ॐ नमः हरिहराय
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ॐ नमः हरिहराय
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नितिन के. मिश्रा
“ई ई ई ई sss”
अनंतिका की तीखी और ज़ोरदार चीख वातावरण में दूर तक गूंजी।
इस चीख की गूंज सामने वाले कॉटिज में अंश तक भी पहुँची। यूँ तो अमूमन इस समय तक अंश सो चुका होता था और बतौर उसके ‘स्लीप वॉक’ कर रहा होता था लेकिन उस रात अंश की आँखों से नींद कोसों दूर थी।
अनंतिका के बारे में सोचते हुए, ख़ास कर उसके साथ गुजरी पिछली दोपहर और शाम की घटनाओं के बारे में सोचते हुए रात कब गुज़र गयी, अंश को ख़्याल भी नहीं था। वो तो यूँ ही उन ख़यालों में डूबे हुए बची रात भी गुज़ार लेता अगर उसके ख़यालों को अनंतिका की चीख का झटका ना लगा होता।
अंश लपक कर अपने कमरे की फ़्रेंच विंडो पर पहुँचा। उसे यक़ीन था कि देर रात गए सन्नाटे में गूंजी वो चीख उसके कल्पना की उपज नहीं थी बल्कि अनंतिका के गले से निकली थी, और सामने वाली कॉटिज से आयी थी। सामने वाली बेडरूम विंडो पर्दे से ढकी हुई थी, हालाँकि बेडरूम में रात के उस समय भी लाइट जल रही थी, अंश कुछ मिनट तक इस आस में खड़ा रहा कि शायद पर्दे के पार अनंतिका का साया नज़र आ जाए लेकिन उस चीख के बाद घुप्प सन्नाटा व्याप्त हो चुका था। अंश का चेहरा पत्थर की मानिंद सख़्त हो गया और आँखों में सुर्ख़ लाल डोरे तैरने लगे।
रात काफ़ी देर तक मिसेज़ राजपूत को नींद नहीं आयी थी। उनका दिमाग़ बीते समय में घटित हुई घटनाओं में उलझा हुआ था। विचारों की दिशाहीन धारा बहते हुए उनके नए पड़ोसी, अनंतिका और निखिल तक आ पहुँची। मिसेज़ राजपूत को घुटन का एहसास होने लगा, उनका ज़ी आया कि वहाँ से निकल कर कहीं भाग जाएँ, लेकिन फिर उन्हें अपनी लाचारी का ख़्याल आया। बेचैनी और भी बध गयी, जिसे दबा कर वो सोने की कोशिश करने लगीं। यादों के बोझ से थका हुआ मन मस्तिष्क को धीरे-धीरे अंधेरे की ओर धकेल रहा था कि अचानक उस अंधेरे को चीरती एक चीख कौंधी।
मिसेज़ राजपूत की आँख खुल गयी, यह चीख अनंतिका की थी।
ग्राउंड फ़्लोर पर उनका बेडरूम अंश के बेडरूम के ठीक नीचे स्थित था और उनका बेड कमरे की खिड़की से लगा हुआ था। खुली खिड़की की चौखट व पल्ला पकड़ कर मिसेज़ राजपूत ने अपना ऊपरी शरीर सीधा किया और खिड़की से बाहर, चीख की दिशा में देखने लगीं। सामने कोई हलचल ना नज़र आयी लेकिन कुछ पल बाद उनके घर का बाहरी दरवाज़ा खोल कर बग़ल के कॉटिज की ओर बढ़ता अंश उन्हें नज़र आया।
रात के अंधेरे और उम्र के साथ धुंधली होती अपनी आँखों की रौशनी के बावजूद, कॉटिज की तरफ़ बढ़ते अंश के जिस्म की थरथराहट, आवेश से उसका तमतमाया चेहरा उन्हें साफ़ दिखाई दे रहा था। मिसेज़ राजपूत के सूखते गले से एक फँसी हुई सिसकारी निकली, उनकी साँस फूलने लगी। साइड टेबल पर रखे वॉटर पिचर से उन्होंने ग्लास में पानी डाला। पानी पी कर ग्लास टेबल पर रखते हुए मिसेज़ राजपूत ने टेबल की दराज खोली जिसमें एक पुराना फ़ोटो ऐल्बम, लकड़ी का एक नक्काशीदार चौकोर बक्सा और कुछ काग़ज़ रखे हुए थे।
इस सामान के नीचे दराज का लकड़ी का पल्ला हटाने पर एक और ख़ुफ़िया दराज थी जिसमें एक पुराने जमाने की रिवॉल्वर, कुछ कारतूस और कुछ पुरानी विंटेज ज्वेलरी जिसकी क़ीमत आज की तारीख़ में करोड़ों में होगी, छुपा कर रखे गए थे। इस सामान के अलावा वहाँ एक दूरबीन थी जो मिसेज़ राजपूत ने निकाल ली। दूरबीन की मदद से वो बग़ल में हो रही गतिविधियों पर नज़र रखने की कोशिश करने लगीं।
अंश ने कॉटिज की डोरबेल बजायी जिसका कोई जवाब नहीं मिला। उसकी बेचैनी बढ़ती जा रही थी।
‘अनंतिका sss… अनंतिका sss!’
अंश ने एक बार फिर डोरबेल का स्विच दबाते हुए, इस बार अनंतिका को आवाज़ भी लगाई लेकिन कोई जवाब ना आया। अंश को पिछले दरवाज़े का ख़्याल आया जो किचेन से कॉटिज के पिछले लॉन में खुलता था। वो भागते हुए पिछले दरवाज़े पर पहुँचा। जैसा कि अपेक्षित था, दरवाज़ा अंदर से बंद था। अंश ने दरवाज़ा पूरी ताक़त से पीटते हुए एक बार फिर अनंतिका को पुकारा।
‘अनंतिका sss… अनंतिका sss!’
अंदर से कोई आवाज़ ना आयी। अंश ने ग्राउंड फ़्लोर की सभी खिड़कियाँ चेक की, अनंतिका के स्टूडीओ की उस खिड़की समेत जहां उन्हें वो साया ताक-झांक करता दिखाई दिया था लेकिन सभी खिड़कियाँ अंदर से मज़बूती से बंद की गयी थीं। कॉटिज के दोनों दरवाज़े पुराने ज़रूर थे, लेकिन इतने मज़बूत थे कि उन्हें तोड़ने के लिए या तो बुलडोजर की ज़रूरत पड़ती या सी.आइ.डी. इंस्पेक्टर दया की। अंश वापस सामने के दरवाज़े की तरफ़ आया।
उसने कॉटिज के फ़्रंट पोर्टिको का मुआयना किया। अगर वो किसी तरह पोर्टिको पर चढ़ने में कामयाब हो जाता है तो वो यहाँ से गुजरते ड्रेनेज पाइप की मदद से बेडरूम की खुली हुई फ़्रेंच विंडो तक पहुँच सकता था। पोर्टिको के नीचे पहुँच कर अंश ने ऊपर की तरफ़ जम्प लगाया। तीन-चार कोशिशों के बाद वो पोर्टिको रेलिंग की कास्ट आयरन ग्रिल पकड़ने में कामयाब हो गया। अंश का कसा हुआ एथलेटिक शरीर ऊपर उठने लगा। ठीक उसी पल कॉटिज का फ़्रंट डोर खुला।
* * * *
“कम आउट यू सन ऑफ़ ए बिच! आय नो यू आर हाइडिंग हेयर।” अनंतिका को खुद अपनी आवाज़ किसी लम्बे हॉलो ट्यूब से आती सुनाई दी।
नशा अब भी उस पर हावी था।
अनंतिका ने हाथ में थमी लकड़ी हिट करने के लिए उठा ली। उसने तेज़ी से क्लॉज़ेट का स्लाइडर डोर सरकाया और लकड़ी वाले हाथ से अंदर वार किया। अनंतिका का वार ख़ाली गया लेकिन क्लॉज़ेट ख़ाली नहीं था। क्लॉज़ेट से एक काले साये ने अनंतिका के ऊपर छलांग लगाई। अनंतिका की ज़ोरदार चीख कॉटिज के बाहर तक गूंजी थी।
“तुम अंदर कैसी आयी? मैंने कॉटिज बंद कर के अच्छी तरह चेक किया था, तब तुम अंदर नहीं थी,”
अनंतिका उस काले साये की तरफ़ पलटते हुए आहत भाव से बोली।
‘म्याऊँ sss’
साये ने अपनी बड़ी-बड़ी, कंजी आँखों से अनंतिका को घूरते हुए फ़रमाइशी ‘म्याऊँ’ की और अनंतिका के कदमों में लोटने लगा।
अनंतिका हैरान थी कि पूरी कॉटिज सील टाइट होने के बावजूद आख़िर बिल्ली अंदर आयी कहाँ से? उसने कॉटिज बंद करते समय अच्छी तरह चेक किया था, बिल्ली वहाँ नहीं थी, नहाने के बाद अनंतिका ने इसी क्लॉज़ेट से कपड़े निकाल कर पहने थे, तब वहाँ बिल्ली नहीं थी। अनंतिका ने क्लॉज़ेट अच्छी तरह बंद किया था, यानी इस बात की सम्भावना भी नहीं थी कि बिल्ली किसी समय अनंतिका की नज़र बचा कर क्लॉज़ेट में घुस गयी हो।
“आख़िर इस बंद क्लॉज़ेट में तुम आयी कहाँ से?”
अनंतिका ने बिल्ली से सवाल किया जिसका प्रत्युत्तर एक मासूम ‘म्याऊँ’ के रूप में आया। क्लॉज़ेट में दरवाज़े के साथ तीनों दीवारें लकड़ी के पल्लों की थी। दाएँ और बाएँ पल्लों पर कपड़े, शूज़ और ऐक्सेसरीज़ रखने के लिए ऊँचे शेल्फ बने थे, क्लॉज़ेट का दरवाज़ा खोलते ही ठीक सामने के पल्ले पर एक लाइफ़ साइज़ मिरर जड़ा हुआ था और ऊपर सीलिंग पर ज़ीरो वॉट का बल्ब था जिसका स्विच क्लॉज़ेट के अंदर ही था। अग़ल-बग़ल के दोनों शेल्फ कपड़ों व अन्य सामानों से भरे हुए थे जिनमें से किसी भी सामान के साथ छेड़छाड़ नहीं की गयी थी।
क्लॉज़ेट की लाइट जल रही थी और गोद में उस काली बिल्ली को उठाए हुए अनंतिका अनिश्चित भाव से अपने अनुत्तरित सवालों के साथ वहाँ खड़ी हुई थी।
“श्रोडिंगर के कैट एक्स्पेरिमेंट से बड़ी मिस्ट्री मेरे लिए कैट इन क्लॉज़ेट है,” कहते हुए अनंतिका ने हताशा से अपने कंधे उचकाए। वो वापस जाने के लिए मुड़ रही थी कि अचानक उसकी नज़रें क्लॉज़ेट फ़्लोर पर जमी धूल पर पड़ीं जिसपर बिल्ली के नन्हे पैरों के फ़ुट्प्रिंट बने हुए थे। धूल पर कुछ इंसानी फ़ुट्प्रिंट्स भी थे जो ज़ाहिर तौर पर उसके और निखिल के थे, लेकिन जिस बात ने अनंतिका का ख़ास ध्यान खींचा था वो थे सामने मिरर वॉल के नीचे धूल पर बने ख़ास निशान, ऐसे निशान जो दरवाज़ा खोल-बंद करने से फ़र्श पर बनते हैं। अनंतिका ने बिल्ली को गोद उतारा और मिरर वॉल की तरफ़ बढ़ी।
अनंतिका ने झुक कर फ़र्श पर बने निशान गौर से देखे। फ़र्श पर दरवाज़े के खुलने से बने निशान थे, इसका मतलब वो मिरर वॉल दरवाज़े की तरह खुल सकती थी? लेकिन कैसे? अनंतिका ने मिरर वॉल को पीछे धकेलने की कोशिश की पर दिवार टस से मस ना हुई।
“अगर ये वॉल वाक़ई हिडेन डोर-वे है तो इसे खोलने के लिए कोई लैच होना चाहिए,”
अनंतिका वुडन पैनल और मिरर के नक्काशीदार माउंट पर उँगलियाँ फिराते हुए खुद में बड़बड़ाई।
मिरर को वुडन पैनल पर फ़िक्स करने के लिए जो मेटल माउंट फ़्रेम यूज़ किया गया था वो ब्रास का बना हुआ था और उसपर चारों तरफ़ रेलीफ़ एंग्रेविंग से ट्रेडिशनल फ़्लोरल पैटर्न बनाए गए थे, फूलों के गुच्छे और पत्तों से भरी लताएँ। इसे देख कर ही इसके ऐंटीक होने का पता लगता था।
अनंतिका की उँगलियाँ बहुत बारीकी से एक-एक नक़्क़ाशी को टटोल रही थीं। मिरर की ऊँचाई अनंतिका की हाइट से ज़्यादा थी, अनंतिका अपने पंजों पर उचक कर ऊपरी फ़्रेम टटोलने लगी। उसकी उँगलियाँ दाएँ कोने की पत्तियों से टकराईं। उँगलियों के हल्के दबाव से ब्रास लीफ़ किसी पुश बटन के जैसे पीछे दब गयीं और एक हल्के खटके के साथ मिरर वॉल दरवाज़े की तरह खुल गयी।
“वॉट द हेल इज़ दिस! डोर-वे टू नार्निया?”
