KAAMA & KARMA


रति-‘जिन एंड टॉनिक. रिपीट.’ रति अपनी आवाज़ शोर से ऊँची रखने की भरसक कोशिश करते हुए बोली. बार्टेंडर ने सर हिलाया और रति को ड्रिंक सर्व करने लगा.


उस रात नाइट क्लब में भीड़ काफ़ी ज़्यादा थी. रति ने एक नज़र डान्स फ़्लोर की तरफ़ डाली. किसी बेसुरे से, तेज़ बेस और बीट्स और बेतुके बोल वाले पंजाबी नम्बर पर कपल्स मदहोश हुए एक-दूसरे की बाहों में थिरक रहे थे.


रति-‘मुंबई नाइट क्लब्स में भी अब ये सरदर्द झेलना पड़ता है!’ एक डिस्गस्टेड लुक उसने डान्स फ़्लोर पर डाली और वापस अपनी ड्रिंक की तरफ़ मुड़ गयी. 


अगर नाइट क्लब्स के आधार पर देखा जाए तो मुंबई की नाइट लाइफ़ काफ़ी क्लिशे` है. बॉलीवुड फ़िल्मों के हाइपोथेटिकल, अनरियलिस्टिक पॉर्ट्रेयल से परे ज़्यादातर नाइट क्लब्स में जो लोग आते हैं वो रिपीटेड कैरीकैचर्स जैसे प्रतीत होते हैं. पब्लिक डिस्प्ले ऑफ़ अफ़ेक्शन के नाम पर एक-दूसरे से गोंद की तरह चिपके रहने वाले कपल्स, जो जल्द ही ब्रेक-अप एंड मूव ऑन कर के किसी और की गोंद और गोद से चिपके नज़र आते हैं. बाप के पैसे या डर्टी मनी वाले नॉक्टर्नल पार्टी ऐनिमल गैंग जिनको सिर्फ़ ड्रग्स और सेक्स चाहिए. मिडिल एज्ड वर्किंग प्रोफ़ेशनल्स या बिज़्नेसमैन, ये ग्रुप्स में चलते हैं. इन्हें भी सेक्स चाहिए, अपनी नीरस, मोनॉटॉनस ज़िंदगी और बदरंग मैरीड लाइफ़ के खूँटे से रस्सी तुड़ाए ये साँड़, जहां सींग समा जाए के फ़लसफ़े पर चलते हुए नाइट क्लब में आने वाली हर लड़की पर डाएरेक्ट-इनडाएरेक्ट चांस मारते हैं. इसके अलावा एक विरली प्रजाति दिल टूटे आशिक़ों की है जो यहाँ ग़म ग़लत करने आते हैं. खुद किनारे पर बैठे, दूसरों को ज़िंदगी की मौजों में गोते लगाते देखते हैं. 


आज रति इसी विरली प्रजाति का हिस्सा थी. इसके अलावा वो कुछ और भी थी. एक ओपन एंड ईज़ी टार्गेट! नाइट क्लब्स में लड़कियाँ हमेशा ग्रुप में नज़र आती हैं या फिर अपने मेल फ़्रेंड्ज़/बॉयफ़्रेंड के साथ. अकेली लड़की नाइट क्लब जैसी जगह पर नहीं पायी जाती इसलिए उसे देखते ही हाई-प्रोफ़ाईल हुकर या एस्कॉर्ट मान लेने का रिवाज है. लड़की क्लब में अकेली है मतलब अवेलेबल है और अपने समय और जिस्म की सही क़ीमत लगाने वाले के साथ जाएगी.  


पूरे क्लब में नज़र फिराने पर रति को ये सारे कैरीकैचर्स नज़र आ रहे थे. ऐसा लग रहा था जैसे उसे रात सिर्फ़ वो ही वहाँ अकेली थी बाक़ी हर कोई किसी ना किसी के साथ था. गाने से ज़्यादा इरिटेशन रति को शायद इस बात से हो रही थी. मिलिंद को अपने ज़हन से लाख कोशिशों के बाद भी ना निकाल पाने का दर्द उसके लिए जिस्म में धंसी उस फाँस की तरह हो चुका था जो इतनी महीन होती है कि सुई से भी नहीं निकलती, बस हर पल अपने होने के दर्द का एहसास कराती है और उसका ज़हर फैल कर ज़ख़्म पका देता है. 


मिलिंद की यादों के ज़ख़्म पक रहे थे, बस फाँस थी जो निकलने का नाम नहीं ले रही थी. इश्क़ सच्चा ना हो, काबिल ना हो, तो उसके टूटने पर दर्द होता है लेकिन इश्क़ सच्चा हो, काबिल हो, कोई इंसान जो सिर्फ़ और सिर्फ़ आपके लिए बना हो, जैसे वो आपकी अंतरात्मा, आपके वजूद का हिस्सा हो वो किसी और को मिल जाए तो मौत से भी बढ़ कर जिस वेदना का एहसास होता है वो ना जीने देता है ना मरने देता है.


मिलिंद के साथ बिताए उसकी ज़िंदगी के सबसे हसीन और खूबसूरत पल उसकी सबसे बदसूरत और दर्दनाक यादों का रूप लेकर रति का जीना दूभर कर रहे थे. ऐसा लग रहा था जैसे उसका पूरा अस्तित्व इन दर्दनाक यादों से भर गया है जिन्हें निकालने पर सिर्फ़ और सिर्फ़ शून्य और अंधकार शेष है बाक़ी कुछ नहीं. ना कोई अस्तित्व है, ना एहसास, ना आधार. यह किसी बुरे सपने में ऊँचाई से अंधकार में गिरने जैसा है जिसकी गहराई अनंत है. पल-पल सिर्फ़ अपने समूचे अस्तित्व को उस अंधकार रूपी अजगर द्वारा लीले जाने का एहसास असहनीय है. इस अंधकार में डूबने से बेहतर नशे में डूबना है. लेकिन वो क्या करे कि नशे के इस तरन्नुम में भी मिलिंद का मुस्कुराता चेहरा ही तैर रहा था.


‘एक्स्क्यूज़ मी, कैन आइ बाई यू ए ड्रिंक?’


वो आवाज़ रति को यूँ महसूस हुई जैसे झील की शांत, स्थिर सतह में तब्दील हो गए अपने जाम के ग्लास में बनते मिलिंद के अक्स में डूबी हुई थी और पीछे से किसी ने कंकर मार कर पर एक तीखी लहर पैदा कर दी हो. पीछे से आयी आवाज़ पर रति पलटी. नॉक्टर्नल पार्टी एनिमल्स के झुंड से निकला एक बिगड़े रईसज़ादे का कैरिकेचर सरीखा लड़का हाथ में बीयर, चेहरे पर झूठी मुस्कान और आँखों में ‘नयनों से निर्वस्त्र’ करने के भाव लिए खड़ा था और बैकग्राउंड में बजते बेसुरे गाने में ज़बरदस्ती ठूँसी हर बीट पर उसका सर बॉबल हेड टॉय की तरह डोल रहा था.


‘फक ऑफ़!’ कहते हुए रति ने अपनी मिडल फ़िंगर लड़के की तरफ़ लहराई और वापस काउंटर की तरफ़ मुड़ गयी. 


उस लड़के का झुंड, जो कि दूर खड़ा हुआ था और उसकी यह भारी बेइज़्ज़ती होते देख रहा था, उसके ठहाकों की आवाज़ ने लड़के के फ़्रेज़ाइल मेल ईगो पर रति के ‘फक ऑफ़’ के साथ मिल कर एक करारा प्रहार किया जिसे झेल पाना उसके बूते के बाहर था. लड़के के चेहरे पर चिपकी फ़ेक प्लास्टिक स्माइल फ़ौरन इवैपरेट हो गयी. 


‘आइ वाज़ जस्ट बीइंग पोलाइट यू कंट!.’


साँप सा फुफकारता हुआ वो लड़का रति की तरफ़ बढ़ा. ऐसी किसी भी सिचूएशन को हैंडल करने के लिए बार्टेंडर और क्लब में मौजूद बाउन्सर्स पूरी तरह तैयार रहते हैं. लड़के के आगे बढ़ते ही बार्टेंडर ने अपने हाथ से उसे रुकने का इशारा करते हुए कहा.


बार्टेंडर-‘काम डाउन सर! अदरवाइज़, यू’ल हैव टू लीव.’
रति पलटी, उसकी मुट्ठी बंधी हुई थी और वो उस लड़के के चेहरे पर पंच जड़ने के लिए पूरी तरह तैयार थी. लड़के ने देखा कि दो बाउन्सर उसी तरफ़ बढ़ रहे हैं. लड़के ने फिर से बार्टेंडर की ओर देखा. उसके फेशियल एक्स्प्रेशन बिल्कुल फ़र्म थे. लड़के की और बार्टेंडर की नज़रें मिलीं, दोनों एक-दूसरे को दो पल बिना पलक झपकाए घूरते रहे.


‘देख लूँगा तुम सब को सालों. सब की लाइन से नंगा परेड ना कराई तो मेरा नाम रौनक़ नहीं.’
रति-‘आगे बढ़ कर दिखा साले! तेरी आँखें निकाल कर तेरे वहाँ फ़िट कर दूँगी जहां सिर्फ़ अंधेरा दिखायी देगा!’ रति का पूरा जिस्म ग़ुस्से से सूखे पत्ते की तरह काँप रहा था. उस पर फ़िट ऑफ़ रेज इस कदर हावी था कि वो वाक़ई उस पल किसी का खून भी कर सकती थी. रति का रौद्र रूप और बार्टेंडर के इशारे पर आते बाउन्सर्स को देख कर लड़के ने पीछे हटने में ही भलाई समझी.


‘यू’ल पे फ़ॉर दिस!’
अपने चोट खाए मेल ईगो के जैसी ही खोखली धमकी देता हुआ वो लड़का वापस पलटा और अपने झुंड की तरफ़ बढ़ गया.


