ॐ नमः हरिहराय

Kathasaarathi
Kathasaarathi
  • THE PHOENIX WOLF
  • TPWG-STUDIO
  • KATHASAARATHI
  • TAROT PHOENIX WOLF
  • ARCANE ARTS
  • NITIN K. MISHRA
  • SEND A RAVEN
  • REVIEWS
  • More
    • THE PHOENIX WOLF
    • TPWG-STUDIO
    • KATHASAARATHI
    • TAROT PHOENIX WOLF
    • ARCANE ARTS
    • NITIN K. MISHRA
    • SEND A RAVEN
    • REVIEWS
  • Sign In
  • Create Account

  • Bookings
  • My Account
  • Signed in as:

  • filler@godaddy.com


  • Bookings
  • My Account
  • Sign out

Signed in as:

filler@godaddy.com

  • THE PHOENIX WOLF
  • TPWG-STUDIO
  • KATHASAARATHI
  • TAROT PHOENIX WOLF
  • ARCANE ARTS
  • NITIN K. MISHRA
  • SEND A RAVEN
  • REVIEWS

Account

  • Bookings
  • My Account
  • Sign out

  • Sign In
  • Bookings
  • My Account
READ PREVIOUS CHAPTER

ही लव्ज़ मी ‘नॉट’

HE LOVES ME "NOT" CHAPTER 3: THE INTRUDER IN THE COTTAGE

चैप्टर-03 द इंट्रूडर इन द कॉटिज

नितिन के. मिश्रा 


 

“रिंग अराउंड द रोज़ीस, 

पॉकेट फुल ऑफ़ पोजिज़

हशा-बुशा, वी ऑल फॉल डाउन”


“स्टॉप इट अंश! स्टॉप फ़ॉर गॉड’स सेक!”

अनंतिका की आँखें बंद थीं, उसकी आँखों के पोरों से गालों पर ढलकी आँसू की बूँदों को अंश ने अपने होंठों में जज़्ब कर लिया। 


“अंशssss…”

अनंतिका के लबों से निकलते अल्फ़ाज़ सिसकारी में बदल गए। 


उसके होंठ और अंश के होंठों की गिरफ़्त में थे। अनंतिका के निचले होंठ पर अंश के दांतों की चुभन उसके जिस्म में तीव्र ज्वार भाटा उत्पन्न कर रही थी। 


अनंतिका का बदन बिस्तर पर ऐंठ रहा था, उसके मुँह से अब भी सिसकारी और कराहें निकल रही थीं।अंश बेहद आहिस्ता-आहिस्ता अनंतिका के ऐंठते जिस्म को चूम रहा था, अपने दांतों से चुभलाते हुए उसके जिस्म पर हिकीज़ बनाता हुआ अंश नीचे की तरफ़ बढ़ा। अंश ने अपना पथराया और तमतमाया हुआ चेहरा उठा कर अनंतिका को देखा, अनंतिका की आँखें अब भी बंद थीं। चुम्बनों को जारी रखते हुए अंश का चेहरा अनंतिका की दोनों जाँघों के बीच कहीं खो गया। 


“अहहssss…” अनंतिका का जिस्म ऐंठा, उसकी कमर कमान की भाँति तन गई। 


“अनंतिका!।।अनंतिका??” 

अनंतिका के जिस्म को कोई ज़ोर-ज़ोर से झँझोड़ रहा था।


हाँफते हुए अनंतिका ने अपनी आँखें खोलीं, उसके फेफड़े फटने पर उतारू थे। 


ऐसा लग रहा था जैसे मुद्दतों से वो सांस लेने की कोशिश कर रही हो लेकिन ना ही उसे सांस आ रही है ना ही उसकी जान निकल रही है। जैसे नर्क की ये सज़ा उसे जन्मों तक भुगतने के लिए मुक़र्रर की गई हो। 


“अनी!! क्या हुआ है तुम्हें?”

निखिल अनंतिका की पसीने से ठंडी पड़ी पीठ पर अपनी हथेली रगड़ कर उसे तपिश देने की कोशिश कर रहा था, अनंतिका का पूरा जिस्म सूखे पत्ते की तरह काँप रहा था। उसकी सासें उखड़ी हुई थीं, मुँह खोल कर वो किसी दमे के मरीज़ की तरह गहरी सासें लेने की कोशिश कर रही थी। दिल यूं धड़क रहा था जैसे किसी भी पल सीने का पिंजर फाड़ कर बाहर निकल जाएगा, अनंतिका अब भी समझने की कोशिश कर रही थी कि उसके साथ हो क्या रहा है।


“स्लीप परैलिसस! तुम्हें स्लीप परैलिसस हो रहा था अनंतिका,” निखिल अनंतिका को पानी का ग्लास देते हुए बोला।

उसने बेडशीट उठा कर अनंतिका के नग्न जिस्म पर लपेटी और उसे अपने आग़ोश में भर लिया।


“हमें किसी साइकोलॉजिस्ट से कन्सल्ट करना चाहिए..म…मुझे लगता है हमें वापस दिल्ली लौट चलना चाहिए अनी,” निखिल कुछ सोचते हुए बोला। उसकी आवाज़ में चिंता साफ़ झलक रही थी।


अनंतिका ने इनकार में सर हिलाया।

“नो निखिल! आय एम फ़ाइन नाउ।”


अनंतिका अब काफी हद तक संभल चुकी थी, खुद के ही ख़्यालों और सवालों में उलझी हुई अनंतिका बोली। उसे यक़ीन नहीं आ रहा था कि एक बार फिर से उसने अपने जिस्म के साथ होते बर्ताव को सिर्फ़ स्वप्न में महसूस किया था। अंश की जलती हुई निगाहें, उसका स्पर्श, उसके चुम्बन, इस बार भी उसने जो कुछ भी अपने साथ घटित होता महसूस किया वो सब कुछ एक सपना मात्र था?


पिछली बार अनंतिका को यही सोच कर थोड़ी राहत मिली थी कि अंश का वो भयावह रूप उसके सोच, उसके सपनों की ही उपज था लेकिन इस बार उसका जिस्म उसे गवाही दे रहा था कि ये सपना नहीं हो सकता और अगर ये वाक़ई सपना था तो इसका मतलब साफ़ था कि उसके अंतर्मन में अंश के लिए सप्रेस्ड सेक्शूअल डिज़ायर थी। 


पानी का एक घूँट भर कर अनंतिका ने अपनी आँखें बंद की, आँखें बंद करते ही अंश की गर्म साँसों की अनुभूति उसे अपनी जाँघों पर हुई…अनंतिका के शरीर ने एक बार फिर से झुरझुरी ली।


“तुम ठीक नहीं हो अनंतिका। मुझे लगा था यहाँ आना तुम्हारे और तुम्हारे काम के लिए अच्छा होगा लेकिन अब मुझे लग रहा है कि इस जगह का तुम पर काफ़ी नेगेटिव इम्पैक्ट पड़ रहा है,”


“नहीं, अब मैं ठीक हूँ निखिल।”


“तुम रात खुद मुझसे कह रही थी कि तुम्हें ये जगह सही नहीं लगती। ज़रा याद कर के बताओ कि ये स्लीप परैलिसस कब से एक्स्पिरीयन्स कर रही हो?”


“जब से यहाँ चकराता आए हैं तब से,”


“क्या इससे पहले कभी नहीं हुआ? मैंने दिल्ली में इतने सालों में तुम्हें एक बार भी ऐसे अटैक आते नहीं देखे!”


“इससे पहले?” निखिल के प्रश्न ने अनंतिका के ज़हन पर जैसे एक तीव्र चोट की। वो कुछ याद करने की कोशिश करने लगी।


“हाँ…शायद पहले भी हुआ है…बहुत पहले, बचपन में। ठीक से याद नहीं मुझे। मुझे मेरे बचपन के बारे में कुछ याद नहीं,”

अनंतिका जैसे खुद में ही बड़बड़ाते हुए बोली। उसने दोनों हाथों से अपना सर पकड़ लिया, उसके सर में तेज दर्द की लहर उठ रही थी। अनंतिका को अपना शरीर दोबारा काँपता महसूस हुआ। निखिल अब भी उसे अपनी बाहों में भरे हुए था।


“इट्स ऑल राइट! वी’ल्ल टॉक अबाउट इट लेटर,”

पिछली रात के उनके वाइल्ड मेक-आउट सेशन के बाद जब अनंतिका सोई उसके बाद उसे समय और यथार्थ का ध्यान ही नहीं रहा। पिछले कुछ दिनों में उसके साथ ये दूसरी बार हुआ था जब अपने साथ सपने में घटित घटना उसे वास्तविक लग रही हो। अनंतिका को यूँ महसूस हुआ कि उसके दिल, दिमाग़ और जिस्म, तीनों के बीच जंग छिड़ी हुई हो।


निखिल ऑफिस जाने को रेडी हो चुका था। अनंतिका ने घड़ी पर नज़र डाली, सुबह के 10 बज चुके थे। उसने उठने की कोशिश की।


“उठो मत! यू नीड रेस्ट, मैं प्रेरणा को कॉल कर देता हूँ कि आज मैं ऑफिस नहीं आऊंगा।”