अनंतिका दरवाज़े की खुली झिर्री के पीछे देखने की कोशिश करते हुए बुदबुदायी, लेकिन उस झिर्री के पार उसे अंधेरे के अलावा कुछ नज़र ना आया।
“नाह…इट्स टू डार्क टू बी नार्निया,”
अनंतिका ने दरवाज़ा पकड़ कर अपनी तरफ़ खींचा। ज़मीन से रगड़ खाते हुए दरवाज़ा एक तीखी चरमराहट के साथ खुल गया।
“ओपन सेज़ मी! खुल जा सिमसिम!”
दरवाज़े के दूसरी तरफ़ नीचे को जाता हुआ एक अंधेरा गलियारा था, जिसमें नीचे की तरफ़ जाती हुई पत्थर की सीढ़ियाँ थीं। वहाँ रौशनी का कोई साधन नहीं था, अनंतिका ने अपने मोबाइल की फ़्लैश लाइट ऑन की और सीढ़ियों पर उतरते हुए नीचे देखने की कोशिश करने लगी। अंधेरा इतना सघन था कि फ़्लैश लाइट भी कुछ सीढ़ियों के बाद अंधेरे में ग़ायब हो रही थी।
“क्या हो सकता है नीचे? कोई छुपा हुआ डंजन? हिडेन ट्रेज़र?”
अनंतिका ने अगला कदम बढ़ाया ही था कि उसे कॉटिज की डोरबेल बजने, और अंश की उसे पुकारने की आवाज़ सुनाई दी।
“अंश? ये इस समय यहाँ क्या कर रहा है? ओह समझी! शायद मेरी चीखने की आवाज़ बग़ल वाली कॉटिज तक गयी है,”
अनंतिका पशोपेश में थी कि उसे क्या करना चाहिए, तभी कॉटिज के पिछली तरफ़ से अंश की घबराई हुई आवाज़ सुनाई दी। अनंतिका ने गिव-अप करने के अन्दाज़ में अपनी आँखें गोल नचाई और ऊपर बेडरूम की तरफ़ बढ़ गयी।
अनंतिका ने जब कॉटिज डोर खोला तो उसे अपने ठीक सामने पोर्टिको से लटकता अंश नज़र आया। अनंतिका की हार्ट्बीट स्किप हो गयी। अंश का सिर्फ़ कमर से निचला हिस्सा नज़र आ रहा था। ऊपर चढ़ने की क़वायद में उसकी टी-शर्ट ऊपर उठी हुई थी और डेनिम सरक कर उसके क्रॉच बल्ज तक आ गयी थी जिससे उसकी ग्रे केविन-क्लाइन अंडरवियर नज़र आ रही थी। अनंतिका के होंठ खुले जिनसे हल्की सीटी जैसी सिसकारी निकली। उसके लिए अपनी आँखें अंश के बल्ज से हटाना मुश्किल हो रहा था। उसके दिल की आवाज़ चीख-चीख कर उससे कह रही थी कि वो आगे बढ़ कर अंश की डेनिम और अंडरवियर खींच कर उसके जिस्म से अलग कर दे।
“अ…अंश,”
अनंतिका ने अपना सर झटक कर वो लुभावना लेकिन बेहूदा विचार अपने दिमाग़ से निकाला और अपनी फँसी हुई आवाज़ को संयमित करने की भरसक कोशिश करते हुए अंश को पुकारा। पोर्टिको के ऊपर चढ़ने की कोशिश करता अंश, अनंतिका की आवाज़ सुन कर ठिठका, उसने नीचे छलांग लगाई और पोर्टिको के नीचे खड़ी अनंतिका के ठीक सामने लैंड किया।
“आप ठीक हो? चीखी क्यों थी? मैंने इतनी बार पुकारा आपको, बेल भी बजाई, कहाँ थीं आप?”
अंश हाँफते हुए एक ही साँस में बोल गया, उसकी खूबसूरत आँखें बड़ी-बड़ी होकर अनंतिका को सर से पैर तक घूर रही थीं। अंश का उसकी सलामती के लिए यूँ फ़िक्रमंद होना अनंतिका को एक अनजान सुख और सुकून दे रहा था। अंश को देख कर कुछ पल के लिए जैसे वो सब कुछ भूल गयी थी।
“कम इन्साइड, आय वॉ’ न्ना शो यू सम्थिंग,”
अपने रूम की खिड़की से मिसेज़ राजपूत ने उन दोनों को कॉटिज के अंदर जाते देखा। कुछ देर तक मिसेज़ राजपूत अनिश्चित भाव से बैठी रहीं, उन्होंने एक नज़र अपनी व्हीलचेयर पर डाली फिर बेड व दिवार का सहारा लेते हुए अपने पैरों पर खड़ी हुईं और अपने काँपते पैरों से छोटे कदम लेते सीढ़ियों से ऊपर, अंश के बेडरूम की ओर बढ़ीं।
* * * *
“इट्स नो बिग डील। ओल्ड कॉटिज हाउसेज़ में सैलर होना आम बात है,”
अंश और अनंतिका क्लॉज़ेट की मिरर वॉल के सीक्रेट डोर-वे के सामने खड़े थे। अंश ने अपने कंधे उचकाते हुए बेपरवाही से कहा। अनंतिका ने ध्यान दिया कि अंश कैज़ूअल साउंड करने की भरसक कर रहा था फिर भी उसके चेहरे पर एक पासिंग सैकेंड के लिए आश्चर्य और चिंता के मिक्स्ड एक्स्प्रेशन उभरे, जिन्हें वो बहुत कुशलता से दबा गया।
“सॉरी टू डिसअपॉइंट यू, बट इट्स जस्ट एन ओल्ड सैलर, नॉट ए डंजन ऑर…नार्निया,”
अंश ने डिस्मिसिव टोन में कहते हुए मिरर वॉल वापस बंद करने को हाथ बढ़ाया, अनंतिका ने उसका हाथ बीच में ही थाम लिया।
“यू आर नॉट गेटिंग माय पॉइंट, अंश। मैंने पहली बार क्लॉज़ेट खोला तो बिल्ली अंदर नहीं थी। दूसरी बार खोला तो बिल्ली क्लॉज़ेट में थी और फ़्लोर पर ये निशान थे, यानी कोई सैलर का दरवाज़ा खोल कर अंदर आया था। मुझे दरवाज़ा खुलने की चरमराहट और यहाँ चलते कदमों की आवाज़ साफ़ सुनाई दी थी,”
“इस हिसाब से जो कोई भी यहाँ आया था…अगर, वाक़ई कोई यहाँ आया था, तो उसे अब भी नीचे सैलर में होना चाहिए,” अंश ने सीरीयस होते हुए कहा।
“अगर, इस सैलर से बाहर निकलने का कोई दूसरा रास्ता नहीं हुआ तो, येस। बट आय हैव ए स्ट्रॉंग गट फ़ीलिंग दैट दिस सैलर इज़ ए सीक्रेट पैसेज विद अनादर एग्ज़िट,”
“देयर इज़ ओन्ली वन वे टू फ़ाइंड आउट,”
अंश ने कहते हुए अनंतिका का हाथ थाम और मिरर वॉल का वुडन पैनल खोल कर अंदर सीढ़ियों पर उतर गया। दोनों ने अपने मोबाइल की फ़्लैश लाइट जला ली और सावधानीपूर्वक एक-एक कदम ध्यान से रखते हुए नीचे उतरने लगे। पत्थर की ऊँची सीढ़ियों के अलावा उस तहख़ाने की दीवारें भी मज़बूत और चिकने पत्थर की बनी हुई थीं। काफ़ी देर तक सीढ़ियाँ उतरने के बाद वो दोनों तहख़ाने में पहुँचे।
नीचे तहख़ाना काफ़ी बड़ा था, अनंतिका ने अंदाज़ा लगाया कि तहख़ाना कॉटिज के लिविंग एरिया के हूबहू, लगभग 12x18 फ़ीट का था। तहख़ाना तीन तरफ़ से चिकने पत्थर की दीवारों से बंद था, जिनमें एक रौशनदान भी नहीं था। वहाँ से निकलने का एकमात्र रास्ता वो सीढ़ियाँ थीं जिनसे अनंतिका और अंश नीचे उतरे थे। बंद तहख़ाना सीलन और बदबू से भरा हुआ था जिससे पुष्टि हो रही थी कि साफ़ हवा आने का वहाँ कोई ज़रिया नहीं था।
तहख़ाना लगभग ख़ाली था, एक कोने में क़तार से, एक पर एक कर के रखे हुए पुराने, जंग लगे लोहे के बक्से, पुरानी किताबों की दो अलमारियाँ, और कुछ छुटपुट सामान था, इन सभी पर धूल की मोटी परत जमी हुई थी। अनंतिका ने फ़्लैश लाइट फ़र्श की ओर घुमाई, सामान के जैसे ही फ़र्श पर भी धूल की परत चढ़ी थी जिस पर सिर्फ़ अनंतिका और अंश के पैरों के निशान थे। वहाँ बिल्ली के पंजों के भी निशान नहीं थे, यानी यहाँ किसी के छुपे होने, या किसी के वहाँ से आने-जाने की सम्भावना शून्य थी। अनंतिका सोच में पड़ गयी।
“क्या सोच रही हैं आप?”
“कितनी अजीब बात है ना! अगर बनवाने वाले को सैलर बनवाना ही था तो उसका सीक्रेट पैसेज वो ग्राउंड फ़्लोर पर बने किचेन से दे सकता था। फ़र्स्ट फ़्लोर के क्लॉज़ेट से यहाँ लिविंग एरिया के नीचे तक, इतने लम्बे पैसेज की क्या ज़रूरत थी?”
“पता नहीं, बनवाने वाले ने कुछ सोच कर ही बनवाया होगा,”
“तुमने मुझे बताया था कि ये कॉटिज और तुम्हारा कॉटिज, दोनों बिल्कुल हूबहू एक जैसे बने हैं। तो क्या तुम्हारे बेडरूम क्लॉज़ेट से भी नीचे अंडरग्राउंड सैलर को जाता, कोई सीक्रेट पैसेज है?”