रति-‘रॉट इन हेल मदरफकर!’  
रति ने अपने सर को झटका दिया. उसके खुले हुए लम्बे बाल दोनों तरफ़ से उसके चेहरे पर आ गए, कुछ अधखुले होंठों में उलझे तो कुछ बेख़याली में आँखों से बहे आंसुओं के साथ फैले मैस्कारा की गिरफ़्त में आते हुए उसके सुर्ख़ गालों पर ठहर गए. 


हाथों से बिखरी हुई ज़िंदगी सँवरे ना सँवरे, बिखरे हुए बालों को ज़रूर सँवार लेना चाहिए वरना दुनिया चेहरे से दिल का दर्द देख कर मज़ा लिया करती है. रति ने अपने चेहरे पर बिखरे बालों को पीछे कर के मुट्ठी में पकड़ा और दूसरे हाथ से उन्हें बैंड की गिरफ़्त में कसने लगी. ऐसा करते हुए उसकी नज़रों के कोने अचानक बार काउंटर की बग़ल सीट की तरफ़ स्थिर हुए, सीट पर एक शख़्स सीधा तन कर बैठा था. उसका चेहरा सामने की ओर था लेकिन नज़रों के कोने हाथ उठा कर बाल बांधती रति के उस शाम ही शेव किए हुए आर्मपिट पर टिके हुए थे. 


दोनों की नज़रों के कोने एक-दूसरे से टकराए, उस शख़्स के पहले से ही सपाट चेहरे के हाव-भाव या उसके अजीब बॉडी पॉस्चर में कोई परिवर्तन ना आया, सिर्फ़ उसकी नज़रें किसी स्लो-मोशन कैमरे की तरह पैन होती हुईं अपने सामने रखे बियर पिचर पर स्थिर हो गयीं. ये चेहरा जाना पहचान लग रहा था. क्या ये मिलिंद था?


नहीं! ये मिलिंद नहीं हो सकता. मिलिंद होता तो अब तक उस रईसज़ादे को हॉस्पिटल पहुँचाने की हद तक पीट चुका होता. इतना बड़ा बखेड़ा खड़ा कर चुका होता कि पुलिस भी आ जाती तो बड़ी बात नहीं थी. फिर अपने स्टेट्स की धौंस दिखा कर मिलिंद पुलिस वालों को भी यूँ चलता कर देता जैसे कोई मालिक अपने शिकारी कुत्तों को वापस जाने का आदेश देता है. मिलिंद के साथ जितना सेफ़, जितनी सिक्योर रति खुद को फ़ील करती थी उतना उसने कभी किसी के साथ नहीं किया. 


मिलिंद जैसे उसके जीवन का आधार स्तम्भ था और उस आधार स्तम्भ के हटते ही रति यूँ लड़खड़ाई कि कभी संभल ना पाई. मिलिंद के आधार और स्थायित्व के रिक्त स्थान को अनजानी बाहों और जिस्मों से भरने की कोशिश करती हुई जाने कितनों के बिस्तर से गुजरी पर वो मिलिंद नहीं थे. उसके आत्मा के दर्द को समझने का झूठा दिखावा करते, उसके जिस्म को भोगते हर शख़्स के चेहरे में वो मिलिंद तलाश रही थी, पर कोई भी मिलिंद ना था!  


मिलिंद सा दिखाई देता वो शख़्स जो उसके बग़ल की टेबल पर बैठा था, शायद वो भी मिलिंद नहीं था. वो भी शायद मिलिंद का मुखौटा लगाए कोई बहरूपिया था जो अपने बिस्तर की गर्माहट आज रति को बनाना चाहता था. 


रति-‘क्रीप!’ रति अपने मन में ही बुदबुदायी. 
बाल पोनीटेल में बांधते हुए रति बार्टेंडर की तरफ़ पलटी, इससे पहले कि वो बार्टेंडर को अपना ड्रिंक रिपीट करने को कहती, बार्टेंडर ने उसकी तरफ़ जिन एंड टॉनिक का रिपीट शॉट बढ़ाते हुए कहा.
बार्टेंडर-‘दिस वन इज़ ऑन द हाउस मै’म. वी आर एक्स्ट्रीम्ली सॉरी फ़ॉर द इनकन्वीन्यन्स.’ 


रति-‘थैंक्स. अप्रीशीएट दैट.’ रति ने बार्टेंडर की मुस्कान का जवाब मुस्कुराहट से देते हुए ड्रिंक ऐक्सेप्ट किया.
रति अपनी ड्रिंकिंग कपैसिटी से काफ़ी अधिक रिपीट शॉट्स ले चुकी थी. इस आख़री शॉट ने उसे एहसास कराया कि दिल टूटने से हुई दुश्वारियों को दूर करने के तरीक़े अगर कारगर ना हों तो खुद दुश्वारी बन जाते हैं. 


उसने बिल पे करने के लिए अपना कार्ड बार्टेंडर को दिया. उसकी नज़रें एक बार फिर अनायास ही बग़ल की सीट की तरफ़ उठ गयीं. सीट पर बैठा शख़्स बुत की तरह सीधा बैठा हुआ था, उसका चेहरा भावविहीन था और फ़िलहाल वो नज़रों के कोनों से रति को ताड़ भी नहीं रहा था. उसके बस वहाँ उस अजीब तरह से बैठे होने, और बार-बार मिलिंद सा नज़र आने भर से ही रति को झुँझलाहट हो रही थी. वैसे भी उस रात हर चीज़ से ही रति को एक अजीब सी चिढ़ मची हुई थी.


रति-‘तू क्यों यहाँ मतवालों की भीड़ में ज़ेन बना बैठा है? समाधि लगनी है तो पहाड़ों पर चला जा! और शिकार पकड़ने बैठा है तो किसी और पर ट्राई कर…यू ब्लडी लूज़र!’ जब तक रति को एहसास होता कि वो नहीं उसके ‘एक्स्ट्रा रिपीट शॉट्स’ बोल रहे हैं और वो अपना मुँह बंद करती, ये पूरा वाक्य उसके मुँह से निकल चुका था. 


रति को लगा कि वो शख़्स या तो रति के साथ बहस करेगा या फिर गाली-गलौज, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. उस शख़्स ने अपनी बियर के पैसे अपने ब्राउन लेदर जैकेट की जेब से निकाल कर बार काउंटर पर रखे और बिना रति की तरफ़ देखे या उससे कुछ कहे, वहाँ से उठ कर एग्ज़िट गेट की तरफ़ चला गया. रति ने देखा कि उस शख़्स ने अपने सामने रखे बियर पिचर को छुआ तक नहीं था.
रति-‘फकिंग वियर्डो!’ रति अपने आप में बड़बड़ायी. तब तक बार्टेंडर ने उसका कार्ड और चेक स्लिप उसे वापस किया. बार्टेंडर को टिप देकर रति भी वहाँ से बाहर जाने के लिए निकल गयी. 


इस स्थिति में गाड़ी ड्राइव कर के घर तक पहुँचना उसे उतना ही असम्भव लग रहा था जितना उसकी ज़िंदगी में मिलिंद का वापस आना था. दोनों ही केसेस में रति के पास कोई चॉईस नहीं थी. रति वो रात नाइट क्लब के बाहर अपनी गाड़ी में पास आउट हो कर नहीं बिता सकती थी. शी डिसायडेड टू टेक हर चैन्सेज़, गाड़ी चलाते हुए या तो वो घर पहुँचेगी, या फिर हॉस्पिटल या पुलिस स्टेशन. हालाँकि, उसकी पूरी कोशिश बाद के दोनों ऑप्शंस को अवॉइड करने की होगी.


अपने दिमाग़ के क़ाबू से बाहर होती विचार तंत्रा और डगमगाते कदमों को किसी तरह सम्भालते हुए रति पार्किंग लॉट में आयी. अपने कदम अब उसे ज़मीन पर नहीं, हवा में पड़ते महसूस हो रहे थे. नाइट क्लब के एग्ज़िट गेट से पार्किंग में खड़ी अपनी कार तक वो कैसे पहुँची उसे समझ नहीं आ रहा था. बस उस घड़ी वो चाहती थी कि उस पार्किंग लॉट से अपने घर तक भी वो इसी करिश्माई अन्दाज़ में पहुँच जाए. फ़िलहाल तो कार अन्लॉक करने के लिए चाभी को धुंधले नज़र आ रहे तीन की-होल्स में से वास्तविक की-होल में डालना भी एक जंग के समान था. काँपते हाथों से झुँझलाहट भरी असफल कोशिश करते हुए उँगलियों से की-रिंग का साथ कब छूट गया रति को पता ना चला.


नीचे ज़मीन पर गिरी की-रिंग रति को इतनी दूर नज़र आ रही थी जैसे उसकी टांगें किसी बिल्डिंग के फ़र्स्ट फ़्लोर जितनी ऊँची हो गयी हों. रति ने की-रिंग उठाने के लिए नीचे झुकने की कोशिश की और उसे ऐसा लगा जैसे वो आसमान में किसी प्लेन से नीचे स्काई डाइविंग कर रही है. वो नीचे गिर रही थी, फिर उसे किसी के द्वारा बाहों में थामे जाने का एहसास हुआ. एक स्ट्रॉंग मस्क फ़्रैगरेन्स उसके नथुनों से टकराई. जैसे अत्यधिक नींद और थकान से बोझिल हुई आँखों के सामने सब धुंधला होता है वैसे ही रति को भी अपनी नज़रों के सामने सब कुछ धुंधला नज़र आ रहा था. सही तरीक़े से देखने के लिए उसने अपनी आँखें सिकोड़ कर मिचमिचाई. 


रति-‘त…तुम..’ रति के अल्फ़ाज़ बहुत मुश्किल से ज़ुबान से बाहर निकले और उसे अपने ही कानों में कहीं बहुत दूर से आते सुनाई दिए. क्लब में जो ब्राउन जैकेट वाला शख़्स रति के बग़ल में बैठा था उसने ही रति को अपनी दाहिनी बाँह के सहारे थामा हुआ था और नीचे झुक कर बायें हाथ से ज़मीन पर पड़ी की-रिंग उठा रहा था. रति के शरीर ने डर से झुरझुरी ली.