“नहीं, इसकी ज़रूरत नहीं है निखिल। मैंने कहा ना मैं ठीक हूँ…तुम ऑफ़िस जाओ। कल भी मेरे चक्कर में तुम बीच ऑफ़िस से ही वापस आ गए थे।”

निखिल दो पल अनंतिका को देखता रहा लेकिन उसने अनंतिका से बहस नहीं की, उसे ख्याल रखने की और फ़ोन पास में रखने की हिदायत दे कर वो ऑफिस के लिए निकल गया।


“ब्रेकफ़ास्ट में टोस्ट और स्क्रैम्बल्ड एग्ज़ माइक्रोवेव में रख दिए हैं, कॉफ़ी भी बनी रखी है। गर्म कर के खा लेना।”


अपनी गाड़ी कॉटिज से निकालते हुए निखिल ने अनंतिका को वॉइस मैसेज भेजा। एस.यू.वी. रोड की तरफ घुमाते हुए उसकी नज़रें बगल की कॉटिज की और अनायास ही उठ गईं। अंश उसे अपने रूम की खिड़की पर खड़ा नज़र आया। वो निखिल के बेडरूम की खिड़की की और एकटक देख रहा था।


निखिल की आँखों में जैसे ग़ुस्से और घृणा की ज्वाला धधक उठी। दांत जबड़ों पर भिंच गए, उसके हाथ स्टेयरिंग व्हील पर यूँ कस गए जैसे वो अंश की गर्दन हो। निखिल के कानों में अनंतिका की उत्तेजना से भरी हुई मादक सिसकारियाँ जैसे फिर से गूंज उठीं।


‘अंशssss…’


निखिल की जलती आँखों से सामने बिस्तर पर अनंतिका का अंश का नाम पुकारते हुए मचलता हुआ नग्न जिस्म घूम गया। आँखें तब तक जलती रहीं जब तक पलकें भीग ना गयीं। अंश की नज़रें अनंतिका के बेडरूम से होती हुई बाहर रुकी हुई निखिल की गाड़ी की तरफ़ गयीं। निखिल ने पूरे रफ़्तार से गाड़ी आगे बढ़ा दी।


बेडरूम विंडो के पर्दे की ओट से अनंतिका ने सामने खड़े अंश और गाड़ी बाहर निकालते समय ठिठक कर रुके निखिल को देखा। निखिल आज सुबह काफ़ी ऑफ़ साउंड कर रहा था। क्या वो सिर्फ़ अनंतिका के स्लीप परैलिसस को लेकर परेशान था या फिर बात कुछ और थी? कहीं उसने अनंतिका को उत्तेजना में अंश का नाम पुकारते तो नहीं सुन लिया था? अनंतिका भारी कदमों से चलते हुए वापस बेड पर आ गयी। 


वो जाने कितनी ही देर वैसे ही किसी मूर्ति की तरह जड़वत बैठी रही। उसका शरीर बेशक किसी मूर्तिके समान निष्क्रीय था लेकिन उसके दिमाग में विचारों की आंधी कौंध रही थी। अंश के यथार्थ रूप और उस रूप जो अनंतिका के अंतर्मन में था, से लेकर कॉटिज की बंद मंजिलों और वहां उस बच्ची के ख्याल उसके दिलो दिमाग को चैन नहीं लेने दे रहे थे। 


उसपर से इन मनहूस विचारों में उसके बचपन के वो भयानक अध्याय भी अब जुड़ रहा था जिसे अनंतिका याद भी नहीं करना चाहती थी। स्लीप परैलिसस उसके जीवन में क्या एक बार फिर किसी आने वाले भयावह मोड़ की आहट लेकर आया था? अनंतिका ने खुद को इन विचारों से बाहर निकालना ही बेहतर समझा। बेडशीट को शाल की तरह अपने जिस्म से लपेटे हुए अनंतिका बेड से नीचे उतरी। उसने फिर पर्दे की ओट से बाहर झांका, उसे सामने की कॉटिज से उधर ही देखता अंश यथावत नज़र आया लेकिन अनंतिका ने कोई प्रतिक्रिया देने के बजाए उसे ऐसे इग्नोर कर दिया जैसे उसने अंश को देखा ही ना हो।


* * * 


ब्रेकफ़ास्ट करने की अनंतिका की ज़रा भी इच्छा नहीं थी। उसने जी भर कर शॉवर लिया और फिर तैयार होकर नीचे अपने पेंटिंग स्टूडियो में आ गयी। अनंतिका ने मन ही मन फ़ैसला किया था कि वो अंश से दूर ही रहेगी और बेकार की बातों में अपना समय और दिमाग़ ख़राब करने के बजाए अपनी पेंटिंग सिरीज़ पर फ़ोकस करेगी।


काफ़ी देर तक अनंतिका अपनी पेंटिंग सिरीज़ के रफ़ लेआउट स्केच करने की कोशिश करती रही लेकिन उसके थॉट और विज़न के अनुरूप एक भी कॉन्सेप्ट तैयार ना हो सका। बहुत जद्दोजहद के बाद भी उसके दिमाग में घुमड़ते विचार काग़ज़ पर निकलने से इनकार कर रहे थे। इसका एक कारण यह भी था कि अनंतिका के विचारों पर अंश बुरी तरह हावी था। 


क्योंकि वो डिलिबरेट्ली अंश को भुलाने और उसके बारे में सोचने से बचने की कोशिश कर रही थी, इस कोशिश में अंश का ख़्याल उसके दिमाग़ पर एक कॉन्स्टंट थॉट बन कर हावी था। अनंतिका ने झुंझला कर अपनी स्केचबुक एक ओर उछाल दी और आँखें बंद कर के अपने दिमाग़ में मची उथल-पुथल शांत करने की कोशिश करने लगी। 


आँखें बंद करते ही उसके सामने अँधेरे में अंश का अक्स उभरता। ग्रीक गॉडेस ऐफ्रोड़ाईटी के प्रेमी ऐडोनिस सा खूबसूरत, यौवन और पुरुषत्व से भरा हुआ उसका कसा बदन पसीने की चमकीली बूंदों से अलंकृत अनंतिका की परिकल्पना को चकाचौंध कर रहा था। प्रेम की देवी ऐफ्रोड़ाईटी की तरह वो अपने सर्वस्व को अंश के आगे बिछा देना चाहती थी…पर क्यों? उसकी स्वछंदता का क्या होगा? क्या वो अंश के साथ अपना भविष्य देख रही थी या फिर ये क्षुधा, ये तपस सिर्फ उसकी कामाग्नि की थी? वो निखिल के साथ खुश थी, निखिल उसके लिए हर तरह से परिपूर्ण था…बिस्तर में भी। फिर आखिर उसे अंश द्वारा स्पर्श किए जाने, चखे जाने, रौंदे जाने की दमित अभिलाषा क्यों थी? अनंतिका ने खिज कर अपनी आँखें खोल लीं। मस्तिष्क और मर्यादा पर बार-बार चोट करते इन उद्दंड प्रश्नों से डर के ही तो स्टूडियो में आई थी अब यहाँ भी वे पीछा नहीं छोड़ रहे थे। 


निखिल को ऑफ़िस गए हुए काफी समय बीत चुका था। अनंतिका ने ना तो सुबह से कुछ खाया था और ना ही खाने की इच्छुक थी। उसका जी चाह रहा था कि वापस ऊपर बेडरूम में जाकर सो जाए लेकिन उसके दुस्वप्न भी उसके उन विचारों जितने ही उद्दंड थे जिनसे वो भागना चाहती थी। अनंतिका ने निश्चय किया कि वो समय बर्बाद नहीं करेगी और काम करेगी। वो किचेन के पास ही निखिल के बनाए हुए बार में गई और अपने लिए नीट स्कॉच का एक लार्ज पेग तैयार किया। 


ड्रिंक करने के बाद अनंतिका खुद को थोड़ा बेहतर और ज्यादा कॉन्फ़िडेंट महसूस कर रही थी। उसने एक और लार्ज पेग तैयार किया जिसे लेकर वो स्टूडियो चली गई और दोबारा से स्केच करने पर कॉन्सेंट्रेट करने लगी। 


अनंतिका रेनेसाँ आर्टिस्ट लीयनॉर्डो द विंचि के आर्ट स्टाइल में न्यूड इंडियन मेल पेंटिंग सिरीज़ पर काम कर रही थी। उसने कुछ स्केचेस तैयार किए उनसे अनंतिका संतुष्ट नहीं थी। रियलिस्टिक स्टाइल में फ़िगर आर्ट बनाने के लिए हर आर्टिस्ट को एक लाइव मॉडल, एक म्यूज की ज़रूरत होती है। अनंतिका के लिए भी बिना किसी मॉडल के वो काम संभव ना था। 


यहाँ आने से पहले अनंतिका ने सोचा था कि वो निखिल को अपने लिए न्यूड पोज़ करने को कहेगी लेकिन दिक्कत यह थी कि जिस दैहिक सौन्दर्य को अनंतिका अपने कैन्वस पर उतारना चाहती थी वो निखिल के पास नहीं था। उसने ऑनलाइन इंडियन मेल मॉडल्स के न्यूड गूगल सर्च किए लेकिन उसे कुछ भी ऐसा नहीं मिला जो उसकी आवश्यकता के अनुरूप हो। उसने मेमरी ड्रॉइंग और इमैजिनेशन से कुछ स्केच बनाए, उसके हर स्केच में अंश की झलक साफ़ नज़र आ रही थी। 


अनंतिका स्केचेस में अंश के कसे हुए जिस्म को उकेरने में यूँ खो गयी कि उसे समय का अंदाज़ा ही ना लगा। उसके दिमाग़ में अंश के नग्न जिस्म के अक्स जिस तरह उभर रहे थे वो उन्हें हूबहू स्केचबुक में उकेरती चली जा रही थी। उसका ध्यान डोरबेल बजने से भंग हुआ। अनंतिका ने उठ कर दरवाज़ा खोला। चेहरे पर सहज मुस्कान लिए हुए सामने अंश खड़ा था। अंश को देख कर अनंतिका सकपका गयी। 


अंश ने मुस्कुरा कर अपने हाथ में थमी अपनी स्केचबुक और टूलबॉक्स लहराते हुए कहा।

“आर्टक्लास…रिमेम्बर?”