“नाह…मेरे बेडरूम में क्यों होगा सीक्रेट पैसेज?”
“हो सकता है हो, बस तुमको उसका पता ना हो,”
“नॉट पॉसिबल। आप घर आए थे तो ऊपर मेरे रूम में नहीं आए, वरना आपको ऐसा नहीं लगता। मुझे ये क्लॉज़ेट पसंद नहीं था, ना ही इतने बड़े क्लॉज़ेट की मुझे ज़रूरत थी, इसलिए मैंने क्लॉज़ेट तुड़वा दिया और उसकी जगह अपने रूम में ही छोटा सा आर्ट स्टूडीओ सेटअप कर लिया। अगर वहाँ कोई सीक्रेट पैसेज होता तो क्लॉज़ेट तुड़वाने पर उसका पता चल जाता,”
“मुझे अब भी समझ नहीं आ रहा कि बिल्ली क्लॉज़ेट में कैसे आयी। आख़िर वो छोटी सी बिल्ली खुद तो दरवाज़ा खोल कर अंदर नहीं आ सकती…और फ़र्श पर दरवाज़ा खुलने के निशान? अगर किसी ने दरवाज़ा नहीं खोला तो वो निशान कैसे बने?”
“हो सकता है आज सुबह जब आप सो रही थीं तब निखिल ने वो दरवाज़ा खोला हो और आपको इस बारे में बताने का मौक़ा ना मिला हो। बिल्ली इतनी छोटी है कि वो क्लॉज़ेट के किसी शेल्फ के कोने में छुप कर बैठी होगी, इसलिए पहली बार आपका ध्यान उस पर नहीं गया। फिर बिल्ली ने बंद क्लॉज़ेट से निकलने के लिए जब क्लॉज़ेट का दरवाज़ा खरोंचना शुरू किया तो उसकी आवाज़ सुन कर आपको दरवाज़ा खुलने और किसी के चलने का वहम हुआ,”
अंश की यह थ्योरी अनंतिका को बिल्कुल भी कन्विन्सिंग ना लगी लेकिन फ़िलहाल उसके पास कोई दूसरी ऑल्टर्नेट थ्योरी नहीं थी। रात के साथ ठंड बढ़ गयी थी और भूमिगत होने की वजह से तहख़ाने में सीलन के साथ-साथ ठंढ भी ज़्यादा थी। अनंतिका ने सिर्फ़ टू-पीस नाइट सूट पहना हुआ था, उसके शरीर में ठंड से रह-रह कर सिहरन उठ रही थी और उसके निप्पल बिल्कुल तन गए थे, जो उसके कॉटन नाइट सूट से साफ़ दिखाई दे रहे थे। अनंतिका का ध्यान गया कि उसकी ओर फ़्लैश लाइट किए अंश की नज़रें बार-बार उसके उभरे हुए निप्पल्स पर आ कर टिक रही हैं, अनंतिका ने खुद को पानी-पानी होता महसूस किया। उसने शर्म से झेंपते हुए दोनो हाथों से अपना सीना छुपा लिया।
“ह…हमें वापस ऊपर चलना चाहिए,”
अंश ने बड़ी मुश्किल से अनंतिका की आँखों में देखते हुए कहा। अनंतिका ने सहमति में सर हिलाया और दोनों वापस ऊपर की ओर बढ़ गए। क्लॉज़ेट से निकलते हुए अनंतिका ने एक वुलेन स्टोल लेकर अपने जिस्म पर लपेट लिया। वहाँ से निकल कर दोनों नीचे लिविंग एरिया में पहुँचे। अनंतिका ने देखा बाहर उजाला हो रहा था। सुबह के छे बज रहे थे।
“आप रेस्ट करो, मैं आपके लिए कॉफ़ी बना कर लाता हूँ,”
कहते हुए अंश किचेन की ओर बढ़ गया और अनंतिका लिविंग एरिया में काउच पर ढ़ेर हो गयी। रात भर की थकान, हैंगओवर और स्टोल से शरीर को मिलती गर्माहट से अनंतिका की आँख लग गयी। किचेन में अंश के कॉफ़ी व्हिप करने की आवाज़ आ रही थी। अनंतिका को एहसास हुआ कि वो उठ कर किचेन की ओर बढ़ रही है।
अंश अनंतिका की तरफ़ पीठ किए खड़ा है और कॉफ़ी व्हिप करने में तल्लीन है। उसे अपने पीछे से अनंतिका के आने का एहसास नहीं होता है। अनंतिका पीछे से आकर अंश से लिपट जाती है। उसके तने हुए उभार, भाले की नोक की तरह अंश की पीठ में धँसे हुए हैं। अनंतिका की इस अप्रत्याशित हरकत से अंश चौंकता है लेकिन अनंतिका उसे प्रतिवाद करने का कोई मौक़ा नहीं देती। जिस तरह चंदन के वृक्ष से लिपटी अतृप्त नागिन अपने जिस्म में धधकती ऊष्मा शांत करने के लिए लहराती है, ठीक उसी तरह अनंतिका के हाथ अंश के सीने और उसके कसे हुए सिक्स पैक ऐब्स से होकर, उसकी डेनिम और अंडरवियर के अंदर सरक गए और अंश की दोनों टांगों के बीच नागिन की मज़बूत कुंडली की तरह जकड़ गए। अनंतिका अंश की पीठ पर अपनी तनी छातियाँ रगड़ते हुए उसकी गर्दन पर चुम्बन ले रही है, उसकी उँगलियाँ अंश की डेनिम के अंदर, अंश के तनाव पर ऊपर-नीचे फिर रही हैं। अंश के होंठों से एक उन्माद भरी सिसकारी निकलती है और उसकी आँखें स्वतः ही बंद हो जाती हैं। अनंतिका उसे बेतहाशा चूम रही है, उसकी उँगलियाँ अंश के पत्थर से भी सख़्त अंग पर तेज़ी से फिर रही हैं। पुरुषांग का यह तनाव, ऐसी सख़्ती, उसने निखिल के साथ कभी महसूस नहीं की। अनंतिका अपने दांत अंश की गर्दन पर गड़ा देती है, चूमते हुए अब वो उसे काट रही है। अनंतिका की उँगलियाँ बहुत तेज़ी से अंश के सख़्त अंग पर घर्षण कर रही हैं। अपनी हथेली पर वो अंश की फड़कती नसें महसूस कर सकती है। ऐसी तीव्र उत्तेजना, ऐसा उन्माद अनंतिका ने निखिल के साथ कभी महसूस नहीं किया।
अचानक अनंतिका की नज़रें सामने उठती हैं। किचेन का बैकडोर खुला है और दरवाज़े कर खड़ा निखिल सुलगती नज़रों से उसे और अंश को घूर रहा है।
अनंतिका ने चौंक कर आँखें खोली। उसकी साँस बुलेट ट्रेन से भी तेज रफ़्तार से चल रही थी।
“सुबह का सपना…बाबा रे!”
“ऐसा क्या देख लिया सपने में?”
अंश हाथ में दो एक्स्प्रेसो कॉफ़ी मग लिए किचेन से वहाँ आया। अनंतिका काउच पर सीधी बैठ गयी।
अंश से नज़रें मिलाने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी। उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसकी आँखों में देखते ही अंश को उसके सपने का पता चल जाएगा। निखिल का विचार ज़हन में आते ही अनंतिका को बेहद शर्मिंदगी का एहसास और अपराध बोध हो रहा था। हालाँकि, वास्तविकता में उसने कुछ भी ग़लत नहीं किया था…अब तक!
“क्या हुआ? कॉफ़ी पसंद नहीं आयी?” अनंतिका को सोच में खोया देख कर अंश ने सवाल किया।
“कॉफ़ी इज़ ऑसम! इट्स नॉट अबाउट दैट,” अनंतिका ने बिना अंश से नज़रें मिलाए, कॉफ़ी की सिप लेते हुए कहा।
“देन? स्टिल वरीड अबाउट द सैलर?”
“इस कॉटिज में कुछ बहुत अजीब है। जब से हम यहाँ आए हैं, एक दिन भी ऐसा नहीं बीता जब कोई ना कोई मिसअड्वेंचर ना हुआ हो। मैंने तुम्हें बताया था ना कि जिस दिन यहाँ शिफ़्ट हुए थे उस रात डिलीवरी वाले वीयर्डो ने सीन क्रीएट किया था, फिर कल रात भी वो इस कॉटिज के पास्ट के बारे में अजीब बातें बताने लगा,”
“वॉट! कौन था वो? क्या कह रहा था?” अंश यूँ चौंकते हुए बोला जैसे उसने बिजली की नंगी तार छू ली हो।
“नाम याद नहीं आ रहा उसका…90s की चीप हिंदी मैगज़ीन जैसा कुछ था…सरस सलील…नो…मनोहर कहानियाँ…येस…मनोहर नाम था उसका!’
“मनोहर! क्या कह रहा था वो?”
अनंतिका ने देखा कि मनोहर का नाम सुनते ही अंश के जबड़े भिंच गए। उसने अंश को मनोहर की कही सारी बातें बताईं।
“उसके अकॉर्डिंग, यहाँ के लोकल्स इसके बारे में जानते हैं, पर कोई इस बारे में बात नहीं करता। मैंने इंटरनेट पर भी सर्च किया लेकिन कुछ नहीं मिला,”
अनंतिका ने देखा कि एकाएक अंश काफ़ी टेन्स नज़र आ रहा है। मनोहर का नाम सुन कर अंश इतना क्यों चौंका? उसने जब पहली बार डिलीवरी बॉय वाली घटना के बारे में अंश को बताया था तब भी अंश के चेहरे पर कुछ ऐसे ही भाव थे, लेकिन उस समय अनंतिका डिलीवरी बॉय का नाम नहीं जानती थी।
अभी अनंतिका के मुँह से मनोहर का नाम सुन कर अंश का बुरी तरह चौंकना अनंतिका को काफ़ी अजीब लगा।
“तुम जानते हो मनोहर को?”
“न।।नहीं। चकराता छोटी जगह है लेकिन इतनी भी छोटी नहीं कि हर किसी को जानूँ, वैसे भी मैं काफ़ी समय तक यहाँ था भी नहीं,”
अंश ने अनंतिका से नज़रें मिलाए बग़ैर, अपनी कॉफ़ी का एक सिप लेते हुए कहा। अनंतिका ने महसूस किया कि अंश उससे कुछ छुपाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन वो झूठ बोलने में काफ़ी कच्चा था।
“लुक ऐट मी, अंश। लुक स्ट्रेट इंटू माय आइज़ एंड टेल मी द ट्रूथ,” अनंतिका ने सख़्त अन्दाज़ में सवाल किया। उसकी आँखें नज़रें चुराते अंश पर गड़ी हुई थीं।
अंश ने गिव-अप करते हुए कहा।
“ऑलराइट! मनोहर को पूरा चकराता जानता है। ही इज़ ए नट केस। दिमाग़ ठिकाने नहीं है उसका। हमेशा कुछ ना कुछ बकवास करते ही रहता है, उसकी बातों पर कोई ध्यान नहीं देता,”
“मतलब इस कॉटिज के पास्ट के बारे में उसने जो कुछ भी कहा वो सब ग़लत था?”