‘ए…क्या कर रहा है तू?’ रति के कानों में कहीं दूर से आती एक दूसरी आवाज़ पड़ी. रति ने बहुत मुश्किल से अपनी गर्दन आवाज़ की दिशा में घुमाई. उसे बाहों में थामे हुए ब्राउन जैकेट वाला भी उस ओर ही देख रहा था.


अंदर क्लब में रति की जिस रईसज़ादे से झड़प हुई थी वो अपने झुंड के साथ उनके सामने खड़ा था. उसके हाथ में एक स्विस आर्मी नाइफ़ थी जिसे वो उँगलियों के बीच फ़्लिप कर रहा था. ब्राउन जैकेट वाले शख़्स ने कोई जवाब ना दिया. की-रिंग उठा कर उसने रति को अपनी दोनों बाहों में यूँ थाम लिया जैसे वो कोई नवजात शिशु हो. उसने आहिस्ता से रति की गाड़ी अन्लॉक की. 


‘सुनाई कम देता है क्या? मुफ़्त की मलाई चाटने के चक्कर में जान गँवाएगा.’ कहते हुए रईसज़ादा आगे बढ़ा. उसके साथ उसका झुंड भी आगे बढ़ा. 


ब्राउन जैकेट वाले के चेहरे पर कोई शिकन या एक्स्प्रेशन नहीं आया. उसने निर्विकार भाव से अपनी डेनिम पैंट में पीछे खोंसी हुई रिवॉल्वर निकाल कर उनकी तरफ़ तान दी. झुंड यूँ वहाँ से तितर-बितर हुआ जैसे सड़क पर जमा कुत्तों के झुंड के बीच किसी ने जलता पटाका फेंक दिया हो. रति के नशे में डूबते दिमाग़ को डर और ख़तरे का एहसास हुआ. वो चीखना चाहती थी, शायद उसकी आवाज़ सुन कर कोई मदद को आ जाए लेकिन उसका दिल-दिमाग़ फ़िलहाल किसी नौसीखिए तैराक जैसा था जो तूफ़ान से उफनती समुद्र की लहरों में फँस गया हो और उनसे निकलने के लिए बेतहाशा हाथ-पैर मार रहा हो.


ब्राउन जैकेट वाले शख़्स ने रति के चेहरे पर एक बार फिर से बिखर आए उसके बालों को अपनी उँगलियों से रति के कानों के पीछे कर दिया. उसकी उँगलियों का स्पर्श ठंडा लेकिन मुलायम था. रति ने अपना चेहरा झटक कर उसका हाथ खुद से दूर करने की कोशिश की. रति के जिस्म में खुद को उसकी बाहों से छुड़ाने की हरकत हुई. वो अब तक उसकी कार का दरवाज़ा खोल चुका था. रति के कसमसाते जिस्म को उसने आहिस्ता से पैसेंजर सीट पर टिका कर सीट बेल्ट कस दी और खुद ड्राइविंग सीट पर सवार हो गया. 


‘आँखें बंद मत करना. ट्राई टू बी अवेक.’ उसकी आवाज़ गहरी थी, शांत और गहरी. बिल्कुल मिलिंद के जैसी.


‘फ़क यह्ह…’ रति को खुद अपनी आवाज़ में स्लर महसूस हुआ. उसके मुँह से शब्द साफ़ नहीं निकल रहे थे.


रति ने इसके बाद उसे कोई जवाब ना दिया. उसे अपनी इस सिचूएशन, अपनी वलनेरबिलिटी पर और उसके लिए ज़िम्मेदार खुद पर बहुत ग़ुस्सा आ रहा था. जाने वो किस साइको के चंगुल में फँस गयी थी. जाने वो साइको उसके साथ क्या करने वाला था. अपने आप को बचाने में वो फ़िलहाल असमर्थ थी. पता नहीं कहाँ ले जा रहा था वो उसे? पता नहीं क्या करने वाला था वो उसके साथ? रति का दिमाग़ अंधेरे में डूबने लगा. अचानक उसके दाहिने गाल पर हल्की तड़ी पड़ी.
‘जागती रहो!’


रति ने भी प्रत्युत्तर में उसे मारने की कोशिश की. साइको ने कोई प्रतिवाद ना किया. रति का हाथ उसके गाल से टकराया, रति के शरीर में दर्द की झनझनाहट दौड़ गयी. ऐसा लगा जैसे उसने किसी पत्थर पर अपना हाथ दे मारा हो. रति जानती थी कि वो बहुत बड़ी मुसीबत में फँस गयी थी जिससे निकलने का फ़िलहाल उसे कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा था. नशे, नींद और थकान से बोझिल उसकी पलकें अब खुलने से इनकार कर रही थीं. रति ने अपना चेहरा विंड स्क्रीन से टिका लिया. फ़्लाई ओवर पर तेज रफ़्तार भागती गाड़ी से गुजरती इमारतों की रात के अंधकार में जगमगाती रौशनियाँ, पिघलते जुगनुओं सी प्रतीत हो रही थीं. रंग-बिरंगे पिघलते जुगनू, जो रात्रि अंधकार में प्रणय नृत्य करते हुए एक हो रहे थे. 


रति टैक्सी की बैकसीट पर थी. मिलिंद की विशाल बाहों में सर टिकाए हुए उसने हेडरेस्ट से टैक्सी की पिछली विंडशील्ड से बाहर देखा. रात के आसमान में सजे तारों के समान उनके सर के ऊपर रंग-बिरंगी, जलती-बुझती लाइट्स का सघन जाल था जो उनकी टैक्सी के साथ-साथ चल रहा था. नवरात्रि चल रही थी. वो शायद षष्ठी या सप्तमी थी. पूरा शहर दुल्हन की तरह सजा नज़र आ रहा था. रति खुद को भी किसी नयी दुल्हन के समान महसूस कर रही थी. लजाई हुई किंतु कौतूहल और उत्साह से भरी हुई. माँ दुर्गा ने शायद मिलिंद को रति के जीवन में उन रंग-बिरंगी रौशनियों का एहसास कराने के लिए ही भेजा था जो उससे पहले कभी थे ही नहीं. 


जाने कितनी देर मिलिंद की बाहों से झूलती हुई रति उस रंग-बिरंगे मेले में घूमती रही थी. उसके कानों में पड़ते ढोल और नवरात्रि के गीत कितना मधुर स्वर घोल रहे थे, जब उसके पाँव यूँ ही फिरते-फिरते थकने लगे तब अपनी गाड़ी में सवार होने के बजाए मिलिंद ने ज़बरदस्ती ये टैक्सी कर ली थी. 


मिलिंद- ‘अपनी कार में ये अनुभव जीने का कोई मज़ा नहीं रति. इस उत्सव के रंगों और रौशनियों को अपने रोम-रोम में महसूस करना चाहती हो तो अंजान टैक्सी के अंजान पैसेंजर बन कर भीड़ और उल्लास से भरी राहों से गुज़रो.’


मिलिंद ने रति को अपने और क़रीब, अपनी बाहों में कस लिया. टैक्सी में काफ़ी अंधेरा था फिर भी बाहर से आती रंग-बिरंगी रौशनियों की झिलमिलाहट में टैक्सी ड्राइवर बार-बार नज़रें चुरा कर रीयर व्यू मिरर से बैकसीट की तरफ़ देखने की कोशिश कर रहा था. उसकी इस हरकत पर रति और मिलिंद के होंठों पर झुँझलाहट के बजाए खिलखिलाहट आ गयी. 


मिलिंद-‘टैक्सी में रेडियो है क्या?’ मिलिंद ने ड्राइवर से सवाल किया.


ड्राइवर-‘रेडियो क्यों सा’ब, अक्खा म्यूज़िक सिस्टम है.’ ड्राइवर ने हड़बड़ा कर नज़रें रीयर व्यू मिरर से हटा कर सामने की तरफ़ करते हुए जवाब दिया.


रति- ‘तो चला दो ना भईयाsss.’रति के भईया बोलने के अन्दाज़ में शरारत साफ़ छुपी थी. मिलिंद ने अंधेरे का फ़ायदा उठाते हुए रति की दायीं अंदरूनी जाँघ पर हल्की सी चींटी काटी. ड्राइवर ने म्यूज़िक चला दिया.


‘तू किसी रेल सी गुजरती है…मैं किसी पुल सा धड़धड़ाता हूँ, किसी लम्बे सफ़र की राहों में…तुझे अलाव सा जगाता हूँ…’ 


उस टैक्सी राइड से पहले, और उसके बाद मिलिंद के साथ की उसकी आख़री टैक्सी राइड तक, हर बार संयोग कुछ यूँ रहा कि टैक्सी में बजने वाले गाने अक्सर रति और मिलिंद को अपनी ज़िंदगी और प्रेम कहानी बयान करते प्रतीत होते थे. अंधेरे और जगमगाहट की आँख मिचौली के बीच, ड्राइवर की चोर नज़रों से बेपरवाह रति ने मिलिंद के होंठों पर अपने होंठ रख दिए. उनका प्रणय रंग और रौशनियों के चरमोत्कर्ष पर पहुँच कर अंधकार में लीन हो रहा था, रति के दिमाग़ की तरह ही.


गाड़ी का दरवाज़ा खुला, दो बाहों ने सीटबेल्ट खोलते हुए रति को सहारा दिया. क्या वो मिलिंद था? या मिलिंद जैसा ही कोई और? रति की काँपती उँगलियों ने उसका चेहरा स्पर्श करने की कोशिश की. वो चेहरा जैसे बहुत दूर था, और जान कर भी अंजाना! गाड़ी रुक चुकी थी और इमारतों की रौशनियों में अब रंग नहीं घुले हुए थे.