अनंतिका फिर से भूल गयी थी कि उसने अंश को आर्ट लैसंस देने का वादा किया था। पिछले आर्ट लैसन में सिचूएशन कुछ ऐसी हुई कि दोनों रंगों में सराबोर एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। अनंतिका ने मन ही मन खुद को हिदायत दी कि वैसी परिस्थिति में उसे दोबारा नहीं पड़ना है। अनंतिका कोई बहाना बना कर अंश को क्लास के लिए मना कर देना चाहती थी। उसने मन में अंश को इनकार करने की ठान कर मुँह खोला।


“श्योर! कम ऑन इन,” 

अपने मुँह से स्वतः निकले इस निमंत्रण पर अनंतिका खुद हैरान थी। 


उसका इरादा अंश को चलता करने का था लेकिन प्रत्यक्षतः उसकी ज़ुबान उसके दिमाग़ के बजाए उसके दिल के विचार मानने और बोलने पर आमादा थी। अनंतिका ने मुस्कुराने की भरसक कोशिश करते हुए असहाय भाव से अपना सर हिलाया और दरवाज़ा खोल कर एक तरफ़ हो गयी। मुस्कुराते हुए अंश अंदर आया।


“आपकी पेंटिंग सिरीज़ कैसी जा रही है? एनी ब्रेक-थ्रू येट?”

अंश खुद ही उसके स्टूडियो की तरफ़ बढ़ गया। अनंतिका अपने चेहरे पर बिखर आए बाल संवारने की कोशिश करते हुए उसके पीछे-पीछे आयी।


“कुछ ख़ास नहीं। मुझे एक लाइव मॉडल…” अनंतिका बोलते-बोलते कुछ सोच कर रुक गयी और फिर उसने बात बदलते हुए कहा, “नेवरमाइंड! कोशिश कर रही हूँ…आज नहीं तो कल शुरू हो ही जाएगी। तुम बताओ, आजकल क्या पेंट कर रहे हो?”


“क…कुछ भी नहीं। अपनी फ़िगरेटिव ड्रॉइंग और अनैटमी स्टडी सुधारने की कोशिश कर रहा हूँ बस। वैसे भी आज कल टाइम नहीं मिलता,”


“हाँ तुम्हारा ज़्यादातर टाइम तो हमारे कॉटिज की बेडरूम विंडो की तरफ़ घूरने में बीत रहा है,”

अनंतिका और अंश दोनों एक साथ ही उस बात पर सकपकाए। अंश संभलते हुए बोला।


“म…मैंने बताया था आपको कि मुझे स्लीप वॉकिंग सिंड्रोम है।”


“रात के साथ-साथ दिन में भी स्लीप वॉक करते हो? आज सुबह भी तुम अपनी बेडरूम विंडो पर खड़े हमारे बेडरूम में देख रहे थे,”


“मैं आपके बेडरूम में कैसे देख सकता हूँ, पर्दे लगे हुए थे अंदर कुछ नज़र नहीं आ रहा था,”


“आय’ल्ल टेक दैट ऐज़ अड्मिटेन्स,” अनंतिका ने सार्कैस्टिक्ली कहा। 


दोनों स्टूडियो में पहुँच चुके थे। अनंतिका को एहसास हुआ कि उसने स्कॉच कुछ ज़्यादा ही पी ली है, इसीलिए वो इतनी बेबाक़ी से अंश से सवाल कर रही है। स्टूडियो में एक स्टूल पर अब भी अनंतिका का स्कॉच का आधा ख़ाली ग्लास रखा था। उसने वहाँ पहुँचते ही वो आधा ख़ाली ग्लास पूरा ख़ाली करते हुए बोली।


“लेट’स सी, वॉट यू हैव बिन डूइंग,” अनंतिका अपना हाथ बढ़ाते हुए बोली। 

अंश ने झिझकते हुए अपनी स्केचबुक उसे थमा दी।


अनंतिका इत्मिनान से एक-एक पन्ना पलटने लगी। अंश ने अपने रूम विंडो के व्यू से उसकी कॉटिज की कई आर्किटेक्चरल स्केच बनायी थी। हर पेज पलटने के साथ ऐसे लग रहा था जैसे अगले पेज की ड्रॉइंग सिक्वेंश्यल आर्ट फ़ॉर्म में बनायी हुई हो, जैसी फ़्लिप बुक्स में बनायी जाती हैं। हर पेज के साथ कैमरा ज़ूम हो कर अनंतिका के बेडरूम फ़्रेंच विंडो पर फ़ोकस हो रहा था।


स्केचबुक के अगले पेज पर बेडरूम विंडो कर्टेन हटा कर वहाँ चादर ओढ़े खड़ी अनंतिका नज़र आ रही थी। अनंतिका ने अंश की तरफ़ देखा। अंश ईज़ल पर रखे बोर्ड पर पिन किए वो स्केचेस देख रहा था जो कुछ देर पहले अनंतिका बना रही थी। अंश के न्यूड स्केचेस। डोरबेल बजने पर जल्दबाज़ी और स्कॉच के नशे में अनंतिका अपना ड्रॉइंग बोर्ड कवर करना भूल गयी थी। अंश ने मुस्कुराते हुए बोर्ड कर पिन किए एक-एक स्केच को बारीकी से देखा फिर अनंतिका की तरफ़ नज़रें घुमायीं। अनंतिका को लगा कि उसके पैरों के नीचे वुडन फ़्लोर प्लैंक्स पानी में बदल जाएँ और वो शर्म से उसी पानी में डूब मरे। कहाँ तो विंडो पर शीट ओढ़ कर खड़े अपना स्केच बनाने के लिए वो अंश को आड़े हाथों लेने वाली थी और कहाँ अंश अपने कम्प्लीट न्यूड्स, वो भी काफ़ी बोल्ड एंड आउटरेजियस पॉस्चर्स में बनाने के लिए अनंतिका को ही जजमेंटल लुक्स दे रहा था। 


“इमैजिनेटिव ड्रॉइंग वाक़ई बहुत शार्प है आपकी एंड ह्यूमन अनैटमी की स्टडी भी। आपने सिर्फ़ अपनी इमैजिनेशन से इतने सटीक स्केचेस बना लिए, बिल्कुल मेरे जैसे लगते हैं,”


अनंतिका जानती थी कि अंश ने ये लास्ट लाइन जान बूझकर उसका मज़ा लेने के लिए कही थी। वो मन ही मन झेंप कर रह गयी। एम्बैरसमेंट और स्कॉच की गर्मी से अनंतिका के कान लाल हो रहे थे। उसकी इस स्थिति से अंश भी अनभिज्ञ नहीं था। अंश के होंठों पर आयी मुस्कान और अधिक फैल गयी। वो स्केचेस में बनाए गए अपने प्राइवेट पार्ट्स की तरफ़ गौर से देखते हुए बोला।


“फ़ेस एंड बॉडी स्ट्रक्चर तो ठीक है लेकिन बाक़ी चीजों में कुछ कमी रह गयी है,”

अनंतिका को कोई जवाब नहीं सूझा। अंश ने उसके पास आकार, नशे और शर्म से गुलाबी हुई अनंतिका की आँखों में देखते हुए कहा।


“आय कैन पोज़ फ़ॉर यू इफ़ यू लाइक,”

एक पल को अनंतिका को अपने कानों पर यक़ीन नहीं हुआ, उसका दिल जैसे धड़कना ही भूल गया। वो बस अपलक अंश को घूर रही थी। अंश के चेहरे पर अब भी वही बच्चों वाली शरारती मुस्कुराहट थी। वो अपने कंधे उचकाते हुए बोला।


“आय डोंट माइंड पोज़िंग न्यूड फ़ॉर यू। आपको मॉडल मिल जाएगा और मुझे आपका ह्यूमन अनैटमी स्टडी करने का स्टाइल भी सीखने का मौक़ा मिलेगा,”


अनंतिका के दिमाग़ ने उसे झँझोड़ा। उसका नशे में बहकता दिमाग़ जैसे चीख कर उससे कह रहा था, “नहीं अनंतिका, मना कर दे इसे। ये सौदा पक्का महँगा पड़ेगा तुझे,” अनंतिका ने खुद में निर्णय किया कि वो अभी के अभी अंश को ना बोल देगी और उसे वहाँ आने से भी मना कर देगी, उसे किसी ऐसे चक्कर में नहीं पड़ना जो उसके और निखिल के रिश्ते में दरार का कारण बने।


“ऑलराइट। यू कैन पोज़ फ़ॉर मी, बट मेरा कहना मानना पड़ेगा। इट कैन बी रियली हार्ड टू बी माय म्यूज। आय एम वेरी डिमैंडिंग,” अनंतिका ने मुँह तो ना बोलने के लिए खोला था लेकिन जो उसके मुँह से निकला वो अंश से ज़्यादा उसे खुद को हैरान कर गया। उसे ये समझते देर ना लगी कि उसने अपनी पूरी ताक़त लगा कर खुद अपना पैर कुल्हाड़ी पर दे मारा है।


“दैट आय कैन टैल,”


“व्हॉट?”