अंश से जवाब देते ना बना, वो अनंतिका से नज़रें चुराते हुए अपनी कॉफ़ी सिप करने लगा। अनंतिका ने उसे घूरते हुए सख़्त आवाज़ में कहा।
“अंश, लुक ऐट मी,”
“मैंने पहले भी बताया था कि रोमेश दीवान और मेरे डैड काफ़ी गहरे दोस्त थे। दोनों ने ये दोनों कॉटिज साथ-साथ बनवाए और इसके बाद यहीं शिफ़्ट हो गए। मेरे डैड अपनी फ़ैमिली, यानी मॉम और मेरे साथ शिफ़्ट हुए, जबकि मिस्टर दीवान यहाँ अकेले रहने आए,”
“ऐसा क्यों?”
“प्रेरणा दीवान की सारी पढ़ाई-लिखाई हमेशा घर से दूर, बोर्डिंग स्कूल फिर डी.यू. हॉस्टल में रह कर हुई। इसका एक बड़ा रीजन उसकी माँ का ना होना और मिस्टर दीवान की प्लेबॉय वाली लाइफ़ स्टाइल था,”
“प्रेरणा की माँ…?”
“प्रेरणा काफ़ी छोटी थी जब उसकी माँ एकाएक ग़ायब हो गयीं। कोई नहीं जानता कि सच में क्या हुआ था। स्मॉल टाउन्स में धुआँ उठने के लिए कहीं आग का लगना ज़रूरी नहीं होता, यहाँ लोगों की बातें आग की तरह फैलती हैं, जिसमें झूठ का धुआँ इतना घना होता है कि सच पहचान पाना मुश्किल हो जाता है,”
“मतलब?”
“कुछ लोग कहते हैं कि मिस्टर दीवान की पत्नी उनकी ऐयाशियों से तंग आकर, उन्हें छोड़ कर चली गयीं। कुछ लोगों कहते हैं कि वो किसी दूसरे आदमी के साथ भाग गयीं, तो कुछ लोगों का मानना है कि अपनी बीवी से तंग आ कर मिस्टर दीवान ने ही उन्हें मार कर बॉडी ग़ायब कर दी। इन सारी बातों में जो भी सच था, वो सिर्फ़ मिस्टर दीवान ही जानते थे,”
“फिर?”
“यहाँ आने के बाद मिस्टर दीवान अक्सर बीमार रहने लगे। रात दिन शराब और औरतों में डूबे रहने वाले आदमी के साथ ऐसा होना कोई बड़ी बात नहीं। फिर धीरे-धीरे उनकी तबियत बिगड़ने लगी और एक दिन अचानक ही, हार्ट फेल होने से उनकी मौत हो गयी। उनकी मौत इसी कॉटिज की दूसरी मंज़िल पर हुई थी। मिस्टर दीवान का सारा सामान आज भी ऊपर वैसे ही पड़ा है, इसीलिए दूसरी मंज़िल बंद रहती है,”
“ओह! लेकिन इसमें पूरा फ़्लोर सील बंद करने वाली क्या बात है? कॉज़ ऑफ़ डेथ नैचरल था,”
अंश दो पल उसे देखता रहा, जैसे निर्णय लेने में दिक़्क़त महसूस कर रहा हो कि अगली बात किस तरह अनंतिका के आगे रखे। फिर झिझकते हुए बोला।
“यह बात सच है कि रोमेश दीवान की मौत हार्ट फेल होने से हुई थी लेकिन…संदिग्ध परिस्थितियों में,”
“क...कैसे संदिग्ध परिस्थिति?”
“प्रेरणा दीवान उस समय दिल्ली कॉलेज में थी। यहाँ कॉटिज में रोमेश दीवान अकेले रह रहे थे। पूरे दिन उनके साथ एक केयर टेकर होता था जो सुबह आ कर कॉटिज की देख-रेख और बाक़ी काम करता था और शाम को वापस अपने घर चला जाता था। इसके अलावा मिस्टर दीवान की बिगड़ती तबियत के कारण एक पर्मनेंट नर्स यहाँ कॉटिज में हमेशा उनके साथ रहती थी…नर्स मतलब हसीन और जवान नर्स, रोमेश दीवान की बेटी की उम्र की। लोगों का मानना है कि वो नर्स कम और रोमेश दीवान की ‘कीप’ ज़्यादा थी,”
“हम्म। काफ़ी रंगीले राजा थे ये मिस्टर दीवान। फिर?”
“रोज़ की तरह एक दिन सुबह केयर टेकर कॉटिज आया। आते ही उसका सबसे पहला काम होता था ब्रेकफ़ास्ट प्रिपेयर कर के मिस्टर दीवान को उनके रूम में सर्व करना। केयर टेकर जब ब्रेकफ़ास्ट ट्रे लेकर ऊपर पहुँचा तो मिस्टर दीवान के रूम का दरवाज़ा अंदर से बंद था। उसने दरवाज़ा नॉक कर के, फिर चिल्ला कर दरवाज़ा खुलवाने की कोशिश की लेकिन दरवाज़ा नहीं खुला। किसी अनहोनी की आशंका से घबरा कर केयर टेकर ट्रे वहीं छोड़ कर नर्स के पास भागा, जो मिस्टर दीवान के बेडरूम के ठीक बग़ल वाले कमरे में रहती थी, लेकिन नर्स अपने कमरे में नहीं थी, इन फ़ैक्ट, नर्स पूरे कॉटिज में कहीं नहीं थी,”
“स्ट्रेंज। देन?”
“यहाँ आस-पास आबादी तो है नहीं, केयर टेकर ने मेरे डैड को बुलाया। दोनों ने मिल कर दरवाज़ा तोड़ा तो सामने का नजारा देख कर दोनों के होश उड़ गए,”
“ऐ...ऐसा क्या देखा?”
“रोमेश दीवान की बॉडी बेड पर चारों खाने चित्त पड़ी हुई थी। उनकी आँखें और मुँह यूँ खुले थे जैसे ज़िंदगी के आख़री पल में कोई बहुत ही भयानक मंजर देखा हो, कुछ ऐसा जिसे देखते ही डर से उनका हार्ट फेल हो गया। मिस्टर दीवान के शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था, उनकी लाश बिस्तर पर नंगी पायी गयी थी,”
“व्होआ!!”
“दैट्स नॉट ऑल। बेड के चारों तरफ़, पूरे बेडरूम फ़्लोर पर सैकड़ों मोमबत्तियाँ जलाई गयी थीं जो तब तक पिघल कर बुझ चुकी थीं और पूरे फ़्लोर पर एक वैक्स कोट लेयर चढ़ी हुई थी। बेडरूम के फ़्लोर और वॉल्स पर किसी नाइफ़ या वैसी ही धारदार चीज़ से खरोंच कर ढेरों छोटे-बड़े सिम्बल्ज़ और आकृतियाँ बनायी गयी थीं, जैसे ब्लैक मैजिक, टोने-टोटके के लिए बनायी जाती हैं वैसे ही,”
“बुड्ढा ब्लैक मैजिक कर रहा था?”
“कौन जाने। लोगों का यही मानना है कि रोमेश दीवान की बढ़ती उम्र के साथ उसकी ठरक भी बढ़ रही थी, लेकिन बिस्तर के मैदान में बूढ़ा घोड़ा अपनी ज़्यादातर रेस हार रहा था…”
“हाहाहा।।अंश, दैट वज़ सो क्रास एंड चीज़ी! ऐसे कौन बात करता है यार, बूढ़ा घोड़ा एंड बिस्तर की रेस!” अनंतिका ने अंश की बात बीच में काटते हुए कहा। अंश बुरी तरह झेंप गया।
“अरे मुझे कुछ और समझ नहीं आया, कि कैसे ये बात रखूँ।”
“दैट्स ओके, आगे बताओ,”
“लोग यही कहते हैं कि रोमेश दीवान अपनी जवान नर्स के साथ ‘टैंट्रिक सेक्स’ और ब्लैक मैजिक प्रैक्टिस करता था अपनी…”
“…खोयी मर्दानगी वापस लाने के लिए,” अनंतिका अंश को मॉक करते हुए बोली, अंश के गाल और कान शर्म से लाल हो गए।
“ह…हाँ, वही!”
“तुम्हें इस ब्लैक मैजिक वाली बकवास पर यक़ीन है?”
“मेरे यक़ीन करने ना करने से क्या फ़र्क़ पड़ता है। कम से कम रोमेश दीवान का यही मानना था दैट ब्लैक मैजिक वज़ द ओन्ली सल्यूशन फ़ॉर हिज़ प्रॉब्लम,”
“इस केस की तो पुलिस इन्वेस्टिगेशन हुई होगी, पुलिस का क्या मानना था? पोस्ट मॉर्टेम रिपोर्ट?”
“मैडम, रियल लाइफ़ स्मॉल टाउन पुलिस ओ।टी।टी। थ्रिलर्स की पुलिस जितनी टैक्टिकल, मोटिवेटेड, एंड एफ़िशिएंट नहीं होती। पुलिस और पोस्ट मॉर्टेम रिपोर्ट के अकॉर्डिंग, ओल्ड एज एंड पूअर मेडिकल कंडिशन में सेक्शूअल इंटरकोर्स करने की वजह से मिस्टर दीवान के हार्ट पर एक्स्ट्रीम प्रेशर पड़ा जिसे वे झेल नहीं पाए और उनका हार्ट फेल हो गया,”
”और उस नर्स का क्या हुआ?”
“उसे किसी ने नहीं देखा। पुलिस के हिसाब से, सेक्स के दौरान मिस्टर दीवान की मौत से घबरा कर नर्स रातों-रात चकराता से हमेशा के लिए ग़ायब हो गयी। पुलिस ने भी उसे ढूँढने के लिए ज़्यादा माथापच्ची नहीं की लेकिन मीडिया में न्यूज़ ना आए इसके लिए और पुलिस केस फ़ाइल को बंद करवाने के लिए प्रेरणा दीवान को अच्छी-ख़ासी मशक़्क़त करनी पड़ी,”
अंश कह कर चुप हुआ। दोनों ने अपनी कॉफ़ी ख़त्म की। अंश की बात से अनंतिका सोच में पड़ गयी थी। उसने जब अंश की ओर देखा तो उसे महसूस हुआ कि अंश के पास अभी कहने के लिए कुछ और भी है, जिसे कहने में वो हिचकिचा रहा है। अनंतिका ने अपनी आइब्रोज़ उचकाते हुए अंश से सवाल किया।
“कम आउट विद इट, अंश। वॉट इज़ इट?”
“इस इन्सिडेंट के बाद से ये जगह बंद थी, लगभग एक साल पहले प्रेरणा की कम्पनी में काम करने के लिए बाहर से आया एक एम्प्लॉई अपनी फ़ैमिली के साथ यहाँ शिफ़्ट हुआ। हस्बैंड, वाइफ़ और उनकी छे-सात साल की एक बेटी। नाइस फ़ैमिली, गुड पीपल। कॉटिज का सेकंड फ़्लोर तब भी सील था। वो फ़ैमिली फ़र्स्ट फ़्लोर पर रह रही थी, वहीं जहां अभी आप दोनों हैं,” अंश ख़यालों में डूबते हुए बड़बड़ाया।
उसकी आवाज़ जैसे कहीं दूर से आ रही थी। फ़ैमिली और बच्ची की बात सुन कर अनंतिका संजीदा हुई।
“क…क्या हुआ उस फ़ैमिली के स..साथ?” अनंतिका को अपनी आवाज़ गले में फँसती महसूस हुई।
“पता नहीं। एक रात वो लोग यहाँ थे, हंसते-खेलते, और अगली सुबह उनका कोई नामोनिशान नहीं था। ना वो फ़ैमिली यहाँ थी और ना ही उनका कोई सामान। सब कुछ ग़ायब हो गया था, जैसे वो यहाँ कभी थे ही नहीं, उनका एक-एक सामान यहाँ से ग़ायब था सिवाय…”
अंश कहते-कहते चुप हो गया।
अनंतिका ने ज़ोर देकर पूछा।
“सिवाय?”