रात का अंधकार और इमारतों की वो रौशनियाँ अब लक्षद्वीप के बंगाराम तट पर आपस में दौड़ लगाते समुद्र की उन लहरों के ख़रगोशों में तब्दील हो गयी थीं जिन पर शीतल सफ़ेद चाँदनी पड़ने पर उनसे रंग-बिरंगी, चमकीली रौशनियाँ उत्पन्न होती हैं. मिलिंद के साथ बंगाराम तट पर बितायी वो रात, उस रात निकला वो पूरा चाँद और उसके पहलू में बिखरे अनंत सितारे रति को एहसास करा रहे थे कि पूरी कायनात उसके और मिलिंद के प्रेम मिलन की साक्षी है. मिलिंद का हाथ अपने हाथों में लिए रति गीली रेत पर चल रही थी. लहरों के वो रंग-बिरंगे ख़रगोश दूर सागर की गोद में बनी अपनी किसी खोह से निकल कर दौड़ लगाते हुए आते और उनके पैरों पर से फुदकते हुए वापस सागर को लौट जाते. आने वाले कल की रति को कोई परवाह नहीं थी, उसके लिए ज़िंदगी सिर्फ़ उतने पल की थी जितने पल मिलिंद उसके साथ था. 


रति-‘सुनो! मुझे कभी छोड़ कर तो नहीं जाओगे ना?….मुझे पता है तुम नहीं जाओगे!.’


मिलिंद-‘मैडम, इन रंग-बिरंगी लहरों को देखिए, उमड़ते सागर को देखिए, आसमान में जगमगाते तारों को और सफ़ेद चाँदनी से झिलमिलाते चाँद को देखिए! इतने रूमानी-ए-रोमैंटिक माहौल में छोड़ कर जाने की बातें नहीं करते.’


रति-‘अच्छा! मुझे तो पता ही नहीं था! फिर कैसी बातें करते हैं?’


मिलिंद-‘अजी पास आने की बातें करते हैं. थोड़ा मिलने-मिलाने की बातें करते हैं.’ मिलिंद ने अपने हाथों में थमा रति का हाथ एक झटके से अपनी तरफ़ खींच कर रति को अपनी बाहों में भर लिया और उसे कस कर अपने सीने से भींचते हुए बोला.


रति ने अपनी कत्थई आँखें बड़ी-बड़ी कर के मासूमियत से मिलिंद की आँखों में देखते हुए कहा.
रति-‘अच्छा! और क्या-क्या करते हैं?’


मिलिंद-‘तुझे नहीं पता?’
रति ने वैसे ही बड़ी-बड़ी आँखें कर के मासूमियत से इनकार में सर हिलाया.


मिलिंद-‘कोई बात नहीं, मैं कर के बताता हूँ.’ मिलिंद के दोनों हाथ रति की कमर से नीचे फिसले और कस गए. रति ने खिलखिलाते हुए मिलिंद को खुद से परे धक्का दिया.


रति-‘हाहाहा…ठरकी…कितना ठरकी है तू मिलिंद…रोमैन्स में भी तुझे ठरक ही सूझती है.’
रति खिलखिलाते हुए गीली रेत पर आगे भाग रही थी. मिलिंद उसके पीछे किसी उत्तेजक, नग्न, लपलपाती लौ के पीछे खिंचे आते पतंगे सा चला आ रहा था. 


मिलिंद- ‘मेरी ठरक में भी सौ फ़ीसदी शुद्ध मोहब्बत है मेरी जान! रुक ना…क्यों सता रही है.’ मिलिंद ने हाँफते हुए कहा.


रति उससे कुछ दूरी पर समुंदर के किनारे उभरी चट्टानों के समूह के ऊपर खड़ी थी, चाँद की दूधिया रौशनी में नहायी हुई. 


रति की बच्चों जैसी बड़ी-बड़ी आँखों में यौवन की चंचलता और कामोत्तेजना का उन्माद स्पष्ट प्रतिबिम्बित हो रहा था. मिलिंद मुस्कुराते हुए रति की तरफ़ बढ़ा. बेज़ टैंक टॉप और ऑलिव रैप अराउंड में रति उस घड़ी मिलिंद को ग्रीक की सौंदर्य, काम व प्रणय देवी वीनस जैसी मादक और उत्तेजक नज़र आ रही थी. स्वयं मिलिंद भी ओशन ब्लू शर्ट, जिसके सामने के सारे बटन खुले थे और ऑफ़ वाइट पैंट में ग्रीक नायक अडोनिस से कम नहीं लग रहा था. उसके कंधे तक आते हल्के लहरदार बाल समुद्र के छन कर आती ठंडी हवा के झोकों से उसके दार्शनिक जैसे चौड़े माथे पर बिखर रहे थे. मिलिंद की गहरी काली आँखों में अब कामोत्तेजना के साथ एक प्रणय निवेदन था. अपनी कत्थई आँखों में शरारती भाव लिए हुए रति ने अपने रैप अराउंड के नीचे से अपनी पैंटी उतारी और बग़ल की चट्टान पर रख दी. रति ने ब्रा नहीं पहनी हुई थी और उसके पतले टैंक टॉप से उसके उत्तेजित उभार बिल्कुल तने नज़र आ रहे थे. 


रति वहीं चट्टान के ऊपर लेट गयी. उसके हाथ उसके सर के ऊपर थे और लम्बे बाल खुल हुए, चट्टान पर समुद्र की लहरों के समान ही बिखरे हुए थे. समुद्र से उठती एक ऊँची बेबाक़, आंदोलित लहर उस चट्टान समूह और उस पर लेटी रति को यूँ सराबोर कर गयी जैसे वो भी रति के जिस्म का आलिंगन और मर्दन करने को ललायित हो. रति का टैंक टॉप और रैप अराउंड उसके भीगे जिस्म से यूँ चिपक गए थे जैसे वो उसकी ही कोमल त्वचा का हिस्सा हों. मिलिंद ने पहला चुम्बन रति के दाहिने पैर के अंगूठे पर अंकित किया और फिर उसकी लम्बी, सुडौल टांगों पर अपने प्रेम और प्रणय निवेदन को गर्म चुम्बनों से अंकित करते हुए ऊपर बढ़ा. रति की आँखें स्वतः ही बंद होती चली गयीं. उस अंधकार में सिर्फ़ मिलिंद के ग़ुस्ताख़ होते चुम्बनों की दहक शेष थी जो रति को वहाँ उफनते सागर की उन्मादित लहरों के समान द्रवित कर रहे थे.


अंधकार में रति को अपना जिस्म हवा में उठा हुआ महसूस हुआ. जैसे कोई उसे बाहों में उठाए हुए चल रहा हो. बहुत मुश्किल से रति ने अपनी आँखें खोलने की कोशिश की. उसकी आँखें बुरी तरह चुभ रही थीं, धुंधले अक्स में उसे वो ब्राउन जैकेट वाला साइको नज़र आया. रति का सर उसके सीने से लगा हुआ था, लेदर जैकेट के पीछे उसके दिल की धड़कन रति को दूर से आते नगाड़ों की थापों के समान सुनाई दे रही थीं. उसकी एक बाँह रति की पीठ से होते हुए उसके बाएँ वक्ष के ठीक नीचे टिकी थी और दूसरा हाथ उसकी जाँघों के पीछे से होते हुए उसके पैरों को उठाए हुए था. रति को उठाए वो स्थिर कदमों से कहीं चला जा रहा था. कहाँ? आख़िर कहाँ ले जा रहा था वो रति को?


रति ने सर घुमा कर देखने की कोशिश की. वो एक बहुत लम्बा गलियारा था जिसकी दीवारें इतनी संकरी थीं कि अग़ल-बग़ल दो लोग भी वहाँ से एक साथ नहीं गुजर सकते थे. गलियारे की आर्क सीलिंग पर बहुत कम पावर के पीले बल्ब काफ़ी दूरी पर जल रहे थे. इनकी रौशनी मात्र इतनी थी कि गलियारे में एक बल्ब से दूसरे बल्ब तक का दायरा तय किया जा सके. गलियारे के अंत में नीचे की तरफ़ जाती हुई गोल घुमावदार लोहे की सीढ़ियाँ थीं. ऐसा लगता था वहाँ कोई तहख़ाना है. 


वो साइको रति को अपनी बाहों में उठाए हुए उन घुमावदार सीढ़ियों से नीचे उतरने लगा. रति प्रतिवाद करना चाहती थी लेकिन जैसे उसके जिस्म में उँगली हिलाने की भी शक्ति शेष ना थी. स्थिर कदमों से बिना डगमगाए और बिना किसी शिकन के वो साइको रति को बाहों में उठाए उन घुमावदार सीढ़ियों से नीचे उतरता गया. रति को ऐसा लग रहा था जैसे वो नीचे रसातल में उतरते ही चले जा रहे हैं. 


सीढ़ियाँ ख़त्म होने का नाम नहीं ले रही थीं, ऐसा लग रहा था जैसे उनके चारों तरफ़ सिर्फ़ पाताल का अंधकार है जिसके बीच भू-गर्भ को जाती उन घुमावदार सीढ़ियों के अलावा बाक़ी और कुछ नहीं. 
रति चीखना चाहती थी, चिल्लाना चाहती थी, उस साइको की गिरफ़्त से खुद को बचाना चाहती थी लेकिन जैसे उसका जिस्म उसके दिमाग़ की सुनने को तैयार ही नहीं था. घुमावदार सीढ़ियाँ उस अंतहीन रसातल के अंधकार घुल रही थीं, रति की चेतना की तरह.


मिलिंद और रति की शामें अक्सर उस पुराने मॉल के फ़र्स्ट फ़्लोर पर बने कॉफ़ी हाउस में बीतती थीं जो अब बंद हो चुका है. उस समय भी पुराने मॉल की ज़्यादातर दुकानें बंद ही होती थीं, शायद बिल्डर उसे गिरा कर वहाँ नया कन्स्ट्रक्शन करने वाला था. वो कॉफ़ी हाउस उस मॉल की उन इक्का-दुक्का शॉप्स में से एक था जो उस समय तक चलता हालात में थीं हालाँकि वहाँ विरले ही कोई जाता था, और यही कारण था कि मिलिंद और रति अपनी शामें वहाँ बिताया करते थे. कॉफ़ी हाउस के काउंटर पर बैठे मालिक से लेकर हर एक वेटर तक मिलिंद और रति को पहचानते थे. 