“दैट यू कैन बी वेरी डिमैंडिंग,”


“अच्छा! हाउ डू यू नो?”


“आपके जितना कीन एंड ऐक्यूरट तो नहीं है, फिर भी इंसानों के बारे में मेरा ऑब्ज़र्वेशन भी काफ़ी स्ट्रॉंग है, दैट्स वाय,”

अनंतिका को एहसास हुआ कि अंश उसके काफ़ी क़रीब आ कर खड़ा है, उसकी गर्म साँसों की तपिश अनंतिका को अपने चेहरे पर महसूस हो रही थी। 


“डू इट,” अनंतिका अंश की आँखों में घूरते हुए बोली।


“व्हॉट?” इस बार अंश सकपकाया।


“टेक ऑफ़ योर क्लोथ्स एंड पोज़,”

अंश और अनंतिका दोनों बिना पलकें झपकाए और बिना एक-दूसरे से नज़रें हटाए, एक-दूसरे की आँखों में घूर रहे थे। दोनों ने जैसे बिना कुछ बोले ही एक दूसरे को ओपन चैलेंज दे दिया था। बिना अपनी पलकें झपकाए, अनंतिका की आँखों में देखते हुए अंश ने अपनी टी-शर्ट उतार कर एक ओर फेंक दी। अंश का कसा हुआ जिस्म अपने इतने क़रीब देख कर अनंतिका ने अपने बदन में सिहरन दौड़ती महसूस की। अंश के जिस्म और कलोन की मिली-जुली ख़ुशबू अनंतिका के पहले से ही नशे में डूबे दिमाग़ पर ऐसे ही असर कर रहा था जैसे वोदका के साथ जिन। दोनों में से किसी की नज़रें एक-दूसरे से नहीं हट रही थी। अंश ने अपनी जींस अनबटन की और अनंतिका की आँखों में देखते हुए जींस का ज़िपर नीचे किया। 


अनंतिका की जैसे साँसें थम गयीं। 


दोनों के चारों तरफ़ वातावरण में निस्तब्ध सन्नाटा था। 


इस सन्नाटे के बीच अब उनकी गर्म साँसों का शोर भी नहीं था, दोनों की साँसें थमी हुई थीं। अनंतिका की आँखें अंश की आँखों से नहीं हटीं, हालाँकि वो हटाना चाहती थी। नशे में बहकती अनंतिका की मदहोश निगाहें अंश के कसे हुए जिस्म पर बेबाक़ फिसलने के लिए बेसब्र हो रही थीं। अंश ने अपनी दोनों इंडेक्स फ़िंगर अपनी लो-वेस्ट स्किन फ़िट ब्लू डेनिम के बेल्ट लूप्स में फँसाई और किसी प्रोफ़ेशनल स्ट्रिप टीज़र की तरह बहुत धीरे-धीरे अपनी जींस नीचे करने लगा। 


ठीक उसे समय उन्हें एक तेज आवाज़ सुनाई दी। 


लकड़ी का कोई भारी पटरा गिरने जैसी आवाज़। 


अनंतिका और अंश दोनों यूँ चौंके जैसे वो एक-दूसरे के सम्मोहन से बंधे हुए थे और आवाज़ से अचानक उनका सम्मोहन टूट गया।


“व्हॉट वज़ दैट?” अनंतिका आवाज़ की दिशा में खिड़की की तरफ़ देखते हुए बोली।


“आय डोंट नो, मस्ट बी द कैट,” अंश ने अपनी जींस ऊपर चढ़ा कर ज़िप करते हुए कहा। 


“नो! दिस वज़ समथिंग…समवन मच बिगर देन ए कैट। बाहर कॉटिज कॉम्पाउंड में कोई है जो अंदर हमें देख रहा था,”


“मैं जा कर देखता हूँ,”


अनंतिका ने नशे में होने के बावजूद भी अंश के फ़ेश्यल एक्स्प्रेशन में आया परिवर्तन साफ़ नोटिस किया। एक पल पहले तक अंश के जिस चेहरे पर बच्चों जैसी शरारती मुस्कान थी वो अब पत्थर जैसा सख़्त और सर्द नज़र आ रहा था। अंश ने नीचे पड़ी अपनी टी-शर्ट उठायी और पहनते हुए बाहर की तरफ़ बढ़ा।


“वेट, मैं भी आती हूँ,”

अनंतिका और अंश दोनों कॉटिज से बाहर निकले। जिस खिड़की के बाहर उन्हें आवाज़ सुनाई दी थी वो कॉटिज की साइड विंडो थी जिसके बाहर लकड़ी के छोटे-बड़े साइज़ के ढेरों पटरे दिवार से टिका कर रखे हुए थे। धूप और बारिश में काफ़ी समय तक रखे रहने से उनमें से कई पटरे सड़ गए थे। उनमें से एक पटरा नीचे गिरा हुआ था। हाउस वॉर्मिंग पार्टी के लिए अंश ने कॉटिज के फ़्रंट लॉन की ट्रिमिंग तो कर दी थी लेकिन कॉटिज के दोनों साइड और बैक कॉम्पाउंड एरिया अब भी घने पेड़ों, झाड़ियों और लताओं से भरे छोटे-मोटे जंगल नज़र आ रहे थे। 


“आय गेस यू वर राइट। शायद वो बिल्ली ही थी,”

अनंतिका और अंश जब खिड़की के बाहर पहुँचे वहाँ कोई भी नहीं था। अंश खिड़की के बाहर रखे लकड़ी के पटरों को गौर से देख रहा था। 


“नहीं, आप सही थीं। यहाँ से अंदर झांकने वाली बिल्ली नहीं कोई इंसान था। इन लकड़ी के पटरों को देखिए। ये काफ़ी समय से यहाँ रखे हैं जिसकी वजह से इन पर धूल-मिट्टी की मोटी परत जमी हुई है। बाहर से खड़े होने पर क्योंकि खिड़की की हाइट सात फ़ीट ऊपर हो जाती है इसलिए हमारे पीपिंग टॉम को अंदर सही ढंग से पीप करने के लिए इन पटरों पर खड़े होकर अंदर झांकने की कोशिश की,” अंश ने दिवार से टिकाए हुए पटरों की तरफ़ इशारा करते हुए कहा। 


अनंतिका का ध्यान उन पटरों की तरफ़ गया।

“ये देखिए, पटरों पर जमी हुई धूल पर फ़ुटप्रिंट्स हैं। जैसे इन पर किसी ने खड़े होने की कोशिश की लेकिन उसका पैर फिसल गया जिससे एक पटरा नीचे गिरा। हमें उसी पटरे के गिरने की आवाज़ सुनाई दी थी लेकिन हमारे बाहर आने से पहले ही वो पीपिंग टॉम भाग गया। उसके पीछे जाने का कोई फ़ायदा नहीं। अब तक तो हवा में ग़ायब हो चुका होगा,”


“स्ट्रेंज। दैट्स रियली स्ट्रेंज। कौन हो सकता है?”


“पता नहीं। यहाँ चकराता में कभी चोरी नहीं होती। इट्स ए सेफ़ नेबरहुड। प्रॉबेब्ली इट वज़ जस्ट सम क्यूरीयस किड ट्राइंग टू गेट योर ग्लिम्प्स,”

अनंतिका अंश की बात से कन्विन्स नज़र नहीं आ रही थी। 


“नो, देयर इज़ समथिंग ऑड गोइंग ऑन हेयर। हम जिस रात यहाँ आए थे तब से ही अजीब-अजीब चीज़ें हो रही हैं,”

अनंतिका ने ध्यान दिया कि अंश की जॉ-लाइन बुरी तरह तनी हुई थी। उसके पूरे शरीर में एक अजीब सा कसाव, उसके मैनरिज़म में एक तनाव था, जैसे वो अपने अंदर उमड़ते आक्रोश को बहुत मुश्किल से कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा था।


“कैसी चीज़ें? क्या हुआ था उस रात?”


“फ़ूड जॉइंट से जो डिलीवरी वाला आया था वो दरवाज़े पर ही खाना छोड़ कर भाग गया और भागते हुए पागलों की तरह बड़बड़ा रहा था,”


“क्या बड़बड़ा रहा था?”


“मुझे ठीक से याद नहीं, मेरे बाहर निकलते-निकलते वो दूर जा चुका था,”


“फिर भी, याद करने की कोशिश करिए,”


“वो निखिल से कुछ कह रहा था, ज़िंदा रहना चाहते हो तो चले जाओ यहाँ से काइंड ऑफ़ समथिंग,”


“दिखने में कैसा था वो डिलीवरी वाला?”