“उस छोटी बच्ची की डॉल के। वो डॉल ऊपर बेडरूम में फ़्लोर के बीचोंबीच रखी हुई थी,”
“ऐसा भी तो हो सकता है कि अचानक कोई इमर्जेन्सी आ गयी हो जिसके कारण देर रात वो फ़ैमिली आनन-फ़ानन अपना सामान पैक कर के यहाँ से चली गयी,”
“बिना किसी को इन्फ़ॉर्म किए? बिना किसी मेल या मैसेज के? जैसे दुनिया से ग़ायब हो गए हों?”
“टेल मी वन थिंग, तुमने ये क्यों कहा कि डॉल फ़्लोर पर रखी हुई थी? नॉर्मल एक्स्प्रेशन होता है गिरी हुई थी, पड़ी हुई थी, या छूट गयी थी। वाय, रखी हुई थी?”
अंश ने अनंतिका की आँखों में देखा। अंश का चेहरा और उसके लबों से निकलते अल्फ़ाज़, दोनों भावहीन थे।
“क्योंकि वो डॉल पड़ी हुई, या पीछे छूटी नहीं थी। वो फ़्लोर पर रखी हुई थी और उसके चारों तरफ़ वैसे ही सिम्बल और डिज़ाइन बने हुए थे जैसे ऊपर मिस्टर दीवान के बेडरूम फ़्लोर पर बने हुए थे। फ़र्क़ बस इतना था कि ये वाले डिज़ाइन खरोंच कर नहीं बल्कि चॉक से बनाए गए थे और देखने से लगता था जैसे किसी बच्चे ने काँपते हाथों से बनाए है,”
“क्या बकवास है ये?” कहते हुए अनंतिका के शरीर ने झुरझुरी ली।
“आय नो। यक़ीन करना मुश्किल है, मुझे भी नहीं होता यक़ीन। इसीलिए मैं इस बारे में कुछ भी कहने से बच रहा था। आप ने ही फ़ोर्स किया,”
अनंतिका ने अंश की बात का कोई जवाब ना दिया, उस घड़ी वो अपने ही ख़यालों में डूबी हुई थी।
“तो आज से हम अपना चकराता टूर स्टार्ट कर रहे हैं ना?”
अंश ने टॉपिक चेंज करने के इरादे से सवाल किया। अनंतिका ने सहमति में सर हिलाया लेकिन अंश साफ़ देख सकता था कि अनंतिका अब भी उन बातों में उलझी हुई है वो अंश ने उसे बतायी हैं।
“आप बेवजह ही परेशान हो रही हैं। बाहर की ताजी हवा खाएँगी तो सब ठीक हो जाएगा,” अंश ने अनंतिका की आँखों में देख कर मुस्कुराते हुए कहा, अनंतिका के होंठों पर एक फ़रमाइशी मुस्कान आयी।
“हवा बाद में खाएँगे, फ़िलहाल मैं ब्रेकफ़ास्ट प्रिपेयर करती हूँ,”
“आप ब्रेकफ़ास्ट करिए और फटाफट रेडी हो जाइए। मैं माँ के लिए खाना बना कर और फिर तैयार होकर आता हूँ,” कहते हुए अंश ने वहाँ से विदा ली।
उसके जाने के बाद काउच पर लेटी अनंतिका के दिमाग़ में अंश की कही एक-एक बात फ़िल्म रील की तरह लूप में चलने लगी।
* * * *
सुबह के ग्यारह बज रहे थे और निखिल नहा-धो कर, रेडी हो कर नॉएडा सिटी सेंटर के बरिस्टा कॉफ़ी हाउस में बैठा याशिका का वेट कर रहा था। कुछ देर बाद उसे याशिका तेज कदमों से चल कर अपनी ओर आती दिखाई दी। दोनों ने एक-दूसरे को देख कर हाथ हिलाया।
“हाय निखिल, क्या बात है, मुझे ऐसे अर्जेंट क्यों बुलाया? सब ठीक तो है? अनी कहाँ है? तुम दोनों तो चकराता गए थे ना?” याशिका ने निखिल के सामने वाली चेयर पर बैठते हुए सवाल किया।
याशिका अनंतिका के सबसे करीबी दोस्तों में से थी, उन चंद करीबी दोस्तों में जिसे निखिल पसंद करता था, वरना अनंतिका के अधिकतर दोस्त निखिल को किसी चिड़ियाघर से भागे, दुर्लभ प्रजाति के कोई जानवर नज़र आते थे जिनसे वो हमेशा दूरी बनाए रखता था। यही कारण था कि अनंतिका का बहुत बड़ा सोशल सर्कल होने के बावजूद निखिल काफ़ी कम लोगों से वाक़िफ़ था।
“सब ठीक है याशिका। अनी चकराता में है, मैं ऑफ़िस के कम से वापस आया हूँ,” निखिल ने मुस्कुराते हुए कहा, लेकिन याशिका देख सकती थी कि निखिल उस मुस्कुराहट के आवरण से अपनी किसी परेशानी को ढकने की कोशिश कर रहा था।
“क्या बात है निखिल, बताओ मुझे,”
“इट्स अबाउट अनी, याशिका,”
“वॉट अबाउट अनी? आर यू टू ब्रेकिंग अप ऑर समथिंग?”
“नो याशिका! ऐब्सल्यूट्ली नॉट! वी…वी आर…हैपी टूगेदर। दिस इज़ ऐक्चूअली अबाउट अनी’ ज़ कंडिशन,”
“कंडिशन?”
“स्लीप परैलिसस एपिसोड्स,”
निखिल ने सिलसिलेवार ढंग से याशिका को चकराता पहुँचने से लेकर अब तक की सारी घटनाएँ बतायी, जिस में अंश का उसने कोई ज़िक्र नहीं किया। अंश व उससे सम्बंधित सभी घटनाओं को परे रख कर निखिल ने अनंतिका की ऐंग्ज़ायटी, उसके डिप्रेशन और मेंटल हेल्थ पर फ़ोकस करना ज़रूरी समझा।
पिछले दिन अनंतिका और अंश को स्टूडीओ में देख कर निखिल कुछ समय के लिए बुरी तरह विचलित हो गया था। उसने आवेश में कोई भी फ़ैसला लेने के बजाए, खुद को थोड़ा समय देना आवश्यक समझा। प्रेरणा को पर्सनल इमर्जेन्सी और अनंतिका को वर्क ट्रिप का एक्स्क्यूज़ देकर, निखिल चकराता से ड्राइव कर के वापस दिल्ली आया।
अकेला और लम्बा सफ़र अक्सर उन फ़ैसलों की राहें आसान बनाता है जिनकी मंज़िल रोज़मर्रा की आम ज़िंदगी में हमें दिखाई नहीं पड़ती।
इस सफ़र के दौरान, जब निखिल का ग़ुस्सा और भावनात्मक आवेश शांत हुआ तब उसे भी यह एहसास हुआ कि वो अनंतिका से बेइंतहा प्यार करता है और अनंतिका के बग़ैर एक दिन भी अपनी ज़िंदगी नहीं गुज़ार सकता। कॉटिज में आने के पहले दिन से ही अनंतिका की मुश्किलें शुरू हुईं, यह सरासर निखिल की गलती थी कि उसने अनंतिका की बातों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया। वो अपने काम में इतना उलझा रहा कि अनंतिका के अंतर्मन की उधेड़बुन पर उसका ध्यान ही नहीं गया, और इस मौक़े का फ़ायदा उठाया अंश ने! अंश जैसे ‘जेन-ज़ी’ के लौंडों का यही तो काम है, पहले लड़की का दोस्त होने का नाटक करो, उसे रोने के लिए अपने कंधे का सहारा दो और फिर मौक़ा मिलते ही लड़की के बिस्तर में घुस जाओ। लेकिन अनंतिका कोई निब्बी नहीं थी जो ऐसे ‘फ़कबॉई’ के झाँसे में आ जाए। निखिल को यक़ीन था कि अनंतिका ने अंश के साथ अब तक कोई भी हद पार नहीं की है…अब तक! लेकिन वो कमीना अंश तो अपना पूरा ज़ोर लगाए हुए था, हर हद तोड़ने की ख्वाहिश में। निखिल ठान चुका था कि वो अंश के मंसूबे किसी भी सूरत में कामयाब नहीं होने देगा।
याशिका रिलेशनशिप काउन्सलर और साइकोथेरपिस्ट थी, उससे बेहतर सलाह फ़िलहाल कोई और नहीं दे सकता था, यही सोच कर निखिल ने दिल्ली पहुँचते ही याशिका से कॉंटैक्ट किया और उसे मिलने बुलाया।
“जितना तुम्हारी बातों से में समझ पा रही हूँ, ऐसा लगता है कि अनंतिका के पास्ट से रिलेटेड कोई सप्रेस्ड मेमरी या ट्रॉमा है जो उस जगह पर जा कर बार-बार ट्रिगर हो रहा है, कुछ ऐसा, जिसे अनंतिका की याददाश्त तो भूल चुकी है लेकिन उस भूले हुए अतीत को उसका अंतर्मन संजोए बैठा है। इस से ज़्यादा डाइग्नोज़ करने के लिए अनंतिका के सेशन्स लेने पड़ेंगे, तभी कुछ पता चल पाएगा,” निखिल की सारी बातें धैर्यपूर्वक सुनने के बाद याशिका ने कहा।
“तुम तो अनंतिका की बेस्ट फ़्रेंड हो, याशिका। तुम्हें उसके पास्ट के बारे में पता होगा ना? तुम लोग पहले रूममेट्स थे, क्या तुमने कभी अनंतिका को स्लीप परैलिसस एक्स्पिरीयन्स करते देखा है?”
याशिका कुछ पल चुप रही, जैसे दिमाग़ पर ज़ोर डालने की कोशिश कर रही हो। फिर, कुछ सोचते हुए बोली,
“मैं अनंतिका को सिर्फ़ पिछले पाँच सालों से जानती हूँ। उसकी पर्सनैलिटी इतनी वाइब्रेंट थी कि कब हम रूमीज़ से अच्छे फ़्रेंड्ज़ और अच्छे फ़्रेंड से बेस्ट फ़्रेंड्ज़ बन गए पता भी नहीं चला। तीन साल पहले जब तुम अनंतिका की लाइफ़ में आए और वो तुम्हारे साथ तुम्हारे फ़्लैट में शिफ़्ट हो गयी, तब तक मैंने कभी उसे स्लीप परैलिसस, डिप्रेशन या ऐंग्ज़ायटी में नहीं देखा,”
“आर यू इन्सिन्यूएटिंग कि अनंतिका की लाइफ़ में प्रॉब्लम्स मेरे आने से बढ़ी हैं?” निखिल चिढ़ कर आहत भाव से बोला।
“ऑल आय एम ट्राइंग टू से इज़, अनंतिका बहुत ही ख़ुशमिज़ाज, खुले दिल से जीने वाली और ज़िंदादिल लड़की है…बट ऑफ़ेन द वन हू शाइन्स ब्रायटेस्ट इज़ द वन विद द डीपेस्ट स्कार्स। हो सकता है कि अनंतिका की पिछली ज़िंदगी में वो ज़ख़्म हों जो अब स्लीप परैलिसस का नासूर बन कर निकल रहे हैं,”
“क्या तुम अनंतिका की पिछली ज़िंदगी के बारे में कुछ जानती हो? आख़िर वो तुम्हारी बेस्ट फ़्रेंड, तुम्हारी रूममेट थी,”
“मुझसे ज़्यादा समय उसने तुम्हारे साथ बिताया है निखिल, और तुम्हारा और अनंतिका का रिश्ता बेस्ट फ़्रेंड से ज़्यादा करीबी का है, क्या तुम उसके पास्ट के बारे में जानते हो?” याशिका ने पलट कर निखिल से सवाल किया जिसका जवाब उससे देते ना बना। कुछ देर चुप रहने के बाद निखिल ने कहा।
“म…मैं नहीं जानता कुछ भी उसके पास्ट के बारे में। अपनी फ़ैमिली, अपने गुजरे कल के बारे में बात करने पर अनंतिका काफ़ी डिस्टर्ब हो जाती थी, इसलिए मैंने कभी उसे कुरेदा नहीं। उसने बस इतना बताया था कि जब वो कॉलेज में थी तभी उसकी पूरी फ़ैमिली एक रोड ऐक्सिडेंट में ख़त्म हो गयी थी, जिसके बाद वो दुनिया में अकेली थी,”
“इग्ज़ैक्टली! मुझे भी अनंतिका के बारे में सिर्फ़ इतना ही पता है, और सिर्फ़ और तुम क्या, अनंतिका का पूरा फ़्रेंड सर्कल उसके पास्ट के बारे में सिर्फ़ यही एक बात जानता है। पाँच साल पहले अनंतिका दिल्ली आयी, अपने पेंटिंग के एक्स्ट्राऑर्डिनेरी टैलेंट, अपनी वाइब्रेंट पर्सनालिटी, और एक्सेलेंट सोशल स्किल से उसने देखते ही देखते अपना एक बड़ा सोशल सर्कल क्रीएट कर लिया लेकिन इससे पहले अनंतिका कौन थी, कहाँ थी, क्या कर रही थी और उसके साथ क्या हुआ ये कोई नहीं जानता,”
“ऐसा कैसे हो सकता है? कोई तो होगा जो पाँच साल पहले की अनंतिका को जानता हो!”
