहा कि जो हश्र वो उसका करना चाहते थे वही हश्र उन सबका होना चाहिए। संसार की हर प्रजाति के सर्वश्रेष्ठ महायोद्धा एक तरफ़ थे और अकेला तक्षक एक तरफ़। सारी रात तक्षक उन्हें चुन-चुन कर काटता रहा। अगले दिन जब तूफ़ान शांत हुआ और सूर्योदय हुआ तो द्वीप के चारों ओर ऊँचे नश्तरों की चारदीवारी खड़ी थी, हर नश्तर पर महायोद्धाओं के शव ध्वजा की तरह लहराए हुए थे। ये तक्षक की चेतावनी थी पूरे संसार को कि यदि किसी ने भी उस ओर अपनी कुदृष्टि डाली तो उसका क्या हश्र होगा। 

उस एक रात ने नित्याक्षि के अस्तित्व को पूर्णतः बदल दिया। जो समय धाराओं को बदल सकती थी उसके अस्तित्व को समय ने बदल दिया। उस रात ने उसे ईर्ष्या, द्वेष, घृणा, अत्याचार, अपमान और लालच का बोध कराया…और एहसास कराया प्रेम का। 

तक्षक से सिर्फ़ संसार के सर्वश्रेष्ठ महायोद्धा नहीं हारे थे, उसपर नित्याक्षि अपना हृदय हार चुकी थी। पर वो जानती थी कि इस प्रेम का कोई भविष्य नहीं है। तक्षक पहले ही सर्वश्रेष्ठ था, अगर नित्याक्षि उसे मिल जाती तो वो अविजयी हो जाता, ब्रह्मांड में शक्ति का संतुलन बिगड़ जाता। वो ब्रह्मांड संहिता के नियमों में बंधी थी जिनका उल्लंघन वो नहीं कर सकती थी। उसने तक्षक से कहा कि वो नित्याक्षि के अतिरिक्त उससे वरदान में कुछ भी माँग ले। पर माँगना तक्षक ने सीखा नहीं था। उसे सिर्फ़ देना आता था। उसने नित्याक्षि को वचन दिया कि इस सृष्टि के अंत तक, संसार और समय धाराओं की परिधि के अंतिम छोर तक, जब भी नित्याक्षि संकट में होगी और उसे सहायता के लिए पुकारेगी वो आएगा। नित्याक्षि स्तब्ध थी, उस क्षण उसे एहसास हुआ कि प्रेम के जो भाव उसके अंदर अंकुरित हुए हैं वो अकेले उसके नहीं हैं। नित्याक्षि का हृदय द्रवित हो गया, उसने तक्षक को वरदान दिया कि तक्षक पर उसके शत्रु कभी विजय ना पा सकेंगे। वो हर बार अपनी चिता की अग्नि से पहले से अधिक प्रलयकारी बन कर पुनर्जन्म लेगा। 

नित्याक्षि और तक्षक सागर के दो छोरों के समान हैं जो समय धाराओं पर समानांतर बह रहे हैं, एक हो कर भी एक नहीं और नहीं हो कर भी सदैव एक हैं। 

नियति चुप हुई, hall में कुछ गेस्ट्स की साँसें तेज़ चल रही थीं, कुछ की आँखें नम थीं। उसने अपनी Gin sip की और आगे बोली। 

नियति(Smirk): ये तो हो गई backstory, अब आते हैं main storyline पर। आज हम यहाँ जिस island पर मौजूद हैं ये वही island है जो कभी नित्याक्षि का घर था। 

Hall में मौजूद सभी guests में फुसफुसाहट शुरू हो गयी।

नियति: Don’t get your hopes high…यहाँ हमें real, living-breathing नित्याक्षि नहीं मिलने वाली, पर कुछ और मिल सकता है। (Pause)

कहते हैं कि इस island पर कहीं एक मूर्ति छुपी हुई है जो actually एक cosmic-key है जो multi-dimensonal portals, timelines खोल सकती है…same like  नित्याक्षि। इस new year event का objective था पूरे island पर उस मूर्ति को ढूँढना। पर बाहर आया तूफ़ान देख कर लगता है कि destiny…या शायद नित्याक्षि नहीं चाहती कि हम उस मूर्ति को ढूँढें। पर हम हार नहीं मानने वाले, ये तूफ़ान भी हमें रोक नहीं सकता…what do you say guys!!

Guests: Yesss!!!

नित्याक्षि: Cool! अब time है intro का, मुझे नहीं लगता कि इस भयंकर तूफ़ान में कोई और guest आने वाला है।       

“KRACKKKKK…DOOOOOMMM”

आसमान में इतनी ज़ोर की बिजली कड़की कि पूरा वातावरण एक पल को यूँ रौशनी में नहा गया जैसे सूर्य धरा पर उतर आया हो। सबकी आँखें चुंधिया गयीं। 

जब उनकी आँखें देखने योग्य हुईं तो hall entrance पर उन्हें एक शख़्स खड़ा नज़र आया जो बिजली कौंधने से पहले वहाँ ना था। तन कर खड़ा वो शख़्स ऐसी vibes carry कर रहा था जैसे पूरा संसार उसका साम्राज्य हो और वो संसार का राजा। उसके साथ एक काला german shepherd था। 

Guests में से कोई चिल्लाया,

निमित्त कालांत्री! ये तो निमित्त कालांत्री है!!

See you tomorrow…      

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3 Comments

  1. लंबे इंतजार के बाद निमित से मुलाकात हो ही गई क्या एंट्री मारी है मुन्नी के साथ vaaranshi की झलक भी देखी और नाना के हाथ का बने जेम के लिए अंधा प्यार भी स्टोरी की शुरुआत बहुत धमाकेदार हुई है मंथरा जैसे लोगों को तो जीने का अधिकार ही नहीं है पर तक्षक और नित्याशी की कहानी बहुत अलग लगी आगे बेसब्री से इंतजार रहेगा रहस्यमयी नाम और वैसी ही कहानी बहुत बेहतरीन ❤️❤️

  2. Every time I open your blog, a new thrill unfolds in the form of your story. Nimit’s entry even surpasses Rajinikanth’s! Hmmm, why wouldn’t it? He has skelly with him 🤭🤭

  3. Waaaahhhh kya entry kiye nimit kalantri.. or yeh mantra kitna dark character hai baba re aaj tak nhi pdha kitna ganda hai yeh..jb dekho hehehe… nimit se mukalat karva do jldi iski sari hnsi gayab ho jaygi fer..😬😬
    bahut lambe intezaar ke baad aaya yeh part lkin worth it.👏👏👏 Waiting for next part .😇

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