“पता नहीं, चेहरा तो मैंने नहीं देखा। बट ही वज़ अराउंड मिडिल एज, ऐव्रेज बिल्ट, दैट्स इट। फिर पार्टी वाली रात मुझे ऊपर के फ़्लोर पर कोई दिखायी दिया, रात को पूरे कॉटिज में अजीब-अजीब आवाज़ें आती हैं जैसे यहाँ लोग चल रहे हों। मुझे अ।।अजीब से सपने आते हैं…ज़…जो बिल्कुल सच्चे लगते हैं जैसे वो सब कुछ मेरे साथ सच में हो रहा हो…अ…और मेरी स्लीप परैलिसस वाली पुरानी बीमारी भी लौट आयी है,”


अनंतिका को एहसास हुआ कि बोलते-बोलते उसका गला रुंध गया है। अंश के फेशियल एक्स्प्रेशन चेंज हुए। उसने धीरे से अपना हाथ अनंतिका की दाहिनी बाँह पर रखते हुए कहा।


“दैट्स ऑलराइट। लेट्स गो इन्साइड,”


“येस, आय नीड अनादर ड्रिंक,”


अनंतिका को लेकर अंश कॉटिज के अंदर बढ़ गया। कॉटिज का दरवाज़ा बंद करने से पहले अंश ने एक बार चारों तरफ़ नज़र घुमाई। सामने अपने कॉटिज के फ़्रंट एरिया में व्हीलचेयर पर उसे मिसेज़ राजपूत बैठी नज़र आयीं। अंश की आँखें दो पल के लिए मिसेज़ राजपूत से मिलीं। दोनों के चेहरों पर पत्थर जैसे ठंडे लेकिन कठोर भाव थे। दोनों की चील जैसी पैनी नज़रें एक दूसरे पर गड़ी हुई थीं। अंश ने एक झटके में कॉटिज का दरवाज़ा बंद कर लिया।


* * * *


आमने-सामने बने दोनों कॉटिज के बीच से गुजरती पगडंडी सड़क का एक छोर आगे जंगल की तरफ़ जाता था और दूसरा टाउन तक जाने वाली मेन रोड से मिलता था। उस रास्ते पर कॉटिज से लगभग आठ सौ मीटर आगे एक पेड़ के नीचे निखिल की एस.यू.वी. खड़ी हुई थी। 


पेड़ से टिक कर खड़ा हुआ निखिल अपनी अब तक उखड़ी हुई साँसों को व्यवस्थित करने की कोशिश कर रहा था। उसकी उखड़ी हुई साँसों की वजह सिर्फ़ उसका तेज़ी से आठ सौ मीटर भागना ही नहीं था। 


कॉटिज में अनंतिका के ठीक सामने अपनी जीन्स अनबटन करते अंश का चेहरा अब भी निखिल की आँखों के सामने घूम रहा था। 


निखिल ने अपने कोट पॉकेट से सिगरेट केस निकाल कर एक सिगरेट होंठों से लगायी। ग़ुस्से से निखिल का पूरा शरीर काँप रहा था। उसने एक कश में ही लगभग आधा सिगरेट राख करते हुए धुआँ फेफड़ों में खींच लिया। वो धुआँ जैसे उसके जलते हुए कलेजे में जज़्ब हो कर रह गया, उसकी एक हल्की सी लकीर भी नथुनों से बाहर नहीं निकली बस अत्यधिक भावावेग को बांधने की कोशिश में आँखों के पोरों में ग़ुस्से की लाल लकीरों के साथ दर्द की नमी आ गयी। सिगरेट ख़त्म करने तक निखिल वहीं खड़ा कुछ सोचता रहा उसके बाद वो आनन-फ़ानन अपनी गाड़ी में सवार होकर टाउन की तरफ़ बढ़ गया।


निखिल निश्चिंत था कि वो बिल्कुल सही समय पर कॉटिज से बाहर निकल गया वरना अंश और अनंतिका उसे ज़रूर देख लेते, बस उसे थोड़ा शक इस बात का था कि शायद मिसेज़ राजपूत ने कॉटिज से बाहर निकलते वक्त उसकी झलक देख ली थी। फिर भी उनके बीच फ़ासला बहुत ज़्यादा था, मिसेज़ राजपूत व्हीलचेयर पर थीं और निखिल ने फ़ौरन ही अपनी पीठ उनकी तरफ़ घुमा ली थी इसलिए इस बात की सम्भावना बहुत कम थी कि उन्हें एहसास हुआ हो कि कॉटिज से निकल कर भागने वाला शख़्स निखिल है। अब निखिल को सोचने-समझने और आगे की प्लानिंग करने के लिए समय चाहिए था। 


उसने टाउन पहुँच कर गाड़ी रोकी और गाड़ी में बैठे-बैठे आगे की पूरी प्लानिंग करने लगा।


अनंतिका बार में अपने लिए एक स्टिफ़ ड्रिंक तैयार कर रही थी, उसने आँखों के इशारे से अंश को ड्रिंक ऑफ़र की, अंश ने इनकार में सर हिलाते हुए कहा,

“आपको भी इतनी नहीं पीनी चाहिए, इट्स नॉट गुड फ़ॉर यू,”


“स्टॉप पेट्रॉनायज़िंग मी। आय डोंट नीड योर मॉरल लेक्चर,” अनंतिका को एहसास हुआ कि उसका टोन एकाएक काफ़ी बिटर हो गया था, हालाँकि वो रूड साउंड नहीं करना चाहती थी लेकिन उससे इतने स्ट्रॉंग और ब्लँट स्टेट्मेंट की अपेक्षा शायद अंश ने नहीं की थी। 


वो एक पल को सकपका गया फिर फ़ौरन ही संभलते हुए बोला,

“अ…आय एम सॉरी, मेरा वो मतलब नहीं था,”


“फिर क्या मतलब था?”

अंश को कोई जवाब ना सूझ, तभी अनंतिका का मोबाइल बजा। कॉल निखिल का था।


“येस निखिल,”


“हाउ आर यू फ़ीलिंग नाउ, अनी?” फ़ोन पर दूसरी तरफ़ से निखिल की आवाज़ आई। 


“आय एम नॉट श्योर हाउ आय शुड फ़ील,”


“क्या हुआ अनी?”


“आज कोई दिन दहाड़े कॉटिज वॉल फाँद कर अंदर कॉम्पाउंड में घुस आया था और कॉटिज में झांकने की कोशिश कर रहा था,”


“व्हॉट! कौन था? तुम ठीक तो हो?”


“आय एम फ़ाइन। शायद कोई चोर था। लकिली अंश अपने आर्ट सेशन के लिए आया हुआ है, उसने इंट्रूडर का पीछा करने की कोशिश की लेकिन वो भाग निकला,”

अनंतिका ने अंश के वहाँ होने की बात निखिल से नहीं छुपायी लेकिन उसने ये भी नहीं बताया कि जिस समय ‘इंट्रूडर’ अंदर झांकने की कोशिश कर रहा था उस घड़ी अंश अनंतिका के सामने खड़ा अपनी पैंट खोल रहा था। यह सोचते हुए निखिल दो पल ख़ामोश रहा।


“पुलिस को इन्फ़ॉर्म किया?”


“क्या फ़ायदा? भागने वाला तो भाग चुका, इसमें पुलिस भला क्या करेगी। तुम कब तक वापस आओगे?”


“मैंने यही बताने के लिए कॉल किया था, मुझे वापस आने में तीन-चार दिन लगेंगे। अर्जेंट्ली वापस दिल्ली जाना पड़ रहा है फ़र्म के काम से,”


“यार अब ऐसा भी क्या ज़रूरी काम है जो तुम्हारे जाए बिना नहीं होगा?” अनंतिका बुरी तरह झल्लाते हुए बोली।


“अकाउंट्स, लेजर्स एंड डेटा शीट्स की बोरिंग टेक्निकल डिटेल्ज़ आपकी समझ में नहीं आएँगी पेंटर मै’म,”


“मुझे बनाने की कोशिश मत करिए मिस्टर अकाउंटेंट,” अनंतिका की आवाज़ में इस बार नशे की कशिश थी। 


“मुझे तो सिर्फ़ लाइफ़ की बैलेन्स शीट में ऐसेट एंड लायअबिलिटीज़ का सीधा-सीधा हिसाब लगाना आता है, बनाने और रचने की कला तुम्हें आती है अनी मुझे नहीं,”

अनंतिका समझ नहीं पायी कि निखिल उससे यह बात मज़ाक़ में कही है या फिर एक टॉंट की तरह। 


“गॉट’टा गो। यू टेक केयर ऑफ़ योरसेल्फ़,”

कॉल डिस्कनेक्ट हो गयी। 


“दैट वज़ स्ट्रेंज,” अनंतिका खुद में बड़बड़ाते हुए बोली। उसे निखिल का कोल्ड एंड इम्पैसिव बिहेव्यर खटक रहा था।


“वॉट’स द डील?”