“है ना! खुद अनंतिका। तुम्हें अनंतिका से बात करनी होगी। अपने प्यार से उसे विश्वास दिलाना होगा कि वो तुम्हें अपने साथ-साथ अपने अतीत का भी भागीदार बना सकती है,”
“ऐसी सिचूएशन में जब अनंतिका पहले ही मानसिक तनाव से ग्रस्त है उससे ये सवाल करना ग़लत होगा। जब नॉर्मल कंडिशन्स में पास्ट से जुड़ा कोई भी सवाल उसे इतना डिस्टर्ब कर देता है तो सोचो अभी के हालात में ये कितना घातक होगा। हो सकता है कि अनंतिका की तकलीफ़ कम होने के बजाए और बढ़ जाए,”
“मैंने इसी लिए कहा निखिल, अनंतिका को काउन्सिलिंग सेशन्स की ज़रूरत है। जब तक तुम उसे यहाँ मेरे पास नहीं लाओगे, मैं तुम्हारी और अनंतिका की कोई मदद नहीं कर पाऊँगी,”
निखिल सोच में पड़ गया। प्रेरणा की कम्पनी का काम निखिल के करियर ग्रोथ के लिए काफ़ी क्रूश्यल था, लेकिन अनंतिका से बढ़ कर नहीं था। उसने फ़ैसला किया कि वापस चकराता पहुँच कर वो प्रेरणा से बात करेगा और यह असाइनमेंट छोड़ देगा, इसके बाद उसकी फ़र्म अगर उसे नौकरी से भी निकाल दे तो उसे परवाह नहीं। अब वो अनंतिका की बात हल्के में लेने की गलती नहीं करेगा, वो चकराता छोड़ देगा और अनंतिका को लेकर वापस दिल्ली आ जाएगा। याशिका से विदा लेकर निखिल फ़ौरन वापस चकराता के लिए निकल गया।
* * * *
अनंतिका ब्रेकफ़ास्ट बना रही थी जब कॉटिज की डोरबेल बजी।
“ये अंश को गए अभी एक घंटा भी नहीं हुआ, इतनी जल्दी वापस कैसे आ गया?” अनंतिका खुद में बड़बड़ाते हुए दरवाज़े की ओर बढ़ी।
“अंश, तू इतनी जल्दी आ गया यार, अभी तो मुझे टाइम…ओह…हेल्लो,” एक साँस में बोलते हुए दरवाज़ा खोलती अनंतिका ने जब सामने अंश के बजाए प्रेरणा दीवान को खड़े देखा तो उसे एक पल को झटका लगा।
“हाय अनंतिका। आय एम सॉरी, आय जस्ट शोड अप अनइन्फ़ॉर्म्ड। इज़ दिस ए बैड टाइम?” प्रेरणा ने सहज भाव से मुस्कुराते हुए सवाल किया।
प्रेरणा को देखते ही अनंतिका के दिमाग़ में सुबह अंश की कही सभी बातें एक बार फिर लूप में घूम गयीं लेकिन उसने फ़ौरन ही खुद पर क़ाबू पाया।
“नो! नॉट एट ऑल…प्लीज़ कम इन।,” अनंतिका ने ज़बरदस्ती अपने चेहरे पर मुस्कान लाते हुए कहा।
प्रेरणा कॉटिज के अंदर कमंद रखने से पहले एक पल ठिठकी। उसकी नज़रें अनंतिका की नज़रों से मिली, दोनों के होंठों पर एक असहज मुस्कान आयी।
“आय वज़ जस्ट प्रिपेयरिंग द ब्रेकफ़ास्ट, साथ में करते हैं?”
“ओ प्लीज़ डोंट बॉदर…”
“अरे इस में बॉदर होने वाली कोई बात नहीं। मुझे ऐसे भी अकेले बैठ कर खाना पसंद नहीं, अच्छा हुआ आप आ गयीं, मुझे कम्पनी मिल जाएगी,” अनंतिका ने किचेन की ओर बढ़ते हुए कहा।
प्रेरणा सहमति में सिर्फ़ मुस्कुराई। अनंतिका ने गौर किया कि प्रेरणा कॉटिज में हर एक चीज़ को बहुत गौर से देख रही है, जैसे उसके दिमाग़ में कुछ चल रहा हो। आख़िर क्यों आयी थी वो? वो भी निखिल की ग़ैरमौजूदगी में!
अनंतिका ने जल्दी से बटर टोस्ट, ऑम्लेट, सॉसिजेस और कॉफ़ी तैयार किए और ब्रेकफ़ास्ट ट्रे लेकर लिविंग एरिया में आयी। प्रेरणा वहाँ नहीं थी। अनंतिका ने ट्रे टेबल पर रखी और प्रेरणा को आवाज़ लगाई।
“प्रेरणा…प्रेरणा,” उसे कोई जवाब ना मिला।
कॉटिज का दरवाज़ा अंदर से बंद था, यानी प्रेरणा वहाँ से गयी नहीं थी। अनंतिका सोच में पड़ गयी।
“आख़िर कहाँ जा सकती है?”
अनंतिका ने अपने स्टूडीओ में देखा, प्रेरणा वहाँ नहीं थी।
लिविंग एरिया और किचेन के अलावा ग्राउंड फ़्लोर पर एक और कमरा था, अनंतिका ने वहाँ भी देखा लेकिन प्रेरणा वहाँ नहीं थी। क्या प्रेरणा कॉटिज में ऊपर गयी थी? अपने दिमाग़ में घुमड़ते सैकड़ों सवाल लिए अनंतिका ऊपर फ़र्स्ट फ़्लोर पर पहुँची। सैकेंड़ फ़्लोर जाने वाला स्टेयर-वे पहले की तारक लॉक्ड था। अनंतिका अपने बेडरूम में आयी, बेडरूम ख़ाली था।
उलझन में डूबी अनंतिका वापस जाने को पलटी लेकिन अचानक कुछ सोच कर उसके कदम ठिठक गए। उसका ध्यान क्लॉज़ेट पर गया। क्या प्रेरणा क्लॉज़ेट के पीछे सैलर में गयी थी? अनंतिका की कनपट्टियाँ सनसनाने लगीं। अनंतिका भारी कदमों से क्लॉज़ेट की ओर बढ़ी। उसने क्लॉज़ेट का पल्ला खोला ही था कि नीचे से प्रेरणा की आवाज़ आयी।
“अनंतिका…अनंतिका!”
अनंतिका ने चैन की साँस ली और क्लॉज़ेट का दरवाज़ा बंद कर के नीचे आ गयी। प्रेरणा काउच पर बैठी थी और उसे देख कर मुस्कुरा रही थी लेकिन उसके चेहरे के भाव देख कर साफ़ पता लग रहा था कि वो अपनी असहजता छुपाने की कोशिश कर रही है।
“मैं आपको ढूँढते हुए ही ऊपर गयी थी,”
“आय एम सो सॉरी, निखिल से आपकी पेंटिंग्स के बारे में इतनी तारीफ़ सुनी है कि मुझसे रहा नहीं गया। मैं आपके स्टूडीओ में बिना बताए ही चली गयी,”
“दैट्स ऑलराइट, बट, मैं आपको ढूँढते हुए सबसे पहले स्टूडीओ में ही गयी थी, आप वहाँ नहीं थीं,”
“ऐसा कैसे हो सकता है? मैं तो वहीं थी, आप ने शायद मुझे देखा नहीं होगा,”
“मैंने आपका नाम पुकारा था,”
“ओह…राइट! मैं अटैच्ड वॉशरूम में गयी थी कुछ देर के लिए। आय’ म श्योर आप उसी टाइम स्टूडीओ में आयी होंगी,”
अनंतिका ने एक औपचारिक मुस्कान के साथ सहमति में सर हिलाया और प्रेरणा को कॉफ़ी व ब्रेकफ़ास्ट सर्व किया।
“आप वाक़ई कमाल की पेंटर हैं, अनंतिका। आपकी बनाई पेंटिंग्स बिल्कुल रियल लगती हैं,”
“थैंक यू,” अनंतिका औपचारिकता वश मुस्कुराई।
“ऐक्चूअली, निखिल ने जब पर्सनल इमर्जेन्सी का बोल कर लीव माँगी तो मैं थोड़ी वरीड हो गयी। कॉल पर भी निखिल बहुत परेशान साउंड कर रहे थे, मैं बस जानना चाहती थी कि सब ठीक तो है, इसीलिए चली आयी,”
अनंतिका की बॉडी लैंग्वेज एक पल को टेन्स हुई, चेहरे पर आश्चर्य के भाव आने को थे लेकिन उसने फ़ौरन खुद पर क़ाबू पाया। वो नहीं चाहती थी कि प्रेरणा को उसके हाव-भाव से कोई अंदाज़ा लगे।
“दिल्ली में निखिल की आंटी की तबियत अचानक ख़राब हो गयी है। निखिल के अलावा आंटी को देखने वाला और कोई भी नहीं, इसलिए उसे जाना पड़ा,”
“ओह! आय होप शी गेट्स बेटर एंड आय बेटर गेट गोइंग,” प्रेरणा ने कॉफ़ी ख़त्म करते हुए कहा।
अनंतिका ने देखा कि उसने ब्रेकफ़ास्ट को हाथ भी नहीं लगाया है।
“बट यू हैवेंट ईटेन येट,”
“आय एम नॉट हंग्री, बट थैंक्स फ़ॉर द जेस्चर,” प्रेरणा उठते हुए बोली।
अनंतिका को प्रेरणा का बिहेव्यर बहुत अजीब लगा था। इस से पहले अनंतिका और प्रेरणा की औपचारिक मुलाक़ात और जान-पहचान हाउस वॉर्मिंग पार्टी के दौरान हुई थी जो कि काफ़ी संक्षिप्त थी, उस समय अनंतिका ने प्रेरणा के लिए कोई राय या धारणा नहीं बनाई थी लेकिन आज उससे रूबरू मिलने के बाद, अनंतिका को प्रेरणा फूटी आँख पसंद नहीं आयी थी और उसे यक़ीन था कि प्रेरणा भी उसके बारे में यही ख़यालात रखती है, हालाँकि, कॉटिज के फ़्रंट गेट तक, एक-दूसरे से विदा लेते हुए, दोनों लड़कियों के चेहरे पर प्लास्टिक स्माइल चिपकी हुई थी।
“अगर आपको कोई भी दिक़्क़त हो तो प्लीज़ मुझसे कहिएगा। आप हमारे गेस्ट हैं, आपका ख़्याल रखना हमारी रेस्पॉन्सिबिलिटी है,”
“आप दिक़्क़त का कोई मौक़ा ही नहीं देतीं,”
“सी यू अगेन, ब’ बाय,”
“बाय,”
अनंतिका की तरफ़ पीठ घुमाते ही प्रेरणा के चेहरे पर चिपकी प्लास्टिक स्माइल फ़ौरन ग़ायब हो गयी। प्रेरणा का खूबसूरत चेहरा बेहद सख़्त और सर्द नज़र आने लगा। लम्बे और तेज कदमों से चलते हुए प्रेरणा कॉटिज के आयरन गेट तक पहुँची। गेट खोल कर बाहर निकलते ही उस तरफ़ आता अंश प्रेरणा से टकराया।