मिलिंद हमेशा कॉफ़ी हाउस तक जाने के लिए एस्केलेटर के बजाय सीढ़ियाँ लेता था. उन घुमावदार सीढ़ियों से कोई नहीं गुजरता था और वहाँ हमेशा अंधेरा होता था. हर एक स्टेप चढ़ने के साथ मिलिंद रति को अपनी बाहों में लिए हुए चूमता चला जाता था. कभी-कभी तो सीढ़ियाँ चढ़ने और कैफ़े तक पहुँचने के दरमियाँ दोनों के होंठ एक-दूसरे से अलग ही नहीं होते थे. 


एक-आध बार ऐसा भी हुआ कि सीढ़ियों के अंधकार में मिलिंद और रति एक-दूसरे में डूब रहे होते तभी किसी के चढ़ने या उतरने की आहट होती, कैफ़े का कोई स्टाफ़ या भूला-भटका कोई बंदा सीढ़ियों का रुख़ करता. मिलिंद और रति फ़ौरन एक-दूसरे से अलग होते और सभ्यता से सीढ़ियाँ चढ़ने लगते और उस बंदे के गुजर जाने के बाद खिलखिला कर काफ़ी देर तक हंसते रहते. काफ़ी बाद में मिलिंद ने रति को बताया कि सीढ़ियों पर कैफ़े के नाइट विज़न कैमरे लगे हैं जिनकी फ़ीड काउंटर पर लगे मॉनिटर पर आती है. उस दिन भी दोनों खूब हंसे थे, और उसके बाद भी उन सीढ़ियों से एक-दूसरे को चूमते हुए ऊपर आने की दोनों की प्रक्रिया यथावत जारी रही, बस अब वो उनके लिए एक अड्वेंचर गेम बन गयी थी जहां वो सीढ़ियों से ऊपर चढ़ते समय कैमरे के रेडीयस में आए बिना एक-दूसरे को चूमते हुए गुजरते और कैफ़े में बैठ कर यूँ हंसते जैसे उन्होंने कितनी बड़ी जंग जीती हो.


रति का जिस्म तैर रहा था, उसे अपने चारों तरफ़ अथाह जल का एहसास हुआ. सागर का खारा लेकिन फ़ीरोज़े सा चमकदार और पारदर्शी पानी. उसने चौंक कर आँखें खोलीं, उसके अग़ल-बग़ल कोरल की रंग-बिरंगी चट्टानें थीं जिन्हें देख कर ऐसा लगता था जैसे प्रकृति के किसी जल शिल्पी ने उन्हें अपनी कल्पना के अनुरूप अत्यंत समर्पण और लावण्य भाव से परिपूर्ण होकर तराशा हो. रति को अपने आस-पास रंग-बिरंगी छोटी-बड़ी मछलियों के विभिन्न समूह दिखाई दिए. जैसे इंद्रधनुष में सातों रंग एक-दूसरे में घुलते हुए एक मेहराब बनाते हैं वैसे ही ये रंग-बिरंगे मत्स्य-समूह एक-दूसरे में घुलते हुए एक सादृश्य वृत-खंड का निर्माण कर रहे थे जो ना सुनाई देते किंतु एक साथ बजते सहस्त्र जलतरंगों के अलौकिक संगीत पर थिरक रहा था. 


इन रंग-बिरंगे जलचरों के साथ उनकी तरह ही रति और मिलिंद भी एक-दूसरे का आलिंगन किए ना सुनाई देने वाले सहस्त्रों जल तरंगों की धुन पर अथाह सागर की गहराई में बहाव के ताल पर थिरकते हुए बह रहे थे. कितने रूमानी थे वो क्षण, यह सिर्फ़ उनके जिस्मों का मिलन नहीं था, दो जिस्मों के आलिंगन में दो आत्माओं के रंग घुल कर एक हुए थे. रति ने अपना और मिलिंद का ऑक्सिजन मास्क ऊपर उठाया, वो मिलिंद को ज़ी भर कर चूमना चाहती थी. दोनों के होंठ एक-दूसरे के होंठों से कस गए. फेफड़ों में ऑक्सिजन के अंतिम कतरे तक वो चुम्बन से अलग ना हुए. रति को अपनी साँस घुटती महसूस हुई. फेफड़ों में ऑक्सिजन ख़त्म हो रही थी. उसके चारों तरफ़ सिर्फ़ पानी था, ऑक्सिजन लेने के लिए उसे सतह पर आना होगा!


रति ने तड़प कर पानी की सतह से बाहर अपना चेहरा निकाला, वो अपने फेफड़ों में साँस भरती चली गयी. रति बुरी तरह हाँफ रही थी. उसने अपनी साँसें और दिमाग़ व्यवस्थित करने की कोशिश की.
 
उसके हाथ पकड़ने के लिए कोई सहारा तलाश रहे थे. दो मज़बूत बाहों ने उसे पकड़ कर सीधा बिठाया. रति ने चौंक कर सामने देखा. वो पानी से भरे बेदिंग टब में थी. ब्राउन जैकेट वाला साइको उसे बाहों का सहारा दे कर बिठाए हुए था. 


‘दूसरा कोई तरीक़ा नहीं था तुम्हें होश में रखने का.’ उसकी भारी आवाज़ अब भी सर्द थी.


रति-‘म…मेरे कपड़े!’


‘भीग गए हैं. बदलने होंगे. देखता हूँ शायद यहाँ कुछ ऐसा हो जो तुम पहन सको.’
साइको ने कहा और रति को टब में बैठा छोड़ कर वॉशरूम से बाहर निकल गया. मुजैक फ़्लॉरिंग वाला वो एक बड़ा लेकिन पुराने स्टाइल का बना वॉशरूम था जहां वेस्टर्न टॉयलेट और बाथ टब बाद में फ़िट कराए गए थे. वहाँ एग्ज़ॉस्ट था लेकिन कोई खिड़की नहीं थी. वैसे भी अगर वो अंडरग्राउंड थी तो खिड़की होना असम्भव था. बाहर निकलने का सिर्फ़ एकमात्र रास्ता वो दरवाज़ा था जिससे अभी-अभी साइको बाहर गया था. रति ने टब से उठ कर बाहर निकलने की कोशिश की. उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसका पूरा जिस्म सुन्न पड़ रहा हो. बहुत मुश्किल से दिवार का संहार लेकर वो किसी तरह टब से बाहर निकली.


‘और तो कुछ मिला नहीं तुम्हें इससे ही काम चलाना पड़ेगा.’ साइको अब तक वापस आ चुका था. उसके हाथ में एक टा’ल और टी-शर्ट थी जो रति के साइज़ से दोगुनी बड़ी थी.


रति-‘तु..म..कौ..न…हो..मु…झे…क..हाँ..ला..ए..हो.’ रति ने बहुत मुश्किल से और भारी स्लर के साथ किसी तरह एक वाक्य बोला.


‘मैं दरवाज़े के बाहर रुकता हूँ. गीले कपड़े बदल लो, दरवाज़ा अंदर से लॉक मत करना. मैं अंदर नहीं आऊँगा.’ साइको ने रति के सवालों के जवाब देने के बजाए टी-शर्ट और टा’ल दरवाज़े के पीछे बनी हैंगिंग क्लिप पर टाँगे और वॉशरूम से बाहर निकल गया.  


रति का दिमाग़ अब भी नशे से पूरी तरह उबरा नहीं था. उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो ब्राउन लेदर जैकेट वाला आख़िर कौन था और रति के साथ क्या करना चाहता था. अगर उसका इरादा रति का रेप करने का होता तो अब तक कर चुका होता, भला वो इतनी ज़हमत क्यों उठाता? लेकिन फिर वो उसे इस अजीब सी अंडरग्राउंड जगह पर क्यों ले कर आया? क्या करना चाहता था वो रति के साथ? रति के बदहवास दिमाग़ को खुद से किए इस सवाल का कोई जवाब ना मिला, उसे सिर्फ़ इतना समझ आया कि जब तक वो पूरी तरह होश में नहीं आ जाती उसे इस साइको से दूर ही रहना चाहिए. रति ने आगे बढ़ कर वॉशरूम का दरवाज़ा अंदर से लॉक कर लिया. अब वो सुरक्षित थी. अब साइको उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता था.


रति का सर अब भी घूम रहा था. उसका गीला शरीर ठंड से काँप रहा था. उसने अपनी वन पीस एमरेल्ड स्कर्ट और लॉंज़रे उतारी और अपने गीले जिस्म को टा’ल से सुखाने लगी. फ़र टा’ल का स्पर्श उसके नम जिस्म पर मिलिंद के लहरदार बालों सा प्रतीत हो रहा था.


रति- ‘मिलिंद स्टॉप…प्लीज़!!’ रति की आवाज़ थर्रा रही थी.


मिलिंद रति की नाभि से नीचे चुम्बन कर रहा था, उसकी उँगलियाँ रति की स्कर्ट की वेस्ट लाइन और पैंटी की अपर लाइनिंग में अटकी हुई थीं. मिलिंद हर चुम्बन के बाद जैसे-जैसे नीचे बढ़ रहा था उसके लहरदार बाल रति की नाभि को सहलाते हुए उसके जिस्म की थर्राहट को और अधिक बढ़ा रहे थे.


बाहर हॉल में पार्टी फ़ुल स्विंग में चल रही थी. लोगों के ठहाकों की आवाज़ें, खनकते जाम के प्यालों और बैकग्राउंड में बजते रॉक बैंड के संगीत साथ घुलते हुए पीछे उस अंधेरे गलियारे तक आ रही थीं. 


रति दिवार से टिक कर खड़ी हुई थी, उसने मरून स्कूप नेक स्लीवलेस ब्लाउज़ पहना हुआ था जो सामने से क्लीवेज डीप था और नीचे मैचिंग लॉंग स्कर्ट थी. मिलिंद वाइट शर्ट और ब्लैक टक्सीडो में था और फ़िलहाल अपने महँगे टक्सीडो के ख़राब होने की परवाह किए बग़ैर घुटनों के बल रति के सामने बैठा हुआ था. उसकी उँगलियाँ रति की पैंटी लाइन के और अंदर जा रही थीं.