“नथिंग, निखिल इज़ ऑफ़ टू डेल्ही फ़ॉर ए कपल ऑफ़ डेज़। आय ड’नो वॉट आय’ल्ल ड़ू हेयर अलोन,”


“अलोन! यू आर नेवर अलोन हेयर,” अंश का चेहरा एकाएक बिल्कुल सर्द हो गया। वो अनंतिका की आँखों में देखते हुए खरखराती आवाज़ में बोला। एक पल के लिए अनंतिका सकपका गयी, अंश के चेहरे पर उसे देखते हुए बिल्कुल वैसे ही भाव थे जैसे स्लीप परैलिसस में अनंतिका ने एक्स्पिरीयन्स किए थे।

“अरे मैं हूँ ना यार! आप अकेले क्यों रहोगे? वैसे भी चकराता जैसे कूल टूरिस्ट प्लेस पर हो, लोग कहाँ-कहाँ से यहाँ घूमने नहीं आते और एक आप हो कि यहाँ आकार भी खुद को इस कॉटिज में बंद किए बैठे हो। मेरे साथ चलो मैं आपको चकराता का चप्पा-चप्पा दिखाता हूँ,”


अंश के चेहरे पर फ़ौरन ही उसकी बच्चों वाली शरारती सिग्नेचर स्माइल वापस आ गयी। अनंतिका की जैसे साँस में साँस आयी, वो अंश के सीने पर मुक्का मारते हुए बोली।

“यू आर सच ए पिग!”


“ओईंक-ओईंक” अंश सूअर की आवाज़ की नक़ल कर के अनंतिका को चिढ़ाने लगा। अनंतिका ने बार काउंटर पर रखा अपना स्कॉच ग्लास ख़ाली किया और अंश की तरफ़ बढ़ते हुए बोली।


“यू नॉटी लिटिल पिग, देख अभी मैं कैसे तेरे पॉर्क चॉप्स बनाती हूँ,”


अंश खिलखिलाते हुए अपने पीछे आती अनंतिका की पकड़ से बचते हुए भागा। अनंतिका और अंश में बच्चों की तरह जैसे चोर-पुलिस का गेम शुरू हो गया था। लिविंग एरिया के काउच पर से जम्प करते हुए अंश सीढ़ियों की तरफ़ भागा। नशे में लड़खड़ाते कदमों से अनंतिका भी उसके पीछे आयी। अचानक काउच से टकरा कर अनंतिका का बैलेन्स ऑफ़ हुआ। अगले ही पल अनंतिका मुँह के बल फ़र्श पर जा गिरती अगर अंश उसे बाहों में ना थाम लेता। अनंतिका संभल कर अंश से अलग होते हुए खड़ी हुई। ठीक उसी समय अंश का मोबाइल बजा।


“माँ कॉल कर रही हैं, काफ़ी देर हो गयी उन्हें अकेला छोड़ कर यहाँ आए हुए। मुझे जाना होगा,” 

अनंतिका ने सहमति में सर हिलाया। कॉटिज के दरवाज़े पर पहुँच कर अंश बोला।


“तो कल से चकराता टूर शुरू करें?”


अनंतिका ने मुस्कुराते हुए सहमति में सर हिलाया। अंश से दूर रहने की उसकी डेटर्मिनेशन एक दिन भी टिक ना पायी थी। वैसे भी निखिल की ग़ैर मौजूदगी में वो अकेले कॉटिज में तीन-चार दिन काटने के मूड में बिल्कुल नहीं थी। उसने सोचा कि इसी बहाने शायद उसका दिमाग़ स्लीप परैलिसस और नाइटमेयर्स से डाएवर्ट हो जाए।


अंश के जाने के बाद अनंतिका वापस अपने स्टूडियो में गयी। उसका ध्यान स्टूल पर रखी अंश की स्केचबुक पर गया। जाने की जल्दबाज़ी में अंश अपनी स्केचबुक ले जाना भूल गया था। अनंतिका ने स्केचबुक उठायी और उँगली के स्केचबुक का लेदर माउंट कवर ठकठकाते हुए कुछ सोचने लगी। फिर स्केचबुक लेकर वो ऊपर बेडरूम की तरफ़ बढ़ गयी। अनंतिका का सर नशे से बुरी तरह घूम रहा था और अब उसे भूख भी लग रही थी। उसने रेग्युलर फ़ूड जॉइंट कॉल कर के मेक्सिकन फ़ूड ऑर्डर किया। 


बेडरूम से अटैच्ड वॉशरूम में जा कर अनंतिका ने वॉश बेसिन का फ़ॉसेट खोला और अपना सर व खुले हुए बाल पानी के नीचे सिंक में झुका दिया। बालों से होते हुए चेहरे पर आता ठंडा पानी उसे सुकून का एहसास दे रहा था। कुछ देर तक अनंतिका वैसे ही हेड बाथ लेती रही फिर वापस बेडरूम में आ कर उसने टॉल्ल से अपने बाल सुखाए और बेडरूम के लाइफ़साइज़ बिल्ट-इन क्लॉज़ेट से सिंगल पीस पुल ओवर ड्रेस निकाल कर कपड़े चेंज किए। 


क्लॉज़ेट बंद कर के अनंतिका बेड पर लेट गयी और इत्मिनान से अंश की स्केचबुक के पेजेस पलटने लगी। कॉटिज विंडो पर खड़ी अनंतिका के अलावा आगे के पन्नों पर अंश ने अनंतिका के और भी कई स्केच उकेरे थे। चार्कोल स्टिक से स्मज टेक्नीक में बनाए गए स्केचेज़ में अंश ने अनंतिका के वेरीयस मूड्ज़ एंड एक्स्प्रेशन कैच करने की कोशिश की थी। अनंतिका फ़ुल स्प्रेड में बनाए अपने क्वॉर्टर प्रोफ़ाईल फ़ेस और आँखों पर हौले से उँगलियाँ फिरा रही थी, इस बात का पूरा ध्यान रखते हुए कि वो उसे स्मज ना कर दे। 


उस स्केच में अनंतिका की आँखों में अंश ने जो गहराई और भाव उकेरे थे वो चीख-चीख कर बयान कर रहे थे कि अंश के मन में अनंतिका के लिए फ़ीलिंग्स थीं। अनंतिका अगला पृष्ट पलटती उससे पहले ही कॉटिज की डोरबेल बजी। अब तक अनंतिका नशे से बुरी तरह बोझिल हो चुकी थी, वो अब बस खाना खा कर सोना चाहती थी। उसने डिसाइड किया कि वो डिनर के साथ एक और स्टिफ़ ड्रिंक लेगी ताकि एक बार जो बेड पर गिरे सीधे अगली सुबह ही उसकी आँख खुले। यह सोचती और अपने बहकते कदमों को सम्भालती हुई अनंतिका दरवाज़े तक पहुँची।


दरवाज़ा खोलते ही अनंतिका यूँ चौंकी कि उसका आधा नशा उतर गया।

“त…तुम?” सामने खड़े शख़्स को देख कर अनंतिका की ज़बान लड़खड़ायी। 


“तुम तो वही हो ना जो पहले डिलीवरी के लिए आए थे और दरवाज़े पर खाना फेंक कर बकवास करते हुए भाग गए थे?”


अनंतिका ने पिछली रात उस शख़्स का चेहरा ध्यान से नहीं देखा था और फ़िलहाल वो काफ़ी नशे में थी फिर भी उसे यक़ीन था कि अपने सामने खड़े डिलीवरी वाले को पहचानने में वो गलती नहीं कर रही। चालीस-पैंतालीस साल का, लम्बा और इकहरे बदन वाला वो शख़्स जिसके चेहरे पर अब भी अजीब से भाव थे और अपनी हल्की भूरी आँखों से नज़रें चुरा कर अनंतिका को देख रहा था, उसने हौले से सहमति में सर हिलाया। 


अनंतिका रोष में बोली।


“हमने पिछली बार ही तुम्हें डिलीवरी के लिए भेजने को मना किया था, इन लोगों ने फिर से तुम्हें भेज दिया। नाम क्या है तुम्हारा?”

उस शख़्स ने फ़ूड पार्सल अनंतिका की तरफ़ बढ़ाते हुए विनती की।


“म…मनोहर नाम है मेरा..प…पर प्लीज़ आज मेरी कम्प्लेन मत करना मैडम मेरी नौकरी चली जाएगी। य…ये छोटा क़स्बा है, यहाँ किसी नौकरी से निकाले जाने पर काम मिलना आसान नहीं।म…मेरे जैसे आदमी के लिए तो बिल्कुल भी नहीं। उ…उस दिन की अपनी हरकत के लिए मैं माफ़ी माँगता हूँ।”


“लेकिन तुम ऐसे पागलों की तरह भागे क्यों थे?” अनंतिका ने पार्सल लेते हुए सवाल किया। उसने देखा कि मनोहर उसके सवाल का जवाब देने के बजाए हिचकिचाते हुए इधर-उधर ताक रहा था जैसे जल्द से जल्द वहाँ से भाग निकलना चाहता हो लेकिन फिर से शिकायत किए जाने और नौकरी गँवाने के डर से वैसे कर नहीं पा था। अनंतिका ने सौ रुपए का नोट उसकी तरफ़ बढ़ाते हुए कहा।


“ये टिप रखो, देखो मैं तुम्हारी कम्प्लेन नहीं करूँगी लेकिन एक कंडिशन पर। मुझे सच-सच बताओ तुम यहाँ से क्यों भागे थे, किस बात से डरे हुए हो तुम?”