अंश और प्रेरणा की नज़रें एक-दूसरे से मिलीं। दोनों के चेहरों पर एक साथ कई भाव आए और गुजर गए, फिर दोनों एक-दूसरे को नज़रअन्दाज़ करते हुए यूँ अपने रास्ते पर बढ़ गए जैसे दो नितांत अजनबी हों।
प्रेरणा को चलता करने के बाद भी अनंतिका के दिमाग़ में भूचाल आया हुआ था। निखिल ने प्रेरणा से झूठ बोला इससे उसे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता लेकिन निखिल ने उससे झूठ बोला! ऐसा आज तक नहीं हुआ था कि निखिल अनंतिका से कोई छोटी से छोटी बात भी छुपाए, फिर आज उसे ये सफ़ेद झूठ बोलने की ज़रूरत क्यों पड़ी? क्या निखिल वाक़ई दिल्ली गया था या कहीं और? तमाम तरह के ख़्याल अनंतिका के दिमाग़ में उमड़ रहे थे। उसका ज़ी चाहा कि निखिल को कॉल लगाए और उससे सच दरयाफ़्त करे, लेकिन उसने ये विचार त्याग दिया। वो देखना चाहती थी कि निखिल उससे इस बाबत क्या कहता है। क्या निखिल उसे वापस लौट कर सच बताता भी है या इसी खुशफ़हमी में रहता है कि उसका पैंतरा चल गया।
निखिल की यह खुशफ़हमी तो तभी हवा हो जाएगी जब वो प्रेरणा से मिलेगा और उसे पता चलेगा कि प्रेरणा उसकी बाबत पूछते हुए अनंतिका के पास आयी थी। आख़िर क्यों आयी थी प्रेरणा? क्या सिर्फ़ ये देखने कि निखिल ने जो रीज़न देकर लीव ली है वो सही है या नहीं? या निखिल का यहाँ ना होना उसके लिए एक मौक़ा था यहाँ आने का, अपने किसी ख़ास मक़सद के लिए? कितने अजीब ढंग से कॉटिज में ग़ायब हो गयी थी प्रेरणा! अनंतिका को पक्का यक़ीन था कि प्रेरणा ने झूठ बोला था, वो वॉशरूम में नहीं थी। तो फिर कहाँ गयी थी प्रेरणा? ऐसे तमाम सवाल अनंतिका के दिमाग़ में विस्फोट कर रहे थे, जो एक बार फिर डोरबेल बजने के साथ थमे।
इस बार दरवाज़े पर अंश था।
“ये प्रेरणा दीवान यहाँ क्या कर रही थी?”
“यही तो मैं भी सोच रही हूँ,”
अंश- ‘वॉट आर द ऑड्ज़, आज सुबह ही हम इसके बारे में बात कर रहे थे और ये यहाँ चली आयी।’
अंश ने अंदर आते हुए कहा। अनंतिका को भी यह बात खटकी थी लेकिन फ़िलहाल वो इन तमाम झंझटों से एस्केप चाहती थी। अंश को लिविंग एरिया में बिठा कर अनंतिका रेडी होने ऊपर बेडरूम में चली गयी।
* * * *
अंश की रॉयल एन्फ़ील्ड थंडरबर्ड पर सवार होकर अंश और अनंतिका कॉटिज से निकले। कुछ दूर आगे जा कर दोनों मेन रोड पर आए ही थे कि उन्हें पुलिस की बैरिकेडिंग दिखाई दी।
“क्या हुआ है?”
“पता नहीं, शायद कोई ऐक्सिडेंट। पुलिस रूट डाईवर्ट कर रही है,”
अंश ने जैसे ही डाईवर्ज़न की तरफ़ अपनी बाइक घुमाई अनंतिका के मुँह से ज़ोर की सिसकारी निकल गई। उसकी नज़र सड़क पर पड़ी उस लाश पर पड़ गयी थी जिसे पुलिस वाले ऐम्ब्युलेन्स में लदवा रहे थे।
“मनोहर! ये तो मनोहर है,” अनंतिका लगभग चीखते हुए बोली, अंश ने फ़ौरन ब्रेक लगाया।
“वॉट?’”
“हाँ ये मनोहर ही है, कल रात जब ये डिलीवरी करने आया था तो इसने यही कपड़े पहने हुए थे, और मैं इसकी साइकिल भी पहचानती हूँ,” अनंतिका ने सड़क किनारे टूटी पड़ी साइकिल की ओर इशारा करते हुए कहा।
“लगता है कल रात आपको खाना डिलीवर कर के वापस लौटते टाइम इसे इधर से गुजरती किसी तेज रफ़्तार ट्रक ने उड़ा दिया,”
अनंतिका को लाश देख कर उबकाई आ रही थी, जिसे वो बहुत मुश्किल से क़ाबू किए हुए थी। वहाँ मौजूद पुलिस इंस्पेक्टर की चील जैसी निगाहें अंश और अनंतिका पर ही टिकी हुई थीं। उस इंस्पेक्टर की पर्सनैलिटी अनंतिका को काफ़ी इंटिमिडेटिंग और नेगेटिव लगी। इंस्पेक्टर की उम्र चालीस-पैंतालीस के बीच होगी, क़द-काठी ऊँची और मज़बूत थी, उसके कंधे तक लम्बे बाल खोपड़ी से यूँ चिपके हुए थे जैसे ग्रीज़ लगा कर चिपकाए गए हों, नज़रों पर धूप का काला चश्मा था जो उसकी चील और बाज के चोंच जैसी लम्बी और मुड़ी हुई नाक पर टिका हुआ था, होंठों के बीच सिगरेट दबी, सुलग रही थी। उसके चेहरे से ही काइयाँपन और मक्कारी टपक रहे थे। हाथ में थमा पुलिसिया डंडा चकरी की तरह गोल नचाता हुआ वो अंश और अनंतिका की दिशा में बढ़ा ही था कि उसे पीछे से एक कॉन्स्टेबल ने आवाज़ दी। इंस्पेक्टर जैसे ही कॉन्स्टेबल की ओर पलटा, अंश ने अनंतिका से कहा।
“हमें यहाँ से निकलना चाहिए वरना पुलिस फ़ालतू में परेशान करेगी,”
“टेक मी बैक टू द कॉटिज, अंश। आय’ म नॉट फ़ीलिंग गुड,”
“आप बेवजह स्ट्रेस ले रही…”
“प्लीज़ अंश! कैन वी जस्ट गो बैक?”
“श्योर!’ “
अंश ने बाइक वापस कॉटिज की ओर मोड़ दी। कॉन्स्टेबल से बात ख़त्म कर के इंस्पेक्टर जब वापस पलटा तब तक बाइक उससे दूर जा चुकी थी। सिगरेट के धुएँ के छल्ले हवा में उड़ाता हुआ इंस्पेक्टर बाइक को नज़रों से ओझल होते देखता रहा।
कॉटिज वापस पहुँच कर अनंतिका ने अपने लिए एक लार्ज पटियाला पेग बनाया और एक ही साँस में ग्लास ख़ाली कर दिया।
“मनोहर ने कहा था ये कॉटिज मनहूस है, यहाँ मौत बसती है।।और।।और, यहाँ से लौटते हुए वो खुद ही मारा गया,”
“मनोहर की मौत ऐक्सिडेंट है, उसका आपसे…ईवेन इस कॉटिज से भी कोई कनेक्शन नहीं। यू आर ओवररीऐक्टिंग,”
अनंतिका ने कुछ कहने के लिए मुँह खोला ही था कि उसका फ़ोन बजा, कॉल याशिका का था।
“हे याशि! कैसी है बेब्स?”
“मैं ठीक हूँ अनी…बट आय’ म रियली वरीड अबाउट यू। तूने ड्रिंक की हुई है? सुबह-सुबह?”याशिका की गम्भीर और परेशान आवाज़ कॉल पर सुनाई दी।
“अरे चिल्ल स्वीटहार्ट! मैं बिल्कुल ठीक हूँ, मुझे भला क्या होगा?”
“अगर तू ठीक होती तो तेरी फ़िक्र में बदहवास निखिल यहाँ मुझसे मिलने ना आया होता!”
“वॉट!? निखिल दिल्ली तुमसे मिलने गया था?”
याशिका ने अपने और निखिल के बीच हुई सारी बातें सिलसिलेवार ढंग से अनंतिका को बताईं।
“निखिल के जाने के बाद मैं उलझन में थी कि तुझे कॉल कर के ये सब बताऊँ या नहीं, पर तू मेरी बेस्ट फ़्रेंड है अनी। निखिल तेरे पास्ट के बारे में मुझसे पूछता रहा लेकिन मैंने गौरव के बारे में उसे कुछ नहीं बताया,”
“गौरव!” अनंतिका की आवाज़ यूँ खोखली हो गयी जैसे उसने किसी मुर्दे को कब्र फाड़ कर निकलते देख लिया हो। गौरव उसे लिए वही था, उसके अतीत की कब्र में दफन एक मुर्दा जो अनायास ही आज ज़िक्र आने से ज़िंदा होता प्रतीत हुआ।
“गौरव मेरे बीते हुए भयानक कल का वो बदनुमा दाग है जिसे मिटाने की कोशिश में जैसे मेरा ही वजूद मिट गया, याशि। अपने अतीत के अंधकार को मैं अपना वर्तमान और भविष्य अंधेरा नहीं करने दूँगी,” अनंतिका ने काँपती और भर्राई आवाज़ में कहा।
“मैं भी वही कह रही हूँ, अनी। क़िस्मत ने निखिल के रूप में तुझे अपनी लाइफ़ संवारने का सैकेंड चान्स दिया है, इसे गँवाना मत। आज की डेट में जब रिलेशनशिप्स बेडरूम से कोर्टरूम पहुँचने में महज़ चंद महीने लगते हैं, किसी को अपना ‘फ़ॉरएवर’ बनाने वाला कोई मिले तो उसके लिए अपनी स्वच्छंदता और स्वतंत्रता की कभी ना मिटने वाली ललक छोड़ देनी चाहिए,”
अनंतिका की आँखों से आंसुओं की दो मोटी बूँदें गिरी। उसने कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया। वहाँ बैठा अंश सब कुछ शांति से सुन रहा था।
उसने अनंतिका से सवाल किया।
“आर यू ओके? ये गौरव कौन है?”