रति- ‘मिलिंद मत करो कोई आ जाएगा इधर!’


मिलिंद- ‘कोई नहीं आएगा, सब पार्टी करने में मशगूल हैं!’ मिलिंद अपनी ज़बान की टिप रति की नाभि में डाल कर सर्क्यलर मोशन में घुमाने लगा. 


रति के मुँह से सिसकारी निकल गयी. रति की लम्बी उँगलियाँ मिलिंद के लहरदार बालों में फिर रही थीं. कभी वो उत्तेजना से मिलिंद के सर को पकड़ कर खुद से भींच लेती तो कभी अपनी बेक़ाबू हो चुकी साँसों और काम इच्छाओं पर क़ाबू पाने की नाकाम कोशिश करती हुई मिलिंद को खुद से परे धकेलने की कोशिश करती.


रति- ‘पार्टी आपके ऑनर में ही दी गयी है मिस्टर मिलिंद मेहरा! जब गेस्ट ऑफ़ ऑनर ही नदारद होगा तो लोग ऑब्वीयस्ली उसे ढूँढेंगे. चलिए उठिए, ये सब करने का बहुत टाइम और मौक़ा मिलेगा.’


मिलिंद- ‘टाइम और मौक़ा तो मिलेगा लेकिन ये थ्रिल कहाँ मिलेगा!’, घुटनों के बल बैठे मिलिंद ने चेहरा उठा कर रति की तरफ़ देखा. मिलिंद के चेहरे पर हल्की मुस्कान थी और आँखें शरारती बच्चे की तरह शैतानी से चमक रही थीं.


रति के कुछ कह पाने से पहले ही मिलिंद का दाहिना हाथ ऊपर उठा और रति की डीप क्लीवेज ओपनिंग से होता हुआ उसके ब्लाउज़ के अंदर ठीक उसके दिल पर चला गया. 


मिलिंद- ‘देखो कितनी तेज़ी से धड़क रहा है तुम्हारा दिल, बेडरूम के सन्नाटे में इसकी धड़कन जितनी तेज सुनाई देती है उससे भी कहीं ज़्यादा है.’


रति की छाती पर कभी मिलिंद की मुट्ठी का कसाव बढ़ता तो कभी उसकी हथेली कोमलता से उसे सहलाने लगती. रति ने आँखें बंद कर के अपना सर पीछे दिवार से टिका लिया. अब उसमें प्रतिवाद करने की क्षमता शेष ना थी. मिलिंद को उसकी मनमानी करने की अब रति ने खुली छूट दे दी थी. 


मिलिंद की हर एक हरकत रति को पानी-पानी कर रही थी. अचानक मिलिंद ने रति को पलटा और उसका चेहरा व सीना दिवार से लगाते हुए उसके दोनों हाथ सर के ऊपर कर के पकड़ लिए. इससे पहले कि रति कुछ समझ पाती, मिलिंद दूसरे हाथ से उसकी स्कर्ट कमर से ऊपर उठा रहा था. रति ने कसमसा कर खुद को मिलिंद से अलग करने की कोशिश की.


रति- ‘मिलिंद नो!’
जवाब में उसे मिलिंद के पैंट का ज़िपर खुलने की हल्की आवाज़ सुनाई दी. रति ने प्रतिवाद करने के लिए मुँह खोला लेकिन पीछे से उसके चेहरे को पकड़े हुए मिलिंद का हाथ उसके होंठों पर सरक आया. रति के होंठों को मसलती मिलिंद की उँगलियाँ उसके लिप-ग्लॉस के एंटी-स्मज होने के दावों को धता बता रही थीं. मिलिंद के मज़बूत जिस्म और सख़्त दिवार के बीच रति को अपना जिस्म पिसता महसूस हुआ. रति के होंठों से सिसकारी निकली, उसके खुले होंठों से मिलिंद ने अपनी दो उँगलियाँ रति के मुँह में डाल दीं. दोनों के जिस्म एक-दूसरे से घर्षण कर रहे थे.


उसी समय हॉल की तरफ़ से एक वेटर पीछे बैक लॉबी की ओर आया. रति के मुँह से चीख निकलने वाली थी, मिलिंद ने उसके मुँह पर हाथ रख कर उसका मुँह बंद कर दिया. 


वेटर दोनों हाथों में एक के ऊपर एक रखे ड्रिंक क्रेट्स उठाए हुए था जो उसके चेहरे के सामने आए हुए थे और उसका पूरा ध्यान उन्हें बिना गिराए, बैलेन्स बना कर चलने पर था. मिलिंद ने रति से अलग होने के बजाए उसे और कस के जकड़ लिया और लगातार उसकी पीठ चूमते हुए उसे और अंधेरे कोने की तरफ़ खींच लिया. वेटर का ध्यान उन पर नहीं गया, वो चुपचाप क्रेट्स का टीला पीछे अंधेरी लॉबी के कोने में रख कर वापस बाहर हॉल की ओर चला गया, लेकिन वेटर द्वारा उस अवस्था में देख लिए जाने का डर रति के अंदर उत्तेजना और आवेग का ऐसा उबाल ले आया जैसा उसने पहले कभी महसूस नहीं किया था. उसका पूरा जिस्म थर्राते हुए मिलिंद की बाहों में निढ़ाल हो गया.  


रति ने मुश्किल से आँखें खोलीं. आँखों की धुँधलाहट के पार खुला आसमान था, लाल बादलों से घिरा हुआ, ठीक वैसे ही लाल बादल जो आने वाले भीषण तूफ़ान का संकेत देते हैं. रति को वो बादल बेहद डरावने दिखाई दे रहे थे, जैसे वो बादल उसके पूरे अस्तित्व को अपनी घन गर्जना में दबा कर विलीन कर देना चाहते हों. लाल दैत्यों जैसे भयंकर बादल! जो रति को समूचा ही लील जाना चाहते हों. 


रति ने अपना सर हिलाने की कोशिश की, उसे एहसास हुआ कि वो कहीं लेटी हुई है. कहाँ? उसे समझ ना आया, हाँ अपने नग्न जिस्म से रगड़ खाते एक क्विल्ट का और पीठ के नीचे किसी नरम गद्दे का एहसास हुआ. उसका सर बुरी तरह चकरा रहा था और इस चक्कर की वजह से ऊपर आसमान में उमड़ते लाल बादलों के दैत्य किसी चक्रवात की तरह तेज गति से घूमते और गर्जना करते रति को लीलने के लिए नीचे आते प्रतीत हो रहे थे. रति का जिस्म बुरी तरह ऐंठा, क्विल्ट उसके नग्न जिस्म पर से ढलकते हुए कमर के नीचे तक पहुँच गया. उसके गले से एक घुटी हुई कराह निकली जिसने खुद रति को स्तब्ध कर दिया. क्या वो जीवित है? या फिर ये उसकी आत्मा के शरीर का त्याग करने का रुदन है जो उसे यूँ अपनी कराह सा होता हुआ भी आभासी प्रतीत हो रहा है?


उसकी नंगी और ठंडी त्वचा पर दो गर्म हथेलियों का स्पर्श हुआ जिनकी हरारत सुकूनदायक थी. कोई उसे पकड़ रहा था, जैसे उन लाल मेघ दैत्यों का ग्रास बनने से रोक रहा हो. रति ने तड़प कर उन हाथों के मालिक को अपने आग़ोश में लेने की कोशिश की.


रति- ‘नहीं मिलिंद! तुम मुझे नहीं छोड़ सकते…बिल्कुल नहीं! तुमने कहा था…वादा किया था मेरा साथ कभी नहीं छोड़ोगे, म..मेरा हमेशा ख़्याल रखोगे…म…मुझे हमेशा प्यार करोगे.’


मिलिंद-‘प्यार मैं तुमसे हमेशा करूँगा रति, पर मैं तुम्हारा नहीं हो सकता.’


रति- ‘झूठ! बकवास! यू आर सच ए कंट!’


मिलिंद- ‘हमारा साथ होना एक गलती थी! मेरी गलती, हमें ये नहीं करना चाहिए था. मुझे ये नहीं करना चाहिए था, मेरी अपनी ज़िम्मेदारियाँ हैं.’


रति- ‘एक गलती? मुझे अपने बिस्तर में घसीटते वक्त तुम्हारी ज़िम्मेदारियों का एहसास कहाँ था मिलिंद? उस समय तो तुम मेरे लिए अपनी बीवी-बच्ची, सारी दुनिया को छोड़ने के लिए तैयार थे!’


मिलिंद- ‘मैं नहीं छोड़ सकता! ना उन्हें ना तुम्हें! उनसे प्यार करता हूँ…तुमसे भी!’


रति- ‘मुझसे भी? यू आर सच ए हिपोक्रेट, यू फ़िल्दी बास्टर्ड! वॉट एम आइ टू यू? ए साइड चिक? एम आइ योर कीप? योर होर? तुझे घर पर बीवी रखनी है और ज़िंदगी के मज़े मेरे साथ लेने हैं, मैं तेरी रखैल बनी रहूँ हमेशा?’


मिलिंद- ‘गॉड नोज़ दिस इज़ सो नॉट ट्रू! आइ लव्ड यू विद ऑल माई हार्ट एंड सोल. हम एक दूसरे के लिए बने थे, बस ज़िंदगी ने टाइमिंग में गड़बड़ कर दी यार.’


रति- ‘यू नो, डेटिंग ए मैरीड गाए वज़ सच ए बैड आइडिया! इट वज़ ऑल माई फ़ॉल्ट. मुझे तेरी बातों में ही नहीं आना चाहिए था. तू बाक़ी मर्दों की तरह है मिलिंद, अपनी बोरिंग मैरीड लाइफ़ की चेन से पट्टा तुड़ा कर भागा एक पालतू कुत्ता जो भटकता हुआ मेरी गोद में आ बैठा. मैंने पुचकारा तो मेरे साथ ज़ी भर कर खेला और फिर वापस दुम हिलाता हुआ अपनी मालकिन के पास लौट गया.’