मनोहर ललचाई हुई चोर नज़रों से कभी उस सौ रुपए को देखता तो कभी अनंतिका को देख कर ये फ़ैसला करने की कोशिश करता कि क्या उसे अनंतिका के सवालों का जवाब देना चाहिए या वहाँ से फ़ौरन भाग निकलना चाहिए। अंततः उसने हौले से अनंतिका के हाथ से सौ रुपए का नोट लेते हुए कहा।


“य…ये जगह बहुत मनहूस है। यहाँ रहने वालों में से हमेशा कोई ना कोई म…मर जाता है…नहीं।मार दिया जाता है। इस अभिशप्त कॉटिज के खूनी इतिहास को दबा दिया गया, बस जो यहाँ के पुराने बाशिंदे हैं वो ही जानते हैं अ…और इस जगह से दूर रहते है,”

अनंतिका को मनोहर की बात सरासर बकवास लगी। उसके चेहरे से उसके आंतरिक मनोभाव साफ़ झलक रहे थे जिन्हें मनोहर भी समझ गया।


“खुद सोचिए मैडम, टूरिस्ट प्लेस पर प्राइम लोकेशन में इतने सालों से इतनी बड़ी कॉटिज ऐसे बंद और उजाड़ क्यों पड़ी हुई है?”


“क्योंकि यहाँ भूत-प्रेत और भटकती आत्माओं का वास है,” अनंतिका आँखें रोल करते हुए सार्कास्टिक टोन में बोली लेकिन उसने ध्यान दिया कि उसके सार्कैज़्म का मनोहर पर कोई असर ना पड़ा। 


“कुछ उससे भी बुरा। यहाँ कुछ है जो बहुत ही बुरा और शैतानी है। इस कॉटिज की हर मंज़िल पर खुद मौत और शैतान का वास है…द..देखिए मैडम अ…आपने पूछा तो मैंने बता दिया, इससे ज़्यादा मुझे कुछ नहीं पता। बस मेरी कम्प्लेन मत करना,” मनोहर ने नोट बेतरतीबी से मोड़-तोड़ कर अपने पैंट के बैक पॉकेट में ठूँसा और एक हाथ से अनंतिका को सलाम करते हुए मशीनी अन्दाज़ में वापस जाने के लिए पलट गया और बहुत ही तेज कदमों से चलते हुए, लगभग भागते हुए, कॉटिज कॉम्पाउंड क्रॉस कर के आयरन गेट खोल कर बाहर निकल गया। 


अनंतिका ने ध्यान दिया कि मनोहर अपना सर नीचे की तरफ़ कर के वहाँ से निकला था और उसने एक बार भी वापस पलट कर अनंतिका या उस कॉटिज की तरफ़ नहीं देखा। 

“क्रीप!” 


खुद में बड़बड़ाते हुए अनंतिका ने दरवाज़ा बंद किया और खाना लेकर बार एरिया के पास रखे डाइनिंग टेबल पर रख दिया। 


कुछ सोचते हुए अनंतिका वापस अपने स्टूडियो में पहुँची। वहाँ की खुली खिड़की उसने अच्छी तरह अंदर से बंद की। कॉटिज में एक पिछला दरवाज़ा भी था जो किचेन से कॉटिज के पिछले कॉम्पाउंड और बैक लॉन पर निकलता था और वो हमेशा बंद ही रहता था। किचेन में पहुँच कर अनंतिका चौंकी। बैकडोर का लैच खुला हुआ था। अनंतिका को यह बात बहुत अजीब लगी। उसे यक़ीन था कि वो दरवाज़ा हमेशा की तरह अंदर से बंद था क्योंकि उस दरवाज़े का इस्तेमाल ना अनंतिका करती थी ना निखिल। उसने डिसाइड किया कि अगली बार जब भी उसकी निखिल से बात होगी वो दरवाज़े की बाबत उससे सवाल करेगी। अनंतिका ने दरवाज़े का लैच लगाया इसके बाद ऊपर बेडरूम में पहुँची। उसने बेडरूम की फ़्रेंच विंडो भी अच्छी तरह बंद की। अब अनंतिका पूरी तरह आश्वस्त थी कि कॉटिज में आने के सारे रास्ते अच्छी तरह से बंद हो चुके हैं। अकेले रहने पर वो किसी भी तरह का कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी। ख़ास कर उस क्रीपी डिलीवरी वाले की बकवास सुनने के बाद तो बिल्कुल भी नहीं। अनंतिका कुछ पल तक सोचती रही इसके बाद उसने कैबिनेट से एक बड़ा फ़ाइव लिवर लॉक निकाला और सेकंड फ़्लोर के बंद दरवाज़े पर पहुँची। उसने दरवाज़े पर ताला लगा कर अच्छी तरह तसल्ली कर ली। फ़ाइनली अनंतिका ने चैन की साँस ली और डिनर करने नीचे बढ़ गयी।


अपनी सायकल पर सवार होकर मनोहर कॉटिज से लगभग उसी स्पीड से भागा जिस स्पीड से पिछली बार भागा था। उसके दिमाग़ में एक सवाल बार-बार चोट कर रहा था, क्या उसे उस लड़की को कॉटिज के बारे में सब कुछ सच-सच बता देना चाहिए था? भाड़ में जाए लड़की! उसने तो मनोहर ने जितना बताया उस पर भी यक़ीन नहीं किया था। मनोहर जानता था कि वो लड़की मन ही मन उसपर हंस रही थी और उसे पागल समझ रही थी। उसने जितना उस लड़की को बता दिया वही बहुत था, उसने भला कोई ठेका थोड़े ही ना लिया हुआ है उस लड़की का। मनोहर तो आज वापस डिलीवरी करने जाना ही नहीं चाहता था लेकिन गिनते के तीन डिलीवरी वाले हैं फ़ूड जॉइंट पर, जिनमें से एक छुट्टी पर था और दूसरा कहीं और डिलीवरी करने गया था इसलिए मालिक ने उसे नौकरी से निकालने की धमकी दे कर कॉटिज भेजा था। आज मनोहर ने कॉटिज की दूसरी मंज़िल की ओर नज़र उठा कर भी नहीं देखा। उस लड़की को आगाह करने के लिए भी जितना वो कर सकता था उसने कर दिया था। मनोहर ने फ़ैसला किया कि वो वापस जा कर मालिक से साफ़-साफ़ कह देगा कि आइंदा अगर कभी उसे डिलीवरी के लिए कॉटिज भेजा गया तो वो खुद ही नौकरी छोड़ देगा लेकिन वहाँ हरगिज़ नहीं जाएगा। 


मशीनी अन्दाज़ में सायकल के पैडल पर चलते मनोहर के पैरों और उसके दिमाग़ में साथ-साथ चल रहे इन विचारों को अचानक एक झटका लगा। उसके सायकल की चेन उतर गयी थी। अभी मनोहर कच्चे रास्ते की ढलान चढ़ कर टाउन जाने वाली मेन रोड पर आया ही था। वहाँ काफ़ी अंधेरा था, रोड डाईवर्ज़न पर एक स्ट्रीट लाइट जल रही थी। मनोहर सायकल से उतरा और उसे घसीटते हुए किनारे जलती लाइट के नीचे ले आया। उसे पूरे रास्ते ऐसा लग रहा था जैसे कोई उसका पीछा कर रहा हो। वो जानता था कि ये सिर्फ़ उसके मन का वहम है, उसके दिमाग़ का डर जो उस पर हावी हो रहा था। सायकल की चेन चढ़ाते हुए मनोहर बार-बार नीचे जाती ढलान और कच्चे रास्ते की तरफ़ देख रहा था, उसे डर था कि उसके दिमाग़ का डर मूर्त रूप लेकर अंधेरे से किसी भी पल निकल सकता है। 


सायकल की चेन चढ़ा कर सीधा खड़ा हुआ ही था कि सामने ढलान की तरफ़ देख कर उसकी सिसकारी निकल गयी। ढलान के नीचे पेड़ों और झाड़ियों से घिरे कच्चे रास्ते पर अंधेरे में कुछ हलचल हो रही थी। एक साया अंधेरे में उभरा, वो ढलान पर मनोहर की तरफ़ बढ़ रहा था। मनोहर क्योंकि खुद ठीक लाइट के नीचे खड़ा था और साया अंधेरे में ढलान चढ़ते हुए उसकी तरफ़ बढ़ रहा था इसलिए साये का चेहरा देख पाना उसके लिए असम्भव था। एक पल को मनोहर ने सोचा कि वो बेवजह ही डर रहा है, वो साया उधर से गुजरने वाला कोई राहगीर भी हो सकता है। मनोहर काफ़ी स्पीड में सायकल चलाते हुए कॉटिज से वहाँ तक पहुँचा था, किसी पैदल इंसान के लिए इतनी तेज़ी से भाग कर उसके पीछे आना असम्भव था। मनोहर तेज़ी से सायकल पर सवार हुआ, वो उस साये के क़रीब आने से पहले ही वहाँ से भाग जाना चाहता था। इससे पहले कि मनोहर पैडल करता उसकी नज़रें आख़री बार उस साये पर पड़ीं। तेज़ी से क़रीब आते साये पर स्ट्रीट लाइट की रौशनी पड़ते ही उसके हाथ में कोई चीज़ चमकी। मनोहर एक पल में समझ गया कि वो एक बड़े फल वाला छुरा है। मनोहर की नज़र अब उस साये के चेहरे और आँखों पर पड़ी। सर्द रात में भी मनोहर पसीने से तर, हाँफ रहा था। उसने पूरी ताक़त झोंक कर सायकल आगे मेन रोड पर भगायी। मनोहर का पूरा ध्यान अपनी तरफ़ आते साये की ओर था ना कि सामने सड़क की ओर। इसीलिए उसे अपनी तरफ़ तेज़ी से आते ट्रक का एहसास तब हुआ जब डिपर हेडलाइट्स की रौशनी में वो सराबोर हो गया। मनोहर पलटा, रौशनी से उसकी आँखें चौंधियाईं, चीखने का भी मौक़ा नहीं मिला उसे। मनोहर का सर ट्रक के नीचे आ गया। ट्रक ड्राइवर नशे में था, जब तक उसके पैर ब्रेक पर कसे, मनोहर का काम तमाम हो चुका था। ड्राइवर को जैसे ही एहसास हुआ कि उसने क्या किया है उसके पैर ऐक्सेलरेटर पर यूँ कसे जैसे कभी उठेंगे ही नहीं। मनोहर के पीछे आते साये का कोई अता-पता नहीं था, ऐसा लग रहा था जैसे वो साया हवा में ग़ायब हो गया हो। रात के अंधेरे में सड़क पर सिर्फ़ मनोहर की सर विहीन गुमनाम लाश पड़ी थी।