“अंश, यू शुड लीव नाओ,” अनंतिका ने उचाट और सर्द भाव से कहा।
उस मौक़े की नज़ाकत को देखते हुए अंश ने कुछ कहना ठीक ना समझा। वो चुप चाप उठ कर वापस अपने घर चला गया। अंश के जाने के बाद अनंतिका ने निखिल को कॉल किया। कुछ देर रिंग जाने के बाद कॉल पिक हुआ।
“कहाँ हो अकाउंटेंट साहब?”भावनाओं के आवेग को सम्भालने की असफल कोशिश करती अनंतिका ने भर्राई आवाज़ में सवाल किया।
“सब कुछ छोड़ कर तुम्हारे पास आ रहा हूँ अनी! शाम तक पहुँच जाऊँगा। कल मैं प्रेरणा से बात कर के ये असाइनमेंट ड्रॉप कर दूँगा, इन फ़ैक्ट, मैं अपनी फ़र्म से भी रिज़ाइन कर रहा हूँ। वी हैव इनफ़ सेविंग्स टू सर्वाइव फ़ॉर कपल ऑफ़ मन्थ्स, बाद का बाद में देखेंगे। अभी मुझे सिर्फ़ तुम चाहिए हो…और तुम्हारी ख़ुशी जिसमें है हम वही करेंगे,”
“ड्राइव सेफ़। जल्दी आओ।,”
अनंतिका ने कॉल डिसकनेक्ट कर दी और फिर जाने कितनी ही देर तक फूट-फूट कर रोती रही। जिन उम्मीदों और ऊर्जा के साथ वो यहाँ आयी थी वो सब बर्बाद हो चुके थे। अब वो वाक़ई इस मनहूस जगह से, और अंश से हमेशा-हमेशा के लिए दूर चली जाना चाहती थी।
दोपहर बारह बजे से शाम साढ़े सात बजे तक का समय किसी पहाड़ जैसा बीता। इस बीच अंश ने अनंतिका को दो-तीन पर कॉल किया लेकिन अनंतिका ने कॉल देख कर भी नहीं रिसीव किए। अंश ने टेक्स्ट ड्रॉप किया जिन्हें अनंतिका ने अनदेखा कर दिया। दिल्ली में लगभग हर कुछ महीने पर अनंतिका अपने लुक्स चेंज कर देती थी। कभी वो बाल लम्बे रखती तो कभी बिल्कुल छोटे कटा लेती, हर बार नया हेयर कलर ट्राई करती, नेल पेंट से लेकर अपने कपड़ों के शेड्स और पैटर्न तक सब कुछ बिल्कुल चेंज कर देती थी। चकराता आने के बाद से उसने अपना लुक चेंज नहीं किया था, लेकिन आज वो निखिल को सर्प्राइज़ देने के मूड में थी।
शाम साढ़े सात बजे कॉटिज की डोरबेल बजते ही अनंतिका ने भाग कर दरवाज़ा खोला। अनंतिका का लुक देख कर एक पल को निखिल का दिल धड़कना भूल गया। आम तौर पर क्रॉप टॉप और हॉट पैंट्स में रहने वाली अनंतिका आज ट्रेडिशनल सूट में थी, गले में सोने की पतली चेन जिसके लॉकेट में एमरल्ड जड़ा हुआ था, कानों में झुमके, माथे पर छोटी सी काली बिंदी, आँखों में काजल, नाक में नोज़ पिन और सेप्टम रिंग, दोनों कलाइयों में सोने की चूड़ियाँ और पैरों में पायल, इन सबके कॉंट्रैस्ट में उसने अपने बाल पर्पल कलर कर लिए थे और आम-तौर पर अपने बाल खुले रखना पसंद करने वाली अनंतिका ने बालों को हाई बन की शक्ल में बांधा हुआ था। इस पूरे आउट्लुक में अनंतिका ऐसी बला की खूबसूरत लग रही थी कि निखिल खुद पर क़ाबू ना रख पाया।
निखिल ने दरवाज़े पर ही अनंतिका को खींच कर अपनी बाहों में कस कर भींच लिया और उसे बेतहाशा चूमने लगा। अनंतिका ने प्रतिवाद ना किया, बल्कि उसने भी निखिल का चेहरा अपनी दोनों हथेलियों में भरते हुए उस पर चुम्बन की झड़ी लगा दी।
निखिल के गले व गर्दन पर निबल करते हुए अनंतिका ने उसका दायां ईयर लोब अपने होंठों के बीच दबा लिया और दांतों से हौले से चुभलाने लगी।
“अकाउंटेंट साहब मेरे कपड़े यहीं उतारना चाहेंगे या ऊपर बेडरूम में चल कर?” अनंतिका निखिल के कान में फुसफुसाई।
“ऐक्चूअली, आय हैव ए बेटर आइडिया। एक जगह है जहां मैं तुम्हें ले जाना चाहता हूँ,” निखिल अनंतिका के दोनों उरोज अपनी हथेलियों में भर कर मसलते हुए बोला।
“पागल हुए हो क्या! सात घंटे ड्राइव कर के आए हो, कल भी पूरी रात ड्राइव किया, अब कहीं नहीं जाना। कल चलेंगे जहां भी चलना है। अभी तो अंदर आ के, कुंडी लगा लो सैयां, तुमको जन्नत दिखाती मैं,” अनंतिका ने शरारती भाव से निखिल के क्रॉच पर अपनी उँगलियाँ फिराते हुए कहा।
“नोप! अभी चलेंगे। कल यहाँ से बोरिया-बिस्तर बांध के निकलना है,”
निखिल ने अनंतिका के प्रतिवाद करने पर उसे अपनी गोद में उठा लिया और वैसे ही चूमते हुए बाहर खड़ी गाड़ी तक ले गया।
अनंतिका और निखिल गाड़ी में सवार हुए, निखिल ने गाड़ी आगे बढ़ा दी। अनंतिका जानती थी कि बग़ल वाले कॉटिज में, अपनी बेडरूम विंडो पर खड़ा अंश लगातार उन्हें देख रहा है लेकिन उसने एक बार भी उस ओर नज़र नहीं उठाई।
अनंतिका का दिल एक बार को यह सोच कर डूबा कि उसे फिर उसी रास्ते से गुजरना पड़ेगा जहां उसने सुबह मनोहर की डेड बॉडी देखी थी, लेकिन निखिल ने उस तरफ़ ना जाकर जंगल की ओर जाते कच्चे रास्ते की तरफ़ गाड़ी घुमा दी। अनंतिका ने चैन की साँस ली।
आसमान में घने काले बादल छाए हुए थे, उस पर से घने होते जंगल का अंधेरा। ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर निखिल की गाड़ी हिचकोले खा रही थी।
“निखिल बताओ ना, इस बियाबान में कहाँ जा रहे हैं हम?”
एक हाथ से स्टेयरिंग सम्भालते हुए, दूसरा हाथ निखिल ने बग़ल की सीट पर बैठी अनंतिका की गर्दन में डाला और उसे अपने पास खींच कर उसके होंठ अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। अनंतिका ने खुद को पिघलता महसूस किया। बहुत मुश्किल से निखिल से खुद को अलग कर पायी वो।
“क्या कर रहे हो, ऐक्सिडेंट हो जाएगा! गाड़ी पलट जाएगी,”
निखिल ने कुछ आगे ले जा कर गाड़ी रोक दी और बाहर निकलते हुए बोला।
“यहाँ से आगे हमें पैदल जाना होगा, गाड़ी घने जंगल में नहीं जा सकती,”
“निखिल पागल हुए हो क्या? अंधेरी रात में, बीच जंगल में मेकआउट करने का भूत चढ़ा है? कोई शेर-वेर मिल गया तो बढ़िया थ्रीसम हो जाएगा, नहीं?”
“कम आउट माय सेक्सी सार्कैज़म क्वीन!” निखिल ने अनंतिका को बाँह पकड़ कर गाड़ी से उतारा और किसी छोटे बच्चे की तरह अपने कंधे व पीठ पर चढ़ा लिया।
“आपके सैंडल बहुत महंगे हैं, इन्हें जंगल की ज़मीन पर मत रखिए मैले हो जाएँगे। आपका ये ग़ुलाम आपकी ख़िदमत में हाज़िर है,”
“हाहाहा…निखिल यू आर सो फ़िल्मी!”
घने जंगल के घुप्प अंधकार में झींगुरों की आवाज़ तेज हो रही थी, जो आने वाली बारिश का संकेत थी। आगे बढ़ते निखिल और अनंतिका को जुगनुओं का एक समूह दिखायी दिया जो तेज़ी से अपनी दिशा बदल रहा था।
निखिल और अनंतिका कुछ और आगे बढ़े ही थे कि बारिश शुरू हो गयी।
“लो बेटा! रोमैन्स की धधकती आग पर ऊपर वाले ने ठंडा-ठंडा पानी डाल दिया,”
“ये पानी इस आग को और भड़काने का काम करेगा मेरी जान, सामने देखो,”
अनंतिका ने सामने देखा। पेड़ों के बीच लकड़ी का बना एक पुराना लेकिन खूबसूरत कैबिन नज़र आया। पूरे कैबिन पर जंगली फूलों की लताओं और पत्तियों का आवरण चढ़ा हुआ था। जब तक दोनों कैबिन में पहुँचे वे सर से पैर तक भीग चुके थे। अनंतिका का सूट उसके भीगे बदन से यूँ चिपक गया था जैसे किसी ने कपड़े की जगह उसके जिस्म पर रंग की एक परत चढ़ा दी हो। बारिश और वातावरण में बढ़ती ठंड का उन दोनों पर कोई असर ना था। दोनों के जिस्मों में ज्वालामुखी सी आग धधकी हुई थी। निखिल ने अनंतिका के सर से पैर तक हर एक अंग को चूमा।
अनंतिका अपने जिस्म से चिपके गीले कपड़े एक-एक कर के उतारने लगी।
“ये क्या कर रही हो अनी! ठंड लग जाएगी, सर्दी हो जाएगी!” निखिल बिना पलक झपकाए, अनंतिका ने भीगे जिस्म को देखते हुए बोला, जो परत दर परत उसके सामने नुमायाँ हो रहा था, और उसके होश उड़ा रहा था।
“मेरे जिस्म की गर्मी बनाए रखना तुम्हारी ड्यूटी भी है और चैलेंज भी अकाउंटेंट साहब,” अनंतिका की आँखों में शरारत उभरी। अपने जिस्म से वो आख़री कपड़ा भी उतार चुकी थी, उसके जिस्म पर अब सिर्फ़ उसकी जूअल्री और पैरों में सैंडल थी।
निखिल अनंतिका की ओर बढ़ा तो अनंतिका कैबिन का दरवाज़ा खोल कर बाहर खुले जंगल में आ गयी। बारिश में भीगता उसका जिस्म सोने सा चमक रहा था। निखिल ने अपने कपड़े उतारे और बाहर आ कर अनंतिका से लिपट गया। निखिल उसके जिस्म से ढलकती पानी की बूँदें चाट रहा था, अनंतिका की आँखें बंद हो गयीं और होंठों से मदहोशी में डूबी कराह निकली। निखिल ने अनंतिका को छोटे बच्चे की तरह कमर से पकड़ कर अपनी गोद में उठाया। अनंतिका ने अपनी टाँगे निखिल की कमर पर लपेट लीं और बाहें उसके गले में डाल कर उसे चूमने लगी। दोनों की साँसें तेज हो गयीं, उन्माद भरी सिसकारियों के साथ दोनों के भीगे जिस्म आपस में तेज़ी से घर्षण करने लगे।
निखिल ने अनंतिका की पीठ एक पेड़ के तने से सटा दी और उसमें समा जाने की कोशिश करने लगा। तेज बारिश के शोर में उनकी सिसकारियाँ और जिस्मों के घर्षण की आवाज़ डूब रही थी, तभी अचानक, वातावरण में अनंतिका की तेज और आतंकित चीख गूंजी।
कहानी जारी है
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