मिलिंद- ‘स्टॉप इट रति! स्टॉप! इतना ज़हर कैसे उगल सकती हो यार!?’


रति- ‘तो अब मैं नागिन हूँ? लेकिन मेरी ज़िंदगी में ज़हर तुमने घोला है मिलिंद मेहरा! तुम सेलिब्रेटेड डिज़ाइनर हो, दुनिया तुम्हें जानती है. मैं कौन हूँ? तुम्हारी अदना सी ए.डी.? ऐसी असिस्टेंट जिसका काम अपने बॉस को वर्क फ़ील्ड से लेकर बिस्तर तक पर खुश रखना है? तुम्हारी मेल ईगो को पैम्पर करती रहूँ सो दैट यू कैन राइड मी एंड मेंटेन योर फ़ैमिली गाए इमेज इन द सोसाइटी?’


मिलिंद- ‘मैंने कभी तुम्हारे बारे में ऐसा नहीं सोचा रति वरना तुम भी जानती हो कि मेरे लिए कितना आसान होता जस्ट टू स्लीप अराउंड एंड मूव ऑन.’


रति- ‘एम आइ सपोज़ टू फ़ील गुड अबाउट दिस? चरण धो कर पियूँ मैं तुम्हारे? देवता बना कर पूजा करूँ तुम्हारी कि वाह देवता मेरे, तुमने मुझसे प्यार किया, अपनी फ़ैमिली को छोड़ कर मेरे साथ घर बसाने का वादा किया, रात-दिन मेरे साथ अपनी हर सेक्शूअल फ़ैंटसी पूरी की और फिर उसके बाद मुझसे माफ़ी माँग कर मुझे छोड़ दिया!’


‘हाहाहाहा!!’ चारों तरफ़ वातावरण में ज़ोरदार ठहाका गूंजा. वो एक ठहाका किसी टूट कर चकनाचूर हुए काँच की तरह कई ठहाकों में बदल गया. रति को यूँ लगा जैसे वो पैने, टूटे हुए काँच जैसे ठहाके उसके जिस्म से हर तरफ़ से टकरा रहे हैं, रति चीत्कार कर रही थी और वो ठहाके अब उसके जिस्म को लहुलुहान करते हुए उसकी अंतरात्मा को घायल कर रहे थे. रति दोनों हाथों से अपने कानों को बंद करते हुए चिल्लाई.


रति- ‘नहींsss! बस करो! बस करो!’


उसके नंगे जिस्म को कोई अपने आग़ोश में ले रहा था. क्या ये मिलिंद था? या फिर मिलिंद जैसा दिखने वाला वो बहरूपिया साइको? रति ने आस-पास देखा, वो एक बेड पर थी. बेड के चारों तरफ़ अंजाने-अजनबी लोग बुत बने खड़े थे और रति की नग्नता पर ठहाके लगा रहे थे. वो मिलिंद के आग़ोश में अपने निर्वस्त्र तन को छुपाना चाहती थी? पर क्या उसे आग़ोश में लेने वाला मिलिंद था? क्या वो उसके जिस्म और उसकी आत्मा से वैसे ही टूट कर प्रेम कर सकता था जैसे मिलिंद करता था? क्या ये अजनबी लोग उनके प्रेम को कामवासना का नाम दे कर ठहाके लगाना बंद करेंगे? उन बुत बने अजनबियों के लहुलुहान कर देने वाले तीक्ष्ण ठहाके और ऊपर चक्रवात का रूप लेकर रति को लीलने को आतुर रक्तिम मेघ दैत्यों का निनाद उस पर हावी होता चला गया.


और एक बार फिर चारों तरफ़ अंधेरा छा गया. 


रति ने चौंक कर आँखें खोलीं, वो एक बड़े किंग साइज़ बेड पर लेटी थी. उसके नंगे जिस्म पर एक गरम क्विल्ट था. वो हड़बड़ा कर उठ बैठी और उसने क्विल्ट अपने चारों तरफ़ लपेट लिया. वो एक अजीब से कमरे में थी. उसने देखा कि बेड के चारों तरफ़ कई लाइफ़ साइज़ मैनिक्वींस खड़े हुए थे, जैसे कपड़ों की दुकानों पर बुत होते हैं ठीक वैसे ही. हर मैनिक्वीन पर अलग-अलग कपड़े पहना कर उसे अलग गेट-अप दिया गया था जिससे वे सभी बुत अलग-अलग इंसानों जैसे नज़र आ रहे थे. रति ने चौंक कर ऊपर सीलिंग की तरफ़ देखा.


अंडरग्राउंड रूम की उस सीलिंग में कहीं से शायद अधिक मात्रा में सीपेज यानी जमे हुए पानी का रिसाव हुआ था जिससे पूरी सीलिंग के लाल पेंट में अलग-अलग आकार की आकृतियाँ बनी प्रतीत हो रही थीं. 


‘सो फ़ाइनली यू आर अवेक!’
रति उस आवाज़ पर चौंक कर पलटी. ब्राउन लेदर जैकेट वाला साइको हाथ में गर्म कॉफ़ी की ट्रे लिए वहाँ आया. रति को जगा हुआ देख कर उसके होंठों पर सहज मुस्कान उभरी. रति ने डर कर क्विल्ट में खुद को छुपाते हुए अपना जिस्म सिकोड़ लिया.


‘रिलैक्स! आइ एम नॉट गॉन’ना हर्ट यू. यू आर सेफ़ हेयर.’
कहते हुए उसने आहिस्ता से कॉफ़ी मग्स की ट्रे बेड पर रख दी. अब वो साइको उसे मिलिंद से उतना मिलता-जुलता भी नज़र नहीं आ रहा था, ना ही वो उसे कोई साइको नज़र आ रहा था. रति ने सवाल किया.


रति- ‘कौन हो तुम? मुझे यहाँ क्यों लाए हो?’


‘काल रात तुम नाइटक्लब में थी, बारटेंडर ने तुम्हें कॉम्प्लिमेंटरी ड्रिंक सर्व की थी याद है?’
रति ने सहमति में सर हिलाया.


‘वो ड्रिंक स्पाइक्ड थी.’


रति- ‘वॉट??’ रति बुरी तरह चौंकी.


‘तुम्हारी उस रईसज़ादे से बहस हुई, उसी समय बारटेंडर ने नज़र बचा कर वो कॉम्प्लिमेंटरी ड्रिंक स्पाइक कर दी थी.’


रति- ‘तुम्हें कैसे पता?’


‘क्योंकि अचानक मेरी नज़र उधर चली गयी थी. एक पल में ही मुझे सारा माजरा समझ आ गया. अगर तुम सीधी तरह उस रईसज़ादे का ऑफ़र ऐक्सेप्ट कर लेती तो तुम ईज़ी कैच थी, नहीं किया तो तुम्हें ड्रग करने का प्लान पहले से तैयार था. रोहिप्नॉल जैसी किसी हलूसिनॉजेनिक ड्रग का यूज़ किया गया था.


मात्रा बहुत ज़्यादा नहीं थी, शायद बारटेंडर को शक हो गया कि मैंने उसे ड्रिंक स्पाइक करते देख लिया है इसलिए वो पूरी तरह ड्रिंक स्पाइक नहीं कर पाया. ये पहली बार नहीं जो बारटेंडर और उन अमीरज़ादों ने गेम पुल ऑफ़ किया होगा.’


रति- ‘मदरफकर्स! आइ विल रिपोर्ट देम टू पुलिस!’


‘कोई फ़ायदा नहीं होगा. ये ड्रग्स टेस्ट में ट्रेसबल नहीं होते और ऐसे नाइट क्लब्स जहां ऐसे काम होते हैं वो पुलिस को महीने की मोटी रक़म दे कर अपनी जेब में रखते हैं. तुम कुछ साबित नहीं कर पाओगी, हाँ, अपने लिए एक और बखेड़ा ज़रूर खड़ा कर लोगी.’


रति- ‘मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि मैंने कोई इतनी भी ज़्यादा ड्रिंक नहीं की कि अपने होश में ही ना रहूँ.’


‘जब तुम नाइटक्लब से बाहर निकली तब वो रईसज़ादा अपने दोस्तों के साथ तुम्हारे पीछे आया. तुम अपने होशोहवास में नहीं थी इसलिए मैं तुम्हें यहाँ अपने ऑफ़िस कम अपार्टमेंट में ले आया.’


रति- ‘तुमने अभी तक ये नहीं बताया कि तुम कौन हो?’ रति ने उसे सशंकित भाव से देखते हुए पूछा. 
 
‘मोक्ष! मोक्ष नाम है मेरा. पेशे से प्राइवट इन्वेस्टिगेटर हूँ. मुझे मिलिंद ने तुम्हारा पीछा करने के लिए हायर किया था.’


रति- ‘वॉट! दैट बास्टर्ड इज़ स्पाइइंग ऑन मी! मुझे छोड़ के, मेरी लाइफ़, मेरा करियर बर्बाद कर के भी चैन नहीं मिला उसको जो अब मेरी जासूसी करा रहा है.’


मोक्ष ने रति की तरफ़ देखा. ना चाहते हुए भी एक व्यंगात्मक मुस्कान मोक्ष के अधरों पर खेल गयी. उसे ऐसे जजमेंटल लुक के साथ देखता देख कर रति बुरी तरह चिढ़ गयी.


रति- ‘वॉट’स दैट स्मर्क फ़ॉर?’


मोक्ष- ‘यू नो रति, आइ हैव डिस्कवर्ड समथिंग लास्ट नाइट. एज़ अडल्ट्स वी डोंट लाई, वी क्रीएट आवर ओन वर्ज़न ऑफ़ कम्फ़र्टिंग ट्रूथ्स! हम खुद से झूठ नहीं बोलते, हम अपने लिए एक ऐसा सच तैयार कर लेते हैं जो हमें सांत्वना देता हो.’