* * * * 


नीचे आते समय अनंतिका अपना लैपटॉप साथ लेते आयी थी। डाइनिंग टेबल पर खाना खाते हुए अनंतिका कॉटिज की बैकहिस्ट्री गूगल कर रही थी। बहुत कोशिशों के बाद भी उसे कुछ नहीं मिला।


“ये फ़िल्मों और सिरीज़ में क्या बेवक़ूफ़ बनाते हैं। गूगल सर्च करते ही खून-क़त्ल से लेकर हॉंटेड मैन्शन तक की सारी बैकहिस्ट्री सामने आ जाती है। रियल लाइफ़ में गूगल कर-कर के मर जाओ फिर भी कुछ नहीं मिलेगा,”

अपने ड्रिंक का सिप लेते हुए अनंतिका खुद में बड़बड़ाई। 


क्या डिलीवरी वाला सच कह रहा था? अगर वो सच कह रहा था तो ऐसी कोई भी जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध क्यों नहीं है? अनंतिका को वैसे भी उस आदमी की बातों पर कुछ ख़ास यक़ीन नहीं हुआ था लेकिन फिर भी, इस कॉटिज में आने के बाद उसके खुद के साथ जो बीती थी वो उसे भी झुठला नहीं सकती थी। अनंतिका ने अपना डिनर और ड्रिंक ख़त्म किया। वो बुरी तरह थकी हुई और नशे से सराबोर थी। नशा उस पर इस कदर हावी था कि सीढ़ियाँ चढ़ कर ऊपर बेडरूम तक जाना उसके लिए इम्पॉसिबल टास्क था। नशे में लड़खड़ाती अनंतिका किसी तरह डाइनिंग एरिया से उठी और लिविंग एरिया में काउच पर आ कर ढेर हो गयी। अनंतिका फ़ौरन ही गहरी नींद और नशे के अंधकार में पूरी तरह डूब चुकी थी।


अनंतिका को समय का कोई अंदाज़ा नहीं था फिर भी उसे ये एहसास था कि काफ़ी रात बीत चुकी है फिर भी भोर होने में अब भी कुछ घंटे बाक़ी हैं। उसकी गहरी नींद ऊपर से आती आवाज़ों से खुली थी। पहले कुछ देर चरमराहट की तीखी आवाज़ आयी जैसे कोई लकड़ी का दरवाज़ा खुल रहा हो, इसके बाद दबे पाँव चलने जैसी आवाज़ आयी। कुछ देर तक अनंतिका को लगता रहा कि ये सिर्फ़ उसके नशे में दूबे दिमाग़ की कल्पना है लेकिन समय के साथ पदचापों की आवाज़ बढ़ी। अब ऐसा लग रहा था जैसे ऊपर एक से अधिक लोग पूरे फ़र्स्ट फ़्लोर पर चल रहे है। नहीं, ये वहम या कल्पना नहीं हो सकती, अनंतिका ने बहुत मुश्किल से अपनी आँखें खोलीं, उसका सर बुरी तरह घूम रहा था। 


अपनी साँस रोक कर उसने अपने घूमते दिमाग़ और ध्यान को ऊपर से आती आवाज़ों पर केंद्रित करने की कोशिश की। 

ऐसा लग रहा था जैसे ऊपर कोई चारों तरफ़ कुछ ढूँढ रहा है। अनंतिका का दिमाग़ फ़ौरन चौकन्ना हुआ, अपने कान के पर्दों पर उसे दिल की धड़कन चोट करती महसूस हो रही थी, अपनी उखड़ी हुई साँसों को क़ाबू में करने की वो भरसक कोशिश कर रही थी क्योंकि अस्थमा पेशंट जैसी उसकी स्थिति ऊपर जो कोई भी था उसे अनंतिका की बाबत चौकन्ना कर सकती थी। 


काउच से उठने में अनंतिका को अपने जिस्म का पोर-पोर दर्द करता महसूस हुआ, उसने मन ही मन फ़ैसला किया कि वो हर हाल में अपनी शराब की तलब पर लगाम लगाएगी। ग्राउंड फ़्लोर के दोनों दरवाज़े और सभी खिड़कियाँ अंदर से बंद थीं। बिना आवाज़ के, दबे पाँव चलते हुए अनंतिका अपने स्टूडियो पहुँची, वहाँ से उसने वुडन ईज़ल का अलग कर के रखा पाया उठा लिया और उसे बैट की तरह पकड़ कर वापस सीढ़ियों की ओर बढ़ी। ऊपर से अब कोई भी आवाज़ नहीं आ रही थी, वातावरण में रात की ठंड होने के बावजूद कॉटिज में एक असाधारण घुटन भरा सन्नाटा व्याप्त था। अनंतिका का सर अब भी घूम रहा था और उसकी साँस फूल रही थी। काँपती उँगलियों से उसने वुडन लॉग मज़बूती से पकड़ने की कोशिश की और सीढ़ियाँ चढ़ते हुए ऊपर फ़र्स्ट फ़्लोर पर पहुँची। सेकेंड फ़्लोर पर जाने वाला स्टेयर-वे डोर भी बंद था, उसपर अनंतिका का लगाया हुआ ताला इंटैक्ट लटक रहा था यानी ऊपर से किसी के आने का कोई चान्स नहीं था। बेडरूम का दरवाज़ा बंद था, अनंतिका ने दिमाग़ पर ज़ोर डालने की कोशिश की कि उसने नीचे उतरते समय उसने बेडरूम डोर खुला छोड़ा था या बंद किया था। वो इतने नशे में थी कि उसके लिए ये याद कर पाना सम्भव नहीं था। उसने डोर नॉब घुमा कर दरवाज़े को अंदर की तरफ़ धकेला, लकड़ी का पुराना दरवाज़ा चरमराहट के साथ अंदर की ओर खुला लेकिन अनंतिका ने ध्यान दिया कि इस चरमराहट की आवाज़ उस आवाज़ से अलग है जो पहले उसे सुनाई दी थी। 


अनंतिका एक झटके में रूम के अंदर दाखिल हुई, उसने हाथ में थमी लकड़ी क्रिकेट बैट की तरह हवा में चारों तरफ़ घुमाई।


“कम आउट यू सन ऑफ़ ए बिच! आय नो यू आर हाइडिंग हेयर,” अनंतिका को खुद अपनी आवाज़ किसी लम्बे हॉलो ट्यूब से आती सुनाई दी। नशा अब भी उस पर हावी था।

बेडरूम ख़ाली था। 


अनंतिका झुंझलाई। ऐसा कैसे हो सकता था। उसने ऊपर से आती आवाज़ें साफ़-साफ़ सुनी थीं। क्लॉज़ेट! क्या वहाँ आने वाला इंट्रूडर अनंतिका के आने की भनक पा कर क्लॉज़ेट में जा छुपा था? क्लॉज़ेट इतना बड़ा था जिसमें दो लोग बहुत आराम से समा सकते थे। अनंतिका तेज़ी से बंद क्लॉज़ेट की तरफ़ बढ़ी। अंदर से यकीनन किसी के होने की, सरसराहट की आवाज़ आ रही थी। अनंतिका ने हाथ में थमी लकड़ी हिट करने के लिए उठा ली। उसने तेज़ी से क्लॉज़ेट का स्लाइडर डोर सरकाया और लकड़ी वाले हाथ से अंदर वार किया। अनंतिका का वार ख़ाली गया लेकिन क्लॉज़ेट ख़ाली नहीं था। क्लॉज़ेट से एक काले साये ने अनंतिका के ऊपर छलांग लगाई। 


अनंतिका की ज़ोरदार चीख कॉटिज के बाहर तक गूंजी।


 * * *

 

कहानी जारी है  

READ NEXT CHAPTER

Copyright © 2025 THE PHOENIX WOLF - All Rights Reserved.

  • TPWG-STUDIO

This website uses cookies.

We use cookies to analyze website traffic and optimize your website experience. By accepting our use of cookies, your data will be aggregated with all other user data.

DeclineAccept