रति- ‘वॉट डू यू मीन.’


मोक्ष- ‘ड्रग्स के नशे में कल पूरी रात तुम अपने और मिलिंद के रिश्ते, अपने सेक्शूअल एंकाउंटर्स और अपने ब्रेक-अप के बारे में बड़बड़ाती रही. कैसे तुम दोनों बिल्कुल मेड फ़ॉर ईच अदर कपल थे, कैसे मिलिंद ने तुम्हारे साथ अपनी हर कार्नल डिज़ायर, अपनी हर सेक्शूअल फ़ैंटसी फ़ुल्फ़िल की फिर उसके बाद अपनी फ़ैमिली के लिए तुम्हें छोड़ दिया.’


रति- ‘यही सच है!’


मोक्ष- ‘ये तुम्हारा सच है रति, जो तुमने अपने ख़ुद के लिए और दुनिया के लिए बनाया है जिससे तुम अपनी और दूसरों की नज़रों में हमेशा विक्टिम कार्ड प्ले कर सको.’
रति मोक्ष की बात पर बुरी तरह तिलमिलाई.


रति- ‘हाउ डेयर यू से दैट!!’


मोक्ष- ‘अपने सच का जो वर्ज़न तुमने क्रीएट किया है वो तो ऑब्वीयस्ली तुम जानती ही हो, चलो अब मैं तुम्हें सच का दूसरा वर्ज़न सुनाता हूँ…सच का सच्चा वर्ज़न. मिलिंद मेहरा इंडस्ट्री के टॉप डिज़ाइनर्ज़ में से एक है. तुम एज़ ए न्यू कमर, एज़ ए नोबॉडी उसके पास काम माँगने गयी. मिलिंद को तुम्हारे काम में पोटेंशियल नज़र आया. उसने तुम्हें अपना असिस्टेंट बना लिया. तुम्हारी ख़ुशी का ठिकाना ना रहा, तुमने सोच-समझ कर जानते-बूझते मिलिंद को हनी ट्रैप किया. मिलिंद वज़ एन इमोशनल फूल. ही फेल फ़ॉर योर ट्रैप और उसे वाक़ई तुमसे सच्चा प्यार हो गया.’


रति- ‘बुलशिट!!’ रति नागिन की तरह फुँफकारते हुए बोली. मोक्ष पर इसका कोई प्रभाव ना पड़ा.


मोक्ष- ‘आगे सुनती जाओ! मिलिंद वज़ हेड ओवर हील्ज़ फ़ॉर यू. इस हद तक कि तुम्हारे लिए वो अपनी बीवी और बेटी को भी छोड़ने को तैयार था. तुम्हारा तो मानो जैकपॉट लग गया! एक न्यू कमर को आते ही नाम, स्टैटस, पैसा, सिक्योर्ड लाइफ़ सब मिल रहा था सो यू प्लेड अलॉंग! वैसे भी ज़्यादा कुछ नहीं करना था, मिलिंद की फ़्रैजाईल मेल ईगो को पैम्पर करना था, उससे प्यार ना होते हुए भी प्यार जताना था जो तुमने बखूबी किया!’


रति- ‘अगर ये सच होता तो आज उसकी बीवी की जगह मैं होती!’


मोक्ष- ‘बिल्कुल होती! बट कर्मा हैज़ इट्स ओन वेज़ ऑफ़ गेटिंग ईवेन विद अस. इश्क़ का ज़हर चढ़ा जिस्म पर इस कदर, जो रूह को तर कर गया. काम की प्यास ही कुछ ऐसी जगी, जो कर्मा मुक़द्दर में सहरा भर गया. सब ठीक जा रहा था लेकिन मिलिंद को तो रात-दिन तुम्हारे अलावा कुछ सूझ ही नहीं रहा था, नतीजतन उसका काम बर्बाद होने लगा. हेवी लॉसेज़ होने लगे और उसने इंडस्ट्री में अपनी रेप्युटेशन खो दी.’


रति चुप थी. वो बस मोक्ष को जलती हुई नज़रों से घूर रही थी.


मोक्ष-‘दिस वज़ द टाइम वेन यू स्टार्टेड फ़ूलिंग अराउंड विद अदर डिज़ाइनर्ज़. जो हनी ट्रैप मिलिंद के लिए सेट किया था वो ही तुमने दूसरों के लिए सेट करना शुरू किया. अपनी लाइफ़ और करियर के सबसे चैलेंजिंग फ़ेज़ में, सड़क पर आ जाने की कगार पर आकार मिलिंद को एहसास हुआ कि उसके साथ सिर्फ़ और सिर्फ़ उसकी फ़ैमिली खड़ी है. उसकी वही बीवी और बच्ची जिन्हें वो तुम्हारे लिए छोड़ने चला था वो उसका इमोशनल सपोर्ट बने और अब तुम्हारे पास मिलिंद को देने के लिए तानों के अलावा कुछ भी नहीं बचा था. मिलिंद ने फ़ैसला किया कि वो अपनी गलती सुधारेगा और इसीलिए वो तुम्हें छोड़ कर वापस अपनी फ़ैमिली के पास चला गया.’


रति- ‘ये झूठ है..ये झूठ हैsss!!’
रति अब पागलों की तरह चीख रही थी. मोक्ष एक बार फिर से मुस्कुराया.


मोक्ष- ‘रुको ज़रा! सब्र करो, अभी तो कहानी की एंडिंग बाक़ी है. अपने इस ब्रेक-अप को तुमने एक काफ़ी स्ट्रॉंग विक्टिम कार्ड के रूप में कैश करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. एक बेचारी न्यू कमर जिसे उसके बॉस ने प्यार का झाँसा देकर एक्स्प्लॉइट किया, जी भर कर यूज़ किया और फिर छोड़ दिया. तुमने इंडस्ट्री में अपनी ये सॉब स्टोरी आगे बढ़ने के लिए चीट कोड की तरह यूज़ की.’


रति- ‘क्योंकि ये सब स्टोरी सच है! हैशटैग मी टू!’


मोक्ष- ‘एग्ज़ैक्ट्ली! हैशटैग मी टू! जानती हो इस हैशटैग मी टू की सबसे बड़ी आयरॉनी क्या है? जो बेचारी लड़कियाँ सच में एक्स्प्लॉइट हुईं उनकी आवाज़ तो प्रॉपगैंडा में कहीं घुट कर रह गयी, आगे आयीं तो सिर्फ़ तुम्हारे जैसी गोल्ड डिगर्ज़ हू वॉंटेड टू स्लीप अराउंड देयर वे टू द टॉप! लेकिन जब स्लीप अराउंड कर के भी टॉप तक नहीं पहुँच पायीं तो उन्होंने मी टू चिल्लाना शुरू किया. जस्ट लाइक यू. मिलिंद के बाद तुमने अपने हनी ट्रैप में जितने भी डिज़ाइनर्स को फाँसा उन्होंने सही मायने में तुम्हें ज़ी भर कर एक्स्प्लॉइट किया और फिर दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया. तब तुम्हें एहसास हुआ कि मिलिंद और तुम्हारे रिश्ते में सिर्फ़ कामवासना नहीं थी, आधा प्यार था…मिलिंद की तरफ़ का आधा प्यार. यू प्रिटेंडेड टू लव हिम बट यू नेवर ऐक्चूअली डिड. और फिर दुनिया से टिश्यू पेपर की तरह इस्तमाल किए और फेंके जाने के बाद तुम्हें उस प्यार का एहसास हुआ जो अब तुम्हारा नहीं था. सही मायनों में दिल तब टूटा तुम्हारा और सहारा मिला शराब में.’


रति ख़ामोश थी. मोक्ष ने एक पैकेट में से कुछ फ़ोटोग्राफ़्स निकाल कर उसके सामने बेड पर फेंक दिए.


मोक्ष- ‘यू नो रति, कामा और कर्मा के बीच कहीं एक बैलेन्सिंग फ़ैक्टर भी होता है जिसे प्यार कहते हैं. कल रात मिलिंद ने मुझे ये फ़ोटोग्राफ़्स तुम्हें देने के लिए भेजा था. इट वज़ सपोज़ टू बी माई लास्ट नाइट ऑन द केस. पर मैं क्लब में तुम्हें ये फ़ोटोग्राफ़्स दे पाता उससे पहले ही काफ़ी कुछ हो गया.’


रति ने फ़ोटोग्राफ़्स की तरफ़ देखा. मिलिंद और रति के साथ में बिताए हर ख़ुशनुमा पल उन तस्वीरों में क़ैद थे. रति की आँखों से अनायास ही दो आंसुओं की बूँदें उन पर गिर गयीं. मोक्ष रति के सुखा कर आयर्न किए हुए कपड़े बेड पर रखते हुए बोला. 


मोक्ष- ‘तुम्हारे कपड़े सूख गए हैं. जैसा कि मैंने कहा, मुझसे डरो मत, तुम्हारे नंगे बदन में मुझे कोई दिलचस्पी नहीं. मैंने तुम्हारी नंगी अंतरात्मा देखी है, बहुत बदसूरत है. अपने कपड़े पहनो और तुम यहाँ से जा सकती हो, अपनी विक्टिम कार्ड सॉब स्टोरी के साथ. आगे भी काम आएगी, आज नहीं तो कल मिलिंद जैसा या उससे बड़ा कोई चू…बेवक़ूफ़ तुम्हारी सॉब स्टोरी और प्रेटेंशियस जेन्यूइन लव के हनी ट्रैप में फँस ही जाएगा…अंटिल देन, इट्स कामा एंड कर्मा!’


कपड़े पहन कर रति उन स्पाइरल सीढ़ियों और ऊपर पतले गलियारे से गुजरी. ना वो रात की तरह लम्बे थे और ना अंधेरे. सारा अंधेरा रति को अपने अंदर महसूस हुआ. रति खुद में ही बड़बड़ाई.


रति- ‘इट्स नॉट ट्रू! दैट सन ऑफ़ बिच मिलिंद यूज़्ड मी एंड रूइंड माई लाइफ़.’


THE END